Sansar डेली करंट अफेयर्स, 28 September 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 28 September 2020


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation. Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Namami Gange

संदर्भ

हाल ही में प्रधानमंत्री ने “नमामि गंगे मिशन” के तहत उत्तराखंड में छह मेगा परियोजनाओं का वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उद्घाटन किया है.

उत्तराखंड के मेगा परियोजना के बारे में

  • इन परियोजनाओं में 68 मिलियन लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाले एक नए अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण, हरिद्वार के जगजीतपुर में स्थित 27 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी के अपग्रेडेशन और हरिद्वार के ही सराई में 18 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का निर्माण शामिल है.
  • जगजीतपुर का 68 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी, सार्वजनिक निजी भागीदारी से पूरी की गई पहली हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल वाली परियोजना है. ऋषिकेश में लक्कड़घाट पर 26 एमएलडी क्षमता वाले एक एसटीपी का भी उद्घाटन किया जाएगा.
  • उत्तराखंड में हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र से गंगा नदी में लगभग 80 प्रतिशत अपशिष्ट जल बहाया जाता है, ऐसे में यहां कई एसटीपी परियोजनाओं का निर्माण गंगा नदी को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

नमामि गंगे कार्यक्रम क्या है?

  • नमामि गंगे भारत सरकार का एक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य गंगा नदी को कारगर ढंग से स्वच्छ बनाना है. इस लक्ष्य को पाने के लिए इसमें सभी हितधारकों को भी संलग्न किया गया है, विशेषकर गंगा घाटी के उन पाँच राज्यों के हितधारकों को जो राज्य गंगा की घाटी में स्थित हैं, यथा – उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल.
  • इस कार्यक्रम में जो कार्य किये जाते हैं, वे हैं – नदी की सतह की सफाई, इसमें गिरने वाले नाली प्रवाह का उपचार, रिवर फ्रंटों का विकास, जैव-विविधता का विकास, वनरोपण एवं जन-जागरूकता के कार्य.

नमामि गंगे कार्यक्रम के मुख्य स्तम्भ

  1. अपशिष्ट जल को साफ़ करने की अवसंरचना
  2. नदी की सतह को साफ़ करना
  3. वनरोपण
  4. औद्योगिक कचरे पर नजर रखना
  5. रिवर फ्रंट का विकास
  6. जैव-विविधता
  7. जन जागरूकता
  8. गंगा ग्राम

कार्यान्वयन

  • इस कार्यक्रम का कार्यान्वयन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga – NMCG) और राज्यों में स्थित इसके समकक्ष संगठनों, जैसे – राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूह (State Program Management Groups – SPMGs) द्वारा किया जाता है.
  • योजना के सही कार्यान्वयन के लिए एक त्रि-स्तरीय प्रणाली गठित करने का प्रस्ताव है. इस प्रणाली के तीन स्तर होंगे जो निम्नवत् हैं –
  1. राष्ट्रीय स्तर पर एक उच्च स्तरीय कार्यदल जिसके अध्यक्ष कैबिनेट सचिव होंगे और जिनकी सहायता NMCG करेगी.
  2. राज्य-स्तर पर एक समिति होगी जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे और जिनकी सहायता SPMG करेगी.
  3. जिला-स्तर पर एक जिला-स्तरीय समिति होगी जिसकी अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट करेंगे.

इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालयों/एजेंसियों के मध्य समन्वय के तन्त्र को सुधारने पर बल दिया गया है.

राष्ट्रीय गंगा परिषद् क्या है?

  • राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण (National Ganga River Basin Authority) को भंग कर के अक्टूबर, 2016 में गंगा नदी प्राधिकरण आदेश (कायाकल्प, संरक्षण एवं प्रबंधन) [River Ganga (Rejuvenation, Protection and Management) Authorities Order] के द्वारा राष्ट्रीय गंगा परिषद् का गठन हुआ था.
  • इसकी अध्यक्षता प्रधानमन्त्री करते हैं.
  • इस परिषद् में गंगा घाटी में स्थित पाँच राज्यों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और प. बंगाल) के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ कई केन्द्रीय मंत्री सदस्य होते हैं.
  • इसकी बैठक प्रत्येक वर्ष किये जाने का प्रावधान है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : Hydrogen Fuel Cell – HFC

संदर्भ

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हाइड्रोजन फ़्यूल सेल (Hydrogen Fuel Cell – HFC) पर आधारित वाहनों के सुरक्षा मूल्यांकन के लिए मानक अधिसूचित किए हैं.

