Sansar डेली करंट अफेयर्स, 20 August 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 20 August 2019


GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture – salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Char Dham pilgrimage

संदर्भ

उत्तराखंड के चार तीर्थों को 900 किलोमीटर की सभी ऋतुओं में सुगम सड़कों से जोड़ने के लिए बनाई गई चारधाम राजमार्ग परियोजना को सर्वोच्च न्यायालय की हरी झंडी मिल गई है. परन्तु सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को निर्देश दिया है कि परियोजना से जुड़े हुए पर्यावरण विषयक मामलों को देखने के लिए 22 अगस्त, 2019 तक एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करे.

chaar dhaam 900 km project map

 

उच्च स्तरीय समिति का स्वरूप और कार्य

  • इस समिति में ये सदस्य होने चाहिएँ – भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के प्रतिनिधि, अन्तरिक्ष विभाग के अधीनस्थ संचालित भौतिक शोध प्रयोगशाला के प्रतिनिधि तथा रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि.
  • सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार यह समिति हर पखवाड़े में बैठक करे और किये गये कार्य का अनुपालन सुनिश्चित करे. साथ ही प्रत्येक समीक्षा-बैठक के बाद सुझाव दे कि और क्या-क्या उपाय किये जा सकते हैं.
  • यह समिति विचार करे कि चारधाम परियोजना का समूची हिमालय घाटी पर क्या प्रभाव पड़ रहा है.
  • समिति सुझाव दे कि किन क्षेत्रों में वन रोपण किया जाए और वहाँ कौन-कौन से पौधे लगाये जाएँ.

पृष्ठभूमि

गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ को चार लेन वाले राजमार्ग से जोड़ने की योजना उत्तराखंड के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की एक मूर्धन्य योजना है.

परन्तु क्योंकि इसके लिए बनाई जाने वाली 900 किलोमीटर की सड़क उत्तराखंड के संवेदनशील पहाड़ों से होकर गुजरेगी, इस कारण कई पर्यावरणवादियों ने यह चिंता जताई है कि राजमार्ग बनने से और क्षेत्र में पर्यटकों के आने से पर्यावरण को क्षति पहुँच सकती है. 

चारधाम परियोजना क्या है?

  • इस परियोजना के अंतर्गत 900 किलोमीटर का राजमार्ग बनाया जाएगा जो हिंदू तीर्थ – गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ– को जोड़ेगा. इस पर अनुमानित खर्च 12,000 करोड़ रु. होगा.
  • इस राजमार्ग को चारधाम महामार्ग कहा जाएगा और इसके निर्माण की परियोजना का नाम चारधाम महामार्ग विकास परियोजना (Char Dham Highway Development Project) होगा.
  • इस परियोजना के अन्दर वर्तमान सड़कों की चौड़ाई को 12 मीटर से बढ़ाकर 24 मीटर किया जाएगा. इसके अतिरिक्त कई स्थानों पर सुरंग, बाइपास, पुल, भूमिगत मार्ग एवं जल-निकास बनाए जाएँगे.

चारधाम तीर्थयात्रा परियोजना

  • भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की एक मूर्धन्य परियोजना है उत्तराखंड में स्थित तीर्थस्थानों – गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ – को जोड़ने वाला एक चार मार्गों वाला एक्सप्रेस वे का निर्माण करना.
  • इस एक्सप्रेस वे की सम्पूर्ण लम्बाई 900 किलोमीटर की होगी. परन्तु कुछ पर्यावरणवादियों ने इस योजना का यह कहते हुए विरोध किया है कि इससे प्रदेश का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जायेगा. इसके लिए इन पर्यावरणवादियों ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दे रखी थी.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Krushak Assistance for Livelihood and Income Augmentation or KALIA Scheme

संदर्भ

ओडिशा सरकार द्वारा चलाई गई योजना “कालिया” (Krushak Assistance for Livelihood and Income Augmentation) में एक बहुत बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. पता चला है कि इस योजना में अपात्र लाभार्थी घुस गये हैं और उन्होंने इसका लाभ भी उठा लिया है. अब सरकार को ऐसे लाभार्थियों को योजना से निकालने में अत्यंत कठिनाई हो रही है.

