Sansar डेली करंट अफेयर्स, 20 February 2021

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 20 February 2021


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora- their structure, mandate. Disaster and disaster management.

Topic : International Solar Alliance

संदर्भ

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance – ISA) ने स्काटलैंड का सबसे बड़े शहर ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में नवंबर 2021 तक विश्व सौर बैंक (World Solar Bank – WSB) को अनावृत करने की योजना बनाई है.

INDIAN SOLAR ALLIANCE - ISA

विश्व सौर बैंक

विश्व सौर बैंक का मुख्यालय भारत में स्थापित किए जाने की पुरजोर संभावना है. यह पहला बहुपक्षीय विकास बैंक होगा, जिसे भारत में स्थापित किया जाएगा. WSB के माध्यम से अगले 10 वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के सदस्य देशों को लगभग 50 बिलियन डॉलर देने की योजना है.

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन

  • ISA (International Solar Alliance) की स्थापना CoP21 पेरिस घोषणा के अनुसार हुई है. 6 दिसम्बर, 2017 को ISA का फ्रेमवर्क समझौता लागू हो गया और इसके साथ ही यह संधि पर आधारित एक अंतर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन के तौर पर औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया.
  • इस संघ का उद्देश्य है सौर ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना जिससे पेट्रोल, डीजल पर निर्भरता कम की जा सके.
  • सौर संघ का प्रधान लक्ष्य विश्व-भर में 1,000 GW सौर ऊर्जा का उत्पादन करना और इसके लिए 2030 तक सौर ऊर्जा में 1,000 बिलियन डॉलर के निवेश का प्रबंध करना है.
  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय, अंतर-सरकारी संघ है जो आपसी समझौते पर आधारित है.
  • अब तक 54 देशों ने इसके फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.
  • यह 121 ऐसे देशों का संघ है जो सौर प्रकाश की दृष्टि से समृद्ध हैं. 
  • ये देश पूर्ण या आंशिक रूप से कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित हैं.
  • इसका मुख्यालय भारत में है और इसका अंतरिम सचिवालय फिलहाल गुरुग्राम में बन रहा है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG) परियोजना

  • OSOWOG अक्षय ऊर्जा संसाधनों को आपस में जोड़ने के लिए वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण भारत द्वारा प्रारम्भ की गयी एक पहल है.
  • OSOWOG का ब्लू प्रिंट विश्व बैंक के तकनीकी सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित किया जाएगा.
  • OSOWOG को तीन चरणों में पूरा करने की योजना है. इसके पहले चरण में मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया (MESASEA) को परस्पर जोड़ा जाएगा. दूसरे चरण में अफ्रीका को जोड़ा जाएगा और तीसरे एवं आखिरी चरण में पूरी परियोजना का वैश्वीकरण होगा.

OSOWOG को बढ़ावा देनी वाली पहल

  • सोलर मिनी ग्रिड कार्यक्रम: वैश्विक सलाहकार कंपनी डेलॉयट के समर्थन में आईएसए सचिवालय, मिनी-ग्रिड कार्यक्रम के लिए एक ठोस कार्यान्वयन योजना विकसित कर रहा है. आईएसए सचिवालय ने राष्ट्रीय फोकल बिंदुओं के लिए एक मॉडल मिनी-ग्रिड नीति का मसौदा भी तैयार किया.
  • वर्ल्ड सोलर बैंक: भारत द्वारा OSOWOG को धरातल पर उतारने हेतु आने वाली वित्तीय चुनौतियों के मद्देनजर इस परियोजना के लिए समुचित मात्रा में वित्त आपूर्ति हेतु वर्ल्ड सोलर बैंक’ (World Solar Bank- WSB) की स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं.
  • स्केलिंग सोलर रूफटॉप:आईएसए सचिवालय पेरू और घाना के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि रूफ-टॉप परियोजनाओं की तैयारी के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की जा सके. आईएसए सचिवालय ने भारत में RESCO मॉडल के तहत रूफटॉप सौर पैनल के लिए दूतावासों/मिशनों को प्रस्ताव भी दिया है.
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का विस्तार: पहले जहां अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का दायरा केवल उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों तक था अब इसे बढ़ाकर विश्व के सभी देशों के लिए कर दिया गया है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora- their structure, mandate. Disaster and disaster management.

