Sansar डेली करंट अफेयर्स, 18 June 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 18 June 2020


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : Rapid antigen test

संदर्भ

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कुछ दिन पहले रैपिड एंटीजन डिटेक्शन जांच के लिए निर्देश निर्गत किया था.

ICMR की ओर से कहा गया है कि राज्य परीक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक क़दम उठाएँ, ताकि लक्षण वाले हर व्यक्ति की जांच संभव हो पाए. इससे संक्रमण का जल्द पता लगाने और इसे रोकने में मदद मिलेगी और लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा.

रैपिड एंटीजन डिटेक्शन जाँच क्या है?

  • इस जाँच में व्यक्ति की नाक की दोनों ओर से फ्लूइड का सैंपल लिया जाता है. इस सैंपल का परीक्षण करने पर एंटीजन का पता लगता है तथा SARS-CoV-2 वायरस संक्रमण की पहचान की जाती है.
  • इस जाँच को परम्परागत प्रयोगशालाओं से बाहर देखभाल केद्रों पर किया जाता है. इस परीक्षण में परिणाम मात्र 15-30 मिनट के अन्दर आ जाता है.

रैपिड एंटीजन डिटेक्शन जाँच, आरटी-पीसीआर जाँच से किस प्रकार अलग है?

यदि समानता की बात की जाए तो RT-PCR जाँच की तरह, रैपिड एंटीजन डिटेक्शन जाँच भी व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडी का पता लगाने के बजाय वायरस संक्रमण की जांच करता है.

परन्तु, दोनों परीक्षणों के बीच सबसे बड़ा अंतर समय’ का होता है.

  • RT-PCR जाँच में न्यूनतम 2-5 घंटे लगते हैं.
  • रैपिड एंटीजन डिटेक्शन जाँच में, संक्रमण के पॉजिटिव अथवा नेगटिव होने का पता लगने की अधिकतम अवधि 30 मिनट होती है.

रैपिड एंटीजन डिटेक्शन जाँच के परिणामों की सीमाएँ

  1. ये परीक्षण विशेष रूप से वायरस की पहचान के लिए किया जाते हैं तथा यह मॉलिक्यूलर पीसीआर परीक्षणों (Molecular PCR tests) की तरह संवेदनशील नहीं होते है. इसका अर्थ है कि एंटीजन जाँच के पॉजिटिव परिणाम अत्यधिक सटीक होते हैं, परन्तु इन परिणामों के गलत-नेगटिव (False Negatives) होने की संभावना भी अधिक होती है, अतः इन टेस्ट से संक्रमण के नकारात्मक परिणाम से इंकार नहीं किया जा सकता है.
  2. एंटीजन जाँच के गलत-नेगटिव (False Negatives) परिणाम के कारण वायरस के संभावित प्रसार को रोकने या उपचार हेतु निर्णय लेने से पहले एंटीजन जाँच के नेगटिव परिणामों की पुष्टि के लिए पीसीआर जाँच (PCR test) की आवश्यकता होती है.
  3. किसी सैंपल को लेने के बाद इसे एक संग्रह बफर (extraction buffer) में रखा जाता है, जिसमे इसे केवल एक घंटे के लिए स्थिर (stable) किया जा सकता है. अतः एंटीजन टेस्ट्स को चिकित्सीय समायोजन में सैंपल लेने वाली जगह पर किये जाने की आवश्यकता होती है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

परीक्षण में इस प्रगति के बावजूद देश के सभी हिस्सों में व्यापक रूप से नमूनों की जांच उपलब्ध कराने के लिए शीघ्र निदान परीक्षण की आवश्यकता है. विभिन्न परीक्षण विकल्पों के जरिये अपने-अपने राज्य में सरकार परीक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, ताकि आपके राज्य में बीमारी के लक्षण वाले प्रत्येक व्यक्ति की जांच संभव हो पाए. इससे संक्रमण का जल्द पता लगाने और इसे रोकने में सहायता मिलेगी और बहुत लोगों की जिंदगी बच पाएगी. कोविड-19 की जांच के लिए आईसीएमआर वैकल्पिक, त्वरित और भरोसेमंद विकल्पों को तलाश रहा है. चूंकि परीक्षण, ट्रैक और उपचार संक्रमण के प्रसार को रोकने और जीवन को बचाने का एकमात्र तरीका है, इसलिए यह जरूरी है कि परीक्षण देश के हर हिस्से में सभी रोगग्रस्त व्यक्तियों के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जाए और संक्रमण के रोकथाम के लिए ट्रेसिंग तंत्र को मजबूत किया जाए. कोविड-19 के लिए रैपिड एंटीजन जांच में नेगटिव आने वाले संदिग्ध लोगों को आरटी-पीसीआर जाँच भी करानी चाहिए. जबकि इस जांच में पॉजिटिव आने वाले लोगों को संक्रमित समझा जाएगा और उन्हें पुष्टि के लिए आरटी-पीसीआर जांच की जरूरत नहीं है.


