Sansar डेली करंट अफेयर्स, 18 January 2020

Sansar LochanSansar DCALeave a Comment

Sansar Daily Current Affairs, 18 January 2020


GS Paper 2 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : WHO Names Top 13 Global Health Challenges for the New Decade

संदर्भ

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक स्वास्थ्य से सम्बंधित 13 सबसे बड़ी चुनौतियों की सूची निर्गत की है. ये चुनौतियाँ हैं – जलवायु संकट, संघर्ष और संकट के समय स्वास्थ्य की देखभाल, स्वास्थ्य सुविधा में समानता, औषधियों की उपलब्धता बढ़ाना, संक्रामक रोग, महामारियों के लिए तैयारी, खतरनाक उत्पाद, स्वास्थ्यकर्मियों में निवेश, 10 से 19 वर्ष के बच्चों को सुरक्षित रखना, लोगों का विश्वास अर्जित करना, नई तकनीकों का प्रयोग, सूक्ष्माणुरोधी प्रतिरोध, स्वच्छ जल, सार्वजनिक स्वच्छता एवं व्यक्तिगत स्वच्छता.

जलवायु संकट

जलवायु संकट के कारण मौसम में अतिशय बदलाव आते हैं, कुपोषण बढ़ता है और मलेरिया जैसे संक्रामक रोगों के फैलाव को बढ़ावा मिलता है. वायु को प्रदूषित करने वाले और वैश्विक तापमान में वृद्धि करने वाले उत्सर्जन के कारण हृदयाघात, स्ट्रोक, फेफड़े का कैंसर  और दीर्घकालिक स्वास रोग से होने वाली मृत्यु का एक-चौथाई अंश होता है.

संघर्ष और संकट के समय स्वास्थ्य की देखभाल

पिछले वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन को जिन रोगों के लिए सबसे अधिक तत्परता दिखानी पड़ी वे अधिकांशतः उन देशों में हुए जहाँ लम्बे समय से संघर्ष चला आ रहा है. ऐसे देशों में स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य केन्द्रों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति देखी जाती है. संघर्ष के कारण अनेक लोग अपना घर-बार छोड़कर निकल जाते हैं और ऐसी जगहों पर रहने को विवश होते हैं जहाँ वर्षों तक स्वास्थ्य की देखभाल की कोई सुविधा नहीं मिलती है.

स्वास्थ्य सुविधा में समानता

सामाजिक-आर्थिक विषमता के कारण लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में भी विषमता देखी जाती है. सच्चाई यह है कि गरीब देशों की तुलना में अमीर देशों में रहने वालों के जीवन प्रत्याशा में 18 वर्ष का अंतर होता है. यहाँ तक कि किसी देश के अन्दर अलग-अलग नगरों में भी इस प्रकार का अंतर देखा जाता है.

औषधियों की उपलब्धता बढ़ाना

संसार-भर के एक-तिहाई लोगों के पास औषधियाँ, टीके, निदान की सुविधा और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य उत्पाद उपलब्ध नहीं होते. इससे उनका स्वास्थ्य एवं जीवन संकटग्रस्त तो है ही, औषधि प्रतिरोध भी बढ़ता है.

संक्रामक रोग

अनुमान है कि 2020 में 40 लाख लोग (अधिकांशतः गरीब) इन रोगों के कारण प्राण गँवा बैठेंगे – HIV, यक्ष्मा, वायरल हेपटाइटिस, मलेरिया, अनुपचारित उष्णकटिबंधीय रोग तथा यौनाचार जनित संक्रमण. दूसरी ओर, खसरा जैसे टीके से बचाव के योग्य रोगों से लोगों का मरना चालू है. विदित हो कि 2019 में 1,40,000 लोग ऐसे रोगों से मृत्यु को प्राप्त हुए. पिछले वर्ष पोलियो के 156 मामले पाए गये जोकि 2014 के बाद सबसे अधिक थे.

