Sansar डेली करंट अफेयर्स, 25 July 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 25 July 2020


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Special Window for Affordable and Mid Income Housing (SWAMIH)

संदर्भ

सस्ते एवं मध्‍यम आय वर्ग के लिए उपयुक्त आवास हेतु विशेष विंडो (Special Window for Affordable and Mid Income Housing– SWAMIH) निधि के अंतर्गत अब तक 81 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है.

SWAMIH निवेश कोष के अंतर्गत परियोजनाओं को स्वीकृति दिए जाने से सम्पूर्ण भारत में लगभग 60,000 घरों का निर्माण करने का लक्ष्य पूरा हो जाएगा.

SWAMIH योजना क्या है?

वर्ष 2019, नवंबर में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सस्ते एवं मध्‍यम आय वर्ग के लिए उपयुक्त आवास हेतु विशेष विंडो (SWAMIH) स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की थी.

  1. SWAMIH निवेश कोष का गठन ‘पंजीकृत किफायती एवं मध्यम आय वर्ग की आवासीय परियोजनाओं’ को पूरा करने के लिए किया गया था, यह परियोजना धन के अभाव में बाधित हो गई थी.
  2. इस कोष को SEBI के अंतर्गत पंजीकृत श्रेणी- II AIF (वैकल्पिक निवेश कोष- Alternate Investment Fund) ऋण कोष के रूप में स्थापित किया गया था.
  3. इस कोष का निवेश प्रबंधक SBICAP वेंचर्स है, जो SBI Capital Market की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है.
  4. वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव भारत सरकार की ओर से इस कोष के प्रायोजक होते हैं.

कोष का निवेशक मंडल  

विशेष विंडो के अधीन गठित किये गये/कोष उपलब्‍ध कराये गये वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Fund – AIF) सरकार और अन्‍य निजी निवेशकों से निवेश आकर्षित करेंगे. इनमें वित्तीय संस्‍थाएं, सोवेरन वेल्‍थ कोष, सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बैंक, घरेलू पेंशन और भविष्‍य निधि, वैश्विक पेंशन कोष और अन्‍य संस्‍थागत निवेशक शामिल होंगे.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability, e-governance- applications, models, successes, limitations, and potential.

Topic : MAUSAM Application

संदर्भ

हाल ही में केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने समय रहते मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिएएक सरकारी मोबाइल एप्लीकेशन “मौसम” (Mausam) का अनावरण किया. ऐप के आनावरण के अवसर पर इस बात पर विशेष बल दिया गया कि मौसम के अपडेट को सटीक बनाने के लिए नई डिवाइस, कंप्यूटर से जुड़े संसाधनों इत्यादि को बदलने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता है और यह निवेश वर्तमान बजट से कम से कम दोगुना होना चाहिए.

मौसम एप्लीकेशन

  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के भारत मौसम विज्ञान विभाग ने नवीनतम टूल्स एवं प्रौद्योगिकियों पर आधारित मौसम पूर्वानुमान एवं चेतावनी सेवाओं के प्रसार में सुधार के लिए हाल के वर्षों में कई अभिनव कदम उठाये हैं. इस पहल को और आगे बढ़ाने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भारत मौसम विज्ञान विभाग के लिए मोबाइल ऐप “मौसम” का अनावरण किया है.
  • यह मोबाइल ऐप आम लोगों को समर्पित है और इसका उद्देश्य सरल तरीके से मौसम की सूचना एवं पूर्वानुमान को प्रेषित करना है.
  • इस मोबाइल ऐप को इंटरनेशनल कॉर्प्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सेमी – एरीड ट्रॉपिक्स (International Crops Research Institute for the Semi-Arid Tropics – ICRISAT) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिरोलॉजी, पुणे (IITM) और भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा मिलकर विकसित किया गया है.
  • मोबाइल ऐप “मौसम” के द्वारा 5 प्रकार की सेवाएं प्रदान की जाएगी :
  1. वर्तमान मौसम: 200 शहरों के लिए रोजाना आठ घंटों पर वर्तमान तापमान, आर्द्रता, हवा की गति एवं दिशा का अद्यतन किया जाता है. सूर्योदय/सूर्यास्त एवं चांद के निकलने तथा अस्त होने के बारे में भी जानकारी दी जाती है.
  2. नाऊकास्ट: आईएमडी के राज्य मौसम विज्ञान विभाग केंद्रों द्वारा भारत के 800 स्टेशनों एवं जिलों के बारे में स्थानीय मौसम की अवधारणा की तीन घंटे पर चेतावनी निर्गत की जाती है. उग्र मौसम के मामले में इसके प्रभाव को भी चेतावनी में सम्मिलित किया जाता है.
  3. नगर पूर्वानुमान: भारत के लगभग 450 शहरों के आसपास की मौसम स्थितियों के पिछले 24 घंटों एवं 7 दिनों का पूर्वानुमान.
  4. चेतावनियांः नागरिकों को आने वाले खतरनाक मौसम की चेतावनी देने के लिए कलर कोड (रेड, औरेंज एवं येलो) में अगले पांच दिनों के लिए सभी जिलों के बारे में दैनिक रूप से  दो बार अलर्ट जारी किए जाते हैं. कलर कोड रेड सर्वाधिक उग्र वर्ग है जो प्राधिकारियों और आम लोगों को कदम उठाने के लिए आग्रह करता है, औरेंज कोड प्राधिकारियों और आम लोगों को सतर्क रहने के लिए प्रेरित करता है जबकि येलो कोड प्राधिकारियों और आम लोगों को खुद को अपडेट रखने के लिए प्रेरित करता है.
  5. राडार उत्पाद: नवीनतम स्टेशन वार राडार उत्पादों का प्रत्येक 10 मिनट पर अद्यतन किया जाता है.

