Sansar डेली करंट अफेयर्स, 19 February 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 19 February 2019


GS Paper 1 Source: PIB

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Topic : Initiatives on women’s safety conceptualized by the WCD Ministry

संदर्भ

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने हाल ही में स्त्री सुरक्षा के लिए तीन बड़ी पहलें की हैं, ये हैं –

  1. पैनिक बटन
  2. SCIM पोर्टल (सेफ सिटी प्रोजेक्ट)
  3. राज्यों में DNA विश्लेषण की सुविधाएँ

पैनिक बटन

संकट के समय कोई भी स्त्री इस बटन का उपयोग कर सकती है. इसके लिए उसे ये कदम उठाने होंगे –

  1. यदि स्मार्ट फ़ोन है तो पॉवर बटन को तीन बार तेजी से दबाना होगा
  2. किसी भी फ़ोन से 112 पर कॉल करना
  3. यदि फीचर फ़ोन तो 5 और 9 अंकों को देर तक दबाना
  4. 112 इंडिया मोबाइल ऐप का प्रयोग करना.

SCIM पोर्टल (सेफ सिटी प्रोजेक्ट)

यह योजना आठ शहरों में चलाई जा रही है. इसकी कुछ मुख्य विशेषताएँ हैं –

  1. प्रत्येक शहर में ऐसे स्थलों का पता लगाना जो संवेदनशील हैं.
  2. ऐसे स्थलों पर CCTV लगाना
  3. अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में स्वचालित नम्बर प्लेट पढ़ने की मशीन लगाना.
  4. अतिसंवेदनशील क्षेत्रों के बाहर जो संकटग्रस्त क्षेत्र हैं, वहाँ भारी गश्ती करना.
  5. सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था सुधारना
  6. स्त्रियों के लिए सार्वजनिक शौचालय की सुविधा बढ़ाना
  7. थाने में महिला सहायता डेस्क स्थापित करना.

राज्यों में DNA विश्लेषण की सुविधाएँ

यौन अपराधों के निपटारे में होने वाली देर को ध्यान में रखते हुए समय DNA नमूनों की जाँच आवश्यक हो जाती है. अभी DNA विश्लेषण की सुविधा कुछ ही शहरों में है. अब इसके लिए नई प्रयोगशालाएँ चेन्नई, मदुरै, आगरा, लखनऊ, मुंबई और कोलकाता में बनाई जाएँगी.


GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : ‘Prevalence and Extent of Substance Use in India’- survey

संदर्भ

भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने हाल ही में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के साहचर्य में एक सर्वेक्षण किया था जिसमें 36 राज्यों और संघीय क्षेत्रों में रहने वाले 2 लाख घरों एवं 4.73 लाख लोगों से 186 जिलों में जानकारी ली गई थी. ये सभी लोग 10 वर्ष से 75 वर्ष तक की आयु के थे.

सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्ष

  • भारत में छह करोड़ शराब की लत वाले व्यक्ति रहते हैं. यह संख्या 172 देशों की जनसंख्या से भी अधिक है.
  • 1 करोड़ से अधिक भारतीय (2.8%) गाँजा, भाँग, चरस, हेरोइन और अफीम का प्रयोग करते हैं.
  • नशे की लत में पड़े 20 लोगों में से मात्र एक का अस्पताल में इलाज होता है.
  • देश में पी जाने वाली 30% शराब देशी शराब होती है.
  • पंजाब और सिक्किम में गांजे से होने वाली बीमारियाँ राष्ट्रीय औसत से तिगुनी होती हैं.
  • राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक प्रयोग में आने वाला नशीला पदार्थ हेरोइन है और उसके बाद ओपीओइड और अफीम का स्थान आता है.
  • 1% से कम अर्थात् 18 करोड़ लोग दर्दनिवारक का का प्रयोग करते हैं. चिंता की बात यह है कि इनका प्रचलन बच्चों और किशोरों में अधिक है.
  • देश में जिन नशीले द्रव्यों का प्रचलन सबसे कम है, वे हैं – कोकेन (0.10%), एम्फेटमिन (18%) और हेल्यूसिनोजन (0.12%).

