Sansar डेली करंट अफेयर्स, 18 October 2018

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Sansar Daily Current Affairs, 18 October 2018


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : LPG set to make Kerala the first smoke-free State

संदर्भ

केरल देश का सबसे पहला धुआँ-रहित राज्य बनने वाला है. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कम्पनियाँ यहाँ 100% घरों में LPG पहुँचाने के लिए प्रयासरत हैं.

  • व्यावसायिक हितों को ध्यान में न रखते हुए प्रधानमन्त्री उज्ज्वला योजना के तहत LPG की आपूर्ति की जा रही है.
  • राज्य में सिलिंडर बनाने के संयंत्र कोच्चि, कोझिकोडे तथा कोल्लम में स्थित हैं. 308 वितरकों के माध्यम से 49.79 लाख उपभोक्ताओं को LPG मुहैया कराई जा रही है.

पृष्ठभूमि

केरल उन राज्यों में से है जहाँ LPG की पैठ सबसे अधिक है और लोगों की जीवन-शैली बदल रही है. 2017-18 में यहाँ LPG की खपत 933.3 TMT थी. LPG के प्रसार से यह अनुमान किया जा रहा है कि LPG के प्रयोग से जलावन से उत्पन्न होने वाले विषैले गैसों का 1 करोड़ टन उत्सर्जन रोका जा सका है और 25 लाख पेड़ बचाए जा सके हैं.

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)

 

  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लक्ष्य गरीब परिवारों तक एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) कनेक्शन पहुँचाना है.
  • इस योजना के अंतर्गत सामाजिक-आर्थिक-जाति-जनगणना (SECC) के माध्यम से पहचान किये गए गरीबी रेखा के नीचे आने वाले परिवारों की वयस्क महिला सदस्य को केंद्र सरकार द्वारा प्रति कनेक्शन 1600 रुपये की वित्तीय सहायता के साथ जमा मुक्त एलपीजी कनेक्शन दिया जाता है.
  • यह योजना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा लागू की जा रही है.

PMUY का उद्देश्य

  • स्त्रियों का सशक्तिकरण और उनकी स्वास्थ्य की सुरक्षा
  • जीवाश्म पर आधारित रसोई से जुड़े गंभीर स्वास्थगत खतरों को घटाना
  • रसोई के अस्वच्छ जलावन के कारण होने वाली मृत्यु की संख्या घटाना
  • घर के अन्दर जीवाश्म जलाने से होने वाले श्वास रोगों से बच्चों को बचाना.

LPG आवश्यक क्यों?

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि भारत में 13% रोग और निःशक्तता ठोस जलावन के कारण होती है. 40% फेफड़े की बिमारी, 30% मोतियाबंद और 20% स्किमिया हृदय रोग जलावन के धुएँ से होता है. इसके अतिरिक्त फेफड़े के कैंसर लिए भी यही धुआँ उत्तरदायी है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Global Competitiveness Index 2018

संदर्भ

विश्व आर्थिक मंच अर्थात् World Economic Forum ने हाल ही में 2018 का वैश्विक प्रतिस्पर्धा सूचकांक (Global Competitiveness Index) प्रस्तुत किया है.

भारत का प्रदर्शन

  • इस वैश्विक सूचकांक में भारत का स्कोर 62.0 रहा जिसके आधार पर इस देश की अर्थव्यवस्था को प्रतिस्पर्धा के हिसाब से 58वाँ स्थान दिया गया.
  • पिछले वर्ष की तुलना में भारत का स्थान 5 क्रम ऊपर आ गया है. यह उछाल G20 देशों में सबसे बड़ी उछाल है.
  • जहाँ तक दक्षिण एशियाई देशों का प्रश्न है भारत का स्थान सूचकांक में सबसे ऊँचा रहा. श्रीलंका को 86वाँ, बांग्लादेश को 103वाँ, पाकिस्तान को 107वाँ और नेपाल को 109वाँ स्थान मिला.
  • रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में भारत स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा के मामले में आगे है.
  • भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता इसलिए अधिक हो जाती है क्योंकि इसका बाजार बहुत बड़ा है और यहाँ नवाचार बेहतर है.

