Sansar डेली करंट अफेयर्स, 20 May 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 20 May 2019


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : United Nations not a State under Article 12

संदर्भ

हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि संयुक्त राष्ट्र संघ भारतीय संविधान की धारा 12 के अंतर्गत एक राज्य नहीं है और इसलिए वह संविधान की धारा 226 के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है.

पृष्ठभूमि

संयुक्त राष्ट्र संघ के एक कर्मचारी को अमेरिका के संघीय न्यायालय ने कदाचार का दोषी पाया था और उसे 97 महीनों के कारागार एवं दो वर्षों की अनिवार्य परिवीक्षा का दंड दिया था. उसे मई 2014 में मुक्त करते हुए भारत भेज दिया गया था. उस कर्मचारी के अनुसार उसके मामले में उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी. इसी आधार पर उसने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी.

याचिकाकर्ता ने नवम्बर 2018 में विदेश मंत्रालय को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि उसे सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अनुभाग 86 के अंतर्गत संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रति कानूनी कार्रवाई आरम्भ करने की अनुमति दी जाए. विदित हो कि इस अनुभाग में यह प्रावधान है कि यदि केन्द्रीय सरकार अनुमति दे तो किसी भी न्यायालय में एक विदेशी देश के विरुद्ध मुकद्दमा चलाया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र संघ को उपलब्ध सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र संघ एक विदेशी देश नहीं है, अपितु यह मात्र एक आंतरिक संगठन है. इसलिए इसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई आरम्भ करने के लिए भारत सरकार की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती है.

संयुक्त राष्ट्र संघ एवं इसके कर्मचारियों को संयुक्त राष्ट्र (विशेषाधिकार एवं सुरक्षा अधिनियम, 1947) के अधीन सुरक्षा प्राप्त है. उस अधिनियम की अनुसूची के अंतर्गत धारा II के अनुभाग 2 के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ पर किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती है. उस पर कानूनी कार्रवाई उसी मामले में हो सकती है जिसके बारे में उसने स्वयं अपनी सुरक्षा स्पष्ट रूप से हटा ली हो. संयुक्त राष्ट्र को प्राप्त यह सुरक्षा सर्वव्यापक है.

संयुक्त राष्ट्र संघ क्या है?

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई याल्टा बैठक (Yalta Conference) के निर्णय के अनुसार 25 अप्रैल से 26 जून 1945 तक सैन फ्रांसिस्को में संयुक्त राष्ट्रों (allied countries) का सम्मलेन आयोजित हुआ.

सम्मलेन ने जर्मनी के आत्मसमर्पण से पहले से ही संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र पर विचार करना शुरू कर दिया था. जापान के आत्मसमर्पण के पहले 26 जून को 51 देशों ने, जिसमें भारत भी शामिल था, एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किये. यह घोषणा पत्र 24 अक्टूबर 1945 से प्रभावी हो गया. इस घोषणा पत्र में संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य तथा गठन की परिभाषा दी गई है. संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations – UN) के निर्माण का उद्देश्य विश्व में विद्यमान संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान करना था.

विश्व राजनीति का सञ्चालन बल और हिंसा को परे रखकर सहयोग और सह-अस्तित्व के आधार पर होना चाहिए, ऐसा घोषणा पत्र में उल्लिखित है. यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए अपरिहार्य है और यह बहुपक्षवाद का आधार है. यह मानव के निम्नतर विकास से उच्चतर विकास का द्योतक है. मानव के इस उच्चतर विकास में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, स्वतंत्रता समानता और मानवाधिकार जैसे मूल्य प्रमुख हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ का मूल आधार अंतर्राष्ट्रीय विधि पर टिका है जिसके अनुसार सभी राज्य समान सम्प्रभुता संपन्न हैं.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें > UNO in Hindi.


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : NPPA caps prices of 9 non-scheduled drugs

संदर्भ

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceutical Pricing Authority – NPPA) ने हाल ही में 9 गैर-अनुसूचीबद्ध कैंसर की दवाओं के दाम 87% तक घटा दिए हैं और उसके व्यापार मार्जिन के लिए 30% की उच्चतम सीमा निर्धारित कर दी है.

पृष्ठभूमि

यह प्राधिकरण औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश – DPCO की अनुसूची 1 के अंतर्गत वर्णित आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची में आने वाली दवाओं के दाम तय करता है. अभी तक उसने 1,000 दवाओं के अधिकतम मूल्य निर्धारित किये हैं.

DPCO क्या है?

औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 1995 भारत सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955 ) के अनुभाग 3 के अंतर्गत निर्गत एक आदेश है जिसका उद्देश्य दवाओं के दामों को नियंत्रित करना है.

