Sansar डेली करंट अफेयर्स, 22 June 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 22 June 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Keeladi excavations

संदर्भ

तमिलनाडु राज्य के पुरातत्त्व विभाग द्वारा तमिलनाडु के कीलादी संगमकालीन नगरीय बस्ती में छठे चरण की खुदाई की जा रही है और उसी दौरान वहां एक बच्चे के कंकाल के अवशेष मिले हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि इस कंकाल को दो टेराकोटा कलशों के मध्य दफन किया गया था. विदित हो कि ‘कीलादी’ मदुरै से लगभग 13 किमी. दक्षिण-पूर्व में वैगई नदी के किनारे स्थित है.

अभी तक के खुदाई में कीलादी उत्खनन से निकले निष्कर्ष

  1. कीलादी की खुदाई से साबित होता है कि तमिलनाडु में संगम युग में वैगई नदी के किनारे एक शहरी सभ्यता मौजूद थी.
  2. उत्खनन में प्राप्त वस्तुएँ लौह युग (12वीं स्थाब्दी ई.पू. से 6ठी शताब्दी ई.पू.) और प्रारम्भिक ऐतिहासिक काल (छठी शताब्दी ई.पू से चौथी शताब्दी ई.पू) के बीच की खोई हुई कड़ियों और तत्पश्चात् हुई सांस्कृतिक प्रगतियों को समझने में सहायता पहुँचाती हैं.
  3. उत्खनन में बर्तन पर तमिल ब्राह्मी लिपि लिखी हुई मिलती है जिससे पता चलता है कि छठी शताब्दी ई.पू. में साक्षरता का स्तर अच्छा था.
  4. उत्खनन में कई पशुओं के कंकाल खंड मिले हैं जैसे गाय-बैल, भैंस, भेड़, बकरी, नील गाय, कृष्ण मृग, बनैला सूअर और मोर. इससे पता चलता है कि उस समय का समाज हेती करता था और पशुओं को पालता था.
  5. उत्खनन में लम्बी दीवारें, पीटा हुआ फर्श, छत के खप्पर, बाँस में लगाई हुईं लोहे की कीलें आदि मिली हैं जिससे संगम युग में जीवन के उच्च स्तर का पता चलता है.
  6. उत्खनन में अन्य वस्तुएँ भी मिली हैं जिनका महत्त्व है. ये हैं – ईंटों के भवन, ईंट से सजाये हुए कुएँ, खप्पर, सोने के गहने, ताम्बे से बनी हुई वस्तुओं के टुकड़े, लोहे के औजार, मिट्टी से बने शतरंज की गोटियाँ, कान के बाले, तकुए, छोटी-छोटी मूर्तियाँ, काले और लाल बर्तन, कलाकृति वाले बर्तन, शीशे के मनके, अर्ध-मूल्यवान पत्थर आदि.
  7. खनन स्थल पर या उसके निकट गुफाओं और चट्टानों के साथ-साथ मिट्टी के बर्तनों पर उत्कीर्ण आकृतियाँ मिलती हैं जो सिन्धु घाटी सभ्यता की आकृतियों से मेल खाती हैं.

Keeladi excavations


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Separation of powers between various organs dispute redressal mechanisms and institutions.

Topic : Rule of Law index

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र संघ की विधि का नियम सूचकांक (रूल ऑफ लॉ इंडेक्स) में भारत को 69वां स्थान मिलने को लेकर सर्वोच्च न्यालय में एक याचिका डाली गई थी जिस पर न्यायालय ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है.

पृष्ठभूमि

इस याचिका में मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए और कानून व्यवस्था को सुधारने पर काम किया जाए. विदित हो कि इस गत वर्ष भारत को ‘रूल ऑफ लॉ सूचकांक’ में 68वां स्थान मिला था.

अन्य देशों का प्रदर्शन

  1. डेनमार्क को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ.
  2. दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमशः नॉर्वे और फ़िनलैंड देश रहे.
  3. वेनेजुएला को सबसे अंतिम स्थान प्राप्त हुआ.

रूल ऑफ लॉ सूचकांक’ क्या है?

  • यह सूचकांक एक स्वतंत्र संगठन ‘वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट’ द्वारा प्रतिवर्ष जारी किया जाता है.
  • इस सूचकांक का उद्देश्य यह पता करना है की विश्व के विभिन्न देशों में किस स्तर तक कानून व्यावहारिक है.
  • सूचकांक के तहत सरकारी शक्तियों पर दबाव, भ्रष्टाचार पर अंकुश, शासकीय खुलापन, मौलिक अधिकार,व्यवस्था एवं सुरक्षा, नियमों को लागू करवाना, सिविल न्याय, आपराधिक न्याय जैसी आठ श्रेणियाँ को शामिल किया गया है.
  • इस सूचकांक में विश्व के 128 देशों को शामिल किया गया है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Uighur rights Bill

संदर्भ

नॉवल कोरोना वायरस के कारण विश्व- भर में फैली महामारी कोविड-19 को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विधेयक पर हस्ताक्षर किया है जिसमें उइगर व अन्य अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर चीन को दंडित करने की मांग की गई है. पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र में उइगर व अन्य जातीय समूहों की व्यापक निगरानी और हिरासत में लेने वाले चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध शामिल है.

