Sansar डेली करंट अफेयर्स, 25 February 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 25 February 2020


GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to women.

Topic : Permanent Commission for Women

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार की आपत्तियों को किनारे रखते हुए आदेश दिया है कि सेना के 10 स्ट्रीमों में कार्यरत महिला अधिकारियों को सभी दृष्टि से उनके पुरुष सहकर्मियों के बराबर रखा जाए.

पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय ने जिस वाद में यह आदेश दिया वह सबसे पहले 2003 में दिल्ली उच्च न्यायालय में महिला अधिकारियों ने दायर किया था. वहाँ उन्हें 2010 में मनचाहा आदेश भी मिला था, परन्तु उस आदेश का पालन नहीं किया गया और भारत सरकार ने उसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी.

महिला अधिकारियों की आपत्ति क्या थी?

सेना के पुरुष शोर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी दस वर्ष की सेवा के अनंतर स्थायी कमीशन का विकल्प दे सकते थे. परन्तु यह विकल्प महिला अधिकारियों को उपलब्ध नहीं था. इस प्रकार वे किसी प्रकार की कमांड नियुक्ति से बाहर रखी जाती हैं. साथ ही उनको सरकारी पेंशन नहीं मिलता है क्योंकि 20 वर्ष की सेवा पूरी करने के उपरान्त भी सरकारी पेंशन देय होती है.

भारत सरकार का मंतव्य था कि एक तो महिलाएँ कठिन जगहों पर काम करने के लिए शारीरिक रूप से सक्षम नहीं होतीं, वहीँ दूसरी ओर उनके साथ मातृत्व और बच्चों की देखभाल की समस्या रहती है. साथ ही परिवार से अलग तैनाती बच्चों की पढ़ाई, गर्भावस्था के कारण काम से लम्बी अवधि तक दूर रहना आदि ऐसी बाते हैं जिनके कारण उनको स्थायी कमीशन नहीं मिलना चाहिए.

एक आपत्ति यह भी थी कि सेना मुख्यतः पुरुषों की सेवा है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाला सैनिक महिला अधिकारी के आदेश को मानने में कोताही बरत सकता है.

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपान का निहितार्थ

  1. अब महिला अधिकारी सभी कमांड नियुक्तियों के लिए योग्य हो जाएँगी और आगे प्रोन्नति के लिए उनके रास्ते खुल जाएँगे.
  2. इसका एक अर्थ यह भी है कि जूनियर रैंक की महिला अधिकारी वही प्रशिक्षण पाठ्यक्रम कर सकती हैं जो पुरुष करते हैं. अब उन्हें संवेदनशील स्थानों पर नियुक्त किया जा सकता है जो उच्चतर प्रोन्नति के लिए आवश्यक होता है.

GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Kambala

संदर्भ

पिछले दिनों श्रीनिवास गौड नामक कंबाला धावक ने 9 . 55 सेकंड में 100 मीटर की दौड़ लगाकर धूम मचा दी थी. परन्तु कुछ ही दिनों में फिर निशांत शेट्टी नामक एक और कंबाला धावक की चर्चा हुई जिसने यही दूरी 9.51 सेकंड में पूरी कर ली.

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कंबाला क्या है?

  • कंबाला एक पारम्परिक और अप्रतिस्पर्धात्मक खेल है जिसमें भैंसों के जोड़े धान के खेतों में दौड़ाये जाते हैं.
  • यह एक वार्षिक खेल है जो सामान्यतः नवम्बर से शुरू होकर मार्च तक चलता है.
  • यह खेल कर्नाटक के तटीय जिलों में होता है.
  • लोगों का कहना है कि वे इस प्रकार भगवान् को अपना धन्यवाद इस बात के लिए प्रकट करते हैं कि उन्होंने पशुओं को रोगों से बचाया.
  • समय के साथ यह खेल एक संगठित खेल का रूप ले चुका है. परन्तु पशु-अधिकार कार्यकर्ता दावा करते हैं कि इस खेल में भैसों को इस डर के मारे दौड़ना पड़ता है कि उन्हें पीटा जायेगा.
  • परन्तु दौड़ के आयोजकों का कहना है कि इस खेल में हिंसा का प्रयोग नहीं होता है और इसके स्वरूप में ऐसे कई सुधार लाये गये हैं जिससे यह आयोजन पशु के लिए पूर्णतया अनुकूल हो गया है.
  • सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगाये जाने को देखते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कंबाला पर भी रोक लगा दी थी परन्तु बाद में कर्नाटक सरकार ने एक अध्यादेश निकालकर कंबाला को प्रतिबंध से मुक्त कर दिया.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Constitution- historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure.

