Sansar डेली करंट अफेयर्स, 22 August 2020

Sansar LochanSansar DCALeave a Comment

Sansar Daily Current Affairs, 22 August 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Prevention of Cruelty to Animals Act

संदर्भ

भारत सरकार पशु क्रूरता कानून को और सख्त बनाने पर विचार कर रही है. इससे पशु क्रूरता के लिए 50 रुपये का जुर्माना जल्द ही अतीत की बात हो सकती है. हाल ही में कुछ सांसदों ने भी केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्री को पत्र लिखकर मौजूदा पशु क्रूरता से संबन्धित कानून को कठोर बनाने और जुर्माना बढ़ाने की मांग की है.

भारतीय संविधान द्वारा पशुओं की रक्षा

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51(क) के अंतर्गत मूल कर्तव्य दिए गए हैं. इन मूल कर्तव्यों में प्रत्येक नागरिक पर कुछ कर्तव्य रखे गए हैं, ये कर्तव्य भारत राष्ट्र के प्रति एक नागरिक के कर्तव्य हैं.
  • हालांकि ये कर्तव्य न्यायालय द्वारा प्रवर्तन नहीं कराए जा सकते, परंतु इन कर्तव्य से प्रेरणा लेकर भारत की संसद नवीन विधानों की रचना अवश्य कर सकती है, जो विधान इन कर्तव्यों को पूरा करने में सहायक हों.
  • भारत के संविधान में मूल कर्त्तव्य एक महत्वपूर्ण भाग है. अनुच्छेद 51(क) (छ) में एक प्रावधान किया गया है जिसके अंतर्गत प्राकृतिक पर्यावरण जिसमें झील,नदी, वन्यजीव की रक्षा करने का कर्तव्य दिया गया है अर्थात् संविधान में स्पष्ट है कि हमें वन्यजीवों की रक्षा करनी है, उनका संवर्धन भी करना है. प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव भी रखना है.

संविधान में दी गयी इस व्यवस्था से प्रेरणा लेकर भारत की संसद में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 , वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 और स्लाटर हाउस रूल्स 2001 का निर्माण किया है.

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960

  • यह पशुओं को अनावश्यक पीड़ा पहुँचाने से रोकने के लिए अधिनियमित किया गया है.
  • इस अधिनियम के तहत पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय पशु कल्याण बोर्ड की स्थापना की गई है.
  • यह पशु बाजारों, डॉग ब्रीडर्स, एक्वेरियम और पालतू मछलियों की दुकान के मालिकों को नियंत्रित करता है.
  • इस अधिनियम के तहत जानवरों से की जाने वाली निर्दयता को प्रतिबंधित किया गया है. इसमें शामिल हैं:-
  1. पशुओं की पिटाई इत्यादि के माध्यम से उन्हें दर्द पहुँचाना
  2. उन्हें स्वेच्छा से तथा अनुचित रूप से दवाएँ देना
  3. पशुओं को अनुपयुक्त तरीके से पिंज़रे में रखने, ले जाने तथा हस्तांतरित करने के ज़रिए उन्हें दर्द और कष्ट पहुँचाना
  4. किसी भी जानवर का अंग-भंग करना इत्यादि.

