Sansar डेली करंट अफेयर्स, 30 January 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 30 January 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability; citizens charters, transparency & accountability and institutional and other measures.

Topic : Corruption Perception Index – 2020

संदर्भ

हाल ही में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) द्वारा भ्रष्टाचार अवधारणा सूचकांक, 2020 (Corruption Perception Index, 2020) को जारी किया गया है.

भ्रष्टाचार अवधारणा सूचकांक क्या है?

  • इस सूचकांक में 180 देशों और भूभागों को शामिल किया गया है.
  • इसमें विशेषज्ञों और व्यवसाइयों से पूछा जाता है कि उनके मन में सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के स्तर के बारे में क्या अवधारणा है. इसी आधार पर देशों को रैंकिंग दी जाती है. इसमें यह देखा जाता है कि सरकारी अधिकारी भ्रष्टाचार करने पर पकड़े जाते हैं अथवा वे बच निकलते हैं. विशेषज्ञों से इस बात की भी जानकारी ली जाती है कि घूसखोरी का चलन वे कितना देखते हैं और क्या सार्वजनिक संस्थाएँ नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति सजग हैं?
  • यह सूचकांक एक मिश्रित सूचकांक है जिसमें देशों को रैंक देने के लिए 12 प्रकार के सर्वेक्षण किये जाते हैं.
  • इस सूचकांक को विश्व में बहुत सम्मान दिया जाता है और विश्लेषक और निवेशक भ्रष्टाचार के मामले में इसे विश्वसनीय मानते हुए इसका उपयोग करते हैं.
  • सूचकांक में से लेकर 100 तक का एक मापदंड होता है जिसमें जीरो का अर्थ हुआ “बहुत अधिक भ्रष्ट” और 100 का अर्थ हुआ “सबसे साफ़-सुथरा”.

सूचकांक 2020 के निष्कर्ष

  • ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी भ्रष्टाचार बोध सूचकांक-2020 में 180 देशों में भारत का स्थान छह स्थान नीचे जाकर 86वें नंबर पर आ गया है. इस वर्ष भारत का भ्रष्टाचार बोध सूचकांक में स्कोर 40 अंक है.
  • भारत का स्कोर चीन की तुलना में भी कम है, जिसने 78 के रैंक के साथ 42 का स्कोर किया. वहीं अमेरिका अमेरिका 67 वें, पाकिस्तान 124 वें और नेपाल 117वें स्थान पर हैं.
  • भ्रष्टाचार बोध सूचकांक-2020 में न्यूजीलैंड और डेनमार्क 88 के स्कोर के साथ पहले स्थान पर रहे हैं. जबकि सोमालिया और दक्षिण सूडान 12 स्कोर के साथ निम्नतम पायदान पर हैं.
  • सूचकांक में भारत का स्कोर वैश्विक औसत और एशिया-प्रशांत दोनों औसत से नीचे है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब भी भ्रष्टाचार सूचकांक में बहुत ही पीछे है.
  • ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक, अधिकांश देश अभी भी भ्रष्टाचार से प्रभावी ढंग से निपटने में विफल हैं.
  • ज्ञातव्य है कि वर्ष 2019 में भारत, इस सूचकांक में 80वें स्थान पर था, जबकि वर्ष 2018 में 78वें स्‍थान पर था.
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि उन देशों में भ्रष्टाचार ज्यादा रहा है, जहां कोरोनावायरस से निपटने के ठीक इंतजाम नहीं हो पाए थे. 
  • पिछले सालों की तरह ही इस बार भी दुनियाभर के दो-तिहाई देशों का स्कोर सूचकांक में 50 के नीचे है, जबकि वैश्विक औसत 43 अंकों का ही है. डेटा के मुताबिक, सूचकांक में कुछ प्रगति के बावजूद कई देश भ्रष्टाचार से निपटने में असफल रहे हैं. 

