Sansar डेली करंट अफेयर्स, 27 August 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 27 August 2019


GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resources.

Topic : International Day for Remembrance of the Slave Trade and Abolition – August 23

संदर्भ

प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी अगस्त 23 को दास व्यापार एवं उन्मूलन के स्मरण में अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया गया.

विदित हो कि इस दिवस का सूत्रपात UNESCO ने 1998 को किया था. इस संगठन ने एक अंतर्राष्ट्रीय अंतर-सांस्कृतिक परियोजना भी बनाई थी जिसका नाम “दास मार्ग (The Slave Route)” रखा गया था. इस परियोजना का उद्देश्य दास व्यापार के इतिहास को अभिलेखबद्ध करना था.

भारत से दासों का अन्यत्र गमन

भारतीयों को विदेश में ले जाकर उनसे दास के रूप में काम करवाने की परम्परा 1834 में चालू हुई थी और यह 1922 तक चली. यद्यपि 1917 में ही गाँधी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के दबाव में इम्पीरियल  लेजिसलेटिव कौंसिल ने दास व्यापार को प्रतिबंधित कर दिया था.

ब्रिटिश शासन की इस नीति के कारण भारत के असंख्य लोग जाकर विदेशों में बस गये और आज भी वे केरेबियाई देशों, फिजी, रियूनियन, नटाल, मॉरिशस, मलेशिया, श्रीलंका आदि में रहते हैं.

इतिवृत्त

  • दासता के उन्मूलन के पश्चात् उपनिवेशवादियों ने अन्यत्र काम कराने के लिए स्थानीय लोगों को भेजने की प्रथा चलाई थी. अंग्रेजों ने वेस्ट इंडीज में चीनी और रबर के बाग़ लगाये थे जिनको चलाने के लिए उन्हें मजदूरों की आवश्यकता थी.
  • जैसे-जैसे ब्रिटिश साम्राज्य और देशों में फैलता गया तो उसने ठेके पर मजदूर (contract labour) भेजने की प्रथा आरम्भ की क्योंकि तब तक दासता को अमानवीय माना जाने लगा था.
  • ब्रिटेन भारत के अतिरिक्त चीन से भी ऐसे मजदूर अपने उपनिवेशों में ले गया.
  • यद्यपि उन्हें दास नहीं कहा जाता था परन्तु वे मूलतः दास ही थे क्योंकि उनसे बलपूर्वक मजदूरी कराई जाती थी और वे जिनके अन्दर होते थे वे लोग स्वयं को दासों का स्वामी मानते थे.
  • दासों को अपने परिवार के साथ जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था. इनको यह अधिकार दिया गया था कि वे 10 वर्ष बीतने पर अपने देश लौट आ सकते हैं. परन्तु ऐसा हुआ नहीं और अंग्रेज़ ऐसा चाहते भी थे.
  • ये दास गिरमिटिया मजदूर कहलाते थे अर्थात् सरकारी मजदूर कहलाते थे. इन्हें जहाज पर बैठाकर ले जाया करता था. चेष्टा होती थी कि हर 100 पुरुष पर 40 महिलाएँ भी जाएँ.
  • गिरमिटिया मजदूरों के शोषण और उनकी पीड़ा संगीत पुस्तकों, छायाचित्रों और अन्य साहित्यों के माध्यम से अभिलेखबद्ध हुई है. केरीबियाई उपनिवेशों तक पहुँचने में गिरमिटिया मजदूरों को 160 दिन लगते थे और जो जहाज इसके लिए प्रयुक्त होते थे वे सवारी जहाज न होकर मालवाहक जहाज होते थे.
  • जहाज के यात्रा के बीच ही यूरोपीय कप्तान मजदूरों का शारीरिक और यौन शोषण करते थे. ऐसी दशा में समुद्र में कूद जाने के अतिरिक्त मजदूरों के पास बचने का कोई उपाय नहीं होता था.
  • गन्तव्य तक पहुँच जाने के पश्चात् भी मजदूरों को आराम नहीं था क्योंकि उन्हें अच्छा भोजन, साफ़ पानी, साफ़-सफाई की सुविधा और चिकित्सा की सुविधा नहीं मिलती थी.
  • कहा जाता है कि महात्मा गाँधी ने ही गिरमिटिया शब्द गढ़ा था एवं वे स्वयं को पहला गिरमिटिया बताते थे.

GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : WorldSkills Kazan 2019

संदर्भ

रूस के कज़ान नगर में स्थित कज़ान एक्सपो अंतरर्राष्ट्रीय प्रदर्शिनी केंद्र में 45वाँ वर्ल्डस्किल्स कम्पटीशन आयोजित हो रहा है.

