[Sansar Ka Eco Series 1] – अर्थशास्त्र शब्दावली

Sansar LochanEconomics Notes2 Comments

sansar_ka_eco
Print Friendly, PDF & Email

आज से मैं अर्थशास्त्र शब्दावली की शुरुआत कर रहा हूँ. वैसे तो यह वेबसाइट सिविल सेवा परीक्षार्थियों के लिए है पर बैंकिंग क्षेत्र से भी कई लोग आग्रह कर रहे थे कि हमारे लिए भी कंटेंट डाला जाए. मैंने सोचा कि अर्थशास्त्र शब्दावली (economics glossary) से दोनों परीक्षाओं के परीक्षार्थियों को फायदा पहुँचेगा इसलिए आज से मैं उन economics related terms को Hindi में आपसे शेयर करने वाला हूँ जो विभिन्न exams जैसे Civil Services/IAS, PCS exam, Banking – IBPS PO/Clerk, Accounts related exams आदि में पूछे जाते हैं. इस सीरीज का मैंने नाम रखा है Sansar Ka Eco Series…

आज हम बात करने वाले कुछ important economy related terms की और वे हैं –

  1. Ability to pay principle
  2. Absolute advantage (निरपेक्ष लाभ)
  3. Accommodatory monetary policy
  4. Account period
  5. Action lag
  6. Ad valorem tax
  7. Assets liquid
  8. Arbitrage

Ability to pay principle 

मान लीजिये जेठालाल की आय भिड़े से अधिक है…तो जेठालाल को अपने अधिक आय और संपत्ति के चलते income tax or property tax भिड़े से अधिक चुकाना पड़ेगा क्योंकि जेठालाल का आयकर चुकाने का सामर्थ्य भिड़े से अधिक है इसलिए उसे ऊँची दर से कर चुकाना होगा. इस सिद्धांत पर कर लेना ही Ability to pay principle का रूप है.

Absolute advantage (निरपेक्ष लाभ)

मान लीजिये A और B दो countries के नाम हैं. दोनों के पास श्रम है और पूँजी भी है और वह भी समान मात्रा में.  दोनों देश X और Y दो वस्तुओं का उत्पादन कर रहे हैं. श्रम और पूँजी की समान मात्रा के बावजूद country A, country B की तुलना में X और Y दोनों वस्तुओं का उत्पादन ज्यादा कर रहा है >>

देश  X वस्तु  Y वस्तु
A 100 100
B 80 80

ऐसी स्थिति में स्पष्ट है, country A दोनों ही वस्तुओं के उत्पादन में निरपेक्ष लाभ(absolute advantage) प्राप्त कर रहा है.

Accommodatory monetary policy

ऐसी नीति जिसके अंतर्गत मुद्रा की पूर्ति (money supply) को इसके माँग के अनुरूप ही बढ़ने दिया जाता है…यानी जितना डिमांड हो उतनी ही मुद्रा की पूर्ति की जानी चाहिए. मुद्रा की माँग में पर्याप्त वृद्धि रहने पर यदि इसकी पूर्ति (supply) को उसी अनुपात में नहीं बढ़ाया गया तो आर्थिक संवृद्धि की दर (economic prosperity rate) रुक या स्थिर हो जाएगी. दूसरी तरफ, यदि demand की तुलना में मुद्रा की पूर्ति high rate से बढ़ने लगी तो inflation की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

Account Period 

विक्तीय प्रतिभूतियों (Bonds << के बारे में पढ़ें) को स्टॉक एक्सचेंजन खरीदने या बेचने के लिए एक अंतिम अवधि decide की जाती है. जैसे आप exam का फॉर्म भरते हो तो last date to apply होता है न? ठीक उसी तरह. बस उसी को financial term में Account Period कहते हैं.

Action lag

Action lag किसी भी व्यापारिक/राजकोषीय/मौद्रिक घोषणा और उसे लागू करने की बीच की अवधि को कहा जाता है. वही policy सफल कहलाती है जिसका action lag कम हो..यानी घोषणा करने और action लेने के बीच time का gap कम से कम हो.

Ad valorem tax

किसी वस्तु के प्रत्येक इकाई पर आरोपित कर ad valorem tax कहलाता है. यानी जितना वस्तु का मूल्य हो उसी के according tax लगेगा, कम मूल्य है तो कम tax, ज्यादा मूल्य है तो अधिक tax.

Aggregate demand or Aggregate expenditure

राष्ट्रीय आय की गणना करते समय सकल माँग (Gross Demand) या सकल व्यय में इन चीजों को शामिल किया जाता है  ->  कुल उपभोग व्यय (C), निवेश व्यय (I), सरकारी व्यय (G) तथा शुद्ध निर्यात (शुद्ध निर्यात का मतलब = difference between निर्यात > आयात ….जहाँ निर्यात always more than आयात)

Assets liquid

Assets liquid मतलब हुआ – तरल संपत्ति. तरल से मतलब ऐसी संपत्ति जिसे मुद्रा के रूप में आसानी से बदल दिया जाए. जैसे बैंक में जमा आपका पैसा. आप बैंक जाओ और पैसा निकालो और पैसा आपके हाथ में…आप अपनी जमीन बेचो, पैसा आपके हाथ में. . . इसलिए हम कह सकते हैं कि बैंक जमाएँ, सोना, चांदी आदि अधिक तरल हैं. वहीं बैंक में जमा fixed deposit का पैसा तरल नहीं है क्योंकि वह आपको एक fixed समय के बाद हाथ में आयेगा. पर भूमि, भवन, मशीनों, कार, फर्नीचर को तात्कालिक रूप से मुद्रा में रूपांतरित करना कठिन है इसलिए इनमें तरलता का अभाव है.

Arbitrage

जिस बाजार में कीमत कम है वहाँ जाकर securities या वस्तु को खरीदना तथा उसी समय ऊँची कीमत वाले बाजार में उसे बेचने का काम किया जाता है. कीमतों के इस अंतर का लाभ उठाना ही अर्थशास्त्र की दुनिया में arbitrage कहलाता है. इससे होता क्या है कि कम कीमत वाले बाजार में demand बढ़ जाती है और अधिक कीमत वाले बाजार में कीमत कम हो जाती है. धीरे-धीरे दोनों बाजारों की कीमतों में ज्यादा अंतर नहीं रह जाता है.

आज के लिए इतना ही. वैसे आपके पास कोई feedback हो या कोई economics related term हो जो आपको समझ में नहीं आ रहा हो, आप उसे कमेंट में लिख सकते हैं ताकि मैं अगले Sansar Ka Eco

Economics से रिलेटेड सभी पोस्ट आपको यहाँ मिलेंगे, Click >>> Economics in Hindi

Books to buy

2 Comments on “[Sansar Ka Eco Series 1] – अर्थशास्त्र शब्दावली”

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.