Sansar डेली करंट अफेयर्स, 24 July 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 24 July 2020


GS Paper 1 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Chandra Shekhar Azad

संदर्भ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने (गुरुवार 23 जुलाई) लोकमान्य तिलक और चंद्र शेखर आजाद को उनकी जयंती पर याद किया. 

चंद्रशेखर आजाद 

  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक एवं लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ.
  • उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी एवं माता का नाम जगदानी देवी था.
  • चंद्रशेखर आजाद 14 वर्ष की उम्र में बनारस गए और वहाँ एक संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई की.
  • 1920-21 के वर्षों में वे गाँधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े. वे गिरफ्तार हुए और जज के सामने प्रस्तुत किए गए. जहाँ उन्होंने अपना नाम ‘आजाद‘, पिता का नाम ‘स्वतंत्रता‘ और ‘जेल‘ को उनका निवास बताया.
  • जब क्रांतिकारी आंदोलन उग्र हुआ, तब आजाद उस ओर खिंचे और ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट आर्मी’ से जुड़े.
  • रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आजाद ने काकोरी षड्यंत्र (1925) में सक्रिय भाग लिया और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गए.
  • 17 दिसंबर, 1928 को चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और राजगुरु ने शाम के समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर को घेर लिया और ज्यों ही जे.पी. साण्डर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर निकले तो राजगुरु ने पहली गोली दाग दी, जो साण्डर्स के माथे पर लग गई वह मोटरसाइकिल से नीचे गिर पड़ा. फिर भगत सिंह ने आगे बढ़कर 4-6 गोलियां दाग कर उसे बिल्कुल ठंडा कर दिया. जब साण्डर्स के अंगरक्षक ने उनका पीछा किया, तो चंद्रशेखर आजाद ने अपनी गोली से उसे भी समाप्त कर दिया.
  • अलफ्रेड पार्क, इलाहाबाद में 1931 में उन्होंने रूस की बोल्शेविक क्रांति की तर्ज पर समाजवादी क्रांति का आह्वान किया. उन्होंने संकल्प किया था कि वे न कभी पकड़े जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी.
  • इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने 27 फरवरी, 1931 को इसी पार्क में स्वयं को गोली मारकर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी.

GS Paper 1 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Bal Gangadhar Tilak

संदर्भ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने (गुरुवार 23 जुलाई) लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्र शेखर आजाद को उनकी जयंती पर याद किया. 

लोकमान्य तिलक

प्रथम चरण में तिलक की गतिविधियाँ मुख्यतः महाराष्ट्र तक ही सीमित रहीं, परन्तु, दूसरे चरण में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अग्रणी भूमिका निभाई. सर्वप्रथम उन्होंने भारतीयों के दिमाग से हीनता की भावना मिटाने का निश्चय किया. इस उद्देश्य से उन्होंने देशभक्ति और नैतिकता की शिक्षा पर बल दिया. उन्हीं के प्रयासों से ‘‘दक्कन एजुकेशन सोसायटी’’ एवं ‘‘फरग्यूसन कॉलेज’’ की स्थापना हुई. शिक्षण संस्थाओं की स्थापना के अतिरिक्त उन्होंने जनमत को जाग्रत करने के लिए केसरी (मराठी दैनिक) और मराठा (अंग्रेजी साप्ताहिक) का प्रकाशन आरंभ किया. इन समाचार पत्रों में उन्होंने भारतीय संस्कृति की सराहना की तथा पश्चिमी सभ्यता के अंधाधुंध अनुकरण की प्रवृत्ति की खिल्ली उड़ाई. भारतीयों के गौरव को बढ़ाने के लिए आर्यों की जन्मभूमि पर विद्वतापूर्ण लेख लिखे. वे भारतीयों को नैतिकता और कर्म मार्ग की शिक्षा देने के लिए गीता की व्याख्या भी करते थे.

बाद में जब वह मांडले जेल में थे तब उन्होंने मराठी में गीता पर टीका लिखी, जो ‘गीता रहस्य’ के नाम से जानी जाती है. तिलक ने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति एवं जनता को संगठित करने के लिए धार्मिक मनोभावना को भी उभारने का प्रयास किया. इस उद्देश्य से उन्होंने ‘गणपति उत्सव’ एवं ‘शिवाजी उत्सव’ बड़े संगठित पैमाने पर मनाने की व्यवस्था की. उन्होंने गोहत्या विरोधी समितियाँ, लाठी और अखाड़ा क्लब भी स्थापित किए.