उनकी स्वीकृति के साथ ही यह विधेयक अब कानून बन गया है. इस विधेयक में उइगर मुसलमानों के दमन के लिए जिम्मेदार चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध की बात कही गई है.

चीन पर क्या आरोप है?

सुनने में आता है कि उइगर लोगों को “शेष देश के साथ समरस” बना रहा है. इसके लिए कहा जाता है कि दस लाख उइगरों, कज्जाखों और दूसरे मुसलमानों को पकड़ कर बंदी शिवरों में डाल दिया गया है जहाँ उनको अपनी पहचान छोड़ने और हान चीनियों के प्रभुत्व वाले साम्यवादी देश चीन में बेहतर ढंग से घुलने-मिलने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

पर चीन का कहना है कि ये सारे आरोप असत्य हैं. वस्तुतः वह उनको “अतिवादी” विचारों से मुक्त किया जा रहा है और व्यावसायिक कौशल सिखाया जा रहा है.

चीन ने हाल के वर्षों में में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उइगर और अन्य मुस्लिम समूहों के विरुद्ध दमनात्मक कदम उठाये हैं और चीन ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है, ठीक उसी प्रकार वर्तमान मोदी सरकार अपनी हिंदू राष्ट्रवादी नीतियों की आलोचना सह नहीं पाती और इन आरोपों को गलत ठहरा देती है.

उइगर (Uighurs) कौन हैं?

  1. उइगर मुसलमानों की एक नस्ल है जो बहुत करके चीन के Xinjiang प्रांत में रहती है.
  2. उइगर लोगउस प्रांत की जनसंख्या के 45% हैं.
  3. विदित हो कि तिब्बत की भांति Xinjiang भी चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र घोषित है.

उइगरों के विद्रोह का कारण

  • कई दशकों से Xinjiang प्रांत में चीन की मूल हान (Han) नस्ल के लोग बसाए जा रहे हैं. आज की तिथि में यहाँ 80 लाख हान रहते हैं जबकि 1949 में इस प्रांत में 220,000 हान रहा करते थे.
  • हान लोग अधिकांश नई नौकरियों को हड़प लेते हैं और उइगर बेरोजगार रह जाते हैं.
  • उइगरों की शिकायत है कि सैनिक उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं जबकि सरकार यह दिखाती है कि उसने सभी को समान अधिकार दिए हुए हैं और विभिन्न समुदायों में समरसता है.

चीन की चिंता

  • चीन का सोचना है कि उइगरों का अपने पड़ोसी देशों से सांस्कृतिक नाता है और वे पाकिस्तान जैसे देशों में रहने वाले लोगों के समर्थन से Xinjiang प्रांत को चीन से अलग कर एक स्वतंत्र देश बनाना चाहते हैं.
  • विदित हो Xinjiang प्रांत की सीमाएँ मंगोलिया, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिजिस्तान, ताजिकिस्तान और अफगानिस्तान से मिलती है.

हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ा है. दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस महामारी के लिए लगातार चीन को जिम्मेदार ठहराते आए हैं. वहीं अब इस बिल के कारण भी अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to direct and indirect farm subsidies and minimum support prices; Public Distribution System objectives, functioning, limitations, revamping; issues of buffer stocks and food security; Technology missions.

Topic : Minimum Selling Price- MSP

संदर्भ

केंद्र सरकार किसानों के लगभग 22 हजार करोड़ रुपए के गन्ने की बकाया राशि का भुगतान करने में सहायता करने के लिये चीनी के ‘न्यूनतम विक्रय मूल्य’ (Minimum Selling Price- MSP) को 31 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है.

मुख्य बिंदु

  • केंद्र सरकार द्वारा चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य के वृद्धि के संबंध में राज्य सरकारों से भी अनुशंसा प्राप्त हुई है तथा नीति आयोग (Niti Aayog) द्वारा भी चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य में बढ़ोतरी का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है.
  • न्यूनतम विक्रय मूल्य में बढ़ोतरी के संदर्भ में गन्ना एवं  चीनी उद्योग पर नीति आयोग द्वारा एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है जिसने चीनी मूल्य में दो रूपए प्रति किलोग्राम की वृद्धि की सिफारिश की गई है.

न्यूनतम विक्रय मूल्य

न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) वह दर है जिसके नीचे मिलों को (mills) खुले बाज़ार में चीनी को थोक व्यापारी एवं थोक उपभोक्ता जैसे पेय और बिस्किट निर्माताओं को बेचने की अनुमति नहीं है.

