Sansar डेली करंट अफेयर्स, 29 October 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 29 October 2019


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Institutes of Eminence Scheme

संदर्भ

पार्षदों के कारण दिल्ली विश्वविद्यालय को उत्कृष्ट संस्थान की पदवी (Institute of Eminence status) देने का निर्णय टाल दिया गया है.

पार्षदों की चिंता क्या है?

  • उनका विचार है कि उत्कृष्ट संस्थान योजना विश्वविद्यालय को निजीकरण की ओर ले जायेगी.
  • उत्कृष्ट संस्थान बन जाने के बाद विश्वविद्यालय पर बहुत बड़ा आर्थिक बोझ आ जायेगा क्योंकि तब विश्व-स्तरीय अवसंरचना की आवश्यकता होगी तथा भारी-भरकम वेतन के साथ विदेशी शिक्षक रखने होंगे. संभव है कि शिक्षा शुल्क में भी बढ़ोतरी हो.

इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ एमिनेन्स योजना क्या है?

  • यह योजना भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की है. इसका उद्देश्य भारतीय संस्थानों को वैश्विक मान्यता दिलवाना है.
  • चुने गये संस्थानों को सम्पूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वयत्तता मिलेगी.
  • सरकार इन संस्थानों में से दस को चलाएगी और उन्हें विशेष धनराशि मुहैया कराएगी.
  • उत्कृष्ट संस्थान के रूप में संस्थानों को चुनने के लिए एक विशेष विशेषज्ञ समिति गठित की गई है.
  • उत्कृष्ट संस्थान के रूप में चयन के लिए वही शैक्षणिक संस्थान योग्य माने जाएँगे जिन्हें वैश्विक-स्तर पर शीर्षस्थ 500 संस्थानों में स्थान मिला हुआ है.
  • इसके लिए वह संस्थान भी आवेदन कर सकता है जिसको राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढाँचे (NIRF) के अंदर शीर्षस्थ 50 में स्थान मिला है.
  • ‘उत्कृष्ट संस्थान’ के रूप में चुने गए प्रत्येक ‘सार्वजनिक संस्थान’ को पाँच साल की अवधि में 1000 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता दी जायेगी. निजी संस्थानों को यह वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी. निजी संस्थानों को यह दर्जा तभी मिलेगा जब वह आगामी 15 वर्ष के लिए अपनी ऐसी योजना प्रस्तुत करे जो भरोसा देने वाली हो.
  • इन संस्थानों को विदेशी छात्रों को प्रवेश देने के लिए, विदेशी अध्यापकों को भर्ती करने के सन्दर्भ में अधिक स्वायत्तता प्रदान की जाएगी.
  • उन्हें UGC की अनुमति के बिना शीर्ष 500 विश्व-संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग करने की भी अनुमति प्रदान की जायेगी.

उत्कृष्ट संस्थानों को प्राप्त सुविधाएँ

  1. ये संस्थान अपने कार्यबल के 25% तक शिक्षकों को विदेशी शिक्षकों को नियुक्त कर सकते हैं.
  2. ये देश के अन्दर अन्य शैक्षणिक संस्थानों से सहयोग कर सकेंगे.
  3. विदेशी छात्रों को अपने संस्थान में मेधा के आधार पर ले सकेंगे बशर्ते उनकी संख्या देशी छात्रों के 30% तक हो.
  4. बिना किसी सीमा के ये संस्थान विदेशी छात्रों से शुल्क ले सकेंगे.
  5. उत्कृष्ट संस्थान बन जाने के बाद ये संस्थान UGC के पाठ्यक्रम से हट कर अपना पाठ्यक्रम निर्धारित कर सकते हैं.
  6. ये संस्थान अपने कार्यक्रमों के ऑनलाइन पाठ्यक्रम चला सकते हैं, परन्तु इसके लिए इसकी 20% की अधिकतम सीमा है.
  7. ऐसे संस्थानों में UGC के निरीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी.

