Sansar डेली करंट अफेयर्स, 29 May 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 29 May 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Veer Savarkar

संदर्भ

28 मई, 2019 को स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की जयंती मनाई गई.

वीर सावरकर से सम्बंधित मुख्य तथ्य

  • सावरकर का पूरा नाम गणेश दामोदर सावरकर था.
  • सावरकर ने 1904 में नासिक में ‘मित्रमेला’ नाम से एक संस्था आरंभ की थी जो शीघ्र ही मेजनी के ‘तरुण इटली’ की तर्ज पर एक गुप्त सभा ‘अभिनव भारत’ में परिवर्तित हो गयी.
  • अभिनव भारत ने अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए विदेशों से अस्त्र-शस्त्र मंगवाया और बम बनाने का काम रूसियों के सहायता से किया. अनेक गुप्त संस्थाएं बम्बई, पूना, नासिक, नागपुर, कोल्हापुर आदि जगहों में सक्रिय थीं. शीघ्र ही सरकार इनकी कार्यवाहियों से पराजित हो गयी.
  • सावरकर स्वदेशी आन्दोलन से भी जुड़े रहे.
  • कालांतर में सावरकर तिलक की स्वराज पार्टी में भी शामिल हुए थे.
  • उनके राष्ट्रभक्ति से पूर्ण भाषणों एवं गतिविधियों से क्रुद्ध होकर ब्रिटिश सरकार ने उनकी BA की डिग्री वापस ले ली थी.
  • जून, 1906 को बेरिस्टर बनने के लिए लंदन गये. वहाँ उन्होंने भारतीय छात्रों को भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एकत्र किया.
  • सावरकर ने फ्री इंडिया सोसाइटी नामक एक समूह बनाया जो भारत की स्वतंत्रता के विषय में चर्चा करने के लिए बना था. यह सोसाइटी भारतीय पंचाग के अनुसार विभिन्न पर्वों तथा स्वतंत्रता आन्दोलन से सम्बंधित मुख्य तिथियों को मनाया करती थी.
  • उन्होंने अंग्रेजो से भारत को मुक्त करने के लिए सशस्त्र आन्दोलन को बढ़ावा दिया और इसके लिए इंग्लैंड में रहने वाले भारतीयों का एक जत्था तैयार किया जिनके पास हथियार भी होते थे.
  • 1908 में उन्होंने 1857 की क्रांति पर एक प्रमाणिक शोधग्रन्थ लिखा. वे अंग्रेजों के इस दावे को नहीं मानते थे कि यह घटना सिपाहियों का विद्रोह थी. इस पुस्तक का नाम ही रखा गया था – 1857 का भारतीय स्वातंत्र्य युद्ध. ब्रिटेन की सरकार ने इस पुस्तक के ब्रिटेन और भारत दोनों जगह छपने पर प्रतिबंध लगा दिया. आगे चलकर इस पुस्तक को मैडम भिकाजी कामा ने हौलेंड में प्रकाशित किया और कालांतर में यह पुस्तक भारत में क्रांतिकारियों तक पहुँच गई.
  • जन नासिक के कलक्टर ए.एम.टी. जैक्सन को किसी युवा व्यक्ति ने गोली मारी तो सावरकर को इस हत्या का आरोपी इस आधार पर बनाया गया क्योंकि उनका इंडिया हाउस से सम्बन्ध रहा था.
  • लन्दन में ही सावरकर को मार्च 13, 1910 को बंदी बना दिया गया और भारत भेज दिया गया.
  • 1920 में विट्ठल भाई पटेल, महात्मा गाँधी और बाल गंगाधर तिलक जैसे प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों ने वीर सावरकर की रिहाई की माँग की परन्तु सावरकर को छोड़ा नहीं गया.
  • मई 2, 1921 को उनको पहले रत्नागिरी जेल भेजा गया और फिर वहाँ से यरवदा जेल में बंद किया गया. कालांतर में उन्हें कालापानी की सजा मिली और उनको अंडमान निकोबार के सेलुलर जेल में रख दिया गया. वहाँ उन्होंने 14 वर्ष तक यातनाएं सहीं.
  • रत्नागिरी जेल में रहते हुए सावरकर ने एक और पुस्तक लिखी, जिसका नाम था – हिंदुत्व, हू इज हिन्दू?
  • सावरकर 1937 से 1943 तक हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे. जब 22 अक्टूबर, 1939 को कांग्रेस के मंत्रियों ने सरकार से त्यागपत्र दे दिया तो हिन्दू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ सहयोग कर सिंध, बंगाल और उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रान्त में सरकारें गठित कीं.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic : Governor modifies law on forest rights

संदर्भ

राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 में महाराष्ट्र राज्य के अनुसूचित क्षेत्र के संबंध में कुछ संशोधन किए हैं.

भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल ने 18 मई 2020 की अधिसूचना द्वारा उपरोक्त अधिनियम की धारा 6 में ये संशोधन किए हैं.

मुख्य तत्त्व

  • जिला स्तरीय समिति द्वारा व्यक्तिगत व सामूहिक वन अधिकार के दावे बड़े पैमाने पर नामंजूर किए जा रहे हैं लेकिन जिला समिति के निर्णय के विरुद्ध अपील करने के लिए कानून में कोई प्रावधान नहीं था. अब नई अधिसूचना से आदिवासियों को राहत मिल सकेगी.
  • प्रदेश में वन अधिकार कानून के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय समिति के व्यक्तिगत अथवा सामूहिक वन अधिकार के दावे (पट्टा) स्वीकार नहीं करने पर आदिवासी समाज के लोग अब विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष अपील कर सकेंगे.

संविधान की पाँचवीं अनुसूची

  • इस अनुसूची में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उपबंध है.
  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 244 (1) के तहत संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, ‘अनुसूचित क्षेत्र’ को भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के पैरा 6 (1) के अनुसार- ‘ऐसे क्षेत्रों के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया गया हो’.
  • एक राज्य के संबंध में “अनुसूचित क्षेत्रों” का विनिर्देश, उस राज्य के राज्यपाल के साथ परामर्श के बाद राष्ट्रपति के एक अधिसूचित आदेश द्वारा होता है.
  • भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुच्छेद 6(2) के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रपति उस राज्य के राज्यपाल के परामर्श से राज्य में किसी भी अनुसूचित क्षेत्र के क्षेत्र में वृद्धि कर सकते हैं; और किसी भी राज्य के संबंध में उन क्षेत्रों को पुनर्परिभाषित करने के लिए नए आदेश दे सकते हैं जिसे अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया जाना है. किसी भी परिवर्तन, वृद्धि, कमी, नए क्षेत्रों का समावेश या “अनुसूचित क्षेत्रों” से संबंधित किसी भी आदेश को रद्द करने के मामले में भी यही लागू होता है.
  • वर्तमान में, आंध्र प्रदेश (तेलंगाना सहित), छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में अनुसूचित क्षेत्र घोषित किए गए हैं.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : EU unveils €750 billion economy rescue plan

संदर्भ

27 मई, 2020 को यूरोपीय संघ ने 750 बिलियन यूरो को COVID-19 रिकवरी फंड के रूप में प्रस्तावित किया. इस कोष का उपयोग देशों द्वारा COVID-19 के कारण होने वाली गहरी मंदी से बाहर आने के लिए किया जायेगा.

पृष्ठभूमि

यूरोपीय संघ ने अपने सदस्य देशों में नौकरियों, स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों और व्यवसायों को जीवित रखने के लिए घाटे की सीमा को तोड़ दिया है. फ्रांस और जर्मनी ने पहले ब्लाक के वित्तीय उपायों के लिए नकदी जोड़ने के लिए 543 बिलियन अमरीकी डालर का फंड देने पर सहमति व्यक्त की थी.

यूरोपीय संघ फ्रेंको-जर्मन मॉडल के समान कई प्रकार के ब्लूप्रिंट को लागू करेगा.

भारत का पक्ष

भारत फ्रेंको-जर्मन मॉडल का समर्थन करता है. भारत सहित करीब 25 देशों ने प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ वायरस को रोकने के उपायों पर चर्चा की. इस गठबंधन का नेतृत्व फ्रांस और जर्मनी द्वारा किया गया था और यह मॉडल 25 देशों की बैठक का एक परिणाम है जो अप्रैल 2020 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गयी थी.  इसमें भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किया था.

फ्रेंको-जर्मन मॉडल

इस मॉडल का उद्देश्य COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में विश्व संगठनों में सम्मिलित करना है. इस मॉडल का ध्येय संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को परीक्षणों और टीकों को विकसित और वितरित करने के प्रेरित करना है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : U.S. strips Hong Kong of special trading status

संदर्भ

संयुक्त राज्य अमेरिका ने हाल ही में अमेरिकी कानून के तहत हांगकांग की विशेष दर्जे को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत चीन के प्रभाव वाले इस वित्तीय हब के लिए व्यापारिक विशेषाधिकार छीनने का रास्ता खुल गया है.

