Sansar डेली करंट अफेयर्स, 19 December 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 19 December 2020


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : MP Local Area Development Scheme

संदर्भ

सभी राजनीतिक दलों के संसद सदस्यों द्वारा एकमत होकर सरकार से वर्ष 2018 और 2019 में स्वीकृत परियोजनाओं के लिए धन जारी करने की मांग की है. इस स्वीकृत की जा चुकी राशि को कोविड-19 महामारी के कारण निलंबित कर दिया गया था.

अपने अभ्यावेदन में सांसदों ने कहा है, कि महामारी के दौरान यह राशि अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गयी है.

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार द्वारा इस साल अप्रैल में संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MP Local Area Development Scheme– MPLAD) को आपदा प्रबंधन अधिनियम का प्रयोग करते हुए निलंबित कर दिया था.

MPLAD योजना क्या है?

  • यह योजना 1993 के दिसम्बर में आरम्भ की गई थी. इसका उद्देश्य सांसदों की ओर से विकासात्मक कार्यों के लिए अनुशंसा प्राप्त कर टिकाऊ सामुदायिक संपदा का सृजन एवं स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर बुनियादी सुविधाएँ (सामुदायिक संरचना निर्माण सहित) प्रदान करना था.
  • इस योजना के अंतर्गत इन कार्यों के लिए राशि खर्च की जा सकती है – पेयजल, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, सड़क आदि. यह राशि सांसद अपने ही चुनाव क्षेत्र के लिए खर्च कर सकता है.
  • MPLAD के लिए निर्गत राशि सीधे जिला अधिकारियों को अनुदान के रूप में निर्गत की जाती है. यह राशि वित्त वर्ष के साथ समाप्त (non-lapsablee) नहीं होती है, अपितु बाद के वर्षों में भी इसका उपयोग हो सकता है.
  • इस योजना में सांसदों की भूमिका एक अनुशंसक की होती है. वे अपने संसदीय क्षेत्र के लिए ही कार्य करा सकते हैंपरन्तु राज्य सभा के सांसद को यह अधिकार है कि वे अपने पूरे राज्य में कहीं भी काम करने के लिए अनुशंसा कर सकते हैं. सांसद अपनी पसंद के कार्यों की अनुशंसा जिला अधिकारियों को करते हैं और जिला अधिकारी राज्य सरकार द्वारा विहित प्रक्रिया के अनुसार उन कार्यों का क्रियान्वयन करते हैं. जिला अधिकारी ही यह देखते हैं कि प्रस्तावित कार्य करने योग्य हैं या नहीं और वे ही कार्यान्वयन करने वाली एजेंसियों का चयन करते हैं. कौन काम पहले होगा, उसका निर्धारण भी यही करते हैं. हो रहे काम का निरीक्षण और जमीनी स्तर पर उसके क्रियान्वयन की निगरानी भी उन्हीं का काम है.

चुनौतियाँ

MPLAD योजना के क्रियान्वयन में जो बड़ी समस्या आती है वह यह है कि मंत्रालय तक जिला स्तर से आवश्यक दस्तावेज समय पर नहीं पहुँचते हैं, जैसे – अंकेक्षण प्रमाण पत्र (Audit Certificate), उपयोग प्रमाण पत्र (Utilization Certificate), अनंतिम उपयोग प्रमाण पत्र (Provisional Utilization Certificate), मासिक प्रगति प्रतिवेदन (Monthly Progress Report), बैंक विवरण एवं ऑनलाइन मासिक प्रगति प्रतिवेदन (Bank Statement and Online Monthly Progress Report) आदि.


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Post-independence consolidation and reorganization within the country.

Topic : Vision 2035 : Public Health Surveillance : PHS

संदर्भ

हाल ही में नीति आयोग ने “विजन 2035: भारत में जन स्वास्थ्य निगरानी” (Public Health Surveillance : PHS) नामक श्वेत-पत्र जारी किया है.

