Sansar डेली करंट अफेयर्स, 14 July 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 14 July 2021


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Salient features of World’s Physical Geography

Topic : Last Ice Area

संदर्भ

ग्रीनलैंड के उत्तर में स्थित आर्कटिक का हिमाच्छादित भाग जिसे “लास्ट आइस एरिया” (Last Ice Area) कहा जाता है, में बर्फ की सांद्रता में चिंताजनक रूप से कमी देखी गई है.  उल्लेखनीय है कि भू-वैज्ञानिकों द्वारा इस क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सहने में सबसे सक्षम माना जा रहा था.

last ice area

लास्ट आइस एरिया के बारे में

आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री बर्फ एक निश्चित पैटर्न में परिसंचरित (circulate) होती है तथा प्राकृतिक रूप से ग्रीनलैंड एवं कनाडा के उत्तर में स्थित इस क्षेत्र में आकर जमा होती है. इसलिए यहाँ बर्फ की अधिक सांद्रता पाई जाती है, विश्व वन्य कोष (WWF) के द्वारा आर्कटिक में वर्ष 2040 तक ग्रीष्मकालीन हिम के पूरी तरह से पिघलने का अनुमान लगाया गया है, लकिन इसके बावजूद लास्ट आइस एरिया के बचे रहने की बात कही गई थी, लकिन अब इस क्षेत्र में भी बर्फ का पिघलना प्रारम्भ हो गया है. यदि यही स्थिति रही तो इस क्षेत्र में रहने वाले ध्रुवीय भालू, वालरस जैसे जीवों पर अस्तित्व का संकट उत्पन्न हो जायेगा.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : India’s exports to Africa and India’s imports from Africa

संदर्भ

भारतीय उद्योग परिसंघ (CCI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अफ्रीका को निर्यात तथा भारत का अफ्रीका से आयात क्रमश: 27.7 बिलियन डॉलर और 28.2 बिलियन डॉलर रहा, जो विगत वर्ष की तुलना में 4.4% और 25% कम है.

गिरावट के कारण

  • अफ्रीका में कोविड-19 का प्रभाव,
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा: अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन, जापान आदि अफ्रीका के बाजारों, खनिजों, हाइड्रोकार्बन और समुद्री संसाधनों के लिए निवेश एवं प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं तथा अपने भू-राजनीतिक प्रभाव का विस्तार कर रहे हैं.
  • अल्प निवेश: अफ्रीका में भारत का निवेश भी वित्त वर्ष 2019-20 में 3.2 बिलियन डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 2020-21 में 2.9 बिलियन डॉलर हो गया था.
  • 25 वर्षों में कुल निवेश, अफ्रीका में चीन के निवेश का लगभग एक तिहाई है.

उठाए जाने वाले कदम

  • कोविड-19 युग में उद्योगों की शिकायतों और चुनौतियों का समाधान करना.
  • स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में सहयोग विकसित करना तथा उसे सुदृढ़ करना.
  • अफ्रीका को अनुदान और रियायती ऋण के लिए नए वित्तीय संसाधन आवंटित किए जाने चाहिए.
  • अफ्रीका में चीन की चुनौती से पार पाने के लिए भारत और उसके अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों के मध्य सहयोग में वृद्धि की जानी चाहिए.
  • विकास के अनुकूल निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

हमें अफ्रीका में अपने संसाधनों का उपयोग आना चाहिए. वहाँ बसे हुए प्रवासी भारतीयों, हमारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और शिक्षा सुविधाएं, हमारे विकास मॉडल की उपयुक्तता और भारत के निजी क्षेत्र द्वारा इस महाद्वीप कार्य करने की उत्सुकता, अफ्रीकी महाद्वीप के संदर्भ में भारत के महत्त्वपूर्ण संसाधन है .