महामारियों के लिए तैयारी

इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इन्फ्लुएंजा का कोई ऐसा महासंक्रामक वायरस आ सकता है जिसके प्रति लोगों में वर्तमान में प्रतिरोधकता का अभाव है. जलवायु परिवर्तन के कारण मच्छर अपनी बस्तियाँ इधर-उधर ले जा रहे हैं जिस कारण डेंगी, मलेरिया, जिका, चिकुनगुनिया और पीतज्वर जैसे रोगों का प्रसार संभावित है क्योंकि ये रोग मच्छरों से ही फैलते हैं.

खतरनाक उत्पाद

विश्व-भर में होने वाले रोगों का एक-तिहाई अंश भोजन के अभाव, भोजन की अनिरापदता और अस्वास्थ्यकर भोजन से होता है.

स्वास्थ्यकर्मियों में निवेश

2020 तक विश्व में, अधिकांशतः निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, 18 मिलियन स्वास्थ्यकर्मियों की आवश्यकता होगी. इस संख्या में 9 मिलियन परिचारिकाएँ और प्रसविकाएँ शामिल हैं.

10 से 19 वर्ष के बच्चों को सुरक्षित रखना

प्रत्येक वर्ष 10 से 19 वर्ष के 10 लाख से अधिक किशोर मृत्यु को प्राप्त होते हैं. जिन कारणों ये मृत्यु होती हैं, वे प्रमुखतः हैं – सड़क दुर्घटना, HIV, आत्महत्या, स्वास्थ्य संक्रमण और आपसी हिंसा. इसके अन्य कारण हैं – मदिरा सेवन, तम्बाकू और नशीली दवाओं का उपयोग, शारीरिक गतिविधि की कमी, असुरक्षित यौन संबंध, बाल कुपोषण.

लोगों का विश्वास अर्जित करना

आजकल सोशल मीडिया में स्वास्थ्य के विषय में गलत सूचनाएँ फैलाई जा रही हैं जिसका दुष्प्रभाव लोक-स्वास्थ्य पर पड़ता है. इसके अतिरिक्त सार्वजनिक संस्थानों से भी लोगों  का विश्वास हट रहा है. ऐसा भी देखा गया है कि कुछ समुदाय टीकों के विरुद्ध हैं जिसके फलस्वरूप ऐसे रोगों से भी मृत्यु देखने को मिलती है जिनसे सरलता से बचा जा सकता था.  

नई तकनीकों का प्रयोग

आजकल जीनोम सम्पादन और कृत्रिम बुद्धि जैसी तकनीकें आ रही हैं जिनसे किसी रोग को रोकने, पता लगाने और उसका उपचार करने में क्रान्ति आई है. परन्तु साथ ही इनका अनुश्रवण और नियमन करना भी एक चुनौती है.

सूक्ष्माणुरोधी प्रतिरोध

सूक्ष्माणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance – AMR) आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है जिससे आधुनिक चिकित्सा के दशकों पूर्व के एंटीबायटिक से पहले के युग में चले जाने का संकट आन खड़ा हुआ है.

स्वच्छ जल, सार्वजनिक स्वच्छता एवं व्यक्तिगत स्वच्छता

आज विश्व-भर में चार स्वास्थ्य केन्द्रों में से एक केंद्र पर स्वच्छ जल, सार्वजनिक स्वच्छता एवं व्यक्तिगत स्वच्छता (Water, Sanitation, and Hygiene – WASH) जैसी मूलभूत सेवाओं का अभाव है जबकि किसी भी स्वास्थ्य तंत्र के लिए ये आवश्यक होती हैं. इनकी कमी से रोगियों और स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है और स्वास्थ्य की देखभाल अच्छे से नहीं हो पाती.

