Sansar डेली करंट अफेयर्स, 27 February 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 27 February 2019


GS Paper  1 Source: PIB

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Topic : Heat Wave

संदर्भ

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority (NDMA) ने 27-28 फ़रवरी 2019 को लू (heat wave) के खतरे को कम करने के विषय में एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जिसका उद्देश्य विशिष्ट ताप कार्रवाई योजनाओं के निर्माण और कार्यान्वयन की आवश्यकता के प्रति राज्यों को संवेदनशील बनाना है.

इस कार्यशाला में जिन राज्यों ने लू के दुष्प्रभाव को घटाने की दिशा में प्रशंसनीय कार्य किया है, वे अन्य राज्यों और हितधारकों से अपने अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं के विषय में जानकारी साझा करेंगे.

लू क्या होती है?

यदि मैदानों में किसी स्थल में अधिकतम तापमान कम से कम  40°C  हो जाए तो उसे लू की अवस्था कहते हैं. इसी प्रकार यदि समुद्र तटीय स्थलों में अधिकतम तापमान  37°C और पहाड़ी क्षेत्रों में 30°C हो जाए तो कहा जाएगा कि वहाँ लू का प्रकोप है.

भारत में लू की स्थिति

  • 2014-17 से भारत में लू चलने का औसत समय 3 से 4 दिन था जबकि विश्व-भर में यह औसत 8-1.8 दिन ही होता है. ध्यान देने योग्य बात है कि 2016 से भारत में लोगों को लू लगने के लगभग 60 मिलियन मामले सामने आये थे जोकि 2012 की तुलना में 20 मिलियन अधिक है.
  • हाल ही में एक प्रतिवेदन आया है जो कहता है कि भारत उन देशों में से एक है जहाँ जलवायु परिवर्तन के चलते सामाजिक और आर्थिक क्षति सर्वाधिक होती है. इस कारण भारत ने 2017 में 75,000 मिलियन श्रम घंटे खोये थे जबकि 2000 में इस प्रकार गँवाए गये श्रम घंटों की संख्या 43,000 मिलियन थी.
  • गर्म हवाओं का सबसे अधिक दुष्प्रभाव कृषि प्रक्षेत्र पर होता है क्योंकि औद्योगिक एवं सेवा प्रक्षेत्रों में काम करने वालों की तुलना में किसान तापमान का अधिक सामना करने को विवश होते हैं.
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने प्रतिवेदित किया है कि 1901 से लेकर 2007 के बीच देश में औसत तापमान में 5°C से अधिक वृद्धि हुई थी.

भारत और अन्यत्र लू के खतरे क्यों बढ़ रहे हैं?

  • शहरी क्षेत्रों में अधिक से अधिक कंक्रीट फर्श होने और कम वृक्ष होने के कारण तापमान बढ़ जाता है.
  • शहरों के तापमान के कारण आस-पास का तापमान 3-4°C अधिक अनुभव होने लगता है.
  • विश्व-भर में पिछले 100 वर्षों से तापमान 8°C के औसत से बढ़ता आया है और रात्रिकालीन तापमान भी बढ़ रहा है.
  • जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि का शिखर-स्तर और उसके टिके रहने समय लगातार बढ़ रहा है.
  • मध्यम-उच्च गर्म हवा के क्षेत्र में पराबैंगनी किरणों का तीव्र होना भी गर्म हवाओं का एक कारण है.

GS Paper  1 Source: The Hindu

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Topic : Warming imperils clouds that deter ‘hothouse’ conditions

संदर्भ

कैलिफ़ोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान ने एक अध्ययन में पाया है कि सूरज की धूप को अन्तरिक्ष में वापस परावर्तित कर धरतीवासियों को तीव्र ताप से बचाने वाले समुद्री बादल वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा तिगुनी होने पर बिखर कर नष्ट हो जाते हैं.

अध्ययन में व्यक्त चिंताएँ

  • स्ट्रेटोक्यूमलस बादल उपोष्ण कटिबंध के महासागरों के 20% क्षेत्र पर छाये रहते हैं. ये बादल अधिकांशतः पश्चिमी समुद्रों के आस-पास, जैसे – कैलिफ़ोर्निया, मेक्सिको और पेरू के तटों पर, होते हैं. जब ये बादल विलीन होते हैं तो पृथ्वी का तापमान 8°C तक बढ़ जाता है.
  • तापमान में इतनी अधिक वृद्धि होने से ध्रुवीय बर्फ पिघल सकती है और समुद्र के तल को कई मीटर ऊपर उठा सकती है.
  • पृथ्वी इतनी गर्म पिछली बार 50 मिलियन वर्ष पहले इओसीन युग (Eocene Epoch) में हुआ करती थी जब आर्कटिक में मगर भ्रमण किया करते थे. उस समय की गर्मी की आधी गर्मी भी आज हो तो मनुष्य मात्र अपने-आप को उसके अनुसार ढाल नहीं पायेगा.

