Sansar डेली करंट अफेयर्स, 21 February 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 21 February 2019


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : Military Space Force

संदर्भ

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अन्तरिक्ष सैन्य बल बनाने के लिए अन्तरिक्ष नीति-निर्देश – 4 (Space Policy Directive-4 (SPD-4) नामक आदेश पर हस्ताक्षर किये हैं.

  • इस नीति-निर्देश के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग सेना की एक अलग शाखा स्थापित करेगा जो वर्तमान में संचालित स्थल, नौ, वायु, सामुद्रिक और तटरक्षक सेनाओं के बाद देश की छठी सेना होगी.
  • अभी इस नीति-निर्देश पर अमेरिकी कांग्रेस का अनुमोदन लिया जाना शेष है.

अन्तरिक्ष सैन्य बल

  • अमेरिकी अन्तरिक्ष सैन्य बल का मुख्य लक्ष्य अन्तरिक्ष में अमेरिका के वर्चस्व को सुनिश्चित करना है.
  • अभी यह अन्तरिक्ष सेना नौसेना के अंदर ही होगी जिस प्रकार सामुद्रिक सेना अमेरिका के नौसेना का एक भाग है.
  • अन्तरिक्ष सेना अपने सैनिकों का संगठन करेगी तथा इसके लिए आवश्यक शाश्त्र, उपकरण आदि की व्यवस्था करेगी.

पृष्ठभूमि

अमेरिका जल, थल और आकाश के बाद अन्तरिक्ष में भी अपना सैन्य-दल तैनात करने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2020 तक ‘यूएस स्पेस फोर्स’ बनाने का फैसला किया है. यह फोर्स अमेरिका की बाकी सेनाओं से अलग होगी. विदित हो कि US Space Force अमेरिका की छठी सैन्य सेवा होगी.

क्यों पड़ी जरूरत?

Space Force के जरिए अमेरिका अपने प्रतिद्वंद्वियों चीन और रूस की मंशा पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है. ज्ञातव्य है कि 2007 में चीन ने अपने ही उपग्रहों को अन्तरिक्ष में नष्ट कर दिया था. रूस ने भी मिसाइल का सफल परीक्षण किया है जिसका उपयोग उपग्रहों को ट्रैक और नष्ट करने के लिए किया जा सकता है. इसलिए अमेरिका को डर है कि अब ये देश उसके उपग्रहों को भी जब चाहे नष्ट कर सकते हैं इसलिए USA को अब एक स्पेस फाॅर्स की जरूरत महसूस हो रही है.

क्या अंतरिक्ष में सैन्य कार्रवाई कानून के अनुकूल होगी?

  • अमेरिका, रूस और चीन समेत सभी देशों ने 1967 की आउटर अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) पर हस्ताक्षर किए थे.
  • समझौते के अनुसार कोई भी देश अंतरिक्ष में क्षेत्राधिकार नहीं दिखा सकता.
  • यह समझौता किसी भी देश को पृथ्वी की कक्षा या उससे बाहर परमाणु हथियार या हथियार रखने से रोकता है.
  • चंद्रमा और मंगल जैसे ग्रहों, जहाँ मानव की पहुँच हो सकती है, के संदर्भ में यह संधि और भी कठोर है. इन ग्रहों में कोई भी देश सैन्य अड्डों का निर्माण नहीं कर सकता है या किसी भी प्रकार का सैन्य संचालन नहीं कर सकता है या किसी अन्य प्रकार के पारंपरिक हथियारों का परीक्षण नहीं कर सकता है.
  • पर साथ ही साथ यह संधि बैलिस्टिक मिसाइलों के अंतर-महाद्वीपीय प्रयोग को प्रतिबंधितनहीं करती है जो लक्ष्य को भेदने के लिए पृथ्वी की कक्षा से बाहर भी चले जाते हैं.
  • इस संधि की इस चूक का लाभ उठाकर कोई देश अन्तरिक्ष का युद्ध के लिए उपयोग कर सकता है.

