Sansar डेली करंट अफेयर्स, 16 February 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 16 February 2019


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : MFN status

संदर्भ

हाल ही में पुलवामा में आतंकवादी कार्रवाई के पश्चात् भारत ने पाकिस्तान को 1996 में दिए गये मोस्ट फेवर्ड नेशन के दर्जे को वापस ले लिया है और पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि यदि वह  भारत के विरुद्ध आतंकी कार्रवाई का समर्थन करता रहेगा तो ऐसे और कठोर उपाय किये जाएँगे.

MFN स्टेटस क्या है?

  • मोस्ट फेवर्ड नेशन वह दर्जा है जो एक देश दूसरे देश को देता है और जिसके अनुसार उन दोनों के बीच व्यापार में भेदभाव नहीं किया जाता है.
  • MFN का महत्त्व इसी से पता चलता है कि यह GAT अर्थात् शुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता के तहत पहले अनुच्छेद में ही वर्णित किया गया है.
  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत कोई सदस्य देश अपने व्यापार भागीदारों के बीच भेदभाव नहीं कर सकता है. यदि किसी एक व्यापार भागीदार को विशेष दर्जा दिया जाता है तो यह दर्जा विश्व व्यापार संगठन के सभी सदस्यों को मिलना चाहिए.

MFN इस सन्दर्भ में कुछ छूट भी देता है जो इस प्रकार हैं – 

  • मुक्त व्यापार समझौते करने का अधिकार :- इसका अर्थ है कि सदस्य क्षेत्रीय व्यापार समझौते में शामिल हो सकते हैं अथवा मुक्त व्यापार समझौते कर सकते हैं जिसके अन्दर सदस्य देशों और गैर-सदस्य देशों के बीच भेदभाव होता है.
  • सदस्य विकासशील देशों को विशेष एवं अलग सुविधा दे सकते हैं. ये विशेष सुविधाएँ अलग-अलग हो सकती हैं, जैसे – अधिक बड़ा बाजार तक पहुँच, आयात शुल्क की घटी हुई दर, विकासशील देशों को उनके उत्पादन प्रक्षेत्रों आदि में सब्सिडी देना. इन सभी छूटों के लिए कठोर शर्ते भी लागू की जाती हैं.

MFN के लाभ

  • MFN का दर्जा विकासशील देशों के लिए अत्यंत ही लाभप्रद होता है. ऐसे देशों को अपने माल के लिए बड़ा बाजार मिल जाता है तथा घटे हुए शुल्क और व्यापारिक व्यवधानों में कमी के कारण उन्हें निर्यात पर कम लागत आती है. अतः उनका व्यापार अधिक प्रतिस्पर्धात्मक अर्थात् लाभकारी हो जाता है.
  • MFN में नौकरशाही की अड़चनें कम हो जाती हैं और अनेक प्रकार के शुल्क के बदले सभी आयातों के लिए एक समान शुल्क लग जाता है. इससे व्यापार की सामग्रियों की माँग बढ़ जाती है और इस प्रकार अर्थव्यवस्था और आयात प्रक्षेत्र को बढ़ावा मिलता है.
  • यह व्यापार सुरक्षावाद के चलते अर्थव्यवस्था पर होने वाले दुष्प्रभाव को भी ठीक करता है.
  • जो देश आयातों पर MFN देता है, उसको सर्वाधिक कुशल आपूर्तिकर्ता से आयात की प्राप्ति होती है.
  • MFN से घरेलू बाजार में भी लाभ होता है. सभी देशों के लिए एक ही प्रकार का शुल्क होने से नियम अधिक सरल और अधिक पारदर्शी हो जाते हैं. अन्यथा जिस देश से माल पहुँचता है, उस देश के हिसाब से शुल्क तय करने से समय और ऊर्जा नष्ट होने के साथ-साथ उलझन भी पैदा होती है.
  • MFN अनुच्छेद देशों के बीच अ-भेदभाव को बढ़ावा देता है, इसलिए यह कुल मिलाकर मुक्त व्यापार के लक्ष्य को भी पोषित करता है.

MFN की हानियाँ

MFN से सबसे बड़ी हानि यह है कि यह दर्जा देने वाले देश को उन सभी देशों के साथ समान व्यवहार करना पड़ता है जो WTO के सदस्य हैं. इसका अभिप्राय यह हुआ है कि उस देश के घरेलू उद्योग में मूल्य का युद्ध छिड़ जाता है जिससे स्थानीय व्यापार को घाटा होता है. बाहर से आने वाली सामग्रियाँ सस्ती होती हैं, अतः अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए घरेलू बाजार को दाम घटाना पड़ता है और फलतः आर्थिक हानि का सामना करना पड़ता है.

