Sansar डेली करंट अफेयर्स, 28 May 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 28 May 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Ensure transport, food for migrants, SC tells Centre, States

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने देश के विभिन्न भागों में फँसे प्रवासी मजदूरों की समस्याओं और दुखों का संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को इन प्रवासियों को तुरंत ‘पर्याप्त परिवहन व्यवस्था, भोजन और आश्रय’ मुफ्त प्रदान करने का आदेश दिया. विदित हो कि शीर्ष न्यायालय ने भारत सरकार के साथ-साथ सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने जवाब प्रस्तुत करने और मुद्दे की तात्कालिकता पर ध्यान देने के लिए नोटिस निर्गत किए हैं.

सर्वोच्च न्यायालय ने क्या आदेश दिया?

  1. सर्वोच्च न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल से अनुरोध किया कि वे अगली सुनवाई में अदालत को यह बताने में मदद करें कि अब तक भारत सरकार द्वारा क्या कदम उठाए गए और आगे क्या कदम लिए जाने चाहिए.
  2. प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में आज भी सड़कों, राजमार्गों, रेलवे स्टेशनों और राज्य की सीमाओं पर फंसे हुए हैं. उन्हें केंद्र और राज्य सरकारें तुरंत पर्याप्त परिवहन व्यवस्था, आश्रय और नि:शुल्क भोजन-पानी उपलब्ध कराएं.

मामला क्या है?

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के कारण से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर शहरों से गाँवों की ओर पलायन कर रहे हैं. यातायात सुविधाएँ तक पहुँच न होने के चलते पैदल और साइकिलों में पलायन करने को विवश हैं. मीडिया में भी प्रवासियों के लौटने से जुड़ी खबरें लगातार दिखाई जा रही हैं और उनके द्वारा कठिन परिस्थितियों का सामना किए जाने का भी जिक्र किया जा रहा है.

अप्रैल महीने के अंत में, सरकार ने प्रवासियों को बस द्वारा घर वापस लाने के लिए दिशानिर्देशों की घोषणा की थी. 1 मई को, सरकार ने उनके लिए विशेष ट्रेन भी चालू किया, लेकिन कई लोगों ने घर वापस पैदल ही जाना जारी रखा क्योंकि वे ट्रेनों के लिए इंतजार नहीं करना चाहते थे या उनके पास आवश्यक दस्तावेज नहीं थे.

9 मई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेल की पटरी पर सो रहे 16 प्रवासी मजदूरों को एक मालगाड़ी ने रौंद डाला था. कोरोना लॉकडाउन के चलते ये सभी मजदूर अपने घर जाने के लिए 40 किलोमीटर चलकर आए थे, इस बीच थकान ज्यादा लगी, तो रेल की पटरी पर ही सो गए.

आगे की राह

लगातार लंबी दूरी तक पैदल और साइकिल से चलने वाले प्रवासी मजदूरों की दुर्भाग्यपूर्ण और दयनीय स्थिति दिखा रही है. प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में आज भी सड़कों, राजमार्गों, रेलवे स्टेशनों और राज्य की सीमाओं पर फंसे हुए हैं. उन्हें केंद्र और राज्य सरकारें तुरंत पर्याप्त परिवहन व्यवस्था, शेल्टर और बिना शुल्क के भोजन-पानी उपलब्ध कराई जानी चाहिए.

भले ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस मुद्दे को राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर संबोधित किया जा रहा हो, लेकिन प्रभावी और स्थिति को बेहतर बनाने के लिए केंद्रित प्रयासों की आवश्यकता है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : ILO urges PM not to dilute labour laws

संदर्भ

भारत ने कुछ राज्यों में श्रमिक कानूनों को पिछले दिनों शिथिल किया था. इसी सन्दर्भ अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने चिंता प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहा है कि वे केन्द्रीय और राज्य सरकारों के अंतर्राष्ट्रीय श्रम कानूनों का पालन करने का सन्देश दें.

पृष्ठभूमि

  • विदित हो कि हाल ही में देश के 10 केंद्रीय श्रमिक संघों ने पत्र के माध्यम से देश में श्रम कानूनों के निलंबन के मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के समक्ष उठाया था और साथ ही इस विषय पर ILO के हस्तक्षेप की मांग की थी.
  • ILO की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे कुछ अन्य राज्यों ने आर्थिक तथा औद्योगिक प्रगति का हवाला देते हुए आगामी 2-3 वर्षों के लिये बड़ी संख्या में श्रम कानूनों को निलंबित कर दिया है.

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भारतीय श्रम कानून क्या है?