इस आदेश में और भी कुछ प्रावधान हैं, जैसे – नियंत्रित मूल्य वाली दवाओं की सूची, दवाओं के मूल्य-निर्धारण की प्रक्रिया,  सरकार द्वारा निर्धारित मूल्यों को लागू करने की पद्धति, प्रावधानों के उल्लंघन के लिए विहित दंड इत्यादि. ज्ञातव्य है कि DPCO के प्रावधानों को लागू करने की शक्ति भारत सरकार ने NPPA में निहित की है. कालांतर में 2013 में DPCO की अधिसूचना निर्गत हुई.

DPCO आवश्यक वस्तु अधिनियम के अधीन क्यों?

किसी समाज के स्वास्थ्य के लिए दवाएँ अत्यावश्यक होती हैं. इसलिए इन्हें अत्यावश्यक श्रेणी में रखा जाता है और तदनुसार उन्हें आवश्यक वस्तु अधिनियम के अधीन रखा जाता है.

NPPA क्या है और इसकी भूमिका

  • राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की स्थापना 29 अगस्त, 1997 को विशेषज्ञों के एक स्वतंत्र निकाय के रूप में हुई थी जिसके लिए एक कैबिनेट समिति ने औषधि नीति की समीक्षा करते समय सितम्बर, 1994 में निर्णय लिया था.
  • इस प्राधिकरण को कुछ अन्य काम भी सौंपे गये हैं, जैसे – दवाओं के दाम निर्धारित अथवा संशोधित करना, औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश के प्रावधानों को लागू करना तथा नियंत्रित एवं नियंत्रण से मुक्त दवाओं के दाम पर नज़र रखना.

GS Paper  2 Source: Times of India

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Topic : BRS Conventions

संदर्भ

हाल ही में स्विट्ज़रलैंड के जेनेवा शहर में बेसल संधि की 14वीं, रॉटर्डम संधि की 9वीं तथा स्टॉकहोम संधि की 9वीं बैठक सम्पन्न हुई. इस बार बैठक की थीम थी – “स्वच्छ ग्रह, स्वस्थ लोग : रसायनों एवं अपशिष्ट का सही प्रबंधन / “Clean Planet, Healthy People: Sound Management of Chemicals and Waste”.

ये संधियाँ क्या हैं?

बेसल संधि

  • इस संधि को 22 मार्च 1989 को हस्ताक्षर के लिए रखा गया था.
  • इस पर कुल मिलाकर 187 देशों ने हस्ताक्षर किये हैं.
  • हैती और अमेरिका ने संधि पर हस्ताक्षर कर दिए हैं परन्तु स्वीकृत नहीं किया है.
  • यह संधि 5 मई, 1992 से लागू है.
  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य खतरनाक कचरे को एक देश से दूसरे देश ले जाने की गतिविधियों को घटाना है. इसमें इसपर विशेष बल दिया गया है कि विकसित देशों से अल्प-विकसित देशों तक ये खतरनाक कचरे नहीं पहुँचे.
  • जिन कचरों को यह संधि रोकती है उनमें रेडियोधर्मी कचरे को शामिल नहीं किया गया है.
  • संधि का उद्देश्य उत्पादित कचरे की मात्रा और विषाक्तता को कम से कम करना है जिससे कि उनका प्रबंधन पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित हो.
  • बेसल संधि खतरनाक कचरे के सुचारू प्रबंधन के लिए अल्पविकसित देशों को सहायता देने का प्रावधान भी करती है.

रॉटर्डम संधि

यह संधि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कुछ हानिकारक रसायनों एवं कीटनाशकों की आवाजाही से संबधित है. यह संधि न केवल मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को सुरक्षित करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को बढ़ावा देती है, अपितु देशों को यह निर्णय लेने की स्वतंत्रता देती है कि वे संधि-पत्र में अनुसूचित खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों के आयात के विषय में उचित निर्णय लें.

स्टॉकहोम संधि

यह एक वैश्विक संधि है जो जैविक प्रदूषण तत्त्वों से सम्बंधित है. इसमें मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए अत्यंत खतरनाक और बहुत समय तक चलने वाले रसायनों के उत्पादन, प्रयोग, व्यापार, विमुक्ति एवं भंडारण को सीमित करने तथा अंततोगत्वा समाप्त करने पर बल दिया गया है.

हाल की बैठकों के परिणाम

बेसल संधि :- इस संधि के बैठक में इन दो महत्त्वपूर्ण विषयों पर मुख्य रूप से चर्चा हुई और निर्णय लिए गये – ई-कचरे के बारे में तकनीकी दिशा-निर्देश तथा प्लास्टिक कचरे को “पहले से सूचित कर/ Prior Informed Consent – PIC” अनुमति लेने की प्रक्रिया में शामिल करना.

स्टॉकहोम संधि :- इसकी बैठक में निर्णय लिया गया कि डायकोफोल/Dicofol को अनुसूची A (विलोपन) में बिना किसी छूट के रखा जाए. इसके अतिरिक्त कुछ छूटों के साथ परफ्लूरोओक्टेनोइक एसिड/Perfluorooctanoic acid को अनुसूची A में रखने का निर्णय हुआ.

