Sansar डेली करंट अफेयर्स, 15 December 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 15 December 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government Policies and Interventions for Development in various sectors and Issues arising out of their Design and Implementation.

Topic : Atma Nirbhar Bharat Rojgar Yojana – ABRY

संदर्भ

मंत्रिमंडल ने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना (Atma Nirbhar Bharat Rojgar Yojana – ABRY) को स्वीकृति प्रदान की है केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आत्मनिर्मर भारत पैकेज 3.0 के तहत आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना को अनुमोदन प्रदान किया है. इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2020-2023 की कोविड रिकवरी चरण अवधि के दौरान औपचारिक क्षेत्र में रोज़गार को बढ़ावा देना और नए रोजगार अवसरों को प्रोत्साहित करना है.

योजना के  लाभ

  • जिन रोजगार प्रदाता संगठनों में 1000 कर्मचारी हैं, वहाँ केंद्र सरकार नए कर्मचारियों के संदर्भ में दो वर्ष की अवधि के लिए कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के अंशदान का कर्मचारी भविष्य निधि (Employees’ Provident Fund: EPF) में भुगतान करेगी (1 अक्टूबर, 2020 को या उसके उपरांत और 30 जून, 2021 तक).
  • जिन रोजगार प्रदाता संगठनों में 1000 से अधिक कर्मचारी हैं, वहाँ केंद्र सरकार नए कर्मचारियों के संदर्भ में दो वर्ष की अवधि के लिए EPF में केवल कर्मचारी के भाग के अंशदान का भुगतान करेगी.

लाभार्थी

  • कोई कर्मचारी जिसका मासिक वेतन 15,000 रुपये से कम है और वह किसी ऐसे संस्थान में कार्यरत नहीं था, जो 1 अक्टूबर, 2020 से पूर्व कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से पंजीकृत था, तो वह इस योजना के लिए पात्र होगा.
  • EPFO यह सुनिश्चित करने के लिए एक उपर्युक्त तरीका अपनाएगा कि ABRY और EPFO द्वारा लागू की गई किसी अन्य योजना के लाम परस्पर व्याप्त (ओवरलैपिंग) नहीं हुए हैं.

चिंताएँ

केवल निम्न-आय और निम्न-कौशल अक्त रोजगार को प्रोत्साहन; कई प्रतिष्ठान EPFO में पंजीकरण की के कारण लाभ नहीं उठा पाएँगे आदि.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Salient features of the Representation of People’s Act.

Topic : MODEL CODE OF CONDUCT

संदर्भ

राज्य चुनाव आयोग (State Election Commission– SEC) ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से आदर्श आचार संहिता (Model code of conduct– MCC) का उल्लंघन करने संबंधी शिकायत पर स्पष्टीकरण मांगा है. मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में सभी के लिए कोविड-19 के मुफ्त टीकाकरण की घोषणा की गयी थी.

मुख्यमंत्री द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के पश्चात इस मामले पर निर्णय लिया जाएगा.

आदर्श आचार संहिता

आदर्श आचार संहिता (MCC) उन मार्गनिर्देशों को कहते हैं जिन्हें भारतीय चुनाव आयोग द्वारा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों पर लागू किये जाते हैं. ये मार्गनिर्देश मुख्यतः इन विषयों से सम्बन्धित होते हैं – भाषण, निर्वाचन दिवस, निर्वाचन बूथ, चुनाव घोषणापत्र, जुलूस तथा सामान्य-आचरण.

लक्ष्य : इन मार्गनिर्देशों का उद्देश्य स्वतंत्र एवं न्यायपूर्ण चुनाव कराना है.

कब लागू होती हैअभी तक आदर्श आचार संहिता आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के तुरंत पश्चात् लागू हो जाती है और जब तक चुनावी प्रक्रिया चलती रहती है यह प्रभावी रहती है.

