Sansar डेली करंट अफेयर्स, 25 September 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 25 September 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and flora, their structure, mandate.

Topic : Arab League

संदर्भ

अरब-इजरायल डील के विरोध में फिलिस्तीन के अरब लीग काउंसिल की अध्यक्षता को छोड़ने के बाद अब कतर ने भी अरब लीग के 154 वें नियमित सत्र की अध्यक्षता करने से इनकार कर दिया.

पृष्ठभूमि

कतर को वर्णानुक्रम में चुना गया था और लीग परिषद की प्रक्रिया के नियमों के अनुच्छेद VI के अनुसार, जिसमें कहा गया था: “यदि मंत्री स्तर पर परिषद के अध्यक्ष पद ग्रहण करने में असमर्थ हैं, तो अस्थायी राष्ट्रपति पद के प्रतिनिधि को सौंपा जाता है. वह देश जो अगले सत्र का नेतृत्व करेगा.” फिलिस्तीन ने पिछले मंगलवार को इजरायल साथ सामान्यीकरण के जवाब में, मौजूदा सत्र के लिए अरब लीग की परिषद की अध्यक्षता करने के अपने अधिकार को छोड़ने का फैसला किया. फिलिस्तीनी विदेश मंत्री रियाद अल-मलिकी ने पुष्टि की। उन्होने कहा कि लीग के महासचिव द्वारा अरब शांति पहल के स्पष्ट उल्लंघन में, इजरायल के साथ इमरती और बहरीन के सामान्यीकरण का समर्थन करने के बाद यह निर्णय आया.

अरब लीग क्या है?

  • अरब लीग (Arab League) अरब देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है जिसके सदस्य उत्तरी अफ्रीका और हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका और अरेबिया में अवस्थित अरबी देश हैं.
  • इसकी स्थापना 1945 के 22 मार्च को काहिरा में हुई थी. उस समय इसके ये छः सदस्य थे – मिस्र, इराक, जॉर्डन, लेबनन, सऊदी अरबिया और सीरिया. आज के दिन इस लीग में 22 सदस्य हो गये हैं, परन्तु गृह युद्ध के कारण सीरिया इस लीग से नवम्बर, 2011 से निलम्बित चल रहा है.
  • अरब लीग का मुख्य लक्ष्य हैं – सदस्य देशों के बीच नजदीकी रिश्ते कायम करना, आपसी सहयोग का समन्वयन करना, प्रत्येक देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता को सुरक्षित करना, अरबी देशों के हितों पर विचार करना आदि.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic :  Roles and limitations of Select Committees

संदर्भ

हाल ही मेंसरकार द्वारा विपक्ष की माँगों को निरस्त करते हुए राज्यसभा में दो महत्त्वपूर्ण कृषि विधेयकों को पारित करा दिया गया. विपक्ष कृषि विधेयकों को राज्यसभा की एक प्रवर समिति (Select Committee) को भेजने की माँग कर रहा था.

विपक्ष द्वारा, विधेयक की संसदीय समिति द्वारा जाँच नहीं कराये जाने का विरोध किया जा रहा था, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई.

प्रवर समिति क्या होती है?

प्रवर समिति (Select Committee) का गठन किसी विधेयक विशेष की जांच के लिए किया जाता है और संबंधित सदन के सांसद ही प्रवर समिति के सदस्य हो सकते है.

  1. प्रवर समिति की अध्यक्षता सत्ताधारी दल के सांसद द्वारा की जाती है.
  2. चूंकि प्रवर समितियों का गठन एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए किया जाता हैअतः इन्हें, इनकी रिपोर्ट आने के बाद भंग कर दिया जाता है.