सैन्य बल की स्थापना पर उठाये जा रहे सवाल

  • पहले से चल रही पाँच-पाँच सेनाओं के अलावे एक छठी सेना बनाने से अमेरिकी रक्षा विभाग की संगठनात्मक चुनौतियाँ बढ़ जाएँगी.
  • नई सेना को सुदृढ़ करने के प्रयास से अन्तरिक्ष में भेजे जाने वाले असैन्य अभियानों में कटौती करनी पड़ सकती है.
  • नई सेना के कारण भविष्य में बजटीय आवंटन बहुत अधिक बढ़ सकता है.
  • अन्तरिक्ष सेना होने से संयुक्त सैनिक कार्रवाई के समय अमेरिकी प्रयासों को धक्का लग सकता है.
  • यद्यपि अन्तरिक्षयानों को ईंधन की खपत की दृष्टि से कम खर्च वाला बनाने का प्रयास चल रहा है, परन्तु इस काम में अभी भी ऊर्जा की भयंकर आवश्यकता होती है. अन्तरिक्ष सैन्य बल स्थापित हो जाने के बाद इस खर्च में बहुत बड़ा उछाल आएगा.
  • अन्तरिक्ष में अधिक से अधिक अन्तरिक्षयान छोड़े जाने के कारण उनका मलबा बढ़ने की भी आशंका है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Norms relaxed for Start- ups

संदर्भ

भारत सरकार ने स्टार्ट-अप की परिभाषा के अंतर्गत कुछ मानकों को शिथिल कर दिया है. ऐसा सरकार की उस सोच के अनुसार किया गया है जिसमें उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ाया जाना है और भारत में व्यवसाय खोलना सुगम बनाया जाना है.

किये गये बदलाव

  • आयकर अधिनियम 1961 के अंतर्गत एंजेल निवेशकों द्वारा किये गये निवेश की सीमा को 10 करोड़ रु. से बढ़ाकर 25 करोड़ रु. कर दिया गया है.
  • निगमित/पंजीकृत होने के बाद कोई भी इकाई अगले दस वर्षों तक स्टार्ट-अप मानी जायेगी जबकि पहले यह अवधि सात वर्ष थी.
  • वर्तमान में 25 करोड़ रु. तक के टर्नओवर वाली कम्पनी स्टार्ट-अप कहलाती थी, परन्तु अब 100 करोड़ रु. तक के टर्नओवर वाली इकाई स्टार्ट-अप कहलाएगी.

प्रस्तावित छूटें

  • स्टार्ट-अप कम्पनी भवन अथवा भूमि में तभी निवेश कर सकती है जब ये व्यवसाय के लिए हों अथवा इनका उपयोग किराए के लिए हों अथवा इन्हें स्टॉक एंड ट्रेड के रूप में रखा जाए.
  • स्टार्ट-अप कंपनी ऋण अथवा अग्रिम तभी दे सकती है जब ये व्यवसाय के लिए दिए जाएँ.
  • कोई स्टार्ट कंपनी किसी दूसरी कम्पनी में पूँजी नहीं लगा सकती है. वह शेयर, कार और किसी ऐसे परिवहन में निवेश नहीं कर सकती है जिसपर 10 लाख से अधिक का खर्च बैठता है.

GS Paper 2 Source: Indian Express

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Topic : US National Emergency

संदर्भ

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने औपचारिक रूप से अमेरिका-मेक्सिको सीमा को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है. ऐसा होने के पश्चात् अब उन्हें अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर दीवार खड़ी करने की अपनी अतिप्रिय योजना के लिए संघीय धनराशि लगाने और उसके नियंत्रण पर कांग्रेस की सांविधानिक शक्तियों को दरकिनार करने में सुविधा होगी.

अमेरिकी राष्ट्रपति का यह तर्क रहा है कि मेक्सिको सीमा से आने वाले शरणार्थियों के कारण अपराध और नशीले द्रव्य के प्रयोग में भयंकर वृद्धि हो रही है और इसलिए इस समस्या से निबटने के लिए सीमा पर दीवार बनाना आवश्यक है. इसी परिप्रेक्ष्य में उन्होंने यह आपातकाल घोषित किया है.

यू.एस. राष्ट्रीय आपातकाल क्या है?

