Sansar डेली करंट अफेयर्स, 21 August 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 21 August 2021


GS Paper 1 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Maharaja Ranjit Singh

संदर्भ

हाल ही में, पाकिस्तान में अवस्थित लाहौर के किले में सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह की घोड़े पर सवार नौ फुट ऊंची कांस्य निर्मित मूर्ति को तोड़ दिया गया था.

भारत ने इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा की घटनाएं “खतरनाक दर” से बढ़ती जा रही हैं.

महाराजा रणजीत सिंह

  • महाराजा रणजीत सिंह पंजाब प्रांत के राजा थे. 12 अप्रैल, सन 1801 को रणजीत सिंह ने महाराजा की उपाधि ग्रहण की थी.
  • वे शेर-ए पंजाब के नाम से प्रसिद्ध हैं.
  • महाराजा रणजीत एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने न केवल पंजाब को एक सशक्त सूबे के रूप में एकजुट रखा, बल्कि अपने जीते-जी अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के पास भी नहीं भटकने दिया.
  • रणजीत सिंह का जन्म सन् 1780 में गुजरांवाला (अब पाकिस्तान) संधावालिया महाराजा महा सिंह के घर हुआ था.
  • उन्होंने लाहौर में शांति और सुरक्षा स्थापित की और शहर के आर्थिक और सांस्कृतिक गौरव को पुनर्जीवित किया.
  • रणजीत सिंह ने परस्पर युद्धरत रहने वाली मिसलों को पराजित कर और 1799 में लाहौर पर विजय प्राप्त करने के बाद एक एकीकृत सिख साम्राज्य की स्थापना की.
  • महाराजा रणजीत सिंह अनपढ़ थे, परन्तु उन्होंने अपने राज्य में शिक्षा और कला को बहुत प्रोत्साहन दिया. उन्होंने पंजाब में क़ानून एवं व्यवस्था कायम की और कभी भी किसी को सज़ा-ए-मौत नहीं दी.
  • उन्होंने अमृतसर के हरिमन्दिर साहिब गुरूद्वारे में संगमरमर लगवाया और सोना मढ़वाया. तब से ही उसे स्वर्ण मंदिर कहा जाने लगा. उन्हें महाराष्ट्र के नांदेड़ में, गुरु गोबिंद सिंह के अंतिम विश्राम स्थल ‘हजूर साहिब’ गुरुद्वारे का वित्तपोषण करने का श्रेय भी दिया जाता है.

GS Paper 1 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Malabar Rebellion

संदर्भ

20 अगस्त को ‘मालाबार विद्रोह’ के 100 वर्ष पूरे हो रहे है. इस विद्रोह को मोपला (मुस्लिम) दंगों के रूप में भी जाना जाता है.

  • ‘मालाबार विद्रोह’ को प्रायः दक्षिणी भारत में हुए प्रथम राष्ट्रवादी विद्रोह के रूप में माना जाता रहा है.
  • इस विद्रोह के दौरान हुए दंगों के कारण मालाबार क्षेत्र में सैकड़ों हिंदुओं को मौत के घाट उतार दिया गया और यह अभी भी इतिहासकारों के मध्य एक बहस का विषय बना हुआ है.

मालाबार विद्रोह

  • पूर्व बंगाल के पबना नामक स्थान के ही समान मद्रास प्रेसिडेंसी के मालाबार में मोपला का विद्रोह हुआ जिसे मालाबार विद्रोह (Malabar rebellion) भी कहते हैं.
  • मालाबार एक मुस्लिम बहुसंख्यक इलाका था. ये मुसलमान मोपला के नाम से जाने जाते थे. मोपला ज्यादातर कृषक या मजदूर वर्ग के थे जो चाय या कॉफ़ी बागानों में काम करते थे. वे अशिक्षित थे इसलिए धार्मिक कट्टरता भी उनमें अधिक थी.

कारण

मोपला विदेशी शासन, हिन्दू जमींदारों और साहूकारों से पीड़ित थे. अपनी दुःखद स्थिति से लाचार होकर 19-20वीं शताब्दी में मोपलाओं ने बार-बार विरोध और आक्रोश प्रकट किया. 1857 के पूर्व मोपलाओं के करीब 22 आन्दोलन हुए. 1882-85, 1896 और बाद में 1921 में भी मोपला विद्रोह (Moplah Rebellion) हुआ. 1870 में सरकार ने मालाबार में मोपलाओं द्वारा बार-बार विरोध की विवेचना करने के लिए एक समिति का निर्माण किया. इस समिति के रिपोर्ट में कुछ बातें सामने आईं कि इन विरोधों का कारण किसानों को जमीन से बेदखल किया जाना, लगान में मनमाने ढंग से वृद्धि किया जाना आदि हैं.