मुख्य बिंदु

  • यह ऊर्जा कुशल और पर्यावरण के अनुकूल हाइड्रोजन फ़्यूल सेल (HFC) आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की सुविधा प्रदान करेगा.
  • HFC वाहन एक इलेक्ट्रिक मोटर द्वारा संचालित होते हैं और इसलिए इन्हें ई-कारों (e-car) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है.
  • अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों के विपरीत, HFC वाहन “बिल्ट-इन” बैटरी से अपनी ऊर्जा प्राप्त नहीं करते हैं, बल्कि फ्यूल सेल पर आधारित उनका अपना विद्युत संयंत्र’ होता है.
  • HFC एक फ्यूल सेल है, जो विद्युत का उत्पादन करने हेतु हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को संयुग्मित करता है तथा इससे उप-उत्पादों के रूप में केवल जल व वाष्प ही शेष रह जाते हैं.
  • ईंधन सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने हेतु विद्युत-रासायनिक उपकरण होते हैं. उन्हें बैटरी की भांति समय-समय पर पुन:चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होती है और जब तक उन्हें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन (सामान्यतया वायु) की आपूर्ति की जाती है, तब तक विद्युत का उत्पादन होता रहता है.

हाइड्रोजन ईंधन ही क्यों?

  • हाइड्रोजन ईंधन का एक स्वच्छ स्रोत है क्योंकि इसके प्रयोग से सह उत्पाद के रूप में मात्र पानी और ताप का ही सृजन होता है.
  • हाइड्रोजन कई स्रोतों से निकाला जा सकता है, जैसे – मीथेन, कोयला, पानी और यहाँ तक की कचरा भी.
  • बिजली से चलने वाली गाड़ियों को रिचार्ज करने में घंटों लग जाते हैं और वे कुछ सौ किलोमीटर ही चल पाती हैं. किन्तु FCVs को रिचार्ज करने में कम समय लगता है और ये अधिक दूर तक भी जाती हैं.
  • यह प्रदूषण को समाप्त करता है, तेल और गैस के आयात पर निर्भरता को कम करता है, उच्च विद्युत दक्षता से युक्त है, शोर-रहित परिचालन होता है आदि.

सीमाएँ

उपकरणों की उच्च लागत, हाइड्रोजन गैस के भंडारण एवं रखरखाव से संबद्ध मुद्दे (जैसे संक्षारण) आदि.

अनुप्रयोग

स्थिर क्षेत्र (भवनों, पृथक घरों आदि के लिए विद्युत आपूर्ति), वहनीय (पोर्टेबल) क्षेत्र (सैन्य अनुप्रयोगों जैसे सुवाह्य सैनिक शक्ति, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि), परिवहन क्षेत्र इत्यादि.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : ISRO’s Mangalyaan Orbiter Completes Six Years Around Mars

संदर्भ

इसरो (ISRO) के मंगलयान ऑर्बिटर ने मंगल की कक्षा में छह वर्ष पूर्ण कर लिए हैं.  मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM), जिसे मंगलयान भी कहा जाता है, ने लाल ग्रह की परिक्रमा करते हुए अपने छह वर्ष (24 सितंबर, 2014 से अब तक) पूर्ण कर लिए हैं. यह भारत का प्रथम अंतर्ग्रही (interplanetary) अर्थात्‌ दो ग्रहों के मध्य संचालित होने वाला मिशन था. MOM के मुख्य उद्देश्यों में स्वदेशी वैज्ञानिक उपकरणों द्वारा मंगल ग्रह की सतह की विशेषताओं, आकृति विज्ञान, खनिज विज्ञान और मंगल के वायुमंडल का अन्वेषण करना शामिल है.