इस महाद्वीप में भारत के लिए जो सद्भावना बनी है, वह स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात्‌ उपनिवेशवाद के विरुद्ध सैद्धांतिक रूप से अपनाए गए दृष्टिकोण का ही परिणाम है. भारत को इस सद्भावना का उपयोग नई सदी में अफ्रीका के साथ सशक्त आर्थिक और राजनीतिक सहभागिता के निर्माण हेतु करना चाहिये.

भारत की अफ्रीका के साथ संबंधों में महत्वपूर्ण राजनीतिक, सामरिक, आर्थिक और समुद्री हिस्सेदारी है.

संसाधन समृद्ध क्षेत्र : अफ्रीका बहुत संसाधन-समृद्ध है, और एक अविकसित महाद्वीप से कई तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं और नए लोकतंत्रों में परिवर्तित हुआ है.

वैश्विक संस्थाओं में सुधार : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने की भारत की महत्त्वाकांक्षा के लिए यह आवश्यक है कि भारत अफ्रीका महाद्वीप के सभी 54 देशों के साथ संलग्न हो.

निजी क्षेत्र के लिए निवेश के अवसर : कई भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों के इस क्षेत्र में कृषि व्यवसाय, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सहित रणनीतिक क्षेत्रों में पहले से ही महत्त्वपूर्ण हित और निवेश हैं. अफ्रीका भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण बाजार के रूप में उभरा है. साथ ही भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की जरूरत की पूर्ति के लिए एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभरा है, भारत अफ्रीका महाद्वीप में डिजिटल पेनीट्रेशन के लिए भी भारी संभावनाएं पैदा कर सकता हैं.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Structure, organization and functioning of the Executive and the Judiciary—Ministries and Departments of the Government; pressure groups and formal/informal associations and their role in the Polity.

Topic : All India Judicial Service

संदर्भ

केंद्र सरकार न्यायपालिका के निचले स्तर पर नियुक्तियों की प्रक्रिया में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है. इसी वर्ष सरकार ने एक ही अध्यादेश के माध्यम से कई महत्वपूर्ण न्यायाधिकरणों को समाप्त कर दिया था. इससे पहले नीति आयोग की रिपोर्ट ‘नए भारत के लिए रणनीति’ में भी न्यायपालिका के निचले स्तर पर नियुक्तियों के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (All India Judicial Service) का गठन किए जाने की बात कही गई थी.

अखिल भारतीय न्यायिक सेवा

  • AIJS का विचार सबसे पहले 1958 में भारतीय विधि आयोग के 14वें प्रतिवेदन में प्रस्तावित किया गया था जिसमें जिला न्यायाधीशों के एक एकीकृत संवर्ग के गठन का सुझाव था जिससे कि अधिक प्रतिभावान व्यक्ति इन पदों पर नियुक्त हो सकें.
  • 1961, 1963 और 1965 में सम्पन्न मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलनों में एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के सृजन के पक्ष में मंतव्य दिया गया था. यहाँ तक कि पहले, आठवें, ग्यारहवें और सोलहवें विधि आयोगों ने ऐसी सेवा आरम्भ करने का सुझाव दिया था, परन्तु विपक्ष ऐसे प्रस्ताव से सहमत नहीं हुआ.
  • 1977 में संविधान में एक संशोधन करके अनुच्छेद 312 (Article 312) के अंतर्गत एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का प्रावधान किया गया था.
  • आजकल AIGS के सृजन के पक्ष में एक तर्क यह दिया जा रहा है कि इस प्रकार की केन्द्रीय सेवा होने से भारत भर में जिला और अवर न्यायिक सेवा में विद्यमान लगभग 5,000 पद भरे जा सकते हैं.

राज्य सरकारें और उच्च न्यायालय AIJS के पक्षधर क्यों नहीं हैं?