संहिता की वैधानिक स्थिति : आदर्श आचार संहिता का कोई वैधानिक आधार नहीं है. यह चुनावों से जुड़ी हुई नैतिकता के नियम हैं जिनपर मात्र पालन करने का दबाव होता है. परन्तु वैधानिक स्वीकृति नहीं होते हुए भी आयोग इस संहिता को लागू करने से नहीं रुकता.

इतिहास : भारतीय चुनाव आयोग ने सबसे पहले 1971 के पाँचवे चुनाव के समय आदर्श आचार संहिता निर्गत की थी और वह उसे समय-समय पर संशोधित करता रहता है. संहिता राजनैतिक दलों की सहमति से बनी थी और उन दलों ने यह वचन दिया था कि वे  इसमें वर्णित सिद्धांतों का पालन करेंगे और इसे अक्षरशः मान्यता देंगे.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : National Family Health Survey – NFHS

संदर्भ

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे’ पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान 5वें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के परिणाम को जारी किया. इस सर्वेक्षण में भारत और इसके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जनसंख्या, स्वास्थ्य और पोषण के बारे में विस्तृत जानकारी शामिल है.

5वें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष

  • 5वें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में 6.1 लाख सैंपल घरों में एकत्र किए गए हैं. जिसमें जनसंख्या, स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और पोषण से संबंधित संकेतकों पर जानकारी एकत्र करने के लिए घरेलू स्तर पर साक्षात्कार लिए गए हैं.
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एनएचएफ़एस के 5वें दौर के आंशिक आंकड़ों को ही जारी किया है. इन आंकड़ों में बताया गया है कि 2015-16 में निर्गत किए गए चौथे दौर के आंकड़ों की तुलना में इस बार वैक्सीन की आपूर्ति में काफी वृद्धि देखी गयी है.
  • पहले चरण में 17 राज्यों और पांच केंद्रशासित प्रदेशों (असम, बिहार, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, केरल, लक्षद्वीप, दादर और नगर हवेली और दमन और दीव) के परिणामों को ही निर्गत किया गया है.
  • शेष 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े आंकड़े दूसरे चरण में निर्गत किए जायेंगे. इन राज्यों में COVID-19 के कारण सर्वेक्षण का कार्य निलंबित कर दिया गया था. इसे नवंबर में फिर से शुरू किया गया है और मई 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है.
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले चरण वाले राज्यों में प्रजनन दर में गिरावट आई है और गर्भनिरोधकों के उपयोग में वृद्धि हुई है. सर्वेक्षण में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 12 से 23 महीने के बच्चों के टीकाकरण कवरेज में काफी सुधार पाया गया है. महिला सशक्तिकरण संकेतक (बैंक खाते वाली महिलाओं सहित) में काफी प्रगति हुई है.
  • 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में कमी हुई है.
  • वहीं समानांतर रूप से राष्ट्रीय राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्वास्थ्य सर्वेक्षण के पहले चरण के दौरान सर्वेक्षण किए गए 22 राज्यों में से 16 राज्यों में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों कम वजन और उम्र के अनुसार कम लंबाई एवं कम शारीरिक वृद्धि दर्ज की गई.
  • NFHS-4 (2015-16) की तुलना में इस बार 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नवजात मृत्यु दर (NMR) कम हुई है.

डेटा विश्लेषण

  • देश भर के कई राज्यों में बाल कुपोषण का उच्च स्तर दर्ज किया गया, जबकि उन्होंने कार्यप्रणाली में बदलाव के चलते स्वच्छता, ईंधन व पीने योग्य जल तक बेहतर पहुँच प्रदान की.
  • नवीनतम डेटा राज्यों में महामारी से पहले की स्वास्थ्य स्थिति को दर्शाता है.
  • कई राज्यों में बच्चों (5 वर्ष से कम आयु) केचार प्रमुख मैट्रिक्स कुपोषण मापदंडों में अल्प सुधार या निरंतर परिवर्तन देखा गया है.
  • इन चार प्रमुख मेट्रिक्स-चाइल्ड स्टंटिंग, चाइल्ड वेस्टिंग, कम वज़न वाले बच्चों की हिस्सेदारी और बाल मृत्यु दर के आधार पर कई राज्यों में या तो सुधार या निरंतर बदलाव देखा गया है.
  • इन मेट्रिक्स के डेटा का उपयोग कई वैश्विक सूचकांकों जैसे कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स आदि में भी किया जाता है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life.