गड़बड़ी क्या हुई?

  • कालिया योजना के अंतर्गत अभी तक 51 लाख कर्ज लेने वाले और कर्ज नहीं लेने वाले किसानों, बटाईदारों और भूमिहीन कृषि श्रमिकों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है.
  • अधिकारियों को अब पता चला है कि इनमें सभी व्यक्ति योजना के लाभ की पात्रता नहीं रखते थे. अतः उन्होंने उन सभी को पैसा लौटाने को कहा है.
  • कई मामलों में एक ही परिवार के अनेक व्यक्ति लाभ लेने में सफल हो गये हैं.
  • अधिकांश प्रखंडों में योजना के लिए आवेदन देने वालों की संख्या उस प्रखंड में रासन कार्ड रखने वाले परिवारों की संख्या से अधिक हो है.

योजना के मुख्य तथ्य

  • इस योजना के अनुसार खरीफ और रबी दोनों मौसमों के आरम्भ में प्रत्येक कृषक परिवार को खेती करने में आर्थिक सहायता देने के लिए 5-5 हजार रु. (कुल 10,000 रु.) दी जाती है.
  • जो किसान बुढ़ापा, दिव्यांगता, रोग अथवा अन्य कारणों से खेती शुरू करने में असमर्थ हैं, इस राशि से उन्हें मदद मिलती है.
  • इस योजना में भूमिहीन परिवारों की आजीविका पर भी ध्यान दिया गया है. इस योजना से विशेषरूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवारों को लाभ मिलता है.
  • किस परिवार को इस योजना का लाभ मिलेगा इसकी पहचान और चुनाव ग्राम पंचायत करती है.
  • दो वर्षों में इस योजना के तहत दस लाख घरबारों को सहायता प्रदान करने का लक्ष्य है.
  • योजना में जीवन बीमा का भी प्रावधान है. यह बीमा दो लाख रु. की होती है. इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत दुर्घटना के लिए भी 2 लाख रु. का इंतजाम है.
  • यह बीमा किसानों और भूमिहीन कृषि श्रमिकों को दी जाती है. इस प्रकार इससे 74 लाख घरबारों को लाभ मिलता है.

योजना की महत्ता

कालिया एक ऐतिहासिक पहल है जो ओडिशा राज्य में कृषि गत समृद्धि बढ़ाने और निर्धनता घटाने में बहुत सहायता पहुंचाती है. इसका दायरा बहुत बड़ा है और इसके द्वारा किये गये आर्थिक निवेश से उन किसानों और मजदूरों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ होता है जिन्हें पैसे की आवश्यकता रहती है. ये पैसे उन्हें प्रत्यक्ष लाभ स्थानान्तरण (Direct Benefit Transfer – DBT) दिए जाते हैं.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : National Essential Diagnostics List (NEDL)

संदर्भ

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (ICMR) ने भारत की पहली राष्ट्रीय आवश्यक निदान सूची (National Essential Diagnostics List – NEDL) तैयार कर ली है.

NEDL क्या है और उसका महत्त्व क्या है?

  • वर्तमान में आवश्यक निदान के अंतर्गत सभी चिकित्सा उपकरण और इन-विट्रो निदान उपकरण (in-vitro diagnostic device – IVD) नहीं आते हैं. इस कमी को दूर करने के लिए NEDL तैयार की गई है.
  • इस प्रकार भारत के पास पहली बार एक ऐसी सूची उपलब्ध हो गयी है जो सरकार को इस विषय में मार्गनिर्देश का काम कर सकती है कि वह गाँवों और सुदूर क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केन्द्रों को किस प्रकार के निदान परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराए. इस प्रकार की सूची विश्व में किसी और देश के पास नहीं है.
  • यह सूची गाँव से लेकर जिला-स्तर के स्वास्थ्य केन्द्रों के उपयोग के लिए है.
  • इसके पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने निदान से सम्बंधित कुछ पहलें अपनाई थी, जैसे – निःशुल्क निदान सेवा पहल आदि जिनके माध्यम से जन-स्वास्थ्य तन्त्र के विभिन्न स्तरों पर प्रयुक्त होने वाले निदान परीक्षणों की संख्या बढ़ाई गई थी.