रॉटर्डम संधि :- इसकी बैठक में फोरेट और HBCD (hexabromocyclododecane) नामक दो नए रसायनों को उस सूची में जोड़ दिया गया जिसमें वर्णित रसायनों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए पहले सूचित कर के सहमति प्राप्त करना अनिवार्य होता है.


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : Chief risk officer (CRO) for NBFCs

संदर्भ

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने 5,000 करोड़ रू. से अधिक की सम्पदा रखने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों (NBFC) को निर्देश दिया है कि वे एक मुख्य जोखिम अधिकारी (CRO) की नियुक्ति करें.

CRO का कार्य

  • जोखिम अधिकारी का सबसे प्राथमिक काम जोखिमों का पता लगाना, इनका आकलन करना तथा इनका निराकरण करना होगा.
  • सभी ऋण उत्पाद (खुदरा अथवा थोक) पर CRO का सत्यापन आवश्यक होगा.
  • CRO ऐसे उत्पादों को संभावित जोखिम की दृष्टि से समीक्षा करेगा.
  • परन्तु ऋण प्रस्तावों के विषय में CRO की भूमिका एक परामर्शी की ही भूमिका होगी.

CRO अपना प्रतिवेदन किसे देगा?

  • RBI ने निर्देश दिया है कि CRO सीधे या तो प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी को या जोखिम प्रबंधन समिति (RMC) को अथवा बोर्ड को प्रतिवेदन देगा.
  • CRO गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी के व्यवसाय विभाग से प्रतिवेदन का रिश्ता नहीं रखेगा और उसे व्यवसाय से सम्बंधित कोई लक्ष्य भी नहीं दिया जाएगा.

नियुक्ति एवं स्थानान्तरण

  • CRO के रूप में नियुक्त होने वाला व्यक्ति सम्बंधित गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी में एक वरिष्ठ अधिकारी होगा और उसके पास जोखिम प्रबंधन के क्षेत्र में समुचित व्यवसायिक योग्यता एवं अनुभव होगा.
  • CRO की नियुक्ति बोर्ड के अनुमोदन के साथ एक विशेष समयावधि के लिए होगी.
  • CRO केवल अपना काम देखेगा और उसे कोई दूसरा दायित्व नहीं सौंपा जाएगा.
  • CRO को निर्धारित समयावधि पूरी होने के पहले पद से तभी स्थानांतरित अथवा हटाया जा सकता है जब इसके लिए बोर्ड अपना अनुमोदन दे दे.
  • यदि CRO को समय के पूर्व स्थानांतरित किया जाता है अथवा हटाया जाता है तो इस विषय में भारतीय रिज़र्व बैंक के उस क्षेत्रीय कार्यालय के गैर-बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग को सूचित करना होगा जिसके अधिकार-क्षेत्र में सम्बंधित गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनी का पंजीकरण हुआ है.

Prelims Vishesh

Mt Makalu :-

  • 16 मई, 2019 को भारतीय सेना के एक पर्वतीय अभियान दल ने माउंट मकालू की चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की.
  • विदित हो कि मकालू पर्वत नेपाल में है और इसकी ऊँचाई 8,485 मीटर है.
  • यह नेपाल की चौथी सबसे ऊँची और विश्व की पाँचवी सबसे ऊँची चोटी है.
  • यह माउंट एवेरेस्ट से मात्र 19 किमी. दूर है.
  • विश्व-प्रसिद्ध बारुन घाटी मकालू पर्वत की ही तराई में स्थित है.

Mt. Tenchenkhang :-

  • हाल ही में राष्ट्रीय कैडेट कोर्ज़ (बालिका) पर्वतीय अभियान को सिक्किम में स्थित माउंट टेंचेनखांग पर चढ़ाई करने के लिए हरी झंडी दिखलाई गई.
  • विदित हो कि सिक्किम में अवस्थित इस चोटी की ऊँचाई 6,010 मीटर है.

SIMBEX :-

  • अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी के निकट SIMBEX नामक नौसैनिक अभ्यास का 26वाँ संस्करण आयोजित होने जा रहा है.
  • इस अभ्यास मेंसिंगापुर और भारत की नौसेनाएँ सम्मिलित होंगी.
  • इस बार का अभ्यास पैमाने और जटिलता के हिसाब से अब तक का सबसे बड़ा अभ्यास होगा.
  • SIMBEX का full form है – “Singapore-India Maritime Bilateral Exercise”.

Buddha Purnima- 18 May 2019 :-

  • 18 मई, 2019 को बुद्ध पूर्णिमा अर्थात् बैशाख पूर्णिमा मनाई गई.
  • विदित हो कि इस वर्ष बुद्ध भगवान् की 2,563वीं जयंती थी.
  • यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि बुद्ध भगवान् ने इसी पूर्णिमा को ज्ञान और महापरिनिर्वाण दोनों पाया था.
  • इस अवसर पर बुद्ध की प्रतिमा को पानी और फूलों से नहाया जाता है और विश्व-भर के बौद्ध ध्यान, शील और भावना का अभ्यास करते हैं.

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