Sansar डेली करंट अफेयर्स, 22 September 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 22 September 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Kakatiya Dynasty

संदर्भ

आंध्र प्रदेश के धारानिकोटा (Dharanikota) में काकतीय राजवंश के शासक ‘गणपति देव’ (Ganapati Deva) द्वारा निर्मित ‘काकती देवी’ (Kakatii Devi) मंदिर को स्थानीय देवी बालूसुलाम्मा (Balusulamma) के मंदिर में परिवर्तित कर दिया गया है.

काकतीय राजवंश

काकतीय वंश के राजाओं का शासन आधुनिक समय के प्रसिद्ध शहर हैदराबाद के पूर्वी भाग ‘तेलंगाना’ में था. कल्याणी के चालुक्य वंश के उत्कर्ष काल में काकतीय वंश के राजा चालुक्यों के सामन्तों के रूप में अपने राज्य का शासन करते थे. चालुक्य वंश के पतन के पश्चात् ‘चोल द्वितीय’ एवं ‘रुद्र प्रथम’ ने ‘काकतीय राजवंश’ की स्थापना की थी.

राज्य विस्तार

  • रुद्र प्रथम ने वारंगल को काकतीय राज्य की राजधानी बनाया था. रुद्र प्रथम के पश्चात् ‘महादेव’ व ‘गणपति’ शासक बने.
  • रुद्र प्रथम काकतीय वंश के सबसे योग्य व साहसी राजाओं में से एक था. उसने अपने राज्य की सीमा का अधिक से अधिक विस्तार किया.
  • गणपति ने विदेशी व्यापार को बहुत महत्ता दी. उसने विभिन्न बाधक तटकरों को समाप्त कर दिया.
  • ‘मोरपल्ली’ (आंध्र प्रदेश) उसके काल का प्रमुख बंदरगाह था.

मुस्लिम शासकों से संघर्ष

  • गणपति के पश्चात् उसकी बेटी रुद्रमा देवी वारंगल की शासिका बनी.
  • रुद्रमा देवी का उत्तराधिकारी उसका बेटा ‘प्रतापरुद्र देव’ था.
  • इसी के काल में ख़िलजी एवं तुग़लक़ शासकों ने वारंगल पर आक्रमण किया.
  • 14वीं सदी के शुरुआत में जब अफ़ग़ान सुल्तान अलाउद्दीन ख़िलज़ी का प्रसिद्ध सेनापति मलिक काफ़ूर दक्षिण भारत की विजय के लिए निकला, तो देवगिरि के यादवों और द्वारसमुद्र के होयसलों के समान वारंगल के काकतीयों की भी उसने विजय की.
  • ग़यासुद्दीन तुग़लक़ के पुत्र ‘उलगू ख़ाँ’ (मुहम्मद बिन तुग़लक़) ने 1332 ई. में वारंगल पर आक्रमण किया और प्रतापरुद्र देव को बंदी बना लिया. इसके पश्चात् काकातीय साम्राज्य को दिल्ली सल्तनत में मिला लिया गया.

काकतीय शासक

काकतीय वंश में जो राजा हुए, उनके नाम इस प्रकार हैं-

  • बेत प्रथम (1000-1030 ई.)
  • प्रोलराज प्रथम (1030-1075 ई.)
  • बेत द्वितीय (1075-1110 ई.)
  • प्रोलराज द्वितीय (1110-1158 ई.)
  • रुद्रदेव प्रथम (1158-1195 ई.)
  • महादेव (1195-1198 ई.)
  • गणपतिदेव (1199-1261 ई.)
  • रुद्रमा देवी (1262-1289 ई.)
  • प्रतापरुद्रदेव या रुद्रदेव द्वितीय (1289-1323 ई.)

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : International Day Of Peace

संदर्भ

प्रति वर्ष की तरह 21 सितंबर को दुनिया भर में विश्व शांति दिवस (International Day Of Peace) मनाया गया. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 21 सितम्बर, को अंतर्राष्ट्रीय शान्ति दिवस पर दुनिया को यह सन्देश दिया कि “ वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया भर में मची उथलपुथल के दौर में भी हर देश में लोगों को शान्ति क़ायम रखने को अपनी प्राथमिकता बनाए रखना होगा.”