Topic : Food and Agriculture Organization

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization – FAO) और आर्बर डे फाउंडेशन ने हाल ही में हैदराबाद को2020 ट्री सिटी ऑफ द वर्ल्ड के रूप में मान्यता दी है. हैदगबाद को शहरी जंगलों को विकसित करने और बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए चुना गया है. ज्ञातव्य है कि FAO द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य शहरों में 63 देशों के 120 शहर सम्मिलित हैं. इनमें से ज्यादातर शहर अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के हैं.

Food and Agriculture Organization - FAO

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन

  • संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की स्थापना वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतर्गत की गई थी.
  • इसका मुख्यालय रोम (Rome), इटली में है. 130 देशों में इसके क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं.
  • यह संगठन सरकारों और विकास एजेंसियों को कृषि, वानिकी (forestry), मत्स्यपालन तथा भूमि एवं जल संसाधन से सम्बंधित गतिविधियों के संचालन में सहायता करता है. यह विभिन्न परियोजनाओं के लिए तकनीकी सहायता देने के अलावा शोध कार्य भी करता है.
  • यह शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण (training) कार्यक्रम भी चलाता है और कृषि उत्पादन और विकास से सम्बंधित आंकड़े भी इकठ्ठा करता है.
  • FAO वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा के लिये कार्य करता है. इस संस्था का लक्ष्य भूक मिटाना और पोषण का स्तर ऊँचा करना है.
  • इसका ध्येय वाक्य (motto) है – Fiat Panis अर्थात् लोगों को रोटी मिले…
  • आपको जानना चाहिए कि FAO संयुक्त राष्ट्र की सबसे वृहद् एजेंसी है.
  • वर्तमान में इस संगठन के सदस्यों देशों की संख्या 197 है (according to Wikipedia). इसके अन्दर 194 देश, 1 संगठन और 2 संलग्न सदस्य (associate members) होते हैं.

भारत और एफएओ

  1. समाज के कमजोर वर्ग और समूहों को आर्थिक रूप से और पोषाहार के मामले में सशक्त बनाने के लिए एफएओ के अबतक के प्रयास अद्वितीय रहे हैं.
  2. भारत का एफएओ के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है. भारतीय सिविल सेवा के अधिकारी डॉ बिनय रंजन सेन 1956-1967 के दौरान एफएओ के महानिदेशक थे.
  3. 2020 में नोबेल शांति पुरस्कार जितने वाले विश्व खाद्य कार्यक्रम की स्थापना उनके समय में ही की गई थी.
  4. वर्ष 2016 को अंतर्राष्ट्रीय दलहन और 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किए जाने के भारत के प्रस्तावों को भी एफएओ द्वारा समर्थन दिया गया.

कुपोषण की समस्या से निबटने के प्रयास

  • भारत ने 10 करोड़ से अधिक लोगों को लक्षित करते हुए एक महत्त्वाकांक्षी पोषण अभियान प्रारम्भ किया है, जिसका उद्देश्य शारीरिक विकास में बाधा, कुपोषण, एनीमिया और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्या से निजात पाना है. कुपोषण एक वैश्विक समस्या है जिसके कारण दो अरब लोग मूल पोषक तत्वों की कमी से पीड़ित हैं. बच्चों में लगभग 45 प्रतिशत मौतें कुपोषण से सम्बंधित हैं. ऐसे में यह अभियान सही मायने में संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों में से एक है.
  • अंतर्राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरुप सूक्ष्म पोषक तत्वों लौह, जस्ता, कैल्शियम, सकल प्रोटीन, लाइसिन और ट्रिप्टोफैन की अधिकता वाले गुणवत्ता युक्त प्रोटीन, एन्थोकायनिन, प्रोविटामिन ए और ओलिक एसिड से भरे पोषक तत्त्वों की समृद्ध किस्मों के विकास को सरकार द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है.
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के नेतृत्व में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के तहत पिछले पाँच वर्षों के दौरान फसलों की 53 ऐसी किस्मों का विकास किया गया. वर्ष 2014 से पूर्व मात्र एक बायोफॉर्टिफाइड किस्म विकसित की गई थी. 

