Sansar डेली करंट अफेयर्स, 27 November 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 27 November 2019


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Constitution- historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure.

Topic : Constitution Day of India

संदर्भ

प्रत्येक वर्ष नवम्बर 26 को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन भारत के संविधान को अंगीकार किया गया था. विदित हो कि यह संविधान आगे चल कर जनवरी 26, 1950 से लागू किया गया था.

  • संविधान का प्रारूप संविधान प्रारूप समिति के द्वारा तैयार किया गया था. संविधान सभा की स्थायी अध्यक्षता डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने की थी और प्रारूप समिति के अध्यक्ष बी.आर. अम्बेडकर थे.
  • पहले यह दिवस राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में मनाया जाता था.

संविधान का ब्रेल संस्करण

सरकार की एक परियोजना के अनुसार संविधान को ब्रेल लिपि में पाँच खंडों में पहली बार उपलब्ध कराया जाएगा जिससे दृष्टिबाधित व्यक्ति भी इसका लाभ उठा सकें. इस परियोजना में बौद्ध नेत्रहीन संघ, सावी फाउंडेशन तथा स्वागत थोराट का सहयोग लिया जा रहा है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : India and its neighbourhood- relations. Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : China-Pakistan Economic Corridor (CPEC)

संदर्भ

अमेरिका ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) से सिर्फ चीन को फायदा होगा. इसके विपरीत पाकिस्तान भारी कर्ज के बोझ तले दब जाएगा. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन के विल्सन सेंटर में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए अमेरिका की थिंकटैंक व दक्षिण एशिया मामलों की अतिरिक्त मंत्री एलिस वेल्स ने कहा कि कई बिलियन डॉलर की यह परियोजना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डालेगी.

CPEC

  • CPEC चीन के One Belt One Road (OBOR) कार्यक्रम का एक अंग है.
  • CPEC 51 अरब डॉलर की कई परियोजनाओं का समूह है.
  • प्रस्तावित परियोजना के लिए पाकिस्तान सरकार को जिन संस्थाओं द्वारा धन मुहैया कराया जाएगा, वे हैं – EXIM बैंक ऑफ़ चाइना, चाइना डेवलपमेंट बैंक और इंडस्ट्रियल & कमर्शियल बैंक ऑफ़ चाइना.
  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का उद्देश्य पाकिस्तान के बुनियादी ढांचों को तेजी से विस्तार करना और उन्नत करना है जिससे चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हो जाएँ.
  • CPEC अंततोगत्वा दक्षिणी-पश्चिमी पाकिस्तान के ग्वादर शहर को चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र Xinjiang को राजमार्गों और रेलमार्गों से जोड़ेगा.
  • CPEC की लम्बाई 3,000 km है जिसमें राजमार्ग, रेलवे और पाइपलाइन बिछेगी.

भारत की चिंताएँ

  • गलियारा का हिस्सा PoK से होकर गुजरेगा जिसे भारत अपना अभिन्न अंग मानता है. भारत का कहना है कि यह गलियारा उसकी क्षेत्रीय अखंडता को आहत करता है.
  • CPEC के कारण हिन्द महासागर में चीन का दबदबा बढ़ सकता है जिससे भारतीय हितों को क्षति पहुँच सकती है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : Exchange Traded Funds

संदर्भ

सरकार जल्द ही देश का पहला फिक्स्ड इनकम ईटीएफ पेश करने जा रही है, जो सरकारी कंपनियों के बांड पर आधारित होगा.

पृष्ठभूमि

भारतीय लोगों के निवेश पोर्टफोलियो में निश्चित आय वाले वित्तीय उपकरणों का एक बड़ा हिस्सा होता है. इनमें लघु बचत योजनाएं, फिक्स्ड डिपॉजिट, बांड और विभिन्न प्रकार के फिक्स्ड इनकम म्यूचुअल फंड शामिल हैं. इसके बावजूद भारत में अब तक एक भी बांड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) अस्तित्व में नहीं है, जबकि विकसित देशों में ये तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.

ETF क्या है?

