एकल उपयोग प्लास्टिक के खतरे एवं सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदम

Sansar LochanEnvironment and Biodiversity, PollutionLeave a Comment

एकल उपयोग प्लास्टिक के कुछ उत्पादों पर प्रतिबंध सरकार द्वारा एकल उपयोग वाले प्लास्टिक (Single use plastics) को खत्म करने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान का संचालन किया जा रहा है।

ज्ञातव्य है कि वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के नियमों में संशोधन किया था, जिसके अंतर्गत 1 जुलाई 2022 से एकल उपयोग प्लास्टिक के कुछ उत्पादों के विनिर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूर्णत: रोक लगाने का निर्णय लिया गया था. इन उत्पादों में इयरबड, ग्लास, प्लेट एवं पैकेजिंग फिल्म आदि शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त नये नियमों के अनुसार प्लास्टिक कैरी बैग्स की मोटाई 30 सितंबर 2021 से न्यूनतम 75 माइक्रोन तथा दिसंबर 2022 से 120 माइक्रोन होनी चाहिये। इसके साथ ही गुटखा, तंबाकू और पान मसाले के पैकेटों के लिए प्लास्टिक के प्रयोग पर भी प्रतिबन्ध लगाया गया है। वर्ष 2018 में विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत सरकार ने वर्ष 2022 तक एकल उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को पूर्णत: बंद करने की घोषणा की थी।

सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदम

CPCB ने 17 अक्टूबर, 2022 से एक विशेष अभियान शुरू किया है और 50 से अधिक टीमों को फूल विक्रेताओं, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं, सब्जी मंडियों, मछली बाजार, थोक बिक्री बाजार आदि द्वारा एसयूपी वस्तुओं के उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए निरीक्षण करने के लिए तैनात किया गया है। राज्य शहरी विकास विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान भाग लिया।

बैक ट्रैकिंग के माध्यम से बाजार में एसयूपी वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला को तोड़ने की कोशिश की गई है। एसयूपी वस्तुओं के निर्माण में लगे खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं और कारखानों का पता लगाया गया है और निरीक्षण के दौरान प्रतिबंधित वस्तुओं का भारी जखीरा जब्त किया गया है। प्रतिबंधित एसयूपी वस्तुओं के अंतरराज्यीय परिवहन को रोकने के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं पर भी जाँच की जा रही है।

एकल उपयोग प्लास्टिक के खतरे

यह प्लास्टिक की थैलियों, दैनिक जीवन में उपयोग में ली जाने वस्तुओं जैसे- दूध, शैम्पू, चिप्स आदि के पाउच में प्रयोग में ली जाती है। इसका पुनर्चक्रण नहीं हो पाता ही और यह दीर्घकाल के लिए कचरे का हिस्सा बन जाती है। इसे जलाने पर पर्यावरण में हानिकारक गैसें मुक्त होती है जो स्वास्थ्य से सम्बंधित बीमारियों का कारण बनती है। वर्तमान में इसका प्रयोग व्यापक स्तर पर किया जा रहा है क्योंकि यह कपड़े एवं अन्य बहुलकों से निर्मित थैलों की तुलना में सस्ती होती हैं।

एकल उपयोग प्लास्टिक के 80% भाग का उपयोग पैकेजिंग के लिए किया जाता है और यह कुल वैश्विक प्लास्टिक कचरे का 50% हिस्सा है। प्लास्टिक का वैश्विक उपभोग वर्ष 2025 तक 400 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो जाने की संभावना है, ऐसे में बिना उचित कचरा प्रबंधन के प्लास्टिक कचरे की समस्या विकराल होती जाएगी और वर्ष 2050 तक समुद्रों में मछलियों से अधिक भार समुद्री प्लास्टिक कचरे का हो जायेगा.

भारत मे प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या

CPCB के अध्ययन के अनुसार, भारत में प्रतिदिन 25,490 टन प्लास्टिक कचरा एकत्र होता है। हालाँकि भारत का प्रति व्यक्ति प्लास्टिक कचरा उत्पादन 11 kg/वर्ष है जबकि अमरीका में यह 109kg/वर्ष है, परन्तु 130 करोड़ की जनसंख्या के साथ यह आँकड़ा भी बहुत ही चिंताजनक है।

प्लास्टिक कचरे का 40% न तो एकत्र किया जाता है और न ही पुनर्चक्रित, यह जल स्रोतों, मृदा को प्रदूषित करता है। यह न केवल समुद्री पारितंत्र, जल स्रोतों, जैव विविधता को प्रदूषित करता है बल्कि जीव जंतुओं की मृत्यु का कारण भी बन रहा है। प्लास्टिक थैलियों, बोतलों में उपस्थित नैनो कण मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर ख़तरे उत्पन्न कर रहा है।

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