वैश्विक प्रदर्शन

  • प्रतिवेदन में वर्णित 140 अर्थव्यवस्थाओं में सर्वोच्च स्थान अमेरिका (85.6 स्कोर) का है जबकि सिंगापुर एवं जर्मनी दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.
  • शीर्ष दस स्थानों के अन्दर आने वाले अन्य देश हैं – स्विट्जरलैंड (चौथा), जापान (5वाँ), नीदरलैंड (6वाँ), हांगकांग (7वाँ), यूनाइटेड किंगडम (8वाँ), स्वीडन (9वाँ) और डेनमार्क (10वाँ).
  • मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीकी देशों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा. जहाँ इजराइल को 20वाँ स्थान मिला वहीं संयुक्त अरब अमीरात का स्थान 27वाँ है.
  • सहारा मरूभूमि के दक्षिण में स्थित 34 देशों में 17 देश इस सूचकांक के अंतिम 20 में आते हैं. सबसे अच्छी रैंकिंग मॉरिशस को मिली (49वीं) जोकि चाड (140वीं) की तुलना में 91 स्थान ऊपर है.
  • BRICS देशों में चीन की अर्थव्यवस्था को 28वाँ स्थान मिला जिसके बाद क्रमशः रूस, भारत, दक्षिणी अफ्रीका और ब्राजील आते हैं.

भूमिका

वैश्विक प्रतिस्पर्धा सूचकांक (GCI) विभिन्न देशों से प्रतिस्पर्धात्मकता की 12 श्रेणियों के अंतर्गत प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तैयार किया जाता है. ये श्रेणियाँ हैं – संस्थान, अवसंरचना, समष्टिगत आर्थिक पर्यावरण, स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण, वस्तु बाजार क्षमता, श्रम बाजार कुशलता, आर्थिक बाजार विकास, तकनीकी तत्परता, बाजार का आकार, व्यवसाय परिष्कार एवं नवाचार.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : ASEM Summit

संदर्भ

बेल्जियम की राजधानी ब्रूसेल्स में एशिया-यूरोप सम्मेलन अर्थात् Asia-Europe Meeting (ASEM) की 12वीं बैठक हो रही है. इस सम्मलेन की थीम है – ‘Global Partners for Global Challenges’ अर्थात् वैश्विक चुनौतियों के लिए वैश्विक भागीदार.

ASEM क्या है?

  • एशिया-यूरोप सम्मेलन (ASEM) आपसी संवाद एवं सहयोग की एक अनौपचारिक प्रक्रिया है जिसमें यूरोपीय संघ के 28 देश, 2 अन्य यूरोपियन देश, 21 एशियाई देश तथा ASEAN सचिवालय सम्मिलित होते हैं.
  • ASEM जिन विषयों पर सम्वाद करता है वे राजनैतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विषय होते हैं और सम्वाद का उद्देश्य यूरोपीय और एशियाई क्षेत्रों के बीच के सम्बन्धों को परस्पर सम्मान और समान भागीदारी की भावना से युक्त होकर सुदृढ़ करना है.
  • इसकी स्थापना इसके पहले सम्मेलन में 1 मार्च, 1996 को हुई थी जो बैंकोक, थाईलैंड में हुआ था.
  • ASEM सम्मेलन दो वर्ष में एक बार होता है.
  • इसमें जो भाग लेते हैं, वे हैं – देशों और सरकारों के प्रमुख, यूरोपियन परिषद् का अध्यक्ष, यूरोपीय आयोग का अध्यक्ष और ASEAN का महासचिव.

GS Paper 3 Source: PIB

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Topic : OneerTM

संदर्भ

वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिक अनुसंधान परिषद् (Council of Scientific & Industrial Research – CSIR) ने हाल ही में “OneerTM” नामक एक सस्ती जल निर्मलीकरण प्रणाली (Water Disinfection System) बनाई है. इस प्रणाली से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेय जल की आवश्यकताओं को पूरा करने में बहुत सहायता मिलेगी.

OneerTM के उपयोग

OneerTM जल को लगातार स्वच्छ करने का एक उपकरण है जो पानी में से सभी रोगकारक पदार्थों को नष्ट कर देता है, जैसे – वायरस, बैक्टीरिया, फफूंद, प्रोटोजोआ और शिष्ट. इस प्रकार इससे निकला हुआ जल घरेलू एवं सामुदायिक उपयोग के लिए सुरक्षित तथा पेय जल के लिए निर्धारित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होता है.

स्वच्छ जल का महत्त्व

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए शुद्ध पेय जल होना अत्यंत आवश्यक होता है और यह एक बुनियादी मानवाधिकार है. परन्तु वर्तमान में भारत के गाँवों में बहुत सारे लोग ऐसा पानी पीते हैं जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा निर्धारित पेय जल गुणवत्ता के मानकों पर खरा नहीं उतरता.

