Sansar डेली करंट अफेयर्स, 26 September 2020

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संयुक्त राष्ट्र संघ

Sansar Daily Current Affairs, 26 September 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : International Treaties & Agreements.

Topic : Armenia Vs Azerbaijan Dispute

संदर्भ

विवादित नागोर्नो-करबख (Nagorno-Karabakh) क्षेत्र को लेकर आर्मीनिया और अज़रबैजान के मध्य एक पुनः फिर हिंसक संघर्ष का प्रारम्भ हो गया है, जिसके चलते इस क्षेत्र विशिष्ट में स्थिरता लाने और शांति स्थापित करने के प्रयासों को लेकर चिंताएँ और भी अधिक बढ़ गई हैं.

nagorno-karabakh map

प्रमुख बिंदु

  • इस संबंध में निर्गत आधिकारिक सूचना के अनुसार, दोनों देशों के मध्य हुए हिंसक संघर्ष के कारण अब तक कुल 16 लोगों मारे जा चुके हैं, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं.
  • विदित हो कि गत लगभग चार दशक से भी अधिक समय से मध्य एशिया में आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच चल रहे क्षेत्रीय विवाद और जातीय संघर्ष ने नागोर्नो-करबाख क्षेत्र के आर्थिक-सामाजिक और राजनीतिक विकास को भी बहुत ही प्रभावित किया है.

विवाद: पृष्ठभूमि

  • वर्तमान नागोर्नो-करबाख क्षेत्र को लेकर आर्मीनिया और अज़रबैजान के मध्य विवाद का प्रारम्भ वर्ष 1918 में तब हुआ था, जब ये दोनों देश रूसी साम्राज्य से आजाद हुए थे.
  • 1920 के दशक की शुरुआत में, दक्षिण काकेशस में सोवियत शासन लागू किया गया और तत्कालीन सोवियत सरकार ने लगभग 95% अर्मेनियाई जनसंख्या वाले नागोर्नो-करबाख क्षेत्र को अज़रबैजान के अन्दर एक स्वायत्त क्षेत्र बन दिया.
  • यद्यपि स्वायत्त क्षेत्र बनने के पश्चात् भी इस इलाके को लेकर दोनों देशों (आर्मीनिया और अज़रबैजान) के मध्य संघर्ष चलता रहा. हालाँकि सोवियत शासन के दौरान दोनों देशों के बीच संघर्ष को रोक दिया है.
  • परन्तु, जैसे-जैसे सोवियत संघ का पतन होना प्रारम्भ हुआ, वैसे-वैसे ही आर्मीनिया और अज़रबैजान पर इसकी पकड़ भी दुर्बल होती गई. इसी दौरान वर्ष 1988 में अज़रबैजान की सीमाओं के अन्दर होने के बाद भी नागोर्नो-काराबाख की विधायिका ने आर्मेनिया में सम्मिलित होने का प्रस्ताव पारित किया.
  • साल 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया और नागोर्नो-काराबाख स्वायत्त क्षेत्र ने एक जनमत संग्रह के जरिये खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया. वहीं दूसरी ओर, अज़रबैजान ने इस जनमत संग्रह को मानने से अस्वीकार कर दिया.
  • सोवियत संघ के विघटन के साथ ही रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण इस क्षेत्र को लेकर आर्मीनिया और अज़रबैजान के मध्य युद्ध का आगाज़ हो गया. विदित हो कि आर्मीनिया और अज़रबैजान दोनों ही समय-समय पर एक दूसरे के ऊपर नागोर्नो-काराबाख स्वायत्त क्षेत्र में जातीय नरसंहार का आरोप लगाते रहे हैं.
  • साल 1992 तक इस क्षेत्र में हिंसा ने बहुत ही जोर पकड़ लिया और इसके चलते हज़ारों नागरिक को विस्थापित होने के लिए विवश होना पड़ा, जिसने अंतर्राष्ट्रीय निकायों और संस्थानों को इस क्षेत्र पर ध्यान देने और कार्यवाही करने के लिये विवश किया.
  • मई 1994 में दोनों देशों के मध्य संघर्ष को बढ़ते देख रूस ने आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच युद्ध विराम की मध्यस्थता की, परन्तु लगभग तीन दशकों से यह संघर्ष आज भी चल रहा है और समय-समय पर संघर्ष विराम उल्लंघन और हिंसा के उदाहरण देखने को मिल जाते हैं.
  • अप्रैल 2016 में इस क्षेत्र में हिंसक संघर्ष बहुत ही तीव्र हो गया, जिसके चलते इस क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था. इस संघर्ष को फोर-डे वॉर (Four-Day War) के रूप में भी जाना जाता है.