आगे की राह

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जिन चुनौतियों का चयन किया है उनका समाधान सरल तो नहीं है, परन्तु उनका समाधान असंभव है ऐसा नहीं कह सकते हैं. इन सभी चुनौतियों का सामना अकेले स्वास्थ्य प्रक्षेत्र नहीं कर सकता है. इसके लिए सरकारों, समुदायों और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों को आगे आने होगा और इसके लिए सम्मिलित प्रयास करना होगा. यदि विश्व को अधिक स्वास्थ्यपूर्ण बनाना है तो इसके लिए कोई छोटा रास्ता नहीं है, अपितु अतिशय परिश्रम की अपेक्षा है.


GS Paper 2 Source: Indian Express

indian_express

UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resources.

Topic : Henley Passport Index

संदर्भ

हेलने पासपोर्ट सूचकांक (HPI) का नवीनतम संस्करण प्रकाशित हो गया है.

हेलने पासपोर्ट सूचकांक क्या है?

  • हेलने पासपोर्ट सूचकांक (HPI) एक वैश्विक रैंकिंग व्यवस्था है जिसमें विभिन्न देशों को उनके नागरिकों को पर्यटन में मिलने वाली स्वतंत्रता के आधार पर रैंक दिया जाता है.
  • 2006 में आरम्भ होने वाले इस सूचकांक का नाम पहले हेलने एंड पार्टनर्स वीसा रिस्ट्रिकशंस इंडेक्स (HVRI) था जिसे जनवरी 2018 में हेलने पासपोर्ट इंडेक्स नाम दिया गया.
  • इस सूचकांक में पासपोर्टों की रैंकिंग इस आधार पर दी जाती है कि उनके माध्यम से कितने देशों की यात्रा “बिना वीजा” के की जा सकती है.

रैंकिंग की तकनीक

HPI में पासपोर्टों की रैंकिंग इस आधार पर की जाती है कि उनके माध्यम से कितने अन्य क्षेत्रों में बिना पूर्व-वीजा की यात्रा की जा सकती है. इसके लिए IATA डाटाबेस में वर्णित सभी प्रमुख गन्तव्य देशों और क्षेत्रों पर विचार किया जाता है.

यह सूचकांक अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन प्राधिकरण (International Air Transport Authority – IATA) द्वारा 199 पासपोर्टों और 227 पर्यटन स्थलों के सम्बन्ध में दिए गये आँकड़ों पर आधारित होता है.

विभिन्न देशों की रैंकिंग

  • इस सूचकांक में पिछले लगातार तीन वर्षों की भाँति इस वर्ष भी जापान सबसे ऊपर है क्योंकि इसके नागरिक बिना पहले से वीजा लिए हुए 191 देश जा सकते हैं.
  • दूसरा स्थान गत वर्ष की भाँति सिंगापुर का है जहाँ के नागरिक बिना वीजा के अथवा पहुँचने पर मिलने वाले वीजा के साथ 190 देशों की यात्रा कर सकते हैं.
  • तीसरा स्थान पिछले वर्ष की भाँति जर्मनी का है जहाँ के निवासी 189 देश बिना-पूर्व वीजा के जा सकते हैं.
  • पिछले कुछ वर्षों की HPI को देखने से पता चलता है कि इस अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के पासपोर्ट की शक्ति लगातार कम होती आ रही है.

भारत का प्रदर्शन

  • भारतीय पासपोर्ट विश्व में 84वाँ स्थान रखता है.
  • इस पासपोर्ट के बल पर 58 देशों में बिना वीजा के जाया जा सकता है. इस संख्या में वे 33 देश भी सम्मिलित हैं जहाँ पहुँचने के पश्चात् वीजा मिलता है.
  • वीजमुक्त पहुँच वाले गंतव्यों की पूर्ण संख्या 58 है जिसमें 20 अफ्रीका के और 11-11 एशिया और कैरिबियाई क्षेत्र के हैं. सर्बिया वह एकमात्र यूरोपीय देश है जहाँ भारतीय पासपोर्ट धारक बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं.

GS Paper 2 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate. Effects of liberalization on the economy, changes in industrial policy and their effects on industrial growth.