स्ट्रेटोक्यूमलस बादल क्या हैं?

स्ट्रेटोक्यूमलस बादल बादलों के उन निम्न-स्तरीय टुकड़ों को कहते हैं जिनका रंग चमकीला उजला से लेकर गहरा धूसर तक होता है. पृथ्वी में यही बादल सबसे अधिक देखे जाते हैं. इन बादलों के अलग-अलग आधार-स्तर होते हैं और इसी हिसाब से इनका रंग हल्का या गाढ़ा होता है. इन आधार-स्तरों के बीच में अधिकतर अंतराल पाया जाता है, परन्तु ये आपस में मिल भी जाते हैं.

स्ट्रेटोक्यूमलस बादल साधारणतः स्ट्रेटस बादल की परत के टूटने से बनते हैं. ये मौसम में परिवर्तन को सूचित करते हैं.

स्ट्रेटोक्यूमलस बादल किस मौसम में होते हैं?

स्ट्रेटोक्यूमलस बादल सभी प्रकार के मौसम में, गर्म अथवा बरसाती, में पाए जाते हैं. परन्तु ये बादल मौसम के परिवर्तन में कोई भूमिका नहीं निभाते हैं. इन बादलों को लोग बरसाती बादल समझ लेते हैं जबकि सच्चाई यह है कि इनसे हल्की रिम-झिम से अधिक वर्षा नहीं होती.


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : UN Women

संदर्भ

यू.एन. वीमेन ने हाल ही में ओडिशा सरकार की इस बात को लेकर सराहना की है कि उसने संसद और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रस्ताव दिया है.

पृष्ठभूमि

नवम्बर, 2018 में ओडिशा विधानसभा ने सर्वसम्मत ध्वनि-मत से एक संकल्प पारित किया था जिसमें विधानसभाओं पर संसद में स्त्रियों के लिए 33% आरक्षण का प्रस्ताव दिया गया था.

यू.एन. वीमेन

  • विश्व में महिलाओं के समानता के मुद्दे को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विश्व निकाय के भीतर एकल एजेंसी के रूप में यू.एन. वीमेन के गठन के लिए 2010 को स्वीकृति प्रदान की गई थी..
  • इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयार्क शहर में बनाया गया है.
  • यू.एन. वीमेन की वर्तमान प्रमुख दक्षिण अफ्रीका की पूर्व उप-राष्ट्रपति Phumzile Mlambo-Ngcuka हैं.
  • संस्था का प्रमुख कार्य महिलाओं के प्रति सभी तरह के भेदभाव को दूर करना तथा उनके सशक्तीकरण की दिशा में प्रयास करना है.
  • वास्तव में UN Women संयुक्त राष्ट्र के चार अलग-अलग भागों को विलय कर स्थापित किया गया था जो सभी लैंगिक समानता और स्त्री-सशक्तीकरण से जुड़े हुए थे. ये भाग निम्नलिखित थे –
  1. महिला प्रगति प्रभाग / Division for the Advancement of Women (DAW).
  2. अंतर्राष्ट्रीय महिला प्रगति औसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान / International Research and Training Institute for the Advancement of Women (INSTRAW).
  3. लैंगिक विषयों एवं महिला प्रगति के विशेष परामर्शी का कार्यालय / Office of the Special Adviser on Gender Issues and Advancement of Women (OSAGI)
  4. संयुक्त राष्ट्र महिला विकास कोष / United Nations Development Fund for Women (UNIFEM).

GS Paper  3 Source: The Hindu

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Topic : Banks may set repo rate as benchmark for lending

संदर्भ

यह संभावना है कि भारत के अधिकांश वाणिज्यिक बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक की रेपो दर को बाह्य मानक के रूप में चुनकर अप्रैल 1 से अपनी ऋण देने की दरों को निर्धारित करेंगे.