हालिया संघर्ष के निहितार्थ

  • विवादित नागोर्नो-काराबाख स्वायत्त क्षेत्र को लेकर आर्मेनिया और अज़रबैजान के मध्य साल 1994  के पश्चात् से ही छोटे-मोटे संघर्ष जारी हैं और मध्यस्थता के सभी प्रयास दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने में नाकाम सिद्ध हुए हैं.
  • हालाँकि इसके बावजूद ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच एक संपूर्ण युद्ध की संभावना बहुत ही कम है.
  • इस विवादित क्षेत्र में सैकड़ों नागरिक बस्तियाँ विद्यमान है, और यदि दोनों देशों के मध्य व्यापक पैमाने पर युद्ध का प्रारम्भ होता है तो इस क्षेत्र में रहने वाले लोग प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित होंगे और बहुत ही व्यापक रूप से विस्थापन देखा जाएगा.
  • किसी भी प्रकार का व्यापक सैन्य संघर्ष तुर्की और रूस जैसी क्षेत्रीय शक्तियों को इस युद्ध में भाग लेने के लिये विवश कर देगा और तुर्की तथा रूस दोनों ही देश इस युद्ध में शामिल होना नहीं चाहेंगे, इसलिये इस क्षेत्र में शांति स्थापित करना उनकी प्राथमिकता होगी.
  • व्यापक पैमाने पर युद्ध होने के चलते इस क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात भी बाधित होगा. विदित हो कि अज़रबैजान, जो प्रतिदिन लगभग 800,000 बैरल तेल का उत्पादन करता है, यूरोप और मध्य एशिया के लिये एक महत्त्वपूर्ण तेल और गैस निर्यातक है. यही सभी वजहें हैं जिससे दोनों देशों के मध्य युद्ध की संभावना बहुत ही अल्प है.

भारत और आर्मेनिया-अज़रबैजान विवाद

  • यद्यपि भारत ने अभी तक इस संबंध में अभी अपनी कोई विशिष्ट प्रतिक्रिया नहीं है, परन्तु क्षेत्रीय शांति और स्थिरता से संबंधित इस मामले पर भारत बारीकी से निगरानी रख रहा है. ज्ञातव्य है कि भारत के अर्मेनिया और अज़रबैजान दोनों के बीच अच्छे संबंध रहे हैं.
  • हाल के कुछ वर्षों में भारत और आर्मेनिया के मध्य द्विपक्षीय सहयोग में बहुत ही तेज़ी देखी गई है. आर्मेनिया के लिये भारत के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करना इस दृष्टि से भी बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं कि भारत, अज़रबैजान-पाकिस्तान-तुर्की के रणनीतिक गठजोड़ को एक संतुलन प्रदान करता है.
  • भारत अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC) का हिस्सा है, जो कि भारत, ईरान, अफगानिस्तान, अज़रबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल की आवाजाही हेतु जहाज़, रेल और सड़क मार्ग का एक नेटवर्क है.
  • ज्ञातव्य है कि अज़रबैजान, तुर्की की भाँति कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की स्थिति का समर्थन करता है.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Destination North East 2020

संदर्भ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 सितंबर, 2020 को वर्चुअल माध्यम से चार दिवसीय महोत्सव ‘डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट-2020’ का उद्घाटन किया. केंद्रीय गृहमंत्री पूर्वोत्तर परिषद के अध्यक्ष भी हैं.