संवैधानिक स्थिति

  • इस विवाद का इतिहास भारतीय गणराज्य की स्थापना के साथ ही प्रारम्भ हुआ था, जहाँ गो-हत्या का विषय बहस के सबसे भयावह और विवादास्पद विषयों में से एक था.
  • गो-हत्या पर प्रतिबन्ध को मौलिक अधिकारों का हिस्सा बनाने की मांग किये जाने पर संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी ने भी इस पर अपनी सहमति व्यक्त की थी.
  • इसे अनुच्छेद-48 के अंतर्गत एक नीति-निदेशक तत्त्व के रूप में शामिल किया गया है, जिसमें कहा गया है कि राज्य “आधुनिक और वैज्ञानिक आधारों पर कृषि और पशुपालन प्रणालियों” को संगठित करने का प्रयास करेगा तथा विशेष रूप से गायों एवं बछड़ों के तथा अन्य दुधारू एवं वाहक पशुओं की नस्लों के संरक्षण और सुधार करने और उनके वध को प्रतिबंधित करने के लिए कदम उठाएगा.
  • यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा किए गए पूर्ण प्रतिबंध के प्रयासों पर विभिन्न विरोधाभासी निर्णय दिए हैं –
  1. 1958 के एम एच कुरैशी बनाम बिहार राज्य- वाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूध, ब्रीडिंग या भारवाही जानवरों के रूप में कार्य करने में सक्षम ना रहने के बाद मादा भैंसों, बैलों या साँड़ों (मवेशी या भैंसे) को मारने पर पूरी तरह से प्रतिबंध को सामान्य जनता के हित में युक्तियुक्त नहीं माना जा सकता.
  2. 1996 में हसमतुल्ला बनाम मध्य प्रदेश राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बैल और साँड़ों की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध कसाइयों के मौलिक अधिकारों पर एक अनुचित प्रतिबंध लगाएगा. हालांकि गायों, गाय के बछड़ों और भैंसों के कटड़े के वध पर प्रतिबंध बरकरार रखा गया.
  3. 2005 में गुजरात राज्य बनाम मिर्जापुर मोती कुरैशी कस्साब जमात– के मामले में न्यायालय ने कहा कि कई वर्षों से दुधारू या भारवाही मवेशियों की प्रजाति को “गायों या बछड़ों” की परिभाषा के अन्तर्गत शामिल किया जाना चाहिए. इस प्रकार कोर्ट ने एम एच कुरैशी मामले में दिए गए अपने निर्णय को आंशिक रूप से खारिज कर दिया.
मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

मानवों के प्रभुत्व वाले परिवेशों में प्रवेश करने वाले वन्यजीवों के साथ हम कैसा व्यवहार करते हैं, इससे सम्बंधित वैधानिक एवं नैतिक मामलों का परीक्षण करें.

Examine the legal and ethical issues related to how we deal with wild animals which venture into human-dominated landscapes. 


GS Paper 2 Source : The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation. Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : Sin Tax

संदर्भ

सॉफ्ट ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों की संस्था इंडिया बेवरेज एसोसिएशन (Indian Beverage Association-IBA) ने कोला (Cola) को सिन टैक्स (sin tax) श्रेणी से हटाने की माँग की है.

  • आईबीए ने इस बारे में जीएसटी काउंसिल और वित्त मंत्रालय को पत्र लिखा है ताकि जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में सिन टैक्स (sin tax) को हटाने पर विचार किया जा सके .
  • गौरतलब है कि आईबीए में कोका-कोला, पेप्सिको, पार्ले एग्रो और रेड बुल जैसी बड़ी- बड़ी कंपनियां शामिल हैं.
  • वर्तमान में देश में नॉन अल्कोहॉलिक बेवरेज सेक्टर लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का है. इसमें सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेज्ड ड्रिंकिग वाटर, जूस आदि सम्मिलित हैं.

सिन टैक्स (sin tax) क्या है?

  • सिन टैक्स (sin tax), एक प्रकार का उत्पाद कर (excise tax) है जो विशेष रूप से समाज और व्यक्तियों के लिए हानिकारक वस्तुओं पर लगाया जाता है, उदाहरणार्थ – शराब, तम्बाकू, कैंडी (candies), ड्रग्स, शीतल पेय, फास्ट फूड, कॉफी, चीनी, जुआ आदि.
  • सिन टैक्स (sin tax) को अनिष्ट कर और पाप कर के नामों से भी जाना जाता है.
  • अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था ‘जीएसटी’ (GST) में शराब, तंबाकू, कोला (Cola) आदि जैसे समाज के नजरिये से हानिकारक या स्वास्थ्य के हिसाब से नुकसानदेह उत्पादों पर सिन टैक्स (sin tax) लगाया जाता है.
  • साधारण जनता को इस कर सेकोई आपत्ति नहीं होती क्योंकि यह अप्रत्यक्ष कर होता है और साथ ही यह उन्हीं उत्पादों पर लागू होता जिनको कोई-कोई लोग ही प्रयोग में लाते हैं.

GST क्या है?

  • जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर), भारत में लागू एक अहम अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है जिसे 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया था.
  • इस कर व्यवस्था में केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा अलग अलग दरों पर लगाए जाने वाले तमाम करों को हटाकर पूरे देश के लिए एक ही अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली लागू की गई है.
  • भारतीय संविधान में इस कर व्यवस्था को लागू करने के लिए 101वां संशोधन किया गया था.
  • सरकार व कई अर्थशास्त्रियों ने इसे आज़ादी के बाद सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताया है.

हमें GST परिषद् क्यों चाहिए?

  • GST परिषद् वह प्रमुख निर्णायक निकाय है जो GST से सम्बंधित सभी बड़े फैसले करती है.
  • GST परिषद् के दायरे में ये सभी चीजें आती हैं – कर की दर, कर में छूट, प्रपत्रों को भरने की अंतिम तिथि, कराधान कानून और कर भरने की अंतिम समय-सीमा. इन सब के लिए परिषद् कुछ राज्यों के लिए विशेष दरों और प्रावधानों को ध्यान में रखती है.
  • GST परिषद् का सर्वप्रधान दायित्व यह पक्का करना होता है कि पूरे देश में वस्तुओं और सेवाओं के लिए करों की दर समरूप हो.

GST परिषद् की संरचना

संविधान का अनुच्छेद 279 (1) कहता है कि अनुच्छेद 279A के आरम्भ होने के 60 दिनों के भीतर राष्ट्रपति GST परिषद् का गठन करेगा.

परिषद् की बनावट

अनुच्छेद 279A के अनुसार, परिषद् केंद्र और राज्यों का एक संयुक्त मंच होगा जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे –

  • केन्द्रीय वित्त मंत्री परिषद् के अध्यक्ष.
  • केन्द्रीय राजस्व वित्त राज्य मंत्री एक सदस्य के रूप में.
  • इस परिषद् में प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा नामित वित्त अथवा कर के प्रभार वाले मंत्री अथवा अन्य कोई भी मंत्री इसके सदस्य होंगे.

GST परिषद् की अनुशंसाएँ

अनुच्छेद 279A (4) में प्रावधान है कि GST परिषद् GST से जुड़े बड़े-बड़े विषयों पर केंद्र और राज्य को अनुशंसाएँ करेगी, जैसे – किस वस्तु अथवा सेवा पर GST लगेगा और किसपर इससे छूट दी जायेगी.

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

पाप कर क्या है और पाप वस्तुएँ क्या होती हैं? चर्चा करें.

What is a sin tax and what are sin goods? Discuss.


GS Paper 3 Source : The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Inclusive growth and issues arising from it.

Topic : Unified Payments Interface

संदर्भ

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ”गूगल पे” द्वारा नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाने वाली याचिका पर केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जवाब मांगा है.

याचिका से संबन्धित जानकारी

  • याचिका में गूगल पे पर आरबीआई के डाटा स्थानीयकरण, भंडारण और साझा करने के मानकों संबंधी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है.
  • याचिका में गूगल इंडिया डिजिटल सर्विस को यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) प्रक्रिया के तहत अपने ऐप पर डाटा (विवरण) का भंडारण नहीं करने और इसे किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं करने संबंधी एक शपथपत्र दायर करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया.

UPI क्या है?

समेकित भुगतान इंटरफ़ेस (UPI) NPCI और RBI द्वारा निर्मित एक प्रणाली है जो एक नकद रहित प्रणाली का उपयोग करते हुए धन का तत्काल स्थानान्तरण करने में सहायक होती है. UPI का उपयोग करने के लिए एक स्मार्टफ़ोन और एक बैंकिंग एप की आवश्यकता होती है जिसके माध्यम से धन को तत्काल भेजा या पाया जा सकता है अथवा व्यापारी खुदरा खरीद के लिए भुगतान कर सकता है. आगे चलकर, UPI संभवतः आज के NEFT, RTGS और IMPS का स्थान ग्रहण कर लेगी.

यह कैसे काम करता है?

