Sansar डेली करंट अफेयर्स, 30 January 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 30 January 2020


GS Paper 1 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Lala Lajpat Rai

संदर्भ

जनवरी 28 को लाला लाजपत राय की 155वीं जयंती मनाई गई.

लाला लाजपत राय से सम्बंधित मुख्य तथ्य

लाला लाजपत राय का जन्म 1865 ई. में पंजाब में हुआ था. उनके पिता स्कूल-इंस्पेक्टर थे. लाला लाजपत बचपन से ही प्रखर बुद्धि के थे. उन्हें प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति से बहुत लगाव था. इसी लगाव के चलते ही उन्होंने प्राचीन विद्या, धर्म और संस्कृति का गहन रूप से अध्ययन किया. वे भी विदेशी शासन के विरोधी थे. उनका राजनीतिक दर्शन दयानंद सरस्वती के दर्शन से प्रभावित था. अपनी शिक्षा ख़त्म कर के वे सक्रिय रूप से राजनीति में संग्लन हो गए.

इतिहास में से लाला लाजपत का स्थान

1888 ई. में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. वे कांग्रेसी के नरमपंथी नेताओं और कांग्रेस की भिक्षा की नीति से काफी असंतुष्ट थे. तिलक के सामान वे भी उग्र राष्ट्रवादिता के हिमायती थी. जल्द ही तिलक और बिपिनचंद्र पाल के साथ उन्होंने अपना उग्रवादी गुट बना लिया जिसे लाल-बाल-पाल (<<Click to read in detail) के नाम से जाना गया. इन लोगोंने कांफ्रेस की शांतिपूर्ण नीतियों का विरोधरंभ किया. फलतः, कांग्रेस के अन्दर नरमपंथियों का प्रभाव कम होने लगा और उग्रवादियों का प्रभाव बढ़ने लगा. बनारस कांग्रेस अधिवेशन (1905 ई.) में उग्रवादियों ने कांग्रेस पंडाल में भी अलग बैठक की. लाजपत राय ने भी इसमें भाग लिया. उन्होंने कहा कि अगर “भारत स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहता है तो उसको भिक्षावृत्ति का परित्याग कर स्वयं अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा.

इनके विषय में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें > लाला लाजपत राय


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic : Legislative Council

संदर्भ

पिछले दिनों आंध्र प्रदेश के मंत्रिमंडल ने राज्य की विधान परिषद् को भंग करने के लिए एक संकल्प का अनुमोदन किया.

पृष्ठभूमि

अविभाजित आंध्र प्रदेश की विधान परिषद् का सृजन जुलाई 1, 1958 में पहली बार हुआ था. किन्तु मई 31, 1985 को इसे भंग कर दिया गया था.

22 वर्षों के पश्चात् मार्च 30, 2007 को इसे फिर से जीवित किया गया था. 2014 में हुए आंध्र प्रदेश के विभाजन के उपरान्त इस परिषद् में अब 58 सदस्य रह गये हैं.

किन-किन राज्यों में विधान परिषदें हैं?

आंध्र प्रदेश के अलावा, पांच अन्य राज्यों में विधान परिषदें हैं – बिहार (58), कर्नाटक (75), महाराष्ट्र (78), तेलंगाना (40), उत्तर प्रदेश (100). जम्मू-कश्मीर में भी एक विधान परिषद् हुआ करती थी, किन्तु उस राज्य के संघीय राज्य बन जाने के कारण वह परिषद् समाप्त हो चुकी है.