  • पेय जल के संक्रमित होने पर लोगों की मृत्यु होती है अथवा शारीरिक निःशक्तता उत्पन्न हो जाती है. इससे सबसे बड़ी क्षति बच्चों को होती है.
  • CSIR द्वारा निर्मित Oneer 2 पैसे/लीटर की दर से शुद्ध पानी देता है. बड़ा वाला Oneer 450 LPH क्षमता का होता है जिसका उपयोग एक समुदाय के लिए हो सकता है. इसकी क्षमता को 5000 से 1 लाख L/दिन तक बढ़ाया जा सकता है. Oneer का रख-रखाव निःशुल्क होता है. ओनीर सौर ऊर्जा से भी चलाया जा सकता है जिस कारण गाँवों के लिए यह बड़े काम की चीज होगा.

GS Paper 3 Source: Times of India

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Topic : Galaxy proto-supercluster — Hyperion

संदर्भ

यूरोपीयन सदर्न ओब्सर्वेटरी (European Southern Observatory – ESO) के वैज्ञानिकों के एक दल ने हाल ही में एक आकाशगंगा पुरा-महासंकुल (galaxy proto-supercluster) देखा है जो अभी तक खोजा गया पुरातन ब्रह्मांड का सबसे विशाल ढाँचा है. इस महासंकुल का नाम Hyperion रखा गया है.

  • इस आकाशगंगा की खोज के लिए ESO की अति-विशाल दूरबीन (Very Large Telescope – VLT) के multi-object spectrograph द्वारा किये गए नए मापों का सहारा लिया गया है.
  • इस खोज के लिए ढेर सारे archive data का भी अध्ययन किया गया है.

मुख्य तथ्य

  • Hyperion के आयतन की विशालता अकल्पनीय है. वस्तुतः इसका आयतन हमारे अपने सूर्य की तुलना में दस लाख करोड़ गुना बड़ा है. Hyperion का द्रव्यमान इतना बड़ा है कि इसमें 1,048 वृहस्पति अथवा 333,000 पृथ्वियाँ समा सकती हैं.
  • खगोलशास्त्रीय दृष्टि से Hyperion अभी किशोरावस्था में है. अभी हम जिस Hyperion को देख रहे हैं, वह Big Bang के पश्चात् 2 करोड़ वर्ष के समय का Hyperion है. विदित हो कि यह बिग बैंग लगभग 13.8 करोड़ वर्ष पहले घटित हुआ था. हमारी सौर प्रणाली जिस आकाशगंगा में स्थित है वह 13.6 करोड़ वर्ष पुराना है.
  • Hyperion के अध्ययन से न केवल ब्रह्मांड के निर्माण की प्रक्रिया समझने में सुविधा होगी अपितु ब्रह्मांड भविष्य में क्या रूप धारण करेगा, उसकी भी समझ विकसित होगी. हो सकता है कि महासंकुल के निर्माण के बारे में हमारी वर्तमान जानकारी को इससे चुनौती मिल जाए और हमें नए सिद्धांत गढ़ने पड़ें.

अति-विशाल दूरबीन (Very Large Telescope – VLT)

  • VLT एक वेधशाला है जिसकी स्थापना यूरोपीयन सदर्न ओब्सर्वेटरी (European Southern Observatory – ESO) ने उत्तरी चिली की अटाकामा मरुभूमि में अवस्थित Cerro Paranal में की है.
  • इसमें चार अलग-अलग दूरबीन हैं जिनका प्रधान दर्पण (mirror) 8.2 मीटर का है. इन दर्पणों का सामान्यतः अलग-अलग उपयोग होता है पर आवश्यकतानुसार इन सभी का एक साथ भी उपयोग हो सकता है जिससे कि अति-उच्च एंगुलर रिसोल्यूशन पाया जा सकता है. इन चारों दूरबीनों के अलग-अलग नाम भी हैं – Antu, Kueyen, Melipal और Yepun. ये सभी शब्द मापुचे (Mapuche) भाषा के हैं और अन्तरिक्षीय पिंडों से सम्बंधित हैं.
  • VLT दृश्य एवं इन्फ्रा-रेड वेवलेंथ पर चलता है. हमलोग नंगी आँख से जितना देखते हैं, उसकी तुलना में VLT के दूरबीन 4 करोड़ गुना अधिक अस्पष्ट पदार्थों को देख सकते हैं. यदि सभी दूरबीनों को मिला दिया जाए तो इसकी एंगुलर रिसोल्यूशन 0.001 arc सेकंड का हो जाता है. यह रिसोल्यूशन चाँद की दूरी पर 2 मीटर के रिसोल्यूशन के बराबर है.
  • Hubble Space Telescope दूरबीन के बाद VLT ऐसी दूसरी वेधशाला है जिसने खगोल विज्ञान को सबसे अधिक जानकारियाँ दी हैं.

