Sansar डेली करंट अफेयर्स, 27 November 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 27 November 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Indus valley had dairy production way back in 3rd millennium BCE

संदर्भ

हाल ही में, 2500 ईसा पूर्व सिंधु घाटी सभ्यता में दुग्ध उत्पादन प्रचलित होने संबंधी साक्ष्यों की पहली बार वैज्ञानिक रूप से पुष्टि हुई है और यह अब तक, दुग्ध उत्पादन के प्राचीनतम ज्ञात प्रमाण है.

  1. गुजरात स्थित एक ग्रामीण बस्ती कोटड़ा भादली के पुरातात्विक स्थल पर पाए जाने वाले मिट्टी के बर्तनों में अवशेषों के आणविक रासायनिक विश्लेषण करने पर इन परिणामों का पता चला है.
  2. अध्ययन किए गए 59 नमूनों में से 22 में दुग्ध वसा (dairy lipids) की उपस्थिति देखी गई.

विदित हो वर्ष 2020 में सिंधु घाटी सभ्यता की खोज के 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं.

नवीनतम अध्ययन से प्राप्त प्रमुख निष्कर्ष

  1. निष्कर्षों के आधार पर पता चला है कि भारत में दुग्ध उत्पादन करीब 3000 साल ईसा पूर्व में शुरू हुआ, जो कि सिंधु घाटी सभ्यता को जीवित रखने के पीछे एक कारक हो सकता है.
  2. स्टेबल आइसोटोप एनालिसिस (Stable Isotope Analysis) प्रक्रिया के माध्यम से शोधकर्ता दुग्ध उत्पादन में प्रयोग किए जाने वाले पशुओं की पहचान करने में भी सक्षम थे, और इनके निष्कर्षो के अनुसार यह पशु बकरियों और भेड़ों के बजाय गाय और भैंस की तरह होते थे.
  3. दुग्ध उत्पादन का औद्योगिक स्तर: हड़प्पावासी दुग्ध-पदार्थों को केवल अपनी घरेलू जरूरतों के लिए उपयोग नहीं करते थे. पशुओं के बड़े झुंडों संबंधी साक्ष्यों से पता चलता है, कि विभिन्न बस्तियों के बीच विनियम व करने के उद्देश्य से दूध का निजी आवश्यकता से अधिक उत्पादन किया जाता था. इससे सिंधु घाटी सभ्यता में दुग्ध उत्पादन, औद्योगिक स्तर पर विकसित होने की संभावना प्रतीत होती है.

निष्कर्ष का महत्त्व

  1. अब तक हड़प्पा सभ्यता के बारे में चर्चा होने पर हमेशा महानगरीय शहरों और बड़े शहरों का उल्लेख किया जाता रहा है. किंतु, एक समानांतर अर्थव्यवस्था – कृषि-चारवाही अथवा ग्रामीण अर्थव्यवस्था, अभी तक ज्ञात नहीं थी.
  2. हम, सिन्धु घाटी सभ्यता के विशिष्ट शहरी नियोजन, व्यापारिक प्रणालियों, आभूषण-निर्माण कौशल के बारे में जानते है. लेकिन हमें, हड़प्पा काल के दौरानआम लोगों की जीवनशैली और उनके द्वारा इस समाज में किये जाने वाले योगदान के बारे में कोई अंदाजा नहीं है.

अध्ययन में प्रयुक्त पद्धति: कार्बन समस्थानिक अध्ययन

प्राचीन मिट्टी के बर्तनों के अवशेषों का अध्ययन करने के लिए आणविक विश्लेषण तकनीकों (Molecular analysis techniques) का उपयोग किया गया था.

  1. मिट्टी के बर्तन छिद्रयुक्त (porous) होते हैं. अतः जैसे ही इन बर्तनों में कोई तरल खाद्य पदार्थ रखा जाता है, ये उसे अवशोषित कर लेते हैं.
  2. इन बर्तनों में वसा और प्रोटीन जैसे खाद्य अणु परिरक्षित हो जाते हैं.
  3. कार्बन-16 (C16) और कार्बन-18 (C18) विश्लेषण जैसी तकनीकों का उपयोग करके वसा के स्रोत की पहचान की जा सकती है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific – UNESCAP

संदर्भ

एशिया एवं प्रशांत के लिये आर्थिक तथा सामाजिक आयोग (United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific – UNESCAP ) के अनुसार भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial tech) कोविड-19 से परे सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की त्वरित निगरानी कर सकती है. हाल ही में, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (UNESCAP) द्वारा एशिया और प्रशांत क्षेत्र में सतत विकास के लिए भू-स्थानिक कार्यप्रणाली (Geospatial Practices for Sustainable Development in Asia and the Pacific) रिपोर्ट 2020 जारी की गई थी.