  • 1976 में अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रीय आपातकाल अधिनियम पारित किया था जिसके अनुसार राष्ट्रपति यदि उचित समझे तो राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर सकता है. इस अधिनियम में आपातकाल की कोई विशिष्ट परिभाषा नहीं दी गई है और इसकी घोषणा को राष्ट्रपति के विवेक पर पूर्णतया छोड़ दिया गया है.
  • राष्ट्रीय आपातकाल घोषित होने पर राष्ट्रपति को दर्जनों विशेष कानूनों की सुविधा प्राप्त हो जाती है. इनमें से एक कानून यह है कि वह ऐसी धनराशि प्राप्त कर सकता है जो अन्यथा उपलब्ध नहीं हो पाती.
  • वर्तमान कानून के अनुसार आपातकालीन अधिकार एक वर्ष में समाप्त हो जाते हैं यदि राष्ट्रपति उनका नवीकरण न करे.
  • राष्ट्रीय आपातकाल अनंतकाल तक बार-बार घोषित हो सकते हैं और व्यवहार में भी ऐसा होता आया है.
  • अभी तक ऐसे आपातकाल 58 बार घोषित हुए हैं जिनमें से 31 अभी भी कारगर हैं.

आपातकाल की घोषणा के संदर्भ में न्यायालय अथवा कांग्रेस की भूमिका

यद्यपि राष्ट्रपति के द्वारा आपातकाल घोषित करने की कोई सीमा नहीं है, परन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि उसे सम्पूर्ण स्वतंत्रता मिल गयी है. यदि कोई आपातकाल से प्रत्यक्षतः प्रभावित हुआ हो तो वह इसे न्यायालय में चुनौती दे सकता है.

कांग्रेस आपातकाल की स्थिति को समाप्त करने के लिए समवर्ती संकल्प का प्रारूप तैयार कर एक नया अधिनियम बना सकती है. परन्तु सामान्यतः कांग्रेस के ऐसे संकल्प राष्ट्रपति द्वारा घोषित राष्ट्रीय आपातकाल का समर्थन ही करते हैं.


GS Paper 3 Source: PIB

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Topic : Sikaria Mega Food Park

संदर्भ

केंद्रीय राज्य मंत्री, साध्वी निरंजन ज्योति ने त्रिपुरा राज्य के सबसे बड़े मेगा फूड पार्क, सिकारिया मेगा फूड पार्क का उद्घाटन किया. यह त्रिपुरा राज्य का पहला मेगा फूड पार्क है.

मेगा फूड पार्क क्या है?

  • मेगा फूड पार्क योजना भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है.
  • इस योजना का उद्देश्य किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और खुदरा व्यवसायियों को एक मंच पर लाकर ऐसी सुविधा देना है जिससे कृषि उत्पादन से लेकर बाजार तक का सम्पर्क सुचारू हो सके. ऐसा करने से उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी तथा साथ ही फसल की बर्बादी घटेगी. इसके कारण किसानों की आय तो बढ़ेगी ही, साथ ही विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होंगे.
  • इस प्रकार का पार्क स्थापित करने के लिए भारत सरकार अधिकतम 50 करोड़ रुपये का अनुदान देती है पर इसके लिए कम से कम 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है जो अलग-थलग होकर एक ही स्थान पर हो. सरकार द्वारा परियोजना की सम्पूर्ण लागत का 50% दिया जाता है.

सञ्चालन प्रक्रिया

  • यह परियोजना धुरी और तीलियाँ मॉडल पर आधारित है. इसमें खेत के पास एक अवसंरचना तैयार की जाती है जहाँ प्राथमिक प्रसंस्करण तथा भंडारण होगा. इन अवसंरचनाओं को प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र (Primary Processing Centres – PPCs) तथा संग्रहण केंद्र (Collection Centres – CCs) का नाम दिया गया है. इनके अतिरिक्त एक केन्द्रीय प्रसंस्करण केन्द्र (Central Processing Centre – CPC) भी होगा.
  • इन प्राथमिक प्रसंस्करण केन्द्रों का काम उत्पादकों एवं प्रसंस्करणकर्ताओं के बीच सम्पर्क सूत्र स्थापित करना होगा जिससे केन्द्रीय प्रसंस्करण केन्द्रों (CPCs) को कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति होती रहे.
  • CPC में प्रसंस्करण की मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध होंगी. यहाँ पर स्थित इकाइयाँ खाद्य प्रसंस्करण का कार्य करेंगी. इस केंद्र के लिए न्यूनतम 50 एकड़ भूमि होना अनिवार्य है.
  • यह योजना माँग के अनुसार चलने वाली योजना है और इसका एक काम खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों पर पर्यावरण, सुरक्षा एवं सामाजिक मापदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करना भी है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : LOFAR telescope