उद्देश्य: पूर्वोत्तर के पर्यटन स्थलों के साथ-साथ देश की विभिन्न संस्कृतियों का एक दूसरे के साथ परिचय कराना.

डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट 2020 का विषय: ‘द इमर्जिंग डिलाइटफुल डेस्टिनेशंस’ (The Emerging Delightful Destinations) है, जो पर्यटन सेक्टर के गति पकड़ने पर पर्यटन स्थलों को मजबूत और अधिक आकर्षक बनाने की बात करता है.

  • यह कार्यक्रम मुख्य रूप से पर्यटन पर केंद्रित है. डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय का एक कैलेंडर ईवेंट है, जिसे पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के अन्य हिस्सों के करीब लाने और राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से संकल्पित किया गया है.
  • 14वें वित्त आयोग ने पूर्वोत्तर के लिए आवंटन में 251 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए 3,13,375 करोड़ रुपये दिये.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : NPPA caps price of liquid medical oxygen, medical oxygen cylinders

संदर्भ

COVID-19 महामारी के दौरान, देश में उचित मूल्य पर मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceutical Pricing Authority– NPPA) द्वारा छह महीने के लिए मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर और लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की कीमतों को कम कर दिया गया है.

संबंधित प्रावधान

  1. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वाराआपदा प्रबंधन अधिनियम’, 2005 की धारा 10 (2) (L) के तहत प्राप्त शक्तियों को, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) को हस्तांतरित करते हुए लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) तथा मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडरों की उपलब्धता तथा कीमतों को नियंत्रित करने हेतु सभी अधिकार दे दिए गए हैं.
  2. ऑक्सीजन अन्तःश्वसन (Oxygen Inhalation), चिकित्सीय गैस, आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची(National List of Essential Medicines NLEM) के अंतर्गत अधिसूचित संरूपण है.

आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (NLEM) के बारे में

औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत, ‘राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा केवल आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (NLEM) में दर्ज दवाओं की कीमतों पर निगरानी और नियंत्रण द्वारा किया जाता है.

  1. आवश्यक दवाएं (Essential medicines) वे होती हैं, जो आबादी के अधिकांश लोगों की स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकता वाली आवश्यकताओं को पूरा करती हैं.
  2. NLEM का मुख्य उद्देश्य तीन महत्वपूर्ण पहलुओं, अर्थात लागत, सुरक्षा और प्रभावकारिता पर विचार करते हुए दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना है.

DPCO, 2013 का अनुच्छेद 19, असाधारण परिस्थितियों में दवा की कीमतों में वृद्धि अथवा कमी से संबंधित है. हालांकि, कीमतों की सीमा में सुधार हेतु कोई निश्चित पूर्व उदाहरण अथवा फॉर्मूला निर्धारित नहीं है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : Prime Minister Narendra Modi virtually addressed the annual UN General Assembly

संदर्भ

हाल ही में 75वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 2020 सत्र को भारतीय प्रधानमंत्री ने भी संबोधित किया. संयुक्त राष्ट्र महासभा में वर्चुअल रूप दिया गया भारतीय प्रधानमंत्री के संबोधन का मूलपाठ नीचे बिन्दुवार तरीके से वर्णित किया गया है.