इस रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताएँ

ESCAP सदस्य देशों द्वारा भू-स्थानिक डेटा के बढ़ते उपयोग के महत्व को स्वीकार किया गया.

इस क्षेत्र में तकनीकी और भू-स्थानिक नवाचारों को प्रोत्साहित करने हेतु सतत विकास के लिए अंतरिक्ष अनुप्रयोगों पर एशिया-प्रशांत कार्य योजना (Asia-Pacific Plan of Action on Space Application for Sustainable Development) (वर्ष 2018–2030) को अपनाया गया था.  

कार्य योजना के तहत छह् प्राथमिकता वाले विषयगत क्षेत्रों (जो SDG के कार्यान्वयन में सहयोग करेंगे) में शामिल हैं:

  • आपदा जोखिम प्रबंधन (SDG 2, 11 व 13)
  • प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (SDG 6, 9, 11, 12, 14 एवं 16
  • संयोजकता (SDG 3, 4, 9, 10 और 11)
  • सामाजिक विकास (SDG 1, 3 व 11)
  • ऊर्जा (SDG 13) तथा
  • जलवायु परिवर्तन (SDG 7)

रिपोर्ट में भारत की प्रशंसा की गई है

  • इसरो (ISRO) द्वारा विकसित “भुवन” (BHUVAN) भारत का एक राष्ट्रीय भू-पोर्टल है, जिसने कोविड-19 से निपटने के प्रयासों में सहायता की है.
  • इसरो के नेतृत्व में जल संसाधन सूचना प्रणाली (Water Resource Information System: WRIS)
  • शहरी नियोजन के लिए भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS) अंतर्निहित डेटा का उपयोग करना.

इसके अतिरिक्त, युवा श्रमिकों को अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए पुनः कौशल प्रदान करना, अन्य डेटा समुच्चयों के साथ मै स्थानिक डेटा को एकीकृत करना, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता बढ़ाना आदि अनुशंसाएं भी रेखांकित की गई थीं.

भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (Geospatial technology)

  • यह अध्ययन का एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), रिमोट सेंसिंग (RS) और ग्लोबल सिस्टम (GPS) शामिल हैं.
  • यह हमें पृथ्वी से संबंधित डेटा को प्राप्त करने में सक्षम बनाता है, जिसका उपयोग विश्लेषण, प्रतिरूपण, अनुकरण और प्रत्योक्षकरण (visualization) के लिए करते हैं.
  • यह हमें प्रकृति में अधिकांशत: सीमित संसाधनों के महत्व और प्राथमिकता के आधार पर सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है.

एशिया और प्रशांत महासागर के लिये संयुक्त राष्ट्र का आर्थिक और सामाजिक आयोग

  • एशिया और प्रशांत महासागर के लिये संयुक्त राष्ट्र का आर्थिक और सामाजिक आयोग (Economic and Social Commission for Asia and the Pacific- ESCAP) एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिये संयुक्त राष्ट्र की एक क्षेत्रीय विकास शाखा है.
  • यह 53 सदस्य देशों और 9 एसोसिएट सदस्यों से बना एक आयोग है. इसका अधिकार क्षेत्र पश्चिम में तुर्की से पूर्व में किरिबाती तक और दक्षिण में न्यूज़ीलैंड से उत्तरी क्षेत्र में रूसी संघ तक फैला हुआ है.
  • यही कारण है कि ESCAP संयुक्त राष्ट्र के पाँच क्षेत्रीय कमीशनों में सबसे व्यापक होने के साथ-साथ 600 से अधिक कर्मचारियों के साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र की संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी संस्था है.
  • इसकी स्थापना 1947 में की गई थी.
  • इसका मुख्यालय थाईलैंड के बैंकॉक शहर में है.
  • ESCAP सदस्य राज्यों हेतु परिणामोन्मुखी परियोजनाएँ विकसित करने, तकनीकी सहायता प्रदान करने और क्षमता निर्माण जैसे महत्त्वपूर्ण पक्षों के संबंध में कार्य करता है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : National Investigation Agency