विश्व-स्तरीय संस्थानों की आवश्यकता क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग के अनुसार, भारत में विश्व-स्तरीय विश्वविद्यालयों का अभाव है और यहाँ के शिक्षकों को विदेश की तुलना में कम पैसा दिया जाता है. चीन की तुलना में भारत में विश्वविद्यालय के स्तर पर पढ़ने वाले छात्रों की संख्या आधी है. इस मामले में वह अधिकांश लैटिन अमेरिकी और अन्य मध्यम आय वाले देशों से कहीं पीछे है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : Indian Ocean Rim Association (IORA)

संदर्भ

IORA मंत्री परिषद् की 19वीं बैठक अबू धाबी में नवम्बर 7 को होने जा रही है. इसकी थीम होगी : हिन्द महासागर में साझा नियति एवं समृद्धि के मार्ग को बढ़ावा/ “Promoting a Shared Destiny and Path to Prosperity in the Indian Ocean”.

इस बैठक में संयुक्त अरब अमीरात और बांग्लादेश क्रमशः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होंगे. यह व्यवस्था 2021 तक चलेगी.

IORA क्या है?

  • IORA का full form है – Indian Ocean Rim Association अर्थात् हिन्द महासागर के तटों पर स्थित देशों का संगठन.
  • यह हिन्द महासागर के तटीय भागों में अवस्थित देशों का एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है.
  • यह एक क्षेत्रीय मंच है जिसमें सरकारों, व्यवसायियों और विद्वानों के सहयोग से सम्बंधित देशों के मध्य सहयोग एवं विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाता है.
  • इस संगठन में 21 देश तथा 7 संवादी भागीदार (dialogue partners) हैं.
  • IORA औषधीय पौधों समेत सहयोग के छह क्षेत्रों में काम करता है.
  • IORA का सचिवालय मॉरिशस के एबेन शहर में है.

IORA के छह प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्र

  1. सामुद्रिक सुरक्षा
  2. व्यापार और निवेश की सुविधा
  3. मत्स्यपालन का प्रबंधन
  4. आपदा जोखिम का न्यूनीकरण
  5. शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक सहयोग
  6. पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा

भारत के लिए भारत-प्रशांत क्षेत्र का महत्त्व

भारत IORA पर अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहता क्योंकि उसकी भारत-प्रशांत नीति की जड़ हिन्द महासागर में ही है. यह नीति भारतीय अर्थव्यवस्था को ब्लू इकॉनमी और सुरक्षा दृष्टिकोण दोनों को एक-दूसरे से जोड़ती है. अपनी भारत प्रशांत कूटनीति के अंतर्गत भारत ने बार-बार आसियान को अपनी नीति के केंद्र में रखा है. उल्लेखनीय है कि आसियान चीन के प्रति सहज नहीं है और साथ ही अमेरिका एवं उसके मित्र देशों से भी चिंतित रहता है और चाहता है कि आसियान क्षेत्र महाशक्तियों की वर्चस्व की राजनीति से बाहर रखे. ऐसी परिस्थिति में भारत की भूमिका बढ़ जाती है. भारत चाहता है कि वह इस क्षेत्र में सिंगापुर, वियेतनाम और इंडोनेशिया के साथ सम्पर्क में रहे. वह यह भी चाहता है कि इस क्षेत्र के नए उभरते समूह में क्वाड को भी सम्मिलित किया जाए.

भारत-प्रशांत क्षेत्र और इस क्षेत्र में आपसी सहयोग का महत्त्व

विशाल हिन्द और प्रशांत महासागर में स्थित देशों को भारत-प्रशांत देश कहा जाता है. यहाँ हर स्तर के देश हैं. कई देश विकासशील हैं तो कई देश सबसे कम विकसित देश हैं. इसी क्षेत्र में जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे महत्त्वपूर्ण विकसित देश भी आते हैं. इस क्षेत्र में अनेक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय वाणिज्य गुट भी हैं जिनमें कई ने वस्तु और सेवा से सम्बंधित मुक्त व्यापार समझौते लागू किए हैं तथा इनमें से कुछ समझौते सीमा शुल्क संघ का आकार ले चुके हैं. भारत प्रशांत क्षेत्र में 38 देश हैं जिनका भूभाग विश्व के भूभाग का 44% ठहरता है. विश्व की जनसंख्या का 65% यहीं रहती है. साथ ही वैश्विक GDP का 62% और वैश्विक व्यापार का 46% इसी क्षेत्र में होता है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Awareness in the fields of IT, Space, Computers, robotics, nano-technology, bio-technology and issues relating to intellectual property rights.