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल

  • 1993 में कुछ व्यक्तियों ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध कदम उठाने का फैसला किया और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की स्थापना की.
  • वर्तमान में यह 100 से अधिक देशों में मौजूद है.
  • इसका सचिवालय बर्लिन (जर्मनी की राजधानी) में है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

संस्थानों को सशक्त किया जाना चाहिये, साथ ही जाँच और संतुलन को बनाए रखना चाहिये. भ्रष्टाचार विरोधी कानून बनाने उन्हें व्यवहार में लाने और उनके प्रवर्तन के बीच के अंतराल को कम किया जाना चाहिये. नागरिकों को अभिव्यक्ति और सरकारों की जवाबदेही तय करने का अधिकार दिया जाना चाहिये. प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा की जाए ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ रिपोर्टिंग करने वाले किसी भी पत्रकार के जीवन को खतरा ना हो.


GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : World Gold Council

संदर्भ

विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council– WGC) के अनुसार, भारत में सोने की मांग कोविड-19 के कारण लगाये गए लॉकडाउन और रिकॉर्ड उच्च कीमतों के कारण वर्ष 2020 में पिछले 25 साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. वर्ष 2020 में सोने की कुल मांग 446.4 टन रही जबकि वर्ष 2019 में यह 690.4 टन थी.

सोना और अर्थव्यवस्था में परस्पर सम्बन्ध

मुद्रा के रूप में: 20 वीं शताब्दी के दौरान अधिकांश काल तक सोने को वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में उपयोग किया जाता रहा. संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वर्ष 1971 तक स्वर्ण-मानक (Gold Standard) का प्रयोग किया जाता रहा.

मुद्रास्फीति के विरुद्ध एक बचाव के रूप में: अंतर्निहित मूल्य और सीमित आपूर्ति के कारण मुद्रास्फीति के समय में सोने की मांग में वृद्धि हो जाती है. चूंकि, इसे पतला अथवा डाईल्यूट नहीं किया जा सकता है, इसलिए सोना, मुद्रा के अन्य स्वरूपों की तुलना में, बेहतर कीमत बनाए रखने में समर्थ होता है.

मौद्रिक शक्ति: जब कोई देश निर्यात से अधिक आयात करता है, तो उसकी मुद्रा के मूल्य में ह्रास हो जाता है. वहीं दूसरी ओर, यदि कोई देश शुद्ध निर्यातक होता है, तो उसकी मुद्रा के मूल्य में वृद्धि हो जाती है. इस प्रकार, जो देश सोने का निर्यात करते हैं अथवा उनके पास स्वर्ण भण्डार होते हैं, तो सोने की कीमतों में वृद्धि होने पर उनकी मौद्रिक शक्ति में वृद्धि हो जाती है, क्योंकि उनके सकल निर्यात का मूल्य बढ़ जाता है.

विश्व स्वर्ण परिषद् क्या है?

  • विश्व स्वर्ण परिषद् (World Gold Council) स्वर्ण उद्योग के लिए बाजार विकास का एक संगठन है.
  • यह स्वर्ण उद्योग से जुड़े हुए हर कार्य को देखता है चाहे वह सोने का खनन हो या सोने का निवेश.
  • इस परिषद् का उद्देश्य सोने की माँग को उत्प्रेरित करना और उसे बनाए रखना है.
  • विश्व स्वर्ण परिषद् एक ऐसा संघ है जिसमें विश्व की अग्रणी स्वर्ण खदान कंपनियाँ सदस्य होती हैं.
  • यह परिषद् अपने सदस्यों को उत्तरदायित्वपूर्ण ढंग से खनन करने में सहायता देती है.
  • इसी परिषद् ने Conflict Free Gold Standard को विकसित किया है.
  • विश्व स्वर्ण परिषद् का मुख्यालय इंग्लैंड में है और इसके कार्यालय भारत, चीन, सिंगापुर, जापान एवं अमेरिका में हैं.

GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Issues related to education.

Topic : Strengthening Teaching-Learning and Results for States : STARS

संदर्भ

राज्यों में शिक्षण, सीखने और परिणामों को बेहतर बनाने की शिक्षा मंत्रालय की स्टार्स परियोजना (Strengthening Teaching-Learning and Results for States: STARS) के क्रियान्वयन को वित्तीय मदद प्रदान करने के लिए आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) और विश्व बैंक के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं.

