Sansar डेली करंट अफेयर्स, 24 December 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 24 December 2019


GS Paper 1 Source: Times of India

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UPSC Syllabus : Important Geophysical phenomena such as earthquakes, Tsunami, Volcanic activity, cyclone etc., geographical features and their location- changes in critical geographical features (including water-bodies and ice-caps) and in flora and fauna and the effects of such changes.

Topic : Winter solstice 2019

संदर्भ

22 दिसम्बर को शरद ऋतु अयनांत (Winter Solstice) पड़ा.

शरद ऋतु अयनांत क्या है?

  • यह एक खगोलीय घटना है जो प्रत्येक वर्ष तब होती है जब सूर्य अपने सबसे दक्षिणी झुकाव (5 डिग्री) पर होता है. दूसरे शब्दों में यह अयनांत उस समय घटित होता है जब उत्तरी ध्रुव सूर्य से सबसे अधिक दूरी पर झुका होता है और परिणामतः इसदिन पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश कुछ ही घंटों तक रह पाता है.
  • दिसम्बर के अयनांत के समय सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा के ठीक ऊपर स्थित होता है और इस समय क्षितिज से इतना निकट होता है जितना कि वर्ष भर कभी नहीं होता.
  • शरदकालीन अयनांत से दिन बड़े होने लगते हैं और कालांतर में जून में जाकार ग्रीष्मकालीन अयनांत आता है.
  • किन्तु दक्षिणी गोलार्द्ध में ऐसा नहीं होता. वहाँ इस समय प्रातः काल जल्दी आ जाता है और संध्या काल देर से आता है. सूर्य भी ऊँचा रहता है और दोपहर की छाया वर्ष भर की सबसे छोटी होती है. दक्षिणी गोलार्द्ध में इस समय लोग सबसे लम्बे दिन और सबसे छोटी रात से गुजरते हैं.

शरद ऋतु अयनांत सदैव दिसम्बर 21 को ही होता है?

  • शरदकालीन सौर अयनांत अधिकतर दिसम्बर 21 को ही होता है, परन्तु इसका सटीक समय प्रत्येक वर्ष बदलता रहता है. किन्तु सौर काल (solar time) एवं हमारे उपयोग में आने वाली घड़ी के समय में थोड़ा अंतर होता है जिस कारण अनयान के समय सूर्यास्त सबसे पहले नहीं होता.
  • दिसम्बर 21 को ही वर्ष का सबसे छोटा दिन होता है, परन्तु हमारा पंचांग सौर वर्ष से तनिक भिन्न होता है. जहाँ आधुनिक पंचाग में वर्ष में 365 दिन होते हैं और हर चौथे वर्ष एक और दिन जोड़ दिया जाता है, वहीं सौर वर्ष 2422 दिनों का होता है. इसलिए शरदकालीन अयनांत दिसम्बर 20, 21, 22 अथवा 23 को भी हो सकता है.
  • यद्यपि दिसम्बर 20 अथवा 23 को यह अयनांत बिरले ही पड़ता है. दिसम्बर 23 का अयनांत पिछली बार 1903 को देखा गया था और अब यह 2303 के पहले नहीं होगा.

अयनांत का अर्थ क्या है?

अयनांत शब्द लैटिन भाषा के शब्द “solstitium” से निकला है, जिसका अर्थ है स्थिर सूर्य. इस दिन मकर रेखा पर सूर्य स्थिर प्रतीत होता है. कुछ लोग इस अयनांत को Sun-turn अर्थात् “सूर्य का मुड़ना” यह नाम देते हैं.


GS Paper 1 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Population and associated issues, poverty and developmental issues, urbanization, their problems and their remedies.

Topic : ‘Nagpur Resolution: A holistic approach for empowering citizens’

संदर्भ

पिछले दिनों “सार्वजनिक सेवा में सुधार लाने में सरकारों की भूमिका (Improving Public Service Delivery – Role of Governments)” के विषय में सम्पन्न क्षेत्रीय सम्मेलन के अंत में एक संकल्प अंगीकार किया गया जिसका नाम दिया गया है – नागपुर संकल्प – नागरिकों को सशक्त करने के प्रति एक पूर्णतावादी दृष्टिकोण.

संकल्प के मुख्य तत्त्व

  • यह संकल्प जिस सम्मेलन में लिया गया उसका आयोजन भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) ने महाराष्ट्र सरकार तथा महाराष्ट्र राज्य सार्वजनिक सेवा अधिकार आयोग के साथ मिलकर किया था.
  • इसके पहले सुशासन के लिए “शिलोंग घोषणा” और “जम्मू संकल्प” को अंगीकृत किया गया था.

