Sansar डेली करंट अफेयर्स, 19 August 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 19 August 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : UN Peacekeeping

संदर्भ

विदेश मंत्री,एस जयशंकर द्वारा संयुक्त राष्ट्र के साथ साझेदारी में ‘संयुक्त राष्ट्र शांति-सैनिकों’ (UN peacekeepers) की सुरक्षा बढ़ाने में मदद करने के लिए ‘संयुक्त राष्ट्र – यूनाइट अवेयर’ (UN — UNITE Aware) नामक एक तकनीकी मंच प्रारम्भ करने की घोषणा की गयी है. इस मंच का संयुक्त राष्ट्र के चार मिशनों में उपयोग किया जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में, हाल ही में आयोजित ‘प्रौद्योगिकी और शांति स्थापना’ विषय पर खुली बहस के दौरान इसकी घोषणा की गई थी.

विदेश मंत्री द्वारा शांति सैनिकों की सुरक्षा के लिए चार सूत्री रूपरेखा

  1. अपने निर्माण में पर्यावरण के अनुकूल, उपयोगिता साबित कर चुकी, लागत प्रभावी और क्षेत्र-सेवा योग्य प्रौद्योगिकियों को तैनात किए जाने की आवश्यकता.
  2. शांति सैनिकों के लिए अच्छी सूचना और खुफिया जानकारी की आवश्यकता.
  3. सटीक स्थिति और भूमि के ऊपर से दृश्यचित्रण की जरूरत.
  4. प्रौद्योगिकी संबंधी क्षमता निर्माण और शांतिरक्षकों के प्रशिक्षण में निवेश.

बैठक के परिणाम

भारत और संयुक्त राष्ट्र के मध्य “शांति व्यवस्था में प्रौद्योगिकी के लिए साझेदारी” पहल और शांति कार्यवाहियों के लिए संयुक्त राष्ट्र C4ISR अकादमी (UN C4ISR Academy for Peace – UNCAP) में सहयोग  हेतु एक समझौता ज्ञापन की घोषणा की गई है.

यूनाइट अवेयर (UNITE AWARE)

UNITE AWARE भारत द्वारा विकसित एक मोबाइल तकनीकी मंच है जिसमें संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को पूरे क्षेत्र से संबंधित जानकारी प्रदान की जाती है . इसे संयुक्त राष्ट्र के “डिपार्टमेंट ऑफ पीसकीपिंग ऑपरेशंस और ऑपरेशनल सपोर्ट डिपार्टमेंट” के साथ साझेदारी में विकसित किया जा रहा है.

भारत द्वारा इस परियोजना के लिए 1.64 मिलियन अमरीकी डालर व्यय किए गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र शांति सुरक्षा अभियानों का वित्त पोषण किस प्रकार किया जाता है?

  • यद्यपि, शांति सुरक्षा अभियानों को प्रारम्भ करने, जारी रखने या विस्तार करने के विषय में निर्णय, सुरक्षा परिषद द्वारा लिए जाते हैं, परन्तु इन संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों का वित्तपोषण, संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों की सामूहिक जिम्मेदारी होती है.
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 17 के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक सदस्य राष्ट्र शांति अभियानों के लिए निर्धारित राशि का भुगतान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है.

वर्ष 2020-2021 के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों हेतु आकलन किए गए योगदान के शीर्ष 5 प्रदाता देश निम्नलिखित हैं:

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका (27.89%)
  2. चीन (15.21%)
  3. जापान (8.56%)
  4. जर्मनी (6.09%)
  5. यूनाइटेड किंगडम (5.79%)