  • स्टार्स परियोजना की कुल लागत 5718 करोड़ रुपए है. पांच वर्ष की अवधि में विश्व बैंक इसमें 50 करोड़ डॉलर (लगभग 3700 करोड़ रुपए) की वित्तीय सहायता देगा. शेष राशि योजना में भागीदारी कर रहे राज्यों द्वारा राज्य अंश के रूप में दी जाएगी.
  • स्टार्स परियोजना शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के अन्तर्गत नई केन्द्रीय सहायता प्राप्त योजना के रूप में क्रियान्वित की जाएगी.

स्टार्स परियोजना 

  • स्टार्स का पूर्ण स्वरुप ‘Strengthening Teaching-Learning and Results for States Program’ है.
  • 1994 से इस कार्यक्रम ने भारत और विश्व बैंक के बीच एक लंबी साझेदारी स्थापित करने में मदद की है. इस कार्यक्रम के माध्यम से, विश्व बैंक समूह ने भारत सरकार को ‘सभी के लिए शिक्षा’ प्रदान करने के दृष्टिकोण को अधिक लचीलापन प्रदान किया है.
  • इस परियोजना में छह राज्य शामिल हैं – राजस्थान, ओडिशा, केरल, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र.

GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : Geological Survey of India: GSI

संदर्भ

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India : GSI) द्वारा नेशनल बेसलाइन जियोसाइंस डेटा जेनरेशन प्रोग्राम (2020-2024) की शुरुवात की गई है. GSI ने देश में खनिज की अन्वेषण गतिविधियों में तेजी लाने के लिए, राष्ट्रीय स्तर के कुछ प्रमुख सर्वेक्षणों को वर्ष 2024 तक पूरा करने हेतु एक महत्त्वकांक्षी योजना आरंभ की है.

इन सर्वेक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. नेशनल जियो-केमिकल मैपिंग (NGCM)
  2. नेशनल जियो-फिजिकल मैपिंग (NGPM)
  3. नेशनल एयरो जियोफिजिकल मैपिंग प्रोग्राम (NAGMP)
  4. नेशनल जियोसाइंस डेटा रिपॉजिटरी (NGDR)

नेशनल जियो-केमिकल मैपिंग

वस्तुतः भू-रासायनिक प्रतिदर्शन (sampling) द्वारा देश के संपूर्ण सतही क्षेत्र को सम्मिलित करने हेतु संचालित एक अखिल भारतीय कार्यक्रम है.

उपयोग: प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन और विकास; पर्यावरण, कृषि, मानव स्वास्थ्य व अन्य सामाजिक संदर्भों में अनुप्रयोग और नए खनिज भंडारों की खोज करना.

नेशनल जियो-फिजिकल मैपिंग (NGPM)

NGPM बॉउगर (ग्रेविटी) एनोमली (असंबद्धता) के बुनियादी एवं व्युत्पन्न मानचित्रों और इंटरनेशनल जियो-मैग्नेटिक रेफरेंस (IGRF) द्वारा सही किए गए देश के कुल चुंबकीय क्षेत्र मानचित्रों को ग्राउंड ग्रेविटी तथा चुंबकीय सर्वेक्षण करके तैयार कर रहा है.

उपयोग: गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय प्रभाव से संबद्ध संसाधित डेटा से प्राप्त एनोमली मानचित्र सभी हितधारकों को अन्वेषण से संबंधित रणनीतियों को तैयार करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है.

नेशनल एयरो जियोफिजिकल मैपिंग प्रोग्राम (NAGMP)

नेशनल एयरो जियोफिजिकल मैपिंग प्रोग्राम (NAGMP) का उद्देश्य खनिजीकरण में सक्षम गहराई में अवस्थित संरचना/लिथो-इकाइयों (जो विद्यमान खनिजयुक्त क्षेत्र के परिसीमन विस्तार और खनिज घटना के संदर्भ में उथली भूपर्पटीय संरचना को समझने में सक्षम हैं) की रूपरेखा प्रस्तुत करना है.

नेशनल जियोसाइंस डेटा रिपॉजिटरी (NGDR)

GSI ने नेशनल जियोसाइंस डेटा रिपॉजिटरी (NGDR) की अपनी प्रमुख पहल भी आरंभ की है. इस पहल का उद्देश्य GSI और इसी प्रकार के संगठनों द्वारा एकत्रित डेटा को समेकित करके डिजिटल माध्यम पर एक रिपॉजिटरी का निर्माण करना है, जिसमें एक साथ कई उपयोगकर्ताओं को पहुंच की सुविधा प्राप्त हो.