“श्रम” समवर्ती सूची में आता है. इसलिए केंद्र और राज्य दोनों अपने-अपने श्रम कानून बनाते हैं. अनुमान है कि वर्तमान में 200 से अधिक राज्य श्रम कानून और लगभग 50 केन्द्रीय श्रम कानून हैं. फिर भी देश में श्रम कानूनों की अभी तक कोई निश्चित परिभाषा नहीं है.

मोटे तौर पर उनको चार श्रेणियों में बाँटा जा सकता है –

  1. कार्यस्थल की दशा
  2. मजदूरी और वेतन
  3. सामाजिक सुरक्षा
  4. नौकरी की सुरक्षा और औद्योगिक सम्बन्ध

भारतीय श्रम कानूनों की आलोचना क्यों होती है?

कहा जाता है कि भारतीय श्रम कानून लचीले नहीं होते हैं. 100 से अधिक कामगारों को रखने वाले प्रतिष्ठानों को ढेर सारी कानूनी अपेक्षाएँ पूरी करनी पड़ती हैं. किसी को नौकरी से निकालने के लिए सरकार की अनुमति लेनी पड़ती है जिस कारण ये प्रतिष्ठान किसी को नौकरी पर रखने से बचते हैं. इससे एक ओर जहाँ इन प्रतिष्ठानों की वृद्धि कुंठित रहती है, वहीं दूसरी ओर, मजदूरों को कोई लाभ नहीं मिलता.

कई कानून आवश्यकता से अधिक जटिल हैं और उनका सही ढंग से कार्यान्वयन नहीं होता है. इस कारण भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है.

राज्य श्रमिक कानूनों में ढील क्यों दे रहे हैं?

  1. आर्थिक गतिविधियों को उत्प्रेरित करने के लिए कानूनों को शिथिल बनाया गया.
  2. घर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों को रोजगार चाहिए, इसलिए उद्योगों को एक लचीले रखो और हटाओ तन्त्र पर काम करने का प्रस्ताव दिया गया है जिससे कि वे अपना काम फिर से शुरू कर सकें.
  3. भारतीय श्रम कानून बहुत उलझे हुए हैं. निवेशक इसकी जटिलता को देख कर भाग खड़े होते हैं. इस कारण भी इन कानूनों को थोड़ा शिथिल किया गया है.

उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश में किये गये मुख्य परिवर्तन

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने अध्यादेश निर्गत कर के कुछ कानूनों को छोड़कर अन्य सभी कानूनों के दायरे से व्यवसायों को अगले तीन वर्षों के लिए बाहर कर दिया है.
  • मध्य प्रदेश सरकार ने भी कई श्रम कानून अगले 1000 दिनों के लिए स्थगित कर दिया.

चिंता का विषय

श्रम कानून को स्थगित करने और उद्योगों को खुला हाथ देने से बंदी और छंटनी की भरमार हो सकती है. फलतः देश में बेरोजगारी की स्थिति और बुरी होगी. कामगारों को उनके अधिकार से वंचित करने मानव एवं मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. कामगारों में असुरक्षा की भावना जनम सकती है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Both Koreas violated armistice agreement

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र कमान (United National Command – UNC) ने पिछले दिनों बताया कि मई 3 को उत्तर और दक्षिण दोनों कोरिया ने गोलीबारी करके युद्ध विराम समझौते (Korean Armistice Agreement) का उल्लंघन किया है. उसने बताया कि यह ठीक से कहा नहीं जा सकता कि पहले किसने गोली चलाई और यह जान-बूझकर हुआ या गलती से.

संयुक्त राष्ट्र कमान ने कहा कि ऐसा दुबारा नहीं हो इसके लिए वह दोनों देशों से बातचीत करेगा.

हुआ क्या था?

मई 3 को उत्तर कोरिया ने असैन्यीकृत जोन (demilitarized zone) के भीतर तैनात दक्षिण कोरिया के रक्षक पोस्ट (guard post) की दिशा में छोटे हथियारों से चार बार गोलियाँ चलाई थीं. बदले में दक्षिण कोरिया के सैनिकों ने दो गोलियाँ मारीं.

पृष्ठभूमि

उत्तरी और दक्षिणी कोरिया के बीच एक असैन्यीकृत जोन (demilitarized zone) है जो 1950-53 में हुए कोरिया युद्ध की समाप्ति पर बनाया गया था.

इस जोन को संभालने और युद्ध विराम को लागू करने के लिए वहाँ एक संयुक्त राष्ट्र कमान तैनात किया गया था.