भारतीय प्रधानमंत्री के संबोधन का मूलपाठ

  • 1945 की दुनिया जिस समय संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ तब से लेकर आज तक वैश्विक परिवेश का काफी बदल गया है क्या उस हिसाब से संयुक्त राष्ट्र में व्यापक बदलाव हुए हैं?
  • 21वीं सदी में हमारे वर्तमान व भविष्य की आवश्यकताएं और चुनौतियां अब कुछ और हैं. इसलिए
  • आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थितियों में हुआ था, उसका स्वरूप क्या आज भी प्रासंगिक है? सदी बदल जाये और हम न बदलें तो बदलाव लाने की ताकत भी कमजोर हो जाती है |
  • पिछले वर्षों में संयुक्त राष्ट्र के नाम कई उपलब्धियां रही हैं एवं तृतीय विश्व युद्ध नहीं हुआ लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि इस संस्था के होने के बावजूद भी अनेकों युद्ध हुए तथा अनेकों गृहयुद्ध भी हुए हैं.
  • संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रियाओं में बदलाव, व्यवस्थाओं में बदलाव, स्वरूप में बदलाव, आज समय की मांग है.
  • भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र के रिफ़ार्म (reforms) को लेकर जो प्रक्रिया (Process) चल रही है, उसके पूरा होने का बहुत लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. आज भारत के लोग चिंतित हैं कि क्या ये प्रक्रिया कभी एक तार्किक अंत (logical end) तक पहुंच पाएगा. आखिर कब तक, भारत को संयुक्त राष्ट्र के निर्णय लेने की संरचना (decision making structures) से पृथक रखा जाएगा?
  • दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र जहाँ विश्व की 18 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या रहती है. एक ऐसा देश, जहां सैकड़ों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं, अनेकों पंथ हैं तथा अनेकों विचारधाराएं हैं. जिस देश ने सैकड़ों वर्षों तक वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने और सैकड़ों वर्षों की गुलामी, दोनों को जिया है,को संयुक्त राष्ट्र में यथोचित स्थान में मिलना एक चिंता का विषय है.
  • संयुक्त राष्ट्र जिन आदर्शों के साथ स्थापित हुआ था और भारत की मूल दार्शनिक सोच बहुत मिलती जुलती है, अर्थात दोनों अलग-अलग नहीं है. संयुक्त राष्ट्र के इसी हॉल में ये शब्द अनेकों बार गूंजा है- वसुधैव कुटुम्बकम. हम पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं. यह हमारी संस्कृति, संस्कार और सोच का हिस्सा है. संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने हमेशा विश्व कल्याण को ही प्राथमिकता दी है. भारत वो देश है जिसने शांति की स्थापना के लिए लगभग 50 शांति मिशन (peacekeeping missions) में अपने जांबाज सैनिक भेजे हैं. भारत वो देश है जिसने शांति की स्थापना में सबसे ज्यादा अपने वीर सैनिकों को खोया है.
  • 02 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ (International Day of Non- Violence) और 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ ( International Day of Yoga), इनकी पहल भारत ने ही की थी.
  • आपदा प्रतिरोधी संरचना हेतु गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance), ये भारत के ही प्रयास हैं.
  • भारत ने सदैव पूरी मानव जाति के हित के बारे में सोचा है, न कि अपने निहित स्वार्थों के बारे में. भारत की नीतियां हमेशा से इसी दर्शन से प्रेरित रही हैं. भारत की पड़ोसी प्रथम नीति (Neighbourhood First Policy) से लेकर एक्ट ईस्ट पालिसी (Act East Policy) तक, क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (Security And Growth for All in the Region) की सोच हो या फिर हिन्द-प्रशांत (Indo Pacific) क्षेत्र के प्रति हमारे विचार, सभी में इस दर्शन की झलक दिखाई देती है.