Topic : What is National Investigation Agency Act, and why is Chhattisgarh challenging it?

संदर्भ

छत्तीसगढ़ सरकार ने अनुच्छेद 131 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है जिसमें राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी अधिनियम, 2008 / National Investigation Agency (NIA) Act, 2008 को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह अधिनियम विधि एवं व्यवस्था संधारण करने विषयक राज्य की शक्तियों का अतिक्रमण करता है.

NIA एक्ट क्या है?

  • यह एक आतंकवाद-निरोधी एजेंसी से सम्बंधित अधिनियम है जो 26/11 की मुंबई आतंकी घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में पारित हुआ था.
  • इस अधिनियम के अनुसार राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी भारत की एकमात्र वास्तविक संघीय एजेंसी ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार अमेरिका की फ़ेडरल ब्यूरो इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (FBI). सार्वदेशिक होने के कारण यह एजेंसी CBI से अधिक सशक्त है.
  • राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी अधिनियम, 2008 के अनुसार NIA के पास यह शक्ति है कि वह भारत के किसी  भी भाग में होने वाली आंतकवादी गतिविधियों का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला पंजीकृत कर सकती है और राज्य सरकार की अनुमति के बिना किसी राज्य में प्रवेश कर सकती है, जाँच कर सकती है और गिरफ्तारी कर सकती है.

छत्तीसगढ़ की आपत्तियाँ

  • अपनी याचिका में छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी अधिनियम, 2008 संविधान-विरुद्ध है और इसको पारित करने की शक्ति संसद को नहीं थी.
  • राज्य सरकार का तर्क है कि संविधान की सातवीं अनुसूची में पुलिस राज्य सूची में दर्ज है. अतः केंद्र को इससे सम्बंधित कानून बनाने का अधिकार नहीं है.
  • यह अधिनियम राज्य को पुलिस के माध्यम से जाँच-पड़ताल करने की शक्ति का हरण करता है और केंद्र को निरंकुश शक्तियां प्रदान करता है.

2019 का NIA संशोधन अधिनियम

  • इस संशोधन के द्वारा कुछ ऐसे नए प्रकार के अपराध जोड़े गये हैं जिनकी जाँच और अभियोजन NIA कर सकती है. ये अपराध हैं – मानव तस्करी, नकली करेंसी, निषिद्ध हथियारों का निर्माण और विक्रय, साइबर आतंकवाद तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत अपराध.
  • इस संशोधन के द्वारा केंद्र सरकार को यह शक्ति दी गई है कि वह NIA के मुकदमों के लिए सेशन न्यायालयों को विशेष न्यायालय के रूप में नामित कर सकती है.
  • 2019 के NIA संशोधन के अनुसार, कोई NIA अधिकारी सम्बंधित राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की पूर्वानुमति लिए बिना धावे कर सकता है और उन संपदाओं को जब्त कर सकता है जिनके विषय में शंका हो कि ये आतंकी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं. इसके लिए NIA के अन्वेषण अधिकारी को अब मात्र अपने ही महानिदेशक की स्वीकृति लेनी होगी.

GS Paper 2 Source: PIB

pib_logo

UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation. Important aspects of governance, transparency and accountability.

Topic : Open Acreage Licensing Policy

संदर्भ

ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP) राउंड 5 (OALP-5) के अंतर्गत तेल एवं गैस ब्लॉकों के 11 क्षेत्रों को नीलामी पर उठाने की प्रक्रिया भारत सरकार ने आरम्भ कर दी है.

