Sansar डेली करंट अफेयर्स, 29 November 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 29 November 2019


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Industrial Relations Code Bill, 2019

संदर्भ

हाल ही में श्रम एवं रोजगार राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार ने लोकसभा में औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक, 2019 पेश किया.

  • इस विधेयक का लक्ष्‍य ट्रेड यूनियनों, औद्योगिक प्रतिष्‍ठानों या उपक्रमों में रोजगार की सेवा शर्तों और औद्योगिक विवादों की जांच एवं निपटान से संबंधित कानूनों को समेकित एवं संशोधित करना है.
  • औद्योगिक संबंध संहिता का मसौदा इन तीन केन्‍द्रीय श्रम अधिनियमों के संबंधित प्रावधानों के विलय, सरलीकरण एवं उन्‍हें तर्कसंगत बनाने के बाद तैयार किया गया है – ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926; औद्योगिक रोजगार (स्‍थायी आदेश) अधिनियम, 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 . 

लाभ

  • दो सदस्‍यीय ट्रिब्‍यूनल (एक सदस्‍य के स्‍थान पर) के गठन के जरिए एक ऐसी अवधारणा शुरू की गई है, जिससे कुछ महत्त्वपूर्ण मामलों पर संयुक्‍त रूप से अधिनिर्णय किया जाएगा, जबकि शेष मामलों पर एकल सदस्‍य द्वारा अधिनिर्णय लिया जाएगा, जिससे मामलों को तेजी से निपटाया जा सकेगा.
  • ‘एक्जिट’ प्रावधानों (छंटनी इत्‍यादि से संबंधित) में लचीलापन आएगा, जिसके अंतर्गत उपयुक्‍त सरकार की पूर्व मंजूरी के लिए आवश्‍यक आरंभिक सीमा को 100 कर्मचारियों के स्‍तर पर यथावत रखा गया है. हालांकि, इसमें एक प्रावधान भी जोड़ा गया है, जिसके तहत अधिसूचना के जरिए‘कर्मचारियों की इस तरह की संख्‍या’ को बदला जा सकता है.
  • री-स्किलिंग फंड, जिसका उपयोग उस तरीके से कामगारों को ऋण देने में किया जाएगा, जिसे अभी निर्धारित किया जाना शेष है.
  • निश्चित अवधि वाले रोजगार की परिभाषा दी गई है जिसके तहत कोई नोटिस अवधि नहीं होगी तथा छंटनी पर मुआवजे का भुगतान शामिल नहीं है.
  • जुर्माने के रूप में पेनल्‍टी से जुड़े विवादों पर अधिनिर्णय के लिए सरकारी अधिकारियों को अधिकार दिए जाएंगे, जिससे ट्रिब्‍यूनल का कार्यभार घट जाएगा.

GS Paper 3 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Awareness in the fields of IT, Space, Computers, robotics, nano-technology, bio-technology and issues relating to intellectual property rights.

Topic : Contract for the Web

संदर्भ

वर्ल्ड वाइड वेब यानी WWW का आविष्कार करने वाले Sir Tim Berners Lee ने अब इंटरनेट को बचाने के लिए एक ऐक्शन प्लान का अनावरण किया है.

पृष्ठभूमि

पिछले कुछ सालों में इंटरनेट पर फर्जी खबरें, अफवाह और प्राइवेसी वॉयलेशन में काफी तेजी आई है. डेटा लीक अब आम हो चुका है और फेक न्यूज से पूरा सोशल मीडिया भरा पड़ा है.

ऐक्शन प्लान में क्या है?

  • यह प्लान फेक न्यूज और  इंटरनेट पर हो रहे फर्जीवाड़े से निपटने के लिए पेश किया गया है.
  • इसके World Wide Web फाउंडेशन दुनिया के 80 ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर डिजिटल पॉलिसी एजेंडा पर काम कर रहे हैं.
  • इसके लिए साल भर से अधिक समय से पॉलिसी पर काम भी किया जा रहा है.  कॉन्ट्रैक्ट फॉर वेब का मकसद सरकारी संस्थाओं, कंपनियों और एंड यूजर को एक साथ लाकर पॉलिसी डेवेलप करके इन्हें लागू करने का है.
  • इस कॉन्ट्रैक्ट में टोटल 9 प्रिंसिपल (सिद्धांत) होंगे और इन्हें सरकार, कंपनियों और नागरिकों को पालन करना होगा.

उद्देश्य

  • इंटरनेट की उपलब्धता सभी लोगों तक पहुँचाना.
  • सरकार के द्वारा इंटरनेट को सस्ता करना, लोगों की प्राइवेसी और पर्सनल डेटा का सम्मान और सभी यूजर की हितों की रक्षा करना.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Emission Gap Report

संदर्भ

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environmental Programme-UNEP) ने उत्सर्जन गैप रिपोर्ट 2019 (Emission Gap Report 2019) प्रकाशित की, जिसमें जलवायु परिवर्तन के संभावित खतरों को लेकर चिंता जाहिर की गई है.

