Sansar डेली करंट अफेयर्स, 14 February 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 14 February 2020


GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Hampi

संदर्भ

कर्नाटक सरकार द्वारा हम्पी स्थल के आस-पास के रेस्त्राँओं को ध्वस्त करने के निर्णय का सर्वोच्च न्यायालय ने समर्थन किया है क्योंकि ये रेस्त्राँ मैसूर प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1961 (Mysore Ancient and Historical Monuments and Archaeological Sites and Remains Act of 1961) का उल्लंघन करके बनाए गये थे.

पृष्ठभूमि

यह मामला कर्नाटक उच्च न्यायालय में भी चला था. इसमें भी न्यायालय ने यह व्यवस्था दी थी कि हम्पी विश्व धरोहर क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (Hampi World Heritage Area Management Authority) को इन अवैध भवनों को गिराने की शक्ति प्राप्त है.

हम्पी के बारे में कुछ मुख्य तथ्य

  • यह एक UNESCO विश्व धरोहर स्थल है.
  • तीसरी शताब्दी ई.पू. में हम्पी मौर्य साम्राज्य का एक भाग था.
  • यह 1336 ई. अस्तित्व में आया और विजयनगर के चार राज्यवंशों के समय यह राजधानी बना रहा.
  • तुलुवा वंश के राजा कृष्णदेव राय के काल में विजय नगर साम्राज्य अपनी श्रेष्ठ ऊँचाइयों पर था.
  • हम्पी रामायण में वर्णित किष्किन्धा क्षेत्र के अन्दर आता था.
  • हम्पी तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित है.
  • 1500 ई. आते-आते हम्पी मध्यकालीन विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नगर बन गया था (बीजिंग के बाद) और संभवतः यह भारत का सबसे समृद्ध नगर था जहाँ फारस और पुर्तगाल के भी व्यापारी आया करते थे.
  • UNESCO ने इसका वर्णन करते हुए इसे एक भव्य स्थल बताया है जहाँ दक्षिण भारत के अंतिम महान हिन्दू राज्य के 1,600 से अधिक अवशेष बचे हुए हैं.

GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : World History.

Topic : Iran celebrates 1979 Islamic Revolution

संदर्भ

फ़रवरी 11 को ईरान ने 1979 की इस्लामी क्रान्ति (Islamic Revolution) को मनाया.

इस्लामी क्रान्ति क्या थी?

यह एक लोकप्रिय विद्रोह था जो 1978-79 में ईरान में हुआ था और जिसके कारण फ़रवरी 11, 1979 को तत्कालीन राजशाही का अंत हुआ और एक इस्लामी गणतंत्र की स्थापना हुई.

इस्लामी क्रांति के कारण

इस क्रान्ति के निम्नलिखित कारण बताये जाते हैं –

  1. पाश्चात्य साम्राज्यवाद का विरोध
  2. ईरान में 1953 में हुआ तख्तापलट
  3. 1973 में तेल निकलने से लोगों में बढ़ी अपेक्षाएँ
  4. एक अतिशय महत्वाकांक्षी आर्थिक कार्यक्रम
  5. 1977-78 में हुई छोटी मगर तीव्र आर्थिक मंदी के प्रति रोष
  6. राजशाही की अन्य कमियाँ

इस्लामिक रिवोल्यूशन का परिणाम

1979 की क्रांति के पश्चात् देश में आध्यात्मिक नेता खोमेनी (Khomeini) के अधीन इस्लामी गणतंत्र का गठन हुआ. नवम्बर 4, 1979 को कुछ मुस्लिम छात्रों ने अमेरिकी दूतावास पर कब्ज़ा कर लिया और 52 अमेरिकी राजनयिकों और नागरिकों को बंधक बना लिया. इस घटना को ईरान बंधक संकट (Iran Hostage Crisis) कहा जाता है.


GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Social empowerment and Indian society.

Topic : Supreme Court upholds changes to SC/ST atrocities law

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 में हुए एक संशोधन को वैध करार दिया है जिसके द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के विरुद्ध अत्याचार के आरोपी व्यक्तियों को अग्रिम जमानत देने की मनाही की गई थी.