parliamentary committee

संसदीय समितियों का वर्गीकरण 

  • संसदीय समितियाँ कई प्रकार की होती हैं, जिन्हें उनके कार्य, सदस्यता और कार्यकाल की अवधि के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है. 
  • विधेयक, बजट और मंत्रालयों की नीतियों की जाँच करने वाली समितियों को विभागीय स्थायी समितियाँ कहा जाता है. संसद में इस प्रकार की 24 समितियाँ हैं. प्रत्येक समिति में 31 सदस्य (21 लोकसभा और 10 राज्यसभा) होते हैं.
  • विभागीय स्थायी समितियों का कार्यकाल एक वर्ष का होता है, जिसके बाद उनका पुनर्गठन किया जाता है. लोकसभा की अवधि के दौरान उनका कार्य जारी रहता है. कोई भी मंत्री इन समितियों का सदस्य नहीं बन सकता है. वित्त, रक्षा, गृह आदि से संबंधित प्रमुख समितियों की अध्यक्षता आमतौर पर विपक्षी सांसदों द्वारा की जाती है.
  • दोनों सदनों के सांसदों को सम्मिलित करके एक विशिष्ट उद्देश्य के लिये संयुक्त संसदीय समितियाँ गठित की जाती हैं. वर्ष 2011 में टेलीकॉम लाइसेंस और स्पेक्ट्रम के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस के सांसद पी.सी. चाको की अध्यक्षता में संयुक्त संसदीय समिति द्वारा जाँच की गई थी. वर्ष 2016 में नागरिकता (संशोधन) विधेयक को भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में एक संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था.
  • किसी एक विशेष विधेयक की जाँच के लिये प्रवर समिति (Select Committee) का गठन किया जाता है. इसकी सदस्यता किसी एक सदन के सांसदों तक ही सीमित रहती है. पिछले वर्ष राज्यसभा ने सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2019 को सदन के विभिन्न दलों के 23 सांसदों की प्रवर समिति को संदर्भित किया था. इस समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद भूपेन्द्र यादव कर रहे थे.
  • चूँकि संयुक्त संसदीय समितियों और प्रवर समितियों का गठन एक विशिष्ट उद्देश्य के लिये किया जाता है, इसलिये इनके द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के पश्चात् इन्हें भंग कर दिया जाता है. इन दोनों प्रकार की समितियों की अध्यक्षता सत्तारूढ़ दल के सांसद करते हैं.

समिति द्वारा विधेयक की जांच कब की जाती है?

विधेयकों को परीक्षण हेतु स्वचालित रूप से समितियों के पास नहीं भेजा जाता है.

इसे तीन विधियों से एक समिति के लिए संदर्भित किया जाता है. ये विधियां निम्नलिखित हैं:

  1. जब विधेयक को पेश करने वाले मंत्री के द्वारा सदन को सलाह दी जाती है, कि इसकी जांच सदन की प्रवर समिति या दोनों सदनों की संयुक्त समिति द्वारा की जानी चाहिए.
  2. यदि मंत्री इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं करता हैतो यह सदन के पीठासीन अधिकारी पर निर्भर करता है कि विधेयक को विभाग से संबंधित स्थायी समिति के लिए भेजे अथवा नहीं.
  3. इसके अतिरिक्त, एक सदन द्वारा पारित किसी विधेयक को दूसरे सदन द्वारा अपनी प्रवर समिति को भेजा जा सकता है.

विधेयक को एक समिति के पास भेजने के बाद की प्रक्रिया

  1. समिति, विधेयक का विस्तृत परीक्षण करती है.
  2. यह विशेषज्ञोंहितधारकों और नागरिकों से टिप्पणियों और सुझावों को आमंत्रित करती है.
  3. सरकार भी अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए समिति के समक्ष उपस्थित होती है.
  4. इस सब को सम्मिलित करते हुए एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) में विधेयक को मजबूत बनाने संबंधी सुझाव दिए जाते है.
  5. समिति की रिपोर्ट एक अनुशंसात्मक प्रकृति की होती है.

प्रतिवेदन  हेतु समय सीमा

समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट पेश करने के बाद ही विधेयक पर संसद में प्रगति हो सकती है. आमतौर परसंसदीय समितियों को तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देनी होती हैलेकिन कभी-कभी इसमें अधिक समय लग सकता है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : About 40% of cess receipts parked in CFI instead of relevant reserve funds: CAG

संदर्भ

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अनुसार, भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India – CFI) में संगत आरक्षित निधियों की बजाय 40% उपकर प्राप्तियाँ जमा की गई हैं.

  • भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने उपकर और अन्य उदग्रहीत करों के लेखा परीक्षण के संबंध में, केंद्र द्वारा पारदर्शिता और प्रकटीकरण के अभाव की ओर संकेत किया है.
  • वित्त वर्ष-2019-20 में केंद्र ने 35 उपकर / लेवी से 2.75 लाख करोड़ रुपये एकत्र किए थे. हालांकि, आगतों का केवल 60% हिस्सा ही संगत आरक्षित निधि में हस्तांतरित किया गया था.

CAG द्वारा प्रस्तुत अन्य रिपोर्ट

शिक्षा मंत्रालय के स्वच्छ विद्यालय अभियान के अंतर्गत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) द्वारा विद्यालयों में शौचालयों के निर्माण पर CAG की रिपोर्ट ने निम्नलिखित मुद्दों को रेखांकित किया है: –

  1. 72% निर्मित शौचालयों के भीतर जल की पर्याप्त सुविधा नहीं थी.
  2. 27% विद्यालयों में केवल एक कार्यशील शौचालय था, जबकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत यह अनिवार्य किया गया है कि सभी विद्यालयों में बालक एवं बालिकाओं के लिए पृथक-पृथक शौचालय होने चाहिए.

उपकर क्या है?

  • “उपकर” सरकार द्वारा अधिरोपित अतिरिक्त कर है जिसे भारत की संचित निधि (CFI) के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा संग्रहित किया जाता है. उसके बाद एकत्रित निधि को अलग-अलग मंत्रालयों के संबंधित कोष में जमा कर दिया जाता है, जिसका संबद्ध मंत्रालयों द्वारा अपने निर्दिष्ट प्रयोजनों हेतु उपयोग किया जाता है.
  • आरक्षित निधियों के गैर-निर्माण / गैर-संचालन से यह सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है कि संसद द्वारा उपकर (cess) का उपयोग निर्धारित विशिष्ट उद्देश्यों के लिए किया गया है अथवा नहीं.
  • अनुच्छेद 270 केंद्र को उपकर उद्ग्रहण की अनुमति प्रदान करता है, जिसे केंद्र को राज्य सरकारों के साथ साझा करने की आवश्यकता नहीं होती है.
  • हाल के वर्षों में, दरों में बढ़ोतरी और नए करों के कारण केंद्र की उपकर प्राप्तियों में वृद्धि हुई है. इसने 14वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार करों के विभाज्य पूल से राज्यों को अधिक हस्तांतरण (32% से 42% तक) करने से उत्पन्न असंगति से निपटने में सहायता प्रदान की है.

संघ सरकार की निधियाँ एवं लोक लेखा

  • संचित निधि: संविधान के अनुच्छेद 266(1) के अनुसार सरकार को मिलने वाले सभी राजस्वों, जैसे- सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क, आयकर, सम्पदा शुल्क, अन्य कर एवं शुल्क और सरकार द्वारा दिये गए ऋणों की वसूली से जो धन प्राप्त होता है, वे सभी संचित निधि में जमा किये जाते हैं. संसद की स्वीकृति के पश्चात् सरकार अपने सभी खर्चों का वहन इसी निधि से करती है. इसीलिये इसे भारत की संचित निधि कहा जाता है.
  • आकस्मिक निधि: संविधान के अनुच्छेद 267 के अनुसार संसद को एक निधि स्थापित करने की शक्ति दी गई है. इस निधि को भारत की आकस्मिक निधि कहा जाता है. यह एक ऐसी निधि है, जिसमें संसद द्वारा पारित कानूनों द्वारा समय-समय पर धन जमा किया जाता है. यह निधि राष्ट्रपति के नियंत्रण में होती है तथा देश की आकस्मिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिये राष्ट्रपति द्वारा इस निधि से सरकार को धन उपलब्ध कराया जाता है.
  • भारत का लोक लेखा: संविधान के अनुच्छेद 266(2) के अनुसार भारत सरकार द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त सभी अन्य लोक धनराशियाँ भारत के लोक लेखों में जमा की जाती हैं.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Indian Economy/Agriculture. 

Topic : Centralized Farm Machinery Performance Testing Portal

संदर्भ

हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री द्वारा आम लोगों के लिए केंद्रीकृत कृषि मशीनरी परीक्षण पोर्टल (Centralized Farm Machinery Performance Testing Portal)  का अनावरण किया गया है.