प्रतिवेदन के मुख्य तथ्य

  • गत 10 सालों में वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में हर साल 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है.
  • इस बढ़ोतरी के चलते वर्तमान समय में कुल वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 55 दशमलव 3 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर हो गया है.
  • यदि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 2020-30 के दौरान प्रतिवर्ष 7.6 प्रतिशत की कमी नहीं की गई तो पेरिस समझौते के तहत किये गए 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को हासिल कर पाना संभव नहीं होगा. यदि लक्ष्य 1.5 डिग्री सेल्सियस हासिल करना है तो 32 GtCO2e प्रतिवर्ष कम होना चाहिए.
  • यदि मौजूदा वक़्त में पेरिस समझौते के तहत तय सभी लक्ष्यों का पालन किया भी जाता है, तो भी 2030 तक वैश्विक तापमान में 3.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी होगी और इसका जलवायु पर बेहद ही गंभीर परिणाम देखने को मिलेंगे.
  • उत्सर्जन गैप रिपोर्ट 2019 में बताया गया है कि दुनिया का 78 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन G20 देशों द्वारा होता है. जबकि G20 देशों में शामिल चीन, अमेरिका, भारत और यूरोपियन यूनियन जैसे देश मिलकर कुल 55 प्रतिशत ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं.
  • पेरिस समझौते के तहत क़रीब 65 देशों ने 2050 तक अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसके लिए फिलहाल सिर्फ कुछ ही देशों ने रणनीति बनाई है.

उत्सर्जन गैप (Emission Gap) क्या है?

  • उत्सर्जन अंतर को प्रतिबद्धता गैप (Commitment Gap) भी कहा जा सकता है. इसके द्वारा यह आकलन किया जाता है कि जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिये हमें क्या करना चाहिये तथा हम वास्तविकता में क्या कर रहे हैं.
  • इसके द्वारा कार्बन उत्सर्जन को निर्धारित लक्ष्यों तक कम करने के लिये आवश्यक स्तर तथा वर्तमान के कार्बन उत्सर्जन स्तर का अंतर निकाला जाता है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Infrastructure- energy and conservation related issues.

Topic : Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation (SATAT) Initiative

संदर्भ

भारत सरकार का कहना है कि सतत योजना के माध्यम से मिट्टी भराई, पराली जलाने आदि से उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान हो सकता है एवं साथ ही तेल और गैस के आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है.

सतत योजना का उद्देश्य

‘सतत’ एक पहल है जिसका उद्देश्‍य विकास से जुड़े एक ठोस प्रयास के रूप में किफायती परिवहन या आवाजाही के लिए टिकाऊ विकल्‍प मुहैया कराना है जिससे वाहनों का इस्‍तेमाल करने वालों के साथ-साथ किसान एवं उद्यमी भी लाभान्वित होंगे.

यह योजना कैसे क्रियान्वित की जा रही है?

इस योजना के जरिए शहरी और ग्रामीण इलाकों में क्षमतावान उद्यमियों को संदमित बायोगैस प्लांट लगाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. इन प्लांट में तैयार होने वाली संदमित जैव-गैस (compressed bio-gas – CBG) को सरकार खरीदेगी और उसका इस्तेमाल वाहनों के ईंधन के तौर पर करेगी. इस योजना के माध्यम से सरकार सस्ता वाहन ईंधन तो मुहैया कराएगी ही साथ ही साथ इसके जरिये कृषि अवषेशों का सही इस्तेमाल होगा और पशु मल तथा शहरी कचरे का प्रयोग भी संभव हो सकेगा. इससे किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक और स्रोत मिलेगा.

योजना के लाभ

  • आज की तीथी में 5000 संदमित बायोगैस स्टेशनों से वार्षिक रूप से लगभग 5 करोड़ टन गैस मिलेगी जो वर्तमान समय में इस्तेमाल हो रही CNG का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है.
  • देश में मौजूदा समय में सालाना लगभग 4 करोड़ टन CNG का इस्तेमाल वाहन ईंधन के तौर पर होता है. इस योजना में सरकार लगभग 7 लाख करोड़ रुपए निवेश करेगी और इससे लगभग 75000 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा.
  • सतत योजना के जरिये फसलों के लिए लगभग 5 करोड़ टन बायो खाद भी मिलेगी.

संदमित जैव-गैस क्या होता है?

