Sansar डेली करंट अफेयर्स, 19 September 2018

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Sansar Daily Current Affairs, 19 September 2018


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Defence Acquisition Council (DAC)

संदर्भ

रक्षा अधिग्रहण परिषद् (DAC) ने हाल ही में 9100 करोड़ रु. के उपकरणों के क्रय की मंजूरी दी है. इससे आकाश मिसाइल प्रणाली और पानी के अन्दर साँस लेने के उपकरणों (Individual Under Water Breathing Apparatus – IUWBA) की खरीद की जायेगी.

आकाश मिसाइल प्रणाली

इस बार जो आकाश मिसाइल खरीदे जायेंगे वे पहले वाले आकाश मिसाइलों की तुलना में उन्नत कोटि के होंगे. इसकी तकनीक पहले से बेहतर होगी और यह 360 डिग्री घूम सकने वाली होगी. इन उन्नत मिसाइलों से बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी.

IUWBA

ये उपकरण T 90 टैंकों के लिए खरीदे जायेंगे. DRDO की प्रयोगशाला द्वारा निर्मित ये उपकरण टैंक चलाने वाले सैनिकों के द्वारा सुरक्षा गियर के रूप में प्रयोग किये जायेंगे और इनसे किसी आपातकाल में जल के अन्दर उत्पन्न होने वाली बाधाओं से निटपने में सहायता मिलेगी.

DAC क्या है?

2001 में भारत सरकार ने रक्षा अधिग्रहण परिषद् (DAC) की स्थापना की थी. इसके अध्यक्ष रक्षा मंत्री होते हैं. DAC की स्थापना का उद्देश्य था सैन्य उपकरणों के क्रय में तेजी लाना तथा क्रय के मामलों में होने वाले भ्रष्टाचार समाप्त करना.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Southern Zonal Council

संदर्भ

हाल ही में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद् की 28वीं बैठक गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बेंगलुरु में सम्पन्न हुई. इस बैठक में पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन में हुई प्रगति की समीक्षा की गई. पिछली बैठक में जो महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गये थे, वे थे – मछुवारों की सुरक्षा, प्रायद्वीपीय पर्यटन के लिए नई रेलगाड़ियाँ चलाना, सभी पाठ्यक्रमों के लिए SC/ST छात्रवृत्ति निधि का जनसंख्या के अनुपात में आवंटन.

क्षेत्रीय परिषद्

  • क्षेत्रीय परिषदों को संसद द्वारा स्थापित किया गया है.
  • इनका उद्देश्य अंतर्राज्यीय सहयोग एवं समन्वय स्थापित करना है.
  • ये परिषदें राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत राज्यादेश द्वारा स्थापित की गई हैं. इसका तात्पर्य यह हुआ कि ये परिषदें सांवैधानिक निकाय नहीं हैं.
  • अतः ये क्षेत्रीय परिषदें मात्र विचार-विमर्श एवं परामर्श के लिए हैं.
  • भारत में ऐसी 5 परिषदें गठित हैं – उत्तरी, मध्य, पूर्वी, पश्चिमी एवं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषदें.
  • उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् – जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और संघ शासित क्षेत्र चंडीगढ़.
  • मध्य क्षेत्रीय परिषद् – उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़,
  • पूर्वी क्षेत्रीय परिषद् – बिहार, झारखंड, उड़ीसा, और पश्चिम बंगाल.
  • पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद् – गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र और दमन -दीव और दादर और नगर हवेली के संघ शासित प्रदेश.
  • दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद् – आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और संघ शासित क्षेत्र पुडुचेरी.
  • क्षेत्रीय परिषदों का अध्यक्ष देश का गृह मंत्री होता है.
  • परिषद् के उपाध्यक्ष सम्बंधित राज्यों के मुख्यमंत्री बारी-बारी से हर वर्ष बनते हैं.
  • इस परिषद् में मुख्यमंत्री के अलावे हर राज्य के दो-दो मंत्री भी होते हैं (जिनका मनोनयन सम्बंधित राज्य के राज्यपाल करते हैं). जिन क्षेत्रों में संघीय शासित क्षेत्र हैं वहाँ से भी दो मंत्री परिषद् के रूप में नामित होते हैं.
  • प्रत्येक परिषद् में सलाहकार होते हैं – एक नीति-आयोग द्वारा नामित, प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिव एवं विकास आयुक्त.