केंद्रीकृत कृषि मशीनरी परीक्षण पोर्टल

  • केंद्रीकृत कृषि मशीनरी परीक्षण पोर्टल या सेंट्रलाइज्ड फार्म मशीनरी परफॉर्मेंस टेस्टिंग पोर्टल को कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग द्वारा कृषि मशीनरी परीक्षण संस्थानों की सेवाओं में सुधार और मशीनों के परीक्षण और मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एक कदम के रूप में विकसित किया गया है.
  • यह पोर्टल निर्बाध तरीके से कृषि मशीनों के परीक्षण की प्रगति के लिए आवदेन करने, संप्रेषण और निगरानी करने में विनिर्माताओं को सुविधा प्रदान करेगा, क्योंकि इस पर किसी भी लोकेशन से और इंटरनेट से जुड़ी किसी भी डिवाइस से आसानी से पहुंचा जा सकता है.
  • यह संगठन के भीतर एकीकृत तरीके से समेकित प्रबंधन की संभावना प्रदान करेगा और इस प्रकार परीक्षण संस्थानों की दक्षता में सुधार लाने में मदद करेगा जिससे विभिन्न कृषि मशीनों और उपकरणों के परीक्षण समय को कम किया जा सकेगा.

लाभ

यह पोर्टल प्रयोक्ताओं अर्थात विनिर्माताओं को निम्नलिखित लाभ प्रदान करेगा –

  • सरकार की “ईज ऑफ डूइंग” नीति की तर्ज पर यह ऑनलाइन मशीनरी के परीक्षण हेतु अप्लाई करने हेतु सुविधा प्रदान करेगा.
  • समग्र परीक्षण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगा.
  • फीडबैक तेजी से प्राप्त होगी.
  • परीक्षण समय में कमी आएगी.
  • कृषि विनिर्माताओं के बिजनेस खर्चे में कमी आएगी.
  • परीक्षण दक्षता में सुधार होगा.
  • परीक्षण में पूर्णता आएगी.
  • मंत्रालय के संबंधित अधिकारी और विनिर्माता इंटरनेट पहुंच से किसी भी स्थान से परीक्षण गतिविधियों को मॉनिटर कर पायेंगे.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Growth & Development, Mobilization of Resources, Liberalization and Investment Models.

Topic : Withholding Tax

संदर्भ

दिग्गज ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) में भारत सरकार के विरुद्ध 22,100 करोड़ रूपए के कर विवाद में जीत हासिल की है.

एक महत्त्वपूर्ण मामले में स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) ने निर्णय दिया है कि वर्ष 2007 के सौदे के लिये ब्रिटिश टेलीकॉम पर पूंजीगत लाभ और विथहोल्डिंग कर’ (Withholding Tax) के रूप में 22,100 करोड़ रूपए की भारत सरकार की मांग ‘निष्पक्ष और न्यायसंगत वैधानिक उपचार की गारंटी का उल्लंघन करती है.

types of taxes

 

पृष्ठभूमि

इस मामले का प्रारम्भ वर्ष 2007 में हुआ था. ये वही वर्ष था जब वोडाफोन का भारत में प्रवेश हुआ था. इसी वर्ष वोडाफोन ने हचिंसन एस्सार (जिसे हच के नाम से जाना जाता था) का अधिग्रहण किया था. वोडाफोन ने हचिंसन एस्सार की 67 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था. वोडाफोन ने इस अधिग्रहण के लिए 11 अरब डॉलर से ज्यादा का भुगतान किया था. हचिंसन एस्सार भारत में काम करने वाली मोबाइल कंपनी थी.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पूंजीगत लाभ को आधार बनाते हुए कंपनी से टैक्स भरने की मांग की थी जिसे कंपनी ने चुकाने से मना कर दिया. कंपनी का तर्क था कि अधिग्रहण टैक्स के दायरे में ही नहीं आता है क्योंकि इस मामले में पूरा वित्तीय लेन-देन भारत में नहीं हुआ है. वहीं इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना था कि वोडाफोन ने वैसी संपत्ति का अधिग्रहण किया जो भारत में मौजूद थी. 

यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया और न्यायालय ने वोडाफोन के पक्ष में निर्णय सुनाया. इस निर्णय के बाद तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बजट 2012-13 पेश करते हुए आयकर कानून 1961 को रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स के साथ संशोधित करने का प्रस्ताव रखा. यह प्रस्ताव इसलिए रखा गया ताकि वोडाफोन जैसे विलय व अधिग्रहण के विदेश में होने वाले सौदों पर टैक्स लगाया जा सके. इसके बाद वोडाफोन ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का रुख किया. इस मामले की लंबी सुनवाई के बाद अब एक बार फिर वोडाफोन के पक्ष में फैसला आया है. विदित हो कि वर्तमान में वोडाफोन का भारत में आइडिया के साथ गठजोड़ है. वोडाफोन—आइडिया देश की तीसरी बड़ी टेलीकॉम कंपनी है.

विथहोल्डिंग कर’ (Withholding Tax)

यह एक ऐसी राशि है जो नियोक्ता द्वारा कर्मचारी की आय से सीधे काटी जाती है और सरकार को व्यक्तिगत कर देयता के हिस्से के रूप में भुगतान की जाती है. 

निर्णय के निहितार्थ

  • स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) द्वारा वोडाफोन के पक्ष में दिया गया फैसला भारत की पूर्वव्यापी कराधान (Retrospective Taxation) नीतियों के लिये एक बड़ा झटका है.
  • इस फैसले के कारण यह संभावना भी बढ़ जाती है कि भारत सरकार को इसी तरह के अन्य मामलों में भी हार का सामना करना पड़ेगा.

Prelims Vishesh

State Disaster Response Fund (SDRF) :-

  • हाल ही में प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि राज्य, COVID-19 से राहत के लिए SDRF से 50% धन का व्यय कर सकते हैं. विदित हो कि इससे पहले यह सीमा 35% थी.
  • SDRF हर राज्य में गठित हुआ है. इसका गठन 2005 के आपदा प्रबंधन अधिनियम के अनुसार हुआ है. ज्ञातव्य है कि इसके गठन के लिए 13वें वित्त आयोग ने अनुशंसा की थी.
  • इस कोष से राहत कार्य के लिए व्यय से सम्बंधित सभी मामलों में अंतिम निर्णय एक राज्य कार्यकारिणी समिति करती है जिसके प्रमुख मुख्य सचिव होते हैं.
  • SDRF के अन्दर आने वाली आपदाएँ हैं – च्रकवात, सूखा, भूकम्प, आगजनी, बाढ़, सुनामी, ओलावृष्टि, भूस्खलन, हिमस्खलन, बादल फटना, टिड्डी आक्रमण, बर्फीली और ठंडी हवाएँ.
  • भारत सरकार SDRF कोष में 75% और 90% योगदान करती है. 75% योगदान सामान्य राज्यों को दिया जाता है और 90% उन राज्यों के लिए जिनको विशेष श्रेणी का दर्जा मिला हुआ है.
  • इसके वित्तीय वितरण से संबंधित नोडल एजेंसीवित्त आयोग है, जिसकी सिफारिश से राहत कोष की धनराशि आवंटित की जाती है.
  • जब किसी आपदा को “गंभीर प्रकृति की आपदा” के रूप में घोषित किया जाता है जैसा की केरल के मामले में किया गया, तो राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि (National Disaster Response Fund – NDRF) कोष से अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाती है, अन्यथा SDRF कोष का उपयोग किया जाता है.

KRITAGYA Hackathon :-

  • यह महिलाओं के अनुकूल साधनों पर विशेष बल देने के साथ-साथ कृषि के मशीनीकरण में बढ़ोतरी के लिए संभावित प्रौद्योगिकी समाधान को प्रोत्साहन देने के लिए बनाई गई योजना है.
  • यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (ICAR) द्वारा राष्ट्रीय कृषि उच्चतर शिक्षा परियोजना (NAHEP) के अंतर्गत बनाई गई है.
  • विदित हो कि NAHEP कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों को अधिक प्रासंगिक और उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए भागीदार कृषि विश्वविद्यालयों और ICAR का समर्थन करता है.
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