OALP

  • OALP भारत सरकार की हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंस नीति (Hyrdrocarbon Exploration and Licensing Policy- HELP) का एक हिस्सा है.
  • यह नीति भारत में तेल/प्राकृतिक गैस के नए भंडार खोजने और उसके दोहन से सम्बंधित है.
  • तेल खोजने वाली कम्पनी इस योजना के अंतर्गतराष्ट्रीय डाटा संग्रह (National Data Repository – NDR) में उपलब्ध डाटा के आधार पर नीलामी के पहले ही अपने मन का ब्लॉक चुन सकती है.
  • उसके पश्चात् कम्पनी सरकार को अपना आवेदन देगी जिसमें उस ब्लॉक पर बोली लगाई जायेगी.
  • जो कम्पनी किसी ब्लॉक के लिए सरकार को सबसे अधिक अंश देने के लिए प्रस्ताव करेगी, उसी को यह ब्लॉक दिया जाएगा.
  • इस नई नीति से भारत की अवसादी घाटियों (sedimentary basins) के लगभग 8 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में तेल के अन्वेषण तथा अंततोगत्वा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त हो जायेगा.

HELP

  • HELP (Hyrdrocarbon Exploration and Licensing Policy) में ऐसा प्रावधान किया गया है जिससे भारत की समस्त अवसादी घाटियों में घरेलू और विदेशी कम्पनीयाँ निवेश करें और निवेश की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो तथा वित्तीय एवं प्रशासकीय तन्त्र निवेशकों के लिए अनुकूल हो.
  • इस नई नीति का उद्देश्य निवेशकों को राष्ट्रीय डाटा संग्रह (National Data Repository – NDR) में उपलब्ध भूकम्प विषयक विशाल डाटा उपलब्ध कराना है.

HELP की आवश्यकता क्यों?

भारत कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. यहाँ जो ऊर्जा खपत होती है उसका 34.4% खनिज तेल और गैस से आता है. 2015-16 में कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता 81% हो गई थी जबकि पहले यह निर्भरता 78.5% थी. दूसरी ओर विगत पाँच वर्षों में भारत में तेल की खोज और उत्पादन में समग्र रूप से गिरावट देखी गई है.विदित हो कि भारत सरकार ने यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि खनिज तेल के आयात में 2022 तक 10% की कमी लाई जाए. इसी को ध्यान में रखकर खनिज तेल के अन्वेषण की नीति बनाई गई है. अन्वेषण की प्रक्रिया को सरल करने से इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा अंततः तेल और गैस के नए-नए कुओं के मिलने से हमारा उत्पादन बढ़ेगा.

NDR क्या है?

  • राष्ट्रीय डाटा संग्रह वह निकाय है जिसका सृजन सरकार ने ईंधन अन्वेषकों को देश-भर के भंडारों के विषय में डाटा देने के लिए किया है. इस डाटा का विश्लेषण करके कोई भी कम्पनी अपनी क्षमता के अनुसार ब्लॉक चुन सकती है.
  • इस राष्ट्रीय डाटा संग्रह में नित्य नए डाटा समाविष्ट होते रहते हैं.राष्ट्रीय भूकम्प कार्यक्रम (National Seismic Programme) देश के 26 अवसादी घाटियों का गहराई से अध्ययन करता रहता है और इस विषय में NDR को डाटा देता रहता है. इन जानकारियों को लगातार NDR के संग्रह में जोड़ लिया जाता है.

GS Paper 3 Source: PIB

pib_logo

UPSC Syllabus : Effects of liberalization on the economy, changes in industrial policy and their effects on industrial growth.

Topic : HSN Code

संदर्भ

भारत सरकार ने निर्णय किया है कि अब जो भी आयात होगा उसमें HSN कोड अनिवार्य होगा. इससे वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता के कारण भारत के द्वारा किये गये निर्यात की विश्व-भर में स्वीकार्यता बढ़ेगी.

HS कोड क्या है?

  • HS कोड का पूरा नाम Harmonized System है.
  • यह छह अंकों वाला पहचान कोड है जिसमें पहले दो अंक HS चैप्टर, अगले दो अंग HS हैडिंग और अंतिम दो अंक HS सब-हैडिंग के सूचक होते हैं.
  • विश्व सीमा-पार शुल्क संगठन (World Customs Organization – WCO) द्वारा निर्मित यह कोड वस्तुओं की सार्वदेशिक आर्थिक भाषा (universal economic language) भी कही जाती है.
  • यह अंतर्राष्ट्रीय उत्पादों के नामकरण की एक बहु-उद्देश्यीय पद्धति है जिसके अन्दर वर्तमान में लगभग 5,000 वस्तु समूह सम्मिलित हैं.