IMPS पर आधारित UPI के माध्यम से बैंक खाते से तुरंत और प्रत्यक्ष रूप से भुगतान हो जाता है. इसके लिए वॉलेट में पहले से पैसा भरना आवश्यक नहीं होता है. इसके माध्यम से एक से अधिक व्यवसाइयों को कार्ड का ब्यौरा टाइप किये बिना अथवा नेट बैंकिंग का पासवर्ड लिखे बिना भुगतान किया जाता है. UPI 2.0 हाल ही में भारत के राष्ट्रीय भुगतान निगम ने (National Payments Corporation of India – NPCI) UPI 2.0 को आरम्भ किया है जो UPI अर्थात् समेकित भुगतान इंटरफ़ेस का एक उत्क्रमित एवं नवीकृत संस्करण है. UPI के इस नवीनतम संस्करण में 4 नई विशेषताएँ हैं जिनसे यह उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक एवं सुरक्षित बन गया है. अब उपभोक्ता अपने ओवरड्राफ्ट खाते को UPI से जोड़ सकेंगे. साथ ही इसमें एककालिक मेनडेट की सुविधा होगी तथा बाद की तिथि में भुगतान करने के लिए पहले ही प्राधिकृत करने की सुविधा भी होगी. इस UPI की चौथी विशेषता यह है कि उपभोक्ता व्यवसायी के द्वारा भेजे गये invoice को भुगतान करने के पहले जाँच सकेंगे.

UPI अनूठा कैसे है?

  • इसमें 365 दिन 24×7 अवधि में मोबाइल से धन तुरंत हस्तांतरित हो जाता है.
  • यह ऐसा एकल मोबाइल ऐप है जिसकी पहुँच अलग-अलग बैंक खातों तक होती है.
  • इसमें एक क्लिक से भुगतान हो जाता है.
  • ग्राहक को कार्ड नंबर, खाता नंबर, IFSC जैसे विवरण नहीं देने होते हैं.
  • इसके माध्यम से दोस्तों के साथ बिल साझा हो जाता है.
  • UPI ATM जाने से बचाता है और घर बैठे काम हो जाता है.
  • इससे मर्चेंट और इन-ऐप भुगतान भी हो जाता है.

UPI के प्रतिभागी

  • भुगतान करने वाला PSP
  • भुगतान पाने वाला PSP
  • पैसा भेजने वाला बैंक
  • पैसा पाने वाला बैंक
  • NPCI
  • बैंक खाता धारक
  • व्यापारी

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI)

  • भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI)भारत में सभी खुदरा भुगतान प्रणाली के लिए एकछत्र संगठन है.
  • दस बैंक इसके प्रोमोटर हैं.
  • इसे सफलतापूर्वक RuPay नामक घरलू कार्ड भुगतान नेटवर्क ने विकसित किया है जिसके कारण विदेशी कार्डों पर निर्भरता घटी है
  • निगम का प्रमुख उद्देश्य नकद रहित लेन-देन को बढ़ावा देना है.
  • NPCI को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय बैंक संघ (IBA) के मार्गदर्शन और समर्थन के साथ स्थापित किया गया था.
मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) का अनावरण किस प्रकार नकद-रहित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने में सहायक होगापरीक्षण करें. साथ ही UPI के उद्देश्यों को साकार करने में आने वाली बाधाओं की भी चर्चा करें. 

How the launch of Unified Payment Interface (UPI) will help in moving towards a cashless economy? Examine. Also discuss the impediments in realising the objectives of UPI.


GS Paper 3 Source : The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Awareness in the fields of IT, Space, Computers, robotics, nano-technology, bio-technology and issues relating to intellectual property rights.

Topic : DNA TECHNOLOGY BILL

संदर्भ

विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा है कि जाति आधारित प्रोफाइलिंग के लिए डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक में दिये गए प्रावधानों का दुरुपयोग किया जा सकता है. इस विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता जयराम रमेश कर रहे है.

पृष्ठभूमि

व्यक्ति की पहचान करने के लिए डीएनए तकनीक के प्रयोग को नियंत्रित करने वाले डीएनए प्रौद्योगिकी विनियमन विधेयक को जाँच के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजा गया था. पिछले मानसून सत्र के दौरान जुलाई में यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है. समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जनता से इस विधेयक पर सुझाव माँगे थे.