MFN का दर्जा लेने का निहितार्थ

भारत ने पाकिस्तान से MFN का दर्जा वापस ले लिया. इसका अभिप्राय यह हुआ कि अब यह वहाँ से आने वाले आयात पर जितना शुल्क लगाना चाहता है, लगा सकता है. इस प्रकार पाकिस्तान से भारत आने वाली सामग्रियों अथवा सेवाओं का मूल्य बढ़ जाएगा. इससे भारत में इनकी माँग घट जायेगी और इस प्रकार पाकिस्तान को आर्थिक घाटा होगा. पाकिस्तान कपास, रसायन, स्टेपल फाइबर, चाय, नमक इत्यादि भारत से आयात करता है. यदि भारत अपने निर्यात को बंद कर दे तो पाकिस्तान का उद्योग चरमरा जाएगा. भारत द्वारा पाकिस्तान को दिए हुए MFN status को वापस लिए जाने पर पाकिस्तान भी बदले के भाव से अपने निर्यात को बंद कर सकता है. परन्तु भारत पर उसका ख़ास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि भारत बहुत ही कम सामान पाकिस्तान से आयात करता है. भारत और पाकिस्तान दोनों वैश्विक स्तर पर कपड़े के उद्योग में अग्रणी हैं. यदि भारत पाकिस्तान को कच्चे कपास का निर्यात बंद कर दे तो पाकिस्तान को कपड़ा बनाना महँगा पड़ेगा और वह भारत से कपड़ा व्यापार में पिछड़ जाएगा. भारत द्वारा पाकिस्तान को निर्यात की गई वस्तुओं का सकल मूल्य 2.17 अरब डॉलर है. पाकिस्तान द्वारा भारत को निर्यात की गई वस्तुओं का सकल मूल्य 0.44 अरब डॉलर है. दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा 2.7 अरब डॉलर है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Why only bureaucrats on information panels, asks SC

संदर्भ

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह केन्द्रीय सूचना आयोग (CIC) और राज्य सूचना आयोगों में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गैर-सरकारी व्यक्तियों पर भी विचार करे.

न्यायालय ने सुझाव दिया है कि जीवन के सभी क्षेत्रों से सुप्रतिष्ठ व्यक्ति सूचना आयुक्त बनाया जाए. ज्ञातव्य है कि सूचना अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत यह प्रावधान है कि सूचना आयुक्त के रूप में चुने जाने वाले व्यक्ति कानून, विज्ञान, तकनीक, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता आदि के मूर्धन्य व्यक्ति हो सकते हैं. परन्तु देखा जाता है कि चयन करते समय अधिकांशतः नौकरशाही के लोगों को ही लिया जाता है.

CIC क्या है?

सूचना अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुभाग 12 यह प्रावधान करता है कि भारत सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना देकर केन्द्रीय सूचना आयोग का गठन करेगी जिसमें 1 मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 केन्द्रीय सूचना आयुक्त होंगे.

अधिनियम के अनुभाग 12 (3) में आगे कहा गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त और केन्द्रीय सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की अनुशंसा पर होगी. इस समिति का स्वरूप निम्नवत् होगा –

  1. प्रधानमंत्री इस समिति के अध्यक्ष होंगे.
  2. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एक सदस्य होंगे.
  3. तीसरे सदस्य कोई केंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री होंगे जो प्रधानमंत्री द्वारा नामांकित किए जायेंगे.

केन्द्रीय सूचना आयोग के पदों के लिए अर्हता

  • सूचना अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुभाग 12 (5) के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त एवं अन्य केन्द्रीय सूचना आयुक्त वे व्यक्ति होंगे जो सार्वजनिक रूप से सुप्रतिष्ठित होंगे और जिन्हें इन विषयों का गहन ज्ञान और अनुभव होगा – विधि, विज्ञान एवं तकनीक, समाज सेवा, प्रबन्धन, पत्रकारिता, जन-मीडिया अथवा प्रशासन.
  • अधिनियम के अनुभाग 12 (6) में यह बतलाया गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त अथवा केन्द्रीय सूचना आयुक्त संसद के सदस्य अथवा किसी भी राज्य अथवा केन्द्रीय-शाषित क्षेत्र के विधायक नहीं होंगे. साथ ही वे ऐसे व्यक्ति नहीं होंगे जो किसी अन्य लाभ के पद पर हैं अथवा किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं अथवा कोई व्यवसाय करते हों अथवा कोई पेशा करते हों.

मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल और वेतन

  • अधिनियम के अनुभाग 13 के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल पदधारण के अगले पाँच साल तक या 65 वर्ष की आयु तक होगा. उसकी दुबारा नियुक्ति नहीं होगी.
  • अधिनियम के अनुभाग 13(5)(a) में बतलाया गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त का वेतन, भत्ते और अन्य सेवा शर्तें वही होंगी जो मुख्य चुनाव आयुक्त की होती हैं.

केन्द्रीय सूचना आयुक्तों का कार्यकाल एवं सेवा शर्तें

  • प्रत्येक सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पाँच वर्ष की अवधि के लिये या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक इनमें से जो भी पहले आये, पद धारण करेगा और सूचना आयुक्त के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिये पात्र नहीं होगा.
  • परन्तु प्रत्येक सूचना आयुक्त, इस उपधारा के अधीन अपना पद रिक्त करने पर, धारा 12 की उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट रीति से मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिये पात्र होगा.
  • परन्तु यह प्रावधान भी है कि जहाँ सूचना आयुक्त को मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जाता है वहाँ उसकी पदावधि सूचना आयुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में कुल मिलाकर पाँच वर्ष से अधिक नहीं होगी.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : LADIS – Least Available Depth Information System

संदर्भ

राष्ट्रीय जलमार्गों के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाते हुए, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्‍ल्‍यूएआई) ने हाल ही में एक नए पोर्टल LADIS (न्यूनतम उपलब्ध गहराई सूचना प्रणाली) का शुभारंभ किया.

इसे आंतरिक स्‍तर पर विकसित किया गया है. प्रारंभ में एलएडी से संबंधित जानकारी राष्‍ट्रीय राजमार्ग-1,राष्‍ट्रीय राजमार्ग-2, इंडो-बंगलादेश प्रोटोकॉल मार्ग और राष्‍ट्रीय राजमार्ग-3 के लिए सर्वेक्षण की तारीख सहित उपलब्ध होगी. इस सुविधा का विस्तार अन्य राष्‍ट्रीय राजमार्गों में भी किया जाएगा.

LADIS क्या करेगा?

  • यह सुनिश्चित करेगा कि – न्यूनतम उपलब्ध गहराइयों के बारे में वास्तविक आंकड़ों को जहाज/नौका और मालवाहक जहाजों के मालिकों को प्रसारित किया जाए, ताकि वे राष्‍ट्रीय जलमार्गों पर अधिक नियोजित तरीके से परिवहन कर सकें.
  • जहाजों के निर्बाध आवागमन के लिए जलमार्ग की एक सुनिश्चित गहराई आवश्यक है. यदि विभिन्न राष्‍ट्रीय जलमार्गों के विस्तार पर न्यूनतम उपलब्ध गहराइयों (एलएडी) के संबंध में वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, तो यह आवाजाही के उपयुक्‍त समय के बारे में मार्गदर्शन करके ट्रांसपोर्टरों की मदद करेगा.
  • यह राष्ट्रीय जलमार्गों पर निर्बाध परिचालन के लिए सूचना के आदान-प्रदान की विश्वसनीयता और दक्षता में वृद्धि करेगा, इसके अतिरिक्त जहाजों की आवाजाही के दौरान होने वाली समस्याओं के बारे में भी पूर्वानुमान व्‍यक्‍त करेगा.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Tagore award

संदर्भ

राष्ट्रपति 18 फरवरी, 2019 को नई दिल्ली के प्रवासी भारतीय केन्द्र में श्री राजकुमार सिंघाजीत सिंह, छायानॉत (बांग्लादेश की सांस्कृतिक संगठन) और श्री राम सुतार वांजी को क्रमशः 2014, 2015 और 2016 के लिए सांस्कृतिक सद्भाव टैगोर पुरस्कार प्रदान करेंगे.

