Sansar डेली करंट अफेयर्स, 25 January 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 25 January 2019


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : SC/ST Act amendment

संदर्भ

हाल ही में सर्वोच्च न्यालय में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम में भारत सरकार द्वारा किये गये संशोधनों के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से मना कर दिया है. रोक लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पास कई याचिकाएं दायर हुई थीं.

पृष्ठभूमि

मार्च 20 के एक निर्णय (सुभाष काशीनाथ महाजन बनाम महाराष्ट्र राज्य) में सर्वोच्च न्यायालय ने मूल अधिनियम के उस प्रावधान को निरस्त कर दिया था जिसमें आरोपित व्यक्ति को बिना जाँच-पड़ताल के गिरफ्तार कर लिया जाता है. न्यायालय ने इसके स्थान पर यह निर्णय दिया कि आरोपित व्यक्ति तभी गिरफ्तार हो जब प्राथमिक जाँच में आरोप प्रथम दृष्टया सत्यापित हो. सर्वोच्च न्यायाय के इस आदेश का दलित समूहों द्वारा प्रबल विरोध किया गया. न्यायालय ने भी अपने निर्णय को बदलने से इनकार कर दिया.

याचिका का आधार

  1. यह संशोधन 2019 के चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है.
  2. यह आवश्यक नहीं है यदि कोई सवर्ण जाति का है तो उसे अपराधी मान लिया जाए.
  3. SC/ST Act का जमकर दुरुपयोग हो रहा है और हाल ही में इसके तहत दायर मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है.

SC/ST Act के बारे में

  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम संसद द्वारा सितम्बर 9, 1989 में पारित हुआ था और इस अधिनियम के लिए नियमों की अधिसूचना मार्च 31, 1995 में निर्गत हुई थी.
  • इस अधिनियम में 22 अपराध वर्णित किये गये हैं. इन अपराधों में आर्थिक, लोकतांत्रिक एवं सामाजिक अधिकारों का हनन, भेदभाव, शोषण तथा विधि प्रक्रिया का दुरूपयोग शामिल हैं.
  • अन्य मुख्य अपराध हैं – कुछ स्थलों पर जाने से रोकना, पारम्परिक मार्गों के उपयोग से रोकना, अखाद्य वस्तु पिलाना अथवा खिलाना, यौन शोषण, शारीरिक क्षति, संपत्ति से सम्बंधित अत्याचार, दुष्टतापूर्ण मुकदमे, राजनैतिक तथा आर्थिक शोषण.
  • अधिनियम का अनुभाग 14 यह प्रावधान करता है कि प्रत्येक जिले में इस अधिनियम के अन्दर आने वाले अपराधों का मुकदमा एक विशेष अदालत में चलेगा.

संशोधन में प्रविष्ट नए अनुच्छेद

मूल अधिनियम के अनुभाग 18 के पश्चात् ये तीन नए अनुच्छेद प्रविष्ट किए जा रहे हैं –

  • किसी व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए प्राथमिक जाँच की आवश्यकता नहीं होगी.
  • अधिनियम के अंतर्गत किये गये किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए पूर्वानुमति की आवश्यकता नहीं होगी.
  • आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) के अनुभाग 438 में वर्णित अग्रिम जमानत के प्रावधान इस अधिनियम के अधीन दायर मामले में नहीं लागू होंगे.

सरकार द्वारा संशोधन क्यों किये गये?

  • यद्यपि SC/ST अधिनियम अजा/अजजा के नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, परन्तु उनके प्रति अत्याचार के मामलों में कोई कमी नहीं आई है. 2014 में ऐसे मामले 47,124 थे जो 2015 में घटकर 44,839 तो हुए परन्तु फिर 2016 में बढ़कर 47,338 हो गये.
  • यह स्थिति तब है जब देश के 14 राज्यों में 195 विशेष न्यायालय अत्याचार निवारण के मामलों की सुनवाई के लिए अलग से गठित किये गये हैं. इन न्यायालयों ने 2014 में 28.8% मामलों में सजा सुनाई और 71.2% आरोपित छूट गये. अगले साल 25.8% मामलों में सजा हुई और 74.2% आरोपित छूट गये. पुनः 2016 में 24.9% मामलों में सजा हुई और 75.1% आरोपित छूट गये.
  • लंबित वादों की संख्या भी 2014 से 2016 तक लगभग समान रही (क्रमशः 85.3%, 87.3% और 89.3%).

