Sansar डेली करंट अफेयर्स, 20 January 2020

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 20 January 2020


GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Sikhs in US to be counted as  separate ethnic group

संदर्भ

2020 में अमेरिका में जनगणना होने वाली है. इस जनगणना के लिए पहली बार उस देश में रहने वाले सिखों को एक अलग जाति समूह के रूप में गिना जाएगा. अमेरिका में सिखों की संख्या लगभग 10 लाख है.

पिछले कुछ वर्षों से सिखों को परेशान करने, उन्हें धमकाने और उनके प्रति घृणा आधारित अपराध करने की घटनाएँ बढ़ी हैं. इसी परिप्रेक्ष्य में माँग की जा रही थी कि सिखों को अमेरिका में एक अलग जाति-समूह के रूप में मान्यता दी जाए.

अमेरिकी जनगणना में नस्ल और जाति की परिभाषा

अमेरिका का जनगणना ब्यूरो नस्ल और जाति को दो अलग अवधारणाएँ मानता है. इसपर 1997 के ऑफिस ऑफ़ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) द्वारा निर्धारित मानकों का अनुपालन किया जाता है.

  1. OMB के अनुसार, नस्ल को अमेरिका में पाँच बड़ी श्रेणियों में रखा जाता है. ये हैं – श्वेत, ब्लैक अथवा अफ्रीकी अमेरिकन, एशियाई, मूल हवाईवासी और अन्य प्रशांत द्वीपों के निवासी. यह नस्ल की एक प्रकार की सामाजिक परिभाषा है और इसमें जीव विज्ञान, मानव विज्ञान और आनुवंशिकी का ध्यान नहीं रखा गया है.
  2. अमेरिका की जनगणना में जातीयता में जातीयता को दो ही वर्गों में बाँटा गया है – हिस्पेनिक अथवा लैटिनो और गैर-हिस्पेनिक अथवा गैर-लैटिनो.

सिख को अलग जाति-समूह मानने से क्या लाभ होगा?

  1. इससे अमेरिका में सिखों की संख्या सही-सही पता लगेगी.
  2. इससे सिख समुदाय के प्रति होने वाले घृणा-आधारित अपराधों का पता लगाने और उसका आकलन करने में सहायता मिलेगी.
  3. सिखों को समान और सटीक प्रतिनिधित्व मिलेगा.
  4. इससे सिख समुदाय की आवश्यकताओं के विषय में कांग्रेस और अन्य सरकारी सेवाओं के सदस्य अवगत हो सकेंगे.

ब्रिटेन और न्यूज़ीलैण्ड में सिखों की स्थिति

सिखों ने ब्रिटेन में भी अपने लिए अलग जातीय समूह बनाने की माँग की है. इसके लिए सिख नवम्बर, 2019 में वहाँ की सरकार के विरुद्ध न्यायालय तक जा चुके हैं. वहाँ लगभग 8 लाख सिख रहते हैं.

न्यूज़ीलैण्ड में भी सबसे तेजी से बढ़ने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाओं में से एक है. उल्लेखनीय है कि वहाँ इन्हें एक अलग जाति-समूह माना जा चुका है.

सिखों के अतिरिक्त यह पदवी वहाँ के पंजाबियों, बंगालियों, भारतीय तमिलों, फ़िजी भारतीयों आदि को भी मिल चुकी है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Telecommunication Consumers Education and Protection Fund (TCEPF)

संदर्भ

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टेलिकॉम सेवा प्रदाताओं को कहा है कि वे दूरसंचार ग्राहक शिक्षा एवं सुरक्षा कोष (Telecommunication Consumers Education and Protection Fund – TCEPF) में वह सभी धनराशि जमा कर दें जिसपर ग्राहकों ने दावा नहीं किया होता है. इसी कोष में अधिकाई चार्ज (excess charges) और सुरक्षा जमा (security deposit) का पैसा भी जमा करने का निर्देश दिया गया है.

दूरसंचार ग्राहक शिक्षा एवं सुरक्षा कोष (TCEPF) में कौन-सी धनराशि जमा होगी?

  • कई बार ऑडिट में पता चलता है कि ग्राहक को अतिरंजित विपत्र (excess billing ) देकर धनराशि वसूली गई है. यह वसूला गया पैसा TCEPF में जमा होगा.
  • कई बार सुरक्षा जमा में रखे गये पैसे के लिए कोई दावा नहीं करता. यह पैसा भी उसी कोष में जाएगा.
  • विफल एक्टिवेशन के लिए प्लान चार्ज के रूप में लिया गया पैसा इसी कोष में जमा होगा.
  • TCEPF में जमा ऊपर बतलाई गई ग्राहकों की दावारहित और अप्रत्यावर्तनीय धनराशि का उपयोग ग्राहकों के ही कल्याण में किया जाएगा.

