Sansar डेली करंट अफेयर्स, 23 September 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 23 September 2019


GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Impact of attack on Saudi Arabia’s oil facility

संदर्भ

ईरान द्वारा समर्थित यमन के विद्रोही शिया गुट हुथिस (Houthis) ने पिछले दिनों ड्रोन के माध्यम से सऊदी अरब के अबकैक संयंत्र तथा खुरैस तेल क्षेत्र पर बमबारी की.

इस आक्रमण का प्रभाव

  • इस आक्रमण के फलस्वरूप सऊदी अरब की सरकारी कम्पनी – सऊदी अरामको – को तेल का उत्पादन रोक देना पड़ा.
  • विदित हो कि यह कम्पनी प्रत्येक दिन लगभग 60 लाख बैरल तेल निकाला करती है जोकि वैश्विक तेल आपूर्ति के 6% के बराबर है.
  • इसके साथ इस कम्पनी को दो 2 मिलियन बैरल दिवस (2 mbd) की अतिरिक्त क्षमता का उपयोग रोकना पड़ा.
  • इस प्रकार हुथिस के आक्रमण के चलते सऊदी अरब में कच्चे तेल के उत्पादन में अभूतपूर्व विघ्न पड़ा.

भारत के लिए चिंता का विषय

  • सऊदी अरब विश्व का 10% कच्चे तेल की आपूर्ति करता है और यह देश कच्चे तेल का विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक है.
  • भारत तेल की अपनी खपत का 80% आयात करता है. अतः सऊदी अरब से तेल की आपूर्ति रुकने से यहाँ तेल के दाम बढ़ सकते हैं.
  • ज्ञातव्य है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर थोपे गये प्रतिबंध के कारण भारत पहले से ही चिंतित है. इराक के पश्चात् भारत को कच्चा तेल आपूर्ति करने वाला दूसरा बड़ा देश सऊदी अरब ही है.
  • तेल आपूर्ति करने वाले वेनेजुएला, लीबिया और नाइजीरिया जैसे देश उपद्रवग्रस्त चल रहे हैं जिस कारण तेल की आपूर्ति संकट में है.
  • यदि भारत में तेल की आपूर्ति घट गई तो इसके दाम भी बढ़ जाएँगे और डॉलर के सामने रुपया और भी कमजोर पड़ जाएगा.
  • तेल के दाम बढ़ने से सरकार का राजकोषीय संतुलन भी गड़बड़ा जाएगा.
  • कुछ उद्योग तेल पर निर्भर होते हैं, जैसे – कार उद्योग. तेल के दाम बढ़ने पर इन उद्योगों से सम्बंधित वस्तुओं की खपत घट जायेगी और माँग में गिरावट आ जाएगी.
  • अंततोगत्वा तेल के दाम बढ़ने से सरकार के राजस्व में ह्रास होगा.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : National Recruitment Agency

संदर्भ

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने एक राष्ट्रीय नियुक्ति एजेंसी (National Recruitment Agency – NRA) के सृजन के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है. यह एजेंसी सरकार के कई पदों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के समतुल्य पदों पर नियुक्ति का काम देखेगी.

मुख्य तथ्य

  • यह एजेंसी उन विभिन्न प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के लिए एक सामान्य योग्यता परीक्षा (Common Eligibility Test – CET) लेगी जिनके लिए अनुमानतः 2.5 करोड़ प्रत्याशी देते हैं.
  • वर्तमान में जिन पदों पर नियुक्ति के लिए कर्मचारी चयन आयोग (SSC) और बैंककर्मी चयन संस्थान (IBPS) काम करते हैं उन सभी के लिए NRA प्रारम्भिक परीक्षा संचालित करेगी.
  • उसके पश्चात् NRA सफल होने वाले प्रत्याशियों की सूची सम्बंधित बहाली एजेंसियों को भेज देगी और वे एजेंसियाँ ही उनके लिए मुख्य परीक्षाएँ लेंगी.
  • कहने का तात्पर्य यह है कि NRA का काम केवल सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) लेना और छाँटे हुए प्रत्याशियों के नाम SSC और IBPS को मुख्य परीक्षा के लिए दे देना होगा.