वर्तमान परिदृश्य

वर्तमान में सभी प्रकार की ऋण दरों के लिए MCLR को मानक माना जाता है. MCLR का अर्थ है कोष की सीमान्त लागत पर आधारित ऋण दर. अधिकतर देखा जाता है कि बैंक घरों एवं वाहनों के लिए ऋण देते समय उसका मूल्य MCLR में थोड़ा बढ़ाकर देते हैं.

रेपो दर ही क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक ने यह अनिवार्य कर दिया है कि ऋण देते समय मानक दर ऋण की सम्पूर्ण अवधि तक अपरिवर्तित रहनी चाहिए. इसमें परिवर्तन तभी हो जब ऋण लेने वाले की साख के मूल्यांकन में एक बड़ा परिवर्तन न हो. यदि ऋण देने की दर को रेपो दर से जोड़ दिया जाए तो रेपो दर में कोई परिवर्तन होने पर उसका घर और वाहन ऋण की दरों पर तत्काल प्रभाव पड़ जाएगा.

रेपो दर को मानक के रूप में अपनाने के लाभ

  • इससे ऋण की प्रणाली पहले से अधिक पारदर्शी हो जायेगी क्योंकि हर ऋण लेने वाला जान सकेगा कि स्थिर ब्याज दर क्या है और बैंक द्वारा निर्धारित स्प्रेड वैल्यू क्या है.
  • रेपो दर की मानक अपनाने से ऋण लेने वाले अलग-अलग बैंकों के द्वारा दिए जाने वाले ऋणों की आपस में तुलना कर सकेंगे.
  • इससे ऋण प्रणाली का मानकीकरण होगा और ऋण लेने वाले सरलता से इसे समझ सकेंगे. इसका अभिप्राय यह हुआ कि कोई किसी विशेष ऋण वर्ग के अंतर्गत अलग-अलग मानक नहीं अपना पायेंगे.

रेपो रेट क्या है?

इस संदर्भ में हमने पहले ही एक आर्टिकल लिखा है, उसे पढ़ लें > Repo Rate in Hindi

MCLR क्या है?

रिज़र्व बैंक ने MCLR (कोष की सीमान्त लागत पर आधारित ऋण दर) इसलिए शुरू की थी कि कम से कम दरों पर ऋण दिए जा सके और बाजार दर के ऊपर-नीचे जाने का लाभ उपभोक्ता को मिल सके. विदित हो कि MCLR को रिज़र्व बैंक ने 1 अप्रैल, 2016 को लागू किया था. इस प्रणाली ने वर्तमान गृह ऋण देने की वर्तमान आधार दर प्रणाली (base rate system) को बदल दिया था. इसके अनुसार बैंकों को अलग-अलग समयाविधियों के लिए अलग-अलग मानक दर निर्धारित करने थे. ये समयाविधियाँ थीं – एक दिन से लेकर एक महिना, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक.

MCLR के उद्देश्य

  • नीतिगत दरों के अनुरूप बैंकों द्वारा ऋण देने की दरों को ढालना.
  • ब्याज दरों के निर्धारण में बैंकों द्वारा अपनाई गई पद्धति में पारदर्शिता लाना.
  • बैंक ऋण इस प्रकार उपलब्ध कराना कि ब्याज दरें ऋण लेने वालों और बैंकों दोनों के लिए उचित हों.
  • बैंकों को अधिक प्रतिस्पर्धात्मक बनाना और उनके दीर्घकालीन मूल्य में वृद्धि करना तथा इस प्रकार आर्थिक विकास में योगदान करना.

GS Paper  3 Source: The Hindu

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Topic : PCA framework  

संदर्भ

सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों (इलाहाबाद बैंक और कारपोरेशन बैंक) तथा निजी क्षेत्र (धन लक्ष्मी बैंक) के एक बैंक को भारतीय रिज़र्व बैंक ने PCAFramework (त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई फ्रेमवर्क) से छूट दे दी है. विदित हो कि इससे पहले इस प्रकार की छूट बैंक ऑफ़ इंडिया, ओरिएंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स और बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र को दी गई थी. इस प्रकार अब PCA ढाँचे के अंदर छह बैंक शेष रह गये हैं.

PCA Framework क्या है?

PCA का फुल फॉर्म है – Prompt Corrective Action. बैंकों के 2017-18 के वित्तीय नतीजे आने के बाद इन बैंकों की परिसंपत्तियों के पुनर्गठन के लिए सरकार ने एक समिति का गठन किया था.

