Sansar डेली करंट अफेयर्स, 12 September 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 12 September 2020


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : WWF

संदर्भ

विश्व वन्यजीव कोष (World Wildlife Fund: WWF) द्वारा लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट (LPR) 2020 निर्गत की गई है.

लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट (LPR)

  • LPR को WWF द्वारा प्रत्येक दो वर्षों में जारी किया जाता है.
  • यह वैश्विक जैव विविधता और पृथ्वी के स्वास्थ्य से संबंधित परिवर्तनों का एक व्यापक अध्ययन प्रस्तुत करती है.

मुख्य निष्कर्ष

  • वर्ष 1970 और वर्ष 2016 के मध्य वैश्विक वन्यजीव आबादी में 68% की गिरावट हुई है.
  • पृथ्वी की 75% हिम मुक्त भू-सतह में भी परिवर्तित हुई है.
  • स्वच्छ जल में पाए जाने वाली प्रजातियों में लगभग तीन में से एक के विलुप्त होने का जोखिम बना हुआ है.
  • 1700 ई. से अब तक वैश्विक स्तर पर लगभग 90% आर्द्रभूमियाँ लुप्त हो चुकी हैं.
  • लैटिन अमेरिका में 94% की खतरनाक दर से वन्यजीवों की अधिसंख्यक आबादी की क्षति हुई है.
  • विगत चार दशकों में भारत में हुए तीव्र शहरीकरण, कृषि विस्तार और प्रदूषण के कारण लगभग एक तिहाई प्राकृतिक आर्द्रभूमियों की क्षति हुई है.
  • जैव विविधता के समक्ष प्रमुख जोखिम: भूमि एवं समुद्र के उपयोग में परिवर्तन (जिसमें पर्यावास की क्षति एवं निम्नीकरण शामिल है) प्रजातियों का अतिदोहन; आक्रामक प्रजातियों का आगमन तथा रोग प्रसार; प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन आदि जैसे कारक जैव विविधता संबंधी जोखिमों को बढ़ावा देते हैं.
  • सुझाव: खाद्य उत्पादन और उपभोग के तरीकों में परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता है. जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रयासों को तीव्र करने तथा प्रकृति को संरक्षित, सुरक्षित और पुनर्स्थापित करने के लिए निवेश आकर्षित करने की आवश्यकता है. प्राकृतिक पूंजी को पुनर्प्राप्त करने लिए आर्थिक को भी परिवर्तित करना अपरिहार्य हो गया है.

विश्व वन्यजीव कोष क्या है?

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय गैरसरकारी संगठन है.
  • इसकी स्थापना 1961 में हुई थी.
  • इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के ग्लैंड नगर में स्थित है.
  • इस संगठन का लक्ष्य वन्यजीवन का संरक्षण करना तथा पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव को घटाना है.
  • यह संरक्षण से सम्बंधित विश्व का सबसे बड़ा संगठन है.

उद्देश्य

  • विश्व की जैव विविधता का संरक्षण करना.
  • नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधनों के प्रयोग को टिकाऊ बनाना.
  • प्रदूषण और निरर्थक खपत में कमी को प्रोत्साहन देना.

WWF के प्रतिवेदन एवं कार्यक्रम

  • लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट: यह रिपोर्ट WWF द्वारा 1998 से प्रत्येक दो वर्ष पर प्रकाशित होता है. यह लिविंग प्लेनेट इंडेक्स और पर्यावरणीय फुटप्रिंट कैलकुलेशन पर आधारित होता है.
  • अर्थ आवर
  • डेट-फॉर-नेचर कार्यक्रम (Debt-for-nature swaps) : इस कार्यक्रम के अंतर्गत विकासशील देश के विदेशी ऋणभार का एक अंश इस शर्त पर माफ़ कर दिया जाता है कि वह देश पर्यावरण के संरक्षण पर स्थानीय स्तर पर निवेश करेगा.
  • मरीन स्टेवार्डशिप कौंसिल (MSC) : यह परिषद् एक स्वायत्त लाभरहित संस्था है जो मछली मारने के टिकाऊ उपायों के लिए मानदंड निर्धारित करती है.
  • हेल्दी ग्रोन पोटेटो: यह एक इको ब्रांड है जो उच्च गुणवत्ता वाले सतत रूप से उपजाए गये, डिब्बाबंद किये गये आलू उपभोक्ताओं को मुहैया करता है. इस कार्यक्रम में बड़े-बड़े खेतों में समेकित कीटनाशक प्रबंधन का प्रयोग होता है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Appointment to various Constitutional posts, powers, functions and responsibilities of various Constitutional Bodies.