पृष्ठभूमि

मार्च 20 के एक निर्णय (सुभाष काशीनाथ महाजन बनाम महाराष्ट्र राज्य) में सर्वोच्च न्यायालय ने मूल अधिनियम के उस प्रावधान को निरस्त कर दिया था जिसमें आरोपित व्यक्ति को बिना जाँच-पड़ताल के गिरफ्तार कर लिया जाता है. न्यायालय ने इसके स्थान पर यह निर्णय दिया कि आरोपित व्यक्ति तभी गिरफ्तार हो जब प्राथमिक जाँच में आरोप प्रथम दृष्टया सत्यापित हो.

सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि सरकारी कर्मचारी को तभी गिरफ्तार किया जाए जब किसके लिए उसे नियुक्त करने वाला अधिकारी लिखित अनुमति दे. जहाँ तक निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का प्रश्न है न्यायालय का आदेश था कि उनकी गिरफ्तारी केवल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अनुमति से ही हो.

न्यायालय का निर्देश था कि प्राथमिकी के पंजीकृत होने के पहले एक प्राथमिक जाँच हो जिसमें देखा जाए कि मामला SC/ST Act के दायरे में आता है या नहीं अथवा यह जानबूझकर परेशान करने के लिए निराधार पंजीकृत किया जा रहा है.

सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का दलित समूहों द्वारा प्रबल विरोध किया गया. न्यायालय ने भी अपने निर्णय को बदलने से इनकार कर दिया.

सर्वोच्च न्यायालय ने प्राथमिकी के पहले जाँच की आवश्यकता क्यों बताई?

सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (National Crime Records Bureau – NCRB) के 2015 आँकड़ों का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि SC/ST एक्ट के तहत की गई 15-16% शिकायतें बंद हो गई थी. इसके अतिरिक्त, जिन मामलों के मुक़दमे चले उनमें 75% में अंततः आरोपी या तो छूट गये या उन पर से मामला उठा लिया गया. इससे यह स्पष्ट है कि निर्दोष व्यक्तियों को इसमें फंसाया जाता है और अनावश्यक रूप से उनकी गिरफ्तारी हो जाती है.  

SC/ST Act के बारे में

  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम संसद द्वारा सितम्बर 9, 1989 में पारित हुआ था और इस अधिनियम के लिए नियमों की अधिसूचना मार्च 31, 1995 में निर्गत हुई थी.
  • इस अधिनियम में 22 अपराध वर्णित किये गये हैं. इन अपराधों में आर्थिक, लोकतांत्रिक एवं सामाजिक अधिकारों का हनन, भेदभाव, शोषण तथा विधि प्रक्रिया का दुरूपयोग शामिल हैं.
  • अन्य मुख्य अपराध हैं – कुछ स्थलों पर जाने से रोकना, पारम्परिक मार्गों के उपयोग से रोकना, अखाद्य वस्तु पिलाना अथवा खिलाना, यौन शोषण, शारीरिक क्षति, संपत्ति से सम्बंधित अत्याचार, दुष्टतापूर्ण मुकदमे, राजनैतिक तथा आर्थिक शोषण.
  • अधिनियम का अनुभाग 14 यह प्रावधान करता है कि प्रत्येक जिले में इस अधिनियम के अन्दर आने वाले अपराधों का मुकदमा एक विशेष अदालत में चलेगा.

संशोधन में प्रविष्ट नए अनुच्छेद

मूल अधिनियम के अनुभाग 18 के पश्चात् ये तीन नए अनुच्छेद प्रविष्ट किए जा रहे हैं –

  • किसी व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए प्राथमिक जाँच की आवश्यकता नहीं होगी.
  • अधिनियम के अंतर्गत किये गये किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए पूर्वानुमति की आवश्यकता नहीं होगी.
  • आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) केअनुभाग 438 में वर्णित अग्रिम जमानत के प्रावधान इस अधिनियम के अधीन दायर मामले में नहीं लागू होंगे.