अमेरिका ने चीन पर हांगकांग की स्वायत्तता रौंदने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अब इसे चीन से स्वायत्त नहीं कहा जा सकता है.

मामला क्या है?

अमेरिकी कानूनों के तहत हांगकांग को विशेष दर्जा देने की जरूरत नहीं है और यह क्षेत्र साल 1997 में चीन के अधिकार में आने के बाद भी इसका फायदा ले रहा है. दरअसल खेल यहां अरबों डॉलर के व्यापार का है, जहां अमेरिका के विशेष दर्जे से हांगकांग को फायदा होता है और अब अमेरिका को लगता है वास्तव में चीन इसका फायदा उठा रहा है. हांगकांग और अमेरिका के बीच व्यापार में अनुमानित 38 बिलियन डॉलर का जोखिम हो सकता है.

पृष्ठभूमि

 चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस गुरुवार को हांगकांग में सुरक्षा कानून पर एक और कदम उठाते हुए अलगाव, आतंकवाद और विदेशी हस्तक्षेप पर प्रतिबंध लगाने जा रही है. हांगकांग के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह एक ऐसा कदम जो क्षेत्र की बुनियादी स्वतंत्रता को खत्म कर देता है. इस कदम के विरोध में हांगकांग में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं और चीन की ओर से उनका बलपूर्वक दमन किया जा रहा है.

निहितार्थ

अमेरिका के इस फैसले का मतलब है कि अमेरिका की ओर से मिलने वाले हांगकांग के विशेषाधिकार खो जाएंगे. चीन के साथ अमेरिका को भी इससे व्यापारिक नुकसान झेलना पड़ेगा लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर हांगकांग पर पड़ने वाला है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : International Day of UN Peacekeepers 2020

संदर्भ

प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दिवस 29 मई को मनाया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अर्थात् UN Security Council के द्वारा महिला, शान्ति एवं सुरक्षा के विषय में प्रस्ताव संख्या 1325 के अंगीकृत होने की 20वीं वर्षगाँठ को ध्यान में रखकर इस बार की थीम रखी गई है – शान्ति रक्षा कार्य में महिलाएँ : शान्ति की एक कुंजी.

29 मई को ही क्यों मनाया जाता है यह दिवस?

यह दिवस 29 मई को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी तिथि को 1948 में प्रथम संयुक्त राष्ट्र शान्ति रक्षा मिशन की स्थापना हुई थी और सुरक्षा परिषद् ने मध्य-पूर्व में संयुक्त राष्ट्र के कुछ सैन्य पर्यवेक्षकों (observers) को तैनाती पर भेजा था.

यू.एन. पीसकीपिंग और इसका महत्त्व

  • सबसे पहला मिशन 1948 के अरब-इजराइल युद्ध के समय भेजा गया था.
  • संयुक्त राष्ट्र की शान्ति सेना उन देशों में शान्ति की स्थापना में सहायता पहुँचाने के लिए भेजी जाती है जहाँ गृह संघर्ष चल रहा होता है.
  • इतिहास साक्षी है कि संयुक्त राष्ट्र कई अवसरों पर अपनी शान्ति रक्षक सेनाओं को सम्बंधित देश के आग्रह पर भेजकर शान्ति को स्थापित करने में सफल रहा है.
  • शांति सेनाएँ विश्व के कोने-कोने से सैनिकों और पुलिस को इकठ्ठा करके तथा सम्बंधित देश के अपने घरेलू नागरिक के साथ हर प्रकार से समन्वय करते हुए शान्ति स्थापित करने का कार्य करती है.
  • यू.एन. पीसकीपिंग का कार्य जिन मूलभूत सिद्धांतों का अनुसरण करता है, वे हैं – i) पक्षकारों की सहमति ii) निष्पक्षता iii) बल का प्रयोग उसी समय करना जब आत्म रक्षा एवं रक्षा की स्थिति उत्पन्न हो.

वैश्विक भागीदारी

यू.एन. पीसकीपिंग वास्तव में एक अनूठी वैश्विक भागीदारी होती है. अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इसमें न केवल संयुक्त राष्ट्र महासभा, सुरक्षा परिषद् और संयुक्त राष्ट्र सचिवालय को ही एक स्थान पर लाया जाता है, अपितु इस कार्य में शान्ति सेना के लिए अपने सैनिक भेजने वाले देशों और इस सेना को आमंत्रित करने वाले देशों का भी मिला-जुला प्रयास होता है. शान्ति सेनाओं को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में ही वैधता दे दी गई है.