Topic : PM-WANI

संदर्भ

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संपूर्ण देश में पीएम-वाणी’ (PM-WANI) के अंतर्गत सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क स्थापित करने को स्वीकृति प्रदान की है. प्रधानमंत्री-वाईफाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (PM-WANI) का उद्देश्य देश भर में सरलता से उपलब्ध सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित करना न यह व्यवसायों को वायरलेस इंटरनेट हॉटस्पॉट सेवाएं प्रदान करने की अनुमति प्रदान करेगा. इन सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से ब्रॉडबैंड इंटरनेट प्रदान करने के लिए कोई लाइसेंस शुल्क नहीं लिया जाएगा.

PM-WANI नेटवर्क सेवा को विभिन्‍न अभिकर्ताओं द्वारा संचालित किया जाएगा

पब्लिक डेटा ऑफिस (Public Data Office: PDO): यह केवल पीएम-वाणी के तहत आने वाले वाई-फाई सेवा स्थलों की स्थापना, रख-रखाव और संचालन करने का कार्य करेंगे. साथ ही, उपभोक्‍ताओं को ब्रॉडबैंड सेवा भी प्रदान करेंगे.

पब्लिक डेटा ऑफिस समूह (PDO Aggregator: PDOA): यह पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के प्रमाणीकरण और लेखा खातों के रखरखाव का कार्य करेंगे.  

ऐप प्रदाता: ये पंजीकृत ग्राहकों के लिए मोबाइल ऐप विकसित करेंगे. इसके अतिरिक्त, पीएम वाणी सेवा की उपलब्धता का पता लगाने के उपरांत मोबाइल ऐप में वह जानकारी समाविष्ट करेंगे.

सेंट्रल रजिस्ट्री: इसका रख-रखाव आरंभिक स्तर पर टेलीकॉम विभाग (C-DoT) द्वारा किया जाएगा. यह ऐप सेवा प्रदाताओं, PDOs और PDOAs की जानकारी भी रखेगा.

PM-WANI का महत्त्व

  • विविध 4G मोबाइल नेटवर्क कवरेज के साथ सुदूर क्षेत्रों और प्रदेशों में उच्च गति के इंटरनेट का विस्तार होगा.
  • ब्रॉडबैंड की उपलब्धता और उपयोग से आय, रोजगार, जीवन की गुणवत्ता, व्यवसाय करने में सुगमता आदि में वर्धन होगा.
  • भारत में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के अंतराल को कम करने के लिए, वर्ष 2023 तक न्यूनतम 100 मिलियन सार्वजनिक वाईफाई हॉटस्पॉट की आवश्यकता होगी.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Aerosols in Indo-Gangetic plain have led to increase in high rainfall in Himalayan foothills: Study

संदर्भ

सिंघु-गंगा मैदान (Indo-Gangetic) में एरोसोल की उपस्थिति ने हिमालय के गिरिपदों में उच्च वर्षण की घटनाओं को बढ़ावा दिया है. यह अध्ययन डीएसटी जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम (DST Climate Change Program) के तहत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा समर्थित विभिन्‍न संस्थानों ने किया था.