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Neglected diseases

संदर्भ

एक नए प्रतिवेदन के अनुसार उपेक्षित ऊष्ण कटिबंधीय रोगों से सम्बंधित अनुसंधान और विकास के लिए धनराशि मुहैया करने वाले देशों में भारत चौथा बड़ा देश है. यह प्रतिवेदन 11वें वार्षिक G-Finder सर्वेक्षण में तैयार हुआ है.

  • इस सर्वेक्षण में विकासशील देशों में उपेक्षित रोगों के लिए नए उत्पादों के विषय में अनुसंधान और विकास में किये गये वैश्विक निवेश का विश्लेषण किया गया है.
  • इस सर्वेक्षण में जिन उपेक्षित रोगों के लिए निवेश का अध्ययन किया गया वे हैं – ट्रैकोमा, बुरुली अल्सर, आमवात ज्वर, मेनिनजाइटिस, लेप्टोस्पायरोसिस, एचआईवी / एड्स, मलेरिया, यक्ष्मा, डेंगी, हेपेटाइटिस सी और कुष्ठ रोग.
  • सर्वेक्षण में धनराशि मुहैया करने के इन स्रोतों की पड़ताल की गई है – सरकारें, मानव-कल्याण संस्थाएँ, निजी क्षेत्र एवं अन्य प्रकार के संगठन.

प्रतिवेदन में वर्णित मुख्य तथ्य

  • प्रतिवेदन के अनुसार अमेरिका सबसे बड़ा निधि-प्रदाता है. उसने 1,595 मिलियन डॉलर की राशि दी.
  • 72 मिलियन डॉलर का निवेश करके भारत की सरकार इस मामले में चौथे स्थान पर रही.
  • निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में भारत को एक ऐसा देश माना गया जो उपेक्षित रोगों के लिए किये जा रहे निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा स्वयं उपलब्ध कराता है.
  • प्रतिवेदन में कहा गया है कि भारत उपेक्षित रोगों से सम्बंधित अनुसंधान और विकास के लिए 2009 से सरकारी योगदान कर रहा है और विश्व-भर में इस मामले में सबसे अधिक वृद्धि भारत में ही हुई है.

उपेक्षित रोगों के लिए R&D आवश्यक क्यों?

भारत में उपेक्षित ऊष्ण कटिबंधीय रोगों के लिए दवाई खोजने के निमित्त अनुसन्धान और विकास की आवश्यकता को कम करके आँका नहीं जा सकता. यहाँ ऐसे रोग बहुत मात्रा में होते हैं. 11 रोग तो ऐसे हैं जिनके मामले सबसे अधिक यहीं होते हैं, जैसे – हाथी पाँव, आंत का लीशमैनियासिस, ट्रेकोमा, टैपवार्म, राउंडवॉर्म, हुकवर्म, व्हिपवर्म, डेंगी और कुष्ठ रोग.

2017 में भारत में यक्ष्मा के 2.8 मिलियन नए मामले आये. विश्व-भर में यक्ष्मा से जितने लोगों का निधन होता है, उसमें 1/3 लोग भारतीय ही होते हैं.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Nitrogen pollution

संदर्भ

दक्षिण-एशियाई नाइट्रोजन हब (South Asian Nitrogen Hub) नामक संस्था एक अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान कार्यक्रम करने वाला है जो पर्यावरण, खाद्य-सुरक्षा, मानव-स्वास्थ्य और दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था पर नाइट्रोजन प्रदूषण से होने वाले प्रभावों से निबटने के उपायों का पता लगाएगा.

दक्षिण-एशियाई नाइट्रोजन हब क्या है?