राजनीतिक जीवन

1900 में तिलक कांग्रेस से प्रभावित होकर इसमें सम्मिलित हुए, परन्तु आरंभ से ही उन्हें कांग्रेस की नरमपंथी नीतियों में विश्वास नहीं था. उनका विचार था कि कागंसे्र का लक्ष्य अपने लिए स्वयं कानून बनाने का अधिकार प्राप्ति होना चाहिए, न कि ऐसे सामाजिक सुधार जिन्हें स्वाधीनता मिलने तक टाला जा सकता था. तिलक ने कांग्रेस पर ऐसे कार्यक्रम रखने के लिए दबाव डाला, जिससे उसे जन समर्थन प्राप्त हो सके. वे यह भी मानते थे कि जनता को और कांग्रेस को बड़े पैमाने पर अंग्रेजी सरकार का प्रतिरोध करने के लिए तैयार होना चाहिए. तिलक ने इस उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा, स्वदेशी, बहिष्कार और स्वराज्य का चार सूत्री कार्यक्रम पेश किया. 1897-98 में जब सरकार ने तिलक को 18 मास के कारावास की सजा दी, तो उन्होंने सहर्ष इसे स्वीकार कर लिया.

1907 के कांग्रेस के सूरत अधिवेशन के बाद लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को अपने साथियों सहित कांग्रेस छोड़कर अलग होना पड़ा. उन्होंने कांग्रेस से अलग उग्रवादी आन्दोलन जारी रखा. कांग्रेस की आतंरिक फूट का लाभ उठाकर 1908 में सरकार ने तिलक पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया. उन्हें 6 वर्ष के कारावास की सजा दी गयी और मांडले निर्वासित कर दिया गया. 1910 ई. में बाल गंगाधर तिलक ने लन्दन के टाइम्स अखबार के वैदेशिक संवाददाता तथा ‘इंडिया अनरेस्ट’ के लेखक वैलेंटाइन शिरोल के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दायर किया.

बाल गंगाधर तिलक 1914 में मांडले से वापस आए. उस समय भारत और विश्व की राजनीतिक स्थिति अत्यंत गंभीर थी. प्रथम विश्वयुद्ध का खतरा मंडरा रहा था. मुस्लिम लीग का भारतीय राजनीति में उदय हो चुका था, कांग्रेस निष्क्रिय हो चुकी थी. ऐसी स्थिति में लोकमान्य तिलक आपसी फूट को समाप्त कर पुनः स्वतंत्रता आन्दोलन की गति तीव्र करना चाहते थे. अतः एनी बेसेंट के प्रयासों के फलस्वरूप तिलक अपने सहयोगियों के साथ पुनः 1916 में लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस में शामिल हुए. वे कांग्रेस के अंदर ही एक ‘‘होमरूल लीग’’ बनाना चाहते थे पर कांग्रेस की अस्पष्ट नीति क के कारण उन्हें सितम्बर 1916 में एक अलग होमरूल लीग बनाने को बाध्य होना पड़ा. उन्होंने अपने समाचार पत्रों द्वारा जनता को इसके उद्देश्यों से परिचित कराया तथा महाराष्ट्र और मध्य भारत में होमरूल आन्दोलन (Home rule movement) को बढ़ावा दिया. उन्होंने घोषणा की कि, ‘‘स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे मैं लेकर रहूँगा.’’

जब सरकार ने 1917 में संवैधानिक सुधारों की घोषणा की, तो उन्होंने इसका स्वागत किया. उनका विचार था कि सरकार के साथ सहयोग कर गृह शासन को प्राप्त किया जा सकता था. उन्होंने खिलाफत आन्दोलन को भी समर्थन दिया, परन्तु जब गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन आरंभ करने का निश्चय किया तो लोकमान्य तिलक ने अप्रैल 1920 में आगामी चनुाव लड़ने के लिए ‘‘कांग्रेस डेमोक्रेटिक पार्टी’’ की स्थापना की. वे अचानक बीमार हो गये और 1 अगस्त 1920 को उनकी मृत्यु हो गयी. 1 अगस्त को ही गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन की घोषणा की. एक युग का अंत और एक नए युग का आरंभ एक ही साथ हुआ.