NEDL की आवश्यकता

  • स्वास्थ्य एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए निदान का अत्यंत महत्त्व होता है.
  • भारत जैसे माध्यम आय वाले देशों में निदान की सुलभता एक चुनौती होती है. वहीं दूसरी ओर यहाँके बाजार में कम लागत वाले निदानों की सुविधा तो होती है परन्तु उनके माध्यम से किया गया निदान सटीक नहीं होता है.
  • NEDL लागू होने से एक ओर जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, वहीं दूसरी ओर रोगियों को रोगमुक्त होने में सहायता मिलेगी. साथ ही रोगियों को अपनी जेब से कम खर्च करना पड़ेगा.
  • NEDL जन-स्वास्थ्य केन्द्रों के कारगर उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा.
  • इस सूची के माध्यम से रोगों का कुशल आकलन संभव होगा तथा यह जानकारी मिलेगी कि कौन-से रोग अधिक प्रचलन में हैं.
  • NEDL वस्तुतः रोगों पर नज़र रखेंगे तथा रोगों के फैलाव को समझने में सहायता करेंगे. इनसे जीवाणु प्रतिरोध के संकट के समाधान में भी मदद मिलेगी.

GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : BASIC countries

संदर्भ

पिछले दिनों ब्राजील के साओ पोलो नगर में जलवायु परिवर्तन से सम्बंधित BASIC देशों की 28वीं मंत्रिस्तरीय बैठक हुई.

BASIC देश

  • BASIC देश के अंतर्गत चार बड़े परन्तु नए-नए औद्योगिकीकृत देश आते हैं – ब्राजील, साउथ अफ्रीका, भारत और चीन. यह भू-राजनैतिक गठबंधन नवम्बर 2009 में एक समझौते के द्वारा बना था.
  • इस मंच के जरिये जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 2009 से समुचित उपायों पर मुख्य रूप से चर्चा की जाती है.
  • जलवायु परिवर्तन के विषय में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम पर चर्चा के लिए प्रत्येक 6 महीने में एक बार बेसिक राष्ट्रों का एक मंत्री-स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाता है.
  • इसमें तकनीकी, आर्थिक तथा रणनीतिक सहयोग संबंधित संयु्क्त सहयोग की प्रतिबद्धता दिखलाई जाती है.
  • हाल ही में भारत का समर्थन करते हुए बेसिक ने यूरोपीय संघ द्वारा बाहरी विमानों पर लगाए जा रहे कार्बन कर का भी कड़ा विरोध दर्ज़ किया है.
  • BASIC देशों का मानना है कि यूरोपीय संघ को यह कर तत्काल खारिज कर देना चाहिए, क्योंकि यह कर संयुक्त राष्ट्र के बहु-पक्षवाद (Multi-lateralism) की भावना के विरुद्ध है.

BASIC के गठन का महत्त्व

  • जिन देशों ने BASIC समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं, वे सभी इस बात पर सहमत हैं कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को घटाया जाए और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए आवश्यक कोष का संग्रह किया जाए.
  • BASIC समूह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण समूह है क्योंकि इस समूह के देशों की अर्थव्यवस्थाएँ विशाल हैं और इनकी जनसंख्या भी बहुत बड़ी है.
  • यदि क्षेत्रफल की दृष्टि से विचार किया जाए तो BASIC देशों का क्षेत्रफल विश्व के भौगोलिक क्षेत्रफल का एक-तिहाई है. इनकी जनसंख्या भी विश्व का 40% है. अतः यदि BASIC देश सहमति से किसी विषय में एक स्वर में बोलते हैं तो उसका बड़ा प्रभाव पड़ता है.
  • BASIC समूह जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए बने कई समूहों में से एक है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic : Legislative Council

संदर्भ

पिछले दिनों मध्य प्रदेश सरकार ने संकेत दिया है कि वह राज्य में एक विधान परिषद् के सृजन की योजना बना रही है.

