“स्टैंडअलोन 5G” एवं “नॉन-स्टैंडअलोन 5G” में क्या अंतर है?

Richa KishoreScience TechLeave a Comment

हाल ही में देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने दिवाली तक दिल्ली, मुंबई, कोलकाता एवं चेन्नई में 5G सेवाओं को लांच करने की घोषणा की है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि सेवा प्रदान करने के लिए यह ‘स्टैंडअलोन 5G‘ आर्किटेक्चर का उपयोग करेगी।

विश्व-भर में 5G नेटवर्क दो मोड में स्थापित किये जा रहे हैं – ‘स्टैंडअलोन 5G’ एवं नॉन-‘स्टैंडअलोन 5G’

स्टैंडअलोन 5G” एवं “नॉन-स्टैंडअलोन 5G” में क्या अंतर है?

  1. SA (स्टैंडअलोन) विकल्पों में केवल एक पीढ़ी की रेडियो एक्सेस तकनीक शामिल है और NSA (नॉन-स्टैंडअलोन) में रेडियो एक्सेस तकनीकों की दो पीढ़ी (4G LTE और 5G) शामिल हैं। स्टैंडअलोन 5G संचालित करने के लिए LTE EPC पर निर्भर नहीं होना पड़ता है, बल्कि यह 5G रेडियो को क्लाउड-नेटिव 5G कोर नेटवर्क के साथ जोड़ता है।
  2. NSA (नॉन-स्टैंडअलोन आर्किटेक्चर) और SA (स्टैंडअलोन आर्किटेक्चर) का मुख्य अंतर यह है कि NSA 5G रेडियो नेटवर्क के कंट्रोल सिग्नलिंग को 4G कोर से जोड़ता है जबकि SA 5G रेडियो नेटवर्क को सीधे 5G कोर नेटवर्क से जोड़ता है (जैसा पहले पॉइंट में पढ़ा)।
  3. NSA, जैसा कि नाम से पता चलता है, एक 5G सेवा है जो ‘अकेले’ (stand alone) नहीं है बल्कि मौजूदा 4G नेटवर्क पर बनी है। दूसरी ओर, SA मौजूदा 4G कोर का प्रयोग किए सीधे 5G सेवा की स्वतंत्र संचालन की अनुमति देता है।

 

Image from GSMA

5G क्या है?

  • 5G एक वायरलेस दूरसंचार प्रौद्योगिकी है. इसमें डेटा प्रसारण एवं प्राप्ति के लिए रेडियो तरंगे और रेडियो आवृत्ति (RF) का प्रयोग किया जाता है.
  • यह 4G LTE नेटवर्क के बाद मोबाइल नेटवर्क प्रौद्योगिकी की अगली पीढ़ी है. 2019 के आरम्भ में 5G प्रौद्योगिकी का उपयोग सेवाओं में क्रमिक रूप से शुरू किया गया और 2024 तक सम्पूर्ण सेवाओं तक इसका विस्तार किया जायेगा.
  • 5G के लिए अंतिम मानक अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) द्वारा निर्धारित किया जाएगा.

5G की विशेषताएँ

  • उच्च डेटा दर (Hotspots के लिए 1Gbps, डाउनलोड गति 100Mbps तथा वाइड-एरिया कवरेज हेतु 50Mbps की अपलोड गति).
  • व्यापक कनेक्टिविटी (प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 1 मिलियन कनेक्शन)
  • अल्ट्रा-लो-लेटेंसी (1 मिलीसेकंड)
  • उच्च विश्वसनीयता (मिशन क्रिटिकल “अल्ट्रा-रिलाएबल” संचार हेतु 99.999%).
  • उच्च गति पर गतिशीलता (500 किमी./घंटा की गति तक अर्थात् उच्च-गति ट्रेन के लिए).