यह प्रतियोगिता क्या है?

  • यह व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल्यगत उत्कृष्टता से सम्बंधित एक प्रतिस्पर्धात्मक आयोजन है जो प्रत्येक दूसरे वर्ष वर्ल्ड स्किल इंटरनेशनल द्वारा सम्पन्न किया जाता है.
  • यह इस प्रकार का विश्व का सबसे बड़ा आयोजन होता है जिसमें विश्व-भर के उद्योगों का प्रतिनिधित्व होता है.

उद्देश्य

इस प्रतिस्पर्धा का उद्देश्य व्यावसायिक कौशल्य सीखने के लाभ को उजागर करना और साथ ही व्यावसायिक योग्यताओं को उतना ही सम्मान देना है जितना कि शैक्षणिक योग्यताओं को दिया जाता है.

वर्ल्डस्किल्स इंटरनेशनल क्या है?

यह एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो भविष्य में उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसरों के लिए राष्ट्रीय कौशल्य प्रतिस्पर्धाओं के माध्यम से कार्यबल तैयार करता है और प्रतिभाओं का चयन करता है. इस संस्था को पहले अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संगठन कहा जाता था. वर्तमान में इस संस्था से 79 सदस्य देश और क्षेत्र जुड़े हुए हैं.  इसकी स्थापना 1940 के दशक में द्वितीय विश्व युद्ध से नष्ट हुई अर्थव्यवस्थाओं को संभालने के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन करने हेतु हुई थी.

वर्ल्डस्किल्स इंडिया क्या है?

वर्ल्डस्किल्स इंडिया कौशल्य विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अधीनस्थ राष्ट्रीय कौशल्य विकास निगम (National Skill Development Corporation – NSDC) की एक पहल है. यही निगम 2011 से विश्व के अलग-अलग स्थानों में आयोजित होने वाली वर्ल्ड स्किल्स इंटरनेशनल की प्रतियोगिताओं में भारत की प्रतिभागिता सुनिश्चित करता है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : IMF Standards for data dissemination

संदर्भ

विशेष डाटा प्रेषण मानक के विषय में विश्व मुद्रा कोष ने पिछले दिनों 2018 का प्रतिवेदन प्रकाशित किया है. इसमें बताया गया है कि विशेष डाटा प्रेषण मानक (Special Data Dissemination Standard – SDDS) के लिए निर्धारित अपेक्षाओं में से भारत ने कई अपेक्षाएँ पूरी नहीं की है. विदित हो कि इस प्रकार का प्रतिवेदन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष प्रत्येक वर्ष निकालता है.

पृष्ठभूमि

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष प्रत्येक सदस्य देश के लिए इस संदर्भ में प्रतिवेदन प्रकाशित करता है कि उसने विशेष डाटा प्रेषण के लिए विहित मानकों को पूरा किया है अथवा नहीं. इसके लिए डाटा की 20 श्रेणियाँ बनाई गई है जिनके माध्यम से यह पता लगाने की चेष्टा होती है कि किसी देश का आर्थिक स्वास्थ्य कैसा चल रहा है. इनमें से कुछ प्रमुख श्रेणियाँ हैं – राष्ट्रीय लेखा (GDP, GNI), उत्पादन सूचकांक, आजीविका, केंद्र सरकार के कार्यक्रम आदि.

प्रतिवेदन में वर्णित तीन प्रकार की चूकें –

  1. पहली चूक वह है जिसमें SDDS में दिए गये समय पर डाटा प्रेषण का काम नहीं होता है और देर हो जाती है.
  2. दूसरी चूक तब होती है जब कोई देश किसी डाटा श्रेणी को अपने अग्रिम निर्गम कैलंडर (Advance Release Calendars – ARC) में सूचीबद्ध नहीं करता है.
  3. यदि किसी विशेष समय के लिए डाटा का प्रेषण होता ही नहीं है तो यह तीसरे प्रकार की चूक कहलाती है.

SDDS क्या है?

  • SDDS एक वैश्विक मापदंड है जो बतलाता है कि किसी देश ने अपनी जनता को मैक्रो इकनोमिक आँकड़े प्रेषित किये हैं अथवा नहीं और यदि किये हैं तो किस प्रकार.
  • यदि कोई देश इन मानकों को पूरा करता है तो माना जाएगा कि वहाँ की सांख्यिक नागरिकता अच्छी है.
  • जो देश अपने यहाँ SDDS लागू करते हैं वे इन चार क्षेत्रों में अच्छी प्रथाओं का पालन करने के प्रति अपनी सहमति व्यक्त करते हैं : डाटा का विस्तार, सावधिकता और सामयिकता; उस डाटा तक लोगों की पहुँच; डाटा की सत्यता और डाटा की गुणवत्ता.