टैगोर पुरस्कार

  • सांस्कृतिक सद्भाव के लिए इस पुरस्कार का प्रारम्भ भारत सरकार ने रवीन्द्रनाथ टैगोर के योगदान की पहचान करने हेतु 2012 में उनकी 150वीं जयंती के अवसर पर किया गया था.
  • यह पुरस्कार वर्ष में एक बार दी जाती है.
  • टैगोर पुरस्कार के अंतर्गत एक करोड़ रुपये नकद, एक प्रशस्ति पत्र, धातु की मूर्ति और एक उत्कृष्ट पारम्परिक हस्तशिल्प/हस्तकरघा वस्तु प्रदान की जाती है.
  • यह पुरस्कार दो व्यक्तियों/संस्थानों को संयुक्त रूप से भी प्रदान किया जा सकता है.
  • टैगोर पुरस्कार के निर्णायक मंडल में निम्नलिखित व्यक्ति भाग लेते हैं –
  1. प्रधानमंत्री – अध्यक्ष (पदेन)
  2. मुख्य न्यायाधीश – सदस्य (पदेन)
  3. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष – सदस्य (पदेन)
  4. विशिष्ट व्यक्ति – नामांकित सदस्य
  5. विशिष्ट व्यक्ति – नामांकित सदस्य

महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • यह वार्षिक पुरस्कार उस व्यक्ति, संघ, संस्थान या संगठन को दिया जाता है जिसने सांस्कृतिक सद्भाव के मूल्यों में वृद्धि करने में असाधारण योगदान दिया है.
  • यह पुरस्कार राष्ट्रीयता, भाषा, जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव के बगैर दिया जाता है.
  • पहला टैगोर पुरस्कार 2012 में सितार वादक पंडित रविशंकर प्रसाद को दिया गया था और दूसरा पुरस्कार 2013 में जूबिन मेहता को प्रदान किया गया था.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Government liberalizes the e-Visa regime

संदर्भ

हाल ही में भारत सरकार ने ई-वीजा व्यवस्था में संशोधन करते हुए इसको पहले से अधिक उदार और पर्यटकोन्मुख बना दिया है. एक बड़ा संशोधन यह है कि ई-टूरिस्ट वीजा अब 166 देशों पर लागू होगा जबकि 2014 में (जब यह आरम्भ हुआ था) यह 46 देशों पर लागू था.

महत्त्वपूर्ण संशोधन

  • ई-पर्यटक और ई-व्‍यापार वीजा के अंतर्गत भारत में प्रवास की अवधि को दो महीने से बढ़ाकर 1 वर्ष कर दिया गया है.
  • साथ ही, विदेशी नागरिक को अधिकतम तीन बार अनुमति देने के वर्तमान प्रतिबंध को भी हटा दिया गया है.

ई-पर्यटन वीजा में बदलाव

  • प्रत्येक यात्रा के दौरान ई- वीजा पर निरंतर प्रवास अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा और जापान के नागरिकों को छोड़कर ई-वीजा प्रदान किए जाने के पात्र सभी देशों के नागरिकों के मामले में 90 दिनों से अधिक नहीं होगा.
  • अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा और जापान के नागरिकों के मामले में प्रत्येक यात्रा के दौरान निरंतर प्रवास 180 दिनों से अधिक नहीं होना चाहिए.
  • सभी मामलों में पंजीकरण की जरुरत नहीं होगी.

ई-व्‍यापार वीजा में बदलाव

  • ई-वीजा प्रदान किए जाने के लिए पात्र सभी देशों के नागरिकों के मामले में प्रत्येक यात्रा के समय निरंतर प्रवास 180 दिनों से अधिक नहीं होना चाहिए
  • 180 दिनों से कम अवधि के प्रवास पर किसी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी.

अन्य परिवर्तन

  • ई-वीजा 2 (दो) और नामित हवाई अड्डों (भुवनेश्वर और पोर्ट ब्लेयर) के माध्यम से प्रवेश के लिए वैध है, ऐसे हवाई अड्डों की कुल संख्या बढ़ा कर 28 कर दी गई है.
  • सामान्य ई-पर्यटन वीजा या पर्यटन वीज़ा के तहत डेस्टिनेशन वेडिंग में भाग लेना – डेस्टिनेशन वेडिंग वीज़ा की कोई भिन्न श्रेणी नहीं.
  • भारत में प्रवास के दौरान बीमार पड़ने वाले विदेशी नागरिक अब अपने वीजा को मेडिकल वीजा में बदलाव किए बिना चिकित्सा उपचार प्राप्त कर सकते हैं. इसमें चिकित्सा संबंधी आपात स्थितियों का ध्यान रखा जाएगा.
  • कोरिया गणराज्य के नागरिकों को आगमन-पर-वीजा सुविधा प्रदान की गई.