अंतर्राष्ट्रीय शान्ति दिवस के बारे में

  • विश्व शांति दिवस अथवा ‘अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस’ प्रत्येक वर्ष ’21 सितम्बर’ को मनाया जाता है.
  • यह दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता, शांति और हर्ष का एक आदर्श माना जाता है.
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1981 में सितम्बर माह के तीसरे मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय शान्ति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया था और फिर दो दशक बाद सर्वमत से इसे अहिंसा और युद्धविराम की अवधि के रूप में आगे बढ़ाया गया.
  • वर्ष 1982 से शुरू होकर 2001 तक सितम्बर महीने का तीसरा मंगलवार ‘अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस’ या ‘विश्व शांति दिवस’ के लिए चुना जाता था.
  • लेकिन वर्ष 2002 से इसके लिए 21 सितम्बर का दिन घोषित कर दिया गया.
  • इस वर्ष 2020 के अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की थीम है ‘मिलकर शांति का निर्माण’ (Shaping Peace Together).
  • विदित हो कि वर्ष 2019 में अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की थीम “शांति के लिए जलवायु कार्रवाई” थी.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Epidemic Diseases (Amendment) Bill, 2020

संदर्भ

हाल ही में संसद के द्वारा महामारी रोग (संशोधन) विधेयक, 2020 (Epidemic Diseases (Amendment) Bill, 2020) पारित किया गया.

  • यह विधेयक महामारी रोग अधिनियम, 1897 में संशोधन के लिए सरकार द्वारा जारी किये गये महामारी रोग (संशोधन) विधेयक, 2020 को प्रतिस्थापित करेगा.
  • यह अधिनियम खतरनाक महामारी रोगों के प्रसार की रोकथाम के लिए विभिन्‍न प्रावधानों को सम्मिलित करता है.
  • इस विधेयक के माध्यम से अधिनियम में संशोधन करके महामारी रोगों का सामना कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षा-प्रावधानों को समाविष्ट किया जाएगा और इसमें ऐसे रोगों के प्रसार की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार की शक्तियों का विस्तार भी किया जाएगा.

विधेयक के प्रावधान

  • यह स्वास्थ्य कर्मियों की परिभाषा प्रदान करता है और यह भी वर्णित करता है कि उनके विरुद्ध हिंसक कार्यों में कौन-कौन से कृत्य शामिल हैं.
  • इस प्रकार के हिंसक कृत्यों में शामिल होना या ऐसा करने के लिए किसी को उकसाना (दुष्प्रेरण) कारावास और अर्थदंड के साथ दंडनीय होगा.
  • अपराधी तब तक दोषी माना जाएगा, जब तक कि वह निर्दोष सिद्ध न हो जाए.
  • केंद्र सरकार किसी भी स्थलीय बंदरगाह (Land Port), बंदरगाह या एयरोड्रम पर किसी भी बस, ट्रेन, माल वाहन, जलपोत, पोत या विमान की आवाजाही के दौरान निरीक्षण को विनियमित करने में सक्षम होगी.
  • इसके अतिरिक्त, सरकार इन परिवहन के साधनों से यात्रा करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के यात्रा-अवरोध को नियंत्रित कर सकती है.

मुख्य बिंदु

स्वास्थ्य कर्मियों को उन व्यक्तियों के रूप में परिभाषित किया गया है, जिन्हें अपने कर्तव्यों का पालन करने के दौरान महामारी के संपर्क में आने का जोखिम होता है. उनमें शामिल है:

  • सार्वजनिक और नैदानिक स्वास्थ्य प्रदाता जैसे-डॉक्टर एवं नर्स
  • ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसे इस अधिनियम के अंतर्गत रोग के प्रकोप की रोकथाम के लिए सशक्त बनाया गया है
  • राज्य सरकार द्वारा ऐसा करने के लिए नामित अन्य व्यक्ति

हिंसक कृत्यों में स्वास्थ्य देखभाल सेवा कर्मियों के विरुद्ध किए गए निम्नलिखित कार्य शामिल हैं:

  • जीवन या कामकाजी स्थितियों को प्रभावित करने वाला उत्पीड़न
  • जीवन को नुकसान, चोट, क्षति या खतरा पहुँचाना
  • कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा उत्पन्न करना
  • स्वास्थ्य सेवा कर्मी की संपत्ति या दस्तावेजों को नुकसान या क्षति पहुँचाना

विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी?