Topic : Delimitation of Constituencies

संदर्भ

जम्मू और कश्मीर राज्य के विभाजन और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख को संघीय क्षेत्र बनाए जाने के लगभग छह महीने पूरे होने पर जम्मू-कश्मीर के विधान सभा क्षेत्रों के परिसीमन की कार्रवाई चालू कर दी है.

पृष्ठभूमि

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर राज्य को संघीय क्षेत्र बनाने तथा लद्दाख को एक संघीय क्षेत्र का स्वरूप देने के कारण चुनाव क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन करना अनिवार्य हो गया है.

स्मरण रहे कि 2014 में जब आंध्र प्रदेश से काटकर तेलंगाना बनाया गया था तो उस समय भी विधान सभा क्षेत्रों के परिसीमन की आवश्यकता उत्पन्न हुई थी.

परिसीमन क्या है?

परिसीमन का शाब्दिक अर्थ विधान सभा से युक्त किसी राज्य के अन्दर चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निधारण होता है.

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन किस प्रकार होगा?

  • जम्मू-कश्मीर संघीय क्षेत्र की विधान सभा में वर्तमान 107 के स्थान पर 114 सीटें होंगी जिनमें मात्र 90 सीटों के लिए चुनाव होंगे क्योंकि शेष 24 वे छाया सीटें (shadow seats) हैं जिनको पाकिस्तान द्वारा कब्ज़ा किये गये कश्मीर के लिए आरक्षित रखा गया है.
  • परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना के आँकड़ों को आधार बनाया जाएगा.
  • सम्प्रति जम्मू-कश्मीर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1957 को अमान्य कर दिया गया है और इसलिए अब परिसीमन का कार्य जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (यथा समय-समय पर संशोधित) तथा 2019 के अधिनियम 34 के अनुभाग 59 और 60 में विहित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा.

परिसीमन का कार्य कौन करता है?

  • परिसीमन का काम एक अति सशक्त आयोग करता है जिसका औपचारिक नाम परिसीमन आयोग है.
  • यह आयोग इतना सशक्त होता है कि इसके आदेशों को कानून माना जाता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
  • आयोग के आदेश राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित तिथि से लागू हो जाते हैं. इन आदेशों की प्रतियाँ लोक सभा में अथवा सम्बंधित विधान सभा में उपस्थापित होती हैं. इनमें किसी संशोधन की अनुमति नहीं होती.

परिसीमन आयोग और उसके कार्य

  • संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार संसद प्रत्येक जनगणना के पश्चात् एक सीमाकंन अधिनियम पारित करता है और उसके आधार पर केंद्र सरकार एक परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन करती है.
  • इस आयोग में सर्वोच्च न्यायालय का एक सेवा-निवृत्त न्यायाधीश, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त सदस्य होते हैं.
  • इस आयोग का काम चुनाव क्षेत्रों की संख्या और सीमाओं का इस प्रकार निर्धारण करना है कि यथासम्भव सभी चुनाव क्षेत्रों की जनसंख्या एक जैसी हो.
  • आयोग का यह भी काम है कि वह उन सीटों की पहचान करे जो अजा/अजजा के लिए आरक्षित होंगे. विदित हो कि अजा/अजजा के लिए आरक्षण तब होता है जब सम्बंधित चुनाव-क्षेत्र में उनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है.
  • सीटों की संख्या और आकार के बारे में निर्णय नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जाता है.
  • यदि आयोग के सदस्यों में किसी बात को लेकर मतभेद हो तो बहुत के मत को स्वीकार किया जाता है.
  • संविधान के अनुसार, परिसीमन आयोग का कोई भी आदेश अंतिम होता है और इसको किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
  • प्रारम्भ में आयोग भारतीय राज्य पत्र में अपने प्रस्तावों का प्रारूप प्रकाशित करता है और पुनः उसके विषय में जनता के बीच जाकर सुनवाई करते हुए आपत्ति, सुझाव आदि लेता है. तत्पश्चात् अंतिम आदेश भारतीय राजपत्र और राज्यों के राजपत्र में प्रकाशित कर दिया जाता है.

परिसीमन आवश्यक क्यों?