GS Paper 3 Source: Times of India

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Topic : NASA’s Mars Rover Opportunity Concludes a 15-Year Mission

संदर्भ

NASA ने यह घोषणा कर दी है कि मंगल ग्रह को भेजे गये उसके Opportunity नामक टोही उपग्रह का अंत हो गया है. ऐसा इसलिए किया गया है कि उस उपग्रह से नासा का सम्पर्क टूट गया था और अथक प्रयासों के होते हुए भी दुबारा सम्पर्क नहीं हो पाया.

सम्पर्क टूटने का कारण क्या था?

Opportunity टोही उपग्रह मंगल में जिस स्थान पर उतरा था, वहाँ बहुत भयंकर धूल की आँधी पहुँच गयी थी जिसके कारण आकाश काला हो गया था और उपग्रह की सौर ऊर्जा प्रणाली क्षतिग्रस्त हो गई थी. जब कालान्तर में उस स्थान में जाड़ा आया तो परिस्थितियाँ और भी विकट हो गईं. सूरज की घट गई और तापमान अत्यंत ठंडा हो गया. इन कारणों से Opportunity को फिर से जिन्दा करना संभव नहीं रहा.

Opportunity मिशन क्या था?

  • Opportunity उन दो जुड़वाँ टोही उपग्रहों में से दूसरा था जो जनवरी 2004 में मंगल में उतरने वाले थे.
  • दूसरा टोही उपग्रह Spirit था. यह मंगल ग्रह के गुसेव क्रेटर में पहुँचा और इसके 90 दिन बाद Opportunity मंगल के दूसरे भाग में मेरिडियानी प्लेनम पर उतरा.
  • नासा को उम्मीद थी कि ये दोनों टोही उपग्रह 90 दिन चलेंगे. इस प्रकार देखा जाए तो ये दोनों उपग्रह अपनी जीवन आयु से बहुत अधिक काम करते रहे.
  • Spirit अभियान पर आठ किलोमीटर चलकर मई 2011 में ही समाप्त हो गया था. जबकि Opportunity 45 किलोमीटर चला और जून 2018 में जाकर संपर्क से बाहर हो गया.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : First District Cooling System of India to come up in Amaravati

संदर्भ

आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में भारत का पहला जिला शीतलीकरण प्रणाली लगाई जा रही है.

जिला शीतलीकरण प्रणाली क्या है?

  • जिला शीतलीकरण प्रणाली के अन्दर एक केन्द्रीय स्थान पर ठंडा पानी, भाप अथवा गर्म पानी का उत्पादन होता है और तत्पश्चात इन सब को जमीन के अन्दर-अन्दर अथवा छतों के ऊपर-ऊपर पाइप द्वारा कई भवनों तक ले जाया जाता है जिससे वहाँ वातानुकूलन उष्मीकरण और पानी गर्माने की सुविधा मिल सके. इस प्रणाली के अन्दर अलग-अलग भवनों को अपना अलग-अलग वातानुकूलन मशीन, ठंडा करने की मशीन, पानी उबालने की मशीन अथवा भट्ठियाँ लगाने की आवश्यकता नहीं होती.
  • जिला शीतलीकरण प्रणाली लागत की दृष्टि से भी सुविधाजनक है. साथ ही यह विश्वसनीय, लचीली और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ भी होती है.
  • यदि शीतलीकरण की अन्य प्रणालियों से तुलना की जाए तो जिला शीतलीकरण प्रणाली में ऊर्जा की खपत 50% कम होती है.
  • यह प्रणाली कार्बन उत्सर्जन भी कम करती है.

Prelims Vishesh

Vande Bharat Express :-

  • भारत के पहले स्वदेश में बने ईंजन रहित अर्ध तीव्रगामी ट्रेन वन्दे भारत एक्सप्रेस को प्रधानमन्त्री ने हाल ही में हरी झंडी दिखलाकर इसका लोकार्पण किया.
  • यह ट्रेन अधिकतम 160 किमी. प्रति घंटा की गति से दिल्ली और वाराणसी के बीच चलेगी.

Pahari Dam Modernization Project :-

  • हाल ही में प्रधानमन्त्री ने पहाड़ी बाँध आधुनिकीकरण परियोजना का लोकार्पण किया.
  • यह बाँध उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में धासन नदी के ऊपर बना हुआ है.
  • इस परियोजना के माध्यम से धासन बाँध को पहले से अधिक सुदृढ़ कर दिया गया है जिस कारण इससे पानी का रिसाव घाट जाएगा और किसानों को और अधिक पानी मिलने लगेगा.

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