सरकार द्वारा इस दिशा में किये गये कार्य

  • नशीले द्रव्यों की तस्करी की समस्या से निबटने के लिए सरकार ने कई नीतिगत और अन्य पहलें की हैं.
  • नवम्बर 2016 में सरकार ने नार्को कोआर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की स्थापना की थी और नार्कोटिक पदार्थों पर नियंत्रण के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता देने की योजना को पुनर्जीवित किया था.
  • 2017 में सरकार ने विभिन्न अवैध औषधियों के पकड़े जाने पर दिए जाने वाले पुरस्कार की राशि बढ़ा दी थी.
  • संसार के अन्य देशों के साथ कारगर समन्वयन के लिए भारत ने 37 द्विपक्षीय समझौते किये हैं.
  • नार्कोटिक नियंत्रण ब्यूरो को नए सॉफ्टवेर बनाने के लिए धनराशि दी गई है. उदाहरण के लिए एक जब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली बनी है जिस पर अवैध औषधियों से सम्बंधित अपराध और अपराधियों का डाटाबेस ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा.
  • सरकार ने राष्ट्रीय औषधि दुरूपयोग नियंत्रण कोष भी गठित किया है जिससे नार्कोटिक औषधियों के अवैध व्यापार की रोकथाम करने, नशे की लत के लोगों को फिर से बसाने, जनसामान्य को इस विषय में जागरूक करने आदि कामों के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जायेगी.
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने नशीले द्रव्यों की माँग को घटाने के लिए राष्ट्रीय कार्योजना (2018-2023) का प्रारूप बनाया है जिसमें नशीले द्रव्यों और औषधियों के दुरूपयोग की समस्या पर कार्रवाई करने के उपाय बताये गये हैं.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Central Wakf Council

संदर्भ

केन्द्रीय वक्फ परिषद् एक वैधानिक निकाय है जो 1964 में भारत सरकार द्वारा वक्फ एक्ट, 1954 (अब वक्फ एक्ट, 1995 का एक उपभाग) के तहत स्थापित किया गया था.

  • यह राज्य वक्फ बोर्डों के काम से संबंधित मामलों पर केंद्र को सलाह देने और देश में वक्फ के उचित प्रशासन के लिए स्थापित किया गया है.
  • विदित हो कि मुस्लिम कानून के तहत परोपकारी मुस्लिम चल-अचल संपत्तियों को धार्मिक और परोपकारी कार्यों के लिए स्थाई रूप से दान दे देते हैं.

रचना और नियुक्तियाँ

परिषद की अध्यक्षता एक अध्यक्ष करते हैं, जो वक्फ के प्रभारी केन्द्रीय मंत्री होते हैं और इसमें अधिकतम 20 अन्य सदस्य होते हैं, जिन्हें भारत सरकार द्वारा वक्फ अधिनियम के अंतर्गत दिए गये प्रावधानों के तहत नियुक्त किया जाता है.

भारत में अल्पसंख्यकों की वर्तमान स्थिति

आजादी के बाद देश के पिछड़े क्षेत्रों के अल्पसंख्यकों, विशेषकर लड़कियों की शैक्षिक अधिकारिता तथा रोजगारपरक कौशल विकास को सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी सुविधाएं प्रदान की हैं. यह वर्ग स्वतंत्रता के बाद से ही इन सुविधाओं से वंचित रहा है. हाल के दिनों में इन वर्गों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया है, ताकि देश के 308 जिलों में अल्पसंख्यकों, विशेषकर लड़कियों की सामाजिक-आर्थिक-शैक्षिक अधिकारिता और रोजगारपरक कौशल विकास सुनिश्चित किया जा सके. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए विकास कार्यक्रमों का देश के 308 जिलों तक विस्तार किया.

वक्फ संपत्तियाँ

उल्लेखनीय है कि देशभर में लगभग 5.77 लाख पंजीकृत वक्फ संपत्तियां हैं. उल्लेखनीय है कि कई वक्फ संपत्तियां पिछले कई दशकों से विवादों में फंसी हैं. ‘प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम’ (पीएमजेवीके) के तहत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने आजादी के बाद पहली बार देशभर की वक्फ संपत्तियों पर स्कूल, कॉलेज, आईआईटी, कौशल विकास केन्द्र, बहुउद्देशीय सामुदायिक केन्द्र ‘सदभाव मंडप’, ‘हुनर हब’, अस्पताल, व्यापार केन्द्र इत्यादि निर्मित किए हैं. पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में मोदी सरकार ने पीएमजेवीके के तहत 28 डिग्री कॉलेज, 2197 स्कूल इमारतें, 40,201 अतिरिक्त कक्षाओं, 1213 छात्रावासों, 191 आईआईटी, 50 पॉलीटेक्नीक, 39,586 आंगवाड़ी केन्द्रों, 405 सद्भावना मंडपों, 89 आवासीय स्कूलों, 527 बाजार शेडों का निर्माण किया है.