संदर्भ

हाल ही में रात्रिकालीन आकाश का एक नया नक्शा प्रकाशित किया गया है. इसमें अन्य दृष्टि-उपकरणों (opticals) से पता नहीं लगने वाले प्रकाश स्रोतों को पकड़ने की क्षमता रखने वाली लोफार दूरबीन (LOFAR telescope) का प्रयोग कर लाखों ऐसी आकाशगंगाओं का पता लगाया गया है जिनसे हम पहले अनजान थे.

इस खोज से ब्रह्मांड के कुछ गहनतम रहस्य प्रकट होते हैं, जैसे – कृष्ण विवरों (black holes) की बनावट और आकाशगंगाओं के संकुलों के क्रमिक विकास की प्रक्रिया.

लोफार दूरबीन (LOFAR telescope)

  • इसका पूरा नाम है – Low-Frequency Array
  • वस्तुतः यह बहुत बड़ा रेडियो दूरबीनों का जाल है जो मुख्य रूप से नीदरलैंड में अवस्थित है. इसे नीदरलैंड्स इंस्टिट्यूट फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी (ASTRON) ने अपने अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर 2012 में पूरा किया था.

यह कैसे काम करता है?

  • LOFAR में कई दिशाओं वाले एंटेना होते हैं. इसमें अलग-अलग एंटेना के संकेतों को क्षण-प्रतिक्षण संयोजित नहीं किया जाता है जैसा कि अधिकांश कई अन्टेना वाली दूरबीनों में होता है.
  • लोफार के अन्टेनों से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक संकेतों को डिजिट में लाकर उन्हें एक केन्द्रीय डिजिटल प्रोसेसर तक ले जाया जाता है और फिर सॉफ्टवेर में संयोजित कर दिया जाता है जिससे कि वे पारम्परिक अन्टेना जैसा प्रभाव उत्पन्न कर सकें.
  • ज्ञातव्य है कि लोफार में लगभग 20,000 छोटे-छोटे अन्टेना कम से कम 48 केन्द्रों पर काम करते हैं.
  • लोफार ब्रह्मांड का नक्शा 10–240 MHz की रेडियो बारंबारता पर तैयार करता है जिससे चित्र बहुत अधिक साफ़ और संवेदनशील निकलते हैं.

GS Paper 3 Source: PIB

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Topic : States’ ranking on Startup initiatives

संदर्भ

हाल ही में औद्योयिक प्रोत्साहन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने स्टार्ट-अप से जुड़ी पहलों के आधार पर राज्यों की रैंकिंग का दूसरे संस्करण का अनावरण किया.

रैंकिंग 2019 की रुपरेखा

  • रैंकिंग रूपरेखा (फ्रेमवर्क) 2019 में 7 आधार और 30 कार्य-बिंदु शामिल हैं.
  • इन आधारों के जरिए संस्थागत सहायता, नियम-कायदों को सरल करने, सार्वजनिक खरीद को आसान करने, इन्क्यूबेशन संबंधी सहयोग, प्रारंभिक पूंजी के वित्त पोषण संबंधी सहयोग, उद्यम वित्त पोषण संबंधी सहायता एवं जागरूकता और पहुंच संबंधी गतिविधियों के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किए गए प्रयासों का आकलन किया जाता है.
  • रैंकिंग से जुड़ी इस कवायद का उद्देश्य 1 मई, 2018 से लेकर 30 जून, 2019 तक की आकलन अवधि के दौरान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किए जाने वाले उपायों का आकलन करना है.
  • DPIIT ने रैंकिंग रूपरेखा के 7 आधारों से जुड़े उल्लेखनीय प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मान्यता प्रदान करने का भी प्रस्ताव किया है.
  • रैंकिंग 2019 कवायद के एक हिस्से के रूप में डीपीआईआईटी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के अभिनव स्टार्टअप कार्यक्रमों और पहलों को मान्यता प्रदान करेगा.