दूरसंचार ग्राहक शिक्षा एवं सुरक्षा कोष नियमावली, 2007 के प्रावधान

  • इस नियमावली में सेवा प्रदाताओं द्वारा ग्राहकों की दावा रहित धनराशि को जमा करने, कोष का संधारण करने और अन्य सम्बंधित पहलुओं के लिए एक आधारभूत ढाँचा अभिकल्पित किया गया है.
  • इस कोष में जमा धनराशि से होने वाली आय का उपयोग ग्राहक शिक्षा एवं सुरक्षा से सम्बंधित कार्यक्रमों और गतिविधियों में होगा.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : Coronavirus

संदर्भ

अमेरिका मध्य चीन के नगर वुहान से आने वाले यात्रियों की अपने तीन हवाई अड्डों पर इस दृष्टि से जाँच करेगा कि कहीं उनमें कोरोना वायरस (Coronavirus) नामक साँस से जुड़े नए वायरस के लक्षण तो नहीं हैं.

कोरोना वायरस (Coronavirus) क्या है?

  • कोरोना वायरस (Coronavirus) एक विशाल वायरस परिवार का सदस्य है जिससे सामान्य सर्दी से लेकर गंभीर रोग भी हो सकते हैं, जैसे – मध्य-पूर्व स्वास सिंड्रोम (Middle East Respiratory Syndrome – MERS-CoV) और गंभीर रूप से विकट स्वास सिंड्रोम (Severe Acute Respiratory Syndrome – SARS-CoV).
  • कोरोना वायरस ज़ूनोटिक (zoonotic ) होता है अर्थात् यह पशुओं और मनुष्यों के बीच संक्रमित होता है.

कोरोना वायरस के लक्षण और प्रकोप

  1. स्वास रोग
  2. ज्वर
  3. खाँसी
  4. छोटी साँस
  5. निमोनिया
  6. गंभीर विकट स्वास सिंड्रोम
  7. वृक्क रोग
  8. म्रत्यु

कोरोना वायरस का संचरण

मानवीय कोरोना वायरस अधिकांशतः किसी संक्रमित मनुष्य से दूसरे मनुष्य में निम्नलिखित माध्यमों से संचरित होता है, जैसे – खाँसी और छींक, निकट सम्पर्क जैसे स्पर्श या हाथ मिलाना, वायरस युक्त वस्तु अथवा सतह को छूना एवं हाथ धोये बिना अपना मुंह, नाक और आँखों को छूना. विरले मामलों में विष्ठा से भी संचरण होता है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Infrastructure

Topic : Development Support Services For States/UTs (DSSS) For Infrastructure Projects

संदर्भ

नीति आयोग और लद्दाख संघीय क्षेत्र ने एक समझौता पत्र हस्ताक्षरित किया है जिसके अनुसार लद्दाख में नीति आयोग की अवसंरचनात्मक परियोजनाओं के लिए राज्यों/संघीय क्षेत्रीय को विकास में सहयोग हेतु सेवा योजना (Development Support Services to States for Infrastructure Projects – DSSS) लागू की जायेगी.

DSSS योजना क्या है?

  • यह योजना नीति आयोग संचालित करता है.
  • DSSS योजना अवसंरचना के निर्माण की परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिए गये सहयोग की योजना है.
  • इसका लक्ष्य प्रशासन के हर स्तर पर अवसंरचनात्मक परियोजनाओं को नवीनतम तकनीक से युक्त एवं उन्नत गुणवत्तापूर्ण स्वरूप प्रदान करना है.
  • इस योजना का उद्देश्य निजी एवं सरकारी प्रतिभागिता (Public–private partnership – PPP) मॉडल को सफलतापूर्वक चलाना है और अवसंरचना निर्माण को एक ऐसा स्वरूप प्रदान करना है कि अवसंरचना निर्माण का एक सतत चक्र स्थापित हो सके.

इस योजना के अंतर्गत किसी योजना की परिकल्पना से लेकर उसकी वित्तीय समाप्ति तक राज्य/संघीय क्षेत्र सरकारों को सहयोग दिया जाता है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment

Topic : Australian Bushfires

संदर्भ

पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया में दावानल का एक ऐसा प्रकोप देखने को मिला जिससे देश के एक बहुत बड़े भाग में विनाश का तांडव देखा गया. वहाँ इस समय सूखा चल रहा है और गर्मी पड़ रही है. कुछ लोग इस प्राकृतिक आपदा को जलवायु परिवर्तन से जोड़ रहे हैं.