Topic : Deputy Speaker of Lok Sabha

संदर्भ

हाल ही में, कांग्रेस ने लोकसभा में उपाध्यक्ष के पद के लिए अपने अभियान को फिर से शुरू किया है. ज्ञात हो कि, लोकसभा में पिछले 15 महीनों से उपाध्यक्ष का पद रिक्त है. इसके स्थान पर,  सांसदों का एक पैनल लोकसभा अध्यक्ष के कार्य निर्वहन में सहायता कर रहा है.

लोकसभा उपाध्यक्ष के बारे में

संविधान के अनुच्छेद 93 में लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों के निर्वाचन का प्रावधान किया गया है.

  1. लोकसभा उपाध्यक्ष का संवैधानिक पद वास्तविक प्राधिकरण की अपेक्षा संसदीय लोकतंत्र का प्रतीकात्मक पद होता है.
  2. किसी व्यक्ति के उपाध्यक्ष के रूप में चुने जाने पर निष्पक्ष रहना होता है, हालांकि उसे अपनी मूल राजनीतिक पार्टी से इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं होती है.

भूमिका एवं कार्य

लोकसभा अध्यक्ष के, बीमारी के कारण अवकाश अथवा मृत्यु हो जाने पर या किसी कारण से अनुपस्थित होने पर, उपाध्यक्ष, पीठासीन अध्यक्ष के रूप में कार्यों का निर्वहन करता है.

निर्वाचन

  1. प्रायः, आम चुनावों के बाद लोकसभा की पहली बैठक मेंलोकसभा के सदस्यों के मध्य से उपसभापति का चुनाव किया जाता है.
  2. संसद में बनी हुई परस्पर सहमति के अनुसार, उपाध्यक्ष का पद विपक्षी दल के किसी नेता को दिया जाता है.

कार्यकाल एवं पदत्याग

लोकसभा अध्यक्ष की भांति, उपाध्यक्ष भी सदन के जीवनपर्यंत पद धारित करता है. हालंकि, वह निम्नलिखित तीन स्थितियों द्वारा अपना पद त्याग सकता है:

  1. उसके सदन के सदस्य न रहने पर;
  2. अध्यक्ष को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित त्यागपत्र द्वारा;
  3. लोकसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा पद से हटाये जाने पर. किंतु, इस प्रस्ताव को पारित करने से पूर्व उसे 14 दिन पूर्व सूचना देना अनिवार्य होता है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Three-Language Formula

संदर्भ

तमिलनाडु ने त्रि-भाषा फॉर्मूले (three-language formula) के विरोध में केंद्र सरकार को पत्र लिखा है. तमिलनाडु सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में द्वि-भाषीय नीति (तमिल और अंग्रेजी) को जारी रखा जाएगा.

  • नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy: NEP) के अंतर्गत त्रि-भाषा फार्मूले को प्रस्तावित किया गया है. इसके अंतर्गत यह अनुशंसा की गई है कि सभी छात्र इस फार्मूले के अंतर्गत अपने विद्यालय में तीन भाषाएँ सीखेंगे जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ होनी चाहिएँ, तथा अंग्रेजी को उनमें पृथक भाषा माना जाएगा. हालांकि इसमें उल्लिखित है कि राज्य, क्षेत्र व छात्र दो भारतीय भाषाओं के चयन के लिए स्वतंत्र होंगे.
  • इसके अतिरिक्त, नवीन NEP कम से कम कक्षा 5 तक मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा या स्थानीय भाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में उपयोग करने का सुझाव देती है.
  • त्रि-भाषा फॉर्मूला प्रथम बार वर्ष 1968 में केंद्र सरकार द्वारा तैयार किया गया था तथा इसे वर्ष 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शामिल किया गया था. इस योजना का प्रयोजन यह सुनिश्चित करना था कि छात्र अधिक भाषाएं सीख सकें.