समिति द्वारा ड्राफ्ट रिपोर्ट में प्रकट की गयी चिंता

  • डीएनए प्रोफाइल किसी व्यक्ति की अत्यंत संवेदनशील जानकारी जैसे कि वंशावली, त्वचा का रंग, व्यवहार, बीमारी, स्वास्थ्य की स्थिति और रोगों जैसी जाकारी का दुरुपयोग व्यक्तियों और उनके परिवारों को लक्षित करने के साथ इसका उपयोग किसी विशेष जाति / समुदाय को आपराधिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए भी किया जा सकता है.
  • विधेयक में गोपनीयता और अन्य सुरक्षा उपायों की उपेक्षा की गई है.
  • भविष्य की जांच के लिए संदिग्धों, अपराधियों, पीड़ितों और उनके रिश्तेदारों के डीएनए प्रोफाइल को संग्रहीत करने का प्रस्ताव है जिसका कोई कानूनी या नैतिक औचित्य नहीं है.
  • समिति ने सिफारिश की है कि जैविक नमूनों को नष्ट करने और डेटाबेस से डीएनए प्रोफाइल को हटाने के प्रस्तावों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.
  • विधेयक अपराध स्थल पर पाए गए डीएनए को संरक्षित करने की अनुमति देता है, भले ही अपराधी को दोषी ठहराया गया हो. सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि व्यक्ति निर्दोष पाया गया है तो उसका डीएनए प्रोफाइल डेटा बैंक से तुरंत हटाया जाना चाहिए.
  • डीएनए प्रोफाइल को डेटा बैंकों में संग्रहीत जाना और डीएनए प्रोफाइल के भंडारण, निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और किसी सार्वजनिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता है. मजबूत डेटा संरक्षण कानून के अभाव में इसके दुरूपयोग होने की अत्यधिक सम्भावना है.

विधेयक की महत्ता

आज पूरे विश्व में अपराधों को सुलझाने के लिए DNA पर आधारित तकनीक की उपयोगिता सर्वमान्य है. इसलिए नए विधेयक का उद्देश्य DNA पर आधारित तकनीकों का प्रयोग कर देश की न्यायव्यवस्था को सुदृढ़ करना.

विधेयक के मुख्य तथ्य

  1. इस विधेयक का उद्देश्य है कि न्यायालय की प्रक्रिया में DNA report को प्रमाण के रूप में मान्यता मिले.
  2. विधेयक में यह प्रस्ताव है कि अपराध-पीड़ितों, संदिग्ध अपराधियों, विचाराधीन बंदियों, खोये हुए व्यक्तियों, लावारिस लाशों की पहचान आदि के लिए राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय DNA डेटा बैंक स्थापित किये जायेंगे.
  3. विधेयक में यह प्रस्ताव है कि यदि कोई DNA data ऐसे व्यक्ति को दे दे जिसके लिए वह अधिकारी नहीं हो तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास की सजा एवं 1 लाख रु. के दंड का जुर्माना लगेगा. यही सजा और जुर्माना उस व्यक्ति को भी लगेगा जो अवैध रूप से DNA data प्राप्त करेगा.
  4. प्रस्ताव है कि DNA प्रोफाइल, DNA नमूने एवं DNA रिकॉर्ड समेत सभी DNA data मात्र व्यक्ति की पहचान के लिए प्रयुक्त किये जायेंगे नाकि किसी अन्य उद्देश्य के लिए.
  5. विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि DNA प्रयोगशालाओं को मान्यता देने और उन्हें विनियमित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ की जायेंगी और इसके लिए एक DNA नियामक बोर्ड की स्थापना होगी.

लाभ

  • इस कानून के बनने के बाद DNA के नमूने लेना और DNA Bank को स्थापित करना आसान हो जाएगा.
  • DNA नमूनों का गलत इस्तेमाल रोका जा सकेगा.
  • गलत इस्तेमाल करने वालों को सजा दिलाई जा सकेगी.
  • इसके साथ ही यह कानून लावारिश लाशों की पहचान करने में मददगार साबित होगा.
  • यौन हमले जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में अपराधियों की पहचान की जा सकेगी चाहे यह मामला कितना भी पुराना क्यों न हो!
  • आपदा में शिकार हुए लोगों की पहचान की जा सकेगी.
  • गुमशुदा लोगों की तलाश, अपराध नियंत्रण और अपराधियों की पहचान की जा सकेगी.’