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

नीचे कुछ इसी तरह की प्रमुख विशिष्ट एजेंसियों के नाम दिए गए हैं और बगल में उनके मुख्यालय का भी उल्लेख है –

  • FAO (Food and Agriculture Organization) – रोम, इटली
  • ILO (International Labour Organization) – जेनवा, स्विट्ज़रलैंड
  • IMF (International Monetary Fund) – वाशिंगटन DC, अमेरिका
  • UNESCO (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) – पेरिस, फ़्रांस
  • WHO (World Health Organization) – जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड
  • WIPO (World Intellectual Property Organization) – जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

प्रधानमंत्री द्वारा देश को समर्पित की जाने वाली 8 फसलों की हाल ही में विकसित जैव-विविधता वाली किस्में पोषण के मामले में 3.0 गुना अधिक हैं. चावल की किस्म सीआर धान 315 जस्ता की अधिकता वाली है; गेहूं की एचडी 3298 किस्म प्रोटीन और लौह से जबकि DBW 303 और DDW 48 प्रोटीन और लौह से समृद्ध है. मक्का की हाइब्रिड किस्म 1, 2 और 3 लाइसिन और ट्राइप्टोफैन से, बाजरे की  सीएफएमवी 1 और 2 फिंगर किस्म  कैल्शियम, लोहा और जस्ता से भरपूर है. छोटे बाजारे की सीसीएलएमवी 1 किस्म लौह और जस्ते से भरपूर है.  पूसा सरसों 32 कम एरियूसिक एसिड से जबकि मूंगफली की गिरनार 4 और 5 किस्म  बढ़े हुए ओलिक एसिड से तथा रतालू की श्री नीलिमा तथा डीए 340 किस्म एंथोसायनिन से प्रचुर है.

फसलों की ये किस्में, अन्य खाद्य सामग्री के साथ, सामान्य भारतीय थाली को पोषक तत्वों वाली थाली में बदल देंगी. इन किस्मों को स्थानीय भूमि और किसानों द्वारा विकसित किस्मों   का उपयोग करके विकसित किया गया है. उच्च जस्ता युक्त चावल की किस्म गारो पर्वतीय क्षेत्र तथा  गुजरात के डांग जिले से संग्रहित की गई है.

आईसीएआर ने पोषण संबंधी सुरक्षा को बढ़ाने के लिए परिवार को खेती से जोड़ने के लिए न्यूट्री-सेंसिटिव एग्रीकल्चर रिसोर्सेज एंड इनोवेशंस (NARI) कार्यक्रम शुरू किया है, पोषण सुरक्षा बढ़ाने के लिए पोषक-स्मार्ट गांवों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुनिश्चित करने के लिए केवीके द्वारा सूक्ष्म पोषक तत्वों से युक्त स्वस्थ और विविध आहार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराए जाने के लिए  विशिष्ट पोषण उद्यान मॉडल विकसित और प्रचारित किए जा रहे हैं.  .

कुपोषण को कम करने और प्राकृतिक रूप से समृद्ध खाद्य सामग्री के माध्यम से भारत को कुपोषण से मुक्त बनाने के लिए  जैव-फोर्टिफाइड फसलों की किस्मों के उत्पादन को बढ़ावा देकर इन्हें मध्यान्ह भोजन, आंगनवाड़ी आदि जैसे सरकारी कार्यक्रमों के साथ जोड़ा जाएगा. यह किसानों के लिए अच्छी आमदनी सुनिश्चित करेगा तथा उनके लिए उद्यमिता के नए रास्ते खोलेगा.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : QUAD

संदर्भ

हाल ही में, क्वाड समूह (QUAD Group) के सदस्यों का एक मंत्रिस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया.

  1. सदस्यों द्वारा, म्यांमार में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को बहाल करने की तत्काल आवश्यकता, और विस्तृत क्षेत्र में लोकतांत्रिक लचीलेपन को मजबूत करने की प्राथमिकता पर चर्चा की गयी.
  2. इस सम्मलेन का उद्देश्य चारों सदस्य देशों के बीच समुद्रीय सहयोग में वृद्धि करना था.

QUAD GROUP COUNTRIES

QUAD क्या है?

  • Quad एक क्षेत्रीय गठबंधन है जिसमें ये चार देश शामिल हैं – ऑस्ट्रेलिया, जापान, भारत और अमेरिका.
  • ये चारों देश प्रजातांत्रिक देश हैं और चाहते हैं कि समुद्री व्यापार और सुरक्षा विघ्नरहित हो.
  • Quad की संकल्पना सबसे पहले जापान के प्रधानमन्त्री Shinzo Abe द्वारा 2007 में दी गई थी. परन्तु उस समय ऑस्ट्रेलिया के इससे निकल जाने के कारण यह संकल्पना आगे नहीं बढ़ सकी.