  • वर्तमान में कोविड-19 महामारी के दौरान, स्वास्थ्य सेवाओं के कर्मचारियों के साथ कई ऐसी घटनाएं घटीं जिसमें उन्हें निशाना बनाया गया और शरारती तत्वों द्वारा हमले भी हुए. ऐसा कर उन्हें उनके कर्तव्यों को पूरा करने से रोका गया.
  • चिकित्सा समुदाय के सदस्य लगातार चौबीसों घंटे लोगों की जान बचाने के लिए काम कर रहे हैं फिर भी दुर्भाग्यवश वे सबसे ज्यादा आसान शिकार बन गए क्योंकि कुछ लोग उन्हें वायरस के वाहक के तौर पर मानने लगे. इससे उन पर दोषारोपण के साथ उनका बहिष्कार करने के मामले सामने आए और यहाँ तक कि वे हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं का शिकार हुए.
  • विधेयक में ऐसी हिंसा की घटनाओं को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध घोषित करने के साथ ही स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को चोट लगने या नुकसान या संपत्ति को नुकसान, जिसमें महामारी के संबंध में स्वास्थ्य सेवा कर्मियों का सीधा हित जुड़ा हो सकता है, के लिए जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

विधेयक के विषय में और भी जानकारियाँ

  • वर्तमान विधेयक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मौजूदा महामारी के दौरान किसी भी स्थिति में स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा और संपत्ति को लेकर जीरो टॉलरेंस होगा.
  • विधेयक में हिंसा को उत्पीड़न, शारीरिक चोट और संपत्ति को नुकसान को सम्मिलित करते हुए परिभाषित किया गया है.
  • स्वास्थ्य सेवा कर्मियों, जिसमें पब्लिक और क्लीनिकल हेल्थकेयर सेवा प्रदाता जैसे डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल वर्कर और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता; ऐक्ट के तहत बीमारी के प्रकोप या प्रसार को रोकने के लिए काम करने वाला अधिकार प्राप्त कोई अन्य व्यक्ति; और आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा राज्य सरकार द्वारा घोषित ऐसे व्यक्ति सम्मिलित हैं.
  • दंडात्मक प्रावधानों को संपत्ति के नुकसान के मामलों में लागू किया जा सकता है जिसमें क्लीनिक, क्वारंटीन और मरीजों के आइसोलेशन के लिए निर्धारित केंद्र, मोबाइल मेडिकल यूनिटें और कोई अन्य संपत्ति, जिसका महामारी के संबंध में स्वास्थ्य सेवा कर्मियों से प्रत्यक्ष संबंध हो.
  • यह संशोधन हिंसा को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाता है. विधेयक के अनुसार ऐसी हिंसक कृत्य करने या उसमें सहयोग करने पर तीन महीने से पांच वर्ष तक कैद और 50 हजार से लेकर दो लाख रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.
  • गंभीर चोट/जख्म पहुंचाने पर दोषी को छह माह से लेकर सात साल तक कैद की सजा होगी और एक लाख से लेकर पांच लाख रूपये तक उस पर जुर्माना लगेगा. इसके अलावा, पीड़ित की संपत्ति को हुए नुकसान पर अपराधी को बाजार मूल्य का दोगुना हर्जाना भी देना होगा.
  • 30 दिनों के भीतर इंस्पेक्टर रैंक के एक अधिकारी द्वारा अपराधों की जांच की जाएगी और सुनवाई एक साल में पूरी होनी चाहिए जबतक कि कोर्ट द्वारा लिखित रूप में कारण बताते हुए इसे आगे न बढ़ाया जाए.

