Sansar डेली करंट अफेयर्स, 25 September 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 25 September 2019


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resources.

Topic : AICTE’s Margadarshan and Margadarshak scheme

संदर्भ

मार्गदर्शन योजना

  • यह भारत सरकार के मानव संसाधन विकास विभाग की एक योजना है जिसमें कुछ पुराने और उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान अपेक्षाकृत नए और संभावनाओं से युक्त 10 से 12 संस्थानों का मार्गदर्शन करेंगे. मार्गदर्शन करने वाले संस्थान का एक्रेडिटेशन रिकॉर्ड अच्छा होना चाहिए.
  • मार्गदर्शन करने वाले संस्थान अपने यहाँ प्रचलित शिक्षा की सर्वोत्तम प्रथाओं को नए संस्थानों में लागू करने का प्रयास करेंगे.
  • इसके लिए प्रत्येक संस्थान को तीन वर्ष तक किश्तों में 50 लाख रु. दिए जाएँगे जिसका उपयोग करते हुए वे प्रशिक्षण, कार्यशाला, सम्मेलन एवं आवागमन जैसी विभिन्न गतिविधियों को सम्पन्न करेंगे.
  • मार्गदर्शन करने वाले संस्थान के शिक्षकों को “मार्गदर्शक” कहा जाएगा.

मार्गदर्शक का कार्य

  • इस योजना के अन्दर जिन शिक्षकों को मार्गदर्शक के रूप में चुना जाएगा वे या तो कार्यरत होंगे अथवा सेवानिवृत्त. परन्तु उनके पास एक्रेडिटेशन की अच्छी जानकारी होनी चाहिए और जो इस बात के लिए तैयार हैं कि सम्बंधित नए संस्थानों की यात्रा कर-कर के उनके लिए पर्याप्त समय निकाल सकें.
  • मार्गार्शक नियमित रूप से मार्गदर्शन पाने वाले संस्थानों में जाएँगे, उनके परिसर में ठहरेंगे और वहाँ की गुणवत्ता में सुधार लाकर उन्हें NBA के एक्रेडिटेशन पाने में समर्थ बनाएँगे.

मार्गदर्शक के लिए योग्यताएँ

  1. पीएचडी होना चाहिए.
  2. तकनीकी शिक्षा (इंजीनियरिंग) डोमेन से होना चाहिए.
  3. न्यूनतम अनुभव 20 वर्ष का अनुभव जिसमें कम से कम पाँच वर्ष शिक्षा कार्य में बिताये गये हों.
  4. एआईसीटीई द्वारा अनुमोदित संस्थान में कम से कम प्रोफेसर के पद पर होना चाहिए.
  5. यदि वह IIT/NIT का शिक्षक हो तो उसे कम से कम एसोसिएट प्रोफेसर होना चाहिए.
  6. कम से कम 10 शोधपत्र प्रकाशित हुए हों
  7. कम से कम पाँच छात्रों को पीएच.डी. करवाई हो.
  8. कम से कम दो पेटेंट उसके नाम से होने चाहिएँ.
  9. कम से कम दो पुस्तकें लिखी हों.
  10. NBA भ्रमण दल अथवा NAAC भ्रमण दल का सदस्य हो.
  11. अपने विभाग के एक्रेडिटेशन में कम से कम दो बार शामिल हुआ हो.
  12. वह उद्योग जगत का ऐसा व्यक्ति हो जिसे शिक्षा में अपार रूचि हो और जो NBA/NAAC दल का सदस्य रहा हो.
  13. मार्गदर्शक कार्य के लिए आवेदन देने वाले के पास इतना समय हो कि वह संस्थानों का भ्रमण कर सके.

GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Accessible India Campaign

संदर्भ

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीनस्थ निःशक्त जन अधिकारिता विभाग (The Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD) ने उपलभ्य भारत अभियान (Accessible India Campaign – AIC) के हितधारकों के लिए एक प्रबंधन सूचना प्रणाली (Management Information System – MIS) बनाई है.