महत्त्व

डाटा प्रेषण मानक यह सुनिश्चित करते हैं कि जन साधारण को समय पर और व्यापक रूप से आँकड़े प्रेषित हो जाएँ. ऐसा करने से माइक्रो इकनोमिक नीतियों को सबल बनाने और वित्तीय बाजारों की कार्यशैली को कुशल बनाने में सहायता मिलती है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : India and its neighbourhood- relations / Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP)

संदर्भ

पिछले दिनों भारत सरकार के वाणिज्य विभाग ने सूचित किया कि पिछले छह वर्षों में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) के विषय में हितधारकों के साथ 100 से अधिक परिचर्चाएँ हो चुकी हैं.

RCEP से सम्बंधित कुछ तथ्य

  • RCEP आसियान के दस सदस्य देशों (ब्रुनेई, म्यांमार, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम) तथा आसियान से सम्बद्ध अन्य छ: देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड) के लिए प्रस्तावित है.
  • RCEP के लिए वार्ताएँ कम्बोडिया में नवम्बर 2012 में आयोजित आसियान के शिखर सम्मलेन में औपचारिक रूप आरम्भ की गई थीं.
  • RCEP का लक्ष्य है अधिकांश शुल्कों और गैर-शुल्क अड़चनों को समाप्त कर वस्तु-व्यापार को बढ़ावा देना. अनुमान है कि ऐसा करने से क्षेत्र के उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर गुणवत्ता युक्त उत्पादनों के अधिक विकल्प प्राप्त हो सकेंगे. इसका एक उद्देश्य निवेश से सम्बंधित मानदंडों को उदार बनाना तथा सेवा व्यापार की बाधाओं को दूर करना भी है.
  • हस्ताक्षरित हो जाने पर RCEP विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क व्यापार हो जायेगा. विदित हो कि इस सम्बद्ध 16 देशों की GDP $50 trillion की है और इन देशों में साढ़े तीन अरब लोग निवास करते हैं.
  • भारत की GDP-PPP $9.5 trillion की है और जनसंख्या एक अरब तीस लाख है. दूसरी ओर चीन की GDP-PPP $23.2 trillion की है और जनसंख्या एक अरब 40 लाख है.

RCEP को लेकर भारत की चिंताएँ

यद्यपि RCEP पर सहमति देने के लिए भारत पर बहुत दबाव पड़ रहा है, परन्तु अभी तक भारत इससे बच रहा है. इसके कारण निम्नलिखित हैं –

  • ASEANआयात शुल्कों को समाप्त करना चाह रहा है जो भारत के लिए लाभप्रद नहीं होगा क्योंकि इसका एक सीधा अर्थ होगा की चीनी माल बिना शुल्क के भारत में आने लगेंगे. यहाँ के उद्योग को डर है कि ऐसा करने से घरेलू बाजार में गिरावट आएगी क्योंकि चीनी माल अधिक सस्ते पड़ेंगे.
  • भारत का यह भी जोर रहा है कि RCEP समझौते में सेवाओं, जैसे – पेशेवरों को आने-जाने के लिए दी जाने वाली कामकाजी VISA, को भी उचित स्थान दिया जाए. अभी तक सेवाओं से सम्बंधित प्रस्ताव निराशाजनक ही रहे हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में कोई भी सदस्य देश सार्थक योगदान करने के लिए तैयार नहीं होगा.

इसमें चीन की इतनी रूचि क्यों हैं?

चीन वस्तु-निर्यात के मामले में विश्व का अग्रणी देश है. इस बात का लाभ उठाते हुए वह चुपचाप अधिकांश व्यापारिक वस्तुओं पर से शुल्क हटाने की चेष्टा में लगा रहता है और इसके लिए कई देशों पर दबाव बनाता रहता है. उसका बस चले तो व्यापार की 92% वस्तुओं पर से शुल्क समाप्त ही हो जाए. इसलिए चीन RCEP वार्ता-प्रक्रिया में तेजी लाने से और शीघ्र से शीघ्र समझौते को साकार रूप देने में लगा हुआ है.

RCEP के माध्यम से मुक्त एशिया-प्रशांत व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area of the Asia-Pacific – FTAAP) स्थापित करने का लक्ष्य है जिसमें 21 देश होंगे. इन देशों में एशिया-प्रशांत देशों के अतिरिक्त अमेरिका और चीन भी हैं, किन्तु भारत नहीं है.