सरकार द्वारा संशोधन क्यों किये गये थे?

  • यद्यपि SC/ST अधिनियम अजा/अजजा के नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, परन्तु उनके प्रति अत्याचार के मामलों में कोई कमी नहीं आई है. 2014 में ऐसे मामले 47,124 थे जो 2015 में घटकर 44,839 तो हुए परन्तु फिर 2016 में बढ़कर 47,338 हो गये.
  • यह स्थिति तब है जब देश के 14 राज्यों में 195 विशेष न्यायालय अत्याचार निवारण के मामलों की सुनवाई के लिए अलग से गठित किये गये हैं. इन न्यायालयों ने 2014 में 8% मामलों में सजा सुनाई और 71.2% आरोपित छूट गये. अगले साल 25.8% मामलों में सजा हुई और 74.2% आरोपित छूट गये. पुनः 2016 में 24.9% मामलों में सजा हुई और 75.1% आरोपित छूट गये.
  • लंबित वादों की संख्या भी 2014 से 2016 तक लगभग समान रही (क्रमशः 85.3%, 87.3% और 89.3%).

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Special category status

संदर्भ

आंध्र प्रदेश ने विशेष राज्य दर्जे (Special Category Status – SCS) के लिए अपनी माँग फिर से दुहराई है.

विशेष राज्य का दर्जा क्या होता है ?

विशेष राज्य का दर्जा मिलने के बाद राज्यों को कई तरह के फायदे होते हैं. इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण है – केन्द्रीय सहायता में बढ़ोतरी. केंद्र अपने अनेक योजनाओं को लागू करने के ऐवज में राज्यों को वित्तीय मदद देते हैं.

कब किसे मिला दर्जा?

  • 1969-1974 – चौथी पंचवर्षीय योजना के दौरान पहली बार असम, जम्मू-कश्मीर और नागालैंड.
  • 1974-1979 – पाँचवी पंचवर्षीय योजना के दौरान हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम और त्रिपुरा.
  • 1990 के वार्षिक योजना में अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम जुड़े.
  • 2001 को उत्तराखंड को यह दर्जा मिला.

शर्तें (Conditions)

किसी भी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए विशेष शर्तें निर्धारित की गई हैं. जैसे –

  1. वह राज्य दुर्गम इलाकों वाला पर्वतीय भूभाग हो.
  2. राज्य का कोई हिस्सा अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगा हो.
  3. प्रति व्यक्ति आय और गैर कर राजस्व काफी कम हो.
  4. आधारभूत ढाँचे का अभाव हो.
  5. जनजातीय आबादी की बहुलता हो और आबादी का घनत्व काफी कम हो.
  6. इनके अलावा राज्य का पिछड़ापन, भौगोलिक स्थिति, सामाजिक समस्याएँ भी इसका आधार हैं.

संविधान में प्रावधान

भारतीय संविधान में  किसी भी राज्य के लिए विशेष श्रेणी के राज्य का कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन पहले का योजना आयोग और राष्ट्रीय विकास परिषद् ने ये मानते हुए कि देश के कुछ इलाके तुलनात्मक रूप से दूसरे इलाकों से पिछड़े हुए हैं, उन्हें अनुच्छेद 371 के तहत विशेष केन्द्रीय सहायता देने का प्रावधान किया था. इसके आधार पर आगे चलकर कुछ राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया.

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें > विशेष राज्य का दर्जा


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Issues related to health and management of human resources.

Topic : National Deworming Day

संदर्भ

कृमि मुक्ति दिवस वर्ष में दो बार 10 फरवरी और 10 अगस्त को सभी राज्यों और संघशासित प्रदेशों में मनाया जाता है. विदित हो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में 14 वर्ष से कम आयु वाले 64% आबादी को कृमि संक्रमण का खतरा है.

उद्देश्य

इसका मुख्य उद्देश्य मिट्टी के संक्रमण से होने वाले एसटीएच रोग (Soil Transmitted Helminth – STH) अर्थात् आंतों में परजीवी कृमि को खत्म करना है.

