Sansar डेली करंट अफेयर्स, 18 March 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 18 March 2021


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Arunodoi scheme

संदर्भ

दिसंबर 2020 में असम सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई, अरुणोदोई योजना राज्य की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है. यह योजना असम सरकार द्वारा राज्य के 29 जिलों में संचालित की जा रही है. इस योजना के जरिये सरकार घर की नामांकित महिला मुखिया के बैंक खातों में प्रतिमाह न्यूनतम 830 रु. की राशि हस्तांतरित करके महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है.

प्रमुख बिंदु

  • इस योजना की घोषणा राज्य के बजट 2020-21 के दौरान की गई थी. इसे 2400 करोड़ रुपए की लागत से लागू किया जाना है.
  • योजना के अंतर्गत लाभार्थी बनने के लिए परिवार की आय 2 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम होनी चाहिए.
  • इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा पहले ही 18 लाख से अधिक लाभार्थियों का चयन किया जा चुका है. बोडोलैंड टेरिटोरियल एरिया में जिलों को सम्मिलित किए जाने के बाद यह संख्या 22 लाख तक पहुँचने की आशा है.
  • असम सरकार के अनुसार यह योजना, परिवार को 200 रुपये मूल्य की 4 किलोग्राम दाल, प्रति माह 400 रुपये की दवा, 80 रुपये की चीनी और 150 रुपये में फल और सब्जियाँ खरीदने में सक्षम बनाएगी.
  • ट्रेक्टर, चार पहिया वाहन, फ्रिज या टीवी रखने वाले परिवार इस योजना के अंतर्गत लाभ के पात्र नहीं हैं.
  • इस योजना के तहत लाभार्थियों को राशि प्रत्यक्ष रूप से भारतीय रिजर्व बैंक की ई-कुबेर प्रणाली से हस्तांतरित की जानी है.

ई-कुबेर

यह भारतीय रिज़र्व बैंक का एक कोर बैंकिंग सोल्यूशन है. कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस बैंकों को एक ही स्थान से 24X7 ग्राहक केंद्रित सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं अर्थात् यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो RBI प्रतिदिन के लेन-देन करने के लिए प्रयोग किया जाता है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : UNIVERSAL BASIC INCOME

संदर्भ

हाल ही में, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा वर्ष 2021 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस पार्टी का घोषणापत्र निर्गत किया गया है.

घोषणापत्र में अन्य बातों के अलावा, प्रत्येक परिवार के लिए ‘सार्वभौमिक आधारभूत आय’ अर्थात् यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) देने का वादा किया गया है.

घोषणा के अनुसार

  1. आय योजना के अंतर्गत, सामान्य श्रेणी के अंतर्गत आने वाले सभी 6 करोड़ परिवारों के लिए 500 रुपए प्रति माह तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के परिवारों को 1,000 रुपए प्रति माह प्रदान किये जाएँगे.
  2. यह राशि, परिवार की महिला मुखिया के नाम पर प्रत्यक्ष रूप से ट्रांसफर की जाएगी.

सार्वभौम आधारभूत आय क्या है?

सार्वभौम आधारभूत आय (UBI) एक ऐसी योजना है जिसमें देश के सभी नागरिकों को एक निश्चित धनराशि दी जाती है चाहे उनकी आय, संसाधन अथवा आजीविका की स्थिति कैसी भी हो.

इस योजना के पीछे मुख्य अवधारणा निर्धनता की रोकथाम करना अथवा उसे घटाना तथा साथ ही नागरिकों के बीच समानता में वृद्धि करना है. सार्वभौम आधारभूत आय का मूल सिद्धांत यह है कि देश के सभी नागरिकों को अधिकार है कि उनके पास एक जीने योग्य आय हो चाहे उनकी जन्मजात स्थिति कुछ भी हो.