Korean Demilitarized Zone – DMZ

कोरियाई युद्ध विराम समझौता (Korean Armistice Agreement)

  • कोरियाई युद्ध विराम समझौते पर 27 जुलाई, 1953 को हस्ताक्षर हुए थे. हस्ताक्षर करने वाले थे – संयुक्त राष्ट्र कमान (United Nations Command – UNC), कोरियन पीपल्स आर्मी (KPA), और चायनीज पीपल्स वालंटीयर आर्मी (PVA).
  • युद्ध विराम के माध्यम से कोरिया में अंतिम शान्तिपूर्ण समझौता होने तक सैन्य कार्रवाइयाँ पूरी तरह से बंद कर दी गईं. इसी युद्ध विराम में कोरिया के असैन्यीकृत जोन की स्थापना हुई जो उत्तर और दक्षिण कोरिया के लिए वास्तविक नई सीमा के रूप में काम करता है.
  • यह जोन (Korean Demilitarized Zone – DMZ) 38 अंश अक्षांश के समानांतर चलता है.
  • युद्ध विराम में युद्ध बंदियों के आदान-प्रदान का भी काम पूरा किया गया.

GS Paper 3 Source : The New York Times

UPSC Syllabus : Awareness in the fields of IT, Space, Computers, robotics, nano-technology, bio-technology and issues relating to intellectual property rights.

Topic : What is Antarctic Impulsive Transient Antenna or ANITA?

संदर्भ

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने समानांतर ब्रह्मांड (Parallel Universe) की खोज की है. विदित हो कि हाल ही में समानांतर ब्रह्मांड को लेकर अंटार्कटिका में एक शोध किया गया था. 

यह शोध कैसे किया गया?

  • वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिक इम्पलसिव ट्रांसिएंट एंटीना (Antarctic Impulsive Transient Antenna – ANITA) को एक विशाल बैलून के माध्यम से ऊँचाई तक पहुँचाया. इस बैलून को इतनी ऊंचाई पर पहुँचाया गया जहाँ हवा सूखी होती है और रेडियो ध्वनि की उपस्थिति नहीं होती.
  • बाह्य अन्तरिक्ष से पृथ्वी पर उच्च ऊर्जा वाले कण आते रहते हैं. जिन कणों का भार शून्य के लगभग होता है और जो निम्न उर्जा के होते हैं, जैसे- सब एटॉमिक न्यूट्रिनों (neutrinos), ये बिना किसी कण से टकराए पृथ्वी के आर-पार हो जाते हैं. लेकिन उच्च ऊर्जा वाले कण पृथ्वी के ठोस पदार्थ से टकरा कर रुक जाते हैं.
  • उच्च ऊर्जा वाले कण को केवल बाह्य अन्तरिक्ष से नीचे आते समय ही पता किया जा सकता है. लेकिन ANITA से ऐसे न्यूट्रिनों के बारे में पता चला जो पृथ्वी से ऊपर की ओर जा रहे थे अर्थात् ये कण समय में पीछे की तरफ चल रहे थे. जो समानांतर ब्रह्मांड के सिद्धांत को सही साबित करते हैं.

ANITA क्या है? 

  • ANITA नासा की ऐसी पहली चलंत वेधशाला है.
  • इसमें एक हीलियम गुब्बारे पर रेडियो एंटेना की एक लम्बी कतार होती है.
  • यह गुब्बारा अंटार्कटिक हिम चादर से 37,000 मीटर ऊपर उड़ता रहता है.’
  • इसका उपयोग अत्यंत उच्च वाले  ब्रह्मांडीय किरणों के न्यूट्रिनों का पता लगाना है.
  • इस  प्रकार की चलंत वेधशालाएँ प्रक्षेपित होती आई हैं. 
  • 2006 में अंटार्कटिका के McMurdo से ANITA-I छोड़ा गया था.
  • 2008 में वहीं से ANITA-II छोड़ा गया जिसमें 40 एंटेना थे
  • इससे भी अधिक सक्षम ANITA-III दिसम्बर, 2014 में उड़ाया गया.
  • दिसम्बर 2016 में ANITA-IV छोड़ा गया जिसमें ट्यून करने योग्य नौच फ़िल्टर और एक विकसित ट्रिगर प्रणाली थी.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation and pollution related issues.

Topic : Stubble burning

संदर्भ

पंजाब में गेहूँ कटाई का काम पूरा हो चुका है. इस बार पिछले दो वर्षों की तुलना में पराली जलाने की घटनाएँ अधिक हुई हैं. तात्पर्य यह है कि किसान पराली जलाने पर लगाये प्रतिबंध को मान नहीं रहे हैं.

ज्ञातव्य है कि इस प्रतिबंध को इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए 1981 में ही एक कानून बना था जिसका नाम वायु (प्रदूषण बचाव एवं नियंत्रण) अधिनियम / Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981 था.

