SIPRI रिपोर्ट 2020 के विषय में विस्तृत समीक्षा

Sansar LochanDefenceLeave a Comment

स्वीडन के थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने एक प्रतिवेदन जारी किया है जिसमें उन देशों का जिक्र है, जिनके पास आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार हैं.

SIPRI Report 2020 के मुख्य तथ्य

  1. दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का 90 फीसदी हिस्सा रूस और अमेरिका के पास है. अमेरिका और रूस अपने परमाणु आयुध धीरे-धीरे घटा रहे हैं और वे अपनी क्षमताओं का आधुनिकीकरण कर रहे हैं.
  2. अन्य परमाणु संपन्न देशों के पास कम हथियार हैं लेकिन उन्होंने नये परमाणु हथियारों पर काम करना शुरू किया है या ऐसा करने की मंशा की घोषणा की है.
  3. वर्तमान समय में चीन के पास 320 और पाकिस्तान के पास 160 परमाणु हथियार हैं. भारत के पास 150 परमाणु हथियार हैं.
  4. पिछले साल भी पाकिस्तान परमाणु हथियारों के मामलों में भारत से आगे था. बताया जाता है कि भारत के पास 90-110 परमाणु हथियार थे जबकि पाकिस्तान के पास 100-120 परमाणु हथियार थे.
  5. 2010 से 2019 के बीच हथियारों की खरीद-फरोख्त 5.5 प्रतिशत बढ़ा है.
  6. 2018 में सैन्य सुविधाओं पर करीब 1917 बिलियन डॉलर (145 लाख करोड़ रु.) खर्च हुए थे. यह 10 साल में सबसे ज्यादा खर्च है.
  7. उत्तर अफ्रीकी देशों ने 2019 के मुकाबले इस साल अपनी सैन्य सुविधाओं पर 67% फीसदी रकम ज्यादा खर्च की.
  8. सिपरी के अनुसार, 9 देशों के पास परमाणु हथियार हैं. कुल मिलाकर इस समय इन देशों के पास 13 हजार 400 परमाणु हथियार (न्यूक्लीयर वॉरहेड्स) मौजूद हैं.
  9. 6 हजार 375 हथियारों के साथ रूस प्रथम स्थान पर है. 30 से 40 हथियारों के साथ उत्तर कोरिया सबसे निचले पायदान पर है.अमेरिका के पास 5 हजार 800, फ्रांस के पास 290, इजराइल के पास 90 और उत्तर कोरिया के पास 30 से 40 परमाणु हथियार हैं.

sipri report 2020

SIPRI

  • SIPRI का गठन स्टॉकहोम (स्वीडन की राजधानी) में 1966 में हुई थी.
  • इसका एक कार्यालय बीजिंग, चीन में भी है और पूरी दुनिया में इसे एक सम्मानित थिंक-टैंक के रूप में जाना जाता है.
  • यह एक स्वायत्त अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है जो युद्ध, हथियार, शस्त्र-नियंत्रण और निरस्त्रीकरण से सम्बंधित अनुसंधान को समर्पित है.
  • यह संस्थान नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, मीडिया और रूचि रखने वाले लोगों को आँकड़े, विश्लेष्ण और सुझाव देता है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

SIPRI का यह प्रतिवेदन ऐसे समय आया है, जब चीन और भारत दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से गलवान घाटी, पैंगोंग शो झील के करीब जबरदस्त तनाव चल रहा है. भारत के पास चीन के मुकाबले परमाणु हथियार जरूर कम है लेकिन भारतीय हथियारों की मारक क्षमता अचूक है. भले ही चीन और पाकिस्तान के पास भारत के मुकाबले परमाणु हथियार अधिक हों लेकिन नई दिल्ली अपने आणविक हथियार की क्षमता को लेकर आश्वस्त है. भारतीय रक्षा सूत्रों के अनुसार, परमाणु हथियारों की गिनती से कुछ नहीं होता है. भारत लगातार अपने परमाणु हथियारों को उन्नत बना रहा है. भारत अपने हथियारों को प्रभावकारी, निश्चित और सेंकडों में हमला की मारक क्षमता से लगातार अपडेट कर रहा है.

भारत अग्नि मिसाइलों को लगातार अपडेट कर रहा है. जमीनी शक्ति दृढ करने के लिए भारत तीव्रता से कार्य कर रहा है. 700 किलोमीटर तक मार करने वाले अग्नि-1 से लेकर 5,000 किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-V मिसाइल तैयार है. यही नहीं, हवा में भारत पड़ोसी देशों को मात देने की रणनीति बना चुका है. लड़ाकू विमान मिराज-2000 और जगुआर को परमाणु बम गिराने की क्षमता से लैस किया जा चुका है. परमाणु हथियारों से लैस भारत की पहली सबमरीन INS अरिहंत 2018 में भी भारतीय नौसेना में सम्मिलित हो चुका है. 3,500 किलोमीटर तक मार करने वाली K-4 सबमरीन बलिस्टिक मिसाइल का दो बार परीक्षण इस साल जनवरी में किया जा चुका है और जल्द ही इसका उत्पादन शुरू हो सकता है. जल्द ही K-4 मिसाइल 750 किलोमीटर तक मार करने वाली K-15 मिसाइल की स्थान ले लेगा.

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