विधान परिषद्

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 169 में राज्यों में विधान परिषद् के गठन का उल्लेख है.
  • संविधान के अनुसार इस परिषद् के सदस्यों की कुल संख्या विधान सभा के कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई भाग से ज्यादा नहीं हो सकती, लेकिन कम-से-कम 40 सदस्य होना अनिवार्य है.
  • यह एक स्थायी सदन है, जिसका कभी भी विघटन नहीं होता है.
  • इसके प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है.
  • प्रत्येक 2 वर्ष पर इसके एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं.
  • इस परिषद् के एक-तिहाई सदस्य स्थानीय संस्थाओं, नगरपालिका, जिला परिषद् आदि के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं. एक-तिहाई सदस्य विधान सभा के सदस्यों के द्वारा चुने जाते हैं. 1/12 सदस्य राज्य के उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों एवं कॉलेजों में कम-से-कम तीन वर्ष का अनुभव रखने वाले अध्यापकों के द्वारा चुने जाते हैं. 1/12 सदस्य सम्बंधित राज्य के वैसे निवासी जो भारत के किसी विश्वविद्यालय से स्नातक हों एवं जिन्होंने स्नातक की उपाधि कम-से-कम तीन वर्ष पहले प्राप्त कर ली हो, के द्वारा चुने जाते हैं. शेष 1/6 सदस्य राज्यपाल के द्वारा कला, साहित्य, विज्ञान, सहकारिता तथा समाज सेवा के क्षेत्र में राज्य के ख्याति प्राप्त व्यक्तियों से मनोनीत किये जाते हैं.
  • विधान परिषद् का अधिवेशन आरम्भ होने के लिए इसके कुल सदस्यों का 1/10 भाग या कम-से-कम 10 सदस्य (जो भी ज्यादा हों) का होना आवश्यक है.
  • इस परिषद् के सदस्यों को सदन में वक्तव्य देने की पूर्ण स्वतंत्रता है एवं उनके द्वारा दिए गये किसी भी वक्तव्य के लिए किसी न्यायालय में किसी भी प्रकार का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है.
  • इस परिषद् के सदस्यों को सदन का सत्र प्रारभ होने के 40 दिन पहले एवं सत्र समाप्त होने के 40 दिन के बाद के बीच में दीवानी मुकदमों के लिए बंदी नहीं बनाया जा सकता है.
  • विधान परिषद् का सत्र राज्यपाल द्वारा बुलाया जाता है. किसी एक वर्ष में इसका कम-से-कम दो सत्र होना आवश्यक है एवं एक सत्र के अंतिम दिन तथा दूसरे सत्र के प्रथम दिन के बीच 6 महीने से ज्यादा का समयांतर नहीं होना चाहिए.

विधान परिषद् सदस्य बनने की योग्यताएँ

  1. वह भारत का नागरिक हो एवं कम-से-कम 30 वर्ष के उम्र का हो.
  2. उसका नाम सम्बंधित राज्य की मतदाता सूची में दर्ज हो.
  3. वह भारत या राज्य सरकार के किसी लाभ का पद धारण नहीं किये हुए हो.
  4. वह पागल या दिवालिया न हो.
  5. चुनाव सम्बन्धी किसी अपराध के कारण उसे इस परिषद् के सदस्य चुने जाने के अधिकार से वंचित न कर दिया हो.

विधान परिषद् के कार्य

इस परिषद् के निम्न प्रकार के कार्य हैं –

वित्तीय कार्य

राज्य के वित्त मामलों की वास्तविक शक्तियाँ विधान सभा के पास होती है. कोई भी धन विधेयक पहले विधान सभा में पेश किया जाता है. विधान सभा में पास होने के बाद धन विधेयक को विधान परिषद् में पेश किया जाता है. यह परिषद् इस विधेयक को 14 दिनों तक रोक सकती है. यदि 14 दिनों की अवधि तक यह परिषद् सम्बंधित विधेयक पर कोई कार्रवाई  न करे या कोई संशोधन की सिफारिश करे तो सम्बंधित विधान सभा को यह अधिकार है कि उस संशोधन को माने या न माने एवं विधेयक दोनों सदन से पारित समझा जाता है.