मुख्य तथ्य

  • सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पंजाब में 15 अप्रैल से 24 मई के बीच फसल अवशिष्ट दहन की कुल 13,026 घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जबकि वर्ष 2019 तथा वर्ष 2018 में इसी दौरान ऐसी घटनाओं की संख्या क्रमश: 10,476 तथा 11,236 थी.
  • ‘पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ के अनुसार, फसल दहन की सबसे अधिक घटनाएँ मोगा ज़िले में, जबकि अमृतसर दूसरे स्थान पर है.

पराली जलाना क्या होता है?

नवम्बर महीने में धान की फसल कट जाने पर उसी खेत में गेहूँ बोने की जल्दबाजी होती है जिस कारण किसान फसल कटाई से बची हुई पराली को जलाकर गेहूँ की तैयारी झट-पट करने लगते हैं. ऐसा करने से न केवल वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे हानिकारक गैसों का ही, अपितु पार्टिकुलेट पदार्थ का भी उत्सर्जन होता है.

किसान पराली जलाना क्यों चाहते हैं?

  • किसान पराली जलने से होने वाले स्वास्थ्य के खतरे को समझते हैं, परन्तु उनके पास खेत को दुबारा झट-पट खेती के योग्य बनाने का और कोई दूसरा उपाय नहीं होता.
  • फसल कटाई से बची हुई पराली के निस्तारण के लिए नई तकनीक उपलब्ध है, परन्तु उनके लिए ये तकनीक सुलभ नहीं होती.
  • विशेषज्ञों का कहना है कि नई तकनीक के खर्चीले होने के कारण किसान पराली को जला देने में ही अपनी भलाई समझते हैं.

ऐसा नहीं है कि पराली जलाने से क्षति ही क्षति होती है. इसके कुछ लाभ भी हैं, जैसे –

  1. इससे खेत झट-पट तैयार हो जाता है.
  2. यह सबसे सस्ता उपाय है.
  3. यह खरपतवार को समाप्त कर देता है. इन खरपतवारों में कुछ ऐसे भी होते हैं जिनको कीटनाशक दवाओं से मारना कठिन होता है.
  4. यह कीड़े-मकौडों को मार देता है.
  5. इससे नाइट्रोजन टाई-अप में कमी आती है.

पराली जलाने से बचने के वैकल्पिक उपाय

  • धान के डंठलों से बिजली बनाई जा सकती है. ऐसा करने से किसान पराली को नहीं जलाएंगे और उन्हें रोजगार के अवसर भी मिलेंगे.
  • पराली को मिट्टी में ही दबा देने से मिट्टी की नमी में सुधार आएगा और इसके भीतर मृदा सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ेगी जो अंततः पौधों के बेहतर विकास में काम आएगी.
  • पराली को कम्पोस्ट करके जैव-खाद में बदला जा सकता है.
  • पराली से खमीर प्रोटीन भी निकल सकता है जिसका उद्योगों में उपयोग हो सकता है.

Prelims Vishesh

Chardham tunnel :-

  • बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) ने प्रतिष्ठित चारधाम परियोजना के तहत ऋषिकेश-धरासू हाईवे (NH-94) पर घनी आबादी वाले चंबा शहर के नीचे सुरंग निर्माण में सफलता हासिल कर ली है.
  • सुरंग बनाने का कार्य जनवरी 20019 में शुरू हुआ था. निर्धारित तिथि जनवरी 2021 से तीन माह पहले यातायात के लिए यह सुरंग खुल जाएगी सुरंग यानी अक्टूबर 2020 में सुरंग से यातायात शुरू हो जाएगा.
  • ऋषिकेश-धरासू राष्ट्रीय राजमार्ग पर चंबा नगर में आमतौर पर जाम जैसी स्थिति पैदा हो जाती है. जाम से निपटने के लिए चंबा शहर के ठीक नीचे से चारधाम ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत सुंरग का निर्माण किया जा रहा है.
  • इस टनल के बनने से न केवल गंगोत्री, यमुनोत्री का सफर आसान होगा, बल्कि चंबा को जाम से मुक्ति भी मिलेगी.
  • चारधाम परियोजना से उत्तराखंड में दुनिया भर के सैलानियों की सालभर चहलकदमी बनी रहेगी, जिससे राज्य वासियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.


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One Comment on “Sansar डेली करंट अफेयर्स, 28 May 2020”

  1. Stubble bunning jaise muddo par sarkar kya kadam utha rahi hai iss bare me bhi jikra kare
    Sir plzzz

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