Sansar डेली करंट अफेयर्स, 23 April 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 23 April 2019


GS Paper  1 Source: The Hindu

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Topic : MHA distributes special kits to states, UTs to help probe sexual assault cases

संदर्भ

गृह मंत्रालय ने यौन शोषण के मामलों की तत्काल जाँच के लिए खून और वीर्य के नमूने एकत्रित करने के अलावा अन्य सबूत जुटाने के वास्ते 3,100 से अधिक विशेष किट राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों को वितरित किये हैं.

यौन शोषण सबूत संकलन किट (Sexual Assault Evidence Collection Kits – SAECK) या ‘बलात्कार जाँच किट’ यौन शोषण तथा बलात्कार के मामलों में तत्काल चिकित्सकीय-कानूनी जाँच करने और सबूत एकत्रित करने में मदद के लिए बनाये गये हैं.

SAECK के घटक और महत्त्व

  • इन सभी किट्स में आवश्यक सामान हैं, जो यौन शोषण तथा बलात्कार के मामलों में सबूत एकत्रित करने जैसे कि खून एवं वीर्य के नमूने लेने में मदद करेंगे, जिससे अभियोजन पक्ष को आरोपी के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में मदद मिलेगी.
  • इन किट्स से आशा की जाती है कि इनसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को यौन शोषण के मामलों में समयबद्ध तरीके से जाँच करने और सजा दिलाने में मदद मिलेगी.
  • बलात्कार जाँच किट केंद्र सरकार के ‘निर्भया कोष’ के अंतर्गत खरीदे गये हैं.
  • इस तरह के किट से सैंपल कलेक्शन में काफी सहयोग मिलता है.
  • इस किट में सैंपल कलेक्ट करने की तकनीक के साथ ही कौन-सा सैंपल किसमें कलेक्ट करना है, की पूरी जानकारी होती है.
  • कई बार सैंपल कलेक्शन के दौरान कुछ जरुरी चीजें छूट जाती हैं. लेकिन इस किट के चलते ऐसी गलती होने की संभावना न के बराबर होती है. विदित हो कि बलात्कार के मामलों में जितनी जल्दी मेडिकल रिपोर्ट संबंधित अधिकारी को मिल जाती है, उतनी ही जल्दी उस पर कार्रवाई शुरू की जा सकती है.

पृष्ठभूमि

महिलाओं के विरुद्ध अपराध की घटनाएँ 2015 में 3,29,243 से बढ़कर 2016 में 3,38,954 हो गयीं. 2015 में, देश में बलात्कार के 34,651 मामले दर्ज किए गए. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों के अनुसार, 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 38,947 हो गया.


GS Paper  2 Source: PIB

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Topic : Traditional Knowledge Digital Library (TKDL)

संदर्भ

आयुष मंत्रालय और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर), नई दिल्ली के बीच चिकित्‍सा की परम्‍परागत प्रणालियों के क्षेत्रों में अनुसंधान और शिक्षा तथा इसके आधुनिक विज्ञान के साथ एकीकरण में सहयोग के विषय में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए.

इन दोनों संगठनों के सहयोग से किया गया यह समझौता एकमात्र समझौता नहीं है. दरअसल, CSIR और आयुष विभाग (अब मंत्रालय) ने संयुक्त रूप से पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (TKDL) भी विकसित किया है.

पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (TKDL) क्या है?

  • पारम्परिक ज्ञान का आंकिक संग्रहालय या ‘ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी’ भारत के परम्परागत ज्ञान का आंकिक संग्रहालय है. इसमें मुख्यत: औषधीय पौधों एवं औषधियों के निर्माण की विधि का संग्रह है.
  • यह जैव-चोरी और हमारे परम्‍परागत ज्ञान के दुरुपयोग को रोकने के लिए भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के बारे में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त ट्रेडमार्क युक्‍त डेटाबेस है.
  • 2001 में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और आयुष मंत्रालय के बीच सहयोग से यह स्थापित किया गया गया.
  • इस पुस्तकालय का उद्देश्य देश के प्राचीन और पारंपरिक ज्ञान को जैवप्रौद्योगिकी और अनैतिक पेटेंट के माध्यम से शोषण से बचाना है और इसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रलेखित करके और अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट वर्गीकरण प्रणालियों के अनुसार वर्गीकृत करना है.
  • यह आधुनिक अनुसंधानों की उपचार और प्रथाओं के विशाल ज्ञान तक पहुँच को सरल बनाता है.
  • TKDL में सार्वजनिक रूप से पारंपरिक ज्ञान के विभिन्न प्रलेखन सम्मिलित हैं, जैसे – आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और योग जो अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी और स्पेनिश में उपलब्ध हैं.

