Sansar डेली करंट अफेयर्स, 30 April 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 30 April 2019


GS Paper  2 Source: The Hindu

Topic : Supreme Court seeks EC response on plea against voter prosecution

संदर्भ

उच्चतम न्यायालय ने एक याचिका पर आयोग से जवाब मांगा जिसमें ईवीएम और वीवीपैट मशीन में गड़बड़ी को लेकर शिकायत गलत होने पर मतदाता के विरुद्ध मामला दर्ज करने का प्रावधान (नियम 49MA) है. चुनाव आयोग का कहना है कि अगर इसका प्रावधान नहीं हो तो लोग मनगढंत शिकायतें कर सकते हैं.

नियम 49MA क्या है?

  • नियम के तहत, अगर कोई मतदाता अपना वोट दर्ज करने के बाद यह आरोप लगाता है कि VVPAT द्वारा बनाई गई पेपर स्लिप में उस उम्मीदवार के नाम या प्रतीक को दिखाया है जिसको उसने वोट दिया ही नहीं था तो पीठासीन अधिकारी निर्वाचक को आरोप गलत साबित होने के परिणामों के विषय में चेतावनी देगा और उमीदवार से इस सम्बन्ध में एक लिखित घोषणा-पत्र प्राप्त करेगा.
  • नियमों की रूपरेखा है कि अगर जांच के बाद, ईवीएम की खराबी के आरोप को गलत या गलत पाया जाता है, तो शिकायतकर्ता पर “गलत जानकारी प्रस्तुत करने” के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 177 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है.
  • ऐसे मामले में छह महीने की जेल या 1,000 रुपये का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.

नियम 49MA (Rule 49MA) को रद्द करने के लिए याचिका में क्या तर्क दिया गया?

  • याचिका में कहा गया है कि चुनाव कराने सम्बन्धी नियम 49MA असंवैधानिक है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और VVPAT में गड़बड़ी की शिकायत को अपराध बनाता है.
  • याचिका में कहा गया कि ईवीएम और वीवीपैट के सही तरीके से काम नहीं करने के आरोप साबित करने की जिम्मेदारी मतदाता पर डालने सम्बन्धी प्रावधान संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार का अतिक्रमण है.
  • याचिका के अनुसार EVM और VVPAT के ठीक से काम नहीं करने सम्बन्धी किसी भी शिकायत के मामले में मतदाता को दो मत देने होते हैं – पहला गोपनीय तरीके से और दूसरा प्रत्याशियों या चुनाव एजेंट की उपस्थिति में. इस तरह से बाद में दूसरे लोगों की उपस्थिति में किया गया मतदान इन उपकरणों के ठीक से काम नहीं करने या गोपनीय मतदान से इतर नतीजा सबूत बन जाता है.
  • याचिका में तर्क दिया गया कि EVM और VVPAT के ठीक से काम नहीं करने के मामले में मतदाता को जवाबदेह बनाने की वजह से वे किसी भी प्रकार की शिकायत करने से बचेंगे जबकि यह चुनाव प्रक्रिया के लिए जरुरी है. इस प्रावधान से संविधान के अनुच्छेद 20 (3) का भी उल्लंघन होता है जिसमें कहा गया है कि किसी अपराध के लिए अभियुक्त किसी व्यक्ति को स्वयं अपने विरुद्ध साक्षी होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा.

GS Paper  2 Source: The Hindu

Topic : Drug-resistant diseases could kill 10 million a year by 2050

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र के एड हॉक इंटर एजेंसी कोऑर्डिनेटिंग ग्रुप (IACG) ने चेतावनी देते हुए कहा कि 2050 तक हर वर्ष ड्रग प्रतिरोधी रोग 10 मिलियन लोगों की मौत का कारण बन सकते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2030 तक, रोगाणुरोधी प्रतिरोध 24 मिलियन लोगों को अत्यधिक गरीबी में रहने के लिए मजबूर कर सकता है. इस रिपोर्ट का नाम ‘नो टाइम टू वेट: सिक्योरिंग द फ्यूचर फ्रॉम ड्रग-रेजिस्टेंट इन्फेक्शनस’ है.