न्यूनतम समर्थन मूल्य

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सरकार के द्वारा तय किया गया वह मूल्य है जिसपर कृषक अपनी फसल सरकार को बेच सकते हैं.
  • जब बाजार की कीमतें सरकार द्वारा तय किये गए न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ जाती हैं तो सरकार की खरीद-एजेंसियाँ किसानों के ​​फसल को खरीदने के लिए आगे आ जाती हैं.
  • जिन फसलों की आपूर्ति घट जाती है, उन फसलों को आगामी मौसम में लगाने के लिए किसानों को प्रेरित करने हेतु MSP का सहारा लिया जाता है.
  • आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति बुवाई के हर मौसम की शुरुआत में विभिन्न फसलों के लिए MSP की घोषणा करती है.
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य का फैसला कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices – CACP) की अनुशंसा पर लिया जाता है.
  • CACP अपनी अनुशंसा माँग और आपूर्ति, उत्पादन की लागत एवं कीमत की रुझान के आधार पर करता है

प्रीलिम्स बूस्टर

 

  • मध्य प्रदेश में भावान्तर भुगतान योजना चल रही है जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर की राशि किसानों को दी जाती है.
  • तेलंगाना में रायतु बन्धु योजना लागू है जिसमें राज्य के सभी किसानों को खेती की हर ऋतु में 4,000 प्रति एकड़ का भुगतान किया जाता है.
  • कालिया एक ऐतिहासिक पहल है जो ओडिशा राज्य में कृषि गत समृद्धि बढ़ाने और निर्धनता घटाने में बहुत सहायता पहुँचाएगी.

Prelims Vishesh

Schizothorax sikusirumensis :-

  1. पिछले दिनों अरुणाचल प्रदेश में स्किजोथोरेक्स नामक मछली की एक नई प्रजाति का पता चला है.
  2. यह मछली अरुणाचल प्रदेश की सीकू और सीरम नदियों के संधि स्थल पर मिली है, अतः इसका नाम सीकूसीरमेनसिस रखा गया है.

Pangolin :-

Pangolin

  • चीनी पेंगोलिन विकट रूप से संकटग्रस्त प्रजाति (critically endangered ) मानी जाती है क्योंकि वहाँ इस जीव के शल्कों (scales) का अवैध व्यापार खूब चलता है. अतः पिछले दिनों चीन में पेंगोलिन के शल्कों को निकालने की अनुमति बंद कर दी गई है. विदित हो कि इन शल्कों का प्रयोग वहां की पारम्परिक औषधि में किया जाता रहा है.
  • ज्ञातव्य है कि भारत में भी पेंगोलिन पाया जाता है जो संकटग्रस्त (endangered) की सूची में आता है.
  • भारतीय पेंगोलिन को Manis crassicaudata कहते हैं.

What is dexamethasone? :-

  • पिछले दिनों रिकवरी ट्रायल के शोधकर्ताओं ने यह प्रतिवेदित किया कि COVID-19 के रोगियों की मृत्यु दर को घटाने में dexamethasone औषधि सहायक सिद्ध हुई है.
  • विदित हो कि यह औषधि एक ज्वलन-निरोधी औषधि है जो corticosteroids की श्रेणी में आती है. यह औषधि शरीर में ज्वलन उत्पन्न करने वाले रसायनों की उत्पत्ति को घटा देती है.

Jagannath Rath Yatra :-

  • पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश में जून 23 को होने वाली जगन्नाथपुरी की रथ यात्रा की अनुमति तो दे दी है परन्तु साथ ही COVID-19 को दृष्टि में रखते हुए इस पर कई प्रतिबंध भी लगा दिए हैं. इस वर्ष रथयात्रा में लोगों का जमावड़ा नहीं होगा.
  • इस समारोह में भगवान् जगन्नाथ, शुभद्रा और बलभद्र की मूर्तियों को पुरी के जगन्नाथ मंदिर से निकाल कर अलग-अलग रथों में दूसरे मंदिर तक पहुँचाया जाता है.
  • जगन्नाथजी के रथ को नंदीघोष, सुभद्रा के रथ को तालध्वज और बलभद्र के रथ को देवदलन कहा जाता है.
  • प्रत्येक वर्ष इन रथों को नए सिरे से लकड़ी से बनाया जाता है.

Kodumanal :-

  • तमिलनाडु के ऐरोड जिले में स्थित कोडुमनाल गाँव में राज्य पुरातत्त्व विभाग की ओर से खुदाई की गई जिसमें बर्तन-बासन, मूल्यवान पत्थर, ताम्बा गलाने की भट्टी और मृतकों को गाड़ने के स्थल मिले हैं. एक खोपड़ी भी मिली है जो संभवतः किसी भेड़िये या कुत्ते की है.
  • ज्ञातव्य है कि यह गाँव पाँचवी शताब्दी ई.पू. से लेकर पहली शताब्दी ई.पू. तक एक व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र था और तब उसे कोडुमनम कहते थे. इसका उल्लेख संगम साहित्य के Patittrupathu में भी आता है.

SATYABHAMA portal :-

  • खनन मंत्रालय के अधीनस्थ खनन सूचना प्रभाग के National Informatics Centre (NIC) ने सत्यभामा नामक एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है जिसका पूरा नाम है – Science and Technology Yojana for Aatmanirbhar Bharat in Mining Advancement.
  • इस पोर्टल पर परियोजना प्रस्ताव जमा हो सकते हैं, उनकी निगरानी हो सकती है और उनके द्वारा निधि/अनुदान की उपयोगिता का पता लग सकता है.


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