Sansar डेली करंट अफेयर्स, 30 November 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 30 November 2019


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : UNDP accelerator labs

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने नई दिल्ली, भारत में एक्सेलेरेटर लैब की शुरुआत की है. इस लैब के साथ  भारत उन 60 वैश्विक देशों में से एक होगा जो अभिनव समाधानों का परीक्षण, खोज और पैमाना बनाने का प्रयास करेंगे, जो जलवायु परिवर्तन और सामाजिक असमानता दोनों से निपटने में मददगार हो सकते हैं.

इस प्रयोगशाला की स्थापना UNDP तथा भारत सरकार के अटल नवाचार मिशन (Atal Innovation Mission) के आपसी समन्वय से की गई है.

एक्सेलेरेटर लैब क्या है?

  • यह लैब एक नवाचारी पहल है जो UNDP, जर्मनी और क़तर के द्वारा आरम्भ की गई है.
  • इसका उद्देश्य वर्तमान की नई जटिल चुनौतियों के लिए 21वीं सदी के समाधान ढूँढना है.

एक्सेलेरेटर लैब के चार प्रमुख दृष्टिकोण

  1. स्थानीय समाधानों के आधार पर उपयुक्त समाधान निकालना और उसे विस्तार देते रहना.
  2. कारगर समाधानों का तेजी से परीक्षण करना और ऐसे समाधान निकालना जो हट कर हों.
  3. सामूहिक ज्ञान को जन्म देने के लिए सर्वोत्तम समझ, विचार और विशेषज्ञता को मिश्रित करना.
  4. विशेषज्ञता, रचनात्मकता और सामूहिक बुद्धि का प्रयोग कर प्रगति में तेजी लाना.

चुनौतियाँ

  1. कृत्रिम बुद्धि के चलते बेरोज़गारी की संभावना.
  2. सोशल मीडिया पर गलत सूचना का प्रसार.
  3. नीतियों को नवाचारोन्मुख बनाये रखना.
  4. मानवाधिकारों का संरक्षण.

उल्लेखनीय है कि इनमें से अधिकांश चुनौतियाँ अत्यंत तेजी से बढ़ रही हैं. आज का युग इतिहास के पिछले युगों से मौलिक रूप से अलग है जिस कारण वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणिक समस्याएँ तेजी से बढ़ती हैं, फैलती हैं और जटिलता को प्राप्त होती हैं.

एक्सेलेरेटर लैब UNDP के द्वारा आरम्भ एक ऐसी पहल हैं जो विकास की दिशा में एक नया मार्ग खोलती हैं. इस काम में UNDP राष्ट्रीय और वैश्विक भागीदारों के सहयोग लेगा.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government Budgeting.

Topic : Supplementary Grants

संदर्भ

पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद के दोनों सदनों में 2019-20 वित्तीय वर्ष के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों का पहला बैच पटल पर रखा.

संवैधानिक प्रावधान

भारत के संविधान में अनुपूरक अनुदान, अतिरिक्त अनुदान, अधिकाई अनुदान, वोट्स ऑन अकाउंट, वोट्स ऑन क्रेडिट एवं आपवादिक अनुदान (exceptional grants) का उल्लेख आता है.

इनमें अनुपूरक, अतिरिक्त अथवा अधिकाई अनुदान का उल्लेख अनुच्छेद 115 में तथा तथा वोट्स ऑन अकाउंट, वोट्स ऑन क्रेडिट एवं आपवादिक अनुदान का वर्णन अनुच्छेद 116 में मिलता है.

विभिन्न अनुदानों की परिभाषा

अनुपूरक अनुदान

वित्तीय वर्ष बीतने के पहले यदि बजट की अपर्याप्तता दिखाते हुए अतिरिक्त खर्च की मांग संसद में पेश की जाती है तो यह अनुपूरक अनुदान की मांग कहलाती हैं.

अतिरिक्त अनुदान

यदि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान किसी नई सेवा के लिए पूरक अथवा अतिरिक्त व्यय की आवश्यकता आ पड़ती है तो उसे अतिरिक्त अनुदान की माँग रखी जाती है.

अधिकाई अनुदान

यदि किसी वित्तीय वर्ष में किसी सेवा के लिए प्रावधान की गई धनराशि से अधिक धनराशि खर्च हो जाती है तो जो अनुदान दिया जाता है उसे अधिकाई अनुदान कहा जाता है. यह अनुदान तब माँगा जाता है जब सम्बन्धित वित्तीय वर्ष समाप्त हो चुका होता है.

आपवादिक अनुदान

किसी वित्तीय वर्ष की चालू सेवा से भिन्न किसी अलग उद्देश्य के लिए अनुदान दिया जाता है तो उसे आपवादिक अनुदान कहते हैं.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : FASTags

संदर्भ

दिसम्बर 1 से राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल चुकाने के लिए FASTags अनिवार्य हो जाएँगे. इस निर्णय का उद्देश्य टोल संग्रह की अड़चनों को इलेक्ट्रॉनिक विधि से दूर करना है. ज्ञातव्य है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India – NHAI) के नियंत्रण में 560 के लगभग टोल प्लाजा हैं. अब ये सभी प्लाजा बिना मानवीय हस्तक्षेप के टोल लेंगे और गाड़ियों को टोल देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा.