निःसंदेह तिलक भारत की एक महान् विभूति थे. स्वयं गाँधीजी ने उनका महत्त्व स्वीकार किया था. तिलक की मृत्यु के बाद ‘‘यंग इंडिया’’ के अपने लेख में गाँधीजी ने स्वीकार किया कि उनके समय में जनसाधारण पर जितना प्रभाव बाल गंगाधर तिलक का था, उतना अन्य किसी का नहीं. जिस दृढत़ा और स्थिरता से लोकमान्य ने स्वराज्य के संदेश का प्रचार किया, वैसा किसी ने नहीं किया. वस्तुतः तिलक एक यर्थाथवादी राजनीतिज्ञ और उच्चकोटि के दार्शनिक थे.


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important Geophysical phenomena such as earthquakes, Tsunami, Volcanic activity, cyclone etc.

Topic : Hurricane Hanna

संदर्भ

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात ‘हन्ना’ ने अमेरिका के टेक्सास प्रांत के दक्षिणी तट पर भारी मचाई है. दक्षिण टेक्सास के कुछ हिस्सों में हरिकेन हन्ना से 15 इंच से अधिक वर्ष को हुई है, जिसके परिणामस्वरूप यहा गंभीर बाढ़ की स्थिति बन गयी है.

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात (TROPICAL CYCLONES)                

उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों को कैरबियन सागर में हरिकेन, पूर्वी चीन सागर में टायफून, फिलीपिंस में “बैगयू”, जापान में “टायसू”, ऑस्ट्रेलिया में “विलिबिलि” तथा हिन्द महासागर में “चक्रवात” और “साइक्लोन” के नाम से जाना जाता है.

उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की अधिकतम बारंबारता पूर्वी चीन सागर में मिलती है और इसके बाद कैरिबियन, हिन्द महासागर और फिलीपिन्स उसी क्रम में आते हैं. उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के प्रमुख क्षेत्र निम्न्वित हैं –

  1. उत्तरी अटलांटिक महासागर– वर्ड अंतरीप का क्षेत्र, कैरबियन सागर, मैक्सिको की खाड़ी, पश्चिमी द्वीप समूह.
  2. प्रशांत महासागर– दक्षिणी चीन, जापान, फिलीपिन्स, कोरिया एवं वियतनाम के तटीय क्षेत्र, ऑस्ट्रेलिया, मैक्सिको तथा मध्य अमेरिका का पश्चिमी तटीय क्षेत्र.
  3. हिन्द महासागर– बंगाल की खाड़ी, अरब सागर, मॉरिसस, मेडागास्कर एवं रियूनियन द्वीपों के क्षेत्र.

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की विशेषताएँ

  1. इनका व्यास 80 से 300 किमी. होता है. कभी-कभी इनका व्यास 50 किमी. से भी कम होता है.
  2. इसकी औसत गति 28-32 किमी. प्रतिघंटा होती है, मगर हरिकेन और टायफून 120 किमी. प्रतिघंटा से भी अधिक गति से चलते हैं.
  3. इनकी गति स्थल की अपेक्षा सागरों पर अधिक तेज होती है.
  4. सामान्यतः व्यापारिक हवाओं के साथ पूर्व से पश्चिम की ओर गति करते हैं.
  5. इसमें अनेक वाताग्र नहीं होते और न ही तापक्रम सम्बन्धी विभिन्नता पाई जाती है.
  6. कभी-कभी एक ही स्थान पर ठहरकर तीव्र वर्षा करते हैं.
  7. समदाब रेखाएँ अल्पसंख्यक और वृताकार होती है.
  8. केंद्र में न्यून वायुदाब होता है.
  9. इनका विस्तार भूमध्य रेखा के 33 1/2 उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों तक होता है.

निर्माण संबंधी दशाएँ

  1. एक विशाल गर्म सागर की उपस्थिति जिसके सतह का तापमान कम से कम 27°C हो.
  2. सागर के उष्ण जल की गहराई कम से कम 200 मी. होनी चाहिए.
  3. पृथ्वी का परिभ्रमण वेग उपर्युक्त स्थानों पर 0 से अधिक होनी चाहिए.
  4. उच्चतम आद्रता की प्राप्ति.
  5. उच्च वायुमंडलीय अपसरण घटातलीय अपसरण से अधिक होनी चाहिए.
  6. उध्वार्धर वायुप्रवाह (vertical wind flow) नहीं होनी चाहिए.
  7. निम्न स्तरीय एवं उष्ण स्तरीय विक्षोभ की उपस्थति.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Vienna Convention on Consular Relations and the China-US Consular Convention.

संदर्भ

अमेरिकी कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने ह्यूस्टन स्थित चीनी कांसुलेट में जबरदस्ती प्रवेश किया. चीन ने अमेरिका के इस कार्य पर विरोध जताते हुये इसे राजनयिक सम्बन्धों पर हुये वियना समझौते का उल्लंघन बताया.