इस श्वेत पत्र का महत्त्व

  • यह श्वेत पत्र त्रिस्तरीय जन स्वास्थ्य व्यवस्था को आयुष्मान भारत की परिकल्पना में शामिल करते हुए जन स्वास्थ्य निगरानी के लिए भारत के विजन 2035 को प्रस्तुत करता है.
  • यह संचारी और गैर-संचारी रोगों दोनों की एकीकृत निगरानी का आधार तैयार करता है.

विजन 2035 : भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी

  • यह भारत की जन स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली को अधिक प्रतिक्रियाशील और भविष्योन्मुखी बनाकर प्रत्येक स्तर पर कार्रवाई करने की तैयारी को बढ़ावा देगा.
  • यह नागरिकों के अनुकूल जन स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली ग्राहक प्रतिपुष्टि (फीडबैक) तंत्र तैयार कर व्यक्ति की निजता और गोपनीयता को सुनिश्चित करेगा.
  • केंद्र और राज्यों के मध्य रोग की पहचान, बचाव एवं नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए एक बेहतर डेटा-साझाकरण तंत्र का गठन करेगा.
  • ऐसी जन स्वास्थ्य आपदा, जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता उत्पन्न की है, के प्रबंधन के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक नेतृत्व प्रदान करेगा.

जन स्वास्थ्य निगरानी की आवश्यकता क्यों?

  • निगरानी, सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबद्ध एक महत्वपूर्ण कार्य है. उल्लेखनीय है कि यह रोग का पता लगाने, रोकथाम करने और नियंत्रण करने के लिए एक आवश्यक प्रक्रिया है.
  • जन स्वास्थ्य निगरानी (PHS) एक महत्वपूर्ण कार्य है, जो प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक सभी स्तरों पर निष्पादित होता है.
  • PHS में रोगों का पता लगाना और आसन्न प्रकोप या महामारियों की प्रारंभिक चेतावनी के संकेत शामिल होते हैं. ये प्रकोप या महामारियां किसी देश के लिए स्थानिक या अंतर्राष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का कारण हो सकते हैं.

भारत की मौजूदा सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी में विद्यमान चुनौतियां

  • कार्यक्रमों और संस्थानों की ऊर्ध्वाधर संरचना में निगरानी कार्य.
  • रोग निगरानी में निजी क्षेत्र की भागीदारी न्यूनतम है.
  • निगरानी में डिजिटल, सोशल और प्रिंट मीडिया का सीमित उपयोग किया जाता है.
  • गैर-संचारी रोगों की निगरानी पर सीमित ध्यान दिया जाता है.

विजन 2035 के कार्यान्वयन कारक

  • केंद्र और राज्यों के मध्य शासन की एक परस्पर निर्भर संघबद्ध प्रणाली.
  • निगरानी के लिए नए डेटा संग्रह और साझाकरण तंत्र का उन्‍नत उपयोग.
  • नए डेटा विश्लेषण डेटा विज्ञान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन अधिगम का बेहतर उपयोग.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health.

Topic : PM-JAY

संदर्भ

हाल ही में, राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी (National Health Agency– NHA) द्वारा ‘निजी अस्पतालों की भूमिका’ पर अपना डेटा जारी किया गया है.

प्रमुख निष्कर्ष

  1. निजी अस्पतालों में ईलाज कराने हेतु भर्ती होने वाले मरीजों में अधिक उम्र के लोगों का अनुपात अधिक था और निजी अस्पतालों में ईलाज करने वालों में पुरुषों का अनुपात सार्वजनिक अस्पतालों की अपेक्षा अधिक था.
  2. सूचीबद्ध अस्पतालों के अंतर्गत आने वाले आधे से अधिक निजी अस्पतालों में चिकित्सा व्यय संबंधी लगभग दो-तिहाई दावे और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के अंतर्गत तीन चौथाई दावे किये जाते हैं.
  3. निजी अस्पतालों द्वारा PM-JAY पैकेज के अंतर्गत महँगे इलाजों में घुटना-प्रतिस्थापन, मोतियाबिंद, हेमोडायलिसिस (Haemodialysis), हृदवाहिनी (cardiovascular) सर्जरी आदि का सर्वाधिक संख्या में ईलाज किया जाता है.
  4. मात्र सात राज्यों, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक, में 72 प्रतिशत से अधिक सूचीबद्ध निजी अस्पताल स्थित हैं.