  • ETF का पूरा नाम Exchange Traded Funds है. ये म्यूच्यूअल फण्ड हैं जो शेयरों की भाँति स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होते हैं और इनका क्रय-विक्रय होता है.
  • संस्थागत निवेशक इंडेक्स ETFs तैयार करते हैं और इस इंडेक्स में शेयर डालते और निकालते रहते हैं.
  • साधारणतः ETF का कोष निष्क्रिय रहता है और कोष प्रबंधक अपने मन से शेयर का चुनाव नहीं करता है. इसके बदले ETF एक इंडेक्स का अनुसरण करता है और इसके प्रदर्शन को सही ढंग से दिखलाने का प्रयास करता रहता है.
  • ETF के अन्दर कोई व्यक्ति बाजार खुले रहने पर क्षण-प्रतिक्षण की स्थिति के आधार पर बाजार के दाम पर इकाइयाँ खरीद और बेच सकता है.

ETF के लाभ

  • इसमें लागत कम आती है क्योंकि इसमें बड़े-बड़े कोष प्रबंधकों की सेवा की आवश्यकता नहीं पड़ती है.
  • ETF में निवेश के पोर्टफोलियो में बहुत प्रकार के विकल्प रहते हैं इसलिए कोष प्रबंधक के द्वारा गलत शेयर ख़रीदे जाने का जोखिम नहीं रहता है.
  • इंडेक्स प्रदाता सावधानी से इंडेक्स में दिए गये शेयरों का चुनाव करते हैं और समय-समय पर इनका संतुलन बनाए रखते हैं.
  • ETF में लगाये गये निवेश एक्सचेंज के माध्यम से निवेश की राशि कभी भी नकद वापस ली जा सकती है.
  • बांड ईटीएफ चूंकि इंडेक्स का अनुसरण करते हैं इसलिए एक्टिवली मैनेज्ड बांड म्यूचुअल फंड के मुकाबले बांड ईटीएफ में ट्रेड करना कम खर्चीला होता है. बांड ईटीएफ में ट्रेड करने के खर्च के अनुपात का अंतरराष्ट्रीय औसत 0.1-0.2 फीसदी है. जबकि एक्टिवली मैनेज्ड बांड म्यूचुअल फंड के मामले में यह औसत 0.3-0.5 फीसदी है.

आगे की राह

गत एक दशक में दुनियाभर में बांड ईटीएफ का बड़ी तेजी से विकास हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में सभी प्रकार के ईटीएफ का असेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) कुल चार लाख करोड़ डॉलर का है. इसका एक चौथाई हिस्सा यानी, एक लाख करोड़ डॉलर से अधिक का एयूएम सिर्फ बांड ईटीएफ का है. वहीं, भारत में जागरूकता, पारदर्शिता की कमी और उपलब्धता की दिक्कत जैसी संरचनागत बाधाओं के कारण कॉरपोरेट बांड में आम लोगों की प्रतिभागिता काफी कम है. बांड ईटीएफ इन बाधाओं का समाधान प्रस्तुत कर सकता है और कॉरपोरेट बांड बाजार में छोटे निवेशकों की प्रतिभागिता बढ़ा सकता है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Ken-Betwa river interlinking project

संदर्भ

केंद्र सरकार ने कहा है कि वह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को केन-बेतवा नदी को जोड़ने वाली परियोजना पर प्रगति करने पर जोर दे रही है.

पृष्ठभूमि

केन-बेतवा नदी संयोजन परियोजना शुरू से ही विवादों के घेरे में रही है. पर्यावरण और अन्य जीव प्रेमी तथा कई समाजसेवी संस्थाएं इसे पर्यावरण के विरुद्ध बताते हुए लगातार विरोध कर रही हैं. इस परियोजना में बुंदेलखंड के कई जनपद शामिल हैं. मध्य प्रदेश में स्थित बुंदेलखंड क्षेत्र के ही टाइगर पापुलेश (पन्ना टाइगर रिजर्व) भी परियोजना में शामिल कर लिया गया है. परियोजना को लेकर कुछ समाजसेवियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. कहा था कि परियोजना से पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचेगा, इसका सही आकलन नहीं किया गया है.