UBI के घटक

  1. सार्वभौमिकता (सभी नागरिक)
  2. बिना शर्त (कोई पूर्व शर्त नहीं)
  3. आवधिक (नियमित अंतराल पर आवधिक भुगतान)
  4. नकद हस्तांतरण (फ़ूड वाउचर अथवा सेवा कूपन नहीं)

सार्वभौम आधारभूत आय (UBI) के लाभ

  1. नागरिकों को सुरक्षित आय प्रदान करता है.
  2. समाज में गरीबी तथा आय असमानता में कमी होती है.
  3. निर्धन व्यक्तियों की क्रय शक्ति में वृद्धि होती है, जिससे अंततः सकल मांग बढ़ती है.
  4. लागू करने में आसान होती है क्योंकि इसमें लाभार्थी की पहचान करना सम्मिलित नहीं होता है.
  5. सरकारी धन के अपव्यय में कमी होती है, इसका कार्यान्वयन बहुत सरल होता है.

भारत में सार्वभौम आधारभूत आय लागू करने में चुनौतियाँ

  • किसी देश में UBI लागू करने हेतु उच्च लागत की आवश्यकता होती है. विकसित देशों के लिए UBI व्यय का वहन करना, विकासशील देशों की तुलना में आसान होता है.
  • भारत में ‘सार्वभौम आधारभूत आय’ को लागू करने में होने वाले भारी व्यय को देखते हुए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु प्रमुख चुनौती है.
  • सार्वभौम आधारभूत आय के लागू होने से इस बात की प्रबल संभावना है कि लोगों को बिना शर्त दी गई एक निश्चित आय उन्हें आलसी बना सकती है तथा इससे वे काम ना करने के लिये प्रेरित हो सकते हैं.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

कोविड-19 महामारी से निपटने के क्रम में विश्व भर में अनेक देशों की सरकारों ने लॉकडाउन (lockdown) तथा सामाजिक दूरी (social distancing) जैसे उपायों को लागू किया है.हालांकि, इन उपायों से अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र को व्यापक क्षति पहुची है. यहाँ तक कि, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा वर्तमान आर्थिक संकट को वर्ष 1929 की आर्थिक मंदी के बाद से सबसे खराब स्थिति बताया गया है. भारत में लगभग 90% श्रमबल, बगैर न्यूनतम मजदूरी अथवा सामजिक सुरक्षा के अनौपचारिक क्षेत्र में काम करता है, जिससे सूक्ष्म-स्तर पर भारत में परिस्थितियां कहीं और की तुलना में अधिक बदतर हुई हैं.अतः, सार्वभौम आधारभूत आय के माध्यम से नियमित भुगतान अनौपचारिक क्षेत्र में लगे श्रमिकों की आजीविका को, कम से कम अर्थव्यवस्था के सामान्य होने तक, सुनिश्चित कर सकता है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : eSanjeevani

संदर्भ

भारत सरकार की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा – ई संजीवनी ने 30 लाख परामर्श उपलब्ध कराकर एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है. वर्तमान में, राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा 31 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में संचालित है और प्रतिदिन देश के 35,000 से अधिक मरीज स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त करने के लिए इस नवाचारी डिजिटल माध्यम – ई संजीवनी का उपयोग कर रहे हैं.

ज्ञातव्य है कि सरकार ने कोविड संक्रमण के डर से अस्पताल न जा पाने वाले सामान्य बीमारियों के मरीजों के लिए ई-संजीवनी ओपीडी की सुविधा शुरू की है. यह ऐसा एप्लीकेशन है, जिसकी सहायता से घर बैठे मरीज को डाक्टर से परामर्श मिल जाएगा.

ई-संजीवनी क्या है?