QUAD का महत्त्व

  • मुक्त, खुला, समृद्ध और समावेशी भारत-प्रशांत क्षेत्र: भारत-प्रशांत वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के केंद्र के रूप में उभरा है.
  • विश्व का दो-तिहाई कंटेनर व्यापार इस क्षेत्र से होता है.
  • आर्थिक रूप से, इस रणनीति को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के प्रति प्रतिक्रिया के रूप में माना जाता है, जो चीन-केंद्रित व्यापार मार्ग स्थापित कर रहा है.
  • क्वाड चीन की बढ़ती हठधर्मिता और वर्धित वैश्विक घुसपैठ को नियंत्रित करने हेतु एक सशक्त समूह सिद्ध हो सकता है.

अमरीका के लिए QUAD का महत्त्व

चीन इस क्षेत्र में एकतरफ़ा निवेश और राजनैतिक संधियाँ कर रहा है. अमेरिका इसे अपने वर्चस्व पर खतरा मानता है और चाहता है कि चीन की आक्रमकता को नियंत्रित किया जाए. चीन के इन क़दमों का प्रत्युत्तर देने के लिए अमेरिका चाहता है कि Quad के चारों देश आपस में सहयोग करते हुए ऐसी स्वतंत्र, सुरक्षात्मक और आर्थिक नीतियाँ बनाएँ जिससे क्षेत्र में चीन के बढ़ते वर्चस्व को रोका जा सके. भारत-प्रशांत सागरीय क्षेत्र में चीन स्थायी सैन्य अड्डे स्थापित करना चाह रहा है. चारों देशों को इसका विरोध करना चाहिए और चीन को यह बता देना चाहिए कि वह एकपक्षीय सैन्य उपस्थिति की नीति छोड़े और क्षेत्र के देशों से विचार विमर्श कर उनका सहयोग प्राप्त करे. चारों देश अपने-अपने नौसैनिक बेड़ों को सुदृढ़ करें और अधिक शक्तिशाली बाएँ तथा यथासंभव अपनी पनडुब्बियों को आणविक प्रक्षेपण के लिए समर्थ बानाएँ.

भारत का दृष्टिकोण

भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते क़दमों को नियंत्रित करना न केवल अमेरिका के लिए, अपितु भारत के लिए उतना ही आवश्यक है. भारत चीन का पड़ोसी है और वह चीन की आक्रमकता का पहले से ही शिकार है. आये दिन कोई न कोई ऐसी घटनाएँ घटती रहती हैं जो टकराव का कारण बनती हैं. इसके अतिरिक्त यदि चीन भारत-प्रशांत क्षेत्र में हावी हो गया तो वह भारत के लिए व्यापारिक मार्गों में रुकावटें खड़ी करेगा और साथ ही इस क्षेत्र के अन्य देशों को अपने पाले लाने में का भरसक प्रयास करेगा. अंततोगत्वा भारत को सामरिक और आर्थिक हानि पहुँचेगी. सैनिक दृष्टि से भी भारत कमजोर पड़ सकता है. अतः यह उचित ही है कि Quad के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका से मिलकर भारत भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए ऐसी नीति तैयार करे और ऐसे कदम उठाये जिससे चीन को नियंत्रण के अन्दर रखा जाए. कुल मिलाकर यह इन चारों देशों के लिए ही नहीं, अपितु यह पूरे विश्व की शांति के लिए परम आवश्यक है.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Indian Constitution- historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure.

Topic : DELIMITATION OF CONSTITUENCIES

संदर्भ

हाल ही में, जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग द्वारा की गयी पहली बैठक में, फारूक अब्दुल्ला और नेशनल कांफ्रेंस के अन्य नेताओं ने भाग नहीं लिया.

पृष्ठभूमि

जम्मू और कश्मीर के लिए परिसीमन आयोग का गठन केंद्र द्वारा पिछले साल 6 मार्च को जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अनुसार केंद्रशासित प्रदेश के लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने के लिए किया गया था. विदित हो कि, ‘जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम’, 2019 द्वारा राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था.

परिसीमन क्या है?

परिसीमन का शाब्दिक अर्थ विधान सभा से युक्त किसी राज्य के अन्दर चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निधारण होता है.

परिसीमन का कार्य कौन करता है?