विदित हो कि एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध एक वैश्विक समुदाय के रूप में हमारे सामने आने वाले सबसे बड़े खतरों में से एक है.

रिपोर्ट में कही गयीं मुख्य बातें

  • विदित हो कि वर्तमान में, दवा प्रतिरोधी बीमारियों के कारण हर वर्ष कम से कम 700,000 लोग मारे जाते हैं.
  • प्रतिवेदन में यह भी कहा गया कि 2030 तक, रोगाणुरोधी प्रतिरोध 24 मिलियन लोगों को अत्यधिक गरीबी में जीने पर मजबूर कर सकता है.
  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध भारत में पहले से ही बढ़ रहा मुद्दा है और अनुमानित रूप से 7,00,000 की मृत्यु प्रतिवर्ष कम और मध्यम आय वाले देशों में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी संक्रमणों से होती है, जो कि मल्टीड्रग-रेजिस्टेंस टीबी (तपेदिक) से होने वाली 2,30,000 मौतों को मिलाकर है.
  • सामान्य बीमारियाँ, अर्थात्, श्वसन पथ के संक्रमण, यौन संचारित संक्रमण और मूत्र पथ के संक्रमण, लाइलाज होते जा रहे हैं और जीवन बचाने वाली चिकित्सा प्रक्रियाएं बहुत जोखिम भरी होती जा रही हैं.
  • रिपोर्ट इस तथ्य पर केंद्रित है कि सभी आय कोष्ठक में राष्ट्रों से निवेश के बिना, हमारी भविष्य की पीढ़ियों को अनियंत्रित रोगाणुरोधी प्रतिरोध के हानिकारक प्रभावों का सामना करना पड़ेगा.

क्या किया जाना चाहिए?

  • विदित हो कि इस समस्या की गंभीरता की पहचान करते हुए वर्ष 2012 में ‘चेन्नई डिक्लेरेशन’ में सुपरबग के बढ़ते खतरे से निपटने के लिये व्यापक योजना बनाई गई थी.
  • इस योजना में 30 ऐसी प्रयोगशालाओं की स्थापना की बात की गई थी जो एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न समस्याओं के समाधान की दिशा में काम करेंगे, लेकिन अभी तक केवल ऐसी 10 प्रयोगशालाओं का ही निर्माण हो पाया है.
  • सरकार को सुपरबग से बचाव का उपाय खोजना होगा और इसके लिये अनुसंधान को प्रोत्साहन देना होगा.
  • एंटीबायोटिक के अधिक प्रयोग को रोकने के लिये सरकार ने बिक्री योग्य दवाओं की नई सूची जारी कर उसके आधार पर ही दवा विक्रेताओं को दवा बेचने का निर्देश दिया है.
  • लेकिन कहीं भी आसानी से एंटीबायोटिक का मिल जाना चिंताजनक है. अतः सरकार को अपने निगरानी तंत्र को और चौकस बनाना होगा.
  • हालाँकि इसमें एक महत्त्वपूर्ण बिंदु संतुलन बनाए रखने का भी है. पूरे विश्व में अभी भी एंटीबायोटिक ड्रग्स समेत दवाओं की कमी से मरने वालों की संख्या अभी भी एंटीबायोटिक प्रतिरोध से मरने वालों से ज़्यादा है. यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ हमें सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना होगा.
  • भारत के ‘सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन’ (Central Drugs Standard Control Organization- CDSCO) ने अनुसूची एच-1 लागू किया है, जिसके अनुसार बिना किसी चिकित्सक के परामर्श 24 मूल एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
  • विश्व भर में कोई भी फार्मा कंपनी अगले 20 वर्षों तक कोई भी नई एंटीबायोटिक दवा तैयार नहीं करने वाली है. एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल को रोकने के लिये यह अभियान शुरू किया गया है.

एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध क्या है?

  • ज्ञातव्य है कि आज से लगभग 88 वर्ष पहले कई बीमारियों से लड़ने के लिये चिकित्सा जगत में कोई कारगर दवा नहीं थी.
  • परन्तु, एंटीबायोटिक के अविष्कार ने चिकित्सा जगत को एक मैजिक बुलेट थमा दी.
  • 20वीं सदी के शुरुआत से पहले सामान्य और छोटी बीमारियों से भी छुटकारा पाने में महीनों लगते थे, लेकिन एंटीमाइक्रोबियल ड्रग्स (एंटीबायोटिक, एंटीफंगल, और एंटीवायरल दवाएँ) के इस्तेमाल से बीमारियों का त्वरित और सुविधाजनक इलाज़ होने लगा.
  • पर विज्ञान यहाँ भी वरदान के साथ-साथ अभिशाप होने के अपने गुण को चरितार्थ कर गया, इन ड्रग्स का धड़ल्ले से प्रयोग होने लगा.
  • एंटीबायोटिक समेत एंटीमाइक्रोबियल ड्रग्स का अत्याधिक सेवन स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है. एंटीमाइक्रोबियल ड्रग्स के अधिक और अनियमित प्रयोग से इसका प्रभाव शनैः शनैः कम होता जाता है.
  • विदित हो कि प्रत्यके व्यक्ति एक सीमित स्तर तक ही एंटीबायोटिक ले सकता है, इससे अधिक एंटीबायोटिक लेने से मानव शरीर एंटीबायोटिक के प्रति अक्रियाशील हो जाता है.
  • प्रायः देखा जाता है कि वायरस के कारण होने वाली बीमारियों में भी लोग जानकारी के अभाव के चलते एंटीबायोटिक दवा लेने लगते हैं.
  • किसी नए प्रकार के आक्रमण से बचाव के लिये एक अलग प्रकार का प्रतिरोध विकसित करना प्रत्येक जीव का स्वाभाविक गुण है और सूक्ष्मजीवियों के साथ भी यही हुआ है.
  • गौरतलब है कि सूक्ष्मजीवियों को प्रतिरोध विकसित करने का अवसर उपलब्ध कराया है, एंटीमाइक्रोबियल ड्रग्स के अत्यधिक उपयोग ने.

एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के दुष्परिणाम

  • सामान्य बीमारियों का भी इलाज़ कठिन हो जाना:
    ⇒ दुनिया भर में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध तेज़ी से बढ़ रहा है. इसके कारण आम संक्रामक बीमारियों का इलाज करना भी असंभव हो जाता है.
    ⇒इसका परिणाम यह होता है कि लम्बे समय तक बीमारी बनी रहती है और यदि यह प्रतिरोध बहुत अधिक बढ़ गया तो बीमार व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है.
  • चिकित्सा प्रक्रियाओं का जटिल हो जाना:
    ⇒चिकित्सकीय प्रक्रियाएँ जैसे अंग प्रत्यारोपण, कैंसर के इलाज़ के लिये कीमोथेरेपी और अन्य प्रमुख शल्य चिकित्सा (surgery) में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल होता है.
    ⇒ एंटीबायोटिक दवाएँ सर्जरी के दौरान होने वाले चिर-फाड़ के बाद संक्रमण बढ़ने से रोकने का कार्य करती हैं. यदि प्रतिरोध बढ़ता गया तो इस तरह की चिकित्सकीय प्रक्रियाएँ जटिल हो जाएंगी.
    ⇒ अंततः एक ऐसा भी समय आ सकता है जब सर्जरी करना ही असंभव हो जाएगा या फिर सर्जरी के कारण ही लोग मर जाया करेंगे.
  • स्वास्थ्य देखभाल की लागत में वृद्धि:
    ⇒एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के कारण रोगियों को अस्पतालों में लंबे समय तक भर्ती रहना पड़ता है. साथ ही उन्हें गहन देखभाल की भी ज़रूरत होती है.
    ⇒ इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव तो बढ़ता ही है साथ में स्वास्थ्य देखभाल की लागत में भी व्यापक वृद्धि होती है.
    ⇒ जनसंख्या विस्फोट के कारण वर्तमान में सभी व्यक्तियों को उचित स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराना चुनौती बनी हुई है.
    ⇒ ऐसे में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध स्वास्थ्य सेवाओं को बद से बदतर की ओर ले जाएगा.
  • सतत् विकास लक्ष्यों को हासिल करना कठिन:
    ⇒ट्रांसफॉर्मिंग आवर वर्ल्ड: द 2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ का संकल्प, जिसे सतत् विकास लक्ष्यों के नाम से भी जाना जाता है, के तहत कुल 17 लक्ष्यों  का निर्धारण किया गया है.
    ⇒ सतत् विकास लक्ष्यों के लक्ष्य संख्या 3 में सभी उम्र के लोगों में स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देने की बात की गई है.
    ⇒ एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध इस लक्ष्य की प्राप्ति में एक बड़ा अवरोध बनने जा रहा है और इसका प्रभाव सतत् विकास के सभी लक्ष्यों पर देखने को मिलेगा.