अध्ययन से सम्बंधित मुख्य बिंदु

  • एरोसोल मानसून के मौसम में हिमालय पर उच्च वर्षण की घटनाओं में तीव्रता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
  • एरोसोल सिंघु-गंगा मैदान को विश्व के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक बनाने के लिए उत्तरदायी हैं.
  • इस क्षेत्र में एरोसोल की अति उच्च मात्रा पाई जाती है. इनका अधिकांश भाग ब्लैक कार्बन और धूल से संबद्ध होता है. यहाँ वायु राशि (air mass) जब उभरे हुए भू-भाग के ऊपर से प्रवाहित होती है तब वह कम ऊंचाई से उच्च ऊँचाई तक जाने के लिए बाध्य हो जाती है. यह क्रिया तकनीकी रूप से पर्वतीय बल (orographic forcing) कहलाती है.
  • कणिकीय उत्सर्जन भी मेघ तंत्र के भौतिक और गतिशील गुणों को परिवर्तित कर सकता है. इसके कारण अत्यधिक प्रदूषित शहरी क्षेत्रों के पर्वतीय अंचलों में पवनों के साथ वर्षण की घटनाओं में वृद्धि होती है.
  • एरोसोल को गैसीय या नमीयुक्त वातावरण में निलंबित द्रवित या ठोस कणों के संयोजन के रूप में परिभाषित किया जाता है. वायुमंडल में, ये कण मुख्य रूप से वायुमंडल की निचली परतों (<1.5 किमी) में स्थित होते हैं. इसका कारण यह है कि एयरोसोल स्रोत स्थलीय सतह पर स्थित होते हैं.
  • हालांकि, कुछ एयरोसोल्स अभी भी समताप मंडल में पाए जा सकते हैं. विशेषकर ज्वालामुखी एरोसोल अधिक ऊंचाई वाली परतों में प्रसारित हो जाते हैं.

एरोसोल के स्रोत

  • एरोसोल के प्राकृतिक स्रोतों में विभंजित लहरों (breaking wavs) से उत्पन्न समुद्री लवण, वायु के माध्यम से सतह से उड़ने वाली खनिज धूल और ज्वालामुखी शामिल हैं.
  • मानवजनित एरोसोल में सल्फेट, नाइट्रेट और कार्बनवुक्त एरोसोल तथा विशेष रूप से जीवाश्म ईंघन दहन सम्मिलित हैं.

एरोसोल के प्रभाव

  • वे वायुमंडलीय रासायनिक संरचना को प्रमावित करते हैं.
  • वे दृश्यता को कम कर सकते हैं.
  • वायु की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं (एरोसोल हृदय और फेफड़ों को क्षति पहुंचा सकते हैं).
  • वे मेघ की बूंदों या हिममेघों में बर्फ के क्रिस्टल के लिए नाभिक के रूप में कार्य करते हैं.

Prelims Vishesh

Better than Cash Alliance :-

  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा समथित, बेटर देन कैश अलायंस 75 से अधिक सरकारों, कंपनियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी है. यह सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए नकदी के स्थान पर उत्तरदायी डिजिटल भुगतान की विधि के अंगीकरण को त्वरित करता है. यह दक्षता, पारदर्शिता, महिलाओं की आर्थिक सहभागिता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए भुगतान को डिजिटल बनाने हेतु प्रतिबद्ध है.
  • भारत वर्ष 2015 में इस गठबंधन का सदस्य बना था. हाल ही में, भारत और बेटर दैन कैश एलायंस ने फिनटेक समाधानों पर एक संयुक्त पीयर लर्निंग एक्सचेंज (Joint Peer Learning Exchange) का आयोजन किया है.

Department of Integrative Medicine :-

  • हाल ही में, आयुष मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIMS) ने एम्स में इंटीग्रेटिव (समग्र) मेडिसिन विभाग स्थापित करने पर कार्य आरंभ करने का निर्णय किया है.
  • यह निर्धारित किया गया है कि एम्स का सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च कोविड उपरांत उपचार पर अध्ययन के लिए आयुर्वेद और योग के साथ एक एकीकृत प्रोटोकॉल विकसित कर सकता है. यह कदम आधुनिक चिकित्सा के साथ पारंपरिक चिकित्सा के एकीकरण की दिशा में प्रगति को दर्शाता है.

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