पृष्ठभूमि

हिंदी को लेकर 50 वर्ष से चला आ रहा विवाद फिर से पिछले दिनों उभर गया जब 2019 की नई शिक्षा नीति का प्रारूप प्रकाशित किया गया जिसमें उन राज्यों में हिंदी की पढ़ाई अनिवार्य करने का प्रस्ताव है जहाँ हिंदी नहीं बोली जाती है. यह प्रारूप केंद्र सरकार के पुराने त्रि-भाषा फोर्मुले के अनुसार ही है. परन्तु इसको लेकर तमिलनाडु में जम कर विरोध हो रहा है. तमिल भाषियों का कहना है कि उन पर हिंदी बलपूर्वक थोपी जा रही है. ऐसी उग्र प्रतिक्रिया को देखते हुए सरकार ने प्रारूप में से हिंदी के बारे में किए गये विवादास्पद प्रावधान को विलोपित कर दिया है.

त्रि-भाषा फोर्मुला क्या है?

त्रि-भाषा फोर्मुले के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में क्षेत्रीय भाषा के अतिरिक्त हिंदी और अंग्रेजी की पढ़ाई का प्रावधान है. यह फार्मूला सबसे पहली बार 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में रूपांकित हुआ था. इस नीति के अनुसार क्षेत्रीय भाषाएँ प्राथमिक और माध्यमिक पढ़ाई के स्तर पर शिक्षा का माध्यम पहले से ही हैं, परन्तु राज्य सरकारों को चाहिए कि माध्यमिक पढ़ाई के स्तर पर त्रि-भाषा फोर्मुले को लागू करें. वांछनीय यह होगा कि उत्तर भारतीय राज्यों को दक्षिण की एक भाषा और अंग्रेजी और हिंदी पढ़ाई जाए. इसी प्रकार जहाँ हिंदी नहीं बोली जाती है, उन राज्यों में क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी भी पढ़ाई जाए.

  • पहली भाषा: यह मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा होगी.
  • दूसरी भाषा: हिंदी भाषी राज्यों में यह अन्य आधुनिक भारतीय भाषा या अंग्रेज़ी होगी। गैर-हिंदी भाषी राज्यों में यह हिंदी या अंग्रेज़ी होगी.
  • तीसरी भाषा: हिंदी भाषी राज्यों में यह अंग्रेज़ी या एक आधुनिक भारतीय भाषा होगी। गैर-हिंदी भाषी राज्य में यह अंग्रेज़ी या एक आधुनिक भारतीय भाषा होगी.

NEP, 1968 हिंदी को सम्पर्क भाषा बनाने के बारे में क्या कहती है?

1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह कहा गया था कि हिंदी को देश की संपर्क भाषा बनाने की दिशा में कदम उठाये जाएँ और यह सुनिश्चित किया जाए कि वह भारत की मिश्रित संस्कृति के सभी अवयवों को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम बन जाए जैसा कि संविधान की धारा 351 में प्रावधान किया गया है. गैर-हिंदी राज्यों में ऐसे महाविद्यालयों और उच्चतर शिक्षा के अन्य संस्थानों का निर्माण किया जाए जहाँ हिंदी की शिक्षा को प्रोत्साहन मिले.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

नौकरशाह, कंपनी मालिक और राजनेता अपने बच्चों को तो अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में भेज रहे हैं लेकिन गरीबों के लिए मातृभाषा में शिक्षा की वकालत कर रहे हैं. अगर इस देश में रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा करने हैं तो सभी विद्यालयों में त्रि-भाषा फार्मूला लागू किया जाना चाहिए. हमलोगों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हम अपने दृष्टिकोण के अनुसार फैसले करते हैं. हम अपनी क्षमताओं के आधार पर निर्णय लेते हैं. हम सोचते हैं कि बच्चों की क्षमता भी उतनी ही सीमित है जितनी की इस उम्र में हमारी, लेकिन यह गलत है. सभी बच्चों को मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी का ज्ञान हासिल करने की खुली छूट मिलनी चाहिए.  सभी बच्चों को मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी का ज्ञान हासिल करने की खुली छूट हो.