राष्ट्रीय नियुक्ति एजेंसी आवश्यक क्यों?

  • अधीनस्थ कोटि के सरकारी पदों की नियुक्ति प्रक्रिया को एक समान पद्धति पर लाना.
  • SSC और IBPS आदि बहाली एजेंसियों को प्रारम्भिक परीक्षा के बोझ से मुक्त करना है क्योंकि ऐसी परीक्षाओं का आयोजन अत्यंत कठिन और दुरूह होता है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation / Money laundering related issues.

Topic : FCRA and foreign funding

संदर्भ

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने विदेश से पैसा प्राप्त करने के लिए कुछ नए नियम अधिसूचित किये हैं.

ये नए नियम क्या हैं?

  • अब विदेश से पैसा लेने वाले गैर-सरकारी संगठन के हर सदस्य को शपथपत्र के माध्यम से सत्यापित करना होगा कि वह प्राप्त धन को पहले से निर्धारित कार्य से हटकर दूसरे कार्य में अथवा देशद्रोह फैलाने अथवा हिंसा की वकालत करने में नहीं लगाएगा. विदित हो कि पहले इस प्रकार का शपथपत्र किसी गैर-सरकारी संगठन के केवल निदेशक स्तर के व्यक्ति को देना होता था.
  • पहले 25,000 रु. तक की वस्तु को उपहार माना जाता था, अब यह राशि बढ़ाकर 1 लाख रु. कर दी गई है.
  • गैर-सरकारी संगठन के कर्मियों और मुख्य अधिकारियों तथा सदस्यों को यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि उनपर धर्म परिवर्तन करने एवं सामुदायिक वैमनस्य फैलाने के लिए कभी भी मुकदमा नहीं चलाया गया है अथवा दण्डित नहीं किया गया है.

विदेश से धनप्राप्त करने के नियम

विदेशी योगदान (नियमन) अधिनियम, 2010 और इस अधिनियम के तहत बनाये गये नियम भारत में गैर सरकारी संगठनों के द्वारा विदेशी योगदान की प्राप्ति एवं उपयोग को नियमित करने का काम करते हैं.

FCRA का प्रभाव क्षेत्र और उद्देश्य

FCRA इसलिए पारित किया गया था कि राष्ट्रीय हित के विरुद्ध किसी गतिविधि में विदेशी योगदान की रोकथाम की जाए. इस अधिनियम का प्रभाव क्षेत्र बहुत व्यापक है. यह किसी व्यक्ति, निगमित निकाय, अन्य प्रकार की भारतीय इकाइयों (निगमित अथवा अनिगमित), प्रवासी भारतीयों, विदेश में स्थित भारतीय कंपनियों की शाखाओं अथवा उपकार्यालयों एवं भारत में निर्मित अथवा पंजीकृत इकाइयों पर लागू होता है. इसका इसका कार्यान्वयन भारत सरकार का गृह मंत्रालय करता है.

विदेशी धन लेने की अनुमति

FCRA उन्हीं NGO को विदेशी दान स्वीकार करने की अनुमति देता है जिनके पास कोई निश्चित सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षणिक, धार्मिक अथवा सामाजिक कार्यक्रम हो और वह भी तब जब सम्बंधित NGO अधिनियम के तहत पूर्वानुमति प्राप्त करे अथवा पंजीकरण का प्रमाणपत्र प्राप्त करे.