ज्ञातव्य है कि पूर्वोत्तर के राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय, सिक्किम और नागालैंड) के लिए अलग से कोई क्षेत्रीय परिषद् नहीं है. इन राज्यों की विशेष समस्याओं को देखने के लिए पूर्वोत्तर परिषद् अधिनियम, 1972 के द्वारा एक पूर्वोत्तर परिषद् (North Eastern Council) गठित की गई है.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : ‘e-Sahaj’ portal

संदर्भ

सुरक्षा अनुमति देने के लिए भारत सरकार ने एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है जिसका नाम “ई-सहज” है. इस पोर्टल पर आवेदक अपना आवेदन ऑनलाइन दे सकता है और समय-समय पर अपने आवेदन की स्थिति को देख सकता है.

सुरक्षा अनुमति (Security Clearance) क्या है?

  • कंपनियों/बोली लगाने वालों/व्यक्तियों को कुछ संवेदनशील क्षेत्रों के लिए लाइसेंस/परमिट, अनुमति, ठेका इत्यादि देने के पहले सुरक्षा अनुमति की आवश्यकता होती है. यह अनुमति सम्बंधित मंत्रालय देता है और इसके लिए गृह मंत्रालय को नोडल मंत्रालय बनाया गया है.
  • सुरक्षा अनुमति देने के समय देखा जाता है कि कहीं प्रस्तावित ठेका आदि देने से सुरक्षा को खतरा तो  नहीं होगा. साथ ही यह भी देखा जाता है कि इससे कोई आर्थिक संकट तो उत्पन्न नहीं हो जाएगा.
  • सरकार का उद्देश्य होता है कि एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा पर आँच न आये और दूसरी ओर व्यवसाय करने की आसानी और निवेश के प्रोत्साहन पर दुष्प्रभाव न पड़े.

पोर्टल का महत्त्व

ऑनलाइन पोर्टल बन जाने से सुरक्षा अनुमति देने की प्रक्रिया में एकरूपता आई है और फलस्वरूप अनुमति देने की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और निगरानी करने में सरल हो गयी है. दिए गये आवेदन और कागज़ात को आसानी से देखा जा सकता है और समय पर निर्णय लिया जा सकता है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : International Telecommunication Union (ITU)

अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) ने घोषणा की है कि वह नई दिल्ली में अपना दक्षिण एशियाई कार्यालय तथा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र खोलेगा.

ITU क्या है?

अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) संयुक्त राष्ट्र संघ की एक एजेंसी है जिसका उद्देश्य विश्व-भर में चल रहे दूरसंचार के कार्यों एवं सेवाओं में तालमेल स्थापित करना है. मूलतः इसकी स्थापना 1865 में अंतर्राष्ट्रीय तार संघ (International Telegraph Union) के रूप में  हुई थी. इस प्रकार यह विश्व का सबसे पुराना अंतर्राष्ट्रीय संगठन है. ITU का मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थित है.

ITU के मुख्य कार्य

  • रेडियो फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम का आदर्श, न्यायपूर्ण एवं तार्किक उपयोग सुनिश्चित करना.
  • विश्व-भर में संचालित दूरसंचार के लिए मानक तैयार करना.
  • देशों को आंतरिक संचार गतिविधियों को विकसित तथा संधारित करने में सहयोग करना.
  • ITU की अनुसंशाएँ बाध्यकारी नहीं होती हैं, किन्तु अधिकांश देश उनका अनुपालन करते हैं क्योंकि ऐसा करने से अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक संचार का वातावरण प्रभावकारी बना रहता है.

सदस्यता

  • ITU में संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश (पलाऊ गणराज्य को छोड़कर) शामिल हैं तथा साथ ही वेटिकन सिटी भी इसका सदस्य है.
  • संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के अतिरिक्त ITU की सदस्यता जिनके लिए खुली हुई है, वे हैं – मालवाहक, उपकरण निर्माता, वित्त प्रदाता निकाय, शोध एवं विकास संगठन तथा अंतर्राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दूरसंचार से जुड़े हुए निजी संगठन. परन्तु इन सभी निजी क्षेत्र के सदस्यों को मत का अधिकार नहीं होता है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : World Tourism Organization (UNWTO)

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) का शहरी पर्यटन पर 7वाँ वैश्विक सम्मेलन, दक्षिणी कोरिया की राजधानी सियोल में आयोजित होने जा रहा है. इसकी theme है – ‘A 2030 Vision for Urban Tourism’.

इस सम्मलेन के आयोजन में UNWTO के अतिरिक्त जिनका सहयोग मिल रहा है, वे हैं – सियोल महानगर प्रशासन, दक्षिणी कोरिया का संस्कृति, खेलकूद एवं पर्यटन मंत्रालय तथा सियोल पर्यटन संगठन.