पृष्ठभूमि

विदित हो कि अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन ने चीन को ह्यूस्टन स्थित वाणिज्य दूतावास पर आर्थिक जासूसी का आरोप लगाते हुए इसे बंद करने का आदेश दिया था. इसके बाद अमेरिकी कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने ह्यूस्टन स्थित चीनी कांसुलेट में प्रवेश किया.

राजनयिक सम्बन्धों पर वियना समझौता

  • सबसे पहले वर्ष 1961 में वियना में स्वतंत्र और संप्रभु देशों में परस्पर राजनयिक संबंधों को लेकर एक संधि पर हस्ताक्षर किए गये थे.
  • इसके दो वर्ष के पश्चात् 1963 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसी संधि से मिलती-जुलती एक अन्य संधि का प्रारूप तैयार किया जिसेवियना कन्वेंशन ऑन कांसुलर रिलेशंस के नाम से हम जानते हैं.
  • वियना कन्वेंशन ऑन कॉन्सुलर रिलेशंस को भारत सहित 180 देशों ने हस्ताक्षर करके मंजूरी प्रदान की है.

वियना समझौते के प्रमुख प्रावधान

  • इस अंतर्राष्ट्रीय संधि के अंतर्गत राजनियकों को विशेष अधिकार दिए गए हैं.
  • वियना संधि के अनुसार राजनयिकों को किसी भी कानूनी मामले में गिरफ्तार करने या हिरासत में रखने पर रोक है.
  • संधि के अनुच्छेद 31 में स्पष्ट है कि मेजबान देश दूसरे देश के दूतावास में उस देश की आज्ञा के बिना प्रवेश नहीं कर सकता है. लेकिन दूतावास की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्हीं की है.
  • अनुच्छेद 36 के अनुसार यदि कोई देश किसी विदेशी नागरिक को गिरफ्तार करता है, तो संबंधित देश के दूतावास को तुरंत इसकी जानकारी देगा.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Effect of Policies & Politics of Countries on India’s Interests.

Topic : Sikh for Justice’s ‘Referendum 2020’

संदर्भ

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने खालिस्तान समूह के जस्टिस फॉर सिख (SFJ) द्वारा कराये जाने वाले जनमत-संग्रह 2020 (Referendum 2020) के परिणामों को मान्यता नहीं देने के कनाडा के निर्णय का स्वागत किया.

जनमत-संग्रह 2020 क्या है?

  • जनमत-संग्रह खालिस्तान समर्थक ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) द्वारा पंजाब की स्वतंत्रता के लिए 2020 में कराया जाने वाला एक गैर-बाध्यकारी जनमत संग्रह है.
  • सिख फॉर जस्टिस (SFJ) नाम का यह समूह पिछले कई सालों से खालिस्तान की मांग को विश्व-भर में रह रहे पंजाबियों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहा है.
  • इनका उद्देश्य पाकिस्तान के पंजाब और भारत के पंजाब को एक साथ मिलाकर एक खालिस्तान की मांग करना है और इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाना है.

सिख फॉर जस्टिस (SFJ)

  • यह अमेरिका स्थित एक अलगाववादी समूह है जो खालिस्तान के रूप में भारत और पाकिस्तान से पंजाब के अलगाव का समर्थन करता है.
  • 2019 में भारत ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए भारत में इसके किसी भी क्रिया-कलाप को प्रतिबंधित कर दिया है.
  • इसके संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारतीय जमीन पर पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी गतिविधियों को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने के लिए आतंकवादी घोषित किया गया है.
  • सिख फॉर जस्टिस द्वारा ही ‘जनमत-संग्रह (Referendum) 2020’ के लिए एक अभियान शुरू किया गया है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