भाषा के सवाल पर नई शिक्षा नीति ने वर्तमान शिक्षा के ढांचे में अमूलचूल परिवर्तन की बात कही है जिस पर इन दिनों हंगामा मचा हुआ है. नई शिक्षा नीति में भाषा को लेकर कुछ खास प्रावधान किए गए है जिनमें शिक्षा के माध्यम के रूप में मातृभाषा के उपयोग की सिफारिश की गई है इसमें मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा का विकल्प दिया गया है. भाषा नीति का मूल आधार त्रिभाषा फार्मूला है जिसके अनुसार विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी को तीन भाषाओं का ज्ञान अनिवार्य रूप से होना चाहिए. इसके साथ ही संस्कृत, तमिल, तेलगु, कन्नड़, फ़ारसी, प्राकृत और पाली जैसी शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन पर विशेष जोर देने की बात की गई है. नई नीति में भाषा को लेकर किए गए बदलावों के बाद शिक्षा के माध्यम के रूप में अंग्रेजी की वकालत करने वाला एक तबका, जिसमें देश भर में कुकरमुत्ते की तरह फैले अंग्रेजी माध्यम विद्यालय भी हैं, शिक्षा नीति के उस प्रावधान का विरोध कर रहे हैं जिसमें प्राथमिक शिक्षा के लिए पढ़ाई का माध्यम मातृभाषा या स्थानीय भाषा में कराने की बात कही गई है. यद्यपि दुनियाभर के शिक्षाविद, और विद्वान यह मानते हैं कि बच्चे का सर्वाधिक प्रारम्भिक विकास और सीखने की प्रवृत्ति उसी भाषा में बढ़ती है जो उसकी घर में बोली जाने वाली भाषा होती है अन्यथा उसका अधिकतर समय मातृभाषा और शिक्षण की भाषा के शब्दों के अंतर को समझने में ही गुजर जाता है.

इस बारे में महात्मा गांधी का मानना था कि मातृभाषा का स्थान कोई दूसरी भाषा नहीं ले सकती. उनके अनुसार, “गाय का दूध भी मां का दूध नहीं हो सकता.” गांधी लिखते है कि,”मेरा यह विश्वास है कि राष्ट्र के जो बालक अपनी मातृभाषा के बजाय दूसरी भाषा में शिक्षा प्राप्त करते हैं , वे आत्महत्या ही करते हैं. यह उन्हें अपने जन्मसिद्ध अधिकार से वंचित करती है. वह उनकी सारी मौलिकता का नाश कर देती है.उनका विकास रुक जाता है. इसलिए मैं इस चीज को पहले दरजे का राष्ट्रीय संकट मानता हूं.” गांधी मानते है कि “मातृभाषा में शिक्षा हो तो भारत में नकलची नमूने नहीं, करोड़ों वैज्ञानिक और दार्शनिक पैदा होंगे. हम जगदीशचन्द्र बसु और डॉ. प्रफुल्ल चंद्र राय को देखकर मोहांध हो जाते हैं. मुझे विश्वास है कि यदि हमने 50 वर्षों से मातृ-भाषा द्वारा शिक्षा पाई होती तो हममें इतने बसु और राय होते कि उन्हें देखकर हमें अचंभा न होता.” बापू आगे कहते है,”आज भारत में हम रट-पिट कर औसत-बुद्धि वाले इंजीनियर और डॉक्टर तो पैदा कर रहे हैं, लेकिन खोजकर्ता वैज्ञानिक, मौलिक चिंतक और दार्शनिक नहीं पैदा कर पा रहे हैं. भारत की अधिकांश जनसंख्या नवीनतम ज्ञान-विज्ञान तक पहुंच से वंचित है. जिसकी मौलिकता बची हुई है, उसके आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया गया है.”

महात्मा गांधी का मानना था कि शिक्षा की भाषा के मामले में भारत को जापान से सीखना चाहिए. वे लिखते है, ‘जापान ने मातृ-भाषा में शिक्षा के द्वारा जन-जागृति की है. इसलिए उनके हर काम में नयापन दिखाई देता है. वे शिक्षकों के भी शिक्षक बन गए हैं. उन्होंने (गैर-यूरोपीय देशों के लोगों को दी गई) सोख्ता कागज की उपमा को गलत साबित कर दिया है. मातृभाषा में शिक्षा के कारण जापान के जन-जीवन में हिलोरें उठ रही हैं और दुनिया जापानियों का काम अचरज भरी आंखों से देख रही है.