जनसंख्या में परिवर्तन को देखते हुए समय-समय पर लोक सभा और विधान सभा की सीटों के लिए चुनाव क्षेत्र का परिसीमन नए सिरे से करने का प्रावधान है. इस प्रक्रिया के फलस्वरूप इन सदनों की सदस्य संख्या में भी बदलाव होता है.

परिसीमन का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के अलग-अलग भागों को समान प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराना होता है. इसका एक उद्देश्य यह भी होता है कि चुनाव क्षेत्रों के लिए भौगोलिक क्षेत्रों को इस प्रकार न्यायपूर्ण ढंग से बाँटा जाए जिससे किसी एक राजनीतिक दल को अन्य दलों पर बढ़त न प्राप्त हो.

चुनाव क्षेत्र परिसीमन का काम कब-कब हुआ है?

  • चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन का काम सबसे पहले 1950-51 में हुआ था. संविधान में उस समय यह निर्दिष्ट नहीं हुआ था कि यह काम कौन करेगा. इसलिए उस समय यह काम राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के सहयोग से किया था.
  • संविधान के निर्देशानुसार चुनाव क्षेत्रों का मानचित्र प्रत्येक जनगणना के उपरान्त फिर से बनाना आवश्यक है. अतः 1951 की जनगणना के पश्चात् 1952 में परिसीमन आयोग अधिनियम पारित हुआ. तब से लेकर 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन का काम हुआ. उल्लेखनीय है कि 1976 में आपातकाल के समय इंदिरा गाँधी ने संविधान में संशोधन करते हुए परिसीमन का कार्य 2001 तक रोक दिया था. इसके पीछे यह तर्क दिया था गया कि दक्षिण के राज्यों को शिकायत थी कि वे परिवार नियोजन के मोर्चे पर अच्छा काम कर रहे हैं और जनसंख्या को नियंत्रण करने में सहयोग कर रहे हैं जिसका फल उन्हें यह मिल रहा है कि उनके चुनाव क्षेत्रों की संख्या उत्तर भारत के राज्यों की तुलना में कम होती है. अतः1981 और 1991 की जनगणनाओं के बाद परिसीमन का काम नहीं हुआ.
  • 2001 की जनगणना के पश्चात् परिसीमन पर लगी हुई इस रोक को हट जाना चाहिए था. परन्तु फिर से एक संशोधन लाया गया और इस रोक को इस आधार पर 2026 तक बढ़ा दिया कि तब तक पूरे भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर एक जैसी हो जायेगी. इसी कारण 2001 की जनगणना के आधार पर किये गये परिसीमन कार्य (जुलाई 2002 – मई 31, 2018) में कोई ख़ास काम नहीं हुआ था. केवल लोकसभा और विधान सभाओं की वर्तमान चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं को थोड़ा-बहुत इधर-उधर किया गया था और आरक्षित सीटों की संख्या में बदलाव लाया गया था.

GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Amendments in Arms Act, 1959 and Arms Rules, 2016 notified

संदर्भ

आयुध अधिनियम, 1959 (Amendments in Arms Act, 1959) एवं आयुध नियमावली, 2016 (Arms Rules, 2016) में किये गये संशोधनों की अधिसूचना प्रकाशित की गई है.