यू.एन. पीसकीपिंग और इसका महत्त्व

  • सबसे पहला मिशन 1948 के अरब-इजराइल युद्ध के समय भेजा गया था.
  • संयुक्त राष्ट्र की शान्ति सेना उन देशों में शान्ति की स्थापना में सहायता पहुँचाने के लिए भेजी जाती है जहाँ गृह संघर्ष चल रहा होता है.
  • इतिहास साक्षी है कि संयुक्त राष्ट्र कई अवसरों पर अपनी शान्ति रक्षक सेनाओं को सम्बंधित देश के आग्रह पर भेजकर शान्ति को स्थापित करने में सफल रहा है.
  • शांति सेनाएँ विश्व के कोने-कोने से सैनिकों और पुलिस को इकठ्ठा करके तथा सम्बंधित देश के अपने घरेलू नागरिक के साथ हर प्रकार से समन्वय करते हुए शान्ति स्थापित करने का कार्य करती है.
  • यू.एन. पीसकीपिंग का कार्य जिन मूलभूत सिद्धांतों का अनुसरण करता है, वे हैं – i) पक्षकारों की सहमति ii) निष्पक्षता iii) बल का प्रयोग उसी समय करना जब आत्म रक्षा एवं रक्षा की स्थिति उत्पन्न हो.

वैश्विक भागीदारी

यू.एन. पीसकीपिंग वास्तव में एक अनूठी वैश्विक भागीदारी होती है. अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इसमें न केवल संयुक्त राष्ट्र महासभा, सुरक्षा परिषद् और संयुक्त राष्ट्र सचिवालय को ही एक स्थान पर लाया जाता है, अपितु इस कार्य में शान्ति सेना के लिए अपने सैनिक भेजने वाले देशों और इस सेना को आमंत्रित करने वाले देशों का भी मिला-जुला प्रयास होता है. शान्ति सेनाओं को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में ही वैधता दे दी गई है.

शान्ति रक्षक कौन होते हैं?

शान्ति रक्षक मिशन में इनको शामिल किया जाता है – सैनिक, पुलिस अधिकारी और गैर-सैनिक अधिकारी. सदस्य देश स्वेच्छा से इस मिशन में सैनिक और पुलिस अधिकारी भेजा करते हैं, परन्तु शान्ति अभियान में शामिल गैर-सैनिक अधिकारी संयुक्त राष्ट्र सचिवालय के ही सिविल सर्वेंट होते हैं.

शांति रक्षकों ब्लू बैरट्स या ब्लू हेलमेट भी कहते हैं क्योंकि इनके हेलमेट का रंग हल्का नीला होता है.

सुधार की आवश्यकता क्यों?

  • वर्तमान मेंयू.एन. पीसकीपिंग का कार्य एक ओर जहाँ विकट परिस्थतियों में शान्ति को स्थापित करना है, वहीं दूसरी ओर उस स्थापित शान्ति को बनाये रखना भी है.
  • शान्ति सेना के लिए सैनिक भेजने वाले देशों, सुरक्षा परिषद् और सचिवालय इन तीनों के बीच सहयोग अपेक्षा के अनुरूप नहीं होता है.

क्या-क्या सुधार हो सकते हैं?

  • महिला शान्ति रक्षक सैनिकों को शान्ति सेनाओं में शामिल होने के लिए उत्प्रेरण दिया जा सकता है. विदित हो कि जुलाई 2019 के आँकड़े के अनुसार, शान्ति सेनाओं में महिलाओं का प्रतिशत मात्र 6 है. संख्या की दृष्टि से कहा जाए तो 86,687 शान्ति रक्षकों में से मात्र 5,243 ही महिला रक्षक हैं.
  • शान्ति स्थापित करने के लिए की गई तैनाती में एक ही देश के सैनिकों को नहीं लगाकर कई देशों की मिली-जुली टुकड़ी भेजी जाएँ जिससे कि भागीदारी की वास्तविक भावना उत्पन्न हो सके.
  • भविष्य के कमांडरों और प्रबंधकों की क्षमता को विकसित करने के लिए तथा शान्ति रक्षक सैनिकों को संयुक्त राष्ट्र के आचारगत मानकों के प्रति शान्ति रक्षकों को जागरूक बनाने के लिए नवाचारी पहलों की आवश्यकता प्रतीत होती है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : National Commission on Minorities – NCM

संदर्भ

दिल्‍ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में केंद्र सरकार से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Commission on Minorities – NCM ) के सभी रिक्त पदों को 30 सितंबर तक भरने के लिए कहा है. इससे पूर्व, उच्च न्यायालय ने आयोग के सभी रिक्त पड़े पदों को 31 जुलाई तक भरने का आदेश दिया था. इसके पश्चात् केंद्र सरकार ने एक आवेदन दायर कर न्यायालय से अनुरोध किया था कि यह समय सीमा तीन मास के लिए बढ़ा दी जाए.