कुछ चिंताजनक आँकड़े

  • एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध से होने वाली मौतों के संबंध में समुचित आँकड़ों का अभाव है, फिर भी एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2015 तक एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण 58,000 शिशुओं की मौत हो गई है.
  • विदित हो कि पूरी दुनिया में भारत सबसे ज़्यादा एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करता है. एक अध्ययन के मुताबिक ‘एंटीबायोटिक प्रतिरोध’ 2050 तक दुनिया की सबसे बड़ी महामारी बन जाएगी.
  • विदित हो कि अभी हर साल कैंसर से पूरी दुनिया में 80 लाख लोगों की मौत हो जाती थी. लेकिन, 2050 तक ‘एंटीबायोटिक प्रतिरोध’ की वज़ह से हर साल एक करोड़ लोगों की मौत होगी, यानी ये कैंसर से भी बड़ा खतरा बन सकता है.

GS Paper  3 Source: PIB

Topic : Technical Textiles

संदर्भ

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा सरंक्षण मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में ‘जल संसाधन कार्यों में तकनीकी वस्त्र का उपयोग’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया.

तकनीकी वस्त्र क्या है?

  • तकनीकी कपड़ा वह कपड़ा होता है जिसका निर्माण मुख्य रूप से तकनीकी कामों के लिए होता है न कि साज-सज्जा के लिए.
  • वाहनों (गाड़ियों) में उपयोग में आने वाले वस्त्र, चिकित्सा में उपयोग किये जाने वाले वस्त्र, भू-वसन (geotextiles, तटबन्धों की मजबूती के लिये प्रयुक्त), कृषिवसन (agrotextiles, फसलों की सुरक्षा के लिये प्रयुक्त), सुरक्षा वस्त्र (ऊष्मा एवं विकिरण से सुरक्षा, अग्नि-सुरक्षा) आदि तकनीकी वस्त्र के कुछ उदाहरण हैं.

तकनीकी वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए भारत द्वारा उठाये गये कदम

  • तकनीकी वस्‍त्र उद्योग के विकास तथा उच्‍च गुणवत्‍तापूर्ण विशेष फाइबर के भारत में निर्माण के लिए शोध व अनुसंधान के संबंध में सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन किया गया है. विशेष फाइबर का आयात एक बड़ी चुनौती है. भारत इसे किफायती बनाने के लिए प्रयासरत है.
  • तकनीकी वस्‍त्रों में 530 प्रोटोटाइम नमूनों को पिछले चार वर्षों में पहले ही मंत्रालय में विकसित किए जा चुके हैं; 140 करोड़ रुपये की लागत से 8 उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र स्‍थापित किए गए हैं; पिछले तीन से चार वर्षों में तकनीकी वस्‍त्रों में 22,000 भारतीयों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
  • जमीनी स्‍तर पर करीब 650 सम्‍मेलन और सेमिनार आयोजित किए गए हैं; 11 इन्‍क्‍यूबेशन सेंटर स्‍थापित किए गए हैं; सड़कों, जलाशयों के लिए 40 जियो टैक्‍सटाइल परियोजनाओं और स्‍लोप स्‍टेबीलाइजेशन को हाथ में लिया गया है.
  • ऐसे कदम उठाए गए हैं, जिससे सुनिश्चित हो कि किसान 54 एग्रोटैक प्रदर्शन केन्‍द्रों में निरूपण के जरिए एग्रोटैक अपनाएं; और रोजमर्रा के कामकाज में एग्रोटैक के इस्‍तेमाल के बारे में किट्स वितरित किए गए हैं.