दुष्प्रभावित क्षेत्र

वैसे तो ऑस्ट्रेलिया के प्रत्येक राज्य में दावानल फैला हुआ है, परन्तु इसका सबसे अधिक प्रकोप न्यू साउथ वेल्स प्रांत में देखा जा रहा है.

जंगल की आग झाड़ियों से आगे बढ़कर जंगली क्षेत्रों और ब्लू माउंटेन्स जैसे राष्ट्रीय उद्यानों तक फ़ैल गई है. यहाँ तक कि मेलबर्न और सिडनी जैसे शहर भी इससे अछूते नहीं रहे और वहाँ के बाहरी उपनगरीय क्षेत्रों में स्थित घरों को क्षति पहुँची है और शहर के मुख्य केंद्र के ऊपर धुएँ की मोटी चादर दिखाई दे रही है.

दावानल का कारण

गर्मी के महीनों में ऑस्ट्रेलिया में प्रत्येक वर्ष वनों में आग लग जाना सामान्य बात है. यदि मौसम गर्म और सूखा रहता है तो इसकी लपटें सरलता से फैलने लगती हैं. कई बार दावानल वैसे जंगलों पर बिजली गिरने से भी होता है जहाँ सूखे का प्रकोप होता है. विक्टोरिया प्रांत के ईस्ट जिप्सलैंड लैंड क्षेत्र में कई जगह आग लगने का कारण आकाशीय बिजली ही थी.

दावानल के लिए मनुष्य भी उत्तरदायी हो सकते हैं. न्यू साउथ वेल्स की पुलिस का आरोप है कि कम से कम 24 लोग ऐसे हैं जिन्होंने जान-बूझकर जंगलों में आग लगाई.

दावानल को बुझाने में हो रही कठिनाइयाँ

इस बार ऑस्ट्रेलिया में कई दशकों का सबसे बुरा सूखा पड़ा है. पिछला वसंत अभी तक का सबसे सूखा वसंत रहा. साथ ही दिसम्बर की लू ने अधिकतम तापमान की राष्ट्रीय औसत का कीर्तिमान तोड़ दिया. कुछ जगहों पर तो पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया. इन सब कारणों से आग बुझाने में कठिनाई हो रही है.

हवाएँ भी तेज चल रही हैं जिस कारण दावानल और उसका धुआँ तेजी से फ़ैल रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अगलगी और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. अब तो कई वर्षों से आग लगना समय से पहले ही शुरू हो जाता है और यह पहले से अधिक तीव्रता से फैलता भी है.

अभी तक हुई क्षति

  • सारे शहर लपटों की लपेट में आ गये हैं और कई राज्यों के निवासी अपने घर खो चुके हैं. सबसे भारी ढाँचागत क्षति न्यू साउथ वेल्स में हुई है जो देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है. यहाँ 1,588 घर नष्ट हो गये हैं और 650 से अधिक घरों को क्षति पहुँची है.
  • ऑस्ट्रेलिया के छह राज्यों में कुल मिलाकर 7 . 3 मिलियन हेक्टेयर भूमि जल चुकी है. यह क्षेत्रफल बेल्जियम और डेनमार्क के योग से भी बड़ा है.
  • न्यू साउथ वेल्स में 4 . 9 मिलियन हेक्टेयर का क्षेत्र जल गया है.
  • पूरे ऑस्ट्रेलिया में 1 बिलियन पशु दावानल की चपेट में आये हैं. अनुमान है कि न्यू साउथ वेल्स में रहने वाले एक तिहाई क्वाला पशु (koalas ) आग में जलकर मर चुके हैं और एक तिहाई का आश्रय स्थान नष्ट हो चुका है.

यह आग कब बुझेगी?

दुर्भाग्य की बात है कि ऑस्ट्रेलिया में ग्रीष्म ऋतु अभी आधी ही पार हुई है. साधारणतः गर्मी जनवरी और फ़रवरी में सबसे तीव्र होती है. इसका अभिप्राय यह है कि दावानल से अभी महीनों राहत मिलने की संभावना नहीं है.

ऑस्ट्रेलिया में दावानल से छुटकारा पाना संभव नहीं है क्योंकि यह हर वर्ष होता ही है और जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि कई कारणों से इसकी तीव्रता और फैलाव बढ़ता ही जा रहा है.


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