स्टार्टअप रैंकिंग की रूपरेखा का उद्देश्य

  • स्टार्ट-अप को आवश्यक सहयोग प्रदान करने की सुदृढ़ व्यवस्था करने की दृष्टि से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की रैंकिंग करना है.
  • इस रूपरेखा के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाता है कि वे एक-दूसरे की अच्छी प्रथाओं या तौर-तरीकों की पहचान करें, उनसे सीखें और उन्हें अपने यहां अमल में लाएं.

पृष्ठभूमि

  • औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग जनवरी 2016 से राज्यों में स्टार्ट-अप से सम्बंधित पारिस्थितिकी तंत्र की समीक्षा करता आया है.
  • इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य था राज्यों/केंद्र-शाषित क्षेत्रों को अपने यहाँ स्टार्ट-अप से सम्बंधित पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए बढ़ कर कदम उठाने हेतु प्रोत्साहन देना. इसके लिए क्षमता विकास पर विशेष बल दिया गया.
  • इसका एक अन्य उद्देश्य देश में सहयोगात्मक संघीयता की भावना को आगे बढ़ाना भी है.
  • इसके लिए जिन तरीकों को अपनाया गया है, उनका लक्ष्य है राज्यों के बीच में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार करना और उन्हें अच्छी-अच्छी प्रथाओं को सीखने, अपनाने और साझा करने के लिए प्रोत्साहित करना.

Prelims Vishesh

VIVID- 2019 :-

  • नेशनल इन्फोर्मेटिक्स सेंटर (NIC) डिस्ट्रिक्ट इन्फोर्मेटिक्स ऑफिसरों की बैठक – VIVID (Vision Insight and Voices as India goes Digital) – आयोजित कर रहा है.
  • इस बैठक का उद्देश्य DIO से बातचीत करना और उनके अनुभवों की चर्चा करना है.
  • विदित हो कि निम्नतम स्तर पर DIO ही डिजिटल परिवर्तन लाते हैं.
  • VIVID की स्थापना 2017 में हुई थी.

Agricultural Science Congress :

NAAS भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् से मिलकर नई दिल्ली में 14वें कृषि विज्ञान कांग्रेस का आयोजन कर रहा है जिसकी थीम है – कृषि रूपांतरण के लिए नवाचार/ Innovations for Agricultural Transformation.

Regional Rapid Transit System (RRTS) :

  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 15 कि.मी. लम्बे दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ गलियारे के लिए क्षेत्रीय द्रुत आवागमन प्रणाली (RRTS) के निर्माण के लिए अनुमति दे दी है.
  • यह आवागमन प्रणाली देश की अपने प्रकार की पहली प्रणाली है जो रेल पर आधारित है और जिसमें द्रुत गति से क्षेत्र विशेष में आवागमन की सुविधा दी जायेगी.

About the Island Development Agency (IDA) :

  • IDA भारतीय द्वीपों के विकास के लिए गठित एजेंसी है जिसकी बैठकों की अध्यक्षता गृहमंत्री करते हैं.
  • इसके अन्य सदस्य हैं – कैबिनेट सचिव, गृह सचिव, पर्यावरण सचिव, पर्यटन सचिव और जनजातीय मामलों के सचिव.

SWAYATT :-

  • इसका पूरा नाम है – Start-ups, Women and Youth Advantage Through eTransactions.
  • इस पहल का उद्देश्य सरकार के ई-मार्केटप्लेस से स्टार्ट-अपों, महिलाओं और युवा उद्यमियों को जोड़ना है.
  • ज्ञातव्य है कि ई-मार्केटप्लेस सरकारी खरीद का एक राष्ट्रीय मंच है.

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