पिछले दिनों मध्य प्रदेश सरकार ने संकेत दिया है कि वह राज्य में एक विधान परिषद् (State Legislative Council) के सृजन की योजना बना रही है.

विधान परिषद् के बारे में जानकारी

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 169 में राज्यों में विधान परिषद् के गठन का उल्लेख है.
  • संविधान के अनुसार इस परिषद् के सदस्यों की कुल संख्या विधान सभा के कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई भाग से ज्यादा नहीं हो सकती, लेकिन कम-से-कम 40 सदस्य होना अनिवार्य है.
  • यह एक स्थायी सदन है, जिसका कभी भी विघटन नहीं होता है.
  • इसके प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है.
  • प्रत्येक 2 वर्ष पर इसके एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं.
  • इस परिषद् के एक-तिहाई सदस्य स्थानीय संस्थाओं, नगरपालिका, जिला परिषद् आदि के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं. एक-तिहाई सदस्य विधान सभा के सदस्यों के द्वारा चुने जाते हैं. 1/12 सदस्य राज्य के उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों एवं कॉलेजों में कम-से-कम तीन वर्ष का अनुभव रखने वाले अध्यापकों के द्वारा चुने जाते हैं. 1/12 सदस्य सम्बंधित राज्य के वैसे निवासी जो भारत के किसी विश्वविद्यालय से स्नातक हों एवं जिन्होंने स्नातक की उपाधि कम-से-कम तीन वर्ष पहले प्राप्त कर ली हो, के द्वारा चुने जाते हैं. शेष 1/6 सदस्य राज्यपाल के द्वारा कला, साहित्य, विज्ञान, सहकारिता तथा समाज सेवा के क्षेत्र में राज्य के ख्याति प्राप्त व्यक्तियों से मनोनीत किये जाते हैं.
  • विधान परिषद् का अधिवेशन आरम्भ होने के लिए इसके कुल सदस्यों का 1/10 भाग या कम-से-कम 10 सदस्य (जो भी ज्यादा हों) का होना आवश्यक है.
  • इस परिषद् के सदस्यों को सदन में वक्तव्य देने की पूर्ण स्वतंत्रता है एवं उनके द्वारा दिए गये किसी भी वक्तव्य के लिए किसी न्यायालय में किसी भी प्रकार का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है.
  • इस परिषद् के सदस्यों को सदन का सत्र प्रारभ होने के 40 दिन पहले एवं सत्र समाप्त होने के 40 दिन के बाद के बीच में दीवानी मुकदमों के लिए बंदी नहीं बनाया जा सकता है.
  • विधान परिषद् का सत्र राज्यपाल द्वारा बुलाया जाता है. किसी एक वर्ष में इसका कम-से-कम दो सत्र होना आवश्यक है एवं एक सत्र के अंतिम दिन तथा दूसरे सत्र के प्रथम दिन के बीच 6 महीने से ज्यादा का समयांतर नहीं होना चाहिए.

विधान परिषद् सदस्य बनने की योग्यताएँ

  1. वह भारत का नागरिक हो एवं कम-से-कम 30 वर्ष के उम्र का हो.
  2. उसका नाम सम्बंधित राज्य की मतदाता सूची में दर्ज हो.
  3. वह भारत या राज्य सरकार के किसी लाभ का पद धारण नहीं किये हुए हो.
  4. वह पागल या दिवालिया न हो.
  5. चुनाव सम्बन्धी किसी अपराध के कारण उसे इस परिषद् के सदस्य चुने जाने के अधिकार से वंचित न कर दिया हो.