विधायी कार्य

इस परिषद् में साधारण विधेयकों को पेश किया जा सकता है लेकिन विधेयक को राज्यपाल के पास भेजे जाने से पहले आवश्यक है कि उसे विधान सभा से पारित किया जाए. अगर कोई विधेयक विधान सभा से पारित किया जा चुका हो परन्तु विधान परिषद् में उस पर कोई गतिरोध हो तो यह परिषद् उस विधेयक को नामंजूर कर सकती है, बदल सकती है या तीन महीने तक रोक कर रख सकती है. इसके बाद यदि विधान सभा इस विधेयक को विधान परिषद् के किये गये संशोधन के साथ या उसके बिना अगर पारित कर देती है तो विधेयक दुबारा इस परिषद् के पास भेजा जाता है. इस बार यदि यह परिषद् विधेयक को पुनः मंजूरी न दे या ज्यादा से ज्यादा एक महीने तक रोक कर रखे तब भी यह विधेयक दोनों सदनों से पारित समझा जाएगा.

संवैधानिक अधिकार

भारत के संविधान के किसी संशोधन में विधान परिषद् विधान सभा के साथ मिलकर भाग लेती है अगर वह संशोधन विधेयक सम्बंधित राज्य पास स्वीकृति के लिए भेजा जाता हो. राज्य का मन्त्रिमंडल केवल विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होता है. यह परिषद् मन्त्रिमण्डल को अविश्वास प्रस्ताव द्वारा नहीं हटा सकती है.

विधान परिषद् के सभापति एवं उप-सभापति

विधान परिषद् के सभापति एवं उप-सभापति का चुनाव सम्बंधित विधान परिषद् के सदस्यों द्वारा किया जाता है. सभापति या उप-सभापति को सदस्यों के द्वारा कम-से-कम 14 दिन पूर्व सूचना देकर प्रस्ताव लाकर बहुमत के द्वारा हटाया जा सकता है. इनका वेतन राज्य के संचित निधि कोष से दिया जाता है.

यह भी जरुर पढ़ें >>

विधान सभा और विधान परिषद् में अंतर


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resources.

Topic : National Population Register (NPR)

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले दिनों राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी के विरुद्ध डाली गई याचिकाओं को सुनना स्वीकार किया.

राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी क्या है?

  • यह एक पंजी है जिसमें देश के निवासियों से सम्बंधित विवरण होगा.
  • इस पंजी को नागरिकता अधिनियम 1955 तथा नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण एवं राष्ट्रीय पहचान कार्य का निर्गमन) नियमावली, 2003 के प्रावधानों के अंतर्गत राष्ट्रीय, राज्य, जिला, अनुमंडल और स्थानीय (गाँव/कस्बा) के स्तर पर तैयार किया जा रहा है.
  • भारत के प्रत्येकसामान्य निवासीको इस पंजी में दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है.
  • यहाँ “सामान्य निवासी” से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो किसी स्थान विशेष में पिछलेछह महीने या उससे अधिक से रहा हो अथवा वह व्यक्ति जो उस क्षेत्र में आगामी छह महीने अथवा अधिक रहना चाहता है.
  • राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी में जो डेटाबेस होगा उसके अन्दर जनसांख्यिक विवरणों के साथ-साथ बायोमेट्रिक विवरण भी होंगे.
  • अंत में 18 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को एक निवासी पहचान कारेजिडेंट आइडेंटिटी कार्ड (RIC) दिया जाएगा. यह एक स्मार्ट कार्ड होगा जिसमें लगे चिप में प्रत्येक व्यक्ति के जनसांख्यिक और बायोमेट्रिक विवरण अंकित होंगे. इस कार्ड पर UID नंबर भी छपा होगा.
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सौजन्य : दैनिक भास्कर

राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी के लाभ

  • सरकार के पास देश में रहने वाले हर निवासी की जानकारी होगी.
  • एनपीआर का उद्देश्य लोगों का बायोमीट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ असली लाभार्थियों तक पहुंचाना भी है.