विरोध में दिए गये तर्क

  • केन-बेतवा गठजोड़ बुंदेलखंड और खासकर बांदा, हमीरपुर, महोबा आदि के लिए घाटे का सौदा और खतरनाक है. पहले से ही पानी की कमी से जूझ रही केन नदी में इस योजना के बाद पानी का अकाल और बढ़ेगा.
  • सरकार की मंशा जब खेत का पानी खेत में रखने की है तो ऐसे में नदियों को जोड़ने और केन का पानी बेतवा में डालने का क्या मतलब? बुंदेलखंड में अक्सर सूखा पड़ता है. केन-बेतवा गठजोड़ से इसके और बढ़ने के आसार है.
  • यह परियोजना प्रकृति विरोधी है. किसी भी दृष्टि से बुंदेलखंड के लिए हितकारी नहीं है. जितना पैसा इसमें खर्च हो रहा है. उतने पैसे से बुंदेलखंड में बड़ी संख्या में किसानों को छोटे सिंचाई के संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं.
  • 10 से ज्यादा गांवों के लोग बेघर हो जाएंगे. उनकी जमीन परियोजना में अधिग्रहीत कर ली जाएगी. उनकी खेती और आजीविका के साधन छिन जाएंगे. मुआवजे के नाम पर जो मिलेगा उससे कोई भी परिवार नई जगह नहीं बस सकेगा. पन्ना नेशनल पार्क इसका उदाहरण है.
  • लगभग 8500 आदिवासी किसान उजड़ जाएंगे. 6499 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि योजना में चली जाएगी. पानी को बांधने से या तो बाढ़ आएगी या सूखा पड़ेगा.

केन-बेतवा नदी संयोजन परियोजना

  • इसका शुभारम्भ 2005 को प्रायद्वीपीय नदी विकास योजना के अंतर्गत किया गया.
  • इस परिजना का नाम “अमृत क्रांति परियोजना” भी है.
  • इसे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में चलाया जा रहा है.
  • इसकी क्षमता लगभग 9 लाख हेक्टयेर की सिंचाई की है.
  • इस पर 72 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.
  • “दौधन बाँध” केन-बेतवा लिंक को जोड़ने हेतु बनाया गया है.
  • बनवा बाँध जलाशय बेतवा नदी पर मिलाया जायेगा.

लाभ

1. उत्तर प्रदेश में केन नदी कमान क्षेत्र के 2 लाख 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई का बंदोबस्त.
2. मध्य प्रदेश के केन नदी कमान क्षेत्र में 3 लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की उपलब्धता.
3. दो पावर हाउस बनाकर 72-78 मेगावाट बिजली का उत्पादन.
4. परियोजना के लिंक मार्ग वाले गांवों और कस्बों तथा जिला मुख्यालयों में पेयजल सुविधा.
5. जलाशय (बांध) में मत्स्य पालन से रोजगार का सृजन.
6. केन नदी में बाढ़ के पानी को बेतवा में डालकर बाढ़ की बर्बादी से बचाव.

नदी संयोजन के लाभ

  • इससे सुखाड़-उन्मुख तथा जल की कमी वाले क्षेत्रों को पानी मिलेगा और फसल की पैदावार बढ़ेगी.
  • नदी संयोजन परियोजनाओं को लागू करने से हिमालय से निकलने वाली नदियों में उपलब्ध अतिरिक्त पानी प्रायद्वीपीय भारत की ओर स्थानांतरित किया जायेगा, जहाँ पानी की कमी रहती है. प्रायद्वीपीय नदियों का भी बहुत सारा पानी समुद्र में चला जाता है और उसका कोई उपयोग नहीं होता है. ऐसे पानी को प्रायद्वीप के कम पानी वाले क्षेत्रों की ओर नदी संयोजन परियोजनाओं के माध्यम से ले जाया जायेगा.
  • विदित हो कि गंगा घाटी और ब्रह्मपुत्र घाटी में लगभग हर वर्ष बाढ़ आती है. नदी संयोजन परियोजनाओं के माध्यम से इन घाटियों में बह रही नदियों के जल की दिशा दूसरे कम पानी वाले क्षेत्रों में स्थानांतरित करने से बाढ़ की समस्या का समाधान सम्भव है.
  • नदियों को जोड़ने से घरेलू जलमार्ग के रूप में इनका उपयोग हो सकता है. ऐसा करने से सार्वजनिक यातायात और माल ढुलाई पहले से तीव्र हो जायेगी.
  • नदी संयोजन से यह लाभ होगा बनाई गई नई नहरों के आस-पास रहने वाले लोगों को रोजगार मिलेगा और मछली पालन का काम भी बड़े पैमाने पर हो सकेगा.