एक राष्ट्र एक FASTAG योजना के मुख्य तथ्य

  • जैसा कि ऊपर लिखा जा चुका है कि यह योजना दिसम्बर 1, 2019 से लागू होगी.
  • देश-भर के राष्ट्रीय और राजमार्गों पर रेडियो बारंबारता पहचान (Radio Frequency Identification – RFID) टैग से युक्त नई गाड़ियाँ एक्टिवेशन करके फ़ास्ट टैग प्राप्त कर सकती हैं.
  • इस योजना का उद्देश्य टोल संग्रह को डिजिटल ढंग से समेकित करना और पूरे भारत में गाड़ियों की निष्कंटक आवाजाही को सुनिश्चित करना है.
  • इस योजना के अंतर्गत भुगतान का संग्रह भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India – NPCI) करता है और इस भुगतान की पद्धति राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (National Electronic Toll Collection – NETC) कार्यक्रम के अनुरूप होती है.

FASTAGS क्या है?

यह टोल भुगतान करने के लिए बनाया गया एक उपकरण है. यह रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान (Radio Frequency Identification ) तकनीक का उपयोग करता है और इससे टोल पर प्रीपेड बैलेंस उपयोग करके सीधे भुगतान किया जा सकता है.

यह उपकरण कार के आगे वाले शीशे से लगा हुआ होता है जिससे वाहन को टोल पर रुकना आवश्यक नहीं रह जाता है. इस टैग की वैधता पाँच वर्ष तक के लिए होती है और इसे समय-समय पर रिचार्ज करना होता है.

इसके क्या लाभ हैं?

  • डिजिटल भुगतान होने के चलते इसमें नकद की आवश्यकता नहीं पड़ती.
  • टोल पर समय बर्बाद नहीं होता.
  • टोल पर रुकने से ईंधन खर्च होता है और प्रदूषण भी होता है. इस तकनीक से इन सब से बचा जा सकता है.
  • इससे सरकार को ये जानकारी हो जाती है किसी टोल से कितने और किस प्रकार के मोटर यान गुजरे. इससे सरकार को पता लगेगा कि बजट में सड़क चौड़ाई और अन्य बुनियादी ढाँचे के लिए कितने खर्च का प्रावधान किया जाए.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : EU declares climate emergency

संदर्भ

यूरोपीय संघ ने पिछले दिनों जलवायु आपातकाल घोषित कर दिया. इस प्रकार यह संघ ऐसा करने वाला पहला बहुपक्षीय संस्था बन गया.

निहितार्थ

यूरोपीय संघ के द्वारा जलवायु आपातकाल की घोषणा एक सांकेतिक कदम है. परन्तु आशा की जाती है कि इससे देशों पर यह दबाव पड़ेगा कि वे दिसम्बर 2 को स्पेन में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन के पूर्व अपेक्षित कार्रवाइयाँ करेंगे. इस घोषणा से यूरोपीय संघ के देश उत्सर्जन को शून्य तक लाने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में उद्द्यत होंगे.

जलवायु आपातकाल और कहाँ घोषित हो चुका है?

वस्तुतः यूरोपीय संघ के अनेक देश इस प्रकार की घोषणा अपने-अपने देश के लिए कर चुके हैं. इनमें स्पेन, फ़्रांस, यूके हैं.

यूरोप के बाहर ऐसी घोषणा करने वाले तीन देश हैं – कनाडा, अर्जेंटीना और बांग्लादेश.

जलवायु आपातकाल है?

वस्तुतः जलवायु आपातकाल की कोई एक परिभाषा नहीं है. परन्तु यह कार्बन उत्सर्जन की अधिकता को व्यक्त करता है. विश्व में ऐसे कई देश हैं जो 2030 तक कार्बन को घटाना (carbon-neutral) चाहते हैं. परन्तु अलग-अलग देशों ने इसके लिए अलग-अलग लक्ष्य रखे हैं. उदाहरण के लिए यूनाइटेड किंगडम का लक्ष्य 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को 1990 के स्तर की तुलना में 80% घटाना है.

इतनी अफरा-तफरी क्यों?

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की विभीषिका पर लगाम लगाना है तो इसके लिए अब मात्र 11 वर्ष ही बचे हैं. बात केवल स्थानीय स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को घटाने की ही की नहीं है, अपितु जलवायु परिवर्तन के विषय में लोगों को जागरूक बनाना भी है.

पेरिस समझौता क्या कहता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र के द्वारा संधारित ऊष्मा के कारण धरती और भी गर्म होने वाली है. अतः अंतर्राष्ट्रीय ध्यान संयुक्त राष्ट्र पेरिस समझौते पर आ कर टिक गया है, जिसपर 2016 में 197 देशों ने हस्ताक्षर किये हैं.

इस समझौते के अनुसार, औद्योगिक युग के पूर्व (19वीं शताब्दी का उत्तरार्ध) के स्तर से 2˚C  ऊपर पहुँचने से वैश्विक तापमान को 2100 तक रोक देना है. आदर्श स्थिति तो यह है कि यह कमी 1.5˚C से अधिक न होवे.


Prelims Vishesh

India’s cold wave zone :-

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भविष्यवाणी की है कि इस वर्ष भारत के शीतलहरी क्षेत्रों में सर्दियों का प्रकोप कम रहेगा.

विदित हो कि भारत के ये राज्य शीतलहरी क्षेत्र में आते हैं – पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और बिहार.


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