जनसांख्यिकी विवरण

राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी के लिए प्रत्येक निवासी का निम्नलिखित जनसांख्यिकीय विवरण लिया जाएगा, जिसे देना आवश्यक है:

  • व्यक्ति का नाम
  • घर के मुखिया से रिश्ता
  • पिता का नाम
  • माता का नाम
  • जीवनसाथी का नाम (शादीशुदा होने पर)
  • लिंग
  • जन्मतिथि
  • वैवाहिक स्थिति
  • जन्मस्थान
  • राष्ट्रीयता
  • सामान्य नागरिक का वर्तमान पता
  • वर्तमान पते पर रहने की अवधि
  • स्थायी निवास का पता
  • व्यवसाय/गतिविधि
  • शैक्षणिक योग्यता

NPR और NRC में अंतर

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. एनआरसी का मकसद देश में अवैध रूप से रह रहे बाहरी नागरिकों की पहचान करना है, वहीं जनसंख्या रजिस्टर का उद्देश्य किसी स्थान पर छह महीने या उससे ज्यादा वक्त से रह रहे निवासियों की जानकारी एकत्र करना है. अगर कोई बाहरी नागरिक भी देश के किसी हिस्से में छह महीने से ज्यादा वक्त से रह रहा हो तो उसका नाम भी इसमें दर्ज होगा.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Oslo Accords

संदर्भ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि वे अगले सप्ताह पश्चिमी एशिया के लिए एक शांति योजना घोषित करेंगे. इस पर फिलिस्तीनियों ने धमकी दी है कि यदि ट्रम्प ऐसा करते हैं तो वे ओस्लो समझौते (Oslo Accords) से बाहर निकल जाएँगे.

फिलिस्तीनियों की आशंकाएँ

  • फिलिस्तीनियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि हो सकता है प्रस्तावित कार्ययोजना में इजराइल ने फिलिस्तीन के जिस भूभाग को तत्काल के लिए कब्जे में रखा है, उस पर उनका स्थायी कब्ज़ा हो जाएगा.
  • फिलिस्तीनी सोचते हैं कि कल होकर उनका कोई देश बनेगा तो उसकी राजधानी पूर्वी येरुसलम होगी जो ट्रम्प की कार्ययोजना के कारण उनके हाथ से निकल जायेगी.
  • फिलिस्तीनियों का विश्वास है कि ट्रम्प की योजना दो देशों के समाधान की अवधारणा (the two-state solution) को समाप्त कर देगी जबकि यही अवधारणा पश्चिम एशिया की अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की दशकों से आधारशिला रही है.

पृष्ठभूमि

1993 के ओस्लो समझौते के अन्दर इजराइल और फिलिस्तीनी दोनों इस बात सहमत हुए थे कि फिलिस्तीनी बस्तियों का दर्जा वार्तालाप से निर्धारित किया जाएगा. परन्तु कई वर्षों से समझौते की प्रक्रिया लगभग मृतप्राय ही है.

1967 में इजराइल पूर्वी येरुसलम में घुस गया और कालांतर में उस पर आधिपत्य जमा लिया. इजराइल का कहना है कि येरुसलम पर कोई भी वार्ता नहीं हो सकती अर्थात् वह इसे कभी नहीं छोड़ेगा. जबकि ऐसा ऊपर कहा जा चुका है कि फिलिस्तीनी पूर्वी येरुसलम को अपने भावी देश की राजधानी बनाना चाहते हैं. विश्व के अधिकांश देश इसे एक कब्ज़ा किया गया भूभाग मानते हैं.

ओस्लो समझौता क्या है?

ओस्लो समझौता का औपचारिक नाम “सिद्धांतों की घोषणा” (Declaration of Principles – DOP) है. इस समझौते में मध्य-पूर्व शान्ति प्रक्रिया की एक समय-तालिका बनी थी. इसके अनुसार, पश्चिमी तट पर स्थित गाजा और जेरिको में फिलिस्तीन की एक अंतरिम सरकार होगी.