HS कोड का प्रयोग

HS कोड का प्रयोग सीमा-पार शुल्क अधिकारियों, सांख्यिकी एजेंसियों और अन्य सरकारी नियामक निकायों द्वारा वस्तुओं के आयात-निर्यात की निगरानी करने और उन्हें नियंत्रित करने में किया जाता है.

इसके लिए अपनाए जाने वाले कार्य निम्नलिखित हैं –

  1. सीमा-पार शुल्क की दरें
  2. अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक आँकड़ों का संग्रहण
  3. उद्भव सम्बन्धी नियम
  4. आंतरिक करों का संग्रहण
  5. व्यापार वार्ता, जैसे – विश्व व्यापार संगठन के द्वारा करों में दी गई छूट की अनुसूची आदि.
  6. परिवहन शुल्क एवं आँकड़े
  7. नियंत्रित वस्तुओं की निगरानी, जैसे – अपशिष्ट, नार्कोटिक पदार्थ, रासायनिक पदार्थ, ओजोन पट्टी को नष्ट करने वाले पदार्थ, संकटग्रस्त प्रजातियाँ, वन्य जीवन से सम्बंधित व्यापार आदि.
  8. सीमा-पार शुल्क से सम्बंधित नियंत्रण और प्रक्रिया, जैसे – जोखिम का आकलन, सूचना प्रौद्योगिकी और अनुपालन

HS कोड का महत्त्व

200 से अधिक देश इस कोड को आधार बना कर अपने सीमा-पार शुल्क को निर्धारित करते हैं. साथ ही इसका प्रयोग अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक आँकड़ों को जमा करने, व्यापार नीतियाँ गढ़ने तथा वस्तुओं पर निगरानी रखने में किया जाता है. यह कोड सीमा-पार शुल्क और व्यापारिक प्रक्रिया को समरस बनाने में सहायता करता है और इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की लागत में कटौती करता है.

HSN कोड क्या है?

  • HSN का पूरा नाम Harmonized System of Nomenclature है.
  • वस्तुतः यह HS का ही भारत में दूसरा नाम है.
  • यह आठ अंकों वाला पहचान कोड है.

HSN का प्रयोग

HSN के द्वारा वस्तुओं को वर्गीकृत किया जाता है. इसका प्रयोग किसी विशेष वस्तु के ऊपर देश में लगने वाले कर की दर पता लगाने में तथा लाभों का दावा प्रस्तुत करने में होता है.


Prelims Vishesh

Z Morh tunnel: –

  • जम्मू-कश्मीर संघीय क्षेत्र के लिए प्रस्तावित 6.5 किलोमीटर लम्बी Z मोड़ सुरंग के लिए सरकार ने 2,000 करोड़ रु. निर्गत किये हैं.
  • इस सुरंग से होकर 80 किमी/घंटे की गति से एक घंटे में 1,000 गाड़ियाँ गुजर सकती हैं.

Winged Raider :

यह भारतीय सेना का एक सबसे बड़ा हवाई अभ्यास है जो पिछले दिनों पूर्वोत्तर भारत में सम्पन्न हुआ.

‘Sahyog-Kaijin’ :

  • सहयोग-काइजिन भारत और जापान के बीच होने वाला एक संयुक्त तटरक्षक अभ्यास है जो इस बार भारत में चल रहा है.
  • इसका उद्देश्य दो देशों के बीच सम्बन्धों को सुदृढ़ता प्रदान करना है.

Click here to read Sansar Daily Current Affairs – Sansar DCA

December, 2019 Sansar DCA is available Now, Click to Download

Books to buy

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.