पृष्ठभूमि

टीकेडीएल पहल की शुरूआत हल्दी के घाव भरने के गुणों का यूएसपीटीओ में तथा नीम के फफूंदी रोधी गुणों का ईपीओ में पेटेंट रद्द कराने के भारतीय प्रयासों जितनी पुरानी है. इसके अलावा, 2005 में, टीकेडीएल विशेषज्ञ समूह ने अनुमान व्यक्त किया कि हर साल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दवाओं की भारतीय चिकित्सा प्रणालियों से सम्बद्ध करीब 2000 गलत पेटेंट प्रदान किए जाते हैं. इसकी मुख्य कारण यह है भारत का परम्परागत चिकित्सकीय ज्ञान संस्कृत, हिंदी, अरबी, फारसी, उर्दू, तमिल आदि भाषाओं में था, जो अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट कार्यालयों के पेटेंट जांचकर्ताओं के लिए न तो सुलभ था और न ही बोधगम्य.

अमेरिका और यूरोप में ये पेटेंट्स प्रदान किया जाना राष्ट्रीय स्तर पर बहुत दुख का कारण बना. तभी से हर भारतीय को अनुभव होने लगा कि भारत का ज्ञान गलत तरीके से उससे छीन लिया गया है. इसके अलावा पेटेंट प्रदान करने वाले देश में, पेटेंट के आवेदक को प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के अलग से अधिकार प्राप्त हो जाते थे.


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : Mosquirix: World’s first Malaria vaccine

संदर्भ

अफ्रीकी देश मलावा में मंगलवार को दुनिया की पहली मलेरिया वैक्सीन लॉन्च की गई जिसका नाम “Mosquirix” रखा गया है. यह पाँच महीने से लेकर 2 साल तक के बच्चों के लिए है. यह वैक्सीन बच्चों को मलेरिया से बचाने के लिए शुरू किए गए पायलट प्रोग्राम का हिस्सा है.

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पृष्ठभूमि

मलेरिया के कारण सबसे अधिक मृत्यु अफ्रीका में होती हैं. यही कारण है कि वर्ल्ड मलेरिया डे (25 अप्रैल) के एक दिन पहले इसकी शुरुआत अफ्रीका से ही की गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अफ्रीका में इस बीमारी के कारण हर साल 2 लाख 50 हजार बच्चों की मौत होती है. इसके सबसे अधिक मामले बच्चों में देखे जाते हैं.

मलेरिया के बारे में

  • मलेरिया प्लास्मोडियम गण के प्रोटोज़ोआ परजीवियों से फैलता है. इस गण के चार सदस्य मनुष्यों को संक्रमित करते हैं- प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम, प्लास्मोडियम विवैक्स, प्लास्मोडियम ओवेल तथा प्लास्मोडियम मलेरिये.
  • इनमें से सर्वाधिक खतरनाक पी. फैल्सीपैरम माना जाता है. यह मलेरिया के 80 प्रतिशत मामलों और 90 प्रतिशत मृत्युओं के लिए जिम्मेदार होता है.
  • यह मुख्य रूप से अमेरिका, एशिया और अफ्रीका महाद्वीपों के उष्ण तथा उपोष्णकटिबंधी क्षेत्रों में फैला हुआ है.