विदेशी धन के प्रयोग की शर्तें

  • NGO द्वारा ली जाने वाली राशि का उपयोग मात्र उसी उद्देश्य के लिए हो जिसके लिए वह ली गई हो.
  • प्राप्त राशि का उपयोग अधिनियम में बताई गई अनुमानात्मक गतिविधियों में किसी भी दशा में न हो.
  • सक्षम प्राधिकार की पूर्वानुमति के बिना विदेशी धनराशि ऐसी किसी इकाई को नहीं दी जा सकती है जो अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत नहीं है.
  • विदेशी धनराशि से खरीदी गई कोई भी सम्पदा NGO के नाम से ही होनी चाहिए न कि इसके पदाधिकारियों अथवा सदस्यों के नाम से.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Ambit of RTI expanded

संदर्भ

पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी कि जिन गैर-सरकारी संगठनों (NGO) सरकार से “अच्छा-ख़ासा पैसा” मिलता है अब उनपर भी सूचना अधिकार अधिनियम लागू होगा.

इस व्यवस्था का आधार

  • जो NGO सरकार से अच्छा-ख़ासा धन लेते हैं अथवा जो सरकार पर तत्वतः निर्भर होते हैं वे सूचना अधिकार अधिनियम (2005) के अनुभाग 2(h) में परिभाषित “लोक अधिकारी” के श्रेणी में आ जाते हैं.
  • इसका तात्पर्य यह हुआ कि सूचना अधिकार के अंतर्गत सूचना मांगे जाने पर उन्हें प्रमुख सूचनाएँ देनी होंगी, चाहे ये सूचनाएँ वित्त से सम्बंधित हों अथवा पदानुक्रम से सम्बंधित हों अथवा कार्यकलाप अथवा निर्णयों से सम्बंधित हों.
  • कुछ ऐसी संस्थाएँ भी हो सकती हैं जो सरकार को स्वामित्व के अन्दर अथवा उसके द्वारा नियंत्रित नहीं हों. परन्तु यदि उन्हें सरकार से प्रयत्क्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से धन मिलता हो तो वे भी सूचना अधिकार अधिनियम के अधीन आ जाएँगी.

यहाँ पर “अच्छा-ख़ासा पैसा” से तात्पर्य क्या है?

सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार “अच्छा-ख़ासा पैसा” का तात्पर्य यह नहीं है कि सम्बंधित गैर-सरकारी संगठन को सरकार से मिलने वाला धन कुल प्राप्त धन राशि के 50% या उससे अधिक हो. इसके लिए कोई एक नियम बनाना कठिन है. NGO को मिलने वाला धन प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार से मिल सकता है. उदाहरण के लिए यदि सरकार मुफ्त में किसी शहर में जमीन दे देती है अथवा बहुत कम दाम पर जमीन देती है तो यह आर्थिक सहायता भी “अच्छा-ख़ासा” की श्रेणी में आ जाएगी. ज्ञातव्य है कि सरकार बहुधा अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों को इस प्रकार की जमीनें दिया करती हैं.


GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Effects of liberalization on the economy, changes in industrial policy and their effects on industrial growth.

Topic : NIRVIK scheme

संदर्भ

ऋण मुहैया कराने की प्रक्रिया सरल बनाने और निर्यातकों के लिए ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय निर्यात साख प्रत्याभूति निगम (Export Credit Guarantee Corporation of India – ECGC) ने “निर्वीक / NIRVIK” नामक एक योजना चलाई है.

NIRVIK योजना की मुख्य विशेषताएँ

  • इसके अंतर्गत गारंटी की गई बीमा ऋण के मूल और ब्याज का 90% कवर करेगी.
  • यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ब्याज विदेश निर्यात के लिए 4% से कम और रूपये में निर्यात के लिए 8% से कम रहे.
  • इस बीमा के अन्दर सामान भेजने के पहले और सामान भेजने के बाद दोनों ऋण आएंगे.
  • रत्न, गहने और हीरे का व्यापार करने वाले तथा 80 करोड़ रु. से ऊपर के खाते वाले निर्यातकों के लिए प्रीमियम की दर अन्य निर्यातकों की तुलना में अधिक होगी क्योंकि उनके माल में क्षति का अनुपात अधिक होता है.
  • जिन निर्यातकों के खाते 80 करोड़ रु. से कम के हैं उनके लिए प्रीमियम की दर प्रत्येक वर्ष 0.60 घटा दी जायेगी तथा जिनके खाते 80 करोड़ रु. से ऊपर के हैं उनके लिए दरें 0.72 प्रतिवर्ष होंगी.
  • 10 करोड़ रु. से ऊपर की क्षति की जाँच के लिए ECGC कर्मचारी बैंक के कागजात एवं अभिलेखों का निरिक्षण करेंगे.
  • मूल और ब्याज की राशि पर ECGC को बैंकों द्वारा प्रत्येक महीने एक निश्चित प्रीमियम का भुगतान किया जायेगा.