नदी संयोजन के संभावित दुष्प्रभाव

  • नदियों को जोड़ने से वर्तमान पर्यावरण में बहुत बड़ी उथल-पुथल होगी. इसके लिए नहरें और जलाशय बनाए जायेंगे जिनके चलते बहुत बड़े पैमाने पर जंगलों की सफाई की जायेगी. इसका प्रभाव वर्षा पर पड़ेगा और अंततः सम्पूर्ण जीवन चक्र प्रभावित हो जायेगा.
  • नदियों को जोड़ा भी जाए तो ऐसा अनुमान है कि 100 वर्ष के अन्दर ये अपना रास्ता और दिशा फिर से बदल सकते हैं.
  • नदियों के संयोजन से एक हानि यह है कि समुद्र में प्रवेश करने वाले मीठे जल की मात्रा घट जाएगी जिसके कारण सामुद्रिक जीवन तंत्र पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा और यह एक महान् पर्यावरणिक आपदा सिद्ध होंगे.
  • बहुत सारी नहरों और जलाशयों के निर्माण से लोगों को विस्थापित करना आवश्यक हो जायेगा और इनका पुनर्वास करना एक समस्या हो जाएगी.
  • नदी संयोजन के परियोजनाओं पर संभावित खर्च बहुत विशाल होगा और इसके लिए सरकार को विदेशी स्रोतों से ऋण लेना होगा. फलतः देश ऋण के जाल में फँस सकता है.

ये जरुर पढ़ें > भारत में बहुद्देशीय सिंचाई परियोजनाएँ


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : Coalbed methane (CBM)

संदर्भ

सरकार ने कोल इंडिया को अगले दो- तीन साल के दौरान कोयला खदानों से कम से कम प्रतिदिन 20 लाख घनमीटर प्राकृतिक गैस उत्पादन करने को कहा है. कोयला मंत्रालय ने इस संबंध में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की सलाहकार इकाई को सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी के पट्टे वाले क्षेत्रों में कोल-बेड-मीथेन (सीबीएम) के विकास कार्यों में सक्रियता के साथ शामिल होने को कहा है.

पृष्ठभूमि

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल ही कोल इंडिया के लिए प्राकृतिक गैस निकालने के नियमों में कुछ ढील दी थी. सरकार ने प्राकृतिक गैस के उत्पादन में तेजी लाने के लिए उसकी कोयला खदानों में छिपी प्राकृतिक गैस को निकालने के लिए इन नियमों में ढील दी थी.

कोल-बेड-मीथेन क्या है?

  • सीबीएम एक प्रकार की ऐसी प्राकृतिक गैस है जो कि कोयला खदानों के नीचे मोटी परतों में मौजूद होती है और इसे ड्रिलिंग करके निकाला जा सकता है।
  • कोल बेड मिथेन कोयला भंडारों के खनन के दौरान निकाला जाता है.
  • इसे यदि कुशलता से निकाला जाए तो यह ऊर्जा का महत्त्वपूर्ण संभावित स्रोत बन कर उभर सकता है.
  • भारत में कोयला खानों से मिथेन को निकालने और उसका उपयोग करने में नवीनतम प्रौद्योगिकी का अभाव और विषेषज्ञता व अनुभव की कमी आड़े आ रही है.
  • आर्थिक मामलों से सम्बंधित कैबिनेट कमेटी ने कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और उसकी सहायक कंपनियों को अपने क्षेत्रों में Coal Bed Methane की खोज करने और उसके दोहन करने की अनुमति दे दी है.
  • पृथ्वी के गर्भ में पौधों से जब कोयला बनने लगता है तो उसी समय इस प्रक्रिया से मिथेन भी उत्पन्न हो जाता है.
  • CBM में अन्य तत्त्व कम से कम होते हैं जिस कारण इसे स्वच्छतम ईंधन माना जाता है.
  • CBM को sweet gas भी कहते हैं. यह खट्टे गैस से भिन्न है जिसमें हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) होता है.

Prelims Vishesh

Rohtang Tunnel :-

  • लेह-मनाली राजमार्ग पर बन रही 8.8 किलोमीटर लंबी रोहतांग सुरंग जल्द ही चालू हो सकती है.
  • एक आधिकारिक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी कि मई 2020 तक इस सुरंग को चालू कर दिया जाएगा. इन इलाकों के लिए पर्यटन के क्षेत्र में यह मील का पत्थर साबित हो सकती है.
  • यह सुरंग रोहतांग दर्रे के नीचे 10,171 फीट की ऊंचाई पर बनाई जा रही देश की सबसे लंबी सड़क सुरंगों में से एक बन जाएगी. इस सुरंग को स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों की यात्रा को आसान बनाने की उम्मीद के रूप में देखा जाता है.

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