खालिस्तानी चरमपंथी भारत से भले ही खदेड़ दिए गए हों, लेकिन उनकी अलगाववादी सोच या विचारधारा कमजोर नहीं पड़ी है, ऐसा लगता है. दुनिया के कई देशों में भारत विरोध और खालिस्तान के समर्थन में चुनिंदा समूहों की लामबंदी बदस्तूर जारी है. इस विरोध में वैचारिक अलगाव है, भारतीय एकता और अखंडता को प्रभावित करने के वैश्विक सरोकार भी हैं, वैश्विक आतंकी संगठनों के साझा प्रयास भी हैं, धार्मिक अलगाव को बढ़ावा देने की कोशिशें भी हैं और राजनीतिक स्वीकार्यता बनाए रखने की कुत्सित प्रतिबद्धता भी इसमें साफ झलक रही है. खालिस्तानी चरमपंथी भारत से भले ही खदेड़ दिए गए हों, लेकिन उनकी अलगाववादी सोच या विचारधारा कमजोर नहीं पड़ी है, ऐसा लगता है. दुनिया के कई देशों में भारत विरोध और खालिस्तान के समर्थन में चुनिंदा समूहों की लामबंदी बदस्तूर जारी है. इस विरोध में वैचारिक अलगाव है, भारतीय एकता और अखंडता को प्रभावित करने के वैश्विक सरोकार भी हैं, वैश्विक आतंकी संगठनों के साझा प्रयास भी हैं, धार्मिक अलगाव को बढ़ावा देने की कोशिशें भी हैं और राजनीतिक स्वीकार्यता बनाए रखने की कुत्सित प्रतिबद्धता भी इसमें साफ झलक रही है. पाकिस्तान आतंकवाद फैलाने के लिए अपनी जमीन का बेजा इस्तेमाल करने से कभी परहेज नहीं करता. वह विदेशों में रहने वाले खालिस्तान समर्थकों को भारत विरोध के लिए उकसाने की नीति पर चलता रहा है. भारत में खालिस्तान आंदोलन भले ही अब शांत हो, लेकिन अमेरिका, कनाडा सहित यूरोप के कुछ देशों में इसकी आग अभी बुझी नहीं है और यही भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है. इसके समर्थक उत्तरी अमेरिका, यूरोप, दक्षिण एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक विस्तृत हैं.

वर्ष 1999 में संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवाद पर हुई चर्चा के बाद यह घोषणा की थी कि वह किसी भी राष्ट्र में आतंक फैलाने के लिए वर्ग विशेष व विशेष व्यक्ति के विरुद्ध राजनीतिक लक्ष्य प्राप्त करने के मकसद से फैलाई जाने वाली हिंसा को आतंकवाद की श्रेणी में रखता है, भले ही उसे राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, जातिगत या अन्य किसी भी आधार पर तार्किक ठहराने की कोशिश क्यों न की जाए. संयुक्त राष्ट्र की इस घोषणा के मुताबिक ही खालिस्तान समर्थकों पर कार्रवाई हो, भारत सरकार को संबंधित देशों पर इसके लिए दबाव बनाना चाहिए. इसके साथ ही खालिस्तान समर्थकों को लेकर वीजा नीति में सख्ती लागू करने की दिशा में भी विदेश मंत्रालय को विचार करने की जरूरत है, तभी हम पृथकतावादी ताकतों को पंजाब से दूर रख पाएंगे.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

आपरेशन ब्लू स्टार : आपरेशन ब्लू स्टार भारतीय सेना द्वारा 3 से 6 जून 1984 को अमृतसर (पंजाब, भारत) स्थित हरिमंदिर साहिब परिसर को ख़ालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराने के लिए चलाया गया अभियान था. पंजाब में भिंडरावाले के नेतृत्व में अलगाववादी ताकतें सशक्त हो रही थीं जिन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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Topic : National Handloom Day

संदर्भ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित किए. यह मन की बात का 67 वां एपिसोड है. इस दौरान उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात देश के साथ साझा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के माध्यम से कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) आ रहा है , इस दौरान हम सभी देशवासियों की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि स्थानीय उपक्रमों, हस्तशिल्प, हथकरघा और कारीगरों का समर्थन किया जाना चाहिए. 

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

7 महत्त्व को भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई, 2015 की तारीख के राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में अधिसूचित किया गया था, जिसका उद्देश्य हथकरघा उद्योग के महत्व एवं आमतौर पर देश के सामाजिक आर्थिक योगदान में इसके योगदान के बारे में जागरूकता फैलाना और हथकरघा को बढ़ावा देना, बुनकरों की आय को बढ़ाना और उनके गौरव में वृद्धि करना था.

7 अगस्त को ही क्यों?

यह दिवस अगस्त 7 को इसलिए मनाया जाता है कि इसी दिन 1905 में स्वदेशी आन्दोलन का सूत्रपात हुआ था. 1905 में इसी दिन कोलकाता के टाउनहॉल में एक महा जनसभा में स्वदेशी आंदोलन का औपचारिक रूप से प्रारम्भ किया गया था. इस आंदोलन में घरेलू उत्पादों और उत्पादन प्रक्रियाओं का पुनरोत्थान शामिल था. भारत सरकार इसी की याद में हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में घोषित किया है. पहला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2015 में मनाया गया था.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Environment and Biodiversity. 