आगे की राह

तकनीकी वस्त्र को पूरी दुनिया में कई देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें विकसित देशों के अलावा कई विकासशील देश भी शामिल हैं. भारत में अभी इसके तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरण संबंधी लाभ उठाए जाने की स्थिति नहीं बनी है. भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बाढ़ और पर्यावरण क्षरण की समस्या मौजूद हैं. कुछ इलाकों में बाढ़ प्रबंधन और नियंत्रण के लिए तकनीकी वस्त्रों से बने ट्यूब, कंटेनर और बैग इत्‍यादि का उपयोग किया जा सकता है.


GS Paper  3 Source: The Hindu

Topic : National Clean Air Programme (NCAP)

संदर्भ

MoEFCC ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) को लागू करने के लिए एक समिति का गठन किया है.

  • इस समिति की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सचिव करेंगे और इसके सदस्यों में संयुक्त सचिव (थर्मल), विद्युत मंत्रालय; महानिदेशक, ऊर्जा संसाधन संस्थान (TERI) आदि भी होंगे.
  • इस कार्यक्रम में 23 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 102 नॉन-अटेनमेंट शहरों  को शामिल किया गया है. इन शहरों का चुनाव केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2011 से 2015 के बीच की वायु गुणवत्ता के आधार पर किया है. वे शहर नॉन-अटेनमेंट शहर हैं जिनमे राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक वायु गुणवत्ता निरंतर ख़राब रहती है. नॉन-अटेनमेंट शहरों की सूची में दिल्ली, वाराणसी, भोपाल, कलकत्ता, नॉएडा, मुजफ्फरपुर और मुंबई ऐसे बड़े शहर शामिल हैं.