  • राज्यों और उच्च न्यायालयों को डर है कि इस प्रकार की सेवा लागू होने से अवर न्यायाधीशों को नियुक्त करने और उनपर प्रशासन करने की उनकी शक्ति छिन जायेगी.
  • एक बड़ा तर्क यह दिया जाता है कि राज्य सरकारों ने अपने-अपने राज्य के अन्दर आदेश लिखने और अन्य काम करने के लिए अवर न्यायालयों को स्थानीय भाषओं का प्रयोग करने की अनुमति दे रखी है. फलस्वरूप यदि कोई न्यायाधीश किसी दूसरे राज्य में जाता है तो उसे न्यायिक करने में असुविधा हो सकती है.
  • यह भी आशंका व्यक्त की जाती है कि न्यायिक सेवा को अखिल भारतीय बनाने से राज्य न्यायिक सेवा के अधिकारियों की प्रोन्नति बाधित हो सकती है.
  • विरोधियों का यह भी कथन है कि अलग-अलग राज्यों में कई स्थानीय कानून एवं प्रथाएँ हैं जिनका पालन अखिल भारतीय सेवा नहीं कर पाएगी और इसके लिए न्यायाधीशों को अलग से प्रशिक्षित करने की आवश्यकता होगी.

सामाजिक न्याय की दृष्टि से की गई आपत्तियाँ

वर्तमान में न्यायिक पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया में कुछ विशेष समुदायों के लिए आरक्षण है. ये समुदाय नहीं चाहेंगे कि AIJS जैसी कोई सेवा बने. उदाहरण के लिए कोई समुदाय किसी एक राज्य में OBC है तो हो सकता है कि वह AIJS के अन्दर OBC नहीं रह जाए. यदि ऐसा होता है तो OBC समुदाय को घाटा होगा.

AIJS के पक्ष में यह एक तर्क दिया जा रहा है कि इससे वंचित समुदायों के प्रतिनिधित्व में कमी को दूर किया जा सकेगा. परन्तु ज्ञातव्य है कि कई राज्य वंचित समुदायों और स्त्रियों के लिए पदों का आरक्षण करते ही हैं.

भाषाई दृष्टि से की गई आपत्तियाँ

अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (All India Judicial Service – AIJS) से नियुक्त होने वाले न्यायाधीश उस प्रदेश की स्थानीय भाषा नहीं जान सकते हैं जहाँ उन्हें पदस्थापित किया जाएगा. जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है कि कुछ राज्य सरकारों ने अपने-अपने न्यायालयों में स्थानीय भाषा के प्रयोग का आदेश दे रखा है. इसलिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा उचित नहीं प्रतीत होती है.

अन्य आपत्तियाँ

अखिल भारतीय न्यायिक सेवा से केंद्र और राज्य में अनबन हो सकती है. अभी ही 9 उच्च न्यायालय इस प्रस्ताव का विरोध कर चुके हैं.

न्यायिक अधिकारियों की प्रोन्नति के मार्ग बहुत सीमित होते हैं और दूसरी ओर, उच्च न्यायालयों में जिला संवर्ग के न्यायाधीशों की नियुक्ति मात्र एक तिहाई पदों पर ही हो पाती है और शेष पद वकीलों से भरे जाते हैं.

निष्कर्ष

अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (AIJS) को लागू करना न्यायिक पद रिक्तियों का कोई अच्छा समाधान नहीं है. अच्छा होगा कि ऐसी रिक्तियों के विषय में सम्यक विश्लेषण के उपरान्त ही कोई निर्णय लिया जाए. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दो बार AIJS का सुझाव देने के पश्चात् भी इसका विरोध उच्च न्यायालय और प्रशासन संवर्ग भी कर रहा है. अतः AIJS की रूपरेखा इस प्रकार गढ़ी जाए कि इसकी सारी कमियाँ और इसके प्रति उठाये गये आक्षेपों को दूर किया जा सके.

न्यायाधीशों की नियुक्तियाँ भरीं जाएँ, इसके लिए AIJS के माध्यम से बहुत बड़ी संख्या में न्यायाधीशों की नियुक्ति होनी चाहिए जैसा कि IAS, IPS, IFS और अन्य सिविल सेवाओं के लिए होती है. इसके अतिरिक्त चयन के पश्चात् न्यायिक सेवा के अधिकारी को अपना काम संभालने के लिए समुचित प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है. इसमें कोई संदेह नहीं कि आज न्यायिक सेवा में प्रतिभा को प्राथमिकता देना अत्यावश्यक है और यह तभी संभव हो सकेगा जब इसके लिए नियुक्ति की प्रक्रिया को प्रतिस्पर्धात्मक बनाए जाए.