Topic : Pied Cuckoo

संदर्भ

वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (WII) ने चातक पक्षी के अफ़्रीका से भारत प्रवास और वापस जाने के मार्ग का पता लगाने के लिए अध्ययन प्रारम्भ किया है.

chatak bird

 

अध्ययन क्या बतलाता है?

  • यह चातक पक्षी के प्रवास रास्तों का पता लगाने और उनका निरीक्षण करने संबंधी देश का पहला अध्ययन है.
  • WII द्वारा यह अध्ययन में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिमोट सेंसिंग और भारत सरकार के बायोटक्नोलोजी विभाग के सहयोग से किया जाएगा.
  • इसके लिए वैज्ञानिकों ने दो चातकों पर सैटेलाइट ट्रांसमीटर से युक्त टैग लगाए हैं.
  • ये पक्षी मानसून प्रारम्भ होने के साथ ही भारत के हिमालय की तराई के क्षेत्रों में नज़र आने लगते हैं.
  • इसलिए वैज्ञानिकों इस प्रयोग से आशा है कि इससे जलवायु परिवर्तन को समझने में भी सहायता मिल सकती है.

चातक पक्षी

  • चातक पक्षी है के सिर पर चोटीनुमा आकार देखने को मिलता है. 
  • इसका वैज्ञानिक नाम क्लैमाटर जैकोबिनस है. इसे जकोबियन कुकू (Jacobin cuckoo) के नाम से भी जाना जाना जाता है.
  • IUCN की लाल सूची में यह पक्षी न्यूनतम संकटग्रस्त (least concern) श्रेणी में आता है.

Prelims Vishesh

What is a vertically transmitted infection? :-

गर्भावस्था अथवा प्रसूति के समय कई बार ऐसा होता है कि बैक्टीरिया और वायरस का संक्रमण माता के माध्यम से भ्रूण अथवा शिशु तक सम्प्रेषित हो जाता है. संक्रमण के इस सम्प्रेषण को लम्वत् सम्प्रेषण (vertically transmitted infection) कहते हैं.

Places in News- Maguri Motapung Wetland :-

  • असम में ब्रह्मपुत्र की बाढ़ वाली घाटियों में सुप्रसिद्ध डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान तथा उसकी जैवमंडलीय आश्रयणी के दक्षिण 10 किमी. से भी कम की दूरी पर एक आर्द्र भूमि स्थित है जिसे मागुरी मोटापुंग बील कहा जाता है.
  • उल्लेखनीय है कि स्थानीय भाषा में मागुर एक प्रकार की मछली को कहते हैं और बील का अर्थ आर्द्र भूमि होता है. मोटापुंग पास के एक गाँव का नाम है.
  • डिब्रू-सैखोवा जैव मंडलीय आश्रयणी अरुणाचल प्रदेश के नामदफा अंतर्राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ी हुई है.
  • 1996 में इसे महत्त्वपूर्ण पक्षी एवं जैव विवधता क्षेत्र (IBA) घोषित किया गया था.
  • यहाँ जो जीव मिलते हैं, उनमें से कुछ प्रमुख हैं – सुनहला महासीर मछली, दलदली फ्रेंकोलिन और मार्श बैबलर, ग्रेटर एडजुटेंट, पलास की चील मछली, बेयर का पोचर्ड बत्तख, लाल सिर वाला गिद्ध और सफ़ेद पेट वाला बगुला आदि.

Bathynomus raksasa :-

Bathynomus raksasa

केंकड़ों और झींगों जैसे आइसोपोड (isopod) अधिकतः एक फुट से बड़े नहीं होते हैं. परन्तु पिछले दिनों पूर्वी हिन्द महासागर में इंडोनेशिया के पश्चिमी जावा के दक्षिणी तट पर स्थित बंटन (Bantan) में एक ऐसा आइसोपोड मिला है जिसकी लम्बाई 1.6 फुट है. इसलिए इसे Bathynomus राक्षस का नाम दिया गया है. कुछ लोग इसे समुद्री तिलचट्टा बता रहे हैं. इसके 14 पैर होते हैं.

Manodarpan :-

पिछले दिनों भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत मनोदर्पण एक पहल की है जिसके अन्दर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण के लिए मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक सम्बल प्रदान किया जाएगा.


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