विदित हो कि 90% वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है. शेष वक्फ संपत्तियों का भी जल्द डिजिटलीकरण कर लिया जाएगा. पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों के लगभग 3 करोड़ 83 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की है, जिनमें लगभग 60% छात्रायें हैं. अल्पसंख्यकों सहित सभी कमजोर वर्गों को शैक्षिक रूप से अधिकार संपन्न बनाने के संबंद्ध में केन्द्र सरकार ने अनेक प्रयास किए हैं. बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाली मुस्लिम छात्राओं का औसत 70% से अधिक हुआ करता था जो अब घटकर लगभग 35 प्रतिशत हो गया है. केन्द्र सरकार ने विभिन्न रोजगारपरक कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से 6 लाख से अधिक अल्पसंख्यक युवाओं को रोजगार और रोजगार अवसर प्रदान किए हैं. इसी तरह ‘हुनर हाट’ के जरिए पिछले दो वर्षों के दौरान दो लाख से अधिक दस्तकारों को रोजगार और रोजगार अवसर प्रदान किये गये हैं.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : ‘Vision Zero’ concept

संदर्भ

मुंबई में अंतर्राष्ट्रीय दृष्टि शून्य सम्मेलन अर्थात विज़न जीरो सम्मलेन आयोजित हो रहा है जिसका उद्देश्य व्यवसायगत सुरक्षा को बढ़ावा देना है.

  • यह सम्मेलन एक ऐसा मंच है जो विचारों, प्रथाओं और अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करता है.
  • इस सम्मलेन का आयोजन श्रम एवं नियोजन मंत्रालय और जर्मनी के सामाजिक दुर्घटना बीमा प्रतिष्ठान के द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है और इसमें सम्मिलित होने वाले अन्य संस्थान हैं – IIT बॉम्बे, अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ.

विज़न जीरो अवधारणा क्या है?

दृष्टि शून्य अवधारणा चार आधारभूत सिद्धांतों पर टिकी हुई है, यथा – जीवन से समझौता नहीं हो सकता, मानव से गलती हो जाती है, सहन की क्षमता मानवीय प्रतिरोध पर निर्भर होती है तथा लोगों को सुरक्षित यातायात और सुरक्षित कार्यस्थल का अधिकार है. इस अवधारणा के तहत ये कार्य करने आवश्यक होते हैं – जोखिमों को नियंत्रित करना, मशीनों, उपकरणों और कार्यस्थलों को सुरक्षा एवं स्वास्थ्यकर बनाना तथा कार्यबल के कौशल में उत्क्रमण करना.

आगे की राह

दृष्टि शून्य की अवधारणा आज देश-विदेश में सभी देश स्वीकार कर रहे हैं. यदि भारत इसे अपनाता है तो देश में व्यवसायगत सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों में प्रगति होगी, ऐसी आशा की जाती है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : Induced Pluripotent Stem Cells (iPSC)

संदर्भ

जापान ने रीढ़ की हड्डी की चोट के उपचार के लिए स्टेम सेल का प्रयोग करने की अनुमति दे दी है. जापानी शोधकर्ताओं का एक दल रीढ़ की हड्डी में लगी चोटों के उपचार के लिए ह्यूमन-इंडयूज्ड प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल के उपयोग हेतु एक अभूतपूर्व प्रयोग करेगा.

इंडयूज्ड प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल क्या हैं?

इंडयूज्ड प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल उन वयस्क सेलों को कहते हैं जिनको जेनेटिक विधि से भ्रूण के स्टेम सेल जैसा बना दिया गया है. इस प्रक्रिया से किसी भी वयस्क सेल में भ्रूणों के स्टेम सेल के गुणधर्म आ जाते हैं.