संदर्भ

हाल ही में देश की आर्थिक संप्रभुता की सुरक्षा के उद्देश्य से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने विशाखापत्तनम के फर्जी भारतीय मुद्रा नोट (एफआईसीएन) मामले में तीसरा पूरक आरोप पत्र दायर किया है. गंभीर बात यह है कि इस मामले में बांग्लादेशी तस्कर भी संलिप्त थे और यह देश की आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील मामला है . उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष ही NIA संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से NIA के क्षेत्राधिकार में वृद्धि करते हुए इसे जाली मुद्रा से जुड़े अपराधों की जांच पड़ताल करने और अभियोग चलाने का अधिकार दिया गया था. तबसे लेकर अब तक राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने ऐसे आर्थिक अपराधों से सक्रियता से निपटने का प्रयास किया है.

NIA एक्ट क्या है?

  • यह एक आतंकवाद-निरोधी एजेंसी से सम्बंधित अधिनियम है जो 26/11 की मुंबई आतंकी घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में पारित हुआ था.
  • इस अधिनियम के अनुसार राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी भारत की एकमात्र वास्तविक संघीय एजेंसी ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार अमेरिका की फ़ेडरल ब्यूरो इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (FBI). सार्वदेशिक होने के कारण यह एजेंसी CBI से अधिक सशक्त है.
  • राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी अधिनियम, 2008 के अनुसार NIA के पास यह शक्ति है कि वह भारत के किसी  भी भाग में होने वाली आंतकवादी गतिविधियों का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला पंजीकृत कर सकती है और राज्य सरकार की अनुमति के बिना किसी राज्य में प्रवेश कर सकती है, जाँच कर सकती है और गिरफ्तारी कर सकती है.

2019 का NIA संशोधन अधिनियम

  • इस संशोधन के द्वारा कुछ ऐसे नए प्रकार के अपराध जोड़े गये हैं जिनकी जाँच और अभियोजन NIA कर सकती है. ये अपराध हैं – मानव तस्करी, नकली करेंसी, निषिद्ध हथियारों का निर्माण और विक्रय, साइबर आतंकवाद तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत अपराध.
  • इस संशोधन के द्वारा केंद्र सरकार को यह शक्ति दी गई है कि वह NIA के मुकदमों के लिए सेशन न्यायालयों को विशेष न्यायालय के रूप में नामित कर सकती है.
  • 2019 के NIA संशोधन के अनुसार, कोई NIA अधिकारी सम्बंधित राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की पूर्वानुमति लिए बिना धावे कर सकता है और उन संपदाओं को जब्त कर सकता है जिनके विषय में शंका हो कि ये आतंकी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं. इसके लिए NIA के अन्वेषण अधिकारी को अब मात्र अपने ही महानिदेशक की स्वीकृति लेनी होगी.

राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (NIA)

  • राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी भारत में आतंकवाद का मुकाबला करने हेतु भारत सरकार द्वारा स्थापित एक संघीय जाँच एजेंसी है.
  • यह केन्द्रीय आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में कार्य करती है.
  • एजेंसी राज्यों से विशेष अनुमति के बिना राज्यों में आतंक संबंधी अपराधों से निपटने के लिए सशक्त है.
  • एजेंसी 31 दिसम्बर 2008 को भारत की संसद द्वारा पारित अधिनियम राष्ट्रीय जाँच एजेंसी विधेयक 2008 के लागू होने के साथ अस्तित्व में आई थी.
  • राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को 2008 के मुंबई हमले के बाद स्थापित किया गया, क्योंकि इस घटना के बाद आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी की जरूरत महसूस की गई.
  • इसके संस्थापक महानिदेशक राधा विनोद राजू थे जिनका कार्यकाल 31 जनवरी 2010 को समाप्त हुआ.
  • आतंकी हमलों की घटनाओं, आतंकवाद को धन उपलब्ध कराने एवं अन्य आतंक संबंधित अपराधों का अन्वेषण के लिए NIA का गठन किया गया जबकि CBI आतंकवाद को छोड़ भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराधों एवं गंभीर तथा संगठित अपराधों का अन्वेषण करती है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization, of resources, growth, development and employment.