विद्रोह की प्रकृति

मोपला के किसानों का आन्दोलन हिंसात्मक था. मोपलाओं ने जमींदारों के घरों में धावा बोला, धन लूटे और हत्या की. मंदिरों की भी संपत्ति लूटी गई. साहूकारों को भी मौत के घाट उतारा गया. पूरे मालाबार में अशांति फ़ैल गई. सरकार ने अपनी तरफ से मोपला विद्रोह (Moplah Rebellion) को नियंत्रित करने के लिए बल का भी प्रयोग किया. पर मोपला किसी से नहीं डरे. उनके मन में यह भावना थी कि इस आन्दोलन में वे मर नहीं रहे बल्कि शहीद हो रहे हैं और उन्हें इस काम के लिए जन्नत मिलेगी.

विद्रोह का अंत

सरकार ने बलपूर्वक मोपला विद्रोह को दबा दिया. इस विद्रोह में संगठनात्मक कमजोरियाँ थीं. यह विद्रोह लम्बे समय तक के लिए टिक नहीं पाया. मोपलाओं को अपने आन्दोलन में कुछ बड़े किसानों का भी सहयोग मिला. जो मोपला विद्रोह (Moplah Rebellion) 1921 में हुआ वह बहुत ही व्यापक था. इस विद्रोह को दबाने के लिए तो सरकार को सेना की मदद लेनी पड़ी थी.

यह भी पढ़ें>>

1857 विद्रोह के प्रमुख नेता


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : IMT and KMTT

संदर्भ

केंद्र सरकार ने अग्रलिखित परियोजनाओं में सीमा सड़क संगठन (Border Road Organisation – BRO) की भूमिका पर म्यांमार सरकार की आपत्तियों के बारे में गृह मामलों की संसदीय समिति को सूचित किया है. ये परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं-

  1. भारत-म्यांमार-थाईलैंड (India-Myanmar-Thailand – IMT) त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना
  2. कलादान बहुविघध-पारगमन परिवहन परियोजना (Kaladan Multimodal Transit Transport: KMTT) .

म्यांमार द्वारा आपत्ति प्रकट किए जाने के पश्चात् मंत्रालय इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए NPCC, NHAI, IRCON और RITES जैसी अन्य एजेंसियों के विकल्प पर विचार कर रहा है.

त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना (IMT)

India-Myanmar-Thailand – IMT

  • 1360 कि.मी. लंबा यह राजमार्ग भारत की “Look East Policy” के तहत एक निर्माणाधीन राजमार्ग है.
  • यह भारत के मोरेह को म्यांमार होते हुए थाईलैंड के मेइ सॉट (Mae Sot) से जोड़ेगा.
  • यह राजमार्ग, आसियान – भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र और शेष दक्षिण पूर्व एशिया के साथ व्यापार एवं वाणिज्य को प्रोत्साहन प्रदान करेगा.
  • भारत द्वारा कंबोडिया, लाओस और वियतनाम तक राजमार्ग का विस्तार करने का भी प्रस्ताव किया गया है.

कलादान बहुविघध-पारगमन परिवहन परियोजना (KMTT)

  • यह पोत-संचालन, अंतर्देशीय जल और सड़क परिवहन सहित तीन अलग-अलग प्रणालियों वाली बहुविध परिवहन परियोजना है.
  • यह परियोजना समुद्री मार्ग द्वारा कोलकाता पत्तन को म्यांमार के सित्तवे पत्तन से जोड़ती है. इसके उपरांत कलादान नदी पर अंतर्देशीय जल परिवहन द्वारा सित्तवे को पलेतवा से तथा सड़क मार्ग से भारत-म्यांमार सीमा को पार करते हुए पलेतवा को भारत से जोड़ती है.
  • यह कोलकाता से मिजोरम के मध्य दूरी को लगभग 1000 कि.मी. तक कम कर देगी. साथ ही, माल ढुलाई के लिए परिवहन के समय में 3-4 दिनों के समय की बचत होगी.

BRO क्या है?