GS Paper 2 Source : Down to Earth

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : Vaccine Nationalism

संदर्भ

कोरोना वायरस की वैक्सीन बनने में कम से कम चार से छह माह का वक्त है, लेकिन अमेरिका, रूस, ब्रिटेन समेत कई बड़े देशों में इसकी सबसे पहली खुराक पाने की होड़ मच गई है. बड़े देशों द्वारा टीके के लिए पहले से कोटा प्राप्त कर लेने को वैक्सीन राष्ट्रवाद करार दिया गया है.

यह किस प्रकार कार्य करता है?

  • वैक्सीन राष्ट्रवाद में कोई देश किसी वैक्सीन की खुराक को अन्य देशों को उपलब्ध कराने से पहले अपने देश के नागरिकों या निवासियों के लिए सुरक्षित कर लेता है.
  • इसमें सरकार तथा वैक्सीन निर्माता के मध्य खरीद-पूर्व समझौता किया जाता है.

क्या यह एक नई अवधारणा है?

वैक्सीन राष्ट्रवाद नई अवधारणा नहीं है. वर्ष 2009 में फ़ैली H1N1फ्लू महामारी के आरंभिक चरणों में विश्व के धनी देशों द्वारा H1N1 वैक्सीन निर्माता कंपनियों से खरीद-पूर्व समझौते किये गए थे.

  • उस समय, यह अनुमान लगाया गया था कि, अच्छी परिस्थितियों में, वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की अधिकतम दो बिलियन खुराकों का उत्पादन किया जा सकता है.
  • अमेरिका ने समझौता करके अकेले 600,000 खुराक खरीदने का अधिकार प्राप्त कर लिया. इस वैक्सीन के लिए खरीद-पूर्व समझौता करने वाले सभी देश विकसित अर्थव्यस्थाएँ थीं.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

प्रश्न है कि अमेरिका, रूस और भारत डब्ल्यूएचओ के कोविड19 टूल्स एक्सीलरेटर में शामिल नहीं हुए हैं, जिसके तहत वैक्सीन को तैयार करने और बांटने का नियम तय किया गया है.

विरोध में विशेषज्ञ

  • कम जोखिम वाले देशों में टीकाकरण पहले
  • ज्यादा खतरे वाले देशों में टीकाकरण बाद में
  • गरीब देशों के लिए महंगी हो सकती है वैक्सीन

देशों के तर्क

  • निवेश के बदले खुराक के करार से टीका जल्द तैयार होगा
  • कंपनियां कम कीमत पर टीके विकास के संसाधन जुटा पाएंगी
  • ऐसा करार किसी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं होता

छह माह में कई दवाओं पर दांव

  • हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन – 03 करोड़ दवाएं अमेरिका ने भारत से मंगाईं
  • रेमडेसिवर – गंभीर मरीजों के लिए, ज्यादा लाभ नहीं, भारत में उत्पादन शुरू
  • फैविपिराविर – एंटी वायरल ड्रग के लाभकारी होने का दावा, ठोस नतीजे बाकी
  • डेक्सामेथासोन – मृत्यु दर में 60% कमी का दावा, सस्ते स्टेरायड पर सवाल
  • फैविलाविर – चीन में सबसे पहले इस्तेमाल, दूसरे देशों ने रुचि नहीं दिखाई.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : ADIP Scheme

संदर्भ

हाल ही में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice & Empowerment) द्वारा पंजाब के फिरोजपुर में एडीआईपी  योजना (ADIP Scheme) के तहत पहली बार वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दिव्यांगजनों को सहायक यंत्रों व उपकरणों का वितरण किया गया है.

एडीआईपी योजना क्या है?

मल्टीपल दिव्यांगता वाले मूक-बधिरों के लिए सरकार की ओर से नि:शुल्क कॉक्लियर इम्प्लांट योजना चलाई जा रही है. इसके अंतर्गत 6 लाख तक की सहायता दी जाती है. इस योजना से मूक-बधिर दिव्यांग 100 प्रतिशत तक सुन और 90 प्रतिशत तक बोल सकेंगे.

कार्यान्वयन एजेंसी

इस योजना का कार्यान्वयन गैर-सरकारी संघटनों (NGOs), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय संस्थानों तथा भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम- एलिम्को (ALIMCO) जैसी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है.

अर्हता

  • 40 प्रतिशत से अधिक किसी भी प्रकार की दिव्यांगता वाले इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. बशर्ते उनकी मासिक आय 20 हजार रुपये से अधिक न हो.
  • अगर लाभुक कोई बच्चा है तो उसके माता-पिता की आय भी 20 हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए. योजना के लाभ के लिए योजना संबद्ध केंद्रों या इकाइयों से संपर्क करना होगा.

ALIMCO

  • एलिम्को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन एक गैर लाभकारी  निगम है. 
  • इसकी स्थापना दिव्यांगजनों के लाभ के लिये पुनर्वास साधन और कृत्रिम अंग घटकों के निर्माण और आपूर्ति के लिये वर्ष 1972 में की गई थी तथा वर्ष 1976 में उत्पादन शुरु किया गया था.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Inclusive growth and associated issues.

Topic : Housing Finance Companies

संदर्भ

हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए कड़े मानदंड प्रस्तावित किए गए हैं.