यह एक पोर्टल है जिसमें सभी नाभिक मंत्रालय और राज्य/संघीय क्षेत्र एक मंच पर आकर AIC के प्रत्येक लक्ष्य में हो रही प्रगति का अनुश्रवण कर सकेंगे.

उपलभ्य भारत अभियान (AIC) क्या है?

  • यह निःशक्त जन अधिकारिता विभाग (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय) का एक राष्ट्रव्यापी मूर्धन्य अभियान है.
  • इसका उद्देश्य देश भर के दिव्यांगजनों के लिए बाधारहित और अनुकूल परिवेश तैयार करना है. इसका ध्येय एक ऐसा समावेशी समाज बनाना है जिसमें दिव्यांग जनों के विकास और वृद्धि के लिए सामान्य अवसर हों और वे एक उत्पादनशील, निरापद और गरिमामय जीवन बिता सकें.
  • इस योजना के सम्यक कार्यान्वयन के लिए अभियान को तीन भागों में बाँट दिया गया है, ये हैं – भवन परिवेश, परिवहन तथा सूचना एवं संचार तकनीक तन्त्र (ICT).

AIC के लक्ष्य

  1. देश के 50 नगरों के प्रमुखतम कम से कम 25-50 सरकारी भवनों में दिव्यांगों की आवाजाही की सुविधा की जाँच पूरा करते हुए इन भवनों को 2019 के अंत तक पूरी तरह से सुगम बनाना.
  2. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और सभी राज्यों की राजधानियों में स्थित आधे सरकारी भवनों को दिव्यांगजनों के लिए सुगम बनाना.
  3. ऊपर एक और दो बिंदु के लक्ष्यों में अछूते रह गये दस सबसे महत्त्वपूर्ण शहरों के सरकारी भवनों में से आधे की सुगमता की जाँच पूरी करना.

GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : International Atomic Energy Agency (IAEA)

संदर्भ

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency – IAEA) का 63वाँ सामान्य सम्मेलन ऑस्ट्रिया की राजधानी वियेना में चल रहा है.

IAEA क्या है?

  • अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency – IAEA) आणविक विषयों के लिए विश्व की सबसे प्रधान एजेंसी है. इसकी स्थापना 1957 में संयुक्त राष्ट्र के एक अवयव के रूप में परमाणु के शान्तिपूर्ण प्रयोग पर बल देने के लिए की गई थी.
  • इसका उद्देश्य है परमाणु तकनीकों के सुरक्षित, निरापद (secure) एवं शान्तिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना.
  • यह एजेंसी परमाणु के सैनिक उपयोग पर रोक लगाती है.
  • IAEA संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद् के प्रति उत्तरदायी होती है.
  • इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियेना शहर में है.

प्रशासी बोर्ड का स्वरूप

  • इसमें महासभा द्वारा निर्वाचित 22 सदस्य देश होते हैं जो विश्व के विभिन्न भौगोलिक भागों का प्रतिनिधित्व करते हैं. उनका निर्वाचन 2 साल के लिए होता है.
  • नए बोर्ड में ऐसे 10 सदस्य देश होते हैं जो पिछले बोर्ड द्वारा नामित किये जाते हैं.
  • प्रत्येक सदस्य को एक वोट मिलता है.

सामान्य सम्मेलन

  • इसमें IAEA के 171 सदस्य देश शामिल होते हैं.
  • प्रत्येक सदस्य के पास एक वोट होता है.
  • यह सम्मेलन वर्ष में एक बार आयोजित होती है.
  • इसमें चालू विषयों एवं नीतियों पर चर्चा होती है.
  • इस सम्मेलन में प्रशासी बोर्ड से प्राप्त कार्ययोजना और बजट का अनुमोदन किया जाता है.
  • इसी सम्मेलन में महानिदेशक का भी चयन होता है.