  • परिसीमन का काम एक अति सशक्त आयोग करता है जिसका औपचारिक नाम परिसीमन आयोग है.
  • यह आयोग इतना सशक्त होता है कि इसके आदेशों को कानून माना जाता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
  • आयोग के आदेश राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित तिथि से लागू हो जाते हैं. इन आदेशों की प्रतियाँ लोक सभा में अथवा सम्बंधित विधान सभा में उपस्थापित होती हैं. इनमें किसी संशोधन की अनुमति नहीं होती.

परिसीमन आयोग और उसके कार्य

  • संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार संसद प्रत्येक जनगणना के पश्चात् एक सीमाकंन अधिनियम पारित करता है और उसके आधार पर केंद्र सरकार एक परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन करती है.
  • इस आयोग में सर्वोच्च न्यायालय का एक सेवा-निवृत्त न्यायाधीश, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त सदस्य होते हैं.
  • इस आयोग का काम चुनाव क्षेत्रों की संख्या और सीमाओं का इस प्रकार निर्धारण करना है कि यथासम्भव सभी चुनाव क्षेत्रों की जनसंख्या एक जैसी हो.
  • आयोग का यह भी काम है कि वह उन सीटों की पहचान करे जो अजा/अजजा के लिए आरक्षित होंगे. विदित हो कि अजा/अजजा के लिए आरक्षण तब होता है जब सम्बंधित चुनाव-क्षेत्र में उनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है.
  • सीटों की संख्या और आकार के बारे में निर्णय नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जाता है.
  • यदि आयोग के सदस्यों में किसी बात को लेकर मतभेद हो तो बहुत के मत को स्वीकार किया जाता है.
  • संविधान के अनुसार, परिसीमन आयोग का कोई भी आदेश अंतिम होता है और इसको किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
  • प्रारम्भ में आयोग भारतीय राज्य पत्र में अपने प्रस्तावों का प्रारूप प्रकाशित करता है और पुनः उसके विषय में जनता के बीच जाकर सुनवाई करते हुए आपत्ति, सुझाव आदि लेता है. तत्पश्चात् अंतिम आदेश भारतीय राजपत्र और राज्यों के राजपत्र में प्रकाशित कर दिया जाता है.

परिसीमन आवश्यक क्यों?

जनसंख्या में परिवर्तन को देखते हुए समय-समय पर लोक सभा और विधान सभा की सीटों के लिए चुनाव क्षेत्र का परिसीमन नए सिरे से करने का प्रावधान है. इस प्रक्रिया के फलस्वरूप इन सदनों की सदस्य संख्या में भी बदलाव होता है.

परिसीमन का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के अलग-अलग भागों को समान प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराना होता है. इसका एक उद्देश्य यह भी होता है कि चुनाव क्षेत्रों के लिए भौगोलिक क्षेत्रों को इस प्रकार न्यायपूर्ण ढंग से बाँटा जाए जिससे किसी एक राजनीतिक दल को अन्य दलों पर बढ़त न प्राप्त हो.

चुनाव क्षेत्र परिसीमन का काम कब-कब हुआ है?

  • चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन का काम सबसे पहले 1950-51 में हुआ था. संविधान में उस समय यह निर्दिष्ट नहीं हुआ था कि यह काम कौन करेगा. इसलिए उस समय यह काम राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के सहयोग से किया था.
  • संविधान के निर्देशानुसार चुनाव क्षेत्रों का मानचित्र प्रत्येक जनगणना के उपरान्त फिर से बनाना आवश्यक है. अतः 1951 की जनगणना के पश्चात् 1952 में परिसीमन आयोग अधिनियम पारित हुआ. तब से लेकर 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन का काम हुआ. उल्लेखनीय है कि 1976 में आपातकाल के समय इंदिरा गाँधी ने संविधान में संशोधन करते हुए परिसीमन का कार्य 2001 तक रोक दिया था. इसके पीछे यह तर्क दिया था गया कि दक्षिण के राज्यों को शिकायत थी कि वे परिवार नियोजन के मोर्चे पर अच्छा काम कर रहे हैं और जनसंख्या को नियंत्रण करने में सहयोग कर रहे हैं जिसका फल उन्हें यह मिल रहा है कि उनके चुनाव क्षेत्रों की संख्या उत्तर भारत के राज्यों की तुलना में कम होती है. अतः1981 और 1991 की जनगणनाओं के बाद परिसीमन का काम नहीं हुआ.
  • 2001 की जनगणना के पश्चात् परिसीमन पर लगी हुई इस रोक को हट जाना चाहिए था. परन्तु फिर से एक संशोधन लाया गया और इस रोक को इस आधार पर 2026 तक बढ़ा दिया कि तब तक पूरे भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर एक जैसी हो जायेगी. इसी कारण 2001 की जनगणना के आधार पर किये गये परिसीमन कार्य (जुलाई 2002 – मई 31, 2018) में कोई ख़ास काम नहीं हुआ था. केवल लोकसभा और विधान सभाओं की वर्तमान चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं को थोड़ा-बहुत इधर-उधर किया गया था और आरक्षित सीटों की संख्या में बदलाव लाया गया था.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Awareness in space.