नागपुर संकल्प के उद्देश्य

  1. बेहतर सेवा के लिए नीतिगत उपाय लागू करके नागरिकों को सशक्त बनाया जाए और इसके लिए समय-समय पर नागरिक अधिकार पत्रों को नवीनतम बनाया जाए, अधिनियम कार्यान्वित किया जाए एवं लगातार सुधार सुनिश्चित करने के लिए मानकों में परिवर्तन किया जाए.
  2. डाटा संग्रह और शिकायत समाधान की गुणवत्ता के मूल्यांकन के द्वारा सार्वजनिक शिकायत निवारण के प्रति पूर्णतावादी दृष्टिकोण अपनाया जाए.
  3. राज्यों और भारत सरकार के मंत्रालयों के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाए जिसमें वे वेब पोर्टल बना सकें और डिजिटल मंचों के माध्यम से सेवा पहुँचाने के काम में सुधार ला सकें.
  4. लचीली नीतियाँ बनाई जाएँ और रणनीतिक निर्णय किये जाएँ. साथ ही कार्यान्वयन का अनुश्रवण किया जाए एवं मुख्य कार्मिकों की नियुक्ति, समन्वयन और मूल्यांकन पर ध्यान दिया जाए.
  5. समय-समय पर सुशासन से सम्बंधित सूचकांक प्रकाशित किये जाएँ जिससे कल्याण एवं अवसरंचना आदि से सम्बंधित 10 प्रमुख क्षेत्रों में प्रशासन की गुणवत्ता का पता लग सके.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Development processes and the development industry the role of NGOs, SHGs, various groups and associations, donors, charities, institutional and other stakeholders.

Topic : Arunachal teachers’ transfer, posting policy

संदर्भ

राज्य सरकार के अधीन काम कर रहे शिक्षकों की तैनाती और स्थानान्तरण को तार्किक बनाने के लिए अरुणाचल सरकार ने अरुणाचल प्रदेश शिक्षक स्थानान्तरण एवं तैनाती नीति, 2020 (Arunachal Pradesh Teachers Transfer & Posting Policy, 2020) का अनुमोदन कर दिया है.

नीति की मुख्य विशेषताएँ

  • इस नई नीति के अंतर्गत सभी सरकारी विद्यालयों को इन तीन श्रेणियों में बाँटा जाएगा – कठिन, मध्यम एवं कोमल.
  • शिक्षक के रूप में नए-नए नियुक्त होने वाले व्यक्तियों को आरम्भ में तीन वर्ष के लिए कठिन तैनाती में रखा जाएगा जिसमें प्रोबेशनरी अवधि भी शामिल होगी. तत्पश्चात् उनको अगले पाँच साल मध्यम तैनाती दी जायेगी.
  • शिक्षकों का सामान्य स्थानान्तरण ऑनलाइन प्रक्रिया से अप्रैल-मई महीने में होगा.

माहात्म्य

छात्रों के शैक्षणिक हितों की सुरक्षा के लिए यह नीति उपयोगी सिद्ध होगी और साथ ही शिक्षक एक स्वतंत्र एवं पारदर्शी रीति से अधिकतम आजीविका संतुष्टि प्राप्त कर सकेंगे.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora..

Topic : Military Space Force

संदर्भ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2020 राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (National Defense Authorization Act, 2020) पर हस्ताक्षर करके अमेरिका की सेना की छठी शाखा के रूप में अंतरिक्ष सैन्य बल की स्थापना को प्राधिकृत कर दिया है.

  • यह अन्तरिक्ष सैन्य बल वायुसेना विभाग का ही एक अंग होगा.
  • 1947 में अमेरिका में वायुसेना स्थापित हुई थी. उसके बाद स्थापित होने वाली यह सबसे नई सेना है.

अन्तरिक्ष सैन्य बल

  • अमेरिकी अन्तरिक्ष सैन्य बल का मुख्य लक्ष्य अन्तरिक्ष में अमेरिका के वर्चस्व को सुनिश्चित करना है.
  • अभी यह अन्तरिक्ष सेना नौसेना के अंदर ही होगी जिस प्रकार सामुद्रिक सेना अमेरिका के नौसेना का एक भाग है.
  • अन्तरिक्ष सेना अपने सैनिकों का संगठन करेगी तथा इसके लिए आवश्यक शाश्त्र, उपकरण आदि की व्यवस्था करेगी.