IAEA के द्वारा संचालित कार्यक्रम

  1. कैंसर उपचार कार्रवाई कार्यक्रम (Program of Action for Cancer Therapy – PACT).
  2. मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम (Human Health Program)
  3. जल उपलब्धता संवर्धन परियोजना (Water Availability Enhancement Project)
  4. नवाचारी आणविक रिएक्टरों और ईंधन चक्र, 2000 से सम्बंधित अंतर्राष्ट्रीय परियोजना (International Project on Innovative Nuclear Reactors and Fuel Cycles, 2000).

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Coal Gasification

संदर्भ

भारतीय उर्वरक निगम लिमिटेड (FCIL) और हिन्दुस्तान उर्वरक निगम लिमिटेड (HFCL) के बंद पड़े प्रतिष्ठानों को फिर से जीवित करने के लिए भारत सरकार कोयले को गैस में बदलने के लिए संयंत्र बनाना चाहती है. इस क्रम में उसने पिछले दिनों चीन के वुहुआँ इंजीनियरिंग कम्पनी लिमिटेड को तालचर उर्वरक लिमिटेड के कोयला गैसीकरण संयंत्र के लिए LSTK (Lump Sum Turn Key) ठेका देने का निर्णय किया है.

कोयले को गैस में बदलने के लाभ

  • कोयला को धोकर ले जाने की तुलना में गैस को ले जाना बहुत सस्ता पड़ता है.
  • स्थानीय प्रदूषण की समस्या के समाधान में सहायता मिलती है.
  • गैस बनाने की प्रक्रिया में कोयले के गैस को पहले अशुद्धियों से मुक्त किया जाता है और तब उसे एक टर्बाइन में जलाकर बिजली उत्पन्न की जाती है. तत्पश्चात् गैस टर्बाइन से निकलने वाले ताप को पकड़कर उसका प्रयोग वाष्प टर्बाइन जनरेटर के लिए वाष्प उत्पन्न करने में किया जाता है. इस प्रकार कोयला के गैस का दो बार प्रयोग हो जाता है जबकि पारम्परिक रूप से कोयला जलाने से उसका लाभ एक ही बार मिलता है.

चिंताएँ और चुनौतियाँ

  • कोयले को गैस बनाने में ऊर्जा उत्पादन की अन्य विधियों की तुलना में अत्यधिक पानी का उपयोग होता है.
  • इसमें पानी के प्रदूषित होने, जमीन के धँसने और बचे हुए जल को निरापद रूप से निपटाने की समस्या होती है.

जमीन के अन्दर के कोयले से गैस बनाने की प्रक्रिया क्या है?

कोयले से गैस निकालने के लिए जमीन के अन्दर कोयले तक एक छोटे छेद से ऑक्सीजन और भाप भेजा जाता है और वहाँ पर एक छोटा-सा नियंत्रित विस्फोट किया जाता है. इस प्रकार ठोस कोयला गैस में बदल जाता है. इसके बाद एक दूसरे छेद से अन्दर के हाइड्रोजन, मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड को ऊपर निकाल लिया जाता है.


GS Paper 3 Source: Down to Earth

down to earth

UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Shola grasslands

संदर्भ

मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने पिछले दिनों एक प्रतिवेदन समर्पित किया जिसके अनुसार चाय जैसे अस्थानीय प्रजाति के पौधों को लगाने के कारण नीलगिरी की शोला वनस्पति विनष्ट होने के कगार पर है.

मुख्य निष्कर्ष

  • नई वनस्पतियाँ लगाने से यहाँ जल स्रोतों का ह्रास हो रहा है और फलस्वरूप बड़े-बड़े भूस्खलन हो रहे हैं.
  • इस क्षेत्र में ऐसे पौधे लगाये जा रहे हैं जो तेजी से फ़ैल कर शोला जंगल और घास भूमि पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल रहे हैं. ये हैं – चाय, यूकेलिप्टस, वैटल, लन्टाना कमारा, ओपन्टिया स्ट्रिक्टा, क्रोमोलैना ओडोरेटा, पार्थेनियम हिस्ट्रोपोरस, सेना स्पेक्टेबलिस आदि.

