Sansar डेली करंट अफेयर्स, 22 January 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 22 January 2020


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resources, issues relating to poverty and hunger.

Topic : Pulse Polio Programme

संदर्भ

इस वर्ष जनवरी 18 से प्लस पोलियो कार्यक्रम आरम्भ होने जा रहा है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुरू किया जा रहा यह अभियान कम उम्र के बच्चों में पोलियो को रोकना है.

प्लस पोलियो कार्यक्रम क्या है?

1988 में विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly – WHA) ने संसार-भर में पोलियो के उन्मूलन के लिए एक संकल्प अंगीकृत किया था. इसके पश्चात् भारत ने 1995 में पोलियो उन्मूलन के उद्देश्य से 0-5 वर्ष के सभी बच्चों को पोलियो का टीका लगाने का एक बड़ा अभियान आरम्भ किया था जो प्लस पोलियो के नाम से जाना जाता है. यह कार्यक्रम वर्षानुवर्ष चलाया गया.

पोलियो क्या है?

  • बहुतृषा, जिसे अक्सर पोलियो या ‘पोलियोमेलाइटिस’ भी कहा जाता है, एक विषाणु जनित संक्रामक रोग है जो आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति मे संक्रमित विष्ठा या खाने के माध्यम से फैलता है.
  • यह एक उग्र स्वरूप का बच्चों में होनेवाला रोग है, जिसमें मेरुरज्जु (spinal cord) के अष्टश्रृंग (anterior horn) तथा उसके अंदर स्थित धूसर वस्तु में अपभ्रंशन (degenaration) हो जाता है और इसके कारण चालकपक्षाघात (motor paralysis) हो जाता है.
  • इस रोग का औपसर्गिक कारण एक प्रकार का विषाणु (virus) होता है, जो कफ, मल, मूत्र, दूषित जल तथा खाद्य पदार्थों में विद्यमान रहता है; मक्खियों एवं वायु द्वारा एक स्थान में दूसरे स्थान पर प्रसारित होता है तथा दो से पाँच वर्ष की उम्र के बालकों को ही आक्रांत करता है.
  • लड़कियों से अधिक यह लड़कों में हुआ करता है तथा वसंत एवं ग्रीष्मऋतु में इसकी बहुलता हो जाती है.
  • जिन बालकों को कम अवस्था में ही टाँसिल का शल्यकर्म कराना पड़ जाता है उन्हें यह रोग होने की संभावना और अधिक होती है.

इनएक्टिवेटेड पोलियो टीका (IPV) क्या है?

  • इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन या आईपीवी इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है. इसमें वायरस के एक निष्क्रिय (मृत) रूप का उपयोग किया जाता है जिसमें पोलियो का कारण बनने की क्षमता नहीं होती है.
  • IPV मुख्य रूप से उन देशों में उपयोग किया जाता है जहां पर पोलियो वायरस पहले ही समाप्त हो चुका है.
  • चूँकि ओपीवी एक जीवित पोलियो वायरस से बना होता है इसलिए जीवित वायरस के टीके से पोलियो के खिलाफ सुरक्षा अत्यधिक प्रभावी होने के बावजूद प्रति वर्ष पोलियो के कुछ मामलों का कारण पोलियो ड्राप या ओरल पोलियो वैक्सीन होते थे.
  • अमेरिका में सन 2000 में निष्क्रिय पोलियो टीके (आईपीवी) का उपयोग शुरू हो गया. भारत ने नवंबर 2015 से ओरल पोलियो वैक्सीन या पोलियो ड्राप (ओपीवी) के साथ अपने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में इंजेक्शन योग्य पोलियो टीका या इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) को भी पेश किया है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : China’s one-child policy

संदर्भ

चीन में जन्म दर इतनी गिर चुकी है जितनी वह पिछले 70 वर्षों में कभी नहीं थी. 2019 में यहाँ की जन्म दर 10.48 प्रति 1,000 रही. 2019 में जन्मे बच्चों की संख्या 580,000 घटकर 14.65 मिलियन थी. जन्म दर के घटने का मुख्य कारण चीन की एक बच्चे की नीति (one-child policy) है जो तत्कालीन नेता डेंग जियोपिंग के द्वारा 1979 में लागू की गई थी.

चीन में एक बच्चे की नीति क्यों अपनाई गई थी?