लाभ

अभी तक देश में मौसम पूर्वानुमान को लेकर रोजाना के अपडेट के लिए कोई खास तंत्र नही था. ऐसे में लोगों को प्राइवेट संस्थानों की रिपोर्ट का सहारा लेना पड़ता था, जिसमें हर एक शहर के मौसम की अपडेट नहीं होती थी. ऐसे में मौसम ऐप से इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है.

UMANG App

  • UMANG app डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई एक पहल है.
  • UMANG का full form है – Unified Mobile Application for New-age Governance.
  • इसे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना तकनीक मंत्रालय  (MeitY) तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस संभाग (National e-Governance Division – NeGD) ने विकसित किया है.
  • इस app का मुख्य लक्ष्य भारत के नागरिकों को सब कुछ एक क्लिक पर ऑनलाइन करने की सुविधा देना है, चाहे पासपोर्ट, आधार अथवा पैन बनाना है अथवा गैस सिलेंडर बुक करना हो अथवा प्रोविडेंट फण्ड का बैलेंस जानना हो.
  • वस्तुतः उमंग app सरकार द्वारा चालाई गई 100 से अधिक सेवाओं का लाभ उठाने के लिए बनाया गया एकल app है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology. 

Topic : S-400 Missile Defence System

संदर्भ

हाल ही में रूस ने चीन को दी जाने वाली एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति पर रोक लगा दी है. रूस ने यह आपूर्ति तब रोकी है, जब चीन अपनी आक्रमकता के कारण कूटनीतिक मोर्चे पर कई देशों से एक साथ संघर्ष कर रहा है. यह चीन के लिए बड़ा झटका है. रूस के इस कदम के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं.

S-400 क्या है?

  • यह एक हवाई प्रतिरक्षा प्रणाली है जो आकाश में शत्रु के विमान को धरती पर से ही भेद सकती है.
  • यह रूस की सर्वाधिक उन्नत प्रणाली है जो 380 km. दूर स्थित बमवर्षकों, जेटों, मिसाइलों और ड्रोनों को भी नष्ट कर सकती है.
  • यह प्रणाली रूस में 2007 से काम कर रही है.
  • इस प्रणाली का निर्माण Almaz-Antey ने किया है.

भारत को S-400 क्यों चाहिए?

पड़ोस से भारत को सदैव खतरा रहता है. पाकिस्तान और चीन दोनों से हमें कभी भी सामना करना पड़ सकता है. पाकिस्तान के पास 20 लड़ाकू स्कवॉड्रन (fighter squadrons) हैं जिनके पास उत्क्रमित F-16 के साथ-साथ चीन से लिए गये कई J-17 विमान भी हैं. चीन के पास भी स्वयं 1,700 फाईटर हैं जिनमें 800 4-Gen फाइटर हैं. इसलिए S-400 का सौदा भारत के लिए आवश्यक हो गया था.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : International Tiger Day

संदर्भ

वैश्विक व्याघ्र दिवस जिसे अंतर्राष्ट्रीय व्याघ्र दिवस (International Tiger Day) भी कहते हैं, हर वर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य व्याघ्र संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है.

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विदित हो कि भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) द्वारा वर्ष 2006 से प्रत्येक 4 वर्ष के अंतराल पर बाघ जनगणना का कार्य किया जा रहा है. बाघ जनगणना की रिपोर्ट को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा संकलित किया जाता है.

समस्याएँ एवं चुनौतियाँ

विश्व के देशों में भारत का उन देशों में आता है जहाँ प्रति-व्यक्ति जंगल सबसे कम है. जंगल जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने वाला एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण तंत्र होता है क्योंकि यह कार्बन को सोख लेता है. जंगलों को काटे जाने से बाघों के निवास स्थान संकुचित होते जा रहे हैं.