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India)

  • GSI भूस्खलन डेटा संग्रह और भूस्खलन अध्ययन करने के लिए भारत सरकार की एक “नोडल एजेंसी” है तथा इसके द्वारा सभी प्रकार के भूस्खलनों और ढाल स्थिरता सम्बन्धी शोध कार्य किया जाता है.
  • यह खान मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत है.
  • इसकी स्थापना 1851 में हुई थी.
  • इसका कार्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और अध्ययन करना है. यह इस तरह के दुनिया के सबसे पुराने संगठनों में से एक है.

इन कार्यक्रमों का महत्त्व

उपरोक्त परियोजनाओं से प्राप्त आंकड़ों के एकत्रीकरण, सम्मिलन और एकीकरण से देश में खनिज अन्वेषण के लिए उपयुक्त और अधिक क्षेत्रों की पहचान होगी. खनिज उत्खनन में बढ़ा निवेश नीलामी के लिए संभावित खनिज ब्लॉकों की एक दृढ़ पाइपलाइन का निर्माण करेगा. यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के पोषित लक्ष्य की ओर देश को ले जाते हुए यहां खनन की दीर्घकालिक व्यवहार्यता और निरंतरता सुनिश्चित करेगा. देश के मैपिंग के योग्य कुल 3.146 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से, 3.119 मिलियन वर्ग किलोमीटर को दिसंबर 2020 तक 1: 50,000 स्केल पर व्यवस्थित जियोलॉजिकल मैपिंग द्वारा कवर किया गया है, जोकि देश केकवरेज का लगभग 99.14% है. इस मैपिंग गतिविधि के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों ने राष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक जानकारी से संबंधित ज्ञान डेटाबेस का निर्माण करने में मदद की है, जोकि खनिज अन्वेषण की गतिविधियों और पृथ्वी विज्ञान से संबंधित अन्य सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों और कार्यक्रमों को बढ़ाने में सहायता करता है. पिछले दशक के दौरान जीएसआई ने ऑब्वियस जियोलाजिकल पोटेंशियल (ओजीपी) वाले क्षेत्रों,जोकि लगभग 0.813 मिलियन वर्ग किलोमीटर है, से संबंधित बेसलाइन डेटा जेनेरेशन को प्राथमिकता दी है.


Prelims Vishesh

M-sand (manufactured sand) policy, Rajasthan :-

  • विनिर्मित रेत (एम-सैंड) वस्तुतः कृत्रिम रेत होती है, जिसे कठोर पत्थरों को सूक्ष्म रेत के आकार के कणों में पीसकर उत्पादित किया जाता है. निर्माण सामग्री के रूप में इसका उपयोग करने के लिए इसे प्रक्षालित (washed) और सूक्ष्मता से वर्गीकृत किया जाता है.
  • नीति का महत्त्व > नदी की रेत पर निर्भरता कम करना, एम-सैंड के उपयोग और उत्पादन को बढ़ावा देना, राज्य में खदानों से निकलने वाले अपशिष्ट की समस्या का समाधान करना और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर सृजित करना.

Pakal Dul Hydroelectric Project :-

  1. पाकल दुल पनबिजली परियोजना 1000 MW की बिजली उत्पादन की क्षमता रखती है.
  2. यह जम्मू कश्मीर में चेनाब नदी की सहायक नदी मारुसादर नदी (Marusadar River) पर बनाई गई है.
  3. पाकिस्तान ने विश्व बैंक के साथ अपनी चिंताओं को व्यक्त करते हुए यह कहा है कि भारत की यह परियोजना सिंधु जल संधि के अनुरूप नहीं थी. हालांकि भारत ने कहा है कि यह IWT की शर्तों का उल्लंघन नहीं करती है. पर दोनों देशों द्वारा वर्ष 1960 में हस्ताक्षर किए गए थे. इसके अंतर्गत सिंघु, झेलम और चिनाब नदी पाकिस्तान के लिए आरक्षित हैं, जबकि रावी, ब्यास और सतलज नदियां भारत के लिए आरक्षित हैं.

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