  • ई-संजीवनी एक वेब-आधारित व्यापक टेली-मेडिसिन सेवा है.
  • ई-संजीवनी ग्रामीण क्षेत्रों और अलग-थलग पड़े समुदायों में विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को जन-जन तक पहुँचती है.
  • ई-संजीवनी का उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के अतिरिक्त, असमान वितरण और आधारभूत ढांचे की कमी के साथ-साथ मानव संसाधनों से संबंधित मुद्दों को संबोधित करते हुए, डिजिटल विभाजन को कम करके स्वास्थ्य सेवाओं को न्यायसंगत बनाना है.
  • इस योजना को 16 जून, 2009 को प्रारम्भ किया गया था.
  • ई-संजीवनी मंच ने दो प्रकार की टेली-मेडिसिन सेवाओं को सक्षम बनाया है जैसे डॉक्टर-से-डॉक्टर (ई-संजीवनी) और रोगी-से-डॉक्टर (ई-संजीवनी ओपीडी) टेली-परामर्श.
  • ‘ई संजीवनी’ और ‘ई संजीवनी ओपीडी’ द्वारा 23 राज्यों में टेली-परामर्श सेवा लागू की जा चुकी है और अन्य राज्य इसको आरम्भ करने की प्रक्रिया में हैं.

टेली-मेडिसिन सेवा क्या होती है?

  • टेली-मेडिसिन स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की एक उभरती हुई शैली है, जो कि स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर को दूरसंचार प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए कुछ दूरी पर बैठे रोगी की जाँच एवं उपचार करने की अनुमति देता है.
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, टेली-मेडिसिन का अर्थ पेशेवर स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) का प्रयोग करते हुए ऐसे स्थानों पर रोगों की जाँच, उपचार तथा रोकथाम, अनुसंधान और मूल्यांकन आदि की सेवा प्रदान करना है, जहाँ रोगी और डॉक्टर के मध्य दूरी एक महत्त्वपूर्ण कारक हो.
  • टेली-मेडिसिन का सबसे पहले प्रयोग एरिज़ोना प्रांत के ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रदान करने के लिये किया गया. ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन (NASA) ने टेलीमेडिसिन के प्रारम्भिक विकास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
  • दूसरी ओर, भारत में इसरो द्वारा वर्ष 2001 में टेली-मेडिसिन सुविधा की शुरुआत पायलट परियोजना के तौर पर किया गया था जिसके अंतर्गत चेन्नई के अपोलो अस्पताल को चित्तूर ज़िले के अरगोंडा गाँव के अपोलो ग्रामीण अस्पताल से जोड़ा था.

ई-संजीवनी ओपीडी

  • इस सुविधा का प्रारम्भ COVID-19 महामारी के दौर में रोगियों को घर बैठे चिकित्सकों से परामर्श लेने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से किया गया था.
  • इसके जरिये नागरिक बिना अस्पताल गये व्यक्तिगत रूप से चिकित्सकों से परामर्श कर सकते हैं.
  • सबसे अच्छी बात यह है कि यह एंड्रॉइड मोबाइल एप्लीकेशन के रूप में सभी नागरिकों के लिये उपलब्ध है.
  • आज की तिथि में करीब 2800 प्रशिक्षित डॉक्टर ई-संजीवनी ओपीडी (eSanjeevani OPD) पर उपलब्ध हैं, और दैनिक रूप से लगभग 250 चिकित्सक और विशेषज्ञ ई-स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करा रहे हैं. इसके जरिये आम लोगों के लिये बिना यात्रा किये स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त करना बहुत ही सरल हो गया है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी जैसा तकनीक आधारित मंच ग्रामीण क्षेत्र के उन लोगों के लिये बहुत ही महत्त्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं, जिनके पास इस प्रकार की सेवाओं तक सरल पहुँच उपलब्ध नहीं है. इन सुविधाओं का उपयोग करने से स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के समय और लागत दोनों में बहुत ही कमी आती है. साथ ही इस प्रकार के मंच भारत के ‘डिजिटल इंडिया’ दृष्टिकोण के भी अनुरूप हैं और वर्तमान COVID-19 महामारी के कारण उत्पन्न परिस्थितियों को सही ढंग से संबंधित करने में भी उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं. ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी को लेकर अनेक प्रयास किये गये हैं, उदाहरण के लिये केरल ने पलक्कड़ ज़िले की जेल में टेली-मेडिसिन सेवाओं को सफलतापूर्वक लागू किया है. इस प्रकार यह आवश्यक है कि राज्य द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं का विश्लेषण किया जाए और यथासंभव उन्हें देशव्यापी स्तर पर लागू किया जाए.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Infrastructure.