भारत में मलेरिया उन्मूलन के लिए किये गये प्रयास

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित 2018 के विश्व मलेरिया प्रतिवेदन के अनुसार मलेरिया से सर्वाधिक ग्रस्त 11 देशों में भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ मलेरिया के मामलों में अच्छी-खासी कमी आई है.
  • 2016 की तुलना में 2017 में मलेरिया के मामले 24% कम हुए. इसका अभिप्राय यह है कि मलेरिया को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों का नेतृत्व अब भारत के हाथ में आ गया है. भारत से प्रेरणा लेकर अन्य देश मलेरिया से निपटने की प्रेरणा ले सकते हैं.
  • भारत को मलेरिया हटाने में सफलता इसलिए मिल रही है कि एक ओर जहाँ वह विश्व-भर में अपनाई गई रणनीतियों के अनुरूप चल रहा है तो दूसरी ओर अपना स्वदेशी मलेरिया-विरोधी कार्यक्रम भी चला रहा है.
  • 2015 में पूर्व एशिया शिखर सम्मलेन में 2030 तक मलेरिया समाप्त करने का वचन देने के उपरान्त भारत ने इसके लिए एक पंचवर्षीय राष्ट्रीय रणनीतिक योजना का अनावरण किया था. इसमें मलेरिया को नियंत्रित करने के स्थान पर उसे समाप्त करने पर बल दिया गया था. इस योजना का उद्देश्य है कि भारत के 678 जिलों में से 571 जिलों में2022 तक मलेरिया का उन्मूलन कर दिया जाए.
  • इस योजना में 10,000 करोड़ रू. का खर्च है. इस खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त निवेश तो चाहिए ही, साथ ही इसके लिए सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों और परोपकारी दाताओं का सहयोग भी अपेक्षित होगा क्योंकिस्वास्थ्य राज्य का विषय होता है इसलिए मलेरिया से निटपने में राज्य सरकारों को विशेष दायित्व निभाना होगा.
  • विदित हो कि ओडिशा राज्य एक मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चला रहा है जिसका नाम दुर्गम अंचलेर मलेरिया निराकरण (DAMaN) रखा गया है.

आगे की राह

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पिछले 15 वर्षों में मलेरिया को रोकने के लिए कई प्रयास किए गए. मच्छरदानी और दूसरे उपायों के बाद भी इस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है. ऐसे में समाधान के तौर पर वैक्सीन ही बेहतर विकल्प है. इसकी सहायता से हजारों बच्चों को मृत्यु के मुँह में जाने से  बचाया जा सकता है.


GS Paper  3 Source: The Hindu

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Topic : J&K on highway traffic ban

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए उधमपुर से बारामूला तक राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर सप्ताह में दो दिन नागरिक यातायात को प्रतिबंधित करने वाले एक आदेश पर रोक लगाने की मांग पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर से जवाब मांगा है.

पृष्ठभूमि

विदित हो कि गृह मंत्रालय ने सुरक्षाबलों के वाहनों को सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए रविवार व बुधवार को राजमार्ग पर आम वाहनों की आवाजाही प्रतिबंध लगा कर रखा है. यह प्रतिबंध दो दिन सुबह 4 बजे से शाम 5 बजे तक लागू रहेगा. इस आदेश के अनुसार अभी तक दो बार राजमार्ग पर आम वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया है. इसके कारण आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

यह राष्ट्रीय राजमार्ग इतना आवश्यक क्यों है?

यह NH श्रीनगर को घाटी के दक्षिणी और उत्तरी जिलों से जोड़ता है. यह राजमार्ग घाटी के 10 जिलों में से पाँच से जिलों से होकर गुजरता है. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यह राजमार्ग 69 लाख से अधिक की आबादी को प्रभावित करता है. यह राजमार्ग बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी मार्ग से घाटी में सभी चीजों की आपूर्ति की जाती है.

ऐसा निर्णय क्यों लिया गया?

जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में इस साल फरवरी में हुए भीषण हमले और इसी हफ्ते एक बार फिर जवाहर सुरंग के निकट हुए कार विस्‍फोट को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा फैसला लिया है. यह उपाय अभी जारी मतदान प्रक्रिया के दौरान फिदायीन आतंकी हमलों की आशंका को खत्म करने के लिए सुरक्षा बलों के काफिलों की निर्बाध आवाजाही में मदद करने के लिए अपनाया गया है.