चुनौतियाँ और चिंताएँ

  1. मेडिकल ऑडिट में यह भी पता चला है कि निजी अस्पतालों में सार्वजनिक अस्पतालों की तुलना में धोखाधड़ी और मरीजों से अधिक दुर्व्यवहार होता है. अधिकतर निजी अस्पतालों में, व्यय में कटौती करने के लिए सर्जरी के बाद रोगियों को जल्दी छुट्टी दे दी जाती है.
  2. कुशल और उच्च-गुणवत्ता की देखभाल प्रदान करने हेतु निजी अस्पतालों की जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के कार्यान्वयन में एक बड़ी चुनौती है.
  3. विभिन्न राज्यों में सूचीबद्ध निजी अस्पतालों की संख्या में काफी भिन्नता है. अधिकांश उत्तरपूर्वी और पहाड़ी राज्यों में सूचीबद्ध निजी अस्पतालों की संख्या 25% से कम है, जबकि महाराष्ट्र में इनकी संख्या लगभग 80% है.
  4. निजी अस्पतालों में सार्वजनिक अस्पतालों की तुलना में विस्तरों की संख्या कम होती है किंतु सर्जिकल पैकेज और सुपर-स्पेशिएलिटी के लिए सूचीबद्ध होने की संभावना अधिक होती है.

आवश्यकता

उच्च प्रदर्शन करने वाले सरकारी अस्पतालों के रूप में एक मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र के विकल्प को पेशकश करना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के उद्देश्यों की सफलता हेतु प्रमुख तत्व हो सकता है.

PM-JAY की प्रमुख विशेषताएं

  1. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा / आश्वासन योजना है.
  2. यह योजना भारत में सार्वजनिक व निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की धन राशि लाभार्थियों को मुहया कराती है.
  3. कवरेज: 74 करोड़ से भी अधिक गरीब व वंचित परिवार (या लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) इस योजना के तहत लाभ प्राप्त कर सकतें हैं.
  4. इस योजना में सेवा-स्थल पर लाभार्थी के लिए कैशलेस स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को उपलब्ध कराया जाता है.

पात्रता

  1. इस योजना के अंतर्गत परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई सीमा नहीं है.
  2. इस योजना के तहत पूर्व से विद्यमान विभिन्न चिकित्सीय परिस्थितियों और गम्भीर बीमारियों को पहले दिन से ही शामिल किया जाता है.
  3. इस योजना के अंतर्गत अस्पताल में भर्ती होने से 3 दिन पहले और 15 दिन बाद तक का नैदानिक उपचार, स्वास्थ्य इलाज व दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध होतीं हैं.
  4. यह एक पोर्टेबल योजना हैं यानी की लाभार्थी इसका लाभ पूरे देश में किसी भी सार्वजनिक या निजी सूचीबद्ध अस्पताल में उठा सकतें हैं.
  5. इस योजना में लगभग 1,393 प्रक्रियाएं और पैकिज शामिल हैं जैसे की दवाइयाँ, आपूर्ति, नैदानिक सेवाएँ, चिकित्सकों की फीस, कमरे का शुल्क, ओ-टी और आई-सी-यू शुल्क इत्यादि जो मुफ़्त उपलब्ध हैं.
  6. स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति सार्वजनिक अस्पतालों के बराबर की जाती है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