यह नीति माल्थस के सिद्धांत को देखते हुए अपनाई गई थी जिसके अनुसार, अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि अंततः आर्थिक एवं पर्यावरणगत विभीषिका में फलित होती है.

70 के दशक में चीन खाद्य पदार्थों की कमी भी थी और यह भी एक बच्चे की नीति के पीछे एक कारण था.

माल्थस का सिद्धांत क्या है?

जनसंख्या के बारे में एक सुगठित सिद्धांत प्रस्तुत करने वाला पहला अर्थशास्त्री टॉमस रोबर्ट माल्थस था. उसने प्रायोगिक आँकड़ों को जमा करके जनसंख्या का एक सिद्धांत बनाया था जो उसने अपनी पुस्तक Essay on the Principle of Population (1798)” में प्रकट किया. इसमें उसने यह तर्क दिया कि यदि जनसंख्या को नियंत्रित नहीं किया गया तो वह संसाधनों से आगे बढ़ जायेगी और ढेर सारी समस्याओं का कारण बनेगी.

विस्तार से पढ़ें > माल्थस का सिद्धांत

क्या एक बच्चे की नीति सफल रही?

चीनी अधिकारीयों के अनुसार, इस नीति के कारण जनसंख्या में 400 मिलियन की कमी आई. परन्तु इससे जनसंख्या पर अनपेक्षित दुष्प्रभाव देखने को मिला. इस नीति के अंतर्गत लोगों को दूसरे बच्चे के लिए सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य था. परन्तु यह पाया गया कि लोग दूसरे बच्चे में अधिक रूचि प्रदर्शित नहीं कर रहे थे. जिस समय एक बच्चे की नीति आई थी उस समय 11 मिलियन जोड़े दूसरे बच्चे के लिए पात्रता रखते थे. सरकार आशा कर रही थी कि 2014 में 2 मिलियन बच्चे जन्मेंगे, परन्तु ऐसा हो न सका. मात्र 7 लाख जोड़ों ने दूसरे बच्चे के लिए आवेदन दिया और उनमें 6 लाख 20 हजार को ही अनुमति मिली. परिणामस्वरूप, आने वाले वर्षों में जनसंख्या में कमी एक समस्या के रूप में विद्यमान रहेगी.

चीन में बूढ़े लोगों की गिनती बढ़ गई है. वस्तुतः जनसंख्या का एक चौथाई भाग 2030 तक 60 वर्ष की आयु से अधिक का होगा.

एक बच्चे की नीति के लाभ

  1. इससे जनसंख्या की समस्या का समाधान करने में सहायता मिलती है.
  2. कुछ परिवारों को यह नीति व्यावहारिक प्रतीत होती है.
  3. इससे दरिद्रता की दर नीचे आती है.

एक-बच्चा नीति के दोष

  1. यह सामान रूप से लागू नहीं हो पाती.
  2. इससे मानव अधिकार का उल्लंघन होता है.
  3. कामगार लोगों की संख्या घटती जाती है.
  4. सांस्कृतिक कारणों से लोग बेटी के स्थान पर बेटा चाहते हैं. फलतः लैंगिक असंतुलन देखने को मिलता है.
  5. गर्भपात और कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में बढ़ोतरी होती है.
  6. एक बच्चे से अधिक बच्चे पैदा करने पर उस परिवार के शेष बच्चे गैर-कानूनी हो जाते हैं और फिर वे कभी भी देश के नागरिक नहीं बनते. पता चलने पर उस परिवार पर अर्थदंड लगाया जाता है.
  7. यह नीति लोगों की व्यक्ति मान्यताओं और विचारों का हनन करती है.

भारत में ऐसी नीति लागू करना कहा तक ठीक है?

  • यदि इस प्रकार की नीति भारत में लागू की जाती है तो उसके परिणाम चीन की तुलना में अधिक विनाशकारी हो सकते हैं.
  • जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर (MIR), जच्चा मृत्यु दर जैसे मूलभूत विकास संकेतकों के मामले में भारत चीन से कोसों पीछे है. बेटे की चाह, पूरे देश में एक समान विकास न होना आदि तत्त्व भी ऐसी नीति लागू करने में अड़चन पैदा करेंगे.
  • सरकार एक बच्चे की नीति लागू करने के लिए किसी घर में प्रवेश करेगी तो इसका भीषण विरोध हो सकता है.
  • परिवार छोटा रखने का काम स्त्रियों का माना जाता है और इसके लिए गर्भनिरोध के उपाय उन पर ही लागू होते हैं जबकि इसमें पति को खुली छूट मिल जाती है. यह पितृसत्तामात्क परिवेश भी एक बच्चे की नीति के लिए बाधा हैं.
  • मात्र परिवार छोटा करने से बात नहीं बनेगी. वास्तविक लक्ष्य खाद्य सुरक्षा, आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की मूलभूत आवश्यकताओं और सेवाओं की सुविधा प्रधान करना होना चाहिए.

GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : UAE has been declared ‘reciprocating territory’ by India

संदर्भ

पिछले सप्ताह विधि एवं न्याय मंत्रालय ने एक असाधारण राजपत्र अधिसूचना निर्गत की जिसमें संयुक्त अरब अमीरात को नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908 (Civil Procedure Code, 1908) के अनुभाग 44A के अंतर्गत एक “पारस्परिक क्षेत्र” (reciprocating territory) अर्थात् वैसा भूक्षेत्र घोषित किया गया जहाँ भारत के न्यायालयों द्वारा पारित आदेश लागू हो सकते हैं और जहाँ के न्यायालयों के द्वारा पारित आदेश भारत में लागू हो सकते हैं.

विदेश में स्थित ऐसे न्यायालयों को सुपीरियर न्यायालय (superior courts) भी कहते हैं. इस अधिसूचना में उन सुपीरियर न्यायालयों की सूची दी गई है जो संयुक्त अरब अमीरात में स्थित हैं.

ज्ञातव्य है कि संयुक्त अरब अमीरात के अतिरिक्त ऐसे कई देश हैं जिनके लिए भारत इस प्रकार की अधिसूचनाएं निर्गत कर चुका है. ये देश हैं – यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, बांग्लादेश, मलेशिया, त्रिनिडाड और टोबैगो, न्यूजीलैंड, कुक आइलैंड्स (नीयू सहित) और पश्चिमी समोआ, हांगकांग, पापुआ न्यू गिनी, फिजी, अदन के ट्रस्ट क्षेत्र.

पारस्परिक क्षेत्र (reciprocating territory) और सुपीरियर न्यायालय क्या होते हैं?

“पारस्परिक क्षेत्र” का अर्थ भारत के बाहर स्थित वह देश अथवा क्षेत्र होता है जिसे भारत सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना निर्गत कर एक पारस्परिक क्षेत्र घोषित करती. सुपीरियर न्यायालय उन न्यायालयों को कहते हैं जो ऐसी अधिसूचना में सुपीरियर न्यायालयों के रूप में वर्णित होते हैं.

इस अधिसूचना के फलस्वरूप संयुक्त अरब अमीरात के किसी सुपीरियर न्यायालय द्वारा पारित आदेश भारत में लागू हो सकते हैं. इसके लिए सम्बंधित व्यक्ति को आदेश की एक प्रति भारत के जिला न्यायालय में जमा करनी होगी.

नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908 का अनुभाग 44 क्या कहता है?

CPC का अनुभाग 44A पारस्परिक देश के कार्यालयों के द्वारा पारित आदेश के कार्यान्वयन से सम्बंधित है. अनुभाग 44A (1) प्रावधान करता है कि किसी पारस्परिक क्षेत्र के सुपीरियर न्यायालय द्वारा पारित आदेश भारत में कार्यान्वित हो सकते हैं. इसके लिए भारत के किसी जिला न्यायलय में उस आदेश की एक अभिप्रमाणित प्रति जमा करनी होगी. वह जिला न्यायालय उस आदेश को अपने ही द्वारा पारित आदेश के रूप में मान्यता देगा.

कौन-से मामले इस प्रावधान के अंतर्गत नहीं आते हैं?

  • नागरिक प्रक्रिया संहिता का अनुभाग 44 केवल उन आदेशों तक ही सीमित होता है जिसमें “धन के भुगतान का विषय” होता है. इसमें वह धनराशि नहीं आती है जो कर, प्रभार, अर्थदंड आदि से सम्बंधित होती है.
  • इसमें पंचाट द्वारा दिए गये निर्णय भी शामिल नहीं होते हैं.

पारस्परिक क्षेत्र घोषणा का महत्त्व

विश्वास किया जाता है कि भारत सरकार के द्वारा संयुक्त अरब अमीरात को पारस्परिक क्षेत्र घोषित करने से दोनों देशों के बीच न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों के कार्यान्वयन में लगने वाला समय घट जाएगा. साथ ही यदि कोई प्रवासी भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में किसी व्यवहार मामले में दण्डित होता है तो वह भाग कर भारत में आकर सुरक्षित नहीं रह पायेगा.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : e-technology in the aid of farmers.