चिंताएँ

आतंकी संगठन पुलवामा जैसा हमला करने के प्रयास में हैं. विशेषकर अब जबकि हर रोज चुनाव ड्यूटी को लेकर सुरक्षाबलों का आवागमन हो रहा है, तो यह और भी चुनौतीपूर्ण हो चुका है.


Prelims Vishesh

Earth Day :-

  • पृथ्वी दिवस एक वार्षिक आयोजन है, जिसे 22 अप्रैल को दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्थन प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जाता है.
  • इसकी स्थापना अमेरिकी सेनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने 1970 में पर्यावरण शिक्षा के लिए की थी.
  • पृथ्वी दिवस 2019 का थीम है – हमारी प्रजातियों की रक्षा करें.

The East Asia – Australasian Flyway (EAAF) :-

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  • जूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ZSI) के शोधकर्त्ताओं के अनुसार, 2004 के इंडोनेशियाई सूनामी के बाद से अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह पूर्वी एशियाई पक्षियों की प्रजातियों के प्रथम ठहराव का प्रमुख स्थल बन गया है.
  • ये पक्षी पूर्वी एशियाई-ऑस्ट्रेलियन फ्लाईवे (EAAF) में उड़ने से पहले कुछ हफ़्तों तक आराम करने के लिये अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपयोग भी करते हैं.
  • पूर्वी एशियाई-ऑस्ट्रेलियन फ्लाईवे रूस और अलास्का से, दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक विस्तृत है. कुल मिलाकर इस मार्ग में 22 देश आ जाते हैं.
  • वे मार्ग जहाँ से होकर प्रवासी पक्षी प्रतिवर्ष यात्रा करते हैं, उन्हें ‘फ्लाईवेज़’ के रूप में जाना जाता है. पूरे विश्व में 9 ‘फ्लाईवेज़ हैं.

Medicine labels in regional language :

  • केन्द्रीय स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में नकली, घटिया गुणवत्ता वाली तथा एक्सपायर हुई दवाओं पर रोक लगाने के लिए आदेश जारी किया है.
  • आदेश के अनुसार अब दवाओं के लेबल अंग्रेजी के अलावा हिंदी/क्षेत्रीय भाषाओं में भी लिखे जायेंगे.
  • प्रारम्भ में इस आदेश का क्रियान्वयन आयरन की दवा तथा पोलियो ड्रॉप्स के लिए किया जायेगा।.
  • स्वास्थ्य मंत्रालय के वक्तव्य के अनुसार यदि यह परीक्षण सफल रहता है तो आगे इस आदेश का क्रियान्वयन अन्य दवाओं के लिए भी किया जायेगा.
  • क्षेत्रीय भाषाओं को सम्मिलित किये जाने का यह निर्णय DTAB (Drug Technical Advisory Board) की एडवाइजरी के मुताबिक लिया गया है.

Garia festival :

  • त्रिपुरा के आदिवासी समुदाय के लिए गरिया त्यौहार एक महत्त्वपूर्ण त्यौहार है.
  • गरिया नृत्य ‘गरिया पूजा’ का एक अनिवार्य हिस्सा है.
  • गायन और नृत्य के माध्यम से पवित्र देवता की पूजा की जाती है.
  • त्रिपुरा के अन्य विभिन्न लोक नृत्यों के नाम – बिजू नृत्य, लेबांग बूमानी नृत्य, होजागिरी नृत्य, झूम नृत्य, है हॉक नृत्य, संगराई नृत्य, गजानन नृत्य, वेलकम डांस, डेलो नृत्य, गैलामुचामो नृत्य.

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[vc_row][vc_column][vc_message message_box_color=”orange” icon_fontawesome=”fa fa-file-pdf-o”]March, 2019 Sansar DCA is available Now, Click to Downloadnew_gif_blinking[/vc_message][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text]
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