  • BRO का full-form है – Border Roads Organisation.
  • BRO 2015 से रक्षा मंत्रालय के साथ काम कर रहा है.
  • इसका कार्य सीमा के आस-पास कठिन एवं दुर्गम स्थानों तक सड़क बनाना है.
  • सेना में “Indian Army’s Corps of Engineers” नामक एक इंजीनियरिंग शाखा होती है, उसी से BRO में इंजिनियर लिए जाते हैं.
  • वर्तमान में BRO द्वारा 21 राज्य और एक संघ शासित क्षेत्र (अंडमान और निकोबार) में काम किया जा रहा है.
  • इसके आलावा BRO को अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार और श्रीलंका में भी काम मिला है.
  • बीआरओ देश की 32,885 किलोमीटर सड़कों और 12,200 मीटर स्थायी पुलों का रखरखाव करता है.
  • उत्तर-पूर्व भारत में आधारभूत संरचना के विकास में BRO का महान योगदान है.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Issues related to direct and indirect farm subsidies and minimum support prices.

Topic : PMFBY

संदर्भ

कृषि संबंधी संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है.समिति की इस रिपोर्ट में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों को रेखांकित किया गया हैः

प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से राज्यों की निकासी

  1. PMFBY के तहत दावों के निपटान में विलंब
  2. PMFBY को लागू करने की संस्थागत क्षमता
  3. विभिन्‍न हितधारकों के मध्य समन्वय का अभाव
  4. राज्य सरकारों और बीमा कंपनियों के मध्य उपज के निर्धारण से संबंधित विभिन्‍न प्रकार के विवाद
  5. योजना के संबंध में किसानों के मध्य अपर्याप्त जागरूकता आदि.

मुख्य अनुशंसाएं

  • राज्यों द्वारा योजना के त्याग के मामलों को रोकने हेतु संशोधित परिचालन दिशा-निर्देशों के अंतर्गत निम्नलिखित दो प्रावधानों में उपयुक्त बदलाव करना चाहिए.
  • सब्सिडी जारी करने में निर्धारित समय सीमा से अधिक विलंब करने वाले राज्य आगामी फसली मौसम में भाग नहीं ले सकते.
  • प्रीमियम सब्सिडी का अपेक्षित केंद्रीय हिस्सा (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 और शेष राज्यों के लिए 50:50) सिंचित क्षेत्रों / फसलों के लिए सकल प्रीमियम दर के 25% तक और असिंचित क्षेत्रों / फसलों के लिए 30% तक प्रदान किया जाएगा.
  • उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों / फसलों के लिए वैकल्पिक जोखिम उपायों के अन्वेषण पर अध्ययन में तीव्रता लानी चाहिए.
  • बीमा कंपनियों (ICs) द्वारा प्रत्येक जिले में तहसील स्तर पर कार्यशील शाखाएं स्थापित करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
  • बीमा कंपनियों का समय-समय पर प्रदर्शन मूल्यांकन किया जाना चाहिए .
  • यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऋणी किसानों के खाते से कोई अनिवार्य कटौती न हो.
  • बीमा कंपनियों के लिए दावों के समय पर निपटान हेतु एक निश्चित समय-सीमा तय करनी चाहिए अथवा ऐसा नहीं करने पर दंड हेतु प्रावधान करना चाहिए.
  • सभी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा विभिन्‍न स्तरों पर शिकायत निवारण समितियों का गठन किया जाना चाहिए.

प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

प्रधानमंत्री फसल बीमा का अनावरण जनवरी 2016 को किसानों की फसल के संबंध में उत्पन्न अनिश्चितताओं को दूर करने के लिए गया था ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. इसके तहत किसानों से अनुमानित फसल मूल्य के कुछ भाग को प्रीमियम के तौर पर लिया जाता है और बाकी बचा प्रीमियम केंद्र-राज्य सरकारों द्वारा बीमा कंपनियों को दिया जाता है. यदि किसी प्राकृतिक कारणवश फसल खराब हो जाती है तो बीमित राशि का भुगतान बीमा कंपनियों द्वारा किसानों को कर दिया जाता है. PMFBY एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें सेवा कर से छूट दी गई है.