पृष्ठभूमि

अमेरिका जल, थल और आकाश के बाद अन्तरिक्ष में भी अपना सैन्य-दल तैनात करने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2020 तक ‘यूएस स्पेस फोर्स’ बनाने का फैसला किया है. यह फोर्स अमेरिका की बाकी सेनाओं से अलग होगी. विदित हो कि US Space Force अमेरिका की छठी सैन्य सेवा होगी.

क्यों पड़ी जरूरत?

Space Force के जरिए अमेरिका अपने प्रतिद्वंद्वियों चीन और रूस की मंशा पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है. ज्ञातव्य है कि 2007 में चीन ने अपने ही उपग्रहों को अन्तरिक्ष में नष्ट कर दिया था. रूस ने भी मिसाइल का सफल परीक्षण किया है जिसका उपयोग उपग्रहों को ट्रैक और नष्ट करने के लिए किया जा सकता है. इसलिए अमेरिका को डर है कि अब ये देश उसके उपग्रहों को भी जब चाहे नष्ट कर सकते हैं इसलिए USA को अब एक स्पेस फाॅर्स की जरूरत महसूस हो रही है.

क्या अंतरिक्ष में सैन्य कार्रवाई कानून के अनुकूल होगी?

  • अमेरिका, रूस और चीन समेत सभी देशों ने 1967 की आउटर अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) पर हस्ताक्षर किए थे.
  • समझौते के अनुसार कोई भी देश अंतरिक्ष में क्षेत्राधिकार नहीं दिखा सकता.
  • यह समझौता किसी भी देश को पृथ्वी की कक्षा या उससे बाहर परमाणु हथियार या हथियार रखने से रोकता है.
  • चंद्रमा और मंगल जैसे ग्रहों, जहाँ मानव की पहुँच हो सकती है, के संदर्भ में यह संधि और भी कठोर है. इन ग्रहों में कोई भी देश सैन्य अड्डों का निर्माण नहीं कर सकता है या किसी भी प्रकार का सैन्य संचालन नहीं कर सकता है या किसी अन्य प्रकार के पारंपरिक हथियारों का परीक्षण नहीं कर सकता है.
  • पर साथ ही साथ यह संधि बैलिस्टिक मिसाइलों के अंतर-महाद्वीपीय प्रयोग को प्रतिबंधित नहीं करती हैजो लक्ष्य को भेदने के लिए पृथ्वी की कक्षा से बाहर भी चले जाते हैं.
  • इस संधि की इस चूक का लाभ उठाकर कोई देश अन्तरिक्ष का युद्ध के लिए उपयोग कर सकता है.

सैन्य बल की स्थापना पर उठाये जा रहे सवाल

  • पहले से चल रही पाँच-पाँच सेनाओं के अलावे एक छठी सेना बनाने से अमेरिकी रक्षा विभाग की संगठनात्मक चुनौतियाँ बढ़ जाएँगी.
  • नई सेना को सुदृढ़ करने के प्रयास से अन्तरिक्ष में भेजे जाने वाले असैन्य अभियानों में कटौती करनी पड़ सकती है.
  • नई सेना के कारण भविष्य में बजटीय आवंटन बहुत अधिक बढ़ सकता है.
  • अन्तरिक्ष सेना होने से संयुक्त सैनिक कार्रवाई के समय अमेरिकी प्रयासों को धक्का लग सकता है.
  • यद्यपि अन्तरिक्षयानों को ईंधन की खपत की दृष्टि से कम खर्च वाला बनाने का प्रयास चल रहा है, परन्तु इस काम में अभी भी ऊर्जा की भयंकर आवश्यकता होती है. अन्तरिक्ष सैन्य बल स्थापित हो जाने के बाद इस खर्च में बहुत बड़ा उछाल आएगा.
  • अन्तरिक्ष में अधिक से अधिक अन्तरिक्षयान छोड़े जाने के कारण उनका मलबा बढ़ने की भी आशंका है.

GS Paper 3 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : European Green Deal

संदर्भ

हाल ही में सम्पन्न वार्षिक मैड्रिड जलवायु वार्ता से हटकर यूरोपीय संघ ने यह घोषणा की कि वह जलवायु परिवर्तन के विषय में कुछ और उपाय लाने जा रहा है. इन उपायों को यूरोपीय ग्रीन डील कहा जा रहा है.

यूरोपीय ग्रीन डील के मुख्य तथ्य

जलवायुगत तटस्थता (Climate neutrality): यूरोपीय संघ ने वचन दिया है कि वह एक ऐसा कानून लाएगा जो सभी सदस्य देशों पर बाध्यकारी होगा और जो 2050 तक यूरोपीय संघ को जलवायु की दृष्टि से तटस्थ बना देगा.

जलवायुगत तटस्थता क्या है?