महामारी अधिनियम, 1897 क्या है?

  • यह कानून ख़तरनाक महामारी के प्रसार की बेहतर रोकथाम के लिए बनाया गया है.
  • केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को धारा 2 को लागू करने के लिए कहा है.
  • धारा 2 में कहा गया है –जब राज्य सरकार को किसी समय ऐसा लगे कि उसके किसी भाग में किसी ख़तरनाक महामारी का प्रकोप हो गया है या होने की आशंका हैतब अगर वो (राज्य सरकार) ये समझती है कि उस समय मौजूद क़ानून इस महामारी को रोकने के लिए काफ़ी नहीं हैंतो कुछ उपाय कर सकती है. ऐसे उपायजिससे लोगों को सार्वजनिक सूचना के जरिए रोग के प्रकोप या प्रसार की रोकथाम हो सके.
  • इस अधिनियम के धारा 2 के भी 2 उप-धारा हैं. इसमें कहा गया है कि जब केंद्रीय सरकार को ऐसा लगे कि भारत या उसके अधीन किसी भाग में महामारी फ़ैल चुकी है या फैलने का ख़तरा हैतो रेल या बंदरगाह या अन्य तरीके से यात्रा करने वालों कोजिनके बारे में ये शंका हो कि वो महामारी से ग्रस्त हैंउन्हें किसी अस्पताल या अस्थायी आवास में रखने का अधिकार होगा.
  • महामारी अधिनियम 1897 का धारा-जुर्माने के बारे में है. इसमें कहा गया है कि महामारी के संबंध में सरकारी आदेश न मानना अपराध होगा. इस अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता यानी इंडियन पीनल कोड की धारा 188 के तहत सज़ा मिल सकती है.
  • इस अधिनियम का धारा 4 क़ानूनी सुरक्षा के बारे में है. जो अधिकारी इस ऐक्ट को लागू कराते हैं, उनकी क़ानूनी सुरक्षा भी यही ऐक्ट सुनिश्चित करता है. ये धारा सरकारी अधिकारी को लीगल सिक्योरिटी दिलाता है. कि ऐक्ट लागू करने में अगर कुछ उन्नीस-बीस हो गया, तो अधिकारी की ज़िम्मेदारी नहीं होगी.

आगे की राह

ऐसी परिस्थिति चिकित्सा समुदाय को कर्तव्यों को पूरा करते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ देने और मनोबल बनाए रखने में बाधा बनते हैं, जो इस राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट की घड़ी में बहुत ही आवश्यक है. स्वास्थ्य सेवाकर्मी बिना किसी भेदभाव के अपना काम कर रहे हैं तो समाज का सहयोग और समर्थन मिलना एक मूलभूत जरूरत है, जिससे वे पूरे विश्वास के साथ अपने कर्तव्यों को निभा सकें.

हेल्थ वर्कफोर्स (स्वास्थ्य कर्मी) कोविड-19 से लड़ने में हमारे अग्रिम पंक्ति के सिपाही हैं. वे दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं. वे इस समय उत्पीड़न या हिंसा नहीं बल्कि हमारे सर्वोच्च सम्मान और प्रोत्साहन के पात्र हैं. यह आशा की जाती है कि इस विधेयक से स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के समुदाय में भरोसा बढ़ेगा जिससे वे मौजूदा कोविड-19 के प्रकोप के दौरान सामने आई विपरीत परिस्थितियों में अपनी अनवरत सेवाओं के माध्यम से मानव जाति की सेवा में अपना योगदान जारी रख सकें.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies / Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : International Financial Services Centres Authority – IFSCA

संदर्भ

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (International Financial Services Centres Authority – IFSCA) की एक समिति द्वारा रिपोर्ट जारी की गई.