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के मुख्य तत्त्व

  • 2017 से लेकर 2024 तक पूरे देश में 5 और PM10 संघनन (concentration) में 20-30% कमी के लक्ष्य को प्राप्त करना.
  • इस कार्यक्रम को पूरे देश में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board – CPCB) वायु (प्रदूषण प्रतिषेध एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1986 के अनुभाग 162 (b) के अनुसार लागू करेगा.
  • इस कार्यक्रम के लिए पहले 2 वर्ष में 300 करोड़ रू. का आरम्भिक बजट दिया गया है.
  • इस कार्यक्रम में 23 राज्यों एवं संघीय क्षेत्रों के 102 शहरों को चुना गया है. इन शहरों का चुनाव केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 2011 और 2015 की अवधि में इन शहरों की वायु गुणवत्ता से सम्बंधित आँकड़ों के आधार पर किया गया है. इन शहरों में वायु गुणवत्ता के राष्ट्रीय मानकों के अनुसार वायु की गुणवत्ता लगातार अच्छी नहीं रही है. इनमें से कुछ शहर ये हैं – दिल्ली, वाराणसी, भोपाल, कोलकाता, नोएडा, मुजफ्फरपुर और मुंबई.
  • इस कार्यक्रम में केंद्र की यह भी योजना है कि वह पूरे भारत में वायु गुणवत्ता की निगरानी के नेटवर्क को सुदृढ़ करे. वर्तमान में हमारे पास 101 रियल-टाइम वायु गुणवत्ता मॉनिटर हैं. परन्तु निगरानी की व्यस्था को सुदृढ़ करने के लिए कम से कम 4,000 मॉनिटरों की आवश्यकता होगी.
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में एक त्रि-स्तरीय प्रणाली भी प्रस्तावित है. इस प्रणाली के अंतर्गत रियल-टाइम भौतिक आँकड़ों के संकलन, उनके भंडारण और सभी 102 शहरों में एक्शन ट्रिगर प्रणाली की स्थापना अपेक्षित होगी. इसके अतिरिक्त व्यापक रूप से पौधे लगाये जाएँगे, स्वच्छ तकनीकों पर शोध होगा, बड़े-बड़े राजमार्गों की लैंडस्केपिंग की जायेगी और कठोर औद्योगिक मानदंड लागू किये जाएँगे.
  • इस कार्यक्रम के तहत राज्य-स्तर पर भी कई कदम उठाये जाएँगे, जैसे – दुपहिये वाहन का विद्युतीकरण, बैटरी चार्ज करने की व्यवस्था को सुदृढ़ करना, BS-VI मापदंडों को कठोरता से लागू करना, सार्वजनिक यातायात तन्त्र को मजबूत करना तथा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों का तीसरे पक्ष से अंकेक्षण कराना आदि.
  • इस राष्ट्रीय योजना में पर्यावरण मंत्री की अध्यक्षता में एक सर्वोच्च समिति, अवर सचिव (पर्यावरण) की अध्यक्षता में एक संचालन समिति और संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति की स्थापना का भी प्रस्ताव है. इसी प्रकार राज्यों के स्तर पर भी परियोजना निगरानी के लिए समितियाँ होंगी जिनमें वैज्ञानिक और प्रशिक्षित कर्मचारी होंगे.

कार्यक्रम के लाभ

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम से यह लाभ हुआ है कि वायु प्रदूषण को घटाने के लिए लक्ष्य निर्धारित हो गये हैं जिसके लिए बहुत दिनों से प्रतीक्षा थी. इन लक्ष्यों से यह लाभ होगा कि उन क्षेत्रों का पता चल जाएगा जहाँ प्रदूषण की समस्या गंभीर है और यह भी पता चलेगा कि वहाँ प्रदूषण घटाने का लक्ष्य पाने के लिए कौन-कौन से कारगर कदम उठाये जाने चाहिएँ.


GS Paper  3 Source: The Hindu

Topic : Army invokes emergency powers

संदर्भ

रक्षा मंत्रालय ‘आपातकालीन खरीद’ के हिस्से के रूप में इज़राइल से स्पाइक-एलआर एंटी-टैंक मिसाइल और रूस से इग्ला-एस वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (वीएसएचओआरएडी) की खरीद करने जा रही है.

रक्षा उपकरण करने के लिए आपातकालीन अधिकार

  • उपकरण खरीदने का अधिकार थल सेना, वायु सेना और नौ सेना तीनों को दिए गये हैं.
  • सेनाओं को हथियार खरीदने की प्रक्रिया 3 महीने में पूरी करने की छूट दी गई है.
  • पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार ने तीनों सेनाओं को पाकिस्तान से लगी सीमा को सुरक्षित बनाने के जरूरी हथियार व रक्षा उपकरण खरीदने के लिए आपातकालीन अधिकार दिए थे.
  • सरकारी सूत्रों मंगलवार को बताया कि तीनों सेनाओं को दी गई शक्तियों के तहत वे 300 करोड़ रुपये प्रति मामले की लागत पर तीन महीने के भीतर अपनी पसंद के रक्षा उपकरण खरीद सकते हैं.
  • आपातकालीन अधिकारों के तहत उपकरण खरीद के लिए सेनाओं को रक्षा वित्त विभाग के वित्तीय सलाहकार की सहमति लेने की भी आवश्यकता नहीं है.
  • सरकार ने रक्षा खरीद के कुछ नियमों को भी आसान बनाया है. तीनों सेनाओं को हथियार और अन्य उपकरण अब एक ही वेंडर से खरीदने की इजाजत दे दी गई है.