  • दक्षिण-एशियाई नाइट्रोजन हब इंग्लैंड के सेण्टर फॉर इकोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी द्वारा बनाए जाने वाले 12 वैश्विक चुनौतियों से सम्बंधित अनुसंधान कोष (Global Challenges Research Fund – GCRF) हबों में से एक हब है.
  • ये सारे हब 85 देशों में वहाँ की सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों, भागीदारों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर कार्य करेंगे.
  • इनका मुख्य काम सतत विकास सम्बंधित चुनौतियों का समाधान करना होगा.
  • दक्षिण-एशियाई नाइट्रोजन हब के अंतर्गत इंग्लैंड और दक्षिण एशिया में 50 संगठन स्थापित किये जाएँगे जिसके लिए निधि मुहैया करने का काम UK रिसर्च एंड इनोवेशन करेगा.
  • इस परियोजना में भारत की भागीदारी बड़ी है क्योंकि इसमें इस देश के 18 संस्थान सहयोग करेंगे.
  • भारत दक्षिण एशिया का ऐसा एकमात्र देश है जिसने अपने नाइट्रोजन आकलन को एक वर्ष पहले ही पूरा कर लिया था.

नाइट्रोजन प्रदूषण

नाइट्रोजन प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला तत्त्व है. यह पौधों और जन्तुओं दोनों में वृद्धि एवं प्रजनन के लिए आवश्यक है. पृथ्वी के वायुमंडल का लगभग 78% भाग इसी से बना है. भारत में नाइट्रोजन प्रदूषण का मुख्य स्रोत कृषि है. इसके पश्चात् सीवेज एवं जैविक ठोस अपशिष्ट का स्थान आता है.

nitrogen pollution

प्रदूषित नाइट्रोजन के प्रभाव

  1. खाद्य उत्पादकता कम होना :- उर्वरकों के अत्यधिक और विवेकहीन उपयोग से फसलों की पैदावार कम हो गई है, जो इसके उपयोग के मूल उद्देश्य के ठीक विपरीत है.
  2. खाद्य फसलों द्वारा उर्वरकों का अपर्याप्त ग्रहण :- उर्वरकों के जरिये चावल और गेहूँ के लिए प्रयुक्त नाइट्रोजन का केवल 33% ही नाइट्रेट के रूप में पौधों के द्वारा ग्रहण किया जाता है.
  3. भूजल प्रदूषित होना :- उर्वरकों के निक्षालन ने पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भूजल में नाइट्रेट की सांद्रता (nitrate concentration) में वृद्धि कर दी है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सीमा से कहीं अधिक है.
  4. प्रबल ग्रीनहाउस गैस (GHG) :- नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) के रूप में नाइट्रोजन CO2 की तुलना में GHG के रूप में 300 गुना अधिक प्रबल है.
  5. आर्थिक प्रभाव :- भारत को हर साल 10 बिलियन डॉलर उर्वरक की सब्सिडी पर खर्च करना पड़ता है.
  6. स्वास्थ्य पर प्रभाव :- ब्लू बेबी सिंड्रोम, थायराॅयड ग्रन्थि से सम्बंधित बीमारी, विटामिन A की कमी आदि.
  7. अम्लीय वर्षा :- H2SO4 के साथ मिलकर नाइट्रिक अम्ल अम्लीय वर्षा का कारण बनता है, जो फसलों एवं मृदाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है.
  8. हानिकारक काई क्षेत्र :- जलमार्गों और महासागरों में प्रदूषित नाइट्रोजन से हानिकारक काई क्षेत्र और मृत क्षेत्र (dead zone) का निर्माण होता है. इन काइयों से मनुष्य और जलजीवों को हानि पहुँचाने वाले टोक्सिन उत्पन्न होते हैं. इस कारण अप्रत्यक्ष रूप से मछली पालन और साथ ही तटीय क्षेत्रों में जैव-विविधता को क्षति पहुँचती है.
  9. ओजोन क्षय :- नाइट्रस ऑक्साइड (N2O/laughing gas) मानव द्वारा उत्सर्जित प्रमुख ओजोन-क्षयकारी पदार्थ माना जाता है.
  10. स्मॉग निर्माण :- उद्योगों से उत्सर्जित नाइट्रोजन प्रदूषण स्मॉग निर्माण में सहायक होता है.

नाइट्रोजन प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए उठाये गए कदम

अनिवार्य नीम-लेपित यूरिया उत्पादन

नीम-लेपित यूरिया (neem coated urea) धीमी गति से नाइट्रोजन मुक्त करता है जिससे पौधों को इसे अवशोषित करने का समय मिल जाता है, इसलिए नाइट्रोजन का इष्टतम उपयोग होता है.