इस फ्रेमवर्क के दायरे में आने के बाद —->

  • ये बैंक शाखा विस्तार नहीं कर सकते.
  • RBI इनको लाभांश भुगतान (dividend payment) करने से रोक सकता है.
  • इन बैंकों द्वारा लोन देने पर भी RBI के द्वारा कई शर्तें लगाई जा सकती हैं.
  • RBI इन बैंकों के एकीकरण, पुनर्गठन और बंद करने की कार्रवाई कर सकता है.
  • RBI इन बैंकों के प्रबंधन के मुआवजे और निदेशकों के फीस पर प्रतिबंध लगा सकता है.

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई फ्रेमवर्क (PCA Framework) के उपबंध 1 अप्रैल, 2017 को लागू किये गये थे. लागू होने के तीन वर्ष बाद इस फ्रेमवर्क की समीक्षा होनी है.

PCA कब लागू की जाती है?

किसी भी बैंक पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई की व्यवस्था तब लागू की जाती है जब उसका डूबा हुआ कुल ऋण 12% से अधिक हो जाता है और उसके चार लगातार वर्षों की परिसंपत्तियों (assets) पर नकारात्मक प्रतिलाभ (return) मिलने लगता है.

PCA के प्रभाव

  • क्योंकि PCA में आ जाने के बाद कोई बैंक ऋण की मात्रा का विस्तार का नहीं कर सकता है इसलिए कंपनियों, विशेषकर MSMEs कंपनियों, को ऋण मिलना रुक जाता है. यदि और सरकारी बैंक PCA में चले जाते हैं तो MSMEs इकाइयों और छोटे और मध्यम प्रतिष्ठानों को ऋण में अतिशय कठिनाई होगी.
  • PCA का बड़ी कंपनियों पर तुरंत कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि वे निगम बांड बाजार से ऋण उठा सकते हैं.

Prelims Vishesh

World’s largest Bhagavad Gita :

  • हाल ही में प्रधानमन्त्री ने दिल्ली के ISKCON मंदिर में विश्व की सबसे बड़ी और सबसे भारी भगवद्गीता का अनावरण किया.
  • यह पुस्तक 8 मीटर लम्बी और 2 मीटर चौड़ी है. इसमें 670 पृष्ठ हैं और इसका भार 800 किलोग्राम है.
  • यह विश्व की सबसे विशाल पवित्र पुस्तक है जिसकी छपाई इटली के मिलान शहर में YUPO सिंथेटिक कागज़ पर की है जो न फटता है और न ही पानी से खराब होता है.

riceXpert :-

ICAR-NRRI द्वारा निर्मित ऐप – riceXpert एक ऐसा ऐप है जिसमें किसानों को इन विषयों पर क्षण-प्रतिक्षण जानकारी उपलब्ध है – कीड़े, पोषक पदार्थ, खरपतवार, नेमाटोड, रोग-विषयक समस्याएँ, अलग-अलग पर्यावरण के लिए चावल की अलग-अलग जातियां, अलग-अलग खेतों के लिए खेती के औजार और फसल कटाई के बाद के कार्यकलाप.

Exercise Sampriti – 2019 :

  • भारत और बांग्लादेश के संयुक्त सैन्य-अभ्यास संप्रीति -2019 का आयोजन बांग्लादेश के तनगैल में हो रहा है.
  • यह इस प्रकार का आठवां अभ्यास है.

‘Delhi Declaration’ on digital health :

  • चौथे वैश्विक डिजिटल स्वास्थ भागीदारी शिखर सम्मेलन में दिल्ली घोषणा नामक डिजिटल स्वास्थ्य प्रस्ताव को अंगीकृत किया गया है.
  • इसमें डिजिटल स्वास्थ्य के मामले में WHO के नेतृत्व की अपेक्षा जतलाई गई और डिजिटल स्वास्थ्य से जुड़े विषयों में समन्वयन के लिए एक विशेष तंत्र की स्थापना पर बल दिया गया.

Quick Reaction Surface-to-Air missiles (QRSAM) :-

  • रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ज़मीन से हवा में मार करने वाली क्विक रिएक्शन मिसाइल (QRSAM) का ओडिशा तट के आईटीआर चांदीपुर से सफलतापूर्वक परीक्षण किया है.
  • दोनों मिसाइलों का परीक्षण विभिन्न ऊंचाइयों और स्थितियों के लिए किया गया.

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