आवश्यकता

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सीमा पर सुरक्षाबलों को युद्ध लड़ना है, इसलिए उन्हें निर्णय लेना होगा कि उन्हें किस हथियार या उपकरण की आवश्यकता है.


Prelims Vishesh

Ban on burqa :

  • ईस्टर हमले के बाद श्रीलंका में बुर्का समेत चेहरा ढंकने वाली हर चीज पर प्रतिबंध घोषित कर दिया गया है.
  • यह प्रतिबंध राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना की ओर से आपात शक्तियों का प्रयोग करते हुए घोषित नए नियमों के तहत लगाया गया है.
  • विदित हो कि हाल ही में श्रीलंका के तीन चर्च एवं तीन आलीशान होटलों में सिलसिलेवार ढंग से किए गए धमाकों में 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 500 से अधिक घायल हो गए थे.

Bharati script :

  • आईआईटी मद्रास के शोधकर्त्ताओं की एक टीम ने यूरोपीय भाषाओं से प्रेरणा लेते हुए जिनमें समान (रोमन अक्षर आधारित) लिपि हैं, नौ भारतीय भाषाओं के लिए एक आम लिपि का विकास किया है और इसे ‘भारती’ नाम दिया गया है.
  • इसका विकास विगत एक दशक में किया गया है. इसके साथ ही शोधकर्त्ताओं ने बहु-भाषी ऑप्टिकल अक्षर पहचान (ओसीआर) का उपयोग करते हुए भारतीय लिपि में दस्तावेजों को पढ़ने के लिए एक तरीका भी विकसित किया है. भारती नामक लिपि में जिन लिपियों को एकीकृत किया गया है, वे हैं :- देवनागरी, बंगाली, गुरुमुखी, गुजराती, ओडि़या, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और तमिल.
  • अंग्रेजी एवं उर्दू को इसमें शामिल नहीं किया गया है.

Indonesia to shift capital :

  • इंडोनेशियाई सरकार ने अपनी राजधानी को जर्काता से हटाकर नई जगह बसाने का फैसला लिया है.
  • जर्काता में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक के चलते सरकार को यह फैसला लेना पड़ा.
  • जर्काता साल दर साल 1 से 15 सेंटीमीटर के औसत से डूब रहा है. तकरीबन आधा शहर ही समुद्र स्तर से नीचे हो गया है. अगर इस समस्या का समाधान नहीं खोजा गया तो 2050 तक शहर के कई हिस्से डूब चुके होंगे.

Oldest human footprint found in Chile :

  • वैज्ञानिकों के एक दल ने चिली में 15 हजार साल से भी ज्यादा पुराने मानव पदचिह्न की खोज की है.
  • इसे दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में मिला सबसे पुराना पदचिह्न बताया जा रहा है.
  • इस खोज के बाद दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में मानवों के पहुंचने के घटनाक्रम से जुड़े पुराने अनुमानों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है.

Green Car Loan launched by SBI :

  • देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) ने ‘ग्रीन कार लोन’ की शुरुआत की है.
  • बैंक ने इसकी दरें सामान्य ऑटो लोन के मुकाबले 0.20 फीसदी कम तय की है.
  • यह इलेक्ट्रिक कार की खरीदारी के लिए लॉन्च हुआ भारत का पहला ग्रीन कार लोन है. इस पहल का मकसद इलेक्ट्रिक वाहन की खरीदारी को बढ़ावा देना है.

Akademik Lomonosov :-

  • यह रूस में स्थित विश्व का पहला पानी पर तैरता परमाणु संयत्र है.
  • एकेडेमिक लोमोनोसोव का उद्देश्य पूर्वी और उत्तरी साइबेरिया के दूरस्थ के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति करना और ऑयल रिफाइनिंग करना है.
  • इसका निर्माण सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोस्तम ने सेंट्स पीटर्सबर्ग में किया है.

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