योजना के लाभ

  • NIRVIK योजना से निर्यातकों के लिए ऋण लेना सुगम और सुलभ हो जायेगा.
  • इससे भारत से होने वाले निर्यातों में प्रतिस्पर्धात्मकता आएगी.
  • इससे ECGC की प्रक्रियाएँ निर्यातकों के अनुकूल हो जाएँगी.
  • बीमा कवर के कारण ऋण की लागत नीचे आ जाएगी.
  • NIRVIK योजना से निर्यात प्रक्षेत्र को समय पर और पर्याप्त रूप से काम करने के योग्य पूँजी उपलब्ध हो जाएगी.

ECGC क्या है?

  • यह एक पूर्णतः सरकारी कम्पनी है जिसकी स्थापना 1957 में साख से जुड़ी बीमा सेवा के लिए की गई थी.
  • निर्यात साख प्रतिभूति निगम (ECGC) एक निर्यात साख देने वाली भारत सरकार की एजेंसी है जो देश के निर्यात को सुविधाजनक बनाने के लिए राष्ट्रीय साख बीमा सेवा उपलब्ध कराती है.
  • यह एजेंसी निर्यातकों को साख बीमा योजनाओं का प्रस्ताव देती है. यह बीमा निर्यातकों को होने वाले उस घाटे से बचाती है जो विदेशी क्रेताओं के द्वारा राजनीतिक अथवा वाणिज्यिक कारणों से भुगतान करने में देरी करने से होता है.

Prelims Vishesh

Survey of India :-

  • भारतीय सर्वेक्षण (Survey of India – SOI) ने यह निश्चय किया है कि वह देश का मानचित्र बनाने में ड्रोन का उपयोग करेगी.
  • विदित हो कि भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीनस्थ भारतीय सर्वेक्षण मानचित्र बनाने का काम देखता है.
  • 1767 में स्थापित यह संगठन देश का सबसे पुराना सरकारी वैज्ञानिक विभाग है.

Rustom- 2:-

रुस्तम 2 DRDO द्वारा निर्मित एक मध्यम ऊँचाई पर काम करने वाला ड्रोन है जो लगातार 24 घंटे सेनाओं के लिए सर्वेक्षण करने में सक्षम है.

5th International Ramayana Festival and ICCR :

  • पिछले दिनों भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् (Indian Council for Cultural Relations – ICCR) ने रामायण उत्सव का आयोजन किया.
  • विदित हो कि ICCR की स्थापना 1950 भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने की थी.

Center- 2019 International Command Exercise :-

रूस में “सेंटर 2019 अंतर्राष्ट्रीय कमांड अभ्यास” नामक एक वार्षिक सैन्य अभ्यास हो रहा है जिसमें भारत, चीन, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिज़स्तान के सैनिक प्रतिभागिता कर रहे हैं.

Astra missile :-

  • DRDO ने हवा से हवा में मार करने वाले दृष्टि से परे मिसाइल (Beyond Visual Range – BVR) का निर्माण देश में ही किया है.
  • यह मिसाइल ध्वनि की गति से अधिक तेज गति (1.2 मैक से 1.4 मैक) से शत्रु के विमान को 80 किलोमीटर की ऊँचाई पर जाकर और 20 किलोमीटर तक पीछा कर के समाप्त कर सकती है.
  • “अस्त्र” नाम की यह मिसाइल DRDO द्वारा बनाई गई सबसे छोटी मिसाइल है जिसकी ऊँचाई मात्र 3.8 मीटर है.

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