गांधी ही नहीं साहित्य में नोबल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगौर और प्रसिद्ध शिक्षाविद गिजुभाई भी मातृभाषा में ही प्रारम्भिक शिक्षा की वकालत करते है. दुनिया के समृद्ध देशों में प्रारम्भिक पढ़ाई का माध्यम स्थानीय भाषा ही है. जर्मनी में जर्मन, जापान में जापानी और चाइना में चीनी भाषा में ही पढ़ाई शुरू होती है अंग्रेजी में नहीं. इसके बावजूद इन देशों ने दुनिया को बड़ी वैज्ञानिक खोज , ज्ञान विज्ञान और दर्शन का मार्ग दिखाया है.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Action Plan 2020-21 of all schemes of Department of Social Justice & Empowerment

संदर्भ

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की सभी योजनाओं के लिए कार्य योजना 2020-21 जारी की गई. इसका उद्देश्य सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, राज्य सरकारों और भाग लेने वाले गैर-सरकारी संगठनों के लिए स्पष्ट लक्ष्य तथा प्रयोजन निर्धारित करना है.

योजना और प्रस्तावित कार्यों के बारे में

अनुसूचित जातियों (SCs) और अन्य पिछड़े वर्गों (OBCs) के लिए निःशुल्क कोचिंग

  • यह एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से वंचित SCs और OBCs छात्रों को गुणवत्ता युक्त कोचिंग कक्षाएं उपलब्ध करवाना है.
  • कार्यान्वयन संबंधी नए तरीके के अंतर्गत पात्र SCs और OBCs छात्र, अपनी पसंद के संस्थान में कोचिंग के लिए सहायता प्राप्त कर सकते हैं.

SCs के लिए उच्च श्रेणी की शिक्षा

  • इसके अंतर्गत, अधिसूचित संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति के छात्रों को शिक्षण (ट्यूशन) शुल्क, निवास संबंधी व्यय आदि को आदि को पूर्ण करने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी.
  • इसके अंतर्गत सीटों की संख्या 1500 से बढ़ाकर 4200 सीट प्रति वर्ष कर दी गई है. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs)/ राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (NITs)/ शीर्ष नेशनल इंस्टिट्यूट रैंकिंग फेमवर्क (NIRF) रैंकिंग वाले संस्थानों जैसी शीर्ष संस्थाओं को भी इसके अंतर्गत सम्मिलित किया गया है.

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (PMAGY)

  • इस योजना में कुल 500 या 500 से अधिक की जनसंख्या और 50 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति (SC) की जनसंख्या वाले गाँवों का समेकित विकास सुनिश्चित करने के लिए उन्हें आदर्श गाँवों में परिवर्तित किया जाएगा.
  • इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जातियों की बहुलता वाले 3,584 गांवों को सम्मिलित किया गया है. इससे ऐसे गांवों की कुल संख्या 13,199 हो गई है.

भिखारियों के पुनर्निवास के लिए एकीकृत कार्यक्रम (Integrated Programme for Rehabilitation of Beggars)

  • यह राज्य सरकारों/संघ शासित प्रदेशों/स्थानीय शहरी निकायों और स्वैच्छिक संगठनों, संस्थानों आदि के सहायता से भिखारियों की पहचान, पुनर्वास, रोजगार परामर्श, कौशल विकास आदि को समाविष्ट करने वाली एक व्यापक योजना है.
  • मंत्रालय द्वारा व्यापक पुनर्वास के लिए एक परियोजना का निर्माण किया गया है. इस परियोजना को मुख्यतः 10 शहरों में प्रायोगिक आधार पर संचालित किया जाएगा.

स्वच्छता उद्यमी योजना

  • इस योजना को यंत्रीकृत सफाई को बढ़ावा देने और हाथ से मैला उठाने एवं इससे संबंधित जोखिमपूर्ण घटनाओं को कम करने के लिए राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (National Safai Karmcharis Finance & Development Corporation) द्वारा प्रारंभ किया गया है.
  • यह संगठन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) के अधीन है.

वंचित इकाई समूह और वर्गों की आर्थिक सहायता योजना (विश्वास योजना)

इस योजना के अंतर्गत SCs और OBCs के स्वयं सहायता समूह तथा कोई भी व्यक्ति बैंक ऋणों पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्राप्त कर सकेंगे.