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के 75वें सम्‍मेलन की थीम

  • संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के 75वें सम्‍मेलन की थीम है- ”हमारी आकांक्षा का भविष्य और आवश्‍यकता के अनुरूप संयुक्‍त राष्‍ट्र, बहुपक्षवाद के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि और प्रभावी बहुपक्षीय प्रयासों से कोविड संकट से निपटना”. संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly- UNGA)
  • 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly-UNGA) की स्थापित की गयी थी.
  • यह संयुक्त राष्ट्र संघ में नीति-निर्माण , विचार-विमर्श और विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर प्रतिनिधि संस्था के रूप में काम करती है; अर्थात संयुक्त राष्ट्र महासभा अपने चार्टर के तहत कवर किये गए अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बहुआयामी और बहुपक्षीय चर्चा के लिये एक बेहतरीन मंच उपलब्ध कराती है.
  • वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देश हैं.
  • तुर्की के राजनयिक वोल्कन बोजकिर (Volkan Bozkir) को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75 वें सत्र का अध्यक्ष चुना गया है. महासभा अध्यक्ष का कार्यकाल एक वर्ष का होता है.
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा का मुख्यालय न्यूयॉर्क(अमेरिका) में है.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Science and Technology.

Topic : PINAKA

संदर्भ

हाल ही में पिनाका हथियार प्रणाली (Pinaka weapon system) की अथारिटी होल्डिंग सील्ड पार्टिकुलर (Authority Holding Sealed Particulars – AHSP) की जिम्मेदारी डीआरडीओ द्वारा डीजीक्यूए (DGQA) को सौंप दी गई है.

एएचएसपी (AHSP) को किया गया यह हस्तांतरण पिनाका रॉकेट, लॉन्चर, बैटरी कमांड पोस्ट(Battery Command Posts), लोडर सह प्रतिकृति (Loader Cum Replenishment) और प्रतिकृति वाहनों (Replenishment Vehicles) के उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाओं (Quality Assurance processes) के सफल स्थापना को इंगित करता है.

पिनाका (PINAKA)

  • पिनाका (PINAKA) स्वदेश विकसित मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम है. इस हथियार प्रणाली को डीआरडीओ की पुणे स्थित प्रयोगशाला में विकसित किया गया है.
  • इसकी रेंज 37.5 किमी है.
  • पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट 44 सेकंड में 12 रॉकेटों को लॉन्च करने की क्षमता से युक्त है.
  • पिनाका हथियार प्रणाली अत्याधुनिक गाइडेंस किट और आधुनिक नेवीगेशन तथा नियंत्रण प्रणाली से भी लैश है.पिनाका का नेविगेशन इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) के जरिये किया जाता है, जिसे ‘नाविक’ भी कहते हैं.
  • पिनाका रॉकेट और इसके ग्राउंड सिस्टम वर्तमान में आयुध कारखानों, बीईएमएल, बीईएल, टाटा पावर और एल एंड टी डिफेंस द्वारा बनाये जा रहे हैं.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defense Research and Development Organization) भारत की रक्षा से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिये देश की अग्रणी संस्था है.
  • यह संगठन भारतीय रक्षा मंत्रालय की एक आनुषांगिक ईकाई के रूप में काम करता है.
  • इसकी स्थापना 1958 में भारतीय थल सेना एवं रक्षा विज्ञान संस्थान के तकनीकी विभाग के रूप में की गयी थी.

गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय (DGQA)

  • यह रक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) के अंतर्गत कार्य करता है.
  • गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय (DGQA), सशस्त्र बलों को आपूर्ति किये जाने वाले हथियारों, गोला-बारूद, उपकरणों की पूरी श्रृंखला के लिये गुणवत्ता आश्वासन (Quality Assurance- QA) प्रदान करता है.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization, of resources, growth, development and employment.

Topic : Guidelines to support Agarbatti industry

संदर्भ

सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने अगरबत्ती बनाने में शामिल कारीगरों और अगरबत्ती उद्योग के लिए पहुंच और समर्थन के विस्तार हेतु 4 सितंबर, 2020 को नए दिशा-निर्देश जारी किए.

महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • एमएसएमई मंत्रालय की ‘स्फूर्ति’ (पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए फंड योजना) के तहत उचित विपणन व्यवस्था के साथ कुल 50 करोड़ रुपये की लागत से 10 क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे.
  • देश भर में 20 पायलट परियोजनाओं के माध्यम से 400 स्वचालित अगरबत्ती बनाने की मशीनें और अतिरिक्त 500 पेडल संचालित मशीनें ‘स्वयं सहायता समूह (एसएचजी)’ और व्यक्तियों को वितरित की जाएंगी.
  • उत्पाद के सभी पहलुओं पर काम करना इस उद्देश्य के लिए एफएफडीसी (फूल और सुगंध विकास केंद्र) कन्नौज में ‘उत्कृष्टता केंद्र’ स्थापित किया जा रहा है.
  • एमएसएमई मंत्रालय के तहत वैधानिक संगठन, खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) कार्यक्रम को कार्यान्वित करेगा.

Prelims Vishesh

RBI releases cybersecurity vision framework 2020-2023 for urban cooperative banks :-

  • इसका उद्देश्य लगातार बढ़ रहे सूचना प्रौद्योगिकी एवं साइबर खतरे के विरुद्ध USBs क्षेत्र की साइबर सुरक्षा स्थिति को मजबूत करना है.
  • आकार, क्षेत्र, वित्तीय स्वास्थ्य और डिजिटल गहनता के संदर्भ में USBs की विविधता को ध्यान में रखते हुए, यह माना गया है कि USBs के लिए साइबर सुरक्षा दिशा-निर्देशों को निर्धारित करते समय “वन साइज फिट्स ऑल” या कोई एक ही उपाय उपयुक्त नहीं हो सकता है.
  • इसने पांच-स्तम्भों पर आधारित रणनीतिक दृष्टिकोण GUARD (गार्ड), अर्थात् -शासन प्रणाली प्रबंधन (Governance Oversight), उपयोगी तकनीकी निवेश (Utile Technology Investment), उपयुक्त विनियमन और पर्यवेक्षण (Appropriate Regulation and Supervision), मजबूत सहयोग एवं विकासशील आवश्यक सूचना प्रौद्योगिकी (Robust Collaboration and Developing necessary IT) व साइबर सुरक्षा कौशल (cyber security skills set) प्रस्तावित किया है.

DDU-GKY :-

  • ग्रामीण विकास मंत्रालय की योजना DDU-GKY, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का एक हिस्सा है.
  • यह ग्रामीण निर्धन परिवारों की आय में विविधता लाने और ग्रामीण युवाओं की करियर संबंधी आकांक्षाओं को पूर्ण करने के दोहरे उद्देश्यों पर केंद्रित है.
  • यह 15 से 35 वर्ष (अनुसूचित जाति / जनजाति, महिला, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG)/ दिव्यांग के लिए: 45 वर्ष तक) की आयु तक के निर्धन परिवारों के ग्रामीण युवाओं को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है.
  • यह कम से कम 75% प्रशिक्षित उम्मीदवारों के लिए गारंटीकृत प्लेसमेंट सुनिश्चित करने का प्रयास करता है.

Ministry of Agriculture launched Centralized Farm Machinery Performance Testing Portal  :-

  • हाल ही में कृषि मंत्रालय ने केंद्रीकृत कृषि मशीनरी परीक्षण पोर्टल का शुभारम्भ किया.
  • इसका उद्देश्य कृषि मशीनरी परीक्षण संस्थानों की सेवाओं में सुधार करना तथा मशीनों के परीक्षण और मूल्यांकन की पूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है.
  • यह पोर्टल निर्बाध तरीके से उनकी मशीनों के परीक्षण की प्रगति के लिए आवेदन करने, संप्रेषण और निगरानी करने में विनिर्माताओं को सुविधा प्रदान करेगा, क्योंकि इस पर किसी भी स्थान से एवं इंटरनेट से संबद्ध किसी भी उपकरण से सुगमता से पहुंचा जा सकता है.

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