मृदा स्वास्थ्य कार्ड

यह मृदा के स्वास्थ्य और इसकी उर्वरता में सुधार लाने के लिए पोषक तत्त्वों की उचित मात्रा के सम्बन्ध में परामर्श के साथ-साथ किसानों को मृदा में पोषक तत्त्वों की स्थिति के विषय में जानकारी देता है. इससे कृषि में नाइट्रोजन के उपयोग में कमी है.

भारत स्टेज मानक

इसका उद्देश्य वाहनों से होने वाले हानिकारक उत्सर्जन जैसे – कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), अदग्ध हाइड्रोकार्बन (HC), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और कणिकीय पदार्थों (PM) को नियंत्रित करना है.

राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (NAQI) को लागू किया गया है जिसमें आठ प्रदूषकों में से एक नाइट्रोजन डाइऑक्साइड है जिसे नियंत्रित किया जाना चाहिए और इसके उत्सर्जन की निगरानी की जानी चाहिए.

अंतराष्ट्रीय पहलें

गोथेनबर्ग प्रोटोकॉल

इसका लक्ष्य अम्लीकरण, सुपोषण और भू-स्तरीय ओजोन को कम करना है और यह कन्वेंशन ऑन लॉन्ग-रेंज ट्रांस बाउंड्री एयर पॉल्यूशन का भाग है. इसका अन्य उद्देश्य मानव गतिविधियों के चलते होने वाले सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), अमोनिया (NH3), वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOC) और कणिकीय पदार्थों (PM) के उत्सर्जन को नियंत्रित और कम करना.

क्योटो प्रोटोकॉल

इसका उद्देश्य मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O), हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC), परफ्लोरोकार्बन (PFC), सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF6) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) जैसी ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करना है.

इंटरनेशनल नाइट्रोजन इनिशिएटिव (INI)

यह खाद्य उत्पादन में नाइट्रोजन की लाभकारी भूमिका को इष्टतम करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम है. इसकी स्थापना 2003 में साइंटिफिक कमिटी ऑफ़ द एनवायरनमेंट (SCOPE) तथा इंटरनेशनल जीओस्फीयर-बायोस्फीयर प्रोग्राम (IGBP) की स्पोंसरशिप के अंतर्गत की गई थी.

आगे की राह

औद्योगिक एवं सीवेज अपशिष्ट का पुनर्चक्रण करके देश में उर्वरकों के उपयोग में 40% कमी लाई जा सकती है. इससे अतिरिक्त संधाराणीय खाद्य उत्पादन हो सकता है और जैव उर्वरक क्षेत्र में नए आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं.

नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (Nitrogen Use Efficiency – NUE) बढ़ाना :- वर्ष के सही समय पर एवं सही पद्धति अपनाकर उचित मात्रा में उर्वरक का उपयोग करने से NUE में पर्याप्त वृद्धि हो सकती है. वर्तमान में NUE में 20% सुधार होने से वैश्विक स्तर पर 170 बिलियन अमरीकी डॉलर का शुद्ध आर्थिक लाभ होगा.

उर्वरक सब्सिडी कम करना : कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP)की रिपोर्ट के अनुसार NPK (nitrogen-phosphorus-potassium) के अनुपात को कम करने के लिए Phosphatic & Potassic (P&K) पर सब्सिडी में वृद्धि की जानी चाहिए जबकि यूरिया पर सब्सिडी कम की जानी चाहिए.

बफर : खेतों, विशेषकर सीमावर्ती जल निकायों वाले खेतों के चारों ओर पेड़, झाड़ियाँ और घास रोपने से जलनिकायों तक पहुँचने से पहले पोषक तत्त्वों को अवशोषित करने या छानने में सहायता मिल सकती है.

संरक्षण जुताई (मृदा अपरदन कम करने के लिए), पशुधन अपशिष्ट प्रबन्धन, जलनिकासी प्रबन्धन इत्यादि जैसे अन्य कदम भी उठाये जा सकते हैं.