यह मुहिम सिर्फ भारत सरकार या राज्य सरकारों की नहीं है. यह उनके लिये है जिनको इसकी ज़रुरत है. इसमें सबसे बड़ी भूमिका आम नागरिक के साथ साथ सभी अस्पतालों, डाक्टरों, नर्सों तथा पैरा मेडिकल स्टाफ की भी है जिनके सहयोग से गरीब जनता को उसका हक़ मिल पाएगा. देश में सार्वजनिक चिकित्सा सुविधाओं को बहुत अच्छा नहीं माना जाता और इनमें उत्तरदायित्व की कमी जैसे कई नकारात्मक पहलू उजागर होते हैं. साथ ही, सभी देशवासियों की पहुँच अच्छे हॉस्पिटलों तक होना अब भी सपना जैसा है. स्पष्ट रूप से जहाँ इस कार्यक्रम के अंतर्गत बहुत से लक्ष्यों को प्राप्त करने की रणनीति बनाई जा रही है वहीं, कई पक्ष ऐसे भी हैं जिनके विषय में और अधिक ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है. सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव अधिक है. ऐसे में निजी अस्पतालों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना होगा. सरकार को स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट को बढ़ाकर स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढाँचे पर काम करने की आवश्यकता है. लाभार्थियों को इस योजना का लाभ तभी मिल सकता है जब प्राथमिक उपचार केंद्र मज़बूत हों और सरकार सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करे. लाभार्थी को इस योजना का लाभ मिले यह एक बड़ी चुनौती है. इस योजना के संबंध तमाम फेक वेबसाइट सक्रिय हैं जो आम लोगों में भ्रम पैदा कर रही हैं. कुछ वेबसाइट के नाम हैं net, ayushmanbharat.co.in, pradhanmantriyojna.in आदि. ये सभी वेबसाइट्स गलत सूचनाएँ दे रही हैं. इनके द्वारा बताया जा रहा है कि यह नामांकन आधारित योजना है. इसके लिये जनता से रुपए लेकर नामांकन का दावा किया जा रहा है. जबकि यह नामांकन आधारित योजना नहीं है. सबसे पहले जनता को इस संबंध में जागरूक करने की आवश्यकता है कि यह सामाजिक, आर्थिक, जातिगत जनगणना पर आधारित 10 करोड़ परिवारों की सूची तैयार की गई है जिसका सत्यापन सरकार द्वारा कर लिया गया है और उन्हें कार्ड देने की प्रक्रिया जारी है और ये लाभार्थी इन्हीं परिवारों के सदस्य हैं. इन फेक वेबसाइट्स पर लगाम लगाना भी एक चुनौती है. हालाँकि गृह मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखा है कि इन तमाम वेबसाइट्स को ट्रैक कर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Related to Space.

Topic : To encourage participation, PM Modi interacts with key industries leaders, startups from space sector

संदर्भ

हाल ही में प्रधान मंत्री द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित प्रमुख उद्योगों व स्टार्टअप्स की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए उनके साथ संवाद किया गया. सरकार ने आत्म निर्भर भारत के अंतर्गत, अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने और अंतरिक्ष गतिविधियों में भारत के निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है.

विदित हो कि अंतरिक्ष क्षेत्र में आगामी भारतीय स्टार्टअप्स में स्काई रूट एयरोस्पेस, पिक्सल (PIXXEL) इंडिया, स्पेस किड्ज इंडिया आदि शामिल हैं.

निजी क्षेत्र की भूमिका

  • तकनीकी परिदृश्यों में परिवर्तन, डिजिटलाइजेशन आदि के संदर्भ में भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं की पूर्ति करना.
  • उपग्रहों की मांग को पूर्ण करने में सहायता करना, क्योंकि इसरो द्वारा एक वर्ष में 18-20 उपग्रहों की आपूर्ति की जाती है.
  • उच्च तकनीकी नौकरियों का सृजन और कोर रिसर्च, डीप-स्पेस मिशन आदि के लिए अपने संसाधनों को उपलब्ध करा कर इसरो की मदद करना.
  • क्षमता निर्माण, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, नवीनतम नवाचार आदि में सहायता करना.