Topic : Organoids

संदर्भ

विशेषज्ञों ने ओर्गेनॉइड की बढ़ती संख्या पर चिंता प्रकट की है. विदित हो कि ओर्गेनॉइड न्यूरो वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशाला में तैयार किये जाने वाले ऐसे सूक्ष्म मस्तिष्क को कहते हैं जो वस्तुओं को देख सकते हैं और उनका अनुभव कर सकते हैं. कुछ वैज्ञानिकों ने ऐसे मस्तिष्कों को वयस्क पशुओं में रोपित भी कर दिए हैं.

ओर्गेनॉइड क्या होते हैं?

  • ये लगभग मटर के आकार की छोटी-छोटी कोषीय रचना हैं जिनमें मानवीय अंगों जैसी कार्यक्षमता तो नहीं होती पर जो बहुधा नए-नए विकसित होते ऊतकों से मिलते-जुलते होते हैं.
  • ये त्रि-आयामी रचनाएँ हैं जिनका निर्माण प्रयोगशालाओं में होता है.
  • इनमें वास्तविक अंग के समान कोष होते हैं, परन्तु इनमें रक्त नहीं होता जिस कारण ये पूरी तरह से कार्यक्षम नहीं होते हैं.

ओर्गेनॉइड कैसे तैयार होते हैं?

ओर्गेनॉइड स्टेम सेल सेल से तैयार किये जाते हैं. इसके लिए स्टेम सेलों में पोषक तत्त्व और अन्य विशेष कण डाले जाते हैं. प्रयोगशालाओं में अभी तक जो ओर्गेनॉइड तैयार हो चुके हैं, वे इन अंगों से सम्बंधित हैं – मस्तिष्क, छोटी आंत, वृक्क, हृदय, पेट, आँखें, यकृत, अग्न्याशय, प्रोस्टेट, लार ग्रन्थियाँ और अंदरूनी कान.

रोगों की समझ में ओर्गेनॉइड का योगदान

  1. ये प्रोटीनों और जीनों की समझ में बढ़ोतरी करते हैं.
  2. इनसे पता चला है कि कैसे किसी विशेष जीव में अंतरण होने से रोग होता है.
  3. जीका वायरस भ्रूण के मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करता है इसका पता मस्तिष्क ओर्गेनॉइडों के माध्यम से चला.
  4. इनसे कोषों की जटिल व्यवस्था को समझने में मदद मिली है.
  5. ओर्गेनॉइडों की सहायता से नई दवाओं की कुशलता और निरापदता के विषय में जानकारी मिलती है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Fly ash

संदर्भ

सिंगरौली और सोनभद्र बिजली संयंत्रों से उड़-उड़ कर गोविन्द वल्लभपन्त सागर अर्थात् रिहंद जलाशय में गिरने वाले फ्लाई ऐश को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले दिनों भारत सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया.

बताया गया है कि अब तक रिहन्द जलाशय में 35 लाख मेट्रिक टन फ्लाई ऐश का प्रवेश हो चुका है.

फ्लाई ऐश क्या है?

फ्लाई ऐश एक बारीक पाउडर है जो तापीय बिजली संयंत्रों में कोयले के जलने से उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है. इसमें भारी धातु होते हैं और साथ ही PM 2.5 और ब्लैक कार्बन भी होते हैं.

इसमें पाया जाने वाला PM 2.5 गर्मियों में हवा के माध्यम से उड़ते-उड़ते 20 किलोमीटर तक फ़ैल जाता है. यह पानी और अन्य सतहों पर जम जाता है.

फ्लाई ऐश हानिकारक कैसे?

फ्लाई ऐश में सिलिका, एल्यूमीनियम और कैल्शियम के ऑक्साइड की पर्याप्त मात्रा होती है. आर्सेनिक, बोरान, क्रोमियम तथा सीसा जैसे तत्त्व भी सूक्ष्म मात्रा में पाए जाते हैं. इस प्रकार इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट उत्पन्न होता है. फैक्ट्रियों से निकलने वाले कोयले के धुओं से फ्लाई ऐश तो वातावरण में फैलता ही है साथ ही साथ कई बार फैक्ट्रियाँ फ्लाई ऐश को जमा कर के बाहर उनका भंडार बना देती हैं. ये सारे कचरे जमा हो-हो कर कभी-कभी पहाड़ जैसा बन जाते हैं. वहाँ से फ्लाई ऐश वातावरण को प्रदूषित करते ही हैं और बहुधा नदी/नहरों में भी फ्लाई ऐश के अंश चले जाते हैं.