  • संदमित जैव-गैस (compressed biogas) एक ऐसा गैस है जिसकी बनावट बाजार में उपलब्ध प्राकृतिक गैस के जैसा है और उसी प्रकार यह भी ईंधन के रूप में प्रयोग में आता है.
  • इसका ऊष्मा मूल्य (calorific value) ~52,000 KJ/kg है.
  • इसके अन्य सभी गुणधर्म CNG के समान होते हैं.
  • संदमित बायो गैस वाहनों में एक वैकल्पिक और अक्षय्य ईंधन के रूप में प्रयुक्त हो सकता है.
  • हमारे देश में जैव पदार्थ प्रचुर मात्रा में होते हैं इसलिए बहुत संभव है कि आगामी वर्षों में यह परिवहन, उद्योग और वाणिज्य में CNG में ले लेगा.
  • संदामित जैव-गैस जिन जैव पदार्थों से बनाया जा सकता है, वे हैं – खेती का कचरा, शहरों का ठोस कचरा, ईख की शिष्टियाँ, शराब बनाने के समय निकला अपशिष्ट, गोबर, नालों का उपचार करने वाले संयंत्र का मलबा, शीत भंडारों के सड़े हुए आलू, सड़ी हुई तरकारियाँ, दुग्ध संयंत्रों के अपशिष्ट, मुर्गियों की बीट, बचा हुआ भोजन, बागवानी का कचरा, जंगल के अपशिष्ट, कारखानों से निकलने वाले पदार्थों के उपचार से बचा अपशिष्ट आदि.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests

Topic : Common but Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities (CBDR–RC)

संदर्भ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 2 से 13 दिसंबर तक स्पेन के मैड्रिड में आयोजित होने वाले (चिली की अध्‍यक्षता में) संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन ढांचा सम्मेलन संबंधी 25वीं कांफ्रेंस आफ पार्टीज : सीओपी (25th Conference of Parties – COP) में वार्ता के बारे में भारत के रुख को मंजूरी दी गयी .

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्‍व पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर करेंगे. सीओपी 25 एक महत्त्वपूर्ण सम्‍मेलन है जिसमें देश क्‍योटो प्रोटोकॉल के तहत 2020 से पहले की अवधि से निकलकर पेरिस समझौते के तहत 2020 के बाद की अवधि में प्रवेश की तैयारी करते हैं. भारत का रूख जलवायु परिवर्तन पर संयुक्‍त राष्‍ट्र फ्रेमवर्क सम्‍मेलन-  यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौते के सिद्धांतों एवं प्रावधानों विशेषतः स्‍वाभाविक न्‍याय के सिद्धांतों और सामान्य परन्तु विभेदित जिम्मेदारियां और संबंधित क्षमता (सीबीडीआर-आरसी) से संचालित होगा.

पृष्ठभूमि

भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन की समस्‍याओं से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में कई कदम उठाए हैं और ये कदम जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और महत्‍वाकांक्षा को दर्शाते हैं. संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव द्वारा हाल ही में आयोजित जलवायु कार्रवाई सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री ने 450 जीडब्‍ल्‍यू तक अक्षय ऊर्जा लक्ष्‍य को बढ़ाने की भारत की योजना की घोषणा की थी और सभी देशों से स्‍वाभाविक न्‍याय और सीबीडीआरसी के सिद्धांतों पर जिम्‍मेदार कार्रवाई करने का आग्रह किया था. भारत अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के माध्यम से सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की कोशिश में विश्‍व में अग्रणी है.

आगे की राह

भारत अपनी कार्रवाई को लेकर काफी उत्साहित रहा है और जोर देता रहा है कि विकसित देशों को उचित कार्रवाई करने में आगे आना चाहिए और 2020 तक वार्षिक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के जलवायु वित्‍तीय प्रतिबद्धता को पूरा करना चाहिए. भारत विकसित देशों पर 2020 से पहले की जरूरतों को पूरा करने पर जोर देगा और 2020 के बाद की अवधि में विकासशील देशों पर अतिरिक्‍त भार नहीं पड़ना चाहिए. कुल मिलाकर, भारत को सृजनात्‍मक और सकारात्‍मक दृष्टि के साथ और लंबी अवधि के विकास हितों की सुरक्षा करते हुए आगे मिलकर काम करने की उम्‍मीद है.


Prelims Vishesh

Dendrochronology Conference :-

  • लखनऊ में बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पलायोसाइंसेज में 6वां एशियाई वृक्षवलय कालक्रम सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है.
  • वृक्षवलय कालक्रम, किसी काष्ठ के काल निर्धारण की एक वैज्ञानिक विधि है और वृक्षों के वलयों के नमूनों के विश्लेषण पर आधारित है.
  • वृक्षवलय कालक्रम द्वारा हम उस काल का निर्धारण कर सकते हैं जब कोई वलय निर्मित हुआ था, लकड़ी के कई प्रकारों में इसके द्वारा हम सटीक कैलेंडर वर्ष भी ज्ञात कर सकते हैं.

‘YuWaah’- Generation Unlimited initiative :

  • यूनिसेफ ने ‘युवा – जेनरेशन अनलिमिटेड’ पहल का भारत में अनावरण किया है. यह निजी क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय संगठनों में कार्यरत युवाओं को एक मंच पर लाएगा.
  • इसका उद्देश्‍य युवाओं को उनके उम्र के अनुरूप कौशल एवं रोजगार परक शिक्षा में प्रशिक्षित करना है, ताकि वे अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकें और एक योग्य नागरिक बन सकें

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