यद्यपि इसके लिए और भी शोध की आवश्यकता है, परन्तु औषधियों को बनाने और रोगों का मॉडल बनाने में इनका पहले से ही प्रयोग हो रहा है. साथ ही वैज्ञानिकों को आशा है कि इस प्रकार के स्टेम सेल प्रत्यारोपण औषधियों के लिए उपयोग में आ सकेंगे.

स्टेम सेल और उनका महत्त्व

स्टेम सेलों में यह विलक्षण गुण होता है कि जीवन के आरम्भ और वृद्धि के दौरान वे भाँति-भाँति के सेल बन जाने की क्षमता रखते हैं. इसके अतिरिक्त कई ऊतकों में ये सेल आंतरिक मरम्मती का काम करते हैं क्योंकि व्यक्ति या पशु जब तक जीवित रहता है, ये अनंत रूप से बंटते रहते हैं.जब किसी स्टेम सेल में विभाजन होता है तो प्रत्येक नए सेल में यह क्षमता होती है कि वह या तो स्टेम सेल रह जाए अथवा एक ऐसे दूसरे प्रकार के सेल में बदल जाए जिसका विशेष कार्य होता है, जैसे – मांसपेशियों के सेल, लाल रक्त सेल अथवा मस्तिष्क सेल.

स्टेम सेल दूसरे सेलों से अलग कैसे?

  • स्टेम सेल विशेष कार्य के लिए बने नहीं होते हैं. उन्हें यह क्षमता है कि सेलों में विभाजन करके वे अपने आप को फिर से नया कर लेते हैं, कभी-कभी तो लम्बी अवधि तक निष्क्रिय होने के बाद भी.
  • विशेष शारीरिक अथवा प्रायोगिक परिस्थितियों में स्टेम सेल को किस ऊतक अथवा अंग का कार्य करने वाले सेल में बदला जा सकता है.
  • आंत एवं अस्थि-मज्जा जैसे कुछ अंगों में स्टेम सेल नियमित रूप से विभाजित होते रहते हैं और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत और नए ऊतकों का निर्माण करते रहते हैं. परन्तु अन्य अंगों, जैसे – अग्नयाशय और हृदय में ये स्टेम सेल विशेष परिस्थितियों में ही विभाजित होते हैं.

भ्रूण स्टेम सेल और वयस्क स्टेम सेल में अंतर

  • वयस्क और भ्रूण स्टेम सेल में सबसे बड़ा अंतर यह है कि भ्रूण स्टेम सेल शरीर के किसी भी प्रकार के सेल में बदल सकता है क्योंकि यह प्लूरीपोटेंट होता है. परन्तु वयस्क स्टेम सेल यह क्षमता नहीं होती.
  • भ्रूण स्टेम सेल को अपेक्षाकृत अधिक सरल रूप से संरक्षित कर उपजाया जा सकता है. दूसरी ओर, वयस्क स्टेम सेल परिपक्व ऊतकों में कम ही होते हैं, इसलिए किसी वयस्क ऊतक से इनको अलग करना एक चुनौती वाला कार्य होता है.

Prelims Vishesh

Fateh Submarine :-

  • हाल ही में अब्बास बंदरगाह में फतह नामक ईरान में निर्मित एक ऐसी पनडुब्बी का अनावरण किया गया है जो आधुनिकतम तकनीक से लैस है और जो क्रूज मिसाइल छोड़ने की क्षमता रखता है.
  • इसकी मारक क्षमता सतह से सतह पर 2,000 कि.मी. की है. इस प्रकार यह इजराइल और मध्य-पूर्व क्षेत्र में अमेरिका के सैनिक अड्डों तक पहुँचने के योग्य है.

Maiden ‘Regional Maritime-Safety Conference’ :

  • मुंबई में पहली बार क्षेत्रीय सामुद्रिक-क्षमता सम्मेलन आयोजित हो रहा है.
  • सम्मेलन का उद्देश्य भारत-एशियाई आसियान उपक्षेत्र में सामुद्रिक सुरक्षा बनाए रखना और भारत के तटों की रक्षा करना है.
  • इस सम्मलेन का आयोजन जहाजरानी मंत्रालय और विदेश मंत्रालय राष्ट्रीय सामुद्रिक फाउंडेशन के साथ मिलकर कर रहे हैं.

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