फ्लाई ऐश का उपयोग

  • इसे कृषि में अम्लीय मृदाओं के लिए एक अभिकारक के रूप में, मृदा कंडीशनर के रूप में प्रयोग किया जा सकता है. इससे मृदा की महत्त्वपूर्ण भौतिक-रसायन विशेषताओं, जैसे जल धारण क्षमता, हाइड्रोक्लोरिक कंडक्टिविटी आदि में सुधार होगा.
  • भारत अभी तक फ्लाई ऐश प्रयोग की अपनी संभावनाओं का पूर्ण प्रयोग कर पाने में सक्षम नहीं है. हाल ही के CSE के एक अध्ययन के अनुसार, उत्पादित की जाने वाले फ्लाई ऐश का  मात्र 50-60% ही प्रयोग हो पाता है.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : UNEP Colombo Declaration

संदर्भ

पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के सदस्य देशों ने कोम्लम्बो घोषणा का अंगीकरण किया, जिसमें वैश्विक नाइट्रोज चुनौती से निबटने का आह्वान किया गया.

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कोम्लम्बो घोषणा के मुख्य तत्त्व

  • कोम्लम्बो घोषणा अंतर्राष्ट्रीय नाइट्रोजन प्रबंधन प्रणाली (International Nitrogen Management System – INMS) और अंतर्राष्ट्रीय नाइट्रोजन पहल (International Nitrogen Initiative) के तकनीकी सहयोग से तैयार की गई है.
  • इस घोषणा का लक्ष्य 2030 तक नाइट्रोजन कचरे को आधा कर देना है.
  • इसके लिए “नाइट्रोजन जीवन के लिए (Nitrogen for Life)” नामक एक अभियान चलाया जाएगा. स्मरणीय है कि नेरोबी, केनिया में सम्पन्न संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (11-15 मार्च, 2019) में सतत नाइट्रोजन प्रबंधन संकल्प पारित हुआ था. यह अभियान इसी संकल्प का एक अंग होगा.
  • कोम्लम्बो घोषणा में इन सभी संस्थाओं से घोषणा के कार्यान्वयन हेतु सहयोग करने का आह्वान किया गया है – संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन, विकास भागीदार, मानव कल्याण एजेंसियाँ, शिक्षा जगत और गैर-सरकारी संगठन.
  • यह घोषणा सभी देशों से यह आशा करती है कि वे नाइट्रोजन चक्रीकरण नीति, उसके विनियमन और वैज्ञानिक पहलुओं के विषय में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मूल्यांकन करेंगे तथा जन-साधारण को अवगत करायेंगे कि प्राकृतिक नाइट्रोजन चक्र क्या होता है और मानवीय गतिविधियाँ किस प्रकार इसे असंतुलित कर सकती हैं.

नाइट्रोजन का नकारात्मक प्रभाव

यद्यपि यह सत्य है कि सभी जीवों की मूलभूत बनावट में नाइट्रोजन का अत्यंत महत्त्व है और साथ ही उनके जीवित रहने के लिए भी यह एक अत्यावश्यक तत्त्व है. परन्तु जब नाइट्रोजन का अत्यधिक उपयोग होता है तो इसका दुष्प्रभाव धरती के साथ-साथ जैव विविधता पर पड़ता है और अंततः जलवायवीय संकट उत्पन्न हो जाता है.


Prelims Vishesh

Strategic Partnership Council (SPC) :-

  • पिछले दिनों भारत और सऊदी अरब ने रणनीतिक भागीदारी परिषद् समझौते पर हस्ताक्षर किये.
  • इस प्रकार यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और चीन के बाद भारत सऊदी अरब के साथ रणनीतिक भागीदारी करने वाला चौथा देश बन गया है.

SEED awards:

  • 2019 के SEED पुरस्कारों” के लिए 14 स्टार्ट-अप कम्पनियों का चयन किया गया है.
  • विदित हो कि सतत विकास पर काम करने वाले संगठनों को प्रति वर्ष ये पुरष्कार दिए जाते हैं.
  • ज्ञातव्य है कि SEED एक वैश्विक भागीदारी संगठन है जो सतत विकास और हरित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में काम करता है.
  • इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने मिलकर 2002 में जोहानसबर्ग में सम्पन्न सतत विकास के विषय में होने वाले वैश्विक शिखर सम्मेलन में की थी.
  • SEED का पूरा नाम है – Supporting Entrepreneurs for Environment and Development.

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