ज्ञातव्य है कि FTAAP की एक अन्य योजना Trans Pacific Partnership से अमेरिका हट गया है. इससे चीन के लिए अपनी पहल को आगे बढ़ाने का रास्ता प्रशस्त हो गया है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Awareness in space.

Topic : Gravitational Lensing

संदर्भ

गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग नामक प्राकृतिक घटना के माध्यम से नये तारे कैसे जन्मते हैं, इसके बारे में अध्ययन करने हेतु नासा के जेम्स वेब अन्तरिक्ष दूरबीन को एक प्रकार की टाइम मशीन के रूप में शोधकर्ताओं द्वारा प्रयोग किया जा रहा है.

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गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग क्या है?

  • गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग आइन्स्टाइन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत पर आधारित एक प्रक्रिया है जिसका सरल शब्दों में अभिप्राय है कि आयतन प्रकाश को मोड़ देता है.
  • किसी विशालाकार पिंड का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र अन्तरिक्ष में दूर-दूर तक फैला होता है. यह निकट से गुजरती हुई प्रकाश किरणों को मोड़कर किसी अन्य दिशा में जाने को विवश कर देता है.
  • पिंड जितना विशाल होगा उसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र भी उतना ही विशाल होगा. फलस्वरूप प्रकाश किरणें उतनी ही अधिक मुड़ेंगी. स्मरण रहे कि चश्मे के लेंस में अधिक अपवर्तन लाने के लिए उसे अधिक मोटा बनाया जाता है.

गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग उपयोगी क्यों है?

  • ब्रह्मांडवेत्ताओं के लिए गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग उपयोगी है क्योंकि यह डार्क मैटर की मात्रा और वितरण के प्रति प्रत्यक्ष रूप से संवेदनशील होता है.
  • लेंसिंग से यह पता चल सकता है कि ब्रह्मांड में डार्क मैटर कितना है और किस प्रकार वितरित हो रखा है.
  • लेंसिंग से डार्क मैटर के अस्तित्व को सत्यापित करने में सहायता मिलती है.

जेम्स वेब अन्तरिक्ष दूरबीन क्या है?

  • जेम्स वेब अन्तरिक्ष दूरबीन को कभी-कभी वेब अथवा JWST भी कहा जाता है.
  • वस्तुतः यह अन्तरिक्ष में स्थापित एक बड़ी वेधशाला है जो इन्फ्रारेड तरंगदैर्घ्य के माध्यम से खोज करने में सक्षम है.
  • हबल अन्तरिक्ष की तुलना में इसकी संवेदनशीलता अत्यधिक है और यह प्रकाश के अधिक लम्बे तरंगदैर्घ्य का भी अध्ययन कर सकता है.
  • ये तरंगदैर्घ्य जितने लम्बे होंगे यह दूरबीन भूतकाल के अन्दर उतने ही आगे जा सकती है और ब्रह्मांड के निर्माण के समय बनने वाली पहली आकाशगंगाओं को भी देख सकती है. साथ ही यह उन धूल भरे बादलों के अन्दर भी झाँककर देख सकती है जहाँ आज की तिथि में तारे और ग्रह बन रहे हैं.

जेम्स वेब कौन हैं?

जेम्स ई. वेब (1906-1992) नासा के दूसरे प्रशासक थे जिनके नेतृत्व में चंद्रमा पर मनुष्य को ले जाने वाले अन्तरिक्षीय कार्यक्रम संचालित हुए थे और जिन्होंने 75 से भी अधिक प्रक्षेपण किये थे.


Prelims Vishesh

Bavar-373 :

ईरान का दावा है कि उसने पिछले दिनों एक लम्बी दूरी वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली बना ली है जो सतह से सतह 200 किलोमीटर तक मार कर सकती है.

Bt cowpea :

  • नाइजीरिया संशोधित जीन वाले बीटी. लोबिया की खेती की मंजूरी देने वाला विश्व का पहला देश नाम गया है.
  • बताया जाता है कि यह लोबिया कीट-प्रतिरोधक है और कुपोषण, विशेषकर बच्चों के कुपोषण से लड़ने में सहायक सिद्ध हो सकती है. यद्यपि आलोचकों का दावा है कि इसमें ट्रांसजीन Cry1Ab होता है जो मानव यकृत कोशिकाओं के लिए विषाक्त होता है और यह पशुओं की प्रतिरोधक क्षमता में उथल-पुथल ला सकती है.

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