संशोधनों का संक्षिप्त विवरण

  • पहले अंतर्राष्ट्रीय पदक जीतने वाले या विख्यात निशानेबाज केवल सात अतिरिक्त हथियार रख सकते थे. पर छूट श्रेणी के अंतर्गत ऐसे 12 अतिरिक्त हथियार रखे जा सकते हैं.
  • यदि कोई निशानेबाज एक खेल में विख्यात है तो वह छूट श्रेणी के अंतर्गत चार हथियार रख सकता था. पर अब वह आठ रख सकेगा.
  • यदि कोई निशानेबाज दो खेलों में ख्याति प्राप्त है तो वह सात हथियार रख सकता है. पर अब वह ऐसे अधिकतम दस हथियार रख सकेगा.
  • पहले यदि कोई निशानेबाज दो से अधिक खेलों में ख्याति प्राप्त था तो वह छूट श्रेणी में सात ही हथियार रख सकता था जोकि अब बढ़ाकर अधिकतम 12 कर दिया गया है.
  • किसी भी श्रेणी के अंतर्गत जूनियर निशानेबाज को अभी एक ही हथियार रखने दिया जाता है, परन्तु संशोधन के पश्चात् अब वह दो हथियार रख सकेगा.
  • ऊपर बताई गई छूटों से अलग, कोई भी निशानेबाज आयुध अधिनियम, 1959 के प्रावधानों के अंतर्गत साधारण नागरिक के रूप में दो हथियार रखने की अर्हता रखता है.
  • आयुध नियमावली, 2016 के नियम 40 का संशोधन करके निशानेबाजों द्वारा एक वर्ष में खरीदी गई गोली आदि की मात्रा अब अच्छी-खासी बढ़ा दी गई है.
  • अब क्यूरियो श्रेणी (50 साल से पुराने दुर्लभ वस्तु की श्रेणी) के अन्दर आने वाले छोटे हथियारों को खरीदने और रखने के लिए किसी भारतीय नागरिक को लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी. परन्तु इन हथियारों का उपयोग करने या कहीं ले जाने के लिए समुचित लाइसेंस लेना होगा. इस तरह के आवश्यक लाइसेंस में प्रविष्टि के बिना धारक को उनके उपयोग हेतु गोला-बारूद की बिक्री नहीं की जाएगी.
  • संशोधन में वर्तमान अपराधों जैसे हथियारों का अवैध निर्माण, विक्रय, हस्तांतरण, निषिद्ध हथियारों और निषिद्ध गोला-बारूद को रखना, हथियारों के स्वरूप को बदलना, उनका आयात-निर्यात करना आदि के लिए निर्धारित दंडों में वृद्धि कर दी गई.
  • संशोधन में नए-नए अपराध भी परिभाषित किये गये हैं और उनके लिए दंड का प्रावधान किया गया है, जैसे – पुलिस या सैनिकों से हथियार छीनना, संगठित अपराधी गुट में संलिप्त होना, हथियारों की अवैध तस्करी, विदेश से अवैध रूप से हथियार मंगाना, विवाह आदि समारोह में लापरवाही के साथ गोली चलाना आदि.
  • संशोधन के अनुसार अब शस्त्र लाइसेंस की अवधि तीन वर्ष न होकर पाँच वर्ष की होगी. साथ ही जालसाजी को रोकने के लिए यह लाइसेंस इलेक्ट्रॉनिक रूप में दिया जाएगा.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : State of India’s Birds 2020

संदर्भ

गुजरात के गाँधीनगर में चल रहे प्रवासी प्रजाति संधि (Convention on Migratory Species) के पक्षकारों के 13वें संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अवसर पर पिछले दिनों 10 संस्थानों एवं अनेक वैज्ञानिकों के द्वारा तैयार अनुसंधान पत्र निर्गत किया गया जिसे State of India’s Birds 2020’ (SoIB) शीर्षक दिया गया है. इस अनुसंधान पत्र के किये आँकड़ों का सिटीजन साइंस ऐप “eBird” के माध्यम से किया गया जिसके अन्दर 15,500 सिटीजन वैज्ञानिकों ने एक करोड़ प्रविष्टियाँ कर रखी हैं. इस ऐप की होस्टिंग की कॉर्नेल विश्वविद्यालय की पक्षी विज्ञान प्रयोगशाला (Cornell University’s Laboratory of Ornithology) करती है.

मुख्य निष्कर्ष

  • जिन 867 प्रजातियों का अध्ययन किया गया है उनमें से 50% प्रजातियों की जनसंख्या दीर्घकाल में तथा 146 प्रजातियों की संख्या अल्पकाल में ढलान की ओर होगी.
  • आखेट पक्षियों जैसे – ईगल, बाज, चील आदि, प्रवासी सामुद्रिक पक्षियों तथा विशेष बस्तियों में रहने वाले पक्षियों की जनसंख्या पिछले दशकों में सबसे अधिक दुष्प्रभावित हुई है.
  • भारत के पश्चिमी घाट विश्व के सबसे बड़े जैव विविधता के गढ़ माने जाते हैं, परन्तु यहाँ पक्षियों की संख्या 2000 के बाद 75% घट चुकी है.
  • किन्तु भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर अब पहले से अधिक हो गये हैं और इनका निवास क्षेत्र भी पहले से अधिक विस्तृत हो गया है.
  • राष्ट्रीय स्तर पर गौरैयों की संख्या भी जस-के-तस बनी हुई है. यद्यपि शहरों में इनमें अच्छी-खासी कमी देखी जाती है.
  • मोर, गौरैया, कोयल, तोते और दर्जिन चिड़िया जैसी 126 प्रजातियों की संख्या बढ़ने की आशा है क्योंकि ये पक्षी मानव बस्तियों में भी अपना सामंजस्य बैठा लेते हैं.