Topic : Preserverance Rover

संदर्भ

द्वारा मंगल ग्रह पर भेजा गया प्रीज़रवेरेंस (Preserverance) रोवर, 18 फ़रवरी 2021 को मंगल की सतह पर उतर गया. रोवर की सॉफ्ट लैंडिंग के लिए 6 इंजन वाले एक जेटपैक का उपयोग किया गया, जिसने लैंडिंग की रफ्तार को 2.7 किमी/प्रति घंटा तक धीमा कर दिया.

पृष्ठभूमि

ज्ञातव्य है कि NASA ने 30 जुलाई, 2020 को अपना मंगल 2020 मिशन एटलस 5 राकेट की सहायता से लॉन्च किया था. यह मिशन नासा के मंगल अन्वेषण कार्यक्रम का एक हिस्सा है.

प्रीज़रवेरेंस रोवर

  • इस मिशन में प्रीज़रवेरेंस रोवर का भी प्रयोग किया गया है. यह रोवर मंगल की तस्वीरें भेजेगा और वहाँ की चट्टानों और धूल के नमूनों को एकत्र करेगा.
  • यह रोवर 6 पहिये वाला है तथा इसका वजन 1040 किलो है.
  • यह 18 फरवरी, 2021 को मंगल की सतह पर जेज़ेरो क्रेटर पर उतरा है.
  • वैज्ञानिकों के अनुमानों के अनुसार ज़ेजेरो लगभग 3.5 मिलियन साल पहले 250 मीटर गहरी एवं 45 किलोमीटर क्षेत्र में फैली एक जल से भरी झील थी, जो कालांतर में सूख गई, परन्तु अभी भी यहाँ जीवन के साक्ष्य मिलने की प्रबल संभावना है.

Ingenuity

Ingenuity एक रोबोट हेलिकॉप्टर है, जिसे नासा के इस मंगल मिशन में रोवर के साथ संलग्न करके भेजा गया है. मिशन से जुड़ा हुआ यह हेलिकॉप्टर परीक्षण करेगा कि मंगल पर स्थितियाँ उड़ान को किस प्रकार प्रभावित करती हैं.


Prelims Vishesh

Enhanced delegation of Financial Powers to Armed Forces :-

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया-2020 की अन्य पूँजीगत खरीद प्रक्रिया (OCPP) के तहत पूँजीगत क्रय (100 करोड़ रुपये तक) के अंतर्गत सशस्त्र बलों में उप प्रमुख से निचले स्तर के अधिकारियों की वित्तीय शक्तियों में बढ़ोतरी को स्वीकृति प्रदान की है.
  • ऐसा पहली बार है जब सशस्त्र बलों में वित्तीय शक्तियों को उप-प्रमुख स्तर से नीचे के अधिकारियों को प्रत्यायोजित किया गया है.
  • यह कदम एक दृढ़ रक्षा औद्योगिक तंत्र के लिए सरकार के “आत्मनिर्भमर भारत और मेक इन इंडिया” की दृष्टि के अनुरूप है.

ECOPact Green Concrete  :-

  • यह एक उच्च निष्पादन क्षमता युक्त, संधारणीय और चक्रीय निर्माण कार्य के लिए प्रारंभ की गई कंक्रीट की नवीन अल्प-कार्बन युक्त शृंखला है.
  • इसमें मानक कंक्रीट की तुलना में 30-50% कम कार्बन सामग्री समाविष्ट है.
  • इसके अतिरिक्त, यह पारंपरिक कंक्रीट की तुलना में बेहतर स्थायित्व (टिकाऊपन) और परिष्करण युक्त है.

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