5G के लाभ

  • इन्टरनेट की तीव्र गति – वर्तमान में 4G नेटवर्क एक गीगाबाइट प्रति सेकंड की अधिकतम डाउनलोड गति प्राप्त करने में सक्षम है. 5 के साथ इस गति को 10 गीगाबाइट प्रति सेकंड तक बढ़ाया जा सकता है.
  • अल्ट्रा-लो-लेटेंसी – लेटेंसी उस समय को संदर्भित करती है जो एक device से दूसरी device तक एक डेटा पैकेट को भेजने में लगता है. 4G में लेटेंसी दर 50 milliseconds है जबकि 5G में 1 millisecond तक हो सकती है.
  • अच्छी तरह से कनेक्टेड विश्व – 5G इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स जैसी प्रौद्योगिकियों  के समायोजन के लिए प्रयोक्ता की आवश्यकता के अनुसार क्षमता तथा बैंडविड्थ प्रदान करेगा. इस प्रकार यह आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स को अपनाने में सहायता करेगा.
  • डिजिटल आर्थिक नीति पर आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) समिति के अनुसार 5G प्रौद्योगिकी का क्रियान्वयन GDP में वृद्धि, रोजगारों का सृजन तथा अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाने में सहायता करेगा.

भारत को 5G से लाभ

  • भारत पर 5G का संचयी आर्थिक प्रभाव 2035 तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है. यह हमारे जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सम्मिलित करने में सहायता करेगा और इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (IOT) के लिए परिवेश प्रदान करने हेतु स्मार्ट उपकरणों को निर्बाध रूप से डेटा के आदान-प्रदान को सक्षम बनाएगा.
  • 5G कृषि से लेकर, स्मार्ट सिंचाई, मृदा एवं फसल की बेहतर निगरानी एवं पशुधन प्रबन्धन तक सम्पूर्ण मूल्य शृंखला में सुधार को सक्षम बना सकता है.
  • 5G सटीक विनिर्माण के लिए रोबोटिक्स के उपयोग को सक्षम बनायेगा, विशेषत: जहाँ मनुष्य इन कार्यों को सुरक्षित या सटीकता से निष्पादित नहीं कर सकता.
  • ऊर्जा क्षेत्र में, “स्मार्ट ग्रिड” और “स्मार्ट मीटरिंग” को सहायता प्रदान की जा सकती है.
  • स्वास्थ्य देखभाल में, 5G अधिक प्रभावी दूरस्थ-चिकित्सा वितरण, सर्जिकल रोबोटिक्स के दूरस्थ नियंत्रण और महत्त्वपूर्ण आँकड़ों की वायरलेस निगरानी को सक्षम बना सकता है.

स्टैंडअलोन 5G सेवाओं को लेकर चुनौतियाँ

यह एक विशाल कार्य है जिसमें स्पेक्ट्रम और नए एंटेना की स्थापना सम्बन्धित मुद्दे सम्मिलित हैं. जैसे कि ईमारतें, वृक्ष, खराब मौसम आदि भी अवरोधक का कारण बन सकते हैं. अतः बेहतर कनेक्शन हेतु अधिक बेस स्टेशनों का निर्माण किये जाने की आवश्यकता है.

अब कुल मिलाकर कहें तो Standalone 5G के लिए एक पृथक् अवसंरचना तैयार करना पड़ेगा अर्थात् इसके लिए अलग से टावर लगाए जाएंगे, इसलिए घरों और ऑफिस में 5जी की कवरेज के लिए जियो ने Jio AIRFIBER पेश किया है। जो कंपनी Non-Standalone 5G की सर्विस देगी वह बिना अलग से टावर लगाए भी सेवाएँ दे सकेंगी. हालांकि वोडाफोन आइडिया और एयरटेल ने अभी 5जी की कवरेज को लेकर कुछ कहा नहीं है। संभव है कि अन्य दो कंपनियां भी Standalone 5G ही अनावृत कर दे। ज्ञातव्य है कि 4जी कनेक्शन जब भारत में आया था तब भी यही परिस्थिति थी क्योंकि इसका विस्तार 3जी के अवसंरचना पर हुआ था।

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