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Related to health.

Topic : China declared malaria-free

संदर्भ

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चीन को “मलेरिया मुक्त” घोषित किया है. ज्ञातव्य है कि मलेरिया मुक्त देश होने का प्रमाणपत्र WHO द्वारा तब दिया जाता है जब उस देश में पिछले एनाफिलीज़ (anopheles) मच्छरों द्वारा मलेरिया का प्रसार पिछले तीन वर्षों से बाधित रहा हो.

चीन की यह उपलब्धि सराहनीय है क्योंकि चीन ने 1940 के दशक में सालाना मलेरिया के 30 मिलियन मामले दर्ज किए थे, लेकिन उसके बाद विभिन्‍न रणनीतियों को अपनाकर मलेरिया उन्मूलन की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की. पिछले कुछ वर्षों में, अल सल्वाडोर (2021), अल्जीरिया (2019), अर्जेंटीना (2019), पैराग्वे (2018) और उज़्बेकिस्तान (2018) को मलेरिया मुक्त देश घोषित किया गया है.

चीन द्वारा अपनाई गई रणनीतियों में 1-3-7 रणनीति प्रमुख रही, जिसके तहत:

  • मलेरिया निदान की रिपोर्ट करने हेतु 1 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है
  • तीसरे दिन तक किसी मामले की पुष्टि करने और फैलने के जोखिम को निर्धारित करने की आवश्यकता
  • उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निरंतर निगरानी के साथ-साथ 7 दिनों के भीतर, बीमारी के और प्रसार को रोकने के लिए उचित उपाय किए जाने चाहिए.

मलेरिया के बारे में मुख्य तथ्य

  • मलेरिया प्लास्मोडियम गण के प्रोटोज़ोआ परजीवियों से फैलता है. इस गण के चार सदस्य मनुष्यों को संक्रमित करते हैं- प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम, प्लास्मोडियम विवैक्स, प्लास्मोडियम ओवेल तथा प्लास्मोडियम मलेरिये.
  • इनमें से सर्वाधिक खतरनाक पी. फैल्सीपैरम माना जाता है. यह मलेरिया के 80 प्रतिशत मामलों और 90 प्रतिशत मृत्युओं के लिए जिम्मेदार होता है.
  • यह मुख्य रूप से अमेरिका, एशिया और अफ्रीका महाद्वीपों के उष्ण तथा उपोष्णकटिबंधी क्षेत्रों में फैला हुआ है.

भारत में मलेरिया उन्मूलन के लिए किये गये प्रयास

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित 2018 के विश्व मलेरिया प्रतिवेदन के अनुसार मलेरिया से सर्वाधिक ग्रस्त 11 देशों में भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ मलेरिया के मामलों में अच्छी-खासी कमी आई है.
  • 2016 की तुलना में 2017 में मलेरिया के मामले 24% कम हुए. इसका अभिप्राय यह है कि मलेरिया को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों का नेतृत्व अब भारत के हाथ में आ गया है. भारत से प्रेरणा लेकर अन्य देश मलेरिया से निपटने की प्रेरणा ले सकते हैं.
  • भारत को मलेरिया हटाने में सफलता इसलिए मिल रही है कि एक ओर जहाँ वह विश्व-भर में अपनाई गई रणनीतियों के अनुरूप चल रहा है तो दूसरी ओर अपना स्वदेशी मलेरिया-विरोधी कार्यक्रम भी चला रहा है.
  • 2015 में पूर्व एशिया शिखर सम्मलेन में 2030 तक मलेरिया समाप्त करने का वचन देने के उपरान्त भारत ने इसके लिए एक पंचवर्षीय राष्ट्रीय रणनीतिक योजना का अनावरण किया था. इसमें मलेरिया को नियंत्रित करने के स्थान पर उसे समाप्त करने पर बल दिया गया था. इस योजना का उद्देश्य है कि भारत के 678 जिलों में से 571 जिलों में 2022 तक मलेरिया का उन्मूलन कर दिया जाए.
  • इस योजना में 10,000 करोड़ रू. का खर्च है. इस खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त निवेश तो चाहिए ही, साथ ही इसके लिए सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों और परोपकारी दाताओं का सहयोग भी अपेक्षित होगा क्योंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय होता है इसलिए मलेरिया से निटपने में राज्य सरकारों को विशेष दायित्व निभाना होगा.
  • विदित हो कि ओडिशा राज्य एक मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चला रहा है जिसका नाम दुर्गम अंचलेर मलेरिया निराकरण (DAMaN) रखा गया है.