Prelims Vishesh

Jaipur Literature Festival :-

  • पाँच दिनों तक चलने वाला वार्षिक जयपुर साहित्य उत्सव जयपुर के ऐतिहासिक दिग्गी पैलेस में आयोजित हो रहा है.
  • विदित हो कि यह उत्सव जयपुर में हर वर्ष जनवरी में होता है.
  • यह उत्सव 2006 में आरम्भ हुआ था. इसका आयोजन 2008 से टीम वर्क आर्ट्स नामक संस्था करती आई है.

INS Kohassa :-

  • उत्तरी अंडमान में स्थित डिग्लीपुर में भारत का एक नौसैनिक स्टेशन INS कोहासा चालू हो गया है.
  • ज्ञातव्य है कि यह नौसैनिक स्टेशन ऐसे स्थान अवस्थित है जहाँ से मलक्का होकर 80% माल चीन को जाते हैं और वहाँ से आते हैं.

Bandipur National Park :-

  • सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय बांदीपुर और वायनाड में क्रमशः 4 और 1 एलिवेटेड सड़क बनाना चाहता है जिसको लेकर पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय को आपत्ति है क्योंकि बांदीपुर में एक राष्ट्रीय उद्यान स्थित है.
  • हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने इन दोनों मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि वे छह सप्ताह के अन्दर एलिवेटेड सड़क निर्माण के विषय में आपसी सहमति बना लें.
  • विदित हो कि बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक में है और यह पास में स्थित नगरहोल राष्ट्रीय उद्यान, मुडुमलई राष्ट्रीय उद्यान और वायनाड वन्य जीव आश्रयणी के साथ-साथ नीलिगिरी जैव मंडल आश्रयणी का एक भाग है.
  • बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान उत्तर में काबिनी नदी और दक्षिण में मोयार नदी के बीच स्थित है और इसके बीच में से नुगु नदी गुजरती है.
  • इस उद्यान में सबसे ऊँचा स्थल एक पहाड़ी पर है जिसे हिमावड़ गोपालस्वामी बेट्टा कहते हैं.

Bio-Jet fuel for Military Aircraft :-

  • देश में उत्पादित जैव ईंधन को अंततः जेट विमानों में उपयोग करने की अनुमति सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC) द्वारा दे दी गई है.
  • यह ईंधन जट्रोफा पौधे के बीजों से तैयार हुआ है. इसके लिए बीज छत्तीसगढ़ से मँगाए गये हैं और उनको देहरादून-स्थित CSIR-IIP की प्रयोगशाला में प्रसंस्कृत किया गया है.

ISRO’s first mission of 2019 :-

  • वर्ष 2019 में ISRO ने अपना पहला मिशन कार्यान्वित करते हुए दो उपग्रहों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है.
  • ये उपग्रह हैं – Microsat-R (सैन्य उपग्रह) और Kalamsat (संचार उपग्रह).
  • ये दोनों उपग्रह PSLV C44 से छोड़े गये हैं.
  • कलामसैट उपग्रह दो महीने चलेगा. यह एक अतिसूक्ष्म उपग्रह है जो मात्र 10 से.मी. आकार का और 1.2 किलो भारी है. यह विश्व का सबसे हल्का और पहला 3D-मुद्रित उपग्रह है.

9th National Voters’ Day :-

  • 2011 से हर वर्ष जनवरी 25 को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय मतदाता दिवस इस वर्ष भी मनाया जा रहा है.
  • इस बार इसकी थीम है – “कोई मतदाता नहीं छूटे”.
  • विदित हो कि 1950 में 25 जनवरी को निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई थी. इसलिए राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी को मनाया जाता है.

Crocodylus palustris :-

  • एकता प्रतिमा (Statue of Unity) के निकट सी-प्लेन सेवा की सुविधा देने के लिए नर्मदा के सरदार सरोवर बाँध में स्थित दो जलाशयों से गुजरात के वन विभाग ने मगरों (Crocodylus palustris) को निकालना आरम्भ कर दिया है.
  • यह मगर प्रजाति IUCN की लाल सूची में 1982 से ही है.
  • भूटान और म्यांमार ये मगर पहले हुआ करते थे, पर अब नहीं होते.

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