ओस्लो II समझौता

आगे चलकर ओस्लो समझौते का विस्तार करते हुए ओस्लो II समझौता हुआ जिसका औपचारिक नाम “पश्चिम तट और गाजा पर इसरायली-फिलिस्तीनी अंतरिम समझौता” (Israeli-Palestinian Interim Agreement on the West Bank and Gaza) पड़ा.

इसमें यह प्रावधान किया गया कि पश्चिम तट के छह नगरों और लगभग 450 शहरों से इसरायली सेनाएँ पूरी तरह से वापस हो जाएँगी. इस भूभाग में फिलिस्तीनियों को पाँच वर्ष की सीमित स्वायत्तता दी जायेगी. ओस्लो II में फिलिस्तीनी विधान परिषद् के लिए चुनाव हेतु एक समय-सारिणी भी दी गई. फिलिस्तीन के पुलिस बल की स्थापना होगी. इस समझौते में येरुसलम के विषय में कोई निर्णय नहीं लिया गया.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Biorock or mineral accretion technology

संदर्भ

गुजरात के वन विभाग की सहायता से भारतीय प्राणीविज्ञान सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI) पहली बार एक प्रक्रिया करने जा रहा है जिसमें कच्छ की खाड़ी में जैव पाषाण (biorock) अथवा खनिज एक्रीशन (mineral accretion) तकनीक का प्रयोग करके प्रवाल भित्तियों को फिर से पुरानी स्थिति में लाया जाएगा.

जैव पाषाण (Biorock) क्या है?

यह एक पदार्थ है जो इस्पात के ढाँचों पर समुद्र जल में घुले हुए खनिजों के विद्युत संचयन से बनता है. यह समुद्र की सतह पर उतार दिया जाता है और फिर इसको किसी विद्युत सोत से जोड़ दिया जाता है. अभी इसके लिए सौर पैनलों का प्रयोग चल रहा है.

बायो रॉक बनते कैसे हैं?

इसके लिए जो तकनीक अपनाई जाती है उसमें जल में इलेक्ट्रानों के माध्यम से बिजली का प्रवाह छोटी मात्रा में किया जाता है. जब एक धनात्मक आवेश वाला एनोड  और एक ऋणात्मक आवेश केथोड समुद्र की सतह पर रखा जाता है तो इन दोनों के बीच होने वाले विद्युत प्रवाह के कारण कैल्शियम आयन कार्बोनेट आयनों से जुड़ जाते हैं और केथोड से चिपक जाते हैं. इसके फलस्वरूप कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) बनता है. प्रवाल के लार्वे CaCO3 से सट जाते हैं और तेजी से से बढ़ने लगते हैं.

टूटे हुए प्रवाल के टुकड़ों को जैव पाषाण ढाँचे से बाँध दिया जाता है. इससे वे प्राकृतिक वृद्धि दर की तुलना में कम-से-कम चार से छह गुनी तेजी से बढ़ने लगते हैं क्योंकि उन्हें अपने कैल्शियम कार्बोनेट कंकालों को बनाने में ऊर्जा नहीं लगानी पड़ती है.


Prelims Vishesh

Nagoba Jatara :-

  • तेलंगाना में महीने भर चलने वाला नागोबा जात्रा उत्सव समाप्त होने को है.
  • यह तेलंगाना का एक जनजातीय उत्सव है जिसे केसलापुर जात्रा भी कहता हैं.
  • यह राज गोंड और प्रधान आदिवासियों की मेसराम उपजाति की बोइगट्टा शाखा का एक महान धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन है जिसमें नागोबा नामक सर्प देवता की महापूजा होती है और इसमें गोंड जनजाति के नर्तक गुसाड़ी नृत्य का प्रदर्शन करते हैं.

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