Topic : Development Finance Institutions  – DFI

संदर्भ

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20,000 करोड़ रुपये के पूंजी के साथ “विकास वित्त संस्थान (DFI)” के गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है. केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार इस DFI के गठन से देश में आधारभूत ढांचे के विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.

विकास बैंक क्या होता है?

विकास बैंक उस वित्तीय संस्थान को कहा जाता है जो लम्बे समय तक चलने वाले और कम प्रतिलाभ देने वाले पूँजी-निवेश के लिए दीर्घकालिक ऋण मुहैया करते हैं. ये निवेश शहरी ढाँचा निर्माण, खनन, भारी उद्योग और सिंचाई के क्षेत्र में किये जाते हैं.

विकास बैंकों को सावधिक ऋणदाता संस्थान (term-lending institutions) अथवा विकास वित्त संस्थान (development finance institutions) भी कहा जाता है.

विकास बैंकों की विशेषताएँ

  • ये बैंक समाज को लाभ पहुँचाने वाले दीर्घकालिक निवेशों को प्रोत्साहित करने के लिए बहुधा कम और स्थिर दरों पर ब्याज लेते हैं.
  • ऐसे ऋण देने के लिए विकास बैंकों को अच्छे-खासे वित्त की आवश्यकता होती है. यह वित्त साधारणतः पूँजी बाजार में बहुत बाद की तिथि वाली प्रतिभूतियों को निर्गत करके प्राप्त किया जाता है. इन सिक्यूरिटियों को पेंशन, जीवन-बीमा कोषों एवं डाकघर जमा जैसे दीर्घकालिक बचत संस्थान खरीदते हैं.
  • विकास बैंकों को सरकार अथवा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों का भी समर्थन मिलता है क्योंकि उनके द्वारा किये गये निवेश का सामाजिक लाभ बहुत अधिक होता है और ऐसे निवेश के साथ अनिश्चितताएँ भी जुड़ी होती हैं. सरकार इनकी सहायता करों में छूट देकर और निजी क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों को इनके द्वारा निर्गत प्रतिभूति में निवेश करने के लिए प्रशासनिक आदेश देकर करती है.

प्रस्तावित विकास बैंक की रूपरेखा क्या हो?

  • भारत में विकास बैंक की स्थापना के पहले यह विचार कर लेना उचित होगा कि इसे वित्त कहाँ से मिलेगा.
  • यदि विदेश से निजी पूँजी आमंत्रित की जाती है तो इसका अर्थ होगा कि पूँजी देने वाली कम्पनियों का इस बैंक पर आंशिक स्वामित्व होगा. अतः ध्यानपूर्वक विश्लेषण के पश्चात् ही इस विकल्प पर निर्णय लिया जाना चाहिए.
  • राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व को चाहिए कि वे विकास बैंक के सदृश पूर्व में स्थापित बैंकों, यथा – IFCI, ICICI, IDBI आदि के संचालन में सीखे गये सबकों पर विचार करके ही नए संस्थान को एक दृढ़ नींव प्रदान करें.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

कोविड 19 महामारी के कारण एक ओर जहाँ अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की गति धीमी हो गई है तो दूसरी ओर देश के बैंकों में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (पढ़ें:- NPA in Hindi) के उच्च स्तर के कारण परियोजनाओं के वित्तपोषण पर संकट खड़ा हो गया है.

ऐसे में नए DFI की स्थापना, 111 लाख करोड़ रुपए लागत वाली केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के वित्तपोषण के लिए आवश्यक है, साथ ही भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लिए भी जरूरी है. ध्यातव्य है कि भारत में पहले से IFCI, SIDBI, NHB, NABARD, EXIM जैसे कई विकास वित्त संस्थान विद्यमान हैं. सिंगापुर, चीन जैसे देशों में DFIs  के माध्यम से वित्तपोषण का मॉडल सफल रहा है.


GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Disaster and management.

Topic : Coalition for Disaster Resilient Infrastructure

संदर्भ

हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आपदा प्रतिरोध अवसंरचना (Disaster Resilient Infrastructure – DRI) पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह की विडियो कांफ्रेंस के जरिये संबोधित किया.

आपदा प्रतिरोध अवसंरचना गठबंधन क्या है?

  • यह एक ऐसा मंच है जहाँ आपदा एवं जलवायु प्रतिरोध से सम्बंधित अवसंरचना के विभिन्न आयामों के विषय में ज्ञान अर्जित एवं आपस में साझा किया जाता है.
  • इसका अनावरण भारतीय प्रधानमन्त्री द्वारा सितम्बर, 2019 में उस समय हुआ जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सचिवालय का जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन चल रहा था.
  • यह मंच विभिन्न देशों को अपने-अपने जोखिम और आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप आपदा प्रबंधन से सम्बंधित क्षमताओं को उत्प्रेरित करने और बेहतर प्रथाओं को अपनाने में सहायता करेगा.

CDRI के लाभ

  • इससे समाज के सभी वर्गों को लाभ मिलेगा. विदित हो कि आपदाओं का सर्वाधिक दुष्प्रभाव स्त्रियों और बच्चों तथा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ता है. अतः आपदा प्रतिरोधी व्यवस्था के निर्माण से सम्बंधित ज्ञान एवं व्यवहार में सुधार उन्हें लाभान्वित करेगा.
  • जिन क्षेत्रों में आपदा के जोखिम अधिक हैं उनको भी इससे लाभ पहुंचेगा. भारत में पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्र में भूकम्प अधिक होते हैं तथा तटीय क्षेत्रों में च्रकवात और सुनामी की सम्भावना बनी रहती है. साथ ही मध्य प्रायद्वीपीय क्षेत्र में सूखे पड़ते रहते हैं. ये सभी भूभाग CDRI से लाभाव्नित होंगे.

माहात्म्य

आपदा प्रतिरोधी अवसरंचना के लिए एक वैश्विक गठजोड़ होने से उन समस्याओं के समाधान को बल मिलेगा जो समान रूप से विकासशील और विकसित दोनों प्रकार के देशों तथा छोटी और बड़ी दोनों प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं से सम्बन्ध रखती हैं. आपदा ऐसी वस्तु है जो कहीं भी उपस्थित हो सकती है, चाहे कोई देश अवसरंचना के विकास में आगे बढ़ा हुआ हो अथवा पीछे रह गया हो. हाँ, यह हो सकता है कि आपदा का जोखिम कहीं बहुत अधिक तो कहीं सामान्य हो सकता है.


Prelims Vishesh

US becomes India’s Second Biggest Oil Supplier :-

  • विगत माह संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब को पीछे छोड़कर भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है.
  • इसका कारण यह है कि तेल शोधकों (refiners) ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन प्लस (ओपेक+) से तेल आपूर्ति में कटौती की क्षतिपूर्ति के लिए अमेरिका से वहनीय कच्चे तेल की खरीद को अधिमान्यता प्रदान की है.
  • भारत के शीर्ष 5 तेल आपूर्तिकर्ता हैं: इराक (प्रथम), अमेरिका, नाइजीरिया, सऊदी अरब तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE).
  • भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है.

Kumbh Mela :-

  • कुंभ मेला प्रत्येक 12 वर्षों में चार नदियों के तटों पर अवस्थित तीर्थ स्थलों पर मनाया जाता है.
  • ये तीर्थ स्थल हैं: इलाहाबाद (गंगा-यमुना व सरस्वती नदियों के संगम पर), हरिद्वार (गंगा नदी), नासिक (गोदावरी नदी) और उज्जैन (क्षिप्रा नदी).
  • कुंभ मेले की तिथि विक्रम संवत पंचांग के अनुसार निर्धारित की जाती है.
  • इसे यूनेस्को (UNESCO) की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया है.

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