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान

  • कृमि मुक्ति अभियान 2015 में शुरू किया गया था.
  • इस अभियान में स्कूलों और आँगनवाड़ियों में जाकर सभी बच्चों को अलबेंडेजौल दिया जाता है और साथ ही स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए जल, स्वच्छता एवं व्यक्तिगत सफाई (Water, Sanitation and Hygiene – WASH) से सम्बंधित गतिविधियों की जानकारी देने के लिए स्कूलों और आँगनवाड़ियों में कार्यक्रम आयोजित होते हैं.
  • कृमि मुक्ति अभियान कम लागत वाला एक ऐसा अभियान है, जिसके अंतर्गत करोड़ों बच्चों को कृमि से बचाव की सुरक्षित दवा अलबेंडेजौल दी जाती है. यह दवा वैश्विक स्तर पर कृमि निरोधक प्रभावी दवा मानी गई है.
  • यह अभियान महिला और बाल विकास तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सहयोग से चलाया गया है.
  • विदित हो कि फरवरी 2015 में जहां 9 करोड़ कृमि की दवा दी गई, वहीं अगस्त 2018 में यह संख्या बढ़कर 69 करोड़ हो चुकी है.
  • इस अभियान के तहत आम लोगों को खुले में शौच करने से कृमि संक्रमण के खतरों तथा उनमें साफ-सफाई की आदतों के प्रति जागरूक बनाया जाता है.

लाभ

इस दवा से बच्चों के स्वास्थ्य में अच्छा-ख़ासा सुधार देखा गया है, जिससे स्कूल में उनकी अनुपस्थिति कम हुई है तथा उनमें पोषक तत्वों को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ी है. बच्चे अब पढ़ाई पर बेहतर ध्यान दे पा रहे हैं.


Prelims Vishesh

Safer Internet Day :-

  • इस वर्ष फ़रवरी 11 को अधिक सुरक्षित इन्टरनेट दिवस के रूप में मनाया गया.
  • इस वर्ष की इसकी थीम थी – “बेहतर इन्टरनेट के लिए साथ-साथ”/ “Together for a better internet”.
  • इस दिवस से समबन्धित समारोह Insafe/INHOPE नामक जागरूकता सृजन केन्द्रों के नेटवर्क के द्वारा आयोजित होते हैं.
  • यह नेटवर्क 30 देशों में फैला हुआ है. समारोह के लिए कोष का प्रबंध यूरोपीय संघ के Connecting Europe Facility program (CEF) की ओर से होता है.

Storm Ciara :

उत्तरी यूरोप में आए नवीनतम झंझावत को स्टॉर्म कायरा नाम दिया गया है. परन्तु जर्मनी में यह झंझावात सबाइन (Sabine) नाम से जाना गया क्योंकि पूरे यूरोप के लिए झंझावातों के नामकरण की व्यवस्था नहीं हो सकी है.

International Day of Women and Girls in Science :-

  • संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान में महिला एवं बालिका दिवस फ़रवरी 11 को मनाया गया.
  • इसका उद्देश्य विज्ञान को महिलाओं और बालिकाओं के लिए सुलभ बनाना और उनकी प्रतिभागिता को बढ़ावा देना है.
  • ज्ञातव्य है कि इतिहास में विज्ञान से सम्बंधित पुरस्कार आदि महिलाओं और बालिकाओं को पुरुषों की अपेक्षा बहुत कम मिले हैं. उदाहरण के लिए अभी तक विज्ञान के लिए मिले 616 नोबल पुरस्कारों में मात्र 19 महिलाओं को (एक महिला मेरी क्यूरी को यह दो बार मिला) यह पुरस्कार मिला.
  • गणित के लिए दिए जाने वाले सर्वोत्तम पुरस्कार – अबेल – 2019 में जाकर पहली बार एक महिला Karen Uhlenbeck (अमेरिका की गणितज्ञ) को प्राप्त हो सका. विदित हो कि इससे पहले 16 बार यह पुरस्कार पुरुष गणितज्ञों को ही मिला था.

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