मादक द्रव्यों की मांग घटाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (वर्ष 2018-2013) (National Action Plan on Drug Demand Reduction) (2018-2023)

  • इस योजना का उद्देश्य मादक द्रव्यों से प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों को शिक्षा, व्यसन मुक्ति (de-addiction) और उनके पुनर्वास सहित बहुआयामी रणनीति के माध्यम से मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के दुष्परिणामों को कम करना है.
  • नशा मुक्त भारत अभियान को मादक पदार्थों के दुरूपयोग से सर्वाधिक प्रभावित 272 जिलों में प्रारंभ किया गया है.
  • यह अभियान 15 अगस्त, 2020 को आरंभ किया गया है और यह 31 मार्च 2021 तक चालू रहेगा.

अनुसूचित जातियों (SCs) के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति/अन्य पिछड़े वर्गों (OBCs) के लिए मैट्रिक छात्रवृत्ति

पोस्ट मैट्रिकुलेशन या पोस्ट-सेकेंडरी स्तर पर अध्ययनरत SC/OBC छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना, जिससे वे अपनी शिक्षा पूरा कर सकें.

वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना

  • इस कार्य योजना के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की शीर्ष चार आवश्यकताओं को प्राथमिकता प्रदान की गई है, अर्थात्- वित्तीय सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और मानवीय अंतर्क्रिया / गरिमामय जीवन.
  • इस वर्ष प्रत्येक जिले में कम-से-कम एक वरिष्ठ नागरिक गृह (Senior Citizen Home) स्थापित किया जाएगा.
  • इसी वर्ष वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन की स्थापना की जाएगी, जो वृद्धजनों की शिकायतों के समाधान के लिए केन्द्र, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और गैर-सरकारी संगठन को एक साझा मंच प्रदान करेगी.
  • वरिष्ठ नागरिकों के डे-केयर सेंटर के लिए स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : AIM, NITI Aayog launched the self-sufficient India ARISE-Atal New India Challenges

संदर्भ

भारतीय MSME और स्टार्टअप्स में अनुसंधान और नवाचार को लागू करने के लिए अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम), नीति आयोग ने आज अपने सबसे बहुप्रतीक्षित कार्यक्रमों में से एक आत्मनिर्भर भारत ARISE-अटल न्यू इंडिया चैलेंजेज (ARISE-ANIC) की शुरुआत की.

ARISE-अटल न्यू इंडिया चैलेंजेज के बारे में

  • यह कार्यक्रम भारतीय में स्टार्टअप्स और MSME में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने और उनके बीच प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय पहल है.
  • इसका उद्देश्य संबंधित मंत्रालयों और उद्योगों के बीच सक्रिय सहयोग के साथ अनुसंधान, नवाचार को उत्प्रेरित करना और क्षेत्रीय समस्याओं के लिए अभिनव समाधान की सुविधा प्रदान करना है.
  • इसका लक्ष्य नवाचारी उत्पादों और समाधानों को एक निरंतरता प्रदान करना है. ताकि केंद्र सरकार के मंत्रालय/विभाग पहले संभावित खरीदार बन सकें.
  • यह भारतीय MSME क्षेत्र के विकास को तेजी से ट्रैक करने के लिए “मेक इन इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” के जनादेश के अनुरूप है.
  • इसमें उन्नत अनुसंधान और विकास के आइडियाज को बाजार के हिसाब से व्यवहार्य और सरकार द्वारा खरीदे जा सकने वाले उपयुक्त MSME उत्पादों को बनाना शामिल है.