सम्मलेन का महत्त्व

इस सम्मेलन में 2030 शहरी एजेंडा के संदर्भ में शहरी पर्यटन के विकास से सम्बंधित प्रधान विचारणीय विषयों की चर्चा होगी. इस सम्मेलन में कई देशों के पर्यटन प्रशासक, नगर अधिकारी और सम्बन्धित हितधारक अपने अनुभवों और विशेषज्ञता को साझा करते हैं.

UNWTO क्या है?

UNWTO संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है जो सतत एवं सबके लिए उपलब्ध पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तरदायी होती है.

सदस्य

इसके 158 देश सदस्य हैं. इसके अलावा इसके 6 सहायक सदस्य होते हैं. साथ ही, इसमें 500 ऐसे सदस्य भी होते हैं जो निजी क्षेत्रों, शैक्षणिक संस्थानों, पर्यटन संघों एवं स्थानीय पर्यटन अधिकारीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Pradhan Mantri Fasal Bima Yojna (PMFBY)

संदर्भ

 

एक अक्टूबर से आरम्भ होने वाली रबी बुआई को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के मार्गनिर्देशों में कतिपय संशोधन किये.

संशोधित मार्गनिर्देश

  • राज्यों और बीमा कंपनियों को बीमा के दावों के निपटान में विलम्ब करने पर जुर्माना देना होगा.
  • बीमा कंपनियों के मूल्यांकन के लिए एक मानकीकृत सञ्चालन प्रक्रिया का सुझाव दिया गया है और यह निर्देश दिया गया है कि यदि कोई कंपनी इस प्रक्रिया में योग्य पाई जाती है तो उसको योजना से बाहर कर दिया जायेगा.
  • सरकार ने यह  निर्णय लिया है कि सदाबहार बाग़वानी फसलों को प्रायोगिक आधार पर फसल बीमा योजना के दायरे में लाया जाएगा.
  • नए मार्ग निर्देशों के अनुसार जंगली पशुओं के कारण फसल में हुई क्षति को भी प्रायोगिक तौर पर बीमा योजना के अन्दर लाया जाएगा.
  • लाभार्थियों को दोहरा लाभ नहीं मिल जाए इससे बचने के लिए आधार नंबर को अनिवार्य बना दिया गया है.
  • अब बीमा कंपनियों को पिछले मौसम की तुलना में 10% अधिक गैर-ऋण प्राप्तकर्ता किसानों को लक्षित करना होगा.
  • बीमा कंपनियों को प्रधान मंत्री बीमा योजना के प्रचार-प्रसार पर हर मौसम में कुल प्रीमियम का 0.5% का व्यय करना अनिवार्य होगा.

प्रधानमन्त्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

अप्रैल 2016 में भारत सरकार ने पुरानी बीमा योजनाओं, जैसे – राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना, मौसम आधारित फसल बीमा योजना और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना को वापस लेते हुए एक नई योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आरम्भ किया था.

  • इस बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को खरीफ फसलों के लिए 2% और रबी फसलों के लिए 1.5% प्रीमियम देना होता है.
  • वार्षिक नकदी और बाग़वानी फसलों के लिए प्रीमियम की दर 5% होती है.
  • जिन किसानों ने बैंकों से ऋण लिया है उनके लिए यह योजना अनिवार्य है और जिन्होंने नहीं लिया है, उनके लिए यह वैकल्पिक है.

उद्देश्य

  • अप्रत्याशित कारणों से फसल की क्षति के शिकार किसानों को आर्थिक सहारा देना.
  • किसानों की आय को बनाए रखना जिससे कि वे खेती करना नहीं छोड़ें.
  • किसानों को अभिनव एवं आधुनिक कृषि प्रचलन अपनाने के लिए उत्साहित करना.
  • कृषि प्रक्षेत्र में ऋण के प्रवाह को सुनिश्चित करना जिससे खाद्य सुरक्षा, फसलों की विविधता, उत्पादन में वृद्धि और कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा मिले और उत्पादन के जोखिमों से किसान सुरक्षित हो सके.

Prelims Vishesh

The case for making Pluto a planet again :-

  • कुछ वैज्ञानिकों ने यह तर्क दिया है कि जिन आधारों पर प्लूटो को ग्रह-वर्ग से निकाल दिया गया था वे गलत थे, अतः प्लूटो को फिर से ग्रह का दर्जा दिया जाना चाहिए.
  • अंतराष्ट्रीय खगोलीय संघ ( International Astronomical Union – IAU) के परिभाषा के अनुसार प्लूटो एक ग्रह नहीं है क्योंकि वह वरुण ग्रह के गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होता है और प्लूटो की कक्षा Kuiper belt में पाई जाने वाली जमी हुई गैसों और पदार्थों के साथ-साथ चलती है.

 

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