शान्ति रक्षक कौन होते हैं?

शान्ति रक्षक मिशन में इनको शामिल किया जाता है – सैनिक, पुलिस अधिकारी और गैर-सैनिक अधिकारी. सदस्य देश स्वेच्छा से इस मिशन में सैनिक और पुलिस अधिकारी भेजा करते हैं, परन्तु शान्ति अभियान में शामिल गैर-सैनिक अधिकारी संयुक्त राष्ट्र सचिवालय के ही सिविल सर्वेंट होते हैं.

शांति रक्षकों ब्लू बैरट्स या ब्लू हेलमेट भी कहते हैं क्योंकि इनके हेलमेट का रंग हल्का नीला होता है.

सुधार की आवश्यकता क्यों?

  • वर्तमान में यू.एन. पीसकीपिंग का कार्य एक ओर जहाँ विकट परिस्थतियों में शान्ति को स्थापित करना है, वहीं दूसरी ओर उस स्थापित शान्ति को बनाये रखना भी है.
  • शान्ति सेना के लिए सैनिक भेजने वाले देशों, सुरक्षा परिषद् और सचिवालय इन तीनों के बीच सहयोग अपेक्षा के अनुरूप नहीं होता है.

क्या-क्या सुधार हो सकते हैं?

  • महिला शान्ति रक्षक सैनिकों को शान्ति सेनाओं में शामिल होने के लिए उत्प्रेरण दिया जा सकता है. विदित हो कि जुलाई 2019 के आँकड़े के अनुसार, शान्ति सेनाओं में महिलाओं का प्रतिशत मात्र 6 है. संख्या की दृष्टि से कहा जाए तो 86,687 शान्ति रक्षकों में से मात्र 5,243 ही महिला रक्षक हैं.
  • शान्ति स्थापित करने के लिए की गई तैनाती में एक ही देश के सैनिकों को नहीं लगाकर कई देशों की मिली-जुली टुकड़ी भेजी जाएँ जिससे कि भागीदारी की वास्तविक भावना उत्पन्न हो सके.
  • भविष्य के कमांडरों और प्रबंधकों की क्षमता को विकसित करने के लिए तथा शान्ति रक्षक सैनिकों को संयुक्त राष्ट्र के आचारगत मानकों के प्रति शान्ति रक्षकों को जागरूक बनाने के लिए नवाचारी पहलों की आवश्यकता प्रतीत होती है.

Prelims Vishesh

Manipur’s Khudol :

  • संयुक्त राष्ट्र ने COVID-19 महामारी के संकट से समावेशी लड़ाई के लिए खुडोल की सराहना की है.
  • मणिपुर की राजधानी इंफाल के एक NGO ने खुडोल की शुरुआत की थी जो जनता से प्राप्त हुए फंड पर आधारित एक पहल है.
  • यह LGBT समुदाय, दैनिक वेतन भोगियों, एचआईवी पीड़ितों, किशोरों और बच्चों के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता और भोजन सुनिश्चित करता है.

World Turtle Day 2020 :-

  • आज यानी 23 मई को विश्व कछुआ दिवस (World Turtle Day) 2020 पूरे विश्व में मनाया गया.
  • विश्व कछुआ दिवस की स्थापना 1990 में American Tortoise Rescue नामक एक गैर-लाभकारी संगठन द्वारा की गई थी.

What are cicadas? :-

  • अमेरिका में वर्ष 2020 और 2021 के दौरान सिसाडा कीड़े का प्रकोप देखा जा सकता है.
  • सिसाडा ऐसा कीड़ा है जो वैसे तो धरती के नीचे रहता है लेकिन संभोग करने के लिए धरती पर आ जाता है.
  • प्रजनन के तुरंत बाद सिसाडा की मौत हो जाती है और अंडों से निकले सिसाडा फिर लंबे समय के लिए धरती के भीतर चले जाते हैं.
  • ये जहरीले नहीं होते और न ही किसी को नुकसान पहुंचाते हैं. इनके जीवन का किसी पेड़ की जड़ में बीस फीट नीचे होता है.
  • ये कीड़े हजारों और लाखों के समूह में एक साथ रहते हैं. नॉर्थ कैरोलीना में पाए जाने वाले इन कीड़ों का जीवन बहुत अजीबोगरीब माना जाता है.

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