DNA तकनीक का महत्त्व

  • DNA विश्लेषण एक ऐसी अत्यंत उपयोगी और सटीक तकनीक है जिससे किसी व्यक्ति के DNA नमूने से उसकी पहचान हो सकती है अथवा दो व्यक्तियों के बीच जैविक रिश्ते का निर्णय हो सकता है.
  • अपराध के स्थल से उठाये गये बाल के नमूने अथवा कपड़ों में लगे रक्त के धब्बों से किसी संदिग्ध व्यक्ति का मिलान किया जा सकता है और अपराधी की पहचान हो सकती है. इस काम में न्यायालय आजकल अत्यंत रूचि ले रहे हैं.
  • DNA नमूने न केवल यह बतलाते हैं कि आदमी कैसा दिखता है अथवा उसकी आँखों या चमड़े का रंग क्या है अपितु यह भी सूचित करता है कि उसे किस बात की एलर्जी है और उसे कौन-कौन रोग लग सकते हैं. इसलिए, DNA विश्लेषण से प्राप्त सूचना का दुरूपयोग भी हो सकता है.
  • DNA तकनीक से न केवल न्याय में गति आएगी, अपितु सजा देने की दर में बढ़ोतरी भी होगी. विदित हो कि वर्तमान में 2016 के आँकड़ों में अनुसार 30% मामलों में ही दंड दिया जाता है.
मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक कई क्षेत्रों के लिए अतिशय लाभकारी हो सकता है, परन्तु इसमें सुरक्षा का अभाव रहेगा. आलोचनात्मक विश्लेषण करें. 

The utility of the DNA Technology (Use and Application) Regulation Bill could be of enormous abet in many areas yet bereft of safeguards. Critically analyse.


Prelims Vishesh

Indian Association of Parliamentariants on Population and Development (IAPPD) :-

जनसंख्या एवं विकास से सम्बंधित भारतीय सांसद संघ (IAPPD) एक राष्ट्रीय स्तर का गैर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना 1978 में जनसंख्या की वृद्धि की गति को मद्धिम करना था क्योंकि जब तक जनसंख्या और विकास में समुचित संतुलन नहीं हो तब तक लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो सकता.

Nuakhai Juhar :-

नुआखाई (शाब्दिक अर्थ : नया खाना) जुहार, जिसे नुआखाई परब अथवा नुआखाई भेटघाट भी कहते हैं, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आस-पास के राज्यों का एक पर्व है जिसमें नई फसल के आने पर अनाज की पूजा होती है और नए अन्न को ओडिशा के संबलपुर जिले की प्रसिद्ध मातृदेवी साम्लेश्वरी देवी को चढ़ाया जाता है.

Council for transgenders :-

  • भारत सरकार ने ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन राइट्स) एक्ट, 2019 के अंतर्गत राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद् का गठन किया है जिसका मुख्य काम केंद्र सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के विषय में नीतियाँ, कार्यक्रम, कानून एवं परियोजनाओं के निर्माण में परामर्श देना होगा.
  • इस परिषद् के अध्यक्ष केन्द्रीय सामाजिक न्याय मंत्री होंगे और इसमें केंद्र के 10 विभागों के प्रतिनिधि तथा साथ ही पाँच राज्यों और ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों का प्रतिनिधित्व भी होगा.

What are flavonoids? :-

  • पिछले दिनों अगरकर अनुसंधान संस्थान (ARI) के वैज्ञानिकों ने यक्ष्मा और चिकुनगुनिया के उपचार के लिए फ्लेवोनाइड के सिंथेटिक पद्धति से निर्माण में सफलता प्राप्त की.
  • ज्ञातव्य है की फ्लेवोनाइड वे पोषक तत्त्व हैं जो रंगीन फलों और तरकारियों में पाए जाते हैं और जो अच्छे एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण जलन को दूर करने की क्षमता रखते हैं. साथ ही प्रतिरोधकता बढ़ाने में ये उपयोगी होते हैं.

Click here to read Sansar Daily Current Affairs – Sansar DCA

July, 2020 Sansar DCA is available Now, Click to Download

Books to buy

Leave a Reply

Your email address will not be published.