Topic : Foreign Direct Investment

संदर्भ

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2020 के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment – FDI) का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है.

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से संबन्धित आँकड़े

  • चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान मॉरीशस को पीछे छोडते हुए यू.एस. भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के दूसरे सबसे बड़े स्रोत के रूप में उभरा है.
  • अप्रैल-सितंबर 2020 के दौरान, भारत ने अमेरिका से 12 बिलियन डॉलर और मॉरीशस से 2 बिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त किया है.
  • उद्योग एवं आंतरिक व्यापार प्रोत्साहन विभाग (DPIIT) के अनुसार मॉरीशस अब चौथे स्थान पर खिसक गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की अवधि के दौरान मॉरीशस दूसरे स्थान पर था.
  • वहीं मौजूदा छमाही में भारत में सर्वाधिक एफ़डीआई के मामले में सिंगापूर 3 बिलियन डॉलर के साथ शीर्ष पर बना हुआ है.

FDI क्या है?

  • FDI का का पूरा नाम है – Foreign Direct Investment.
  • सरल शब्दों में कहें तो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी विदेश की कोई कंपनी भारत की किसी कंपनी में सीधे पैसा लगा दे. जैसे वॉलमार्ट ने हाल ही में फ्लिपकार्ट में पैसा लगाया है तो यह एक सीधा विदेशी निवेश है. भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें विदेशी कंपनियां भारत में पैसा नहीं लगा सकती हैं.

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

  • भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को दो अलग-अलग मार्गों के माध्यम से अनुमति दी जाती है- पहला, स्वचालित (Automatic) और दूसरा, सरकारी अनुमोदन के माध्यम से.
  • स्वचालित मार्ग में विदेशी संस्थाओं को निवेश करने के लिये सरकार की पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है.
  • हालाँकि उन्हें निर्धारित समयावधि में निवेश की मात्रा के बारे में भारतीय रिज़र्व बैंकको सूचित करना होता है.
  • विशिष्ट क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सरकारी अनुमोदन के माध्यम से होता है.

Prelims Vishesh

Bioluminescence :-

  • हाल ही में, महाराष्ट्र की तटरेखा के साथ नीले रंग का ज्वार दृष्टिगोचर हुआ था, जो जैव संदीप्ति नामक प्रक्रिया से प्रतिदीप्त नीले रंग के कारण उत्पन्न हुआ था.
  • जीवों द्वारा प्रकाश के उत्पादन और उत्सर्जन को जैव संदीप्ति (Bioluminescence) कहा जाता है.
  • नीला प्रकाश पादप प्लवकों (सूक्ष्म समुद्री पौधे) द्वारा उत्पन्न प्रकाश के उत्सर्जन की विशेषता है, जिसे सामान्यतया डायनोपलैजिलेट (dinoflagellates) के रूप में जाना जाता है.
  • प्रकाश, ल्यूसिफरेज (ऑक्सीकारक एंजाइम) प्रोटीन के कारण रासायनिक प्रतिक्रियाओं की एक श्रृंखला के माध्यम से उत्पन्न होता है.

National Medicinal Plants Board (NMPB) :-

  • हाल ही में, NMPB ने अपनी स्थापना के दो दशक पूर्ण किए.
  • NMPB की स्थापना वर्ष 2000 में औषधीय पादपों के क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए की गई थी तथा वर्तमान में यह बोर्ड आयुष मंत्रालय में स्थित है.
  • NMPB का मुख्य उद्देश्य हितघारकों अर्थात किसानों, व्यापारियों और विनिर्माताओं (उनमें से प्रत्येक को लाभान्वित करते चुए) के मध्य मजबूत समन्वय विकसित करके औषधीय पादपों के क्षेत्र का विकास करना है.
  • इसका लक्ष्य किसानों और जनजातियों की आय और आजीविका को बढ़ाना है.
  • यह कटाई के उपरांत प्रबंधन के माध्यम से उद्योग / विनिर्माताओं के साथ प्रतिगामी संयोजन (backward integration) की सुविधा प्रदान करेगा.

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