वर्गीकरण

  • अनुसंधान पत्र में 101 पक्षी प्रजातियों को भारत के लिए संरक्षण की दृष्टि से “अत्यंत चिंता के योग्य” (High Conservation Concern) वर्ग में रखा गया है.
  • 319 प्रजातियों को संरक्षण की दृष्टि से “सामान्यतः चिंतनीय” (Moderate Conservation Concern ) वर्ग में डाला गया है.

पक्षियों की संख्या क्यों कम हो रही है?

अनुसंधान पत्र बताता है कि निम्नांकित कारणों से पक्षी घटते जा रहे हैं –

  1. मानवीय गतिविधि
  2. कीटनाशक जैसे विषाक्त पदार्थों की व्यापक उपस्थिति
  3. पक्षियों के व्यापार के लिए उनका आखेट और उनका जाल से फंसाया जाना/

Prelims Vishesh

Surajkund International Crafts Mela :-

  • सूरजकुंड मिला फरीदाबाद में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला विश्व का सबसे बड़ा हस्तशिल्प मेला है.
  • इस वर्ष यह 34वीं बार आयोजित हो रहा है.
  • 2020 के इस मेले के लिए थीम राज्य के रूप में हिमाचल प्रदेश को चुना गया है.

Malai Mahadeshwara Wildlife Sanctuary :

  • शीघ्र ही राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) कर्नाटक के चामराज नगर जिले में स्थित मलई महादेश्वरा वन्यजीव आश्रयणी को व्याघ्र रिज़र्व के रूप में अधिसूचित करने जा रहा है.
  • यहाँ वर्तमान में 20 बाघ रहते हैं.
  • इस व्याघ्र रिज़र्व के घोषित हो जाने पर चामराज नगर देश का एक ऐसा अनोखा जिला बन जाएगा जहाँ तीन-तीन व्याघ्र रिज़र्व होंगे.
  • पहले से जो दो अन्य व्याघ्र रिज़र्व हैं, वे हैं – बांदीपुर रिज़र्व और बिलिगिरी रंगनाथ मंदिर व्याघ्र रिज़र्व.
  • जहाँ तक कर्नाटक का प्रश्न है इस राज्य में कुल मिलाकर अब छह व्याघ्र रिज़र्व हो जाएँगे.

Craspedotropis gretathunbergae :

  • पिछले दिनों ब्रूनेई में भूमिचर घोंघे की एक नई प्रजाति का पता चला है जिसका नाम स्वीडन की जलवायु कार्यकर्त्री Greta Thunberg के नाम पर रखा गया है.
  • यह घोंघा 2 मिलीमीटर लम्बा और गहरे ग्रे रंग के मूछों वाला होता है.

Idlib :

  • पिछले दिनों सीरिया के राष्ट्रपति बशर-अल-असद की सरकारी सेनाओं और तुर्की की सेना के बीच जम कर संघर्ष हुआ.
  • ज्ञातव्य है कि इदलिब उत्तर-पश्चिम सीरिया का एक शहर है जो इदलिब प्रान्त की राजधानी अलेप्पो से 59 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है.

SERB Women Excellence Award-2020 :-

  • लखनऊ स्थित CSIR-CDRI के सूक्ष्म पराजीवी विज्ञान एवं प्रतिरोध विज्ञान विभाग के वरीय वैज्ञानिक को 2020 का सर्ब महिला उत्कृष्टता पुरस्कार मिला है.
  • यह पुरस्कार राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों द्वारा मान्यता प्राप्त करने वाली 40 वर्ष से कम आयु की महिला वैज्ञानिकों को दिया जाता है.
  • पुरस्कार में महिला शोधकर्ता को 5 लाख का शोध अनुदान प्रतिवर्ष तीन वर्ष दिया जाता है.

International Judicial Conference :

  • पिछले दिनों नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें भारत सरकार द्वारा सेना में और लड़ाकू विमानों में महिलाओं के चयन की प्रशंसा की गई क्योंकि ऐसा करने से लैंगिक समानता को बल मिला है.
  • सम्मेलन में भी यह चर्चा हुई कि महिलाओं को खदानों में रात में काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए अथवा नहीं.

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