जलवायुगत तटस्थता का अर्थ है शून्य उत्सर्जन. यह स्थिति तब आती है जब किसी देश में होने वाला उत्सर्जन और ग्रीनहाउस गैसों का वायुमंडल से निष्कासन दोनों संतुलित हो जाते हैं. इसके लिए जंगल जैसे कई कार्बन को आत्मसात करने वाले ठिकाने बनाने पड़ते हैं और साथ ही कार्बन को पकड़ने और जमा करने की तकनीकों को लागू किया जाता है.

2030 के उत्सर्जन न्यूनीकरण लक्ष्य को बढ़ाना

पेरिस समझौते में यूरोपीय संघ ने यह वचन दिया था कि वह 2030 तक अपने उत्सर्जन में 1990 के स्तर की तुलना में 40% कमी लाएगा. अब वह यह वचन दे रहा है कि यह कमी 40 के स्थान पर 50-55% की जायेगी.

यूरोपीय ग्रीन डील का महात्म्य

  • यूरोपीय संघ में 18 देश हैं जो कुल मिलाकर चीन और अमेरिका के बाद तीसरे सबसे बड़े ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जक हैं. इसलिए यूरोपीय संघ की इस घोषणा के महत्त्व को कम करके नहीं आँका जा सकता.
  • परन्तु, विश्व के हित में यह अच्छा होगा कि अन्य देश भी उत्सर्जन को घटाने में ऐसी ही तत्परता दिखाएँ. पिछले कई महीनों से इस पर बल भी दिया जा रहा है जो 2050 तक सभी देश शून्य उत्सर्जन की स्थिति में आ जाएँ. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने पिछले सितम्बर में एक विशेष बैठक भी बुलाई थी जिसमें यह आह्वान किया गया था कि उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त किया जाए. 60 से अधिक देश इसके लिए सहमत भी हुए थे, परन्तु ये सार देश उत्सर्जन के मामले में पीछे हैं अर्थात् कम उत्सर्जन करते हैं.
  • यूरोपीय संघ के द्वारा इस डील से 2050 के लक्ष्य को पाना सरल हो जाएगा.

Prelims Vishesh

Mission Shat Pratishat :-

  • पंजाब के शिक्षा विभाग ने पिछले सितम्बर को मिशन शतप्रतिशत का अनावरण किया है जिसका उद्देश्य विगत वर्ष की तुलना में सरकारी स्कूलों के परिणाम में सुधार लाना है.
  • लक्ष्य यह है कि सरकारी स्कूलों की कक्षा 5, 8, 10 और 12 के परिणाम शत प्रतिशत आवें.
  • इसके लिए शिक्षा विभाग ने एक नारा भी बनाया है – असंभव नू संभव बनइए, शतप्रतिशत नतीजा लियइए (Make impossible possible and secure 100 per cent results).

West African Nations Rename Common Currency- eco :

  • पश्चिमी अफ्रीका के आठ देशों ने अपनी मुद्राओं को एक सामान्य मुद्रा बनाते हुए उसका नाम ईको (Eco) रखने का निर्णय किया है.
  • अभी तक इनकी मुद्रा को CFA Franc कहा जाता था.
  • इन आठ पश्चिमी अफ्रीकी देशों के नाम हैं – आइवरी कोस्ट, माली, बुर्किना फासो, बेनिन, नाइजर, सेनेगल, टोगो और गिनी-बिसाउ.
  • विदित हो कि गिनी-बिसाउ को छोड़कर ये सभी देश फ़्रांस के उपनिवेश हुआ करते थे

Chilai-Kalan :-

  • कश्मीर में शरद ऋतु की सबसे विकट अवधि आरम्भ हो गई है.
  • 40 दिनों तक चलने वाली इस अवधि को कश्मीरी लोग “चिलइ-कलां” कहते हैं. इस समय घाटी में सबसे अधिक ठण्ड पड़ती है और सबसे अधिक हिमपात होता है.

Hunar Haat :

  • “हुनर हाट” राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कारीगरों, मिस्त्रियों और पाक-विशेषज्ञों के लिए रोजगार का अवसर प्रदान वाला मंच हैं.
  • इन हाटों का आयोजन अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा उस्ताद (USTTAD) योजना के तहत किया जाता है.
  • USTTAD का पूरा नाम Upgrading the Skills & Training in Traditional Arts/Crafts for Development है.
  • उस्ताद योजना अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की एक मूर्धन्य योजना है जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों की पारम्परिक कलाओं और शिल्पों की समृद्ध विरासत को संरक्षित करना एवं उन्हें प्रोत्साहित करना है.

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