शोला घासभूमियाँ क्या होती हैं?

  • शोला उन क्षेत्रों को कहते हैं जहाँ पहाड़ी वनस्पति और घासभूमि दोनों विद्यमान होते हैं.
  • ये क्षेत्र बहुत ऊँचाई पर पाए जाते हैं. इनकीऊँचाई समुद्र तल से 1500 मीटर या अधिक होती है.
  • भारत में शोला दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट में पाए जाते हैं.
  • शोला घासभूमियों में 25-30 फीट के पेड़ होते हैं. यहाँ विभिन्न प्रकार की घास प्रजातियों के अल्पविकसित जंगल होते हैं.
  • शोला क्षेत्र में एक ओर तो रह-रह करके बड़ी-बड़ी घासभूमियाँ मिलती हैं तो दूसरी ओर साथ ही साथ सदाबहार पर्वतीय वृक्ष भी मिलते हैं.
  • यहाँ की हरियाली दो तल्लों में होती है जिसमें ऊपर का तल्ला इतना घना होता है कि नीचे की हरियाली तक सूरज की किरणें पहुँच नहीं पाती हैं.
  • हाल ही के अध्ययन से पता चला है कि पश्चिमी घाट की पलानी पर्वत श्रेणी में शोला क्षेत्र 2/3 घट गए हैं. इसके कारण हैं – इमारती लकड़ियों का लगाया जाना, कृषि क्षेत्र में विस्तार, हानिकारक प्रजातियों का फैलाव और इस क्षेत्र में उढगमंडलम, पोनमुडि (तिरुवनंतपुरम जिला) और मुन्नार जैसे पर्यटन स्थलों का विकास.
  • इन घासभूमि में तो 1973 की तुलना में 67% की कमी आ गयी है.
  • पहले यहाँ नीलगिरि पिपिट नामक पक्षी बहुतायत से मिलते थे. पर अब घासभूमियों के विखंडन से ये पक्षी विस्थापित हो गए हैं.

शोला वनों का माहात्म्य

शोला वन और उनसे जुड़ी हुई घासभूमियाँ पहाड़ से गिरने वाले पानी को जमा करती हैं और इस प्रकार इनको जल भंडारण का स्रोत माना जाता है. केरल और तमिलनाडु की बहुत सारी नदियाँ यहीं से निकलती हैं और उनमें साल-भर पानी रहता है. यदि शोला वन नष्ट हो गये तो इन नदियों में पानी भरने वाले सोते गर्मी में सूख जाएँगे. शोला वनों में जैव विविधता का भंडार तो है ही, साथ ही यहाँ का वन्यजीवन अत्यंत समृद्ध है.


Prelims Vishesh

Waste Management Accelerator for Aspiring Women Entrepreneurs (WAWE Summit 2019) :-

  • इस वर्ष नवम्बर-दिसम्बर में WAWE शिखर सम्मेलन जयपुर में आयोजित होगा.
  • कचरा निष्पादन से सम्बंधित इस सम्मेलन में युवा महिला छात्र शामिल होंगी और कचरा निष्पादन और एकल प्रयोग वाली प्लास्टिक थैलियों के विकल्प से सम्बंधित जानकारियों का आदान-प्रदान होगा.
  • इस बार सम्मेलन की थीम है – “अपना थैला स्वयं बनाओ” / Make your own bag.

Year of Artificial Intelligence :-

  • तेलंगाना राज्य सरकार ने 2020 को कृत्रिम बुद्धि वर्ष (Year of Artificial Intelligence) घोषित किया है.
  • राज्य सरकार पूरे 2020 के दौरान कृत्रिम बुद्धि से सम्बंधित अनेक कार्यक्रम, बैठकें और गतिविधियाँ चलाएगी.

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