हाल ही में इस दिशा में उठाए गए कदम

  1. न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड: इसरो की यह वाणिज्यिक शाखा भारतीय उद्योगों को अंतरिक्ष से संबंधित गतिविधियों में उच्च प्रौद्योगिकी के अंगीकरण में सक्षम करेगी.
  2. भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) (INSPACe): यह निजी क्षेत्र के लिए भी समान नीतियाँ सुनिश्चित करेगा. यह अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी हेतु उन्हें प्रोत्साहन व समर्थन प्रदान करने के लिए एक विनियामक के रूप में कार्य करेगा.
  3. एंट्रिक्स (Antrix): एंट्रिक्स इसरो की एक विपणन शाखा है. यह अंतरिक्ष उत्पादों के प्रचार और वाणिज्यिक दोहन, तकनीकी परामर्श सेवाओं तथा इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के लिए उत्तरदायी है.
  4. इसरो ने बेंगलुरु में एक स्पेस टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना की है. इस पार्क में उद्योग के उपयोग के लिए कई प्रकार की सुविधाएँ स्थापित की गई हैं.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life.

Topic : Quantum Computing

संदर्भ

हाल ही में वैज्ञानिकों की एक टीम ने न्यू अल्ट्रा थिन मैटेरियल (New Ultra-Thin Material) तैयार किया है. इस नए मैटेरियल का उपयोग जटिल/एलुसिव क्वांटम स्टेट (Elusive Quantum States) को बनाने के लिए किया जाएगा.

न्यू अल्ट्रा थिन मैटेरियल (New Ultra-Thin Material) और इसके अनुप्रयोग के विषय में

  • वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किये गए न्यू अल्ट्रा थिन मैटेरियल (New Ultra-Thin Material) का उपयोग जटिल/एलुसिव क्वांटम स्टेट (Elusive Quantum States) को बनाया जा सकेगा.
  • न्यू अल्ट्रा थिन मैटेरियल से बनाये गए इन क्वांटम स्टेट्स (Quantum states) को वन डाईमेनशनल मजोराना ज़ीरो एनर्जी मोड(One Dimensional Majorana Zero Energy Modes) का उपनाम दिया गया है.
  • अल्ट्रा थिन मैटेरियल से बने ये क्वांटम स्टेट्स कणिका कंप्यूटिंग (Quantum computing) पर वृहद प्रभाव डाल सकते हैं.
  • उल्लेखनीय है कि क्यूबिट (Qubits), क्वांटम कंप्यूटर(Quantum computer) में उच्च गति गणनाओं (high speed calculations) के लिए जिम्मेदार होते हैं.
  • पूर्व में गूगल और अन्य कंपनियों ने क्वांटम कंप्यूटर  (Quantum computer) बनाने हेतु क्यूबिट (Qubits) तकनीक का प्रयोग करने का प्रयास किया है, किन्तु क्यूबिट (Qubits) तकनीक शोर एवं अन्य बाहरी इंटरफिरेंस (interference) के प्रति बहुत संवेदनशील है. जिससे क्वांटम कंप्यूटर द्वारा की गयी गणना में त्रुटियों के आने की संभावना रहती है.
  • टोपोलॉजिकल क्यूबिट (Topological qubit) के रूप में बनायी गयी नयी क्यूबिट (Qubit), उपरोक्त समस्या को हल कर सकती है. इन्हें बनाने में वन डाईमेनशनल मजोराना ज़ीरो एनर्जी मोड (one dimensional Majorana zero energy modes) की महत्वपूर्ण भूमिका है. 

कणिका प्रौद्योगिकी पर बल देने के कारण

  • कणिका कंप्यूटर (quantum computer) बहुत ही रोचक एवं उत्तेजनापूर्ण उपकरण है क्योंकि यह साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में आवश्यक जटिल आकलन करने की क्षमता रखता है. कहना नहीं होगा कि आजकल डिजिटल कंप्यूटर इस प्रकार के आकलन किया करते हैं.
  • कणिका संचार (Quantum communications) से साइबर सुरक्षा बढ़ेगी और इससे अनूठे उंगली के चिन्ह भी प्राप्त हो सकते हैं. साथ ही इन्टरनेट संजाल के लिए यह वर्तमान बैंडविथ में बढ़ोतरी ला सकता है.