PMFBY के उद्देश्य

  • किसानों को आर्थिक रूप से स्थायित्व प्रदान करना
  • नई तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा देना
  • किसानों को राष्ट्र की प्रगति में सहायक बनाना
  • किसानों की आत्महत्याओं, महाजनों से ऊंचे ब्याज पर ऋण के कारण होने वाले तनाव को कम करना और किसान आंदोलनों में कमी लाना
  • ऋण माफी और बैंको की गैर-निष्पादित संपत्ति (Non-Performing Assets) को कम करना

योग्यता और प्रीमियम

सभी ऋणी किसानों के लिए अनिवार्य पंजीकरण  

  • ऋणी किसानों के लिए बीमित राशि जिला स्तरीय तकनीकी समिति द्वारा निर्धारित वित्तीय माप के बराबर होगी जिसे बीमित किसान के विकल्प पर बीमित फसल की अधिकतम उपज के मूल्य तक बढ़ाया जा सकता है. यदि अधिकतम उपज का मूल्य ऋण राशि से कम है तो बीमित राशि अधिक होगी (राष्ट्रीय अधिकतम उपज को चालू वर्ष के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के साथ गुणा करने पर बीमा राशि का मूल्य प्राप्त होता है.)
  • जिनफसलोंके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा नहीं की गई है, उनके मामलों में विपणन विभाग/बोर्ड द्वारा स्थापित मूल्य अपनाया जाएगा.

गैर-ऋणी किसानों के लिए स्वैछिक पंजीकरण

फसल और प्रीमियम

  • फसल: खाद्यान्न, तिलहन और वाणिज्यिक फसल
  • प्रीमियम : खरीफ 2%, रबी 1.5% और वाणिज्यिक 5%

कवरेज

  • बुवाई से लेकर फसल काटने के 2 सप्ताह बाद तक
  • बुवाई से संबन्धित जोखिम जैसे सूखा या प्रतिकूल मौसम के कारण बुवाई न हो पाना
  • खड़ी फसल के दौरान ना रोके जा सकने वाले जोखिम, जैसे – सूखा, अकाल, बाढ़, सैलाब, कीट एवं रोग, भूस्खलन, प्राकृतिक आग और बिजली, तूफान, ओले, चक्रवात, आंधी, तूफान और बवंडर आदि
  • कटाई के उपरांत 14 दिनों तक खेत में फसलपड़ी होने के समय या मंडियों तक पहुंचाने के दौरान होने वाले चक्रवात, बारिश और ओलावृष्टि आदि
  • स्थानीय आपदाएँ – बाढ़ , भूस्खलन और मूसलाधार वर्षा आदि

अपवर्जन

निम्नलिखित जोखिमों के लिए कोई बीमा राशि नहीं दी जाएगी –

  • युद्ध और आंतरिक खतरे
  • परमाणु जोखिम
  • दंगा
  • दुर्भावनापूर्ण क्षति
  • चोरी या शत्रुता का कार्य
  • घरेलू या जंगली जानवरों द्वारा चरे जाना और अन्य रोके जा सकने वाले जोखिम

कार्यान्वयन एजेंसी

  • बीमा कंपनियों के कार्यान्वयन पर समग्र नियंत्रण कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के परिचालन नियंत्रण के तहत भारतीय कृषि बीमा कंपनी (Agriculture Insurance Company of India Limited) द्वारा किया जाएगाजबकि AIC का प्रशासनिक नियंत्रण वित्त मंत्रालय के तहत आता है.
  • सरकारी और निजी दोनों प्रकार की बीमा कंपनियाँ इसमे भाग ले सकती है. निजी कंपनियों का चुनाव राज्य सरकारो के ऊपर छोड़ दिया गया है.
  • कार्यान्वयन एजेंसी का चुनाव तीन साल की अवधि के लिए किया जा सकता है जिसको आगे बढ़ाया जा सकता है.

प्रबंधन

  • राज्य स्तर पर  – राज्य स्तरीय समन्वय समिति
  • राष्ट्रीय स्तर पर – राष्ट्रीय स्तर निगरानी समिति कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग (डीएसी और परिवार कल्याण) के संयुक्त सचिव (क्रेडिट) की अध्यक्षता में
  • जैसे ही बैंकों को दावों के बाद वित्तीय राशि बीमा कंपनियों से प्राप्त होगी, बैंकों या वित्तीय संस्थाओं को 1 हफ्ते में इसका निपटारा कर देना होगा
  • नोडल बैंकों के बिचौलिये संबन्धित व्यक्तियों के रेकॉर्ड को आगे मिलान के लिए बीमित किसानोंं (ऋणी और गैर-ऋणी दोनों) की सूची एवं अपेक्षित विवरण संबन्धित बीमा कंपनियों की शाखाओं से प्राप्त कर सकते हैं .
  • लाभार्थियों की सूची को फसल बीमा पोर्टल एवं संबंधित बीमा कंपनियों की वेबसाइट पर अपलोड किया जा सकता है
  • करीब 5% लाभार्थियों को क्षेत्रीय कार्यालयों/बीमा कंपनियों के स्थानीय कार्यालयों द्वारा सत्यापित किया जा सकता है जो संबंधित जिला-स्तरीय निगरानी समिति और राज्य स्तरीय समन्वय समिति को अपना प्रतिवेदन भेजेंगे और इनमें से 10% संबंधित जिला-स्तरीय निगरानी समिति द्वारा प्रतिसत्यापित किए जायेंगें और वे अपना प्रतिवेदन राज्य सरकार को भेजेंगें.
  • लाभार्थियों में से 1 से 2% का सत्यापन बीमा कंपनी के प्रधान कार्यालय/केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त स्वतंत्र एजेंसियों/राष्ट्रीय स्तर की निगरानी समिति द्वारा किया जा सकता है और वे आवश्यक रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भेजेंगे.