प्रस्तावित मानदंड

  1. हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (HFC) के लिए शुद्ध परिसंपत्तियों का कम से कम 50% ‘अर्हक संपत्ति’ की प्रकृति में होना चाहिए, जिनमें से कम से कम 75% को व्यक्तिगत आवास ऋण के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए.
  2. ऐसे HFC जो मानदंड को पूरा नहीं करते हैं, उन्हें NBFC- निवेश और क्रेडिट कंपनियों (NBFC-ICCs) के रूप में माना जाएगा और इसके लिए HFC से NBFC-ICC में पंजीकरण हेतु रूपांतरण प्रमाणपत्र के लिए RBI से संपर्क करना होगा.
  3. वे NBFC-ICCs जो HFC के रूप में बने रहना चाहते हैं, उन्हें अपनी कुल संपत्ति का 75% व्यक्तिगत आवास ऋण प्रदान करने हेतु निर्धारित रोडमैप का पालन करना होगा.
  4. इसके लिए 31 मार्च 2022 तक 60%, 31 मार्च 2023 तक 70% और 31 मार्च 2024 तक 75% का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
  5. RBI ने न्यूनतम शुद्ध स्वामित्व फंड (Minimum Net-Owned Fund- NOF) की राशि 10 करोड़ रु. से बढाकर 20 करोड़ रु करने का भी प्रस्ताव किया है.

अर्हक परिसंपत्ति (Qualifying Assets) क्या हैं?

RBI ने ‘अर्हक परिसंपत्तियों’ को किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के लिए ऋण के रूप में परिभाषित किया है, जिसमे सहकारी समितियों, नई आवासीय इकाइयों के निर्माण / खरीद के लिए ऋण, मौजूदा आवास इकाइयों के नवीनीकरण के लिए व्यक्तियों को ऋण, आवासीय इकाइयों के निर्माण के लिए बिल्डरों को ऋण को सम्मिलित किया गया है.

विनियामक निरीक्षण

  • एक आवास वित्त कंपनी को RBI के नियमों के तहत एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (Non-Banking Financial Company- NBFC) माना जाता है.
  • यदि किसी कंपनी की वित्तीय परिसंपत्तियां उसकी कुल परिसंपत्तियों के 50% से अधिक होती है तथा वित्तीय परिसंपत्तियों से होने वाली आय, उसकी सकल आय के 50% से अधिक होती है, तो, उस कंपनी को NBFC के रूप में माना जाता है.

Prelims Vishesh

Malathion :-

  • पिछले दिनों HIL India Ltd. ने मरुस्थलीय टिड्डों को मारने के लिए ईरान को 25MT मेलाथियोन (Melathion) कीटनाशक भेजे जिस कारण यह कीटनाशक चर्चा में है.
  • विदित हो कि खाद्य एवं कृषि संगठन की सूचना के अनुसार, ईरान में टिड्डों का जमावड़ा हो रहा है जहाँ से उनके भारत की ओर फ़ैल जाने की आशंका है.

Places in News :-

  • पर्यटन मंत्रालय की देखो अपना देश वेबिनार शृंखला के 32वें सत्र में हिमालय क्षेत्र के चार स्थलों की विशेष चर्चा हुई. ये स्थल हैं –
  1. कुआरी दर्रा, उत्तराखंड (लार्ड कर्जन द्वारा खोजा गया).
  2. ब्रह्मा ताल, उत्तराखंड (एक प्रछन्न (छिपी हुई) झील जहाँ भगवान् ब्रह्मा ने तपस्या की थी.
  3. फोटोक्सार, लद्दाख (एक रमणीय गाँव)
  4. रूपखंड, उत्तराखंड (त्रिशूल मैसिफ की गोद में स्थित हिमानी झील).

Magallanodon baikashkenke :-

  • चिली और अर्जेंटीना के शोधकर्ताओं ने पेटागोनिया में गोंडवाना वंश परम्परा की एक विलुप्त जाति के दांत खोज निकाले हैं. इस प्रजाति का नाम मेगालनोडोन बैकाशकेंके (Magallanodon baikashkenke) है.
  • अनुमान है कि यह छोटी स्तनपायी प्रजाति क्रेटासियस युग के उत्तरार्ध में पेटागोनिया में डायनासोरों, मगरमच्छों, कछुओं और चिड़ियों के साथ रहती होगी.

Magallanodon baikashkenke

PNGRB :-

  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) की स्थापना पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड अधिनियम, 2006 के अंतर्गत हुई है.
  • इस बोर्ड का काम उपभोक्ताओं और पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक से सम्बन्धित विशिष्ट गतिविधियों में लगे अधिष्ठानों की हितों की रक्षा करना है.
  • बोर्ड का एक लक्ष्य इन उत्पादनों से सम्बन्धित प्रतिस्पर्धात्मक बाजारों को प्रोत्साहन देना भी है.
  • यह बोर्ड पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों एवं प्राकृतिक गैस के शोधन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण, विपणन एवं विक्रय को विनियमित करता है जिससे कि पूरे देश में इनकी पर्याप्त और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.
  • यह बोर्ड कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन का विनियमन नहीं करता है.

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