क्रियान्वयन

इस कार्यक्रम को इसरो द्वारा संचालित किया जाएगा. जिसमें इसरो के साथ भारत सरकार के चार मंत्रालय- रक्षा मंत्रालय; खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय; और आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय भी सम्मिलित होंगे. आत्मनिर्भर भारत ARISE-एएनआईसी कार्यक्रम प्रस्तावित प्रौद्योगिकी समाधान और / या प्रोडक्ट के त्वरित विकास के लिए 50 लाख रुपये तक की धनराशि से सहायता कर योग्य अनुसंधान आधारित नवाचारों को मदद करेगा.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

AIM की छह प्रमुख पहल:

  • अटल टिंकरिंग लैब्स (Atal Tinkering Labs): भारत के विद्यालयों में समस्याओं को सुलझाने की मानसिकता (Problem-solving Mindset) को विकसित करना.
  • अटल इन्क्यूबेशन सेंटर्स (Atal Incubation Centers): विश्व स्तर के स्टार्ट-अप को बढ़ावा देना और इनक्यूबेटर मॉडल में एक नया आयाम जोड़ना.
  • अटल न्यू इंडिया चैलेंजेज़ (Atal New India Challenges): विभिन्न क्षेत्रों/मंत्रालयों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये उत्पाद नवाचारों को बढ़ावा देना.
  • मेंटर इंडिया कैंपेन (Mentor India Campaign): मिशन की सभी पहलों का समर्थन करने के लिये सार्वजनिक क्षेत्र, कॉरपोरेट्स और संस्थानों के सहयोग से एक नेशनल मेंटर नेटवर्क (National Mentor Network) विकसित करना.
  • अटल सामुदायिक नवाचार केंद्र (Atal Community Innovation Center): टियर-2 और टियर-3 शहरों समेत देश के दूरस्थ क्षेत्रों में समुदाय केंद्रित नवाचार और विचारों को प्रोत्साहित करने के लिये.
  • उन्नत मरम्मत और औद्योगिक कौशल संवर्द्धन (Advanced Repair & Industrial Skill Enhencement- ARISE): सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (Micro, Small and Medium Enterprises- MSME) में नवाचार तथा अनुसंधान को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिये.

Prelims Vishesh

Thailand scraps Kra Canal Project :-

  • हाल ही में, थाईलैंड ने चीन द्वारा प्रस्तुत क्रा-नहर के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया है.
  • क्रा-नहर के प्रस्ताव के अंतर्गत थाईलैंड में क्रा-स्थलडमरुमध्य (isthmus) के माध्यम से 120 किलोमीटर की विशाल नहर का निर्माण किया जाना था.
  • यह जलमार्ग अंडमान सागर को थाईलैंड की खाड़ी से जोड़ेगा तथा साथ ही, मलक्का जलडमरूमध्य से दूर नौवहन का मार्ग परिवर्तन कर एक समुद्री लघु मार्ग प्रदान करेगा.
  • इस परियोजना के माध्यम से चीन का उद्देश्य मलक्का जलडमरूमध्य का उपयोग न करके समुद्री आवागमन के अन्य विकल्प का प्रयोग करना है, जिससे मलक्का दुविधा (Malacca dilemma) का समाधान किया जा सके.

Low ozone over Brahmaputra River Valley :-

  • शोधकर्ताओं ने पाया है कि उत्तर-पूर्व के इस क्षेत्र में धरातलीय ओजोन (ground-level ozone) की सांद्रता अन्य शहरी क्षेत्रों की तुलना में कम है.
  • क्षोभमंडलीय (Tropospheric) या धरातलीय ओजोन का निर्माण नाइट्रोजन के ऑक्साइड्स (NOx+) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (volatile organic compounds) के मध्य होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा होता है.
  • कारों, विद्युत्‌ संयंत्रों, रिफाइनरी और अन्य स्रोतों से उत्सर्जित प्रदूषकों की सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रिया इसकी सांद्रता में वृद्धि करती है। इस प्रकार इसकी बढ़ी हुई सांद्रता मानव स्वास्थ्य को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है.

Ur River, Madhya Pradesh :-

  • नागरिक समाज के सदस्यों और राज्य शासन के अधिकारियों द्वारा भूमिगत जल स्रोतों के पुनर्भरण (मृदा जल अवशोषण सुनिश्चित करते हुए और वर्षाजल के व्यर्थ प्रवाह को कम करते हुए) के माध्यम से उर नदी को पुनर्जीवित करने के लिए एक संयुक्त प्रयास किया गया है.
  • भूमिगत जल स्रोतों के पुनर्भरण के लिए प्रत्येक लघु भू-खंड पर गर्तों या खेत-तालाबों का निर्माण किया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में ओडी नदी (Ody River) के संरक्षण के दौरान भी जमीनी स्तर पर इसी प्रकार की भागीदारी दृष्टिगोचर हुई थी.

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