मलेरिया से सम्बंधित चिंतायें

  • मलेरिया से निपटने के लिए समय समय पर टेक्निकल, फाइनेंसशियल, ऑपरेशन और प्रशासनिक समस्याओं में उतार चढ़ाव देखे गए हैं.
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO) के मुताबिक विश्व मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 के दौरान भारत में साल 2016 के मुकाबले साल 2017 में मलेरिया के मामलों में 24% की कमी पाई गई है.
  • मलेरिया पर नियंत्रण पाने के लिए भारत का खर्च दक्षिण पूर्व एशिया में सबसे कम है.
  • WHO के अनुसार, मलेरिया को खत्म करने के लिए व्यापक तरीका अपनाना होगा. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया को लेकर लोगों में जागरुकता फैलाने की अधिक आवश्यकता है.
  • दक्षिण-पूर्व एशिया में कुल मलेरिया के 70 प्रतिशत मामले और मलेरिया से होने वाली 69 प्रतिशत मौतें भारत में होती हैं.
  • मलेरिया सबसे प्रचलित संक्रामक रोगों में से है. यह रोग प्लाज्मोडियम गण के प्रोटोजोआ परजीवी के माध्यम से फैलता है.
  • केवल चार प्रकार के प्लाज्मोडियम परजीवी मनुष्य को प्रभावित करते हैं, जिनमें से सर्वाधिक खतरनाक प्लाज्मोडियम फैल्सीपैरम तथा प्लाज्मोडियम विवैक्स माने जाते हैं.
  • साथ ही प्लाज्मोडियम ओवेल तथा प्लाज्मोडियम मलेरिया भी मानव को प्रभावित करते हैं. इन सभी समूहों को ‘मलेरिया परजीवी’ कहते हैं.

आगे की राह

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पिछले 15 वर्षों में मलेरिया को रोकने के लिए कई प्रयास किए गए. मच्छरदानी और दूसरे उपायों के बाद भी इस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है. ऐसे में समाधान के तौर पर वैक्सीन ही बेहतर विकल्प है. इसकी सहायता से हजारों बच्चों को मृत्यु के मुँह में जाने से  बचाया जा सकता है.


Prelims Vishesh

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  • हाल ही में, अमरीकी एवं नाटो सेनाओं द्वारा अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस को खाली कर दिया गया है.
  • यह लगभग पिछले 20 वर्षों से आतंकवादियों के खिलाफ युद्ध का केंद्र रहा था.
  • ज्ञातव्य है कि अगस्त 2021 तक अमरीकी सेनाएँ अफ़ग़ानिस्तान से पूरी तरह चली जायेंगी.
  • कई अफ़ग़ान लोग इसके बाद देश में गृहयुद्ध की वैसी ही स्थिति उत्पन्न होने की आशंका जता रहे हैं, जैसी 1990 के दशक में सोवियत संघ के चले जाने के बाद उत्पन्न हुई थी. पिछले कुछ दिनों में विभिन्‍न अफ़ग़ान शहरों पर तालिबान के हमलों में भी तेजी आई है.

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