PMFBY से PMFBY 2.0

पूर्णतया स्वैच्छिक: वर्ष 2020 के खरीफ सीजन से सभी किसानों के लिए नामांकन को शत प्रतिशत स्वैच्छिक बनाने का निर्णय लिया गया है.

सीमित केंद्रीय सब्सिडी: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस योजना के तहत गैर-सिंचित क्षेत्रों/फसलों के लिये बीमा किस्त की दरों पर केंद्र सरकार की हिस्सेदारी को 30% और सिंचित क्षेत्रों/फसलों के लिये 25% तक सीमित करने का निर्णय लिया गया है.

राज्यों के लिये अधिक स्वायत्तता: केंद्र सरकार द्वारा राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने के लिये व्यापक छूट प्रदान की गयी है और साथ ही उन्हें बुवाई, स्थानिक आपदा, फसल के दौरान मौसम प्रतिकूलता, और फसल के बाद के नुकसान आदि किसी भी अतिरिक्त जोखिम कवर/ सुविधाओं का चयन करने का विकल्प भी दिया गया है.

निर्णय में देरी होने पर दंड: संशोधित PMFBY में, एक प्रावधान शामिल किया गया है, जिसमें राज्यों द्वारा खरीफ सीजन के लिए 31 मार्च से पहले और रबी सीजन के लिए 30 सितंबर से पहले अपना हिस्सा जारी नहीं करने पर, उन्हें बाद के फसल सीजनों में योजना के तहत भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

सूचनाशिक्षा और संचार गतिविधियों में निवेश: अब इस योजना के तहत बीमा कंपनियों द्वारा एकत्र किये गए कुल प्रीमियम का 0.5% सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य किया गया है.


Prelims Vishesh

‘Extended Troika’ meeting :-

  • कतर ने रूस द्वारा आयोजित “विस्तारित ट्रोइका” की एक बैठक की मेजबानी की है.
  • इस बैठक में अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत जल्मे खलीलज़ाद और उनके अन्य समकक्ष यथा रूस, चीन एवं पाकिस्तान के प्रतिनिधि भी शामिल थे.
  • मूल ‘“ट्रोइका” प्रक्रिया मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के मध्य सुलह आधारित वार्ता को संदर्भित करती है.
  • भारत ने प्रथम बार रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के साथ दोहा में आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लिया था.
  • हालांकि, इस सम्मेलन के आयोजन के उपरांत कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं किया गया है. विस्तारित ट्रोइका सम्मेलन का उद्देश्य अफगान शांति प्रक्रिया को मजबूत करना है.

Banks have to pay fines if ATMs run out of cash :-

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को एक निर्देश जारी किया है कि एक अक्टूबर से किसी एटीएम के नकदी रहित (एक महीने में दस घंटे से अधिक की अवधि तक) पाए जाने पर बैंकों पर प्रति एटीएम 10,000 रुपये तक का जुर्माना आरोपित किया जाएगा.
  • व्हाइट लेबल एटीएम (WLA) के मामले में, उस बैंक पर जुर्माना आरोपित किया जाएगा, जिसके द्वारा उस विशेष WLA की नकदी आवश्यकता को पूरा किया जा रहा है.
  • हालांकि, बैंक स्व-विवेक से WLA संचालक से अर्थदंड की वसूली कर सकता है.
  • गैर-बैंकों द्वारा स्थापित, उनके स्वामित्वाधीन और उनके द्वारा संचालित ATM को व्हाइट-लेबल एटीएम के रूप में संदर्भित किया जाता है.

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