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना

  • वर्ष 1978 में गृह मंत्रालय द्वारा पारित एक संकल्प में अल्पसंख्यक आयोग (Minorities Commission- MC) की स्थापना की परिकल्पना की गई थी.
  • वर्ष 1984 में, अल्पसंख्यक आयोग को गृह मंत्रालय से पृथक् कर दिया गया और इसे नव-निर्मित कल्याण मंत्रालय (Ministry of Welfare) के अधीन रखा गया, जिसने वर्ष 1988 में भाषाई अल्पसंख्यकों को आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर कर दिया.
  • वर्ष 1992 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अधिनियमन के साथ ही अल्पसंख्यक आयोग एक सांविधिक/वैधानिक (Statutory) निकाय बन गया और इसका नाम परिवर्तित कर के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) कर दिया गया.
  • वर्ष 1993 में पहले वैधानिक राष्ट्रीय आयोग का गठन किया गया और पाँच धार्मिक समुदायों-मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी को अल्पसंख्यक समुदायों के रूप में अधिसूचित किया गया.
  • वर्ष 2014 में जैन धर्म मानने वालों को भी अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया गया था.

संरचना

  • NCM में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पाँच सदस्य होते हैं और इन सभी का चयन अल्पसंख्यक समुदायों में से किया जाता है.
  • केंद्र सरकार द्वारा नामित किये जाने वाले इन व्यक्तियों को योग्य, क्षमतावान और सत्यनिष्ठ होना चाहिये.
  • कार्यकाल: प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल पद धारण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि तक होता है.

प्रमुख कार्य

  • संघ और राज्यों के अंतर्गत अल्पसंख्यकों के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना.
  • अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की सुरक्षा के लिये बनाई गई नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु आवश्यक सिफारिशें करना.
  • अल्पसंख्यकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास से संबंधित विषयों का अध्ययन, अनुसंधान और विश्लेषण करना.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Gujarat HC stays some sections of anti ‘love jihad’ law

संदर्भ

हाल ही में गुजरात उच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में गुजरात धर्मान्तरण विरोधी कानून, 2021 के कुछ प्रावधानों (सेक्शन 3, 4, 4a, 5, 6, 6a) पर रोक लगा दी है. न्यायालय की खंड पीठ ने कहा है कि उक्त कानून के प्रावधानों से इस प्रकार की धारणा बनती है कि राज्य में अंतरधार्मिक विवाह की अनुमति नहीं है और इसी कारण अंतरधार्मिक जोड़ों पर तलवार लटकती रहती है.

धर्मान्तरण विरोधी कानून के बारे में

  • इस कानून में धर्म की स्वतंत्रता कानून, 2003 में संशोधन के माध्यम से विवाह के माध्यम से जबरन एवं लालच देकर धर्मांतरण करवाने को अपराध घोषित किया गया है. (सेक्शन 3)
  • जबरन धर्मान्तरण के मामलों में अपराध सिद्ध होने पर 3 वर्ष का कारावास एवं 50,000 के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. यदि पीड़ित SC/ST, नाबालिग महिला है तो सजा 4 वर्ष तथा जुर्माना 1 लाख रु. होगा. (सेक्शन 4)
  • केवल धर्मान्तरण के लिए विवाह करने की स्थिति में सजा 3-5 वर्ष तथा जुर्माना 2 लाख निर्धारित किया गया है. (सेक्शन 4a)
  • धार्मिक पुजारियों, मौलवियों, पादरियों आदि को धर्मान्तरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति लेनी होगी. (सेक्शन 5)
  • कानून के तहत मुकदमा चलाने से पहले जिला मजिस्ट्रेट की स्वीकृति की आवश्यकता होगी (सेक्शन 6) तथा सबूत प्रस्तुत करने का जिम्मा आरोपी पर होगा (सेक्शन 6a)
  • संशोधन में लालच को परिभाषित भी किया गया है, जिसके अनुसार बेहतर जीवन स्तर, दैवीय वरदान के वादों को लालच की श्रेणी में रखा गया है.
  • पीड़ित व्यक्ति के परिवारजन या अन्य कोई व्यक्ति उसकी ओर से शिकायत दर्ज करा सकता है.

धर्मांतरण एवं अंतरधार्मिक विवाहों पर संवैधानिक प्रावधान एवं न्यायालय के विभिन्‍न निर्णय

  • संविधान के अनुच्छेद 25 में अंत:करण की स्वतंत्रता तथा धर्म के अबाध रूप से मानने की स्वतंत्रता, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार दिया गया है.
  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वर्ष 2020 के ‘सलामत अंसारी-प्रियंका खरवार’ मामले में निर्णय सुनाते हुए कहा कि किसी साथी को चुनने का अधिकार अथवा अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार, नागरिकों के “जीवन और स्वतंत्रता संबंधी मूल अधिकार” (अनुच्छेद 21) का भाग है.
  • सर्वोच्च न्यायालय ने, लिली थॉमस और सरला मुद्गल, दोनों मामलों में यह पुष्टि की है कि धार्मिक विश्वास के बिना और कुछ कानूनी लाभ प्राप्त करने के एकमात्र उद्देश्य के लिए किए गए धर्म-परिवर्तन का कोई आधार नहीं है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : 4 more sites in India added to Ramsar list

संदर्भ

हाल ही में, भारत की चार और आर्द्रभूमियों (Wetlands) को ‘रामसर अभिसमय’ (Ramsar Convention) के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता दी गई है. इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की संख्या 46 हो गई है और इन स्थलों से आच्छादित सतह क्षेत्र अब 1,083,322 हेक्टेयर हो गया है.

नए आर्द्र-स्थलों में सम्मिलित हैं: –

  1. सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यानहरियाणा: यह उद्यान पक्षियों, शीतकालीन प्रवासी और स्थानीय प्रवासी जलपक्षियों की 220 से अधिक प्रजातियों की उनके अपने जीवन चक्र के महत्त्वपूर्ण चरणों में आश्रय देकर संभरण करता है. इनमें से दस से अधिक प्रजातियाँ विश्व स्तर पर खतरे में आ चुकी हैं, जिनमें अत्यधिक संकट में लुप्तप्राय होने की कगार पर आ चुके मिलनसार टिटहरी (लैपविंग) और लुप्तप्राय मिस्र के गिद्ध, सेकर फाल्कन, पलास की मछली(फिश) ईगल और ब्लैक-बेलिड टर्न शामिल हैं.
  2. भिंडावास वन्यजीव अभयारण्यहरियाणा: यह मानव निर्मित मीठे पानी की आर्द्रभूमि है. यह इस प्रकार की हरियाणा की सबसे बड़ी आर्द्रभूमि है.
  3. थोलगुजरात: गुजरात की थोल झील वन्यजीव अभयारण्य पक्षियों के मध्य एशियाई उड़ान मार्ग (फ्लाईवे) पर स्थित है और यहां 320 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जा सकती हैं. यह आर्द्रभूमि अत्यधिक संकट-ग्रस्त लुप्तप्राय सफेद-पंख वाले गिद्ध और मिलनसार टिटहरी (लैपविंग) और संकटग्रस्त सारस बगुले (क्रेन), बत्तखें (कॉमन पोचार्ड) और हल्के सफ़ेद हंस (लेसर व्हाइट-फ्रंटेड गूज़), जैसे 30 से अधिक संकटग्रस्त जलपक्षी प्रजातियों की शरण-स्थली भी है.
  4. वाधवानागुजरात: गुजरात में वाधवाना आर्द्रभूमि (वेटलैंड) अपने पक्षी जीवन के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रवासी जलपक्षियों को सर्दियों में रहने के लिए उचित स्थान प्रदान करती है. इनमें लुप्तप्राय पलास की मछली-ईगल, दुर्बल संकटग्रस्त सामान्य बत्तखें (कॉमन पोचार्ड) और आसन्न संकट वाले डालमेटियन पेलिकन, भूरे सर वाली (ग्रे-हेडेड) फिश-ईगल और फेरुगिनस डक, जैसी कुछ संकटग्रस्त या संकट के समीप आ चुकी प्रजातियां शामिल हैं.

आर्द्रभूमि क्या है?

  • नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र को आर्द्रभूमि या वेटलैंड (Wetland) कहा जाता है. दरअसल, वेटलैंड्स वैसे क्षेत्र हैं जहाँ भरपूर नमी पाई जाती है और इसके कई लाभ भी हैं.
  • आर्द्रभूमि जल को प्रदूषण से मुक्त बनाती है. आर्द्रभूमि वह क्षेत्र है जो वर्ष भर आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से जल से भरा रहता है.
  • भारत में आर्द्रभूमि ठंडे और शुष्क इलाकों से लेकर मध्य भारत के कटिबंधीय मानसूनी इलाकों और दक्षिण के नमी वाले इलाकों तक फैली हुई है.

रामसर क्या है?

  • रामसर आर्द्रभूमि समझौते (Ramsar Convention on Wetlands) पर फरवरी, 1971 में इरान के कैप्सियन सागर के तट पर स्थित शहर रामसर में हस्ताक्षर किये गये थे. इसलिए इसे रामसर संधि कहा जाता है. कुछ लोग इस संधि को आर्द्रभूमि संधि (Wetland Convention) भी कहते हैं.
  • यह 1975 में लागू हुई.
  • इस संधि का औपचारिक नाम है – अंतर्राष्ट्रीय महत्त्वविशेषकर जल पक्षी आवास के रूप में आर्द्रभूमियों के विषय में संधि.
  • यह एक अंतर-सरकारी संधि है जो आर्द्रभूमि के संरक्षण और समुचित उपयोग के सम्बन्ध में मार्गदर्शन प्रदान करती है.
  • भारत ने 1982 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए.
  • भारत में आर्द्रभूमि के संरक्षण के मामलों के लिए केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु-परवर्तन मंत्रालय नोडल मंत्रालय घोषित है.
  • विदित हो कि भारत में सम्पूर्ण भूमि के 4.7% पर आर्द्रभूमि फैली हुई है.

यह भी पढ़े > रामसर संधि


Prelims Vishesh

Places in News :-

St. Vincent – The Grenadines :-

St. Vincent - The Grenadines

  • भारत के प्रधान मंत्री ने सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के प्रधानमंत्री पर हमले की निंदा की है, जो एक प्रस्तावित वैक्सीन जनादेश के जन विरोध में घायल हो गए थे.
  • सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस दक्षिणी कैरेबियन सागर में 32 द्वीपों की एक श्रृंखला है.

Sitanadi Udanti Tiger Reserve :-

Sitanadi Udanti Tiger Reserve :-

  • छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरी क्षेत्र में और बाघ अभयारण्य के मुख्य क्षेत्र (कोर एरिया) में सामुदायिक वन संसाधन (CFR) अधिकारों को मान्यता प्रदान की है. ऐसा देश में प्रथम बार हुआ है.
  • अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम, 2006 व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों से संबंधित प्रावधानों को शामिल करता है.
  • छत्तीसगढ़ में सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व सहित 4 टाइगर रिज़र्व हैं.
  • अन्य 3 टाइगर रिजर्व हैं: अचानकमार टाइगर रिजर्व, गुरु घासी दास राष्ट्रीय उद्यान और इंद्रावती टाइगर रिजर्व.

Mount Merapi :-

Mount Merapi

  • हाल ही में, इंडोनेशिया में सर्वाधिक अस्थिर और सक्रिय ज्वालामुखी प्रस्फुटित हो गया है. इसका नाम मेरापी है.
  • यह शिखर, योग्याकार्ता के निकट अवस्थित है.
  • यह कई लाख की आबादी से युक्त व्यापक क्षेत्र में विस्तारित एक प्राचीन शहर है.
  • डोनेशिया भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधि के प्रति प्रवण क्षेत्र है. इसका कारण यह है कि यह प्रशांत महासागर के चारों ओर घोड़े की नाल के आकार में विस्तारित भूकंपीय भ्रंश रेखाओं के क्षेत्र “रिंग ऑफ फायर” में स्थित है.

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