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उपलब्धियाँ

  • भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ने ऑर्बिटर द्वारा प्रदान की गई छवियों के आधार पर मंगल ग्रह का एक मानचित्र तैयार किया है.
  • फोबोस और डीमोस, मंगल के दो प्राकृतिक उपग्रह हैं. मंगल के दोनों चंद्रमाओं की खोज आसफ हॉल ने वर्ष 1877 में की थी. फोबोस डेमोस से सात गुना बड़ा है.
  • मार्स ऑर्बिटर मिशन पर स्थापित मार्स कलर कैमरे (MCC) ने मंगल के निकटतम और सबसे बड़े उपग्रह फोबोस की तस्वीर ली है.
  • तस्वीरों में फोबोस पर मौजूद क्रेटर भी शामिल हैं, जिनके नाम हैं- स्टिकनी, श्लोवस्की, रोशे और ग्रिलड्रिग.
  • MOM का उपयोग करके प्रथम बार संपूर्ण मंगल ग्रह का अल्बीडो मानचित्र तैयार किया गया है, जो मंगल की सतह की संरचना के बारे में सूचना प्राप्त करने के लिए सतह से परावर्तित सूर्य के प्रकाश का मापन करता है.

मुद्दे

मीथेन, जो जीवन प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण गैस है, मंगल पर उसकी खोज करने वाला मीथेन सेंसर, डिजाइन संबंधी एक दोष के कारण विफल हो गया है. लाइमैन अल्फा फोटोमीटर से कोई प्रकाशित परिणाम प्राप्त नहीं हुए हैं. इस फोटोमीटर को यह विश्लेषण करना था कि मंगल की उत्पत्ति के उपरांत से वहां कितना और किस दर से जल का विलोपन हुआ है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : News related to Space.

Topic : Five years of astronomical photography in visible, near-ultraviolet, and far-ultraviolet spectrum

संदर्भ

ब्रह्माण्ड में कॉस्मिक नून से पहली एक्सट्रीम-यूवी किरणों का पता लगाने वाले उपग्रह ने, 28 सितंबर, 2020 को अपना 5वाँ जन्मदिन मनाया है.

अल्ट्रा-वायलेट इमेजिंग खगोलीय फोटोग्राफी से प्रमुख बिंदु

  • टेलीस्कोप, या यूवीआईटी (Ultra-Violet Imaging Telescope) एक ‘ 3-in-1’ इमेजिंग टेलीस्कोप है जो एक साथ दृश्यमान, निकट-पराबैंगनी (एनयूवी) और दूर-पराबैंगनी (एफयूवी) स्पेक्ट्रम का पर्यवेक्षण कर सकता है.
  • 230 किलोग्राम वजन के साथ, यूवीआईटी में दो अलग-अलग टेलिस्कोप शामिल हैं। उनमें से एक दृश्यमान (320-550 एनएम) और एनयूवी (200-300 एनएम) के रूप में काम करता है। दूसरा केवल एफयूवी (130-180 एनएम) में काम करता है.
  • यह भारत की पहली बहु-तरंगदैर्ध्य खगोलीय वेधशाला, एस्ट्रोसैट के पांच पेलोड में से एक है, जिसने 28 सितंबर 2020 को आकाश में खगोलीय पिंडों का चित्र (इमेजिंग) लेते हुए अपने पांच साल पूरे किये हैं.
  • अपने संचालन के पाँच सालों में, इसने कई उपलब्धियां प्राप्त की हैं. इसने भारत और विदेश के वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित 800 अद्वितीय आकाशीय स्रोतों के 1166 पर्यवेक्षण-कार्य पूरे किये हैं.
  • इसने तारों तथा तारा समूहों की खोज की है और हमारे मिल्की वे आकाशगंगा में बड़े और छोटे उपग्रह आकाशगंगाओं का मानचित्रण किया है, जिसे मैगेलैनिक क्लाउड्स कहा जाता है, जो ब्रह्मांड में एक ऊर्जावान घटना है जैसे अल्ट्रा-वायलेट के समकक्ष के रूप में गामा-किरण विस्फोट, सुपरनोवा, सक्रिय आकाशगंगा नाभिक आदि.
  • इसकी बेहतर स्थानिक रिज़ॉल्यूशन क्षमता ने खगोलविदों को आकाशगंगाओं में तारों के निर्माण का पता लगाने के साथ-साथ स्टार क्लस्टर्स (पिछले नासा मिशन, गलेक्ससे 3 गुना बेहतर) के समाधान को सक्षम किया है.
  • यूवीआईटी के पर्यवेक्षणों ने हाल ही में पृथ्वी से लगभग 10 बिलियन प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित एक आकाशगंगा की खोज की है,जो अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण का उत्सर्जन कर रही है.

AstroSAT क्या है?

  • जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है कि AstroSAT भारत की पहली अनेक तरंग दैर्घ्य वाली अन्तरिक्ष वेधशाला है. इसका प्रक्षेपण ब्रह्मांड की विस्तृत समझ पैदा करने के लिए किया गया था.
  • AstroSAT में पाँच पेलोड हैं जिनकी सहायता से वह विद्युत-चुम्बकीय वर्णक्रम (electromagnetic spectrum) के दृश्य, पराबैंगनी निम्न एवं उच्च ऊर्जा वाले एक्स-रे क्षेत्रों में एक साथ ही पूरे ब्रह्मांड पर नज़र रखता है.
  • AstroSAT का एक उद्देश्य न्यूट्रोन तारों और कृष्ण विवरों (black holes) से युक्त बाइनरी तारक प्रणालियों में घटने वाली उच्च ऊर्जा प्रक्रियाओं को समझना भी है. इसके अतिरिक्त यह न्यूट्रोन तारों के चुम्बकीय क्षेत्रों का अनुमान लगाता है और तारों के जन्म वाले क्षेत्रों का अध्ययन भी करता है. इसके अतिरिक्त इसका एक काम मिल्कीवे आकाशगंगा से बाहर अवस्थित तारक प्रणालियों में उच्च ऊर्जा प्रक्रियाओं का अध्ययन का भी करना है.
  • AstroSAT के प्रक्षेपण से भारत उन चुनिन्दा देशों में एक हो गया है जिसके पास अंतरिक्ष-आधारित वेधशाला है. ऐसे जो अन्य देश हैं, वे हैं – अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान और रूस.

Prelims Vishesh

Steps taken by Election Commission to ensure safe elections in Bihar :-

  • निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा निर्वाचनों के लिए विभिन्‍न असाधारण उपायों की घोषणा की है, जो वैश्विक कोरोनो वायरस महामारी के दौरान आयोजित किए जा रहे हैं.
  • मतदान केंद्र मतदाता की अधिकतम संख्या 1,500 से घटाकर 1,000 कर दी गई है.
  • 80 वर्ष से अधिक आयु के सभी मतदाताओं, कोविड-पॉजिटिव मतदाताओं तथा जो क्वारेंटाइन हैं, उनके लिए भी डाक मतपत्र द्वारा मतदान का प्रावधान किया गया है.
  • घर-घर अभियान, रोड शो आदि के लिए उम्मीदवारों / राजनीतिक दलों के लिए विशिष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं.

Faceless Appeals launched by Central Board of Direct Taxation (CBDT) :-

  • फेसलेस अपील में कर अधिकारी के समक्ष करदाता की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है.
  • फेसलेस अपीलों के अंतर्गत बड़ी कर अपवंचना, गंभीर घोखाघडी, अंतर्राष्ट्रीय कर और काले घन अधिनियम के मामलों को छोड़कर सभी आयकर अपीलों को शामिल किया जाएगा.
  • यह अपीलकर्ता हेतु अपील के आदेश सुनिश्चित करने की सुविधा प्रदान करेगा और मुकदमेबाजी को कम करने में सहायक सिद्ध होगा.
  • यह और अधिक पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करेगा.
  • मामलों का आवंटन डेटा एनालिटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से किया जाएगा.
  • इसे हाल ही में आरंभ की गई “पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान” पहल के हिस्से के रूप में प्रारंभ किया गया है.

Flash Floods :-

  • हाल ही में असम के कुछ गांव आकस्मिक बाढ़ से जलमग्न हो गए हैं.
  • निम्न जलस्तर में त्वरित वृद्धि और प्रवाह का मंद होना तथा अत्यधिक जल विसर्जन आकस्मिक बाढ़ या फ्लैश फ्लड की विशेषताएं हैं, जिसके अचानक घटित होने के कारण अत्यंत नुकसान होता है.
  • फ्लैश फ्लड अधिकतर पहाड़ी (अति-पहाड़ी क्षेत्रों में नहीं) क्षेत्रों और ढलान वाली भूमि पर आती है, जहां अत्यधिक वर्षा या मेघ प्रस्फुटन (cloudbursts) की घटनाएँ सामान्य हैं.
  • अन्य कारणों में ढाल पर ऊपर की ओर स्थित जलाशयों से जल का अकस्मात निर्गमन, भूस्खलन आदि के कारण बांधों की दीवारों और नदी तटबंधों के टूट जाने से होने वाला जल निकास इत्यादि हैं.

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