कणिका कंप्यूटर क्या है?

  • कणिका यांत्रिकी (quantum mechanics) के गुणधर्मों का उपयोग करके ही कणिका कंप्यूटर काम करते हैं.
  • कणिका कंप्यूटरों में कणिका अंशों अर्थात् क्यूबिट्स (qubits) नामक लॉजिकल इकाइयों का प्रयोग होता है.
  • इन क्यूबिटों को कणिका दशा में डाला जा सकता है जिससे वेएक ही समय 0 और 1 दोनों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं.

शास्त्रीय एवं कणिका कंप्यूटरों में अंतर (DIFFERENCE BETWEEN CLASSICAL AND QUANTUM COMPUTERS)

  • शास्त्रीय कंप्यूटर सूचना को बिट नामक एक बाइनरी फॉर्मेट में प्रसंस्कृत करते हैं जो या तो 0 अथवा 1 के रूप में होते हैं.
  • शास्त्रीय कंप्यूटर में ये सारे बिट एक-दूसरे से स्वतंत्र होकर काम करते हैं. दूसरी ओर, क्वांटम अथवा कणिका कंप्यूटर में एक क्यूबिट की दशा प्रणाली के अंतर्गत काम कर रहे अन्य क्यूबिटों की दशा को प्रभावित करती है जिस कारण वे सभी मिलकर किसी समाधान को सिद्ध कर सकते हैं.

कणिका कंप्यूटर में परिणाम कैसे आते हैं?

पारम्परिक कंप्यूटर किसी समस्या का उत्तर सदैव एक ही देते हैं चाहे कितनी बार ही गणना क्यूँ न की जाए. परन्तु कणिका कंप्यूटर के परिणाम संभावनात्मक अर्थात् प्रोबेबिलिस्टिक (probabilistic) होते हैं. कहने का तात्पर्य यह है कि ये सदैव एक ही उत्तर नहीं देते. इसलिए कणिका कंप्यूटर का उपयोग करते समय किसी गणना को हजारों या यहाँ तक कि लाखों बार करना पड़ता है और ऐसे में उस उत्तर को सही माना जाता है जिसकी ओर ये सारी संगणनायें आकर मिल जाती हैं.


Prelims Vishesh

Movimiento San Isidro Movement :-

  • यह कलाकारों और कार्यकर्ताओं द्वारा क्यूबा में संचालित किया जा रहा एक अभियान है. इसके अंतर्गत देश में अभिव्यक्ति के लिए अधिक स्वतंत्रता की मांग की जा रही है. ज्ञातव्य है कि क्यूबा छह दशकों से भी अधिक समय से एक सत्तावादी कम्युनिस्ट शासन के अधीन रहा है.
  • सन इसिद्रो एक अश्वेत-बहुल क्षेत्र है, जो हवाना का सर्वाधिक निर्धन भाग होते हुए भी सांस्कृतिक रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है. यह यूनेस्को (UNESCO) विश्व विरासत स्थल “ओल्ड हवाना” का भी हिस्सा है.

Places in News :-

सूडान: हाल ही में, अमेरिका ने सूडान को दिए गए “आतंकवाद के प्रायोजक राज्य” पदनाम को हटा दिया है. सूडान पूर्वोत्तर अफ्रीका महाद्वीप का एक देश है. इसकी अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ मिस्र, इरिट्रिया, इथियोपिया, दक्षिण सूडान, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, चाड और लीबिया से संलग्न हैं.

मोरक्को: हाल ही में, मोरक्को ने इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य किया है. मोरक्को अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर में स्थित एक देश है. यह अटलांटिक महासागर, भूमध्य सागर, अल्जीरिया और पश्चिमी सहारा के साथ अपनी सीमा साझा करता है.


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