  • IFSCA समिति की अंतरिम रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में अंतर्राष्ट्रीय खुदरा व्यवसाय को विकसित करने के उपायों के साथ-साथ IFSC को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के लिए आकर्षक बनाने हेतु संभावित रणनीतियों का सुझाव दिया गया है.
  • IFSC, सीमाओं के पार वित्त, वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के प्रवाह का समाधान करते हुए घरेलू अर्थव्यवस्था के क्षेत्राधिकार से बाहर के ग्राहकों की मांग को पूरा करता है. यह निधि संग्रहण, परिसंपत्ति प्रबंधन आदि जैसी सेवाएं प्रदान करता है.
  • सेज (विशेष आर्थिक क्षेत्र: SEZ) अधिनियम 2005 एक विशेष आर्थिक क्षेत्र में एक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र स्थापित करने की अनुमति देता है.
  • इसका उद्देश्य गिफ्ट सिटी (Gujarat International Finance Tec-City) में स्थित IFSC के लिए भारत के अपतटीय व्यवसाय को चैनलबद्ध करना और इसे भारत-केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के लिए एक प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करना है.

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण की आवश्यकता

  • वर्तमान में IFSCs बैंकिंग, पूंजी बाज़ार एवं बीमा क्षेत्र भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) जैसे अनेक नियामकों द्वारा नियंत्रित हैं. IFSC में कारोबार की गतिशील प्रकृति के कारण नियामकों के बीच अत्यधिक समन्वय की आवश्यकता है. IFSC में वित्तीय गतिविधियों का नियंत्रण करने वाले मौजूदा नियामकों में स्पष्टीकरणों तथा संशोधनों की भी आवश्यकता है.
  • IFSC में वित्तीय सेवाओं एवं उत्पादों के विकास के लिये केंद्रित एवं समर्पित नियामक हस्तक्षेपों की आवश्यकता होगी. इसलिये भारत में IFSC के लिये एक एकीकृत वित्तीय नियामक स्थापित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि वित्तीय बाज़ार के भागीदारों के लिये विश्वस्तरीय नियामक वातावरण उपलब्ध हो सके.
  • इसके अलावा कारोबारी सुगमता की दृष्टि से भी यह अनिवार्य होगा. एकीकृत प्राधिकरण के माध्यम से वैश्विक श्रेष्ठ प्रणालियों के अनुसार भारत में IFSC के विकास पर ज़ोर दिया जा सकेगा, जो अत्यंत आवश्यक है.

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण कोष

विधेयक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीस सेवा केंद्र प्राधिकरण कोष (International Financial Services Centres Authority Fund) की स्थापना का भी प्रावधान करता है. इस कोष में निम्नलिखित राशियाँ जमा की जाएंगी:

  • प्राधिकरण के सभी अनुदान, फीस और शुल्क.
  • केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित विभिन्न स्रोतों से प्राधिकरण को प्राप्त होने वाली राशि.

Prelims Vishesh

First direct cargo ferry service between India, Maldives flagged off :-

  • इससे भारत और मालदीव के मध्य कार्गो की आवाजाही के लिए प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी और इस प्रकार दोनों देशों के भारत-मालदीव के मध्य प्रथम प्रत्यक्ष बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा.
  • भौगोलिक निकटता के बावजूद भी भारत मालदीव का चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है.
  • यह भारत से मालदीव के लिए माल परिवहन हेतु परिवहन लागत को कम करेगा तथा साथ ही समयबद्ध, त्वरित और लागत प्रभावी साधन उपलब्ध कराएगा.
  • इस सेवा का संचालन महीने में दो बार किया जाएगा और इसे भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड (शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) द्वारा संचालित किया जाएगा.

Rocket Launching Port :-

  • केंद्र सरकार तमिलनाडु के थुथुकुडी जिले के कुलसेकरपट्टिनम में एक दूसरे अंतरिक्ष रॉकेट प्रक्षेपण पोर्ट की योजना निर्मित कर रही है.
  • इसे घरेलू और वैश्विक ग्राहकों के लिए इसरो द्वारा किए जा रहे प्रक्षेपणों की संख्या में वृद्धि के कारण स्थापित किया जा रहा है.
  • वर्तमान में रॉकेटों का प्रक्षेपण चेन्नई के पास श्रीहरिकोटा के स्पेस पोर्ट से किया जाता है.

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