भारत और पूरे विश्व में व्याघ्र संरक्षण में एक बहुत बड़ी समस्या उनका शिकार है. जब तक बाघ के शरीर के अवयवों का अवैध बाजार रहेगा तब तक यह समस्या रहेगी.

भारत के सुन्दरबन में जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का जल-स्तर बढ़ रहा है जिसका बहुत बड़ा दुष्प्रभाव उस क्षेत्र में रहने वाले रॉयल बंगाल बाघों पर हुआ है.

संरक्षण के लिए किये गये प्रयास

राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने वन संरक्षकों के लिए एक मोबाइल अनुश्रवण प्रणाली विकसित की है जिसका नाम M-STrIPES (Monitoring System for Tigers – Intensive Protection and Ecological Status) दिया गया है.

2010 में St. Petersburg व्याघ्र शिखर सम्मलेन में बाघों की आबादी वाले 13 देशों के नेताओं ने यह संकल्प लिया था कि बाधों की संख्या की दुगुनी कर दी जायेगी और इसके लिए एक नारा दिया था – ‘T X 2’

भारत में 1973 में ही बाघों के संरक्षण के लिए Project Tiger आरम्भ किया गया था. इस परियोजना के तहत अभी तक देश में 50 अभ्यारण्य बनाए जा चुके हैं जिनका भौगोलिक क्षेत्रफल देश का 2.2% है.

विश्व बैंक के वैश्विक व्याघ्र पहल (Global Tiger Initiative – GTI) कार्यक्रम ने बाघों से सम्बंधित एजेंडा को सबल बनाने के लिए वैश्विक प्रतिभागियों को प्रेरित किया है. कालांतर में यह कार्यक्रम वैश्विक व्याघ्र पहल परिषद् (Global Tiger Initiative Council – GTIC) का रूप ले चुकी है. इस परिषद् के अन्दर दो अलग-अलग उप कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं जो हैं – वैश्विक व्याघ्र मंच कार्यक्रम (Global Tiger Forum) और वैश्विक हिम तेंदुआ पारिस्थितिकी सुरक्षा कार्यक्रम (Global Snow Leopard Ecosystem Protection Program).

कुछ विवादास्पद परियोजनाएँ

  • कान्हा और पेंच बाघ रिजर्व को जोड़ने वाले गलियारे में राजमार्ग और रेलवे लाइनों का विस्तार किया जा रहा है.
  • महाराष्ट्र के मेलघाट बाघ रिजर्व से होकर एक रेलवे लाइन का निर्माण किया जा रहा है.
  • मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व का लगभग 100 वर्ग किलोमीटर केन-बेतवा नदी लिंकिंग परियोजना में चला जाएगा.

Prelims Vishesh

What are Metamaterials?  :-

  • मेटा मटेरियल वे मटेरियल हैं जिन्हें कृत्रिम रूप से बनाया जाता है. इनमें ऐसे अनूठे आंतरिक सूक्ष्म बनावटें होती हैं जिनके कारण इन मटेरियलों में उस प्रकार के गुणधर्म उत्पन्न हो जाते हैं जो प्रकृति में अन्यत्र नहीं पाए जाते.
  • इन गुणधर्मों को प्रदर्शित करने के लिए मेटा मटेरियल की कृत्रिम इकाइयों को विभिन्न रूपों, आकारों तथा अंतर-आणविक अन्तः क्रिया में ढाला जा सकता है.

Odisha raises retirement age of doctors :-

ओडिशा में ओडिशा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (OHMS) संवर्ग के चिकित्सकों तथा श्रम एवं ESI विभाग के अधीनस्थ एलोपेथिक चिकित्सा अधिकारियों की सेवा निवृति की आयु 62 से बढ़ाकर 65 की जा रही है.

DDT to South Africa for Malaria control program :-

  • दक्षिण अफ्रीका में मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के लिए भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीनस्थ लोक सेवा उपक्रम HIL (India) Limited ने दक्षिण अफ्रीका को 20.60 मेट्रिक टन DDT 75% WP की आपूर्ति की है.
  • ज्ञातव्य है कि पूरे विश्व में DDT मात्र HIL India ही बनाती है.

Operation routes for merchant, fishing vessels in south-west Indian waters separated :-

  • दुर्घटनाओं को कम करने के लिए तथा समुद्री परिवेश को समृद्ध करने के लिए भारत सरकार ने दक्षिणी-पश्चिमी हिन्द महासागर में व्यापारियों और मछुआरों के जलयानों के लिए अलग-अलग मार्ग घोषित किये हैं.
  • विदित हो कि इस समुद्री क्षेत्र में अनेक व्यापारी और जलयान आते-जाते हैं और साथ ही मछुआरों के जलयान भी भरपूर सक्रिय रहते हैं जिस कारण आये दिन इनके आपस में टकराने की घटना घटती है जिसके फलस्वरूप न केवल जान-माल की क्षति होती है अपितु पर्यावरण भी प्रदूषित हो जाता है.

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