Topic : National Agriculture Market

संदर्भ

पिछले दिनों पंजाब मंडी बोर्ड ने पूरे राज्य की मंडियों में राष्ट्रीय कृषि बाजार (National Agriculture Market – e-NAM) के विषय में जागरूकता शिविरों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सेमिनारों का आयोजन किया.

e-NAM क्या है?

e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाजार) कृषि उत्पादों के लिए एक ऑनलाइन वाणिज्य मंच है जिसका उद्देश्य किसानों, व्यापारियों और क्रेताओं को ऑनलाइन वाणिज्य सुविधा प्रदान करना और बाजार की ऐसी सुचारू व्यवस्था देना है जिसमें कृषि उत्पादों के लिए बेहतर दाम मिल सकें.

e-NAM का अनावरण भारत सरकारने 2015 में किया था और क्रमबद्ध रूप से विस्तार होते-होते दिसम्बर 31, 2019 तक इसका विस्तार देश की 585 मंडियों तक हो गया.

e-NAM के लाभ

  • इससे किसानों को कृषि उत्पादों की विक्री के लिए एक से अधिक विकल्प मिल जाते हैं.
  • किसान की पहुँच सीधे गोदाम तक हो जाती है जिससे उसे मंडी तक उत्पाद पहुँचाने के लिए परिवहन की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती है.
  • मंडी और बाजार के स्थानीय व्यापारियों को e-NAM के माध्यम से द्वितीयक वाणिज्य के लिए एक अधिक बड़े राष्ट्रीय बाजार तक पहुँच प्राप्त हो जाती है.
  • e-NAM मंच के माध्यम से थोक विक्रेताओं, प्रसंस्कर्ताओं, निर्यातकों आदि को स्थानीय मंडी/बाजार में प्रत्यक्ष प्रतिभागिता करने का अवसर मिल जाता है जिस कारण बिचौलियों का खर्च घट जाता है.
  • भविष्य में धीरे-धीरे NAM के अन्दर पूरे देश की सभी बड़ी मंडियाँ आ जाएंगी जिसके फलस्वरूप लाइसेंस देने, शुल्क लगाने और उत्पादों को इधर-उधर ले जाने की प्रक्रियाएँ समरूप हो जाएँगी.
  • NAM से प्रमुख कृषि वस्तुओं के लिए एक वैल्यू चैन देश-भर में उभर कर सामने आ सकता है और साथ ही वैज्ञानिक ढंग से वस्तुओं के भंडारण और परिवहन को बढ़ावा भी मिल सकता है.

e-NAM आवश्यक क्यों है?

  1. वर्तमान में देश कई बाजार क्षेत्रों में बंटा हुआ है.
  2. कृषि विपणन से सम्बंधित अवसंरचनाओं की गुणवत्ता अच्छी नहीं है और तकनीक का प्रयोग भी कम होता है.
  3. पारम्परिक मंडी प्रणाली में किसानों को अपनी फसल के लिए बहुत कम दाम मिल पाता है क्योंकि उनको बाजार में कई बिचौलियों से होकर पहुंचना पड़ता है. इससे उत्पाद की लागत बढ़ जाती है.
  4. वर्तमान प्रणाली में किसान को अनेक प्रकार के करों, लेवियों और लाइसेंसों की समस्या से दो-चार होना पड़ता है.

Prelims Vishesh

Steppe eagle :-

  • पिछले दिनों विजयवाड़ा में स्टेपी ईगल देखा गया.
  • अन्य ईगलों की भाँति इसका परिवार Accipitridae कहलाता है और इसका वैज्ञानिक नाम Aquila nipalensis है.
  • इसके प्रजनन केंद्र रोमानिया से दक्षिणी रूस और केन्द्रीय एशियाई स्टेपिज से होते हुए मंगोलिया पाए जाते हैं.
  • रोमानिया को छोड़कर ऐसे ईगल शरदकाल में अफ्रीका में रहते हैं.
  • इस समय रोमानिया के ईगल भारत आ जाते हैं.
  • कज़ाकिस्तान के झंडे में स्टेपी ईगल का चित्र बना रहता है. मिश्र के झंडे में भी यह देखा जाता है क्योंकि यह वहाँ का राष्ट्रीय जीव है.

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