विधान परिषद् का कार्य

इस परिषद् के निम्न प्रकार के कार्य हैं –

वित्तीय कार्य

राज्य के वित्त मामलों की वास्तविक शक्तियाँ विधान सभा के पास होती है. कोई भी धन विधेयक पहले विधान सभा में पेश किया जाता है. विधान सभा में पास होने के बाद धन विधेयक को विधान परिषद् में पेश किया जाता है. यह परिषद् इस विधेयक को 14 दिनों तक रोक सकती है. यदि 14 दिनों की अवधि तक यह परिषद् सम्बंधित विधेयक पर कोई कार्रवाई  न करे या कोई संशोधन की सिफारिश करे तो सम्बंधित विधान सभा को यह अधिकार है कि उस संशोधन को माने या न माने एवं विधेयक दोनों सदन से पारित समझा जाता है.

विधायी कार्य

इस परिषद् में साधारण विधेयकों को पेश किया जा सकता है लेकिन विधेयक को राज्यपाल के पास भेजे जाने से पहले आवश्यक है कि उसे विधान सभा से पारित किया जाए. अगर कोई विधेयक विधान सभा से पारित किया जा चुका हो परन्तु विधान परिषद् में उस पर कोई गतिरोध हो तो यह परिषद् उस विधेयक को नामंजूर कर सकती है, बदल सकती है या तीन महीने तक रोक कर रख सकती है. इसके बाद यदि विधान सभा इस विधेयक को विधान परिषद् के किये गये संशोधन के साथ या उसके बिना अगर पारित कर देती है तो विधेयक दुबारा इस परिषद् के पास भेजा जाता है. इस बार यदि यह परिषद् विधेयक को पुनः मंजूरी न दे या ज्यादा से ज्यादा एक महीने तक रोक कर रखे तब भी यह विधेयक दोनों सदनों से पारित समझा जाएगा.

संवैधानिक अधिकार

भारत के संविधान के किसी संशोधन में विधान परिषद् विधान सभा के साथ मिलकर भाग लेती है अगर वह संशोधन विधेयक सम्बंधित राज्य पास स्वीकृति के लिए भेजा जाता हो. राज्य का मन्त्रिमंडल केवल विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होता है. यह परिषद् मन्त्रिमण्डल को अविश्वास प्रस्ताव द्वारा नहीं हटा सकती है.

विधान परिषद् के सभापति एवं उप-सभापति

विधान परिषद् के सभापति एवं उप-सभापति का चुनाव सम्बंधित विधान परिषद् के सदस्यों द्वारा किया जाता है. सभापति या उप-सभापति को सदस्यों के द्वारा कम-से-कम 14 दिन पूर्व सूचना देकर प्रस्ताव लाकर बहुमत के द्वारा हटाया जा सकता है. इनका वेतन राज्य के संचित निधि कोष से दिया जाता है.

यह भी जरुर पढ़ें >>

विधान सभा और विधान परिषद् में अंतर


Prelims Vishesh

Mangdechhu Project :-

  • पिछले दिनों अपनी भूटान यात्रा के दौरान भारत के प्रधानमंत्री ने माँगदेछू बिजली संयंत्र का उद्घाटन किया.
  • यह संयंत्र भूटान के त्रोंग्सा ज़ोनखाग (Trongsa Dzongkhag) में बहने वाली माँगदेछू नदी पर बना हुआ है. इससे 720 MW बिजली उत्पन्न होगी.

Publicity Rath:

  • बिहार सरकार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत श्रव्य-दृश्य माध्यम से जल संरक्षण के विषय में जागरूकता पैदा करने और सरकार की विविध जल संसाधन योजनाओं से जन-साधारण को अवगत कराने के लिए एक प्रचार रथ तैयार किया है.
  • इस रथ के माध्यम से लोगों को यह बताया जाएगा कि कम वृष्टि होने पर भूजल ही एकमात्र सहारा होता है, अतः वर्षा जल को रोक कर जल बचाना अत्यावश्यक है.

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