Prelims Vishesh

Man Booker Prize :-

  • उत्तरी-आयरलैंड की लेखिका Anna Burns को उनके तीसरे बड़े उपन्यास “Milkman” के लिए 2018 का मैन बुकर पुरस्कार दिया गया है.
  • यह पुरस्कार 1969 से दिया जा रहा है.
  • यह पुरस्कार अंग्रेजी में लिखी साहित्यिक कृति के लिए प्रतिवर्ष दिया जाता है.
  • पुरस्कार में £50,000 दिए जाते हैं.

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5 Comments on “Sansar डेली करंट अफेयर्स, 18 October 2018”

  1. A DAILY QUIZ MUST BE THERE SIR ,
    That will help to analyze ourselves
    So it is kind request to start this initiative
    highly obliged

  2. महोदय,
    आज फिर मैं कुछ नई उलझने लेकर उपस्थित हूँ। यथा- 1.मेरी English ठीक ठाक है लेकिन मुझे लगता है कि Upsc के English qualifying पेपर के दृष्टिकोण से यह पर्याप्त नही है। आप इसके लिए क्या सुझाव देंगे?
    2.हालांकि GS papers की तैयारी के लिये मेरे पास सभी मानक पुस्तकें है एवं मैं इतिहास, भूगोल और राजनीति विज्ञान से स्नातक हूँ लेकिन मुझे फिर भी सलाह दी जाती रही है कि NCERT पढो और नेट से भी पढो। NCERT तो लगभग कम्पलीट हो गयी है लेकिन यह नेट से पढ़ने वाला मामला उलझा रहा है, समझ नही आता कि कितना पढ़ना है और क्या पढ़ना है क्योंकि नेट पर इतनी ज्यादा सामग्री है कि अपना पूरा समय दिया जाए तो भी कम ही पड़ता है। मार्गदर्शन दीजिए।
    3.मेरे पास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए dr. रवि p अग्रहरि की पुस्तक है मगर इसके अतिरिक्त क्या पढ़ना होगा?
    4.जहां मैं रहता हूँ वहां दैनिक भास्कर एवं राजस्थान पत्रिका के अलावा कोई अखबार नही आता है। मुझे सलाह दी गयी कि दैनिक जागरण का राष्ट्रीय संस्करण पढा जाए लेकिन The Hindu के कंटेंट की तुलना में इसका कंटेंट मुझे नाकाफी महसूस हुआ, हालांकि मैं संसार DCA के साथ दृष्टि करंट बुलेटिन पढ़ता हूँ और आकाशवाणी न्यूज़ सुनता हूँ। क्या यह करंट अफेयर्स के लिए काफी है?
    5.CSAT के लिए आर एस अग्रवाल पर्याप्त है क्या?
    आपके शीघ्रातिशीघ्र जवाब के इंतज़ार में..!

    1. आपको इंग्लिश में सिर्फ पास मार्क्स लाना है, इतना तो आपको पढ़ना ही होगा. पुराने सवालों को हल करें और देखें कहाँ दिक्कत हो रही है, बाक़ी की बात बाद में करेंगे.
      NCERT से पढ़ना अनिवार्य नहीं है. NCERT पढ़ने इसलिए कहा जाता है कि आपका basics मजबूत हो जाए, उसके बाद इन किताबों का कोई प्रयोग नहीं है. जहाँ तक रही इन्टरनेट से पढ़ाई की बात, तो इन्टरनेट की मदद लेना कोई बुरी बात नहीं है. आप नोट्स बनाते समय यदि कहीं पर अटक जाते हैं तो तथ्यों को सर्च करके नोट्स बना सकते हैं. पर इन्टरनेट पर पूरी तरह निर्भर रहना बेवकूफी है क्योंकि खासकर हिंदी माध्यम के लिए कोई उत्कृष्ट वेबसाइट उपलब्ध नहीं जिसपर पूरी UPSC पढ़ाई के लिए आँख मूँदकर विश्वास किया जा सके. विज्ञान से सवाल कम आते हैं इसलिए आप जो भी किताब पढ़ो, वह पर्याप्त ही होगा. NCERT भी सच पूछा जाए तो विज्ञान के लिए पर्याप्त है. हमारे वेबसाइट पर Sansar DCA प्लस हमारे app पर रोज़ रेडियो सुनें. मुझे लगता है करंट के लिए इतना पर्याप्त होगा. CSAT के लिए RS Agarwal तो पर्याप्त है पर साथ-साथ CSAT के लिए सबसे अधिक जो जरुरी है – वह है प्रैक्टिस. वह प्रैक्टिस सिर्फ उन प्रश्नों की जो CSAT में पूछे जाते हैं. इसके लिए आप previous year CSAT papers को हल करें या कहीं से mock टेस्ट का जुगाड़ करके सिर्फ प्रश्नों को समय पर हल